मैं अपने दोस्त की बहन से प्यार करता हूं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 21 साल का लड़का हूं. मेरी स्टडीज पूरी हो गई है, मैं अपने परिवार को भी बहुत चाहता हूं अब जाकर मुझे एक लड़की पसंद आई है जिससे मैं प्यार करता हूं. लेकिन प्रौब्लम ये है कि वो मेरी दोस्त की बहन है. मैं अपने दोस्त की बहन को पसंद करता हूं और शादी भी करना चाहता हूं. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

अगर आपको अपनी बहन की दोस्त अच्छी लगती है और आप उससे प्यार करते है तो ये अच्छी बात है. इसमे कोई बुराई नहीं है. आप अपने दोस्त से रिश्ता ओर मजूबत बना सकते है. साथ ही, उसके घरवालों का दिल जीत लें. इससे आपकी दोस्ती रिश्तेदारी में बदलेंगी. लेकिन, इसके लिए आपको कुछ बातें फोलो करने की जरूरत है.

पहले तो आप अपने दोस्त से इस बारे में बताएं और उनके विचारों को जानें की वो कैसा सोचते है इस बारे में. अगर वे इस बारें में पौजीटिव सोच रखते है तो आप इस बात को आगे बढ़ा सकते है. आप अपने दोस्त के साथ ईमानदारी से बनं रहे. सिर्फ ईमानदारी से बात करें. ताकि भविष्य में कोई गलतफहमी न हो.

इसके अलावा आप उसके इमोशन का भी ध्यान रखे. उसके इमोशनस का मजाक न बनाएं. यह जांचे कि वह स्वभाव में अच्छी है और लंबे वक्त तक आपका साथ देंगी. इस बात का भी पता लगाएं कि उसका कोई दोस्त, भाई, पिता आप पर भारी न पड़ जाएं. अगर प्यार को रिश्तेदारी में बदलना चाहते है तो इस बात पर भी गौर करें कि फाइनेंशियली स्ट्रौंग बनों.

अक्सर दोस्त की बहन आपको भी अपने भाई की तरह मानने लगती हो या अगर आपको सहेली के भाई से प्यार है, तो हो सकता है कि वह आपको बहन की तरह ट्रीट करती हो. इसलिए आपको अपने दिल की बात बतानी होंगी. ताकि दोस्त को बाद में पता चले तो वह ये न समझें कि आपने उन्हे धोखा दिया है. इसलिए समय रहते आपको अपनी फिलीग्स शेयर करनी है.

इस तरह के रिलेशनशिप में सबसे जरूरी है कि दोस्ती के बीच प्यार न आए. इसके साथ ही प्यार और दोस्ती के बीच तालमेल बैठा कर चलें.

6 टिप्स: जानें सेक्स के दौरान महिलाओं को कौन सी चीज बना देती है दीवाना

महिलाओं का सेक्स आनंद एक ऐसा विषय है जिस पर अक्सर काफी अध्ययन और सर्वे किया जाता रहा है. लेकिन अब तक की गई रिसर्च सामान्य ही रही है. जैसे कि यह एक जाना माना तथ्य है कि फोरप्ले और विविधता लड़कियों के चरम के लिए अच्छे हैं.

  1. रसभरी जानकारियां

किन्तु विशिष्ट जानकारी का क्या? जब बात महिलाओं को एक विशेष तरीके से स्पर्श करने की आती है, तो शायद अब तक की गई शोध कोई खास मददगार साबित नही हो पाती. उंगली को असल में कहां घुमाना है, किस तरह से घुमाना है और कितना स्पर्श जरूरी है.

महिलाओं के ओर्गास्म और सेक्स आनंद की रसभरी और विशिष्ट जानकारी पाने के लिए प्रतिबद्ध शोधकर्ता समूह ने अलग अलग उम्र की 1000 महिलाओं पर एक सर्वे किया. यह सर्वे ओ एम जी व्हाई रिसर्च कंपनी की प्लेजर रिपोर्ट सर्वे का हिस्सा था. यह संस्थान महिला सेक्स आनंद से जुड़े तथ्यों पर वेबसाइट चलाता है.

गोपनीय रखे गए सर्वे में महिलाओं से शोधकर्ताओं ने इस तरह के प्रश्न पूछे, जैसे कि: कितना दबाव पर्याप्त लगता है? आपके साथी के कौनसे स्पर्श ने आपको सबसे ज़्यादा आनंद दिया? कुछ ओर्गास्म दूसरे ओर्गास्म से बेहतर क्यों लगते हैं? आपको एक से अधिक ओर्गास्म एक साथ होते हैं?

2. एहसास को लाजवाब क्या बनाता है?

रिसर्चकर्ताओं ने जाना कि सहवास के दौरान होने वाले ओर्गास्म में भगशिश्न (क्लाइटोरिस) की अहम भूमिका है. करीब 36 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि इसके बिना उन्हें ओर्गास्म नही होता और 36 प्रतिशत ने कहा कि क्लाइटोरिस उत्तेजन उनके ओर्गास्म को बेहतर बना देता है.

बेहतर ओर्गास्म की बात की जाए तो महिलाओं ने माना कि ओर्गास्म के आनंद का स्तर अलग अलग होता है. तो एक ओर्गास्म को दूसरे से बेहतर कैसे किया जा सकता है? 75 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उत्तेजना यदि धीरे धीरे बने, तो उसका अंत फल ज्यादा मीठा महसूस होता है. करीब आधी महिलाओं का ये भी कहना था कि अगर उनके साथी के प्रति उनका भावनात्मक जुड़ाव हो तो भी ओर्गास्म बेहतर महसूस होता है. एक दिलचस्प तथ्य ये था कि अधिकतर महिलाओं ने कहा कि सेक्स के देर तक चलने का ओर्गास्म के बेहतर होने से कोई संबंध नहीं है.

