एसटीडी और महिलाएं: सेक्स की राह में खतरे भी हैं कई!

‘कई बरस पुरानी बात है, मेरा सम्बंध एक रईस और मशहूर व्यक्ति से था. वह बेहद हाॅट और डैशिंग था. उसे देख हमेशा मन विचलित हो उठता था. वह वाकई किसी भी लड़की का ड्रीम ब्वाॅय हो सकता है. वह हमेशा डिजायनर सूट्स में रहता था. गाॅगल्स के बिना तो वह कभी घर से निकलता ही नहीं था. एक रोज उसने मुझे ऑफर कर दिया. मैं उसे मना ही नहीं कर पायी. आखिर कैसे करती? वह मेरे सपनों का राजकुमार था. वह राजकुमार जो सफेद घोड़े पर आकर मुझे ब्याहकर ले जाता है. हालांकि वह घोड़े पर नहीं आया था. मगर उसकी कार सफेद रंग की ही थी.

बहरहाल उसने मुझे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया. मैं बहुत खुश थी. उन्हीं दिनों जब उसने मुझसे अंतरंग सम्बंध स्थापित करने चाहे तो मैं इंकार नहीं कर सकी. वह रात का समय था. मैं यहां पेइंग गेस्ट के तौरपर रहती थी. मकान के मालिक घर पर नहीं थे. वह मेरे घर आया था. वो सब बहुत अचानक हुआ, जिसकी मुझे कल्पना नहीं थी. हालंाकि मैं बहुत खुश थी. इस सबके बीच मैं एक चीज भूल ही गई कि उन लम्हों के पहले कुछ सुरक्षा का भी ख्याल रखना चाहिए. लेकिन उस पर आंख मूंदकर भरोसा करती थी. इसलिए जो हुआ वह जानबूझकर था. लेकिन इस घटना  के एक साल बाद मैं चेकअप के लिए अपनी गायनी (स्त्रीरोग विशेषज्ञ) के पास गयी. मुझे बताया गया कि मैं क्लामीडिया (बीसंउलकपं) की शिकार हो गयी हूं. इस खबर से भी ज्यादा खतरनाक यह था कि बैक्टीरिया ने मेरी एक फेलोपियन ट्यूब को भी इंफेक्ट (संक्रमित) कर दिया था, जिससे मैं कभी भी मां नहीं बन सकती थी.’

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यह एक 28 वर्षीय महिला का दर्दभरा खत है. लेकिन इस रोग से ग्रस्त वह अकेली महिला नहीं है. दरअसल, एसटीडी (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीजेज़ यानी यौन संक्रमण रोग जिसमें क्लामीडिया भी आता है) रोगियों की तादाद खासकर महिलाओं में बढ़ती जा रही है. पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी द्वारा हाल ही में किए गये सर्वेक्षण के अनुसार, एसटीडी से जितने लोग ग्रस्त हैं, उनमें से 50 प्रतिशत से भी अधिक 25 वर्ष की आयु से कम के हैं. डाॅ. मिटशेल क्राइनिन, जिनके नेतृत्व में यह सर्वे किया गया, का कहना है कि एसटीडी का ज्यादा खतरा महिलाओं को है क्योंकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के गुप्तांगों के इर्दगिर्द म्युकस मेंबरेंस ज्यादा होते हैं जिनके गर्म व नमी वाले वातावरण में बैक्टीरिया व वायरस को फलने-फूलने का अच्छा अवसर मिल जाता है. साथ ही 20-25 वर्ष आयुवर्ग वाली युवतियों की जो वैजाइनल (योनि) लाइनिंग होती है, उसमें प्रवेश करना बैक्टीरिया व वायरस के लिए आसान होता है. इससे भी खतरनाक बात यह है कि महिलाओं में एसटीडी ज्यादातर लक्षणरहित होती है.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते अगर इसका उपचार करा लिया जाए, तो फिर कुछ खास समस्या नहीं रहती. महिलाओं को होने वाला ऐसा ही एक रोग है एचपीवी. एचपीवी किस तरह महिलाओं को अपने घेरे में लेता है, पढ़िए यह पत्र- ‘रूटीन चेकअप कराने के बाद जब मेरी गायनी ने यह बताया कि मुझे एचपीवी है तो मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गयी. इससे भी ज्यादा खराब मुझे यह लगा जब गायनी ने कहा कि मुझ जैसी लड़कियों को एचपीवी होना ही चाहिए. डर के साथ मुझे शर्म भी थी इसलिए मैंने यह बात किसी को नहीं बतायी. लेकिन एक बोझ के साथ भी ज्यादा दिन जिया नहीं जा सकता. लिहाजा यह बात मैंने अपनी सबसे प्यारी सहेली को बतायी. उसने मुझे अपनी बहन से मिलवाया जो खुद एचपीवी की शिकार थी. दोनों बहनों ने मुझे समझाया कि एचपीवी सेक्स करने की सजा नहीं है. यह तो एक वायरस है जो किसी को भी अपना शिकार बना सकता है.’

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एचपीवी का अर्थ है ह्यूमन पेपिल्लोमा वायरस (ीनउंद चंचपससवउं अपतने). इसके तहत विभिन्न किस्म के लगभग 100 वायरस आते हैं जिनसे वाटर््स (मस्से) हो जाते हैं. इनमें से 40 वायरस महिलाओं को उस वक्त संक्रमित करते हैं, जब उनके गुप्तांग किसी संक्रमित पुरुष के संपर्क में आ जाएं. अमूमन जब यह होता है तो न कोई मस्से विकसित होते हैं और न ही किसी बीमारी का अहसास होता है. और कुछ माह या कुछ साल बाद महिला के जिस्म का इम्यून सिस्टम (प्रतिरोधक क्षमता) अपने आप ही इन वायरसों को नष्ट कर देता है.

लेकिन इन सौ में से दो वायरस ऐसे हैं जिनकी वजह से वार्ट्स या मस्से विकसित हो सकते हैं. संक्रमण के दो सप्ताह के भीतर वल्वा (भग), वैजाइना (योनि), सर्विक्स और एनल (गुदा) क्षेत्र- या जहां भी संक्रमित साथी के साथ संपर्क बनाया गया हो- सफेद या त्वचा की रंग के चकत्ते उभर आते हैं. एक या दो ही चकत्ते होते हैं लेकिन अक्सर एक ही मस्सा गोभी के फूल की तरह बहुत सारे मस्सों में फूट जाता है. इन सौ में से 15 वायरस से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है. हालांकि पुरुषों को इस रोग से कोई खास नुकसान नहीं होता लेकिन एचपीवी संक्रमण उन्हें कैरियर (वाहक) अवश्य बना देता है, यानी वे इस रोग को एक महिला से दूसरी महिला तक पहुंचा सकते हैं. शोध से यह भी मालूम हुआ है कि एचपीवी के कुछ वायरस पुरुषों में एनल (गुदा) और पेनाइल (लिंग) कैंसर का कारण भी बन जाते हैं.

