⚲

सैक्स के भ्रम से निकलें युवा, नहीं तो होगा यह नुकसान

Sex News in Hindi: अकसर युवा सैक्स को ले कर कई तरह की भ्रांतियों से घिरे रहते हैं. अपनी गर्लफ्रैंड से सैक्स को ले कर अपने इमैच्योर फ्रैंड्स से उलटीसीधी ऐडवाइज लेते हैं और जब उस ऐडवाइज का सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है तो शर्मिंदगी से किसी से बताने में संकोच करते हैं. यहां युवाओं को यह बात समझनी जरूरी है कि सैक्स से सिर्फ मजा ही नहीं आता बल्कि इस से सेहत का भी बड़ा गहरा संबंध है. सैक्स (Sex) और सेहत (Health) को ले कर कम उम्र के युवकों और युवतियों में ज्यादातर नकारात्मक भ्रांतियां फैली हैं. स्वास्थ्य के लिए सैक्स कितना अच्छा है, यह बात न इन्हें स्कूल और कोचिंग सैंटर्स में पढ़ाई जाती है और न ही पैरेंट्स सैक्स ऐजुकेशन (Sex Education) को ले कर इतने जागरूक हैं कि अपने युवा बच्चों को सैक्स और सेहत के बीच के सही तालमेल और पोजिटिवनैगेटिव फैक्टर्स से रूबरू करा सकें.

आएदिन देशदुनिया में कहीं न कहीं सैक्स और सेहत को ले कर रिसर्च होती रहती है जिस से अंदाजा लगाना आसान होता है कि सैक्स कोई बीमारी नहीं बल्कि आप की सेहत के लिए बहुत आवश्यक है बशर्तें इस के बाबत आप को सही गाइडैंस मिली हो.

सैक्स, सेहत और भ्रांतियां

 सैक्स के बाद युवतियों के हिप्स और ब्रैस्ट का वजन बढ़ जाता है. सैक्स करने से कमजोरी आती है. सैक्स करने से शरीर में खून की कमी होती है. सैक्स के दौरान भयानक पीड़ा से गुजरना पड़ता है. सैक्स करने से पढ़ाई में मन नहीं लगता. ज्यादा सैक्स करने से वजन कम हो जाता है. सैक्स करने से लड़की तुरंत प्रैग्नैंट हो जाती है. सैक्स तनाव का बड़ा कारण है, सैक्स करने से हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है. सैक्स का याद्दाश्त पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, सैक्स करने से ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है… वगैरावगैरा.

यह तमाम भ्रांतियां आजकल के युवकयुवतियों के दिमाग में घर कर गई हैं. इन के चलते सैक्स को ले कर जो रवैया युवाओं में होना चाहिए, वह नहीं दिखता.

हर मिथक और गलतफहमी के वैज्ञानिक और मैडिकल तथ्य हैं जो इन को सिरे से खारिज करते हैं. मसलन, वजन बढ़ने वाली बात की जाए, तो सैक्सुअल रिलेशन की शुरुआत होते ही युवतियों के हिप्स और ब्रैस्ट का वजन नहीं बढ़ता है. एक तर्क यह है कि युवतियों और महिलाओं के खून में स्पर्म आत्मसात हो जाता है और वह बाहर नहीं निकल पाता, लेकिन समझने वाली बात यह है कि 2-3 मिलीलिटर स्पर्म से मात्र 15 कैलोरी बढ़ती हैं. इसलिए सैक्स को मनोवैज्ञानिक रूप से वजन बढ़ने का सही तथ्य नहीं माना गया है.

विल्किस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक और एक अन्य अमेरिकन शोध बताते हैं कि  सप्ताह में एक या दो बार सैक्स करने से इम्युनोग्लोबुलिन नाम के ऐंटीबौडी में बढ़ोतरी होती है. इसलिए रैगुलर ऐक्सरसाइज करें और हैल्दी डाइट से वजन मैंटेन करें न कि सैक्स न करने से. शोध में यह बात भी सामने आई है कि यह हार्ट के लिए बेहद फायदेमंद है. वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि सप्ताह में 2 बार या इस से ज्यादा बार सैक्स करने वाले पुरुषों में दिल की बीमारी होने की आशंका 45 फीसदी तक कम होती है. इतना ही नहीं सैक्स करना आप के ब्लडप्रैशर और हृदयगति के लिए भी अच्छा है. सैक्स के दौरान जितना ज्यादा स्खलन होगा उस से प्रोस्टैट कैंसर होने की आशंका उतनी ही कम होगी.

रिसर्च से यह सच भी सामने आया कि जो लोग ज्यादा तनाव में रहते हैं वे ज्यादा सैक्स करते हैं. ऐसा करने से तनाव दूर हो जाता है. यह शोध मैसाच्यूसैट्स स्थित न्यू इंगलैंड इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने किया है.

परफैक्ट टाइमिंग है जरूरी

सैक्स के दौरान अगर सेहत को भी अनुकूल रखना चाहते हैं तो युवाओं को सैक्स का समय, माहौल और मानसिक दशा पर सतर्कता बरतने की जरूरत होती है. मान लीजिए आप सैक्स रात को ढाई बजे कर रहे हैं. उस समय एक सैक्स पार्टनर को हलकीहलकी नींद आ रही है. ऐसे में जाहिर है सैक्स का भरपूर आनंद तो मिलेगा नहीं, मानसिक तनाव ही बढे़गा. सैक्स सर्वे भी स्पष्ट करते हैं कि मौर्निंग सैक्स करने वाले ज्यादा खुश रहते हैं और हैल्दी भी यानी सैक्स के साथ टाइमिंग की बड़ी भूमिका है. स्कूल या औफिस से लौट कर सैक्स करने में जो आनंद और शरीर को रिलैक्स मिलेगा उस का अनुपात सुबहसुबह तरोताजा मूड में सैक्स करने वाले कपल से अलग होगा. इस का एक कारण यह भी है कि मोर्निंग सैक्स करने वालों के शरीर में एक ऐसे तत्त्व का रिसाव होता है जो पूरे दिन प्यार बनाए रखने में लाभदायक सिद्ध होता है. हफ्ते में तीन बार सुबहसुबह सैक्स करने वालों को हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा भी कम हो जाता है.