3. सही स्पर्श

जननांग के स्पर्श  के मामले में सही जगह और तरीका काफी हद तक महिला विशेष की पसंद पर ही निर्भर था. जैसे कि करीब हर 3 में से 2 महिलाओं ने कहा कि क्लाइटोरिस पर सीधा स्पर्श उन्हें पसंद था जबकि 45 प्रतिशत को सीधा स्पर्श नापसन्द था.

अधिकतर महिलाओं को हल्का, कम दबाव का स्पर्श पसंद था. रिसर्चकर्ताओं ने यह भी पाया कि केवल 10 प्रतिशत महिलाओं को अधिक दबाव से अच्छा महसूस होता है.

4. गति की महत्ता

गति का महत्व भी इस रिसर्च में समझाया गया. 60 प्रतिशत महिलाओं को ऊपर नीचे की लय पसंद थी, जबकि आधी से ज़्यादा को गोल गति. 20-30 प्रतिशत महिलाओं को एक तरफ़ से दूसरी तरफ़ की गति और दबाव अधिक सुहाता था.

कुछ तकनीक महिलाओं को बेसुध कर देने में सक्षम है, शोधकर्ताओं ने जाना. एक विशेष लय में स्पर्श, गोलाई में छुअन और फिर गतियों और लय का मिश्रण- ये सभी अच्छे तरीके हैं. तीव्रता में भी विविधता लाना आवश्यक है.

5. आनंद वृद्धि

ओर्गास्म को विलम्बित करना सेक्स के आनंद को दोगुना करने में सक्षम हो सकता है. आखिर ये कैसे किया जाता है? अध्ययन में भाग लेने वाली महिलाओं ने बताया कि उत्तेजक अंगों पर स्पर्श रोक कर कुछ पल बाद फिर से कम तीव्र लय से शुरुआत करने से ऐसा किया जा सकता है.

करीब आधी महिलाओं को बहु ओर्गास्म हो चुके थे. 53 प्रतिशत के अनुसार ओर्गास्म के बाद फिर से शुरुआत से शुरू करना बेहतर है, 33 प्रतिशत ने माना कि ओर्गास्म के बाद उत्तेजन वहीं से जारी बेहतर है और इसी संख्या में महिलाओं ने कहा कि ओर्गास्म के बाद कुछ अलग तरह के उत्तेजन की आवश्यकता होती है.

6. संवाद कुंजी है

ये तो स्पष्ट है कि महिलाओं के सेक्स आनंद में काफी विभिन्नताएं हैं. शोधकर्ता मानते हैं कि धीरे, तेज, ऊपर नीचे, हल्का दबाव, ज़्यादा दबाव, हर महिला की व्यक्तिगत पसंद नापसंद हो सकती है.

इसलिए समझने वाली बात ये है कि अंदाजा लगाने की बजाय महिला की पसंद जानने के लिए दोनों साथियों के बीच बेहतर संवाद हो. बेहतर आनंद के लिए चार बातें पता लगाना जरूरी है – स्थान, दबाव, लय और गति.

5 टिप्स: सिंगल सेक्स को लेकर युवतियों के बदलते विचार

परिवर्तन के इस दौर में न सिर्फ युवतियों के विचार बदले हैं बल्कि उस से कई कदम आगे वे दैहिक स्वतंत्रता की बोल्ड परिभाषा को नए कलेवर में गढ़ती और बुनती नजर आ रही हैं.

1. सेक्सुअलल बोल्डनैस का बोलबाला

आज युवतियों ने सेक्स को अपने बोल्ड व बिंदास अंदाज से बदल दिया है. युवतियां न केवल सोशल फोरम में व सार्वजनिक जगहों पर सेक्स जैसे बोल्ड इश्यू को सरेआम उठा रही हैं बल्कि उस के पक्ष में अपना मजबूत तर्क भी पेश कर रही हैं. वे कैरियर ओरिऐंटिड होने के साथसाथ सेक्स ओरिऐंटिड भी हैं. सेक्स के टैबू होने के मिथक को वे काफी पीछे छोड़ चुकी हैं. वे सेक्स को बुराई नहीं समझतीं बल्कि उस का भरपूर लुत्फ उठाना चाहती हैं.

2. सिंगल सेक्स की पैरोकार आज की युवतियां

कुछ समय पहले तक युवतियों के अकेले रहने या सफर करने पर सवाल उठाए जाते थे, पर जवान होती युवापीढ़ी ने वर्षों से चली आ रही नैतिक व सेक्स से जुड़े सामाजिक मूल्यों की अपनी तरह से व्याख्या की है. सहशिक्षा व बौद्धिक विकास ने इसे बदलने में काफी सहायता की है. शिक्षित स्वतंत्र कम्युनिटी के इस बोल्ड अंदाज ने आम मध्यवर्गीय सोच में भी अपनी पैठ बना ली है. निम्न वर्गों में तो पहले से ही स्वतंत्रता थी. बगावती सुरों ने आजादी पाने की राह आसान कर दी है. युवतियों की आर्थिक स्वतंत्रता ने भी इस में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.  सिंगल रहने वाली अधिकतर युवतियां इस सेक्सुअलल फ्रीडम का बेबाकी से फायदा उठाती नजर आती हैं. वे सेक्स को ऐंजौय करने में हिचकिचाती नहीं हैं. यह भी शरीर की एक आवश्यकता है.