वार्ट्स या मस्से मुलायम और सूखे होते हैं लेकिन उनमें कोई तकलीफ या खुजली नहीं होती. सवाल यह है कि क्या यह हमेशा संक्रमित होते हैं? इस सिलसिले में विख्यात गुप्तरोग विशेषज्ञ स्वर्गीय डाॅ. बी.बी. गिरि का कहना है, ‘वार्ट्स हमेशा बहुत अधिक इंफेक्शस (संक्रमणकारी) होते हैं. अगर वार्ट्स मौजूद न भी हों तो भी उनसे एचपीवी दूसरों को लग सकती है या खुद को हो सकती है.’ डाॅ. गिरि का यह भी कहना है कि कंडोम हमेशा एचपीवी से बचाव नहीं कर सकता. ऐसा इसलिए है क्योंकि कंडोम पुरुष के सिर्फ निजी अंग को ढकता है और दूसरी जगहों पर जो इसके वायरस होंगे, वह महिला को लग सकते हैं. अब सवाल यह है कि अगर किसी को एचपीवी के वार्ट्स हो जाएं, तो क्या किया जाए? इस सिलसिले में गायनी अकसर एक क्रीम सुझाती हैं जिससे आठ सप्ताह के भीतर आराम पहुंच जाता है. लेकिन अगर यह काम न करे, तो गायनी उन मस्सों को अपने क्लिनिक में बर्न या फ्रीज़ करेगी. यह भी हो सकता है कि एक मस्सा ठीक कराते वक्त दूसरा मस्सा पनप जाए.

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जैसा कि ऊपर कहा गया है कि चालीस एचपीवी वायरस कुछ खास नुकसान नहीं पहुंचाते. लेकिन जिन दो वायरसों से संक्रमण होता है, उनसे सर्वाइकल डिस्प्लेसिया -सर्विक्स की कोशिकाओं में परिवर्तन- हो सकता है जिसकी सर्वाइकल कैंसर में तब्दील होने की आशंका रहती है. लेकिन घबराने की बात नहीं है. जितनी जल्दी आप पैप (चंच) टेस्ट करा लेंगी उतनी जल्दी यह मालूम हो जायेगा कि डिस्प्लेसिया है या नहीं. जाहिर है, मालूम होने पर उसे कैंसर के स्तर तक पहुंचने से रोका जा सकता है.

इस तरह करें सुहागरात की तैयारी, बनी रहेगी प्यार की खुमारी

जीवन के कुछ बेहद रंगीन पलों, जिन की कल्पना मात्र से धड़कनें तेज हो जाती हैं और माहौल में रोमानियत छा जाती है, में से एक है शादी की पहली रात यानी मिलन की वह रात जब दो धड़कते जवां दिल तनमन से मिलन को तैयार होते हैं.

चाहे किसी भी उम्र का कोई भी व्यक्ति क्यों न हो? वह अपनी पहली रात की यादों की खुशबू को हमेशा अपने जेहन में बसाए रखना चाहता है. मिलन की यह रात एक प्रेम, रोमांस और रोमांच तो पैदा करती ही है साथ ही अगर सावधानीपूर्वक इस के आगमन की तैयारी न की जाए तो यह पूरे जीवन के लिए टीस बन कर रह जाती है. जीवन की इस खास रात को यादगार बनाने के लिए अगर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो बेशक यह रात हमेशाहमेशा के लिए खास बन जाएगी.

घूंघट में लिपटी, फूलों की सेज पर बैठी दुलहन के पारंपरिक कौंसैप्ट से अलग बदलाव आने लगे हैं. अब तो युवा शादी तय होते ही बाकायदा इसे सैलिब्रेट करने की योजना में विवाह से पहले ही जुट जाते हैं.

रोमानियत और रोमांच की इस रात को अगर थोड़ी तैयारी और सावधानी के साथ मनाया जाए तो जिंदगी फूलों की तरह महक उठती है वरना कागज के फूल सी बिना खुशबू हो जाती है. दो लफ्जों की यह कहानी ताउम्र प्यार की सुरीली धुन बन जाए इस के लिए कुछ बातों का जरूर खयाल रखें.

मुंह की दुर्गंध करें काबू : यह समस्या किसी को भी हो सकती है. मुंह से दुर्गंध आना एक आम समस्या है पर यही समस्या मिलन की रात आप के पार्टनर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. चूंकि नवविवाहितों को इस खास रात बेहद करीब आने का अवसर मिलता है. ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही आप के पार्टनर के मन में आप के लिए खिन्नता व दूरी पैदा कर सकती है. इसलिए बेहतर है कि अगर आप के मुंह से दुर्गंध आती है तो पहले ही इस का बेहतर इलाज करा लें या फिर इसे दूर करने के लिए मैंथौल, पीपरमैंट या फिर सुगंधित पानसुपारी आदि लें. आप बेहतर क्वालिटी के माउथ फ्रैशनर का भी प्रयोग कर सकते हैं.

सैंट का प्रयोग करें : कहते हैं शरीर की सुगंध सामने वाले को सब से ज्यादा प्रभावित करती है. पसीने के रूप में शरीर से निकलने वाली दुर्गंध आप की छवि खराब कर सकती है. मिलन की रात ज्यादातर लोग इसे ले कर गंभीर नहीं होते जबकि यह सब से अहम है.

आप के तन की खुशबू सीधे आप के पार्टनर के मन पर प्रभाव डालती है जिस से मिलन का मजा दोगुना हो जाता है. शारीरिक दुर्गंध कोई बड़ी समस्या नहीं है. आजकल बाजार में आप की पसंद और चौइस के अनुसार ढेरों फ्लेवर व विभिन्न ब्रैंड्स के डिओ उपलब्ध हैं.

‘आप चाहें तो अपने पार्टनर की पसंद पूछ कर उसी ब्रैंड का डिओ, सैंट, स्पे्र आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. इस के दो फायदे हैं एक तो आप की सकारात्मक इमेज बनेगी दूसरे पसीने की दुर्गंध से बचेंगे, जिस से आप की पार्टनर आप से खुश भी हो जाएगी.