इसी तरह अगर किसी से झगड़ा हुआ है किसी नुकसान के चलते मन अस्थिर है, तो ऐसे समय सैक्स करने से न तो शारीरिक संतुष्टि मिलती है और न सैक्स का मजा, उलटा यह गलती बारबार दोहराने में सैक्स के प्रति मन भी उचटने लगता है और उदासीनता सैक्स लाइफ के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है.

सैक्स से रहें हैल्दी 

 सैक्स का सेहत से कितना गहरा रिश्ता है इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते साल  स्वीडिश सरकार ने अपने देश के नागरिकों की सैक्स लाइफ से चिंतित हो कर व्यापक पैमाने पर एक स्टडी शुरू की. 2019 में पूरी होनी वाली यह स्टडी इसलिए करवाई गई क्योंकि लोगों का सैक्स के प्रति झुकाव कम हो रहा था. वहां के हैल्थ मिनिस्टर के मुताबिक यदि स्वीडिश नागरिकों की सैक्स लाइफ तनाव और अन्य हैल्थ समस्याओं के कारण प्रभावित हो रही है तब भी यह एक राजनीतिक समस्या है.

सैक्स स्टडी कर रहे शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘‘सैक्स से लोगों की सेहत पर व्यापक असर होता है. जो लोग हफ्ते में कम से कम एक बार सैक्स करते हैं वे सैक्स न करने वालों की तुलना में ज्यादा खुश और प्रोडक्टिव रहते हैं.’’

सैक्स के दौरान न सिर्फ इम्यून सिस्टम बेहतर होता है बल्कि शरीर की फुरती में भी इजाफा होता है. इतना ही नहीं सही मूड, अवस्था और जगह में किए गए सैक्स से बालों, स्किन और नाखूनों को भी बेहतर बनाने में मदद मिलती है. सैक्स करने से हड्डियां और मसल्स भी मजबूत होते हैं. जो सैक्स को ले कर उदासीन रहते हैं उन्हें मीनोपोज के बाद आस्टियोपोरोसिस की समस्या का खतरा रहता है. नियमित सैक्स से एस्ट्रोजन हारमोंस का रिसाव ज्यादा होता है जो सेहत के लिए फायदेमंद होता है. सैक्स ऐक्सपर्ट मानते हैं कि युवाओं में अकसर सैक्स के दौरान एनर्जी लैवल और ऐक्ससाइटमैंट की कमी के चलते तनाव रहता है. ऐसे में वे सुझाव देते हैं कि ऐरोबिक्स शरीर को फिट रखने के लिए सब से बेहतरीन और शानदार वर्कआउट है. इस को करने से शरीर में हमेशा उत्तेजना और फुरती बनी रहेगी. ऐरोबिक्स एनर्जी लैवल को हमेशा बढ़ाए रखता है.

सैक्स, नुकसान और समाधान

जीवनयापन के लिए खाना, पानी, हवा की तरह सैक्स भी एक शारीरिक जरूरत है और इसे सक्रिय रखना युवा रहने के लिए बेहद जरूरी है. एक तरफ जहां सैक्स न करने के कई नुकसान हैं वहीं कुछ हमारी बिगड़ी आदतें ऐसी होती हैं जो हमें सेहत और सैक्स के मोरचे पर कमजोर कर देती हैं.

पहले बात करते हैं सैक्स से जुड़े नफेनुकसानों की. सैक्स न करने वाले हमेशा तनाव में डूबे रहते हैं और यह तनाव हमारे जीवन की सभी जरूरी चीजों को बुरी तरह से प्रभावित करता है. काम, पढ़ाई और निजी संबंधों में तनाव जहर का काम करता है.

जहां सैक्स के कई फायदे हैं वहीं कुछ नुकसान भी हैं. कहते हैं न कि अति हर चीज की बुरी होती है. सैक्स के मामले में यह बात लागू होती है. दिन में 2-3 बार सैक्स करना उसी को सूट करता है जिस का स्टेमिना बेहद अच्छा हो वरना इस से दिल के रोगियों के लिए मुश्किलें भी पैदा हो सकती हैं. इसी तरह जो युवा हस्तमैथुन के आदी हो जाते हैं, उन के लिए भी यह अनहैल्दी हो सकता है. गर्लफ्रैंड नहीं हो जिस की वजह से जो युवा पोर्न का सहारा लेते हैं, धीरेधीरे वे पोर्न के भी इतने आदी हो जाते हैं कि हर पल उन के दिमाग में वही चलता रहता है. इस एडिक्शन के चलते असली सैक्स के दौरान वह उत्तेजना नहीं आती जो पोर्न देखने के दौरान आती है. कई बार युवा अपने साथी दोस्तों, उन की गर्लफ्रैंड और सैक्स लाइफ के किस्से सुन कर कौंप्लैक्स के शिकार हो जाते हैं और चिड़चिडे़ और गुस्सैल होने लगते हैं. यह चीज आप के बोलचाल और व्यव्हार में भी दिखती है.

स्मोकिंग करने से भी सैक्स लाइफ बुरी तरह से बिगड़ जाती है. आजकल के युवा स्मोकिंग को फैशन और लाइफस्टाइल का हिस्सा मान कर कूल और टशन के नाम पर स्मोकिंग करते हैं. इस से सैक्स और्गन के सिकुड़ने से ले कर नपुंसक होने तक का खतरा रहता है.