3. सेफ सेक्स, सेफ लाइफ का फंडा

आधी आबादी का एक बड़ा वर्ग सेफ सेक्स को तरजीह देता है. सेक्स अब इंटरकोर्स का माध्यम मात्र नहीं बल्कि सुरक्षित व आनंददाई बन गया है. युवतियां अलर्ट हैं, जागरूक हैं और अपनी सेहत को ले कर सजग भी हैं. सेक्सुअलल इंटरकोर्स के दौरान वे दुनियाभर के उपाय जैसे पिल्स, कंडोम आदि का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर रही हैं. सिंगल रहने वाली युवतियां अब सेक्स का भी मजा ले रही हैं और फिटनैस भी बरकरार रख रही हैं.

4. सिंगल सेक्स के फायदे

वर्जनाएं अब टूट रही हैं. पढ़ाई, नौकरी या कामकाज के सिलसिले में युवतियां अपनी जद की सीमाएं लांघ रही हैं. ऐसे में बेरोकटोक वाली एकाकी जिंदगी उन्हें ज्यादा रास आ रही है. माना कि आम भारतीय परिवारों में विवाहपूर्व सेक्स को अभी भी वर्जित समझा जाता है और इसे चोरीछिपे ही अंजाम दिया जाता है, लेकिन यही रोकटोक युवाओं को सेक्स के और अधिक करीब खींच कर ला रही है. वैसे तो सिंगल सेक्स अपनेआप में एक फ्रीडम का एहसास कराता है, पर इस के कुछ फायदे भी हैं जैसे :

  •    इस से बोल्डनैस का एहसास होता है.
  •    यह कथित वर्जनाओं को तोड़ने का चरम एहसास कराता है.

माना कि सिंगल सेक्स आप को रियल सेक्सुअलल फन दे सकता है, पर अपनी सेक्सुअलल प्राइवेसी को ले कर सतर्क भी रहें. सेक्सुअलल फ्रीडम की भी लिमिट तय करें तभी आप इस के आनंद के चरम पर पहुंच सकती हैं और इस के बिंदास अंदाज में रंग सकती हैं. सेक्सुअलल इंडिपैंडैंसी जहां आप को बेबाक व बोल्ड बनाती है वहीं मोरल पुलिसिंग का शिकार भी इसलिए फन के साथ केयर का भी खयाल रखें.

5. सिंगल सेक्स के नुकसान

भले ही सिंगल रहने वाली युवतियां सेक्स को ले कर मुखरित हों पर इस के अपने कुछ नुकसान भी हैं:

  •   मल्टी पार्टनर्स से संक्रमण के खतरे बढ़ जाते हैं.
  •  चीटिंग का खतरा हमेशा बना रहता है.
  •  लंबे समय तक ऐसी फ्रीडम आप को फिजिकल प्रौब्लम्स भी दे सकती है.

उम्र बढ़ने पर मर्दों को सताती हैं ये 4 सैक्स प्रौब्लम

सैक्स लाइफ का एक खूबसूरत हिस्सा है, जो आप को दिमागी और जिस्मानी तौर पर फिट रखता है. मर्द हो या औरत सब के लिए एक उम्र में सैक्स जरूरी हो जाता है. पर ज्यादातर मर्दों में देखा गया है कि एक उम्र के बाद उन्हें कई तरह की सैक्स समस्याओं को झेलना पढ़ता है, जबकि हर मर्द चाहता है कि उस की सैक्स लाइफ रोमांस से भरी हो. वजह, हार्मोनल के हिसाब से भी सैक्स की चाह बढ़ जाती है.

 

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जैसेजैसे उम्र बढ़ती है, वैसेवैसे कई तरह की टैंशन भी मर्दों को होने लगती हैं. उन पर बढ़ती उम्र के साथसाथ कई दूसरी जिम्मेदारियां भी आ जाती हैं, जिस की वजह से उन्हें कई तरह की सैक्स समस्याएं भी होने लगती हैं.

आज हम उन्हीं सैक्स समस्याओं के बारे में आप को जानकारी देंगे, जो मर्दों को बढ़ती उम्र के साथ परेशान करती हैं.

  1. इरैक्शन, लेकिन सैक्स नहीं

जब किसी किसी मर्द की उम्र 20 साल से 45 साल तक होती, है तो वह आसानी से इरैक्शन (अंग में तनाव) के बाद सैक्स कर पाता है. लेकिन जब उम्र बढ़ती जाती है तो बहुत से मर्दों को एक ऐसी समस्या झेलनी पड़ती है, जिस में उन्हें इरैक्शन तो होता है लेकिन वे उस हालत में सही से सैक्स नहीं कर पाते हैं.

ऐसे मर्दों को सैक्स करते समय थोड़ीबहुत असुविधा झेलनी पड़ती है और ऐसे में उन्हें दर्द का भी सामना करना पड़ता है. ज्यादातर मामलों में ऐसा तब होता है जब वे ज्यादा टैंशन लेते हैं. जो मर्द डिप्रैशन में रहने लगता है, उसे भी इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

अगर आप की उम्र ज्यादा है और आप को ऐसी समस्या हो रही है, तो आप कोशिश करें कि आप कुछ ऐक्सरसाइज करें. पर अगर यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है, तो आप किसी डाक्टर से भी सलाह ले सकते हैं.

2. जल्दी डिस्चार्ज होना

बढ़ती उम्र के साथ बहुत से मर्दों को सैक्स संबंधित ऐसी समस्या होने लगती है, जिस में वे जल्दी पस्त होने लगते हैं. जब भी कोई मर्द सैक्स करता है और वह शुरुआत के 2 से 3 मिनट के अंदर ही अगर पस्त हो जाता है.