अनचाहे बालों से मुक्ति : कई बार अनाड़ीपन में पहली रात का मजा किरकिरा हो जाता है. लापरवाही और बेफिक्री आप को इम्बैरेंस फील करा सकती है. बोयोलौजिकली हमारे शरीर के हर हिस्से में बाल होते हैं जिन में गुप्तांगों के बाल भी शामिल हैं. मिलन की रात से पहले ही अपने शरीर के इन अंगों के बालों को अवश्य हटा लें. यह न केवल हाइजिनिक दृष्टि से जरूरी है बल्कि यह कम्फर्टेबिलिटी का पैमाना भी है. बाजार में कई तरह के हेयर रिमूवर व क्लीनर मिलते हैं, जिन से आसानी से इन बालों को रिमूव किया जा सकता है. अगर इम्बैरेंस होने से बचना है तो इस बात का खयाल अवश्य रखें.

मासिक धर्म न आए आड़े : कई बार ऐसा होता है कि मिलन की रात वाले दिन ही मासिक धर्म एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ कर आप के हसीन सपनों पर पानी फेर देता है. इस रात मासिक धर्म आप के मिलन पर भारी न पड़े, इस के लिए जरूरी है कि अगर आप के मासिक धर्म की तिथि इस दौरान है तो पहले ही डाक्टर से मिल कर इस का समाधान कर लें. माहवारी ऐक्सटैंड या डिले करने वाली दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं. डाक्टर की सलाह से उन का उपयोग करें.

कुछ यों करें साथी को तैयार

–       कई बार मिलन की हड़बड़ी में पार्टनर की भावनाओं की परवा किए बगैर युवा गलती कर बैठते हैं. इसलिए जब तक साथी मिलन के लिए पूरी तरह तैयार न हो उस पर बिलकुल दबाव न डालें.

–       बेसब्र होने के बजाय धीरज से पार्टनर के पास जाएं. बातचीत करें. उस के शौक, चाहत, लक्ष्य आदि के बारे में बात करें.

–       अगर पार्टनर अपने अतीत के बारे में स्वयं कुछ बताना चाहे तो ठीक अन्यथा कुरेदकुरेद कर उस के अतीत को जानने का प्रयत्न न करें.

–       पार्टनर के हावभाव, तेवर व आंखों की भाषा पढ़ने की कोशिश करें, उसे जो पसंद हो, वही करें. अपनी चौइस उस पर न थोपें.

–       आप की पार्टनर अपने घर को अलविदा कह कर आप के घर में  सदा के लिए आ गई है, ऐसे में जल्दबाजी में संबंध बनाने के बजाय उस का विश्वास जीतने की कोशिश करें व सामीप्य बढ़ाएं.

– संभव हो तो अपने परिवार के सदस्यों के बारे में उस की पसंदनापसंद, स्वभाव, प्रवृत्ति तथा घर के तौरतरीकों के बारे में हलकीफुलकी बातें कर सकते हैं.

–       पार्टनर की कमियां निकालने के बजाय उस की खूबियों की चर्चा करें, फिर देखिए मिलन की रात कैसे सुपर रात बनती है. –

इन बातों का भी रखें ध्यान 

–  अपने बैडरूम का दरवाजाखिड़की अच्छी तरह बंद करें. उन्हें खुला बिलकुल न छोड़ें.

– ड्रिंक न करें, जरूरी हो तो ओवरडोज से बचें. नशा सारी खुमारी पर पानी फेर सकता है.

– कमरे में तेज रोशनी न करें. हलके गुलाबी या रैड लाइट वाले जीरो वाट के बल्ब का इस्तेमाल करें.

– पार्टनर के साथ जोरजबरदस्ती बिलकुल न करें. उसे प्यार से तैयार करें. पहले बातचीत से नजदीक आएं फिर मिलन के लिए आलिंगनबद्ध करें व बांहों के आगोश में समा जाएं.

– भारीभरकम वैडिंग गाउन, लहंगे, साड़ी पहनने से बचें. हलकेफुलके नाइट गाउन को तरजीह दें. सैक्सी अंत:वस्त्र ऐसे में माहौल को रोमानियत प्रदान करते हैं.

–  रूम फ्रैशनर का प्रयोग करें पर जरूरत से ज्यादा नहीं. हो सकता है आप के पार्टनर को इस से ऐलर्जी की समस्या हो.

–  बैड की पोजिशन जरूर चैक करें. ज्यादा आवाज करने वाले बैड आप को इम्बैरेंस कर सकते हैं.

वायग्रा सिर्फ सेक्स के लिए नहीं, जानें यहां

डायमंड के आकार वाली छोटी सी नीली गोली वियाग्रा सैक्स पावर को बढ़ाने के अलावा दूसरी बीमारियों में भी कमाल का असर दिखाती है. वियाग्रा में मौजूद दवा सिल्डेनाफिल को मर्दों की सैक्स संबंधी कमजोरियों को दूर करने में असरकारक माना जाता है लेकिन एक नई रिसर्च के अनुसार, वियाग्रा अन्य कई गंभीर रोगों में भी फायदेमंद है.

कई देशों में वियाग्रा के साइड इफैक्ट्स के बारे में शोध करने पर इस के कई फायदे सामने आए जो चौंकाने वाले हैं. अमेरिका में किए गए एक शोध के अनुसार, ठंड के मौसम में अकसर लोगों की उंगलियों में ऐंठन, दर्द होना, मुड़ न पाना, पीली पड़ जाना जैसी समस्याएं हो जाती हैं. ठंड से बच कर इन समस्याओं से बचा जा सकता है.

इस समस्या से जूझ रहे मरीजों को सिल्डेनाफिल देने पर उन्हें काफी फायदा हुआ. ऐसे?स्थान जहां अधिक बर्फ पड़ती है, वहां के लोगों को माउंटेन सिकनैस की समस्या हो जाती है. ऊंचे स्थानों पर औक्सीजन की कमी होने से ब्लड में इस का लेवल कम हो जाता है जिस से पल्मोनरी धमनियां संकरी हो जाती हैं. ऐसे में हृदय को पंपिंग करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है और व्यक्ति की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है.

पल्मोनरी हाइपरटैंशन जैसी समस्या में भी सिल्डेनाफिल काफी प्रभावशाली होती है. फेफड़ों की बीमारी व हृदय संबंधी गड़बडि़यां होने पर पल्मोनरी हाइपरटैंशन की समस्या हो सकती है. पल्मोनरी हाइपरटैंशन के इलाज के लिए पुरुष व स्त्री दोनों के लिए सिल्डेनाफिल की 20 एमजी की 1-1 खुराक दिन में 3 बार निर्धारित की गई है. क्लीनिकल ट्रायल्स में इस दवा के काफी बेहतर परिणाम मिले हैं.

