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मेरे पति कौलगर्ल के पास अपना मन बहलाने जाते हैं, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल

मैं 42 वर्षीय विवाहिता हूं. विवाह को 16 वर्ष हो चुके हैं. 2 बेटे हैं. सुखी व संपन्न दांपत्य है. 3 महीने पहले तक मैं अपने को एक सफल गृहिणी और पति की प्रेयसी समझती रही, पर अचानक एक दिन ज्ञात हुआ कि पति जब कईकई दिनों के लिए टूअर पर जाते हैं तो वहां (मुंबई में) किसी कौलगर्ल से मन बहलाते हैं. यह सचाई जानने के बाद से मेरी रातों की नींद उड़ गई है. मुझे अपने आप से ग्लानि होने लगी है. जिस पति पर मैं आंख मूंद कर विश्वास करती रही उस ने मेरे साथ विश्वासघात किया. मैं ने उन से तो कोई बात जाहिर नहीं की पर अंदर ही अंदर घुलती जा रही हूं. समझ में नहीं आ रहा है कि  इस स्थिति को कैसे संभालूं. पति मेरा उखड़ा मूड़ और चिंतित चेहरा देख कर कई बार पूछ चुके हैं. मैं ने तबीयत ठीक न होने की बात कह कर टाल दिया है. कृपया बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

आप का परेशान होना स्वाभाविक है, पर आप के चिंतित और तनावग्रस्त रहने से समस्या हल नहीं होगी. इस के लिए आप को खुद प्रयास करना होगा. पति को सामने बैठा कर उन से बात करें. उन्हें समझाएं कि इस तरह का आचरण अनुचित तो है ही उन के स्वयं के भी हित में नहीं है. कौलगर्ल्स के कईकई मर्दों के साथ संबंध रहते हैं और उन से संबंध बनाने से एड्स जैसी बीमारी होने का भी खतरा रहता है. इसलिए उन्हें इस व्यभिचार से तोबा करनी चाहिए. उन्हें प्यार से, गुस्से से जैसे भी हो समझाएं और यह भी कहें कि यदि वे इस अनाचार को नहीं छोड़ते हैं तो आप उन के साथ शारीरिक संबंध नहीं रखेंगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें-  सरस सलिल-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

मेरे घरवाले मेरी शादी लड़की से कराना चाहते हैं पर मैं एक लड़के से प्यार करता हूं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 25 साल है. मेरे घर वाले एक ऐसी लड़की के साथ मेरी शादी कराना चाहते हैं, जो मुझे पसंद नहीं है. हकीकत तो यह है कि मैं किसी भी लड़की को पसंद नहीं करता हूं, बल्कि एक हमउम्र लड़के के साथ मेरी गहरी दोस्ती है या कह लें कि हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं. घर वालों को मनाने के लिए मैं क्या करूं?

जवाब-

आप घर वालों को साफसाफ बता दें कि आप शादी नहीं कर सकते और क्यों नहीं कर सकते, यह भी बता दें, क्योंकि आप का राज ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रह पाएगा. बताने के बाद का विरोध झेलने के लिए खुद को दिमागी तौर  पर तैयार रखें. पहले आप को नसीहतें मिलेंगी और उस के बाद धौंस.

मुमकिन है कि इस के बाद भी आप नहीं माने, तो आप को घर और समाज से भी निकाला जा सकता है. घर वालों के दबाव में शादी न करें. इस से आप की और जिस लड़की से आप शादी करेंगे, उस की भी जिंदगी बरबाद हो जाएगी. अपने दोस्त के साथ अलग रहने के अलावा आप के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

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जानें आखिर क्या है सेक्सरिंग: कहीं प्यार के नाम पर आप भी ना फंस जाएं

युवाओं का पहला आकर्षण प्रेम ही होता है. शायद ही कोई ऐसा युवा होगा जो रोमांस के इस फेज में न फंसा हो. कोई अपना लव इंटरैस्ट अपनी क्लासमेट में ढूंढ़ता है तो कोई पासपड़ोस की ब्यूटीफुल युवती पर फिदा हो जाता है. युवावस्था के आकर्षण से जुड़े हारमोंस ही हमें किसी विपरीतलिंग की तरफ आकर्षित करते हैं.

हालांकि हर बार यह प्यार सच्चा हो, इस की कोई गारंटी नहीं. प्यार के नाम पर कैमिकल लोचा भी हो सकता है, प्यार एकतरफा भी हो सकता है और कई बार लव को लस्ट यानी वासना की शक्ल में भी देखा जाता है. इन सब प्यार की अलगअलग कैटेगरीज से गुजरता हर युवा मैच्योर होतेहोते सीखता है कि लव के असल माने क्या हैं?

इस रोमांटिक फेज में उपरोक्त कैटेगरीज के अलावा एक और खतरनाक फेज होता है सेक्सरिंग का यानी प्यार के नाम पर जब कोई युवती किसी युवा को फंसा ले तो वह सेक्सरिंग में उलझ कर रह जाता है.

प्यार में सौदा नहीं

अचानक लड़की आप के करीब आ जाए तो उस पर लट्टू होने के बजाय जरा दिमाग लगा कर सोचिए कि इस नजदीकी की वजह प्यार है या आप की मोटी जेब, क्योंकि प्यार कोई सौदेबाजी नहीं होती. जो लड़की आप से प्यार करेगी वह बातबात पर महंगे गिफ्ट्स नहीं मांगेगी और न ही हर समय आप की जेब ढीली करेगी. अगर आप की गर्लफ्रैंड भी आप से ज्यादा आप के तोहफों पर ध्यान देती है तो समझ जाइए कि आप भी सेक्सरिंग में फंसने वाले हैं.