3. बारबार सैक्स करने का मन

जब मर्दों की उम्र 50 से 60 साल की हो जाती है, तो हो सकता है कि उन्हें बारबार सैक्स करने का मन करता है. ऐसा हर किसी मर्द के साथ नहीं होता, लेकिन बहुत से लोगों के साथ ऐसा हो जाता है कि वे बढ़ती उम्र के साथ सैक्स करना ज्यादा पसंद करते हैं.

अगर आप को बारबार सैक्स करने का मन करता है तो आप अपने पार्टनर से इस बारे में बातचीत कर सकते हैं और दोनों मिल कर फैसला ले सकते हैं कि आप को दिन में कब और कितनी बार सैक्स करना है.

4. प्राइवेट पार्ट में जलन

बढ़ती उम्र के साथ मर्दों में एक समस्या यह भी हो जाती है कि जब वे सैक्स संबंध बनाते हैं तो उस के बाद उन के अंग में जलन होने लग जाती है. ऐसा हर किसी के साथ तो नहीं होता है, लेकिन बहुत से लोगों को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ज्यादातर मामलों में ऐसा तब होता है, जब सैक्स करते हुए लुब्रिकेशन की कमी पड़ जाती है. इस के लिए बाजार में आप को कई तरह के लुब्रिकेंट भी मिल जाएंगे.

कुछ समय पहले मेरे पेशाब के साथसाथ धातु गिरती थी, इस बात से मैं बहुत तनाव में हूं. सलाह दें?

सवाल-

मेरी उम्र 25 साल है. कुछ समय पहले मेरे अंग से पेशाब के साथसाथ धातु गिरती थी. इस सिलसिले में एक झोलाछाप डाक्टर ने मुझ से कहा था कि तुम गुप्त रोग से पीडि़त हो. इस से तुम्हारी शादी पर बुरा असर पड़ेगा. इस बात से मैं बहुत तनाव में हूं. सलाह दें?

जवाब-

धातु एक ऐसा लक्षण है जो आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृतियों में पाया जाता है. इस में मरीजों को समय से पहले पस्त होना या नामर्दी की शिकायत होती है और उन्हें लगता है कि उन के पेशाब के साथ वीर्य भी निकलता है.

इस का इलाज दवाओं से किया जाता है और साथ ही, गलत धारणाओं को दूर करने में मनोवैज्ञानिक सलाह भी कारगर साबित होती है.

मेरी एक फेसबुक फ्रैंड से गहरी दोस्ती हो गई है और मैं उस से बात किए बिना नहीं रह सकती, मैं क्या करूं?

सवाल-

32 वर्षीय विवाहित महिला हूं. 2 बच्चों की मां हूं. 11 साल हो गए शादी को. शुरुआत में सब ठीक नहीं रहा. सास बहुत प्रताडि़त करती थीं. झगड़े में पति ने कई बार हाथ भी उठाया. इन सब से अलग मेरी एक फेसबुक फ्रैंड से गहरी दोस्ती हो गई. हम लोग अलगअलग शहर में रहते हैं, बावजूद उस के मेरी लगातार चैटिंग और बातचीत होती रहती है.

उस से मेरी एक बार भी मुलाकात नहीं हुई पर हम आपस में बगैर बातचीत किए नहीं रह सकते. उस को कई बार ब्लौक भी किया पर फिर पहले जैसी स्थिति हो जाती है. कभीकभी मन कचोटता है कि पति से चीटिंग क्यों कर रही हूं? बताएं मैं क्या करूं?

जवाब-

आप किसी तरह के गिल्ट के चक्कर में न रहें. आप कोई गलत काम नहीं कर रही हैं. जब तक आप को मानसिक सुख घर में नहीं मिल रहा आप सुकून पाने के लिए फेसबुक फ्रैंड का सहारा ले रही हैं चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, गलत नहीं है. नैतिकता के चक्कर में पड़ कर अपना मन खराब न करें. हां, एकदूसरे से मिलना हो तो उस से पहले 2 बार सोच लें कि जोखिम लेने लायक है या नहीं.

KISS को न करें मिस, होगें ये 9 फायदे

भारत में किस सिर्फ रील लाइफ में ही देखने को मिलता है, रियल लाइफ में नहीं. इस किस सीन को परदे पर देख कर हम खुश तो होते हैं, लेकिन जब इस पर अमल की बात आती है तो खुलेपन की बात तो छोडि़ए, बैडरूम में भी ज्यादातर दंपती एकदूसरे को सपोर्ट नहीं करते हैं. जबकि किस पर हुए कई सर्वे बता चुके हैं कि इस से कोई नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होता है.