मोटापा, अनियमित जीवनशैली और मानसिक तनाव जैसे कई तत्त्व सैक्स का खेल बिगाड़ सकते हैं. युवाओं को इन्ही कमियों को दूर करना होगा तभी वे युवावस्था का आनंद ले सकेंगे. याद रखें जिन युवाओं की सैक्सुअल जरूरतें समय से पूरी हो जाती हैं उन का स्वास्थ्य ऐसा न कर पाने वालों की तुलना में अच्छा होता है. इसलिए सैक्स से सेहत के तालमेल को सही बैठा कर बिंदास जिंदगी जीने के लिए कमर कस लीजिए, क्योंकि न तो जवानी बारबार आती है और न आप चिर युवा रह सकते हैं.

मुझे मेकअप प्रोडक्ट शेयर करना बिलकुल पसंद नहीं है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी एक काफी करीबी दोस्त है. बचपन से ले कर कालेज तक हम ने अपनी हर चीज शेयर की है. बाकी सब तो ठीक है लेकिन उस का मेरा मेकअप प्रोडक्ट शेयर करना मुझे बिलकुल पसंद नहीं. मैंने यह बात उसे बातोंबातों में कई बार बोल भी दी है लेकिन वह नहीं मानती. साफ बोल दूं तो कहीं वह बुरा न मान जाए. क्या करूं, सलाह दें.

जवाब

दोस्ती में अपने सीक्रेट्स और चीजें शेयर करना अच्छी बात है लेकिन मेकअप प्रोडक्ट शेयर करना स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है. इस के अलावा मेकअप प्रोडक्ट शेयरिंग से जुड़ी अन्य बीमारियों में हर्पीस भी शामिल है, जो घावों और खुजली, चकत्ते और सूजन का कारण बनता है. जैसे, आंखों का काजल, आईलाइनर और मस्कारा शेयर करने से लाल आंखें, आंखों में खुजली, जलन, आंख से पानी आना आदि समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, लिपस्टिक शेयर करने से हर्पीस समेत कई अन्य इन्फैक्शन हो सकते हैं.
मेकअप ब्रश और ऐप्लिकेटर आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में बैक्टीरिया ले जा सकते हैं, आप अपनी दोस्त को साफसाफ शब्दों में यह बात समझाएं. समझदार होगी तो आप का कहना जरूर मानेगी. तब भी न माने तो कह दें कि आप को स्किन प्रौब्लम हो रही है, इसलिए मेकअप प्रोडक्ट्स शेयर नहीं कर सकती. तब वह बुरा माने या अच्छा, चिंता मत करिए. वैसे, समझदार फ्रैंड है, तो बुरा बिलकुल नहीं मानेगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

शादीशुदा जीवन में हो रही है सैक्स की कमी

Sex News in Hindi: सैक्सलैस विवाह के 70% केस युवा जोड़ों के हैं और यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इस के लिए एक ही उपाय है कि दूसरी चीजों की तरह सैक्स के लिए भी समय निकालें, क्योंकि जब आप इस का स्वाद जानेंगे तभी इसे करेंगे. कुछ समय एकदूसरे के साथ जरूर बिताएं. कन्फ्यूशियस ने कहा था कि खाना व यौन इच्छा (Sex Desire) दोनों मानव की प्राकृतिक जरूरतें हैं. मनोविज्ञानी (psychologist) और मनोचिकित्सक (psychiatrist) डा. पुलकित शर्मा इस बढ़ते रोग के संबंध में कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं:

सैक्सलैस विवाह सामान्य होने का कोई सूचक है?

हां, है. विवाहित लोग कैरियर के तनाव से घिरे हैं और अब उन के पास अंतरंगता के लिए बिलकुल भी समय नहीं है. दूसरा, अब चिड़चिड़ाहट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. विवादों को सुलझाने के बजाय स्त्री तथा पुरुष सैक्स की इच्छापूर्ति को बाहर ढूंढ़ रहे हैं.

क्यों कोई विवाह सैक्सलैस होता है?  

यदि हम इन बातों को छोड़ दें कि किसी साथी को सैक्स संबंधी या मानसिक समस्या हो तो भी विवाह की शुरुआत सैक्सलैस नहीं होती, लेकिन बाद में हो जाती है. शुरुआत में अपनी यौन क्षमता को ले कर पुरुषों में विशेष घबराहट होती है. उन्हें डर रहता है कि वे अपने साथी को संतुष्ट कर पाएंगे या नहीं और यह डर इतना ज्यादा होता है कि वे अपनी यौन क्रिया को सही अंजाम नहीं दे पाते. शुरुआत में जोड़े सैक्स तथा अपने संबंधों को अच्छा बताते हैं, लेकिन समय के साथ प्यार तो बढ़ता है, परंतु विवाह सैक्सलैस हो जाता है.

तनाव से डिप्रेशन बढ़ता है, जिस से सैक्सुल इच्छा घटती है व प्रदर्शन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है. तीसरा कारण है पोर्नोग्राफी. यह लोगों की कल्पनाओं को रंग देती है, जिस से वे जो रील में देखते हैं वैसा ही रियल में करने की कोशिश करते हैं.

क्या सैक्सलैस विवाह वाले जोड़े कम खुश रहते हैं?

भले ही रिश्ता अच्छा हो, परंतु सैक्सहीन विवाहित जोड़े नाखुश रहते हैं, क्योंकि सैक्स प्यार व आत्मीयता का जरूरी हिस्सा है. इस विवाह को कोई एक साथी इच्छाहीन व बेकार महसूस करता है.

क्या सैक्स को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है?