हृदय रोगियों के लिए हालांकि वियाग्रा सुरक्षित नहीं है लेकिन एक ही जगह पर रक्त की अधिकता, जिस की वजह से हार्ट फेल्योर की समस्या उत्पन्न होती है, के मरीजों के लिए सिल्डेनाफिल काफी प्रभावकारी होती है.  स्ट्रोक जैसी समस्या में सिल्डेनाफिल कमाल का असर दिखाती है. इस विषय पर शोध करने वाले जरमनी के डा. मैक रैपर का कहना है कि सिल्डेनाफिल मस्तिष्क के स्ट्रोक को दूर  करने में काफी अच्छा काम करती है.

सिल्डेनाफिल को ले कर नए शोध जारी हैं.  शोधों में इस से होने वाले लाभ और नुकसान के नतीजे सामने आ रहे हैं. बहरहाल, अब तक किए गए नतीजों से वियाग्रा एक लाभदायक दवा के रूप में भी सामने आई है. मगर ध्यान रहे, ऐसी कोई भी दवा बिना विशेषज्ञों की सलाह के बगैर न लें.

कंडोम: बीमारी दूर, मजा भरपूर

भारत जैसे विकासशील देश में बढ़ती हुई आबादी पर काबू पाना बहुत जरूरी हो गया है. आसान शब्दों में कहें कि अब ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ महज नारा ही नहीं, बल्कि आज की जरूरत है. इस के अलावा सेफ सैक्स से पतिपत्नी को किसी तरह की सैक्स संबंधी बीमारियों से भी बचाया जा सकता है.

सेफ सैक्स कैसे किया जाता है? इस के लिए क्याक्या सावधानियां बरतनी चाहिए? सेफ सैक्स करने के क्याक्या फायदे होते हैं और इस में किनकिन बातों का ध्यान रखना चाहिए? पतिपत्नी को इन सवालों के जवाबों की सही जानकारी होनी चाहिए.

भले ही सैक्स इनसान की जरूरत है, लेकिन इस का सेफ भी होना जरूरी है. एक बार की लापरवाही से बनाए गए सैक्स संबंध से आप की जिंदगी पूरी तरह से बदल सकती है. पत्नी को पेट से करा सकती है या फिर जिंदगीभर के लिए न ठीक हो सकने वाली कोई बीमारी दे सकती है.

वैसे भी आज के समाज में बहुत ज्यादा खुलापन आ गया है. पतिपत्नी के अलावा कई लोगों से जिस्मानी संबंध रखना आम बात हो गई है.

कुछ लोग तो इसे फैशन और नई सोच समझते?हैं, पर यह साथी के प्रति वफादारी और सेहत दोनों ही नजरिए से गलत है. इसी का नतीजा है कि समाज में सैक्स से जुड़ी कई तरह की बीमारियां बढ़ गई हैं.

पहले तो यह जान और मान लें कि शादी से पहले इस तरह के जिस्मानी संबंध बनाना किसी के भी भविष्य को बरबाद कर सकता है, इसलिए शादी से पहले इस तरह के संबंधों को न बनाएं.

सैक्स रोगों से बचने का सब से अच्छा तरीका है कि सैक्स ही न किया जाए या किया भी जाए तो केवल एक ही साथी से, जो आप का पति या पत्नी हो.

सेफ सैक्स का आसान और सस्ता तरीका है कंडोम का इस्तेमाल. हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें. यह अनचाहे पेट और सैक्स रोगों से बचाता है.

सैक्स और कंडोम

कंडोम का इस्तेमाल सेफ सैक्स के लिए किया जाता है. सेफ सैक्स को ले कर लोगों में आज भी तमाम भ्रांतियां फैली हुई हैं. इस के लिए न सिर्फ सेफ सैक्स के बारे में जानना जरूरी है, बल्कि यह भी जानना जरूरी है कि आखिर कंडोम के इस्तेमाल के फायदे क्या हैं. कंडोम और सेफ सैक्स में क्या संबंध है.

* आज भी ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हें कंडोम की सिक्योरिटी पर शक होता है. ऐसे लोगों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर कंडोम का सही और सावधानी से इस्तेमाल किया जाए तो इस के कोई बुरे नतीजे सामने नहीं आते?हैं.

* कंडोम को सेफ सैक्स का अच्छा विकल्प तो माना ही जाता है, साथ ही यह सैक्स में तमाम तरह की सेफ्टी भी रखता?है.

* सैक्स संबंधी तमाम बीमारियों से बचाने के लिए कंडोम बहुत ही फायदेमंद?है.

* कंडोम न सिर्फ अनचाहे पेट से बचाने में काफी मददगार है, बल्कि यह सैक्स संबंधी बीमारियों को भी काबू में रखता है.

  • आज कंडोम कई तरह की वैराइटी में, रंगों में मौजूद?है, लेकिन हर किसी को अपनी जरूरत के हिसाब से कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए.

* कंडोम से न सिर्फ इंफैक्शन, बल्कि किसी भी तरह की एलर्जी से बचा जा सकता?है.

* कंडोम के इस्तेमाल करने से एचआईवी एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों को काबू में भी किया जा सकता?है.

* कंडोम न सिर्फ महफूज है, बल्कि बहुत उपयोगी, सस्ता और इस्तेमाल करने में भी आसान है.

* जिस्मानी संबंध बनाते समय कंडोम का इस्तेमाल करने से कंट्रासैप्टिव पिल्स यानी गर्भनिरोधक गोलियों को खाने से बचा जा सकता है.

* सेफ सैक्स के विकल्प के साथ ही यह अनचाहे पेट से भी बचाता है.

आमतौर पर किसी सैक्स रोग से पीडि़त औरत से बिना सावधानी बरते जिस्मानी संबंध बनाने से यह रोग मर्द को भी लग सकता है या फिर मर्द से औरत को भी यह रोग लग सकता है, इसीलिए संक्रमित रोगों के बचाव के लिए और सेफ सैक्स के लिए कंडोम का इस्तेमाल जरूरी है.

* कंडोम एक शारीरिक बाधा पैदा करता?है जो शुक्राणु को अंडे तक पहुंचने से रोकता?है. इस वजह से औरत पेट से नहीं होती?है.

* कंडोम मुख्य रूप से बहुत पतले लेटैक्स रबड़ या पौलीयूरेथेन से बनता है.

कम कीमत और सुविधाजनक कंडोम को दुकानों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और औनलाइन हासिल करना बहुत ही आसान है. आप को कंडोम खरीदने के लिए कोई डाक्टरी परची या आईडी की जरूरत नहीं है. कहींकहीं पर तो यह मुफ्त में भी मिलता है.