कई महिलाएं और पुरुष अकसर यह बहाने बनाते देखे जा सकते हैं कि सुनो न, आज मन नहीं है बहुत थक गया हूं/गई हूं. कल करेंगे प्लीज. जब आप अपने पार्टनर के साथ चंद प्यार भरे लमहे गुजारना चाहें और ऐसे में आप का पार्टनर कल कह कर बात टाल दे तो आप को बुरा लगना स्वाभाविक है. लेकिन क्या आप ने कभी यह सोचा है कि ऐसा कह कर आप अपना रिश्ता तो खराब नहीं कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो सावधान हो जाएं. बहुत से ऐसे शादीशुदा जोड़े हैं, जो एकदूसरे की फीलिंग्स को इसी तरह हर्ट कर अपना रिश्ता बिगाड़ लेते हैं. सभी को प्यार को ऐक्सप्रैस करने का हक है. ऐसे में पार्टनर जब इस तरह से संबंध को रोकेगाटोकेगा तो इस से न सिर्फ आप का रिश्ता प्रभावित होगा वरन मन में भी खटास आएगी. इतना ही नहीं, ऐसा करना आप के शारीरिक व मानसिक संतुलन पर भी बुरा असर डालेगा. आप को मालूम होना चाहिए कि किस थेरैपी दे कर आप का पार्टनर पल भर में आप की सारी थकान को गायब कर सकता है. इसलिए इसे मना करने से पहले थोड़ा सोच लें. आइए, अब जानें किस की खूबियों को:

रिश्ता मजबूत बनाता है किस:

यह तो हम सभी जानते हैं कि लिपलौक करने से रिश्ता अधिक मजबूत बनता है. एकदूसरे के साथ लिपलौक करने से एकदूसरे के प्रति ऐक्स्ट्रा प्यार का एहसास मिलता है. ऐसा लगता है कि मेरा पार्टनर मुझ से बेहद प्यार करता है. किस करने से औक्सीटौसिन हारमोन बनता है, जो रिश्तों को ज्यादा मजबूत बनाता है.

सैक्सुअल प्लैजर को बढ़ाता है:

सैक्स करने से जहां दिनभर की थकान या किसी भी तरह का तनाव तो कम होता ही है, आप का रिश्ता भी ज्यादा स्ट्रौंग बनता है. लेकिन किसी भी किस के बिना आप की सैक्स ड्राइव अधूरी रहती है. सैक्स से पहले किस आप का सैक्सुअल प्लैजर बढ़ाता है. आसान शब्दों में कहें तो सैक्स करने से पहले अपने पार्टनर के साथ एक किस सैशन जरूर करें. ऐसा करना आप के प्लैजर को न सिर्फ बढ़ावा देगा, बल्कि आप के पार्टनर को भी पूरी तरह से संतुष्ट करेगा.

स्पिट स्वैपिंग भगाए बीमारी:

चुंबन करते समय जब तक स्पिट स्वैपिंग न हो तब तक किस करना बेमानी सा है. किस या लिपलौक करते समय अपने पार्टनर के साथ बेझिझक हो पूरा मजा लें और स्पिट यानी थूक आने पर पोंछें नहीं, बल्कि उस की स्वैपिंग करें, क्योंकि यह कई संक्रमणों को दूर करता है. सैक्स के दौरान किए जाने वाले किस से इम्यूनिटी भी बढ़ती है.

मिलती हैं जहां की खुशियां:

एकदूसरे को बारबार किस करने से पार्टनर की आप के प्रति सैक्स के प्रति इच्छा कितनी है, का भी पता चलता है. ज्यादातर केसेज में अधिकतर महिलाएं सैक्स के प्रति बड़ी रिजर्व रहती हैं. वे पार्टनर क्या सोचेगा सोच कर सैक्स में खुल कर सपोर्ट नहीं कर पातीं. ऐसा करना न सिर्फ आप को सैक्स के प्रति रूखा दिखाएगा, बल्कि आप के पार्टनर को भी जिस्मानी तौर पर संतुष्ट नहीं कराएगा. किस करते वक्त एंडोफिंस नाम का तत्त्व निकलता है जो आप को खुश रखने में मदद करता है. अगर आप टैंशन में हैं या गहन सोचविचार में तो पार्टनर को किस करना आप के लिए दवा का काम करेगा.

दवा का काम करे किसिंग सैशन:

हौट किसिंग सैशन के दौरान आप का शरीर एक ऐड्रेनलीन हारमोन रिलीज करता है, जो किसी भी तरह के दर्द को कम करने में मददगार होता है. अब दर्द को कम करने के लिए भी आप यह सैशन कई बार ट्राई कर सकते हैं. अगर आप के सिर में दर्द है तो लिपलौक जरूर ट्राई करें और इस का असर देखें और फिर इस का कोई साइड इफैक्ट भी नहीं होता है.

तनाव भगाए किस:

दिन के ढलतेढलते इंसान भी काफी थकाथका सा महसूस करने लगता है, इसलिए सिर्फ अपने काम का दबाव या अपने हारमोनल बदलावों को ब्लेम करना गलत होगा. थके होने पर आप घर जा कर बस अपने पार्टनर के साथ एक किस थेरैपी लीजिए. यकीन मानिए, आप की थकान पलक झपकते छूमंतर हो जाएगी और आप फ्रैश महसूस करेंगे. दरअसल, किसिंग करने से कार्टिसोल नामक हारमोन लैवल कम होता है और आप के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है. एंडोक्राइन सिस्टम से दिमाग भी स्वस्थ रहता है.

ऐक्स्ट्रा कैलोरीज करता है कम:

अपनी हैल्थ के प्रति सचेत लोग अपनी अति कैलोरी को कम करने के लिए या तो ट्रेडमिल पर रनिंग करते हैं या फिर डाइट पार्ट फौलो करते हैं. अगर आप कभी जिम जाना भूल जाएं या पार्टी का मौका देख डाइट चार्ट को एक दिन के लिए फौलो न कर पाएं तब भी आप अपने पार्टनर के साथ किसिंग सैशन कर के अपनी कैलोरी बर्न कर सकते हैं. जी हां, जितनी कैलोरी आप की जिम सैशन में कम नहीं होगी उतनी आप की किसिंग सैशन में हो जाएगी. इतना ही नहीं, कैलोरी बर्न करने के अलावा किस करने से आप के चेहरे की भी ऐक्सरसाइज होती है. किस आप की स्किन मसल्स को भी टाइट करता है, जिस से आप दिखेंगे जवांजवां.