हां. बस पहले यह जानने की जरूरत है कि समस्या कहां है? क्या यह समस्या बाह्य है जैसे तनाव, पारिवारिक माहौल आदि. इस बारे में खुल कर बात करें व बिना साथी की इच्छा से कोई फैसला न करें ताकि दूसरा साथी बुरा न महसूस करे. काम का तनाव घटा कर एकदूसरे के साथ ज्यादा समय बिताएं, आपसी विवाद सुलझाएं, यौन क्रियाओं को बढ़ाएं, एकदूसरे की जरूरतों को समझें व इच्छापूर्ति की कल्पना करें, साथी को आराम दें, उसे उत्साहित करें. मनोवैज्ञानिक से सलाह भी ले सकते हैं.

क्या सैक्सहीन विवाह वाले तलाक की ओर बढ़ रहे हैं?

हां, ऐसा हो रहा है, क्योंकि एक साथी अपनेआप को उत्तेजित महसूस करने लगता है या वह महसूस करने लगता है कि उसे धोखा दिया जा रहा है. इसलिए वह भी सैक्स का विकल्प बाहर खोजने लगता है, जिस से बंधेबंधाए रिश्ते में समस्या आने लगती है.

यौन संतुष्टि दर में कमी

भारत में हुए सैक्स सर्वे दर्शाते हैं कि पिछले दशक में यौन संतुष्टि की दर मात्र 29% रह गई. सैक्स से बचने के लिए पत्नियों की पुरानी आदत है कि आज नहीं हनी. आज मुझे सिरदर्द है. 50% पुरुष भी अपनी पत्नी से सैक्स न करने के लिए सिरदर्द का झूठा बहाना बनाते हैं. 43% पति मानते हैं कि उन की आदर्श बिस्तर साथी उन की पत्नी नहीं है. 33% के करीब पत्नियां मानती हैं कि विवाह के कुछ सालों बाद सैक्स अनावश्यक हो जाता है. 14% स्त्रीपुरुषों को नहीं पता कि वे बैडरूम में किस चीज से उत्तेजित होते हैं जबकि 18% के पास कोई जवाब नहीं है कि वे सैक्स के बाद भी संतुष्ट हुए हैं. 60% जोड़े यौन आसन के बारे में कल्पना करते हैं. फिर भी आधे से ज्यादा जोड़े नए आसन के बजाय नियमित आसन ही अपनाते हैं. 39% जोड़े ही यौन संतुष्टि पाते हैं.

मैं 23 साल का लड़का हूं और 21 साल की लड़की से बहुत प्यार करता हूं. क्या करूं.

सवाल
मैं 23 साल का लड़का हूं और 21 साल की लड़की से बहुत प्यार करता हूं. हम अलग अलग जाति के हैं, पर शादी करना चाहते हैं. लड़की की रिश्तेदारी में एक लड़की ने घर से भाग कर शादी की थी, इसलिए उस के घर वालों को समाज से अलग कर दिया गया था. बताएं कि मैं क्या करूं?

जवाब

आप अपने घर वालों को लड़की के घर वालों से बात करने को कहें. अगर वे लोग राजीखुशी से इस शादी के लिए तैयार हो जाएं तो ठीक है, वरना लड़की को भूल जाएं. आप लोग घर से भाग कर कोर्ट मैरिज तो कर सकते हैं, मगर इस में तमाम तरह के झंझट हैं..

मेरी उम्र 23 साल है, मैं एक 30 साल की विधवा से प्यार करता हूं…

सवाल

मेरी उम्र 23 साल है और मैं एक 30 साल की विधवा से प्यार करता हूं. क्या हमारी शादी हो सकती है?

जवाब….

शादी तो हो सकती है पर 7 साल बड़ी एक विधवा. शादी कर के उसे निभा पाना आसान बात नहीं है. अगर आप की आमदनी ठीकठाक? है और आप समाज का मुकाबला कर सकते हैं तो ही शादी करें. शादी से पहले कुछ दिन साथ रह कर देख लें कि आप का प्यार सिर्फ बातों का ही तो नहीं है. वैसे, अब जब जीवन 60-70 साल तक आराम से चलता है, तब 7 साल का फर्क ज्यादा नहीं है.

ये भा पढ़ें….

जिस्मानी संबंध के दौरान मेरा प्रेमी मेरी फोटो खींचना चाहता है. मैं क्या करूं

मुझे मास्टरबेशन की आदत है, 10 सेकेंड में इजैक्युलेट हो जाता हूं. क्या करूं?

मैं एक युवती से पिछले 2 साल से प्यार करता हूं, लेकिन मेरा प्यार एकतरफा है, मैं उसे कैसे प्रपोज करूं.

सवाल
मैं एक युवती से पिछले 2 साल से प्यार करता हूं, लेकिन मेरा प्यार एकतरफा है, क्योंकि हम सिर्फ दोस्त की तरह बात करते हैं. मैं ने अभी तक उसे अपने दिल की बात नहीं बताई. मैं उसे कैसे प्रपोज करूं?

जवाब
आप की दोस्ती 2 साल पुरानी है, तो आप यह समझते ही होंगे कि उस का मिजाज कैसा है, उस की पसंद क्या है. उस का जन्मदिन आदि भी आप को पता होगा. तो बस, सही मूड देख कर उस की पसंद का उसे कुछ खिलाएं या दें. उन के जन्मदिन को सैलिब्रेट करें और इसी दौरान अपने दिल की बात भी उसे बताएं. इस के अलावा आजकल व्हाट्सऐप, फेसबुक जैसे साधन भी हैं, जो मन की बात उस तक पहुंचा सकते हैं. नहीं तो मिलते रहिए और बातोंबातों में प्यार हो जाने का इंतजार कीजिए.