यौन रोग के शुरुआती लक्षण

यौन रोग पतिपत्नी के संबंधों में बाधक बन जाते हैं. यौन रोग के डर से लोग संबंध बनाने से डरने लगते हैं. कई बार यौन रोगों से अंदरूनी अंग से बदबू आने लगती है, जिस की वजह से सेक्स संबंधों से रुचि खत्म हो जाती है. ऐसे में पतिपत्नी एक दूसरे से दूर जा कर कहीं और संबंध बनाने लगते हैं.

क्या है यौन रोग

यौन रोग शरीर के अदरूनी अंगों में होने वाली बीमारियों को कहा जाता है. यह एक पुरुष और औरत के साथ संपर्क करने से भी हो सकता है और बहुतों के साथ संबंध रखने से भी हो सकता है. यौन रोग से ग्रस्त मां से पैदा होने वाले बच्चे को भी यह रोग हो सकता है. ऐसे में अगर मां को कोई यौन रोग है, तो बच्चे का जन्म डाक्टर की सलाह से औपरेशन के जरीए कराना चाहिए. इस से बच्चा योनि के संपर्क में नहीं आता और यौन रोग से बच जाता है.

कभीकभी यौन रोग इतना मामूली होता है कि उस के लक्षण नजर ही नहीं आते हैं. इस के बाद भी इस के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं. इसलिए यौन रोग के मामूली लक्षण को भी नजरअंदाज न करें. मामूली यौन रोग कभीकभी अपनेआप ठीक हो जाते हैं, पर इन के बैक्टीरिया शरीर में रह जाते हैं, जो कुछ समय बाद शरीर में तेजी से हमला करते हैं. यौन रोग शरीर की खुली और छिली जगह वाली त्वचा से ही फैलते हैं.

यौन रोग का घाव इतना छोटा होता है कि उस का पता ही नहीं चलता है. पति या पत्नी को भी इस का पता नहीं चलता है. यौन रोगों का प्रभाव 2 से 20 सप्ताह के बीच कभी भी सामने आ सकता है. इस के चलते औरतों को माहवारी बीच में ही आ जाती है. यौन रोग योनि, गुदा और मुंह के द्वारा शरीर में फैलते हैं. यौन रोग कई तरह के होते हैं. इन के बारे में जानकारी होने पर इन का इलाज आसानी से हो सकता है.

हार्पीज: हार्पीज बहुत ही आम यौन रोग है. इस रोग में पेशाब करते समय जलन होती है. पेशाब के साथ कई बार मवाद भी आता है. बारबार पेशाब जाने को मन करता है. बुखार भी हो जाता है. टौयलेट जाने में भी परेशानी होने लगती है.  जिसे हार्पीज होता है उस के मुंह और योनि में छोटेछोटे दाने हो जाते हैं. शुरुआत में ये अपनेआप ठीक भी हो जाते हैं. अगर ये दोबारा हों तो इलाज जरूर कराएं.

व्हाट्स: व्हाट्स में शरीर के तमाम हिस्सों में छोटीछोटी फूलनुमा गांठें पड़ जाती हैं. व्हाट्स एचपीवी वायरस यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के चलते फैलता है. यह 70 प्रकार का होता है. अगर ये गांठें अगर शरीर के बाहर हों और 10 मिलीमीटर के अंदर हों तो इन्हें जलाया जा सकता है. 10 मिलीमीटर से बड़ा होने पर औपरेशन के जरीए हटाया जाता है.

योनि में फैलने वाले वायरस को जैनरेटल व्हाट्स कहते हैं. यह योनि में बच्चेदानी के मुख पर हो जाता है. अगर समय पर इलाज न हो तो यह घाव कैंसर का रूप ले लेता है. अगर यह हो तो 35 साल की उम्र के बाद एचपीवी का कल्चर जरूर करा लें. इस से घाव का पूरा पता चल जाता है

गनेरिया: इस रोग में पेशाब की नली में घाव हो जाता है, जिस से पेशाब की नली में जलन होने लगती है. कई बार खून और मवाद भी आने लगता है. इस का इलाज ऐंटीबायोटिक दवाओं के जरीए किया जाता है. अगर यह बारबार होता है तो इस का घाव पेशाब की नली को बंद कर देता है, जिसे बाद में औपरेशन के द्वारा ठीक किया जाता है.

गनेरिया को साधारण बोली में सुजाक भी कहा जाता है. इस के होने पर तेज बुखार भी आता है. इस के बैक्टीरिया की जांच के लिए मवाद की फिल्म बनाई जाती है. अगर यह बीमारी शुरू में ही पकड़ में आ जाए तो इलाज आसानी से हो जाता है. बाद में इलाज कराने में मुश्किल आती है.

सिफलिस: यह यौन रोग भी बैक्टीरिया के कारण फैलता है. यह यौन संबंध के कारण ही होता है. इस रोग के चलते पुरुषों के अंग के ऊपर गांठ सी बन जाती है. कुछ समय के बाद यह ठीक भी हो जाती है. इस गांठ को शैंकर भी कहा जाता है. शैंकर से पानी ले कर माइक्रोस्कोप द्वारा ही बैक्टीरिया को देखा जाता है. इस बीमारी की दूसरी स्टेज पर शरीर में लाल दाने से पड़ जाते हैं. यह कुछ समय के बाद शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करने लगता है. इस बीमारी का इलाज तीसरी स्टेज के बाद मुमकिन नहीं होता है. खराब हालत में यह शरीर की धमनियों को प्रभावित करता है. धमनियां फट भी जाती हैं. यह रोग आदमी और औरत दोनों को हो सकता है. इस का इलाज दवा और इंजैक्शन से होता है.

क्लैमाइडिया: इस बीमारी में औरतों को योनि में हलका सा संक्रमण होता है. यह योनि के द्वारा बच्चेदानी तक फैल जाता है. यह बांझपन का सब से बड़ा कारण होता है. यह बच्चेदानी को खराब कर देता है. बीमारी की शुरुआत में ही इलाज हो जाए तो ठीक रहता है. क्लैमाइडिया के चलते औरतों को पेशाब करते समय जलन, पेट दर्द, माहवारी में दर्द, टौयलेट के समय दर्द, बुखार आदि परेशानियां पैदा होने लगती हैं.

एक फ्रैंडशिप क्लब में मेरे पैसे फंसे हुए हैं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 23 साल है. कुछ समय पहले मैं ने एक फ्रैंडशिप क्लब में काम करने के लिए फार्म भरा था. उन्होंने दाखिले की फीस के नाम पर मुझ से काफी पैसे ले लिए. मुझे अभी तक कोई काम नहीं मिला है.