ऐलर्जी से छुटकारा:

किस न सिर्फ तनावग्रस्त लोगों को सहज करता है, बल्कि कई बार ऐलर्जी जैसे खुजली आदि होने को भी दूर करता है.

डैंटिस्ट को भी रखे दूर:

किस मुंह, दांतों और मसूड़ों की बीमारी से भी आप को दूर रखता है. मुंह में लार कम बने तो भी किसिंग फायदेमंद हो सकता है.

मेरे कौलगर्ल बनने की कहानी…

वो शाम बड़ी उलझन भरी थी. उस ने मेरी ओर देखा. मेरे हाथ को अपने हाथ में ले कर बोला, ”बेहद खूबसूरत हो तुम. क्या अभी तक शादी नहीं की है तुम ने?
फिर मुझे पीछे से पकड़ कर बेतहाशा चूमने लगा. मुझे याद है मिहिर (पति) ऐसा करता था तो मेरे तनबदन में एक लहर सी दौड़ जाती थी. मगर उस दिन मुझे कुछ नहीं हो रहा था. उस ने मुझ से धीरेधीरे कपड़े उतारने को कहा और वह कांच की डिजाइनर गिलास में बियर डालते हुए मुझे अपलक निहारता रहा. वह मुझे भी बियर पिलाना चाहता था.
शाम के 7 बज गए थे और मुझे 9 बजे तक घर पहुंचने की जल्दी थी. मैं जानती हूं, पुरुष को उत्तेजित करो तो वे जल्दी ही चरम पर पहुंच जाते हैं. मैं यही सोच कर उस से लिपट गई तो वह जल्दी ही बैड पर जाने को आतुर हो उठा. शारीरिक भूख शांत होने के बाद वह काफी संतुष्ट और खुश नजर आ रहा था.
उस ने मेरे हाथ में 500-500 के 20 नोट हाथ में रखे तो मैं ने उसे धीरे से पर्स में सरका दिए. मुसकराई और ‘बाय’ कह कर विदा हो ली. मुझे घर जल्दी पहुंचना था ताकि बेटे को संभाल सकूं.

सुंदरता पर मोहित थे सब

मुझे याद है जब मिहिर से मेरी शादी हुई थी तो वह मेरी सुंदरता पर मोहित रहता था. जब मेरी शादी हुई थी तो तब मैं 21 साल की थी. बचपन में तुम बहुत खूबसूरत और अच्छी हो लोगों से सुनती तो बहुत खुश होती थी. पर मेरी सुंदरता ही मेरे राह की दुश्मन बन गई थी. 10वीं के बाद ही मेरी पढ़ाई घर वालों ने बंद करा दी थी. मांपिताजी बचपन में ही गुजर गए थे और जब तक नानानानी जीवित थे तब तक तो सब ठीक था पर उन के मरने के बाद मेरी सारी उम्मीदें खत्म हो गई थीं.
शादी के बाद लगा जिंदगी बदल जाएगी. लगा सब पटरी पर आ गया. प्यार करने वाला पति मिला, एक बेटा हुआ. पर मेरी यह खुशी भी ज्यादा दिनों तक नहीं रही. एक सड़क दुर्घटना में पति की असमय मौत ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया. बेटे को पालना और पढ़ाना मेरे लिए चुनौती बन गई तो 1-2 जगह नौकरी भी की. पर कम पढीलिखी होने की वजह से 7-8 हजार रुपए महीने से ज्यादा की नौकरी नहीं मिली.
इसी बीच मेरे संपर्क में 1-2 पुरुष आए भी. पर दोनों ने एकएक कर मुझे भोगा और शादी की बात पर भाग खड़े हुए. कोई भी बेटे सहित मुझे अपनाने को तैयार नहीं था.

एक दिन मैं घर के पास वाले पार्क में बैठी थी कि तभी एक युवती आई और मेरे बगल में बैठ गई. बातचीत शुरू हुई तो बाद में घर आनाजाना और दोस्ती गहरी हो गई.

…और फिर एक दिन

एक दिन उस ने मुझे जो बताया उस से मैं हैरान रह गई. वह मुझे कौलगर्ल बनने के लिए बोल रही थी. उस की कही बात मैं कैसे भूल सकती हूं, ”देखो, तुम मुझ से भी ज्यादा स्मार्ट हो, सुंदर हो. पढीलिखी नहीं हो. मगर तुम चाहो तो महीने में 60-70 हजार रुपए कमा सकती हो. इस से तुम्हारी जिंदगी बदल जाएगी. बेटे का भविष्य बना पाओगी. मुझे 2-4 दिन में बता देना. सोचसमझ लो, बाकी मुझ पर छोड़ दो.”
मेरे पास कोई चारा नहीं था. रिश्तेदारी मतलब की थी. पति के मरने के बाद सब धीरेधीरे कटते गए. जो हमदर्दी दिखाते वे इस बहाने मुझे भोगना चाहते थे.
बहुत सोचने के बाद मैं ने तय किया कि मुझे पैसे कमाने हैं. 60-70 हजार महीने के किस को काटते हैं? मुझे पता है कि इस कमाई के लिए अभी उम्र है. 40-42 के बाद फिर जिस्म के खरीदार कम हो जाते हैं.