मैं अपने एक दोस्त से प्यार करने लगी हूं पर वो इस बारे में कोई बात नहीं करता, मैं क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 20 साल है. कुछ महीनों पहले ही मुझे एहसास हुआ कि मैं लगातार अपने एक दोस्त के लिए कुछ फील करने लगी हूं. मैं उस से बात करने के बहाने ढूंढ़ने लगी, उस के मैसेजेस का इंतजार करने लगी और न चाहते हुए भी उसे चाहने लगी. मुझ से अपनी फीलिंग्स ज्यादा दिन छिपाई नहीं गई तो मैं ने उस से सबकुछ कह दिया. उस ने ज्यादा कुछ तो नहीं कहा लेकिन यह कह दिया कि उस के मन में भी मेरे लिए कुछ है. अगले दिन जब हम मिले तो उस ने इस बारे में कोई बात ही नहीं की तो मैं ने भी कुछ नहीं कहा. उस के अगले दिन भी हम ने बात की लेकिन एक दूसरे के प्रति फीलिंग्स की नहीं. इस बात को 2 हफ्तों से ज्यादा हो गए हैं. अब मेरे लिए इंतजार करना मुश्किल हो रहा है. उस के इतना पास हो कर भी मैं इतनी दूर हूं. मैं क्या करूं, समझ नहीं आता?

जवाब-

लड़कों का स्वभाव चाहे कैसा भी हो लेकिन जब वे किसी लड़की को पसंद करते हैं तो उस से अपनी फीलिंग्स का इजहार करने से खुद को नहीं रोक पाते. आप के इजहार करने के इतने दिनों बाद भी अगर वह आप से इस विषय पर बात नहीं कर रहा तो इस का मतलब साफ है कि वह बात करना नहीं चाहता. आप की कुलबुलाहट जायज है लेकिन वह लड़का आप में इंटरैस्टेड नहीं है, यह भी झुठलाया नहीं जा सकता.

आजकल वैसे भी मैसेजेस पर लोग जो कहते हैं, जरूरी नहीं कि वह सच ही हो. हां, आप एक बार हिम्मत कर के उस से इस बारे में बात कर के देख लीजिए. बाद में पछताने से बेहतर है कि एक बार में मसला सुलझा लिया जाए. यदि वह सचमुच इंटरैस्टेड न हो तो आप भी अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल करने की कोशिश कीजिए, नहीं तो आप को केवल दुख ही पहुंचेगा.

Winter Romance Special: जातिधर्म नहीं प्यार की खुमारी देखें

ये मुहब्ब्त में हादसे अकसर दिलों को तोड़ देते हैं,तुम मंजिल की बात करते हो लोग राहों में ही साथ छोड़ देते हैं इश्क की खुमारी में लोग इन बातों को गलत भी ठहरा रहे हैं. यह बात और है कि ‘ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब कर जाना है’.

प्यार को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं. कुछ लोग मानते हैं कि प्यार अंधा होता है. जहां दिल लग जाता है वहीं प्यार हो जाता है. बहुत से दूसरे लोग यह मानते हैं कि प्यार अंधा नहीं होता, बल्कि सूरत और शक्ल देख कर होता है.

असल में प्यार की खुमारी में जाति और धर्म देखने की जरूरत नहीं होती है. जो दिल को अच्छा लगे, जहां दिल मिले वहां प्यार करना चाहिए. प्यार जबरदस्ती का सौदा नहीं होता है. यह बात सच है कि प्यार जब शादी में बदलने वाला होता है, तब बहुत सारी दीवारें आज भी खड़ी हो जाती हैं.

समय के साथसाथ समाज और घरपरिवार ने कुछ समझते किए हैं, पर आज भी कई बातें ऐसी हैं, जिन को ले कर घरपरिवार और समाज तमाम तरह की रूढि़यों और कुरीतियों में फंसे हैं.

शेखर ने दिव्या के साथ 12 साल प्यार में गुजार दिए थे. जब वे 10वीं क्लास में थे, तभी से एकदूसरे को बखूबी जानतेपहचानते थे. शुरू से ही दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे. एक ही गांव में रहते थे.

उन दोनों के घरपरिवार वाले भी एकदूसरे को अच्छी तरह जानते थे. इन सब से बड़ी बात यह थी कि दोनों एक ही जाति के थे. ऐसे में उन की शादी में कोई अड़चन नहीं थी. इस के बावजूद भी वे 12 साल बाद शादी कर सके.

दरअसल, स्कूल की पढ़ाई के बाद वे दोनों नौकरी करने लगे. गांव से दूर एक बड़े शहर में रहने लगे. उन के परिवार के लोग भी गांव छोड़ कर शहर में बस गए थे. इस के बाद भी शेखर और दिव्या एकदूसरे से दूर नहीं हुए.

उन दोनों के लिए अपने घर वालों को राजी करने में समय लगा. घर वाले इसलिए राजी नहीं हो रहे थे कि जाति में भी गोत्र का बंधन होता है. एक ही गोत्र में लड़कालड़की की शादी नहीं हो सकती. लिहाजा, गांव के रिश्ते में दोनों भाईबहन लगते थे.

किसी तरह जब घर वाले राजी हुए, तो उन की शर्त थी कि किसी को यह नहीं बताना कि यह शादी उन दोनों की मरजी से हुई है. शेखर और दिव्या ने इस बात के लिए हामी भर ली कि वे किसी को कुछ नहीं बताएंगे.

शादी से पहले सगाई हुई. सबकुछ ठीक था. शेखर और दिव्या ने अपने 12 साल के सबंधों को यादगार बनाने के लिए केक काटने का इंतजाम किया, जिस पर लिखा था ‘12 साल एकदूजे के साथ’.