सिंगल होना शर्मिंदगी नहीं

सेक्सरिंग का सब से आसान शिकार युवतियां ज्यादातर उन युवकों को बनाती हैं जो सिंगल होते हैं. साइकोलौजिस्ट भी मानते हैं कि हमारे समाज व युवाओं का रवैया कुछ ऐसा है कि जो लड़के सिंगल होते हैं उन का मजाक बनाया जाता है, उन पर जल्द से जल्द गर्लफ्रैंड बनाने का दबाव डाला जाता है. मानो किसी युवक की गर्लफ्रैंड नहीं है तो उस में कोई न कोई कमी होगी.

इस मनोवैज्ञानिक दबाव के तले दब कर युवक अपनी सोचसमझ खो कर एक अदद युवती की तलाश में जुट जाता है जो जल्दी से जल्दी उस की गर्लफ्रैंड बनने को तैयार हो. भले इस के लिए उसे कोई भी कीमत चुकानी पड़े. इसी जल्दबाजी व मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा चालाक व शातिर युवतियां उठाती हैं और सिंगल युवकों को झूठे प्यार के सेक्सरिंग में फांस कर उन की जेबें ढीली करती हैं. कई मामलों में तो उन की पढ़ाईलिखाई व कैरियर तक बरबाद कर डालती हैं.

युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि सिंगल होना कोई  शर्मिंदगी की बात नहीं है. जब तक कोई ईमानदार या सच्चा प्यार करने वाली युवती न मिले, सिंगल रहना बेहतर है. पढ़ाई, कैरियर, शौक व दोस्तों को समय दे कर सेक्सरिंग से बचने में ही समझदारी दिखाने वाले युवा कुछ बन पाते हैं.

इमोशनल अत्याचार के साइड इफैक्ट्स

अकसर युवतियों से धोखा खाए या यों कहें कि सेक्सरिंग के शिकार युवक भावनात्मक तौर पर टूट जाते हैं और प्रतिक्रियास्वरूप कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो उन के भविष्य को खतरे में डाल देता है.

जनवरी 2017, दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके के रोहन को जब एक युवती ने झूठे प्यार के जाल में फंसा कर चूना लगाया तो उस ने उस से बदला लेने की ठान ली व एक दिन स्कूल से लौटते समय युवती के चेहरे पर ब्लैड मार दिया.

घायल युवती के परिजनों ने रोहन के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी. इस तरह मामला उलटा पड़ गया. युवती का तो कुछ नहीं बिगड़ा, रोहन को जरूर हवालात की हवा खानी पड़ी.

अकसर सेक्सरिंग के शिकार युवा इमोशनली इतने डिस्टर्ब हो जाते हैं कि धोखा खाए प्रेमी की तरह उस युवती से बदला लेने की ठान लेते हैं. आएदिन हम प्रेम में ठुकराए प्रेमियों की आपराधिक कृत्यों की खबरें पढ़ते रहते हैं. कोई तेजाब से हमला करता है तो कोई युवती का अपहरण तक कर डालता है. कोई सेक्स संबंधों की  पुरानी तसवीरों, सेक्स क्लिप्स या प्रेमपत्रों के नाम पर लड़की को सबक सिखाना चाहता है.

प्यार से अपराध की ओर न जाएं

याद रखिए ये तमाम हिंसात्मक व अनैतिक रास्ते अपराध की उन गलियों की ओर ले जाते हैं, जहां से युवाओं के लिए वापस आना नामुमकिन सा हो सकता है. एक तो पहले ही युवती ने फंसा कर आप का धन व समय बरबाद कर दिया. उस पर उस से बदला लेने के लिए अतिरिक्त समय, धन व भविष्य दांव पर लगाना कहां की समझदारी है?

बेहतर यही है कि उस बात को भूल कर आप अपने कैरियर पर ध्यान दें. एक न एक दिन आप को सच्चा प्यार जरूर मिलेगा. इस धोखेभरी लवस्टोरी से इतना जरूर सीखिए कि अगली बार जब कोई युवती आप की भावनाओं से खिलवाड़ कर आप पर सेक्सरिंग का वार करे तो उस के झांसे में न आएं.

सेक्सरिंग के लक्षण

कोई युवती आप से सचमुच प्यार करती है या फंसा रही है, उसे समझने के लिए सेक्सरिंग के कुछ लक्षण समझना जरूरी है. निम्न पौइंट्स से समझिए कि कौन सी युवती स्वाभाविक तौर पर सेक्सरिंग के जाल में आप को फंसाना चाहती है :

–       जब बातबात पर शौपिंग, पार्टी या महंगे गिफ्ट्स की डिमांड करे.

–       जब खुद से जुड़ी जानकारियां छिपाए व आप की हर बात जानना चाहे.

–       आप के दोस्तों या परिवार से मिलने से कतराए.

–       अपने फैमिली या फ्रैंड सर्किल से मिलवाते वक्त आप की पौकेट खाली करवाए.

–       बातबात पर आप की तारीफ करे और आप की हर बात पर सहमति जताए.

–       हर जरूरत पर आर्थिक मदद की डिमांड करे.

–       झगड़े की वजहों में पैसों का ताना मारे.

–       आप के अमीर व संपन्न दोस्तों से करीबी बढ़ाए.

–       आप की आर्थिक मदद करने से कतराए या बहाने बनाए.

–       प्यार के नाम पर भावनात्मक सहारे के बजाय सिर्फ फिजिकल रिलेशन को तरजीह दे.

अगर इन तमाम पौइंट्स पर आप की गर्लफ्रैंड खरी उतर रही हो तो सावधान हो जाइए. आप पर सेक्सरिंग फेंका जा चुका है. सही मौका पाते ही सेक्सरिंग का छल्ला गले से निकाल फेंकिए और ब्रेकअप