शरीफों के साथ रंगीन रातें

अब उस युवती ने मुझे पहले तो अपने साथ ब्यूटी पार्लर ले गई फिर पहनावे में भी मुझे पूरी तरह बदल दी. सलवारकुरती की जगह अब आधुनिक कपड़े ने ले लिया था. मैं सप्ताह में लगभग 4-5 दिन ग्राहकों को अपना जिस्म बेचती हूं. हर बार के मुझे कम से कम 6-8 हजार और कभीकभी तो 10 हजार रुपए तक मिल जाते हैं. मैं तथाकथित शरीफ लोगों के साथ थ्री, फोर और फाइव स्टार होटल में होती हूं. मुफ्त में खाना मिलता है, गिफ्ट मिलते हैं और पैसे भी.
वह युवती भी अब मेरे साथ एक ही फ्लैट में रहती है. हम दोनों ही पिछले 3-4 साल से यह सब कर रहे हैं.
अब पैसे रहने की वजह से बेटे का दाखिला अच्छे स्कूल में करवा दिया है. उसे ट्यूशन देती हूं. पर दिल के अंदर एक हुक सी उठती है कभीकभी.

काश, मैं पढ़ीलिखी होती

मुझे पता है मैं क्या कर रही हूं. पर मुझे इस का मलाल नहीं है. पति के मरने के बाद दरदर की ठोकरें खाई थी, अब कम से कम पास में पैसे तो होते हैं, मन की कर तो सकती हूं, बेटे को उस की पसंद के खिलौने तो दे सकती हूं, मनपसंद खापी और पहन तो सकती हूं…
कभीकभी मन दुखी होता है तो छत को निहारते हुए सोचती हूं कि औरत का जीवन भी क्या है? क्या उस का पूरा जीवन ही संघर्ष के लिए बना है?
मुझे लगता है कि अगर मैं पढ़ीलिखी होती तो शायद ये दिन नहीं देखने पड़ते.
मैं जहां रहती हूं वहां किसी को पता नहीं मैं क्या करती हूं, कहां जाती हूं. शहरी जिंदगी में तो लोग वैसे भी मतलब तक नहीं रखना चाहते.

मैं क्या करूं

मैंं तो कहूंगी कि भारतीय परिवार में बेटों से ज्यादा बेटियों को पढ़ाना चाहिए, उन्हें शिक्षित बनाना चाहिए क्योंकि कब किस के साथ क्या घटित हो जाएगा यह कौन जानता है? अपनी नजरों में मैं एक कौलगर्ल हूं, जिसे देशी भाषा में वेश्या भी कहते हैं. पर मैं कर भी क्या सकती थी? अब मेरे पास 5-7 लाख रुपए इकट्ठे हो चुके हैं. मुझे सलाह दीजिए कि अब मुझे क्या करना चाहिए? इस जिंदगी ने पैसा तो दिया पर अब आजिज आ चुकी हूं. कल को बेटे को क्या जवाब दूंगी? कृपया उचित सलाह दें.

खास अंगों की साफसफाई, ध्यान रखें ये बातें

अब से तकरीबन 23 साल पहले जब दीपक कुशवाहा ने भोपाल के नजदीक बैरसिया कसबे में अपना जनरल स्टोर खोला था, तब दुकान में कहने भर को ही लेडीज आइटम हुआ करते थे, लेकिन दीपक की आधे से ज्यादा दुकान अब लेडीज आइटमों से भरी पड़ी है, जिन में सैनेटरी नैपकिन, हेयर रिमूवर, अंडरगारमैंट्स, क्रीम, पाउडर और तरहतरह के दूसरे आइटम ज्यादा हैं.

इस बदलाव की वजह बताते हुए दीपक कहते हैं, ‘‘शिक्षा और जागरूकता ज्यादा है, जो कसबाई और देहाती लड़कियों में मीडिया और इश्तिहारों के जरीए आई है.’’

कसबे के हाईस्कूल में दाखिले बढ़े, तो नएनए आइटमों की मांग आने लगी. फिर कालेज खुला तो लड़कियों की झिझक और दूर होने लगी. अब तो हालात ऐसे हैं कि लड़कियां खरीदारी में बिलकुल नहीं शरमाती हैं.

दीपक कुशवाहा की बातों पर गौर करें, तो कसबाई और देहाती लड़कियों में खूबसूरती और सेहत के प्रति जबरदस्त जागरूकता आई है और वे बाहरी के साथसाथ अंदरूनी साफसफाई की भी अहमियत समझने लगी हैं. इस बाबत उन्हें घरों से भी छूट मिली हुई है. इसी वजह के चलते कसबे में हर ब्रांडेड कंपनी का हेयर रिमूवर और सैनेटरी नैपकिन मिलते हैं, जिन्हें खरीदने के लिए आसपास के गांवों की लड़कियां भी इफरात से आती हैं.

लेकिन इन लड़कियों की एक बड़ी दिक्कत आज भी यह है कि इन्हें खास अंगों की साफसफाई के बारे में कोई पुख्ता जानकारी कहीं से नहीं मिलती. आधीअधूरी जानकारी के चलते वे कई बार परेशानियों से भी घिर जाती हैं. घर में मां या भाभी अकसर पुराने यानी अपने जमाने के उपाय बाताती हैं, जबकि अब दौर नए तौरतरीकों का है.

मिसाल प्राइवेट पार्ट के आसपास के बालों की सफाई का लें, तो लड़कियां अब हाईस्कूल में आतेआते हेयर रिमूवर का इस्तेमाल शुरू कर देती हैं. पहले इस के लिए ब्लेड और कैंची का इस्तेमाल ज्यादा होता था, हालांकि अभी भी होता है, पर न के बराबर. और जो लड़कियां इन का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी पुराने ब्लेड का इस्तेमाल न करें. इस से इंफैक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

आजकल बाजार में प्राइवेट पार्ट और बगलों के बालों को हटाने के लिए खास तरह के महीन ब्लेड वाले ब्रांडेड रेजर आ रहे हैं, इन का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित रहता है.