रिश्तेदारी में कुछ लोगों की निगाह केक पर पड़ गई. वह इस का मतलब निकालने लगे. आखिर में सब को इस बात का पता चल गया कि यह शादी शेखर और दिव्या की मरजी से हो रही है. इस बात की काफी बुराई हुई. घरपरिवार के लोग अलग से नाराज हुए कि केक पर यह सब क्यों लिखा था.

पर अब कुछ हो नहीं सकता था. शेखर और दिव्या की शादी हो गई. अब वे दोनों हंसीखुशी एकदूसरे के साथ रहते हैं. इस से सबक मिलता है कि आप जिस से प्यार करें, उसे जिंदगीभर निभाएं. यही इश्क की असली खुमारी है. कई ऐसे उदहारण हैं, जो इश्क में जातिधर्म जैसी बंदिशों को स्वीकार नहीं करते हैं.

गांवों में नहीं सुधरे हालात

प्यारमुहब्बत को ले कर शहरों में तो हालात बदल गए हैं, पर गांवदेहात में अभी भी प्यार बंदिशों में रहता है. वहां नौजवानों को अपनी सोच बदलने की जरूरत है. कई नौजवान इस की कोशिश भी करते हैं. ऐसे में वे औनर किलिंग जैसी वारदातों के शिकार हो जाते हैं.

दरअसल, आजकल गांवदेहात में रहने वाली मुसलिम, एससीएसटी और ओबीसी जातियों की लड़कियां भी पढ़ने के लिए स्कूल जाने लगी हैं. वहां उन्हें अलगअलग लड़कों का साथ मिलता है. ये लड़कियां सुंदर और आकर्षक होती हैं. ऐसे में इन के साथ इश्क करने वाले कम नहीं होते हैं.

कई बार बहुत सी लड़कियां इश्क में पड़ भी जाती हैं, पर जब बात शादी की आती है, तो तमाम तरह की परेशानियां खड़ी हो जाती हैं. पर जो लड़केलड़कियां अपने पैरों पर खड़े होते हैं, वे अपने हक में फैसले कर लेते हैं.

निशा ओबीसी समाज से थी. गैरधर्म के अकील के साथ उस का इश्क हुआ. दोनों 12वीं क्लास के बाद आगे की पढ़ाई के लिए शहर चले गए. वहां उन को अच्छी नौकरी मिल गई. 2 साल के बाद उन दोनों ने शादी करने का फैसला लिया.

उन दोनों के घर वालों को जब इस बात का पता चला, तो वहां विरोध शुरू हो गया. निशा और अकील ने अपनेअपने घर वालों को समझने की लाख कोशिश की, पर कोई भी तैयार नहीं हुआ. लिहाजा, उन्होंने स्पैशल मैरिज ऐक्ट के तहत कोर्ट में शादी कर ली.

जो प्यार करने वाले जाति और धर्म को छोड़ कर इश्क की खुमारी देखते हैं, वे कामयाब होते हैं. कानून ने इस तरह के लोगों को सुरक्षा दे रखी है. जरूरत इस बात की है कि प्यार करने वाले अपने इश्क की खुमारी को पहचानें और एकदूसरे पर भरोसा रखें.

हां, यह बात जरूर है कि जब लड़कालड़की दोनों अपने पैरों पर खड़े होते हैं, तो किसी भी तरह की लड़ाई लड़ने में कामयाब हो जाते हैं. पर जब वे घरपरिवार के भरोसे रहते हैं, तो उन की शादी मुश्किल हो जाती है. लिहाजा, जाति और धर्म का कट्टरपन खत्म करने के लिए इश्क की खुमारी जरूरी है.

Winter Romance Special: सर्दी में रात का इश्क

राज और मोहिनी की हाल ही में शादी हुई थी. पर जब से जाड़े ने जोर पकड़ना शुरू किया था, इन दोनों की सैक्स लाइफ ठंडी पड़ने लगी थी. राज को लगता था कि मोहिनी बिस्तर पर बर्फ की सिल्ली की तरह पड़ जाती है और कितना ही जोर लगा लो, गरम ही नहीं हो पाती है. उसे बड़ी कोफ्त होती थी.

उधर मोहिनी की दिक्कत यह है कि उसे ठंड बहुत ज्यादा लगती है और वह बिस्तर पर बिना गरम कपड़ों के नहीं रह सकती है. ठंड में सैक्स करने के नाम से ही उसे कंपकंपी छूट जाती है.

उत्तर भारत में जब गुलाबी जाड़े की दस्तक होती है, तभी शादियों का सीजन भी शुरू हो जाता है. गुलाबी जाड़े में गुलाबी इश्क, यह मेल कमाल का होता है. पर एक सच यह भी है कि सर्दी में हमारी सैक्स की इच्छा भी कम हो जाती है. यह सुन कर हैरानी होती है न? बिस्तर पर रजाई हो और पहलू में सैक्स पार्टनर, तो फिर यह इच्छा अचानक क्यों सिकुड़ जाती है?

दरअसल, मोहिनी की तरह बहुत से जोड़ों की यह शिकायत रहती है कि सर्दी के मौसम में वे काफी रूखे और सूखे हो जाते हैं. साथ ही, सर्दी में विटामिन डी का लैवल भी कम होता है, जो शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी होता है. इस की कमी के चलते लोग अपने मूड में सब से खराब बदलाव महसूस करते हैं. दिन छोटे और रातें बड़ी हो जाती हैं. जल्दी अंधेरा होने की वजह से लोग और भी ज्यादा बुरा महसूस करते हैं. पर साथ ही यह भी याद रखिए कि भले ही सर्दी में सैक्स के प्रति दिलचस्पी कम हो जाती है, लेकिन इस मौसम में मर्दों में टैस्टोस्टैरोन का लैवल हाई होता है, जिस में स्पर्म की तादाद ज्यादा होती है. वहीं, औरतों में भी ज्यादा फर्टिलिटी होती है, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है. सर्दी में रात का इश्क भी गरमागरम हो सकता है, बस थोड़े से सब्र और नए उपाय करने की जरूरत होती है.