वे लोग अब कहते हैं कि और ज्यादा पैसे दो, तभी बात बनेगी. मेरे पैसे फंसे हुए हैं. क्या वे मुझे वापस मिल सकते हैं?

जवाब-

आप धोखेबाजों के चंगुल में फंस गए हैं. पहले रोजगार के लालच में पैसा दे चुके हैं, अब दोबारा ऐसी बेवकूफी न करें. पुराने पैसों के बाबत उन पर दबाव बनाएं और पैसा देने का कोई सुबूत हो तो पुलिस में रिपोर्ट लिखाएं. मीडिया के जरीए भी उन का फरेब उजागर करें, जिस से और नौजवान ठगने से बचें. उम्मीद कम ही है कि अब आप का पैसा वापस मिल पाएगा.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Top 10 Sex Tips : टॉप 10 सेक्स से जुड़े आर्टिकल

Top 10 Sex Tips : दिल्ली प्रैस की ‘सरस सलिल’ मगैजीन सबसे पढ़ी जानी वाली मैगजीन है. जिसमें आप कहानियों के साथ साथ कुछ ऐसे लेख भी पाएंगे. जो आपको सेक्स एजुकेशन देने का भी काम करती हैं. इस मैगजीन में सेक्स के जुड़े कई आर्टिकल है जो आपके सेक्शुअल रिलेशन बनाने में मदद करती है. तो आज हम आपको सेक्स से जुड़े कुछ खास टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हें पढ़कर आप अपनी सेक्स लाइफ बेहतर बना सकते हैं. तो पढ़े TOP 10 SEX Tips.

1. कुछ ऐसी होती है उन पलों में आपकी सैक्स फैंटेसीsex tips

शारीरिक संबंधों में अनावश्यक सहना या अपनेआप समय गुजरने के साथ उन में तबदीली हो जाने की गुंजाइश मान कर चलना भ्रम है. यह इन संबंधों के सहज आनंद को कम करता है. कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें पति की आक्रामकता पसंद नहीं आती थी. लेकिन लज्जा या संकोचवश कुछ कहना अच्छा नहीं लगता था. कुछ महिलाओं का कहना है कि पति को खुद भी समझना चाहिए कि पत्नी को क्या पसंद आ रहा है, क्या नहीं. मगर इस पसंदनापसंद के निश्चित मानदंड तो हैं नहीं, जिन से कोई अपनेआप ही समझा जाए और आनंद के क्षण जल्दी और ज्यादा मिल जाएं.

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2. एकतरफा नहीं, दोनों की मंजूरी से Enjoy करें सेक्सsex tips

पार्टनर के साथ संबंध बनाना एक सुखद अनुभूति प्रदान करता है. लेकिन इसमें आनंद के लिए शारीरिक जुड़ाव के साथसाथ भावनात्मक लगाव होना भी बहुत जरुरी होता है तभी इसका जी भरकर मज़ा लिया जा सकता है. लेकिन कई बार पार्टनर को सेक्स के दौरान इतना अधिक दर्द महसूस होता है कि वे सेक्स से कतराने लगती है और यह पल उसके लिए खुशी देने के बजाए दर्द देने वाला एहसास बनकर रह जाता है. ऐसे में अगर आप इस पल का बिना किसी रूकावट आनंद लेना चाहते हैं तो अपनाएं ये टिप्स.

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3. मनगढ़ंत बातों के जाल में फंसा सैक्सsex tips

हाल में कहीं पढ़ा था कि इनसान के पूर्वज माने जाने वाले चिंपांजी जब आपस में मिलते थे, तब वे सैक्स कर के एकदूसरे का स्वागत करते थे. इस बात से समझा जा सकता है कि सैक्स किसी भी जीव के बहुत जरूरी होता है और इस से मिलने वाली खुशी और मजे को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

यह भी दावा किया जाता है कि हफ्ते में 2 से 3 बार सैक्स करने से इनसान की बीमारी से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है. अच्छी नींद के लिए सैक्स बहुत अच्छी दवा माना जाता है. अगर वर्तमान की बात करें तो अभी इसी पल में दुनिया के 25 फीसदी लोग सैक्स के बारे में सोच रहे होंगे.

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4. छोटे घर में कैसे करें पार्टनर से प्यार, जानें यहां

बड़े शहरों में सब से बड़ी समस्या आवास की होती है. 2 कमरों के छोटे से फ्लैट में पतिपत्नी, बच्चे और सासससुर रहते हैं. ऐसे में पतिपत्नी एकांत का नितांत अभाव महसूस करते हैं. एकांत न मिल पाने के कारण वे सैक्स संबंध नहीं बना पाते या फिर उन का भरपूर आनंद नहीं उठा पाते क्योंकि यदि संबंध बनाने का मौका मिलता है तो भी सब कुछ जल्दीजल्दी में करना पड़ता है. संबंध बनाने से पूर्व जो तैयारी यानी फोरप्ले जरूरी होता है, वे उसे नहीं कर पाते. इस स्थिति में खासकर पत्नी चरमसुख की स्थिति में नहीं पहुंच पाती है.

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5. गले पड़ने वाले आशिक से बचें ऐसेsex tips

इतना ही नहीं, वे उसे अपने साथ कहीं भी ले जा सकेंगी. इस प्रोडक्ट का नाम ‘बॉयफ्रेंड हग स्पीकर्स’ (Boyfriend Hug Speakers) है. 2 बड़ी बांहों वाले इस प्रोडक्ट की बाजुओं में ब्लूटुथ स्पीकर्स भी लगे हैं जिन को गले लगाने पर म्यूजिक बजता है. सवाल उठता है कि ऐसा नकली बौयफ्रेंड बनाने की जरूरत ही क्या है? इस का जवाब यह है कि जापान (Japan) ही नहीं, बल्कि अब हर कहीं ऐसे भावनात्मक लड़कों की कमी हो गई है जो अपनी गर्लफ्रेंड को गले लगा कर उस को राहत दे सकें. हां, गले पड़ने वाले लड़कों की कमी नहीं है.