तरीका जो भी अपनाएं, लेकिन बालों की समयसमय पर सफाई जरूरी है, क्योंकि इन्हीं बालों के ऊपर पसीना जमता है, जो बदबू की बड़ी वजह होता है.

हेयर रिमूवर के इस्तेमाल से बाल एक बार में पूरी तरह साफ हो जाते हैं. इस का इस्तेमाल करने से पहले इसे थोड़ी सी तादाद में हाथ पर कुछ देर लगाए रखना चाहिए. अगर जलन न पड़े तो इस का बेहिचक इस्तेमाल किया जा सकता है. इस के अलावा प्राइवेट पार्ट को रोजाना एक बार कुनकुने पानी से जरूर साफ करें. और हर बार पेशाब करने के बाद साफ पानी से इसे धो लेना चाहिए.

कोशिश यह होनी चाहिए कि प्राइवेट पार्ट को ज्यादा से ज्यादा सूखा रखा जाए. इस के लिए साफ कपड़े या टिशू पेपर से उसे पोंछ लेना चाहिए. इस से कई बीमारियों से बचाव होता है और बदबू भी नहीं आती.

बाल साफ करते रहने से पार्टनर को भी सैक्स में मजा आता है और वह अपने मनचाहे तरीके से प्यार करने में नहीं हिचकता. लेकिन प्राइवेट पार्ट पर कभी तेज खुशबू वाले परफ्यूम और साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, इस से इंफैक्शन का खतरा बना रहता है.

माहवारी के 5 दिन भले ही तकलीफ वाले होते हों, लेकिन इन दिनों में खासतौर से एहतियात बरतना चाहिए. नैपकिन हर 4 घंटे बाद बदल लेना चाहिए, नहीं तो बदबू तो बढ़ती ही है साथ ही कई बीमारियों का भी डर बना रहता है. अंडरवियर भी इन दिनों में धो कर और सुखा कर ही पहनना चाहिए. सस्ते और लोकल सैनेटरी नैपकिन और अंडरगारमैंट्स के बजाय ब्रांडेड ही लेने चाहिए. ये भरोसेमंद भी होते हैं और अपना काम भी बेहतर तरीके से करते हैं.

दीपक की मानें, तो गांवों के हाट बाजारों में सस्ते के नाम पर लोकल नैपकिन और अंडरगारमैंट्स धड़ल्ले से बिकते हैं, लेकिन इन की न तो क्वालिटी अच्छी होती है और न ही नतीजे अच्छे मिलते हैं.

इन अंगों पर भी दें ध्यान

नाभि, स्तन, नितंब, जांघें और पीठ भी कम खास नहीं होते, जिन की साफसफाई पर लड़कियां कम ही ध्यान देती हैं. इन अंगों की साफसफाई अच्छे साबुन से हो जाती है. सेहत के अलावा ये अंग सैक्स में भी अहम रोल निभाते हैं, इसलिए इन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई लड़कियों की जांघों और नितंबों पर भी महीन बाल उग आते हैं जो हार्मोंस की गड़बड़ी के चलते मामूली बात है. इन बालों को भी रेजर या रिमूवर से हटा लेना चाहिए.

खास अंगों की साफसफाई को ले कर आ रही जागरूकता एक अच्छी बात है, जो लड़कियों को आत्मविश्वास से भरे रखती है. जरूरत इस बात की है कि यह जागरूकता घरघर पहुंचे.

नए तौरतरीकों और प्रोडक्ट्स की जानकारी के किए लड़कियों के लिए खासतौर से निकाली जाने वाली मैगजीन ‘गृहशोभा’ जरूर पढ़नी चाहिए. इस के उपयोगी लेख, फैशन, सेहत, खूबसूरती और सैक्स के अलावा जिंदगी के दूसरे अहम पहलुओं की पेचीदगियों से रूबरू कराते हुए न केवल सही रास्ता सुझाते हैं, बल्कि लड़कियों को नए जमाने से भी जोड़े रखते हैं.

मेरे पति पीरियड्स के दौरान सेक्स करने की जिद करते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 27 वर्ष है. अभी नईनई शादी हुई है. पति मेरा पूरा ध्यान रखते हैं. पीरियड्स के दौरान भी सैक्स करने की जिद करते हैं लेकिन मैं उस दौरान सैक्स करते समय सहज नहीं रहती. संक्रमण का डर लगा रहता है, कहीं गर्भ न ठहर जाए यह भी चिंता रहती है. कृपया मेरी इस आशंका का समाधान करें.

जवाब

सैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान सैक्स करने में कोई समस्या नहीं है.
पीरियड्स सैक्स में किसी प्रकार के एसटीडी और संक्रमण से बचने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए. जहां तक गर्भ ठहरने की बात है तो इस दौरान यौन संबंध बनाने से गर्भवती हो सकती हैं. दरअसल एक महिला के शरीर में शुक्राणु 5 दिनों तक जीवित रह सकता है और पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून इस में बाधा नहीं बनता. इस दौरान गर्भधारण की आशंका कम हो सकती है, मगर शून्य नहीं. इसलिए पीरियड्स के दौरान सुरक्षित सैक्स कीजिए. पति से इस बारे में खुल कर बात करें. आप की असहजता बात करने से दूर हो सकती है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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