सर्दी में इश्क का मजा लेना हो, तो अपने काम से कुछ दिन की छुट्टी ले लें और अपने पार्टनर के साथ कहीं घूमने चले जाएं. दिन में बाइक पर सट कर बैठते हुए एकदूसरे के अंगों की गरमाहट लें और रात को कमरे में बेबाक हो कर एकदूसरे में समा जाएं.

यकीन मानिए, काम के बोझ से हलका आप का मन तन को इतनी ज्यादा गरमाहट से भर देगा कि बिस्तर पर आप दोनों बिना कपड़ों के भी हीटर की तरह सुलग रहे होंगे.

एक काम और जरूर करें. बिस्तर पर अपनी सैक्स पोजीशन और किस अंग को छूने से आप की गरमाहट बढ़ती है, इस पर खुल कर बात करें. एकदूसरे के शरीर को बेशर्म हो कर देखें, चूमें और सहलाएं. रात के कालेपन और सर्दी की ठिठुरन को भूल कर एकदूसरे के शरीर की गरमी को महसूस करें.

अगर कमरे के अंधेरे से दिक्कत है, तो बल्ब की रोशनी के बजाय मोमबत्ती की हलकी रोशनी कर लें. जलते मोम की गंध आप के शरीर के पसीने की गंध को और ज्यादा महका देगी और आप दोनों के रिश्ते में एक अलग तरह की रोमानियत ले आएगी.

सर्दी में कमरे के भीतर आप अपने पार्टनर की मालिश कर सकते हैं. यह नुसखा प्यार बढ़ाने के लिए अचूक माना जाता है. इस से शरीर की गरमी तो बढ़ती ही है, साथ ही खून का दौरा भी तेज हो जाता है.

मालिश करते हुए एकदूसरे के नाजुक अंगों से भी खूब खेलें और जोश को बढ़ा दें. यह एक तरह का फोरप्ले होता है, जो दोनों पार्टनर को जिस्मानी रिश्ता बनाने के लिए तैयार कर देता है. पर इस के लिए जरूरी है कि आप साफसुथरे हों, इत्र वगैरह लगाया हो, ब्रश किया हो और नाखून भी ट्रिम किए हुए हों, ताकि मालिश के दौरान जोश में शरीर नोचने पर चोट न लगे.

अगर इस सब के बावजूद जाड़े में रात को कमरा ठंडा लगता है, तो ब्लोअर या हीटर ले आएं और उस की आंच पर अपने इश्क की खीर पकाएं.

Winter Romance Special: शरीर खुशबूदार तो गहरा प्यार

आजकल आशिक और माशूक एकदूसरे को तोहफे में जो सब से ज्यादा आइटम देते हैं, वह परफ्यूम या डिओ होता है. तय है कि इस के पीछे मंशा यह रहती है कि हमारा प्यार हमेशा यों ही महकता रहे. इस सोच को एक शायर ने अपने एक शेर में कुछ ऐसे कहा है :

‘सुबह उठते ही तेरे जिस्म की खुशबू आई, शायद रातभर तू ने मुझे ख्वाब में देखा है.’

परफ्यूम या डिओ ऐसा गिफ्ट है, जो सभी के बजट में रहता है और इसे सहूलियत से रखा जा सकता है. आजकल हर कोई परफ्यूम और डिओ का इस्तेमाल करता है और प्यार करने वाले तो कुछ ज्यादा ही करते हैं, खासतौर से डेट पर जाते वक्त. अगर उन के पास एक से ज्यादा खुशबू वाले परफ्यूम हों, तो वे बहुत सारा समय यही सोचने में लगा देते हैं कि आज कौन सा परफ्यूम लगाया जाए कि पार्टनर उस के लिए और दीवाना हो जाए.

एक इश्तिहार में बड़े दिलचस्प तरीके से इसे दिखाया भी गया है कि कोई जवां मर्द एक खास किस्म का परफ्यूम लगा कर निकलता है, तो लड़की उस की खुशबू सूंघते हुए उस के पीछेपीछे पतंग सी खिंची चली आती है.

प्यार में खुशबू की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि ज्यादातर फिल्मों में जब आशिक और माशूक एकदूसरे से लिपटते हैं, तो आशिक माशूका के बालों और गरदन को सूंघता दिखता है.

हकीकत इस से जुदा नहीं होती. आशिक और माशूक एकदूसरे के गले लगें या न लगें, लेकिन नजदीक होने पर ही बदन से उठती खुशबू में डूबने और इतराने से खुद को रोक नहीं पाते हैं और फिर जुदा होने के बाद तनहाई में गुनगुनाते हैं :

‘खुशबू तेरे जिस्म की मेरे इत्र की किताब है, वफा न सही मुझ को दर्द ए हिज्र का खिताब है.’

खुशबू से महकता प्यार

कुदरती तौर पर हरेक जिस्म की अपनी एक अलग गंध होती है. वैज्ञानिक और माहिर भले ही इसे हार्मोन से जोड़ते रहें, लेकिन एक दफा जो इस गंध में बंध गया, वह फिर खुद इस से आजाद नहीं होना चाहता. इसी गंध में जब चंदन, केसर, गुलाब, मोगरा या कोई दूसरी परंपरागत या फिर नई खुशबू मिला ली जाती है, तो चाहने वालों के लिए तो वह जायदाद जैसी हो जाती है.