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6. 4 टिप्स से जानें औरत की सैक्स चाह गंदी बात क्योंsex tips

समाज में स्त्रीपुरुष (Male Female) के हर क्षेत्र में समान होने का गुणगान हो रहा है, पर वैवाहिक जीवन (Married Life) में बिस्तर पर स्त्रियों की समानता शून्य है. महिलाएं जब अपनी पसंद के भोजन का मेन्यू तय नहीं कर सकतीं तो बिस्तर पर सैक्स संबंध (Sex Relation) में अपनी पसंद की बात तो बहुत दूर की है. हमारे यहां दांपत्य जीवन में सैक्स संबंध में मेन्यू क्या होगा, इस का निर्णय केवल पुरुष ही लेता है. हमारे समाज में पब्लिक प्लेस पर सैक्स, हस्तमैथुन, सैक्स में पसंद और कामोन्माद अर्थात और्गेज्म (Orgasum) आदि.

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7. सैक्स के भ्रम से निकलें युवा, नहीं तो होगा यह नुकसान sex tips

अकसर युवा सैक्स को ले कर कई तरह की भ्रांतियों से घिरे रहते हैं. अपनी गर्लफ्रैंड से सैक्स को ले कर अपने इमैच्योर फ्रैंड्स से उलटीसीधी ऐडवाइज लेते हैं और जब उस ऐडवाइज का सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है तो शर्मिंदगी से किसी से बताने में संकोच करते हैं. यहां युवाओं को यह बात समझनी जरूरी है कि सैक्स से सिर्फ मजा ही नहीं आता बल्कि इस से सेहत का भी बड़ा गहरा संबंध है. सैक्स (Sex) और सेहत (Health) को ले कर कम उम्र के युवकों और युवतियों में ज्यादातर नकारात्मक भ्रांतियां फैली हैं.

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8. कंडोम मुसीबत नहीं दोस्त है आपकाSex tip

फिल्म ‘डियर जिंदगी’ (Dear Zindagi) में शाहरुख खान ने दिमाग के डाक्टर का किरदार निभाया था और दिमागी बीमारी या परेशानी को ले कर एक बात समझाई गई कि लोग शरीर की बीमारी को तो नहीं छिपाते हैं, पर जैसे ही उन्हें पता चलता है कि घर में कोई दिमागी तौर पर बीमार है, तो उन्हें जैसे सांप सूंघ जाता है.फुसफुसाहट सी शुरू हो जाती है, जैसे दिमागी बीमारी होना जिंदगी की सब से बड़ी दुश्वारी है. अनपढ़ ही नहीं, बल्कि पढ़ेलिखे लोग भी दिमागी समस्याओं पर दिमाग खोल कर बात नहीं कर पाते हैं.

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9. अब बैडरूम में मूड औफ नहीं, लव औन होगा Sex tips

रागिनी पिछले 5 सालों से खुशहाल विवाहित जीवन (Married Life) जी रही हैं. रागिनी और गगन के प्यार की निशानी उत्सव 4 साल का है. आजकल वे कुछ बुझीबुझी लगती हैं. इस का कारण है उन की उदासीन बैडरूम लाइफ (Bedroom Life). दिन भर रागिनी घर के हर छोटेबड़े काम को मैनेज करने में बिजी रहती हैं. दोपहर से रात तक उत्सव की देखरेख में अलर्ट रहती हैं. उत्सव को सुलाने के बाद अपने बैड पर जाने से परहेज करती हुई वे उत्सव के कमरे में उस के साथ ही सो जाती हैं. इस का कारण पता चला कि हड़बड़ी वाली रोजाना की सैक्स लाइफ (Sex Life) जो रागिनी और गगन दोनों का मूड औफ कर तनाव का कारण बनती है.

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10. सिर्फ दम दिखाने के लिए नहीं होती सुहागरात!Sex tips

इस रात का इंतजार हर युवा को होता है. लेकिन अगर कहा जाए कि हर किशोर को भी होता है तो भी यह कुछ गलत नहीं होगा. क्योंकि मनोविद कहते हैं 15 साल की होने के बाद लड़की और 16 साल के बाद लड़के, इस सबके बारे में कल्पनाशील ढंग से सोचने लगते हैं. सोचे भी क्यों न, आखिर इस रात को ‘गोल्डेन नाइट’ जो कहते हैं.इस रात में दो अजनबी हमेशा हमेशा के लिए एक हो जाते हैं. दो जिस्म एक जान हो जाते हैं. इस एक रात में न कोई पर्दा होता है, न दीवार. बत्तियां बुझी होती हैं, सांसें उफन रही होती हैं, फिजा में जिस्मानी गंध होती है और धीमी सी मुस्कान लाती रहे. जब भी इसका जिक्र हो तो उम्र चाहे कोई भी हो चेहरे पर एक गुलाबी आभा खिल जाए.

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आप भी पा सकते हैं मल्टिपल और्गैज्म

आप इस सच को अच्छा भी कह सकती हैं और बुरा भी, क्योंकि इससे सेक्शुअल संबंधों में आपका दबदबा कम भी हो सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि हालांकि मल्टिपल और्गैज्म (एक से अधिक बार चरम पर पहुंचना) पाना महिलाओं की शारीरिक विशेषता है, लेकिन यदि पुरुष इसे पाने के लिए थोड़ी मशकक्त करें तो वे भी इसका आनंद ले सकते हैं. यह मानना कि पुरुष हर सत्र में केवल एक बार ही और्गैज्म का अनुभव करते हैं, मिथक है.

इस राज का खुलासा

पुरुषों के लिए मल्टिपल और्गैज्म कोई नई संकल्पना नहीं है, बल्कि यदि आप प्राचीन ताओइस्ट की तकनीकों में मल्टिपल और्गैज्म के राज़ का खुलासा किया गया है. ताओइस्ट मान्तक चिया की किताब दि मल्टी-ऑर्गैज़्मिक मैन: सेक्शुअल सीक्रेट्स एवरी मैन शुड नो के अनुसार,‘‘और्गैज्म और इजेकुलेशन (स्खलन)-जो दो अलग-अलग शारीरिक प्रक्रियाएं हैं, के बीच के अंतर को सीखकर पुरुष मल्टिपल और्गैज्म पा सकते हैं.’’

होती है योग्यता

स्टेट यूनिवर्सिटी औफ न्यूयौर्क के एम ई डन और जेई फ्रॉस्ट द्वारा वर्ष 1979 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, पुरुषों में मल्टिपल और्गैज़्म पाने की योग्यता होती है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक मान्यता के अनुसार एक स्वस्थ पुरुष में और्गैज्म के दो चरण होते हैं-और्गैज्म के बाद तुरंत स्खलन और फिर थोड़ा समय, जो सामान्य होने में लगता है. पर अपने शोध के दौरान डन और फ्रॉस्ट ने पाया कि एक नॉन-इजैकुलेटरी और्गैज्म भी होता है, जो इजैकुलेटरी और्गैज्म के पहले या बाद में भी आ सकता है. और इस तरह के कई और्गैज्म आ सकते हैं. ‘‘अध्ययनों से पता चलता है कि मास्टबेशन के दौरान युवकों को कई ऑगैज़्मिक पीक्स का अनुभव होता है, खासतौर पर इजैकुलेशन से ठीक पहले,’’ यह कहना है डॉ फेलिस डनास का, जो क्लीनिकल चायनीज मेडिसिन के विशेषज्ञ हैं.

इस कला को अर्जित किया जा सकता है

पुरुषों के लिए मल्टिपल और्गैज्म नाबिल्कुल अपने सपनों की महिला को पाने जैसा होता है-इसके लिए लगन, संयम और तीव्र इच्छाशक्ति की जरूरत होती है. सेक्सोलॉजिस्ट डॉ प्रकाश कोठारी इसे अर्जित कर सकनेवाली कला मानते हैं. वे कहते हैं,‘‘हालांकि पुरुषों में मल्टिपल और्गैज्म पाने की स्वाभाविक विशेषता नहीं होती, लेकिन सही तकनीक को सीख कर वे इसका आनंद उठा सकते हैं.’’

आपकी सेक्स लाइफ बिगाड़ रहा है स्मार्टफोन

आजकल शायद ही कोई घर ऐसा होगा जिसमें स्मार्टफोन ना हो. इतना ही नहीं,  लोगों का ज्यादातर समय स्मार्टफोन पर ही बीतता है, लेकिन शायद आप में से कम लोग जानते हैं कि आजकल विवाहित पुरुषों को संभोग से ज्यादा स्मार्टफोन भा रहा है और वे फोन पर ज्यादा समय बिताते हैं. यह बात एक ताजा सर्वे में सामने आई है.

इस सर्वेक्षण में साफ-साफ कहा गया है कि आजकल पुरुषों को अपनी पत्नी से ज्यादा गैजेट्स रास आ रहे हैं. यह शोध कंडोम बनाने वाली मशहूर कंपनी ड्यूरेक्स ने कराया था और इसे ब्रिटेन में कराया गया है, जिसमें 40 प्रतिशत पत्नियों ने कहा कि रात को उनके पति अपना समय अपने स्मार्टफोन को दे देते हैं जो कि उन्हें देना चाहिए जिसके कारण उन्हें सेक्स में बाधा उत्पन्न होती है.

इस शोध में 30 प्रतिशत दम्पत्तियों ने माना कि अक्सर प्रेम के क्षणों में स्मार्टफोन बाधा बन जाता है और 30 प्रतिशत पत्नियों ने कहा कि जब सेक्स के वक्त फोन और उनमें से उनके पति को किसी एक को चुनना होता है तो उनके पति स्मार्ट फोन को चुनते हैं. उनका कहना होता है कि फोन पर लोगों को उत्तर देना सेक्स से ज्यादा जरूरी है.

शोध में यह भी खुलासा हुआ कि एक चौथाई जोड़े सेक्स के दौरान गैजेट्स का उपयोग यौन क्रिया को फिल्माने के लिए करते हैं, जबकि 40 फीसदी लोग तस्वीरें क्लिक करते हैं, हालांकि शोध में साफ कहा गया है कि पति-पत्नी को बेडरूम में गैजेट्स नहीं ले जाना चाहिए. कभी-कभी इस तरह के प्रयोग घर में अप्रिय विवाद को जन्म देने के लिए पर्याप्त होते हैं.

सेक्स का डबल मजा लेना चाहते हैं तो आज ही आजमाएं ‘डर्टी टौकिंग’

यों तो भारतीय समाज का एक बड़ा तबका सेक्स पर खुल कर बात नहीं पसंद करता व सेक्स आनंद की चीज है, यह तो पता होता है पर सिर्फ रात के अंधेरे में ही. कमरे की बत्तियों को बुझा कर सेक्स का लुत्फ उठाने वालों के लिए यह भले ही एक सामान्य प्रक्रिया लगती हो, पर विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्स में नए नए प्रयोग शारीरिक सुख के साथ साथ मानसिक खुशी भी देती है.

लंबे सेक्स लाइफ के दौरान उब गए हों, कुछ नयापन चाहते हों, सेक्स संबंध के दौरान चुहूलबाजी कर उसे और भी मजेदार बनाना चाहते हों, तो डर्टी टौकिंग विद सेक्स संबंधों में गरमाहट ला देगी.

क्या है डर्टी टौकिंग

सेक्स के दौरान डर्टी टौकिंग न तो गाली है न ही ऐसी कोई बात कहनी होती है, जो सेक्स पार्टनर को बुरी लगे. सेक्स में डर्टी टौकिंग सेक्स क्रिया के दौरान साथी के अंगों को निहारना, सहलाना, हलकी छेड़छाड़ व खुल कर बातचीत करनी होती है.

कैसे बनाएं मजेदार

अगर आप को अपने प्यार भरे शब्दों के बाण से साथी को घायल करने में थोङी भी महारत हासिल है, तो डर्टी टौकिंग का कुछ इस तरह अंदाज गुदगुदी का एहसास कराएगी-

* सेक्स के दौरान कमरे की बत्तियों को जलने दें. संभव हो तो रंगीन बल्व जलाएं.

* हलका म्यूजिक चला दें. इस से मदहोशी का आलम बना रहेगा.

* एकदूसरे के अंगों को अपलक निहारें और उन की तारीफ करें.

* सेक्स के दौरान बातचीत उस पल को और हसीन बनाता है. आप चाहें तो तेज स्वर में भी बातचीत कर सकते हैं.

* अंगों का खुल कर नाम लें और बताएं कि वे आप को कितने पसंद हैं. सेक्स पार्टनर से भी ऐसा ही करने को कहें.

* इस दौरान सेक्स पार्टनर को अपनी आंखें खुली रखने के लिए बोलें.

* किचन में, बाथरूम में, बाथटब में बनाए सेक्स संबंधों को याद करें और खूब हंसें.

* कंडोम्स को ले कर भी खुल कर बात करें कि आप के सेक्स पार्टनर को कौन सी पसंद हैं.

* मार्केट में कई फ्लेवर्स व रंगों के कंडोम्स उपलब्ध हैं. उन पर खुल कर बात करिए और उन्हें आजमाइए भी.

यकीन मानिए, सेक्स की उपरोक्त क्रियाएं तनाव व भागदौड़ भरी जिंदगी से अलग ही सुकून देंगी और न सिर्फ रोमांचक लगेंगी, रिश्तों में नई जान व ताजगी का एहसास भी कराएंगी. याद रखिए कि सेक्स कुदरत का दिया एक अनमोल तोहफा है.

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