पार्टनर के शरीर से उठती खुशबू कब प्यार की पहचान बन जाती है, इस का तो सालोंसाल पता ही नहीं चलता. इसी खुशबू में डूबतेइतराते प्यार इतना गहराता जाता है कि एकदूसरे के बगैर रहना और जीना भी सजा लगने लगता है.

विदिशा के नजदीक एक गांव का नौजवान अमित (बदला नाम) अग्निवीर बन कर सेना में शामिल हुआ, तो उसे पहली तैनाती जम्मूकश्मीर में मिली. नौकरी पर जाने से पहले उस की माशूका सीमा (बदला नाम) ने उसे एक महंगा परफ्यूम तोहफे में यह कहते हुए दिया था कि ‘इस की खुशबू तुम्हें मेरी याद दिलाती रहेगी’.

ट्रेनिंग के दौरान अमित ने जब भी वह परफ्यूम लगाया, तो सचमुच उसे लगता था कि सीमा आसपास ही कहीं है और इसी खुशबू के साथ महक रही है.

सीमा चोरीछिपे अमित से मोबाइल के जरीए बात करती थी, तो अमित उसे बताता था कि ‘तुम्हारी दी गई खुशबू दिनरात महकती रहती है. सुहागरात में भी तुम मुझे यही परफ्यूम गिफ्ट में देना’.

इन दोनों का शादी करने का सपना पूरा होने में अब कोई अड़ंगा नहीं है, बस इन्हें पूरे दमखम और भरोसे के साथ घर वालों को अपनी इच्छा बताना भर है. वे मान जाएं तो ठीक, नहीं तो किसी के रोकने से अब ये रुकने वाले भी नहीं.

सीमा की मुहब्बत में डूबे अमित को भी एक दिन शायरी का रोग लग ही गया, तो उस ने माशूका को ह्वाट्सएप पर दिल से निकला यह मैसेज भेजा :

‘कभी आग तो कभी शोला बन कर दहकती है, तेरे प्यार की खुशबू सरहद पर यों महकती है.’

ऐसे करें इस्तेमाल

वह खुशबू ही है, जो प्रेमियों को नजदीक लाती है. अहम बात यह कि इस का सलीके से इस्तेमाल करना है. जब अपने पार्टनर से मिलें, तो ध्यान रखें कि खुशबू बहुत तीखी न हो. भीनीभीनी खुशबू हर किसी को भाती है. बालों को शैंपू करने के बाद बहुत सारा तेल सिर में उड़ेलना कतई जरूरी नहीं. किसी अच्छे तेल को बालों में कम से कम लगाना ही काफी रहता है. चेहरे और गरदन पर ब्रांडेड कोल्ड क्रीम सर्दियों में अच्छी रहती है और उस के ऊपर हलका सा कोई टैलकम पाउडर लगा लें, तो चेहरा खिल उठता है.

अब बारी आती है परफ्यूम या डिओ की, तो वह अपने पार्टनर की पसंद का स्प्रे करें. अगर उस की कोई खास पसंद न हो तो लड़कियों के लिए चंदन, मोगरा और गुलाब की खुशबू वाले परफ्यूम अच्छे रहते हैं.

इस के उलट लड़कों को चौकलेट फ्लेवर के परफ्यूम ज्यादा पसंद आते हैं. पहली डेट पर ज्यादातर लड़के चौकलेट खुशबू का परफ्यूम लगा कर जाते हैं. इस के पीछे माहिरों का कहना है कि लड़कियां चौकलेट पसंद करती हैं और इस की तरफ जल्दी खिंचती भी हैं.

भोपाल की मनीषा मार्केट के एक कैमिस्ट अनिल ललवानी बताते हैं, ‘‘परफ्यूम तो परफ्यूम लड़के डेट पर जाने के लिए कंडोम भी चौकलेट फ्लेवर का ज्यादा लेते हैं. चौकलेट के बाद लड़कों की दूसरी पसंद फूलों की खुशबू वाले परफ्यूम होते हैं.

‘‘आजकल अलकोहल की गंध वाले परफ्यूम भी लड़के पसंद कर रहे हैं. लड़कियों को इंप्रैस करने के लिए चौथे नंबर पर फलों की खुशबू वाले परफ्यूम लड़के ज्यादा लगाते हैं.’’

डेट पर जाने से पहले खुशबूदार साबुन से नहाना चाहिए, ताकि शरीर की बदबू भाग जाए. इस के बाद पूरे शरीर पर टैलकम पाउडर लगाना चाहिए. आजकल सभी कंपनियां तकरीबन सभी खुशबुओं वाले टैलकम पाउडर बना रही हैं. सर्दियों में यों तो कोई भी खुशबू चल जाती है, क्योंकि पसीना कम आता है. थोड़ा सा चंदन वाला पाउडर लंबे समय तक महकता रहता है.

प्यार में हों, डेट पर हों या उस से भी ज्यादा कुछ होना हो, जरूरी है कि पूरा शरीर महकता रहे. एक अहम बात जिस पर अकसर प्यार करने वाले ध्यान नहीं दे पाते, वह मुंह से आती बदबू है, जिसे दूर करने के लिए ब्रश करने के बाद इलायची या माउथ फ्रैशनर जरूर इस्तेमाल करना चाहिए.

पूरा शरीर खुशबू से तर हो, लेकिन जैसे ही किस करने की बारी आए, तो मुंह की बदबू मामला खराब कर देती है, इसलिए इस का भी ध्यान रखना चाहिए, तभी तो प्यार की गहराइयों में उतरने का सही लुत्फ आएगा और जेहन में तकरीबन 45 साल पहले आई फिल्म ‘बदलते रिश्ते’ का ऋषि कपूर, जितेंद्र और रीना राय पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गाना गूंज उठेगा :

‘मेरी सांसों को जो महका रही है ये पहले प्यार की खुशबू तेरी सांसों से शायद आ रही है.’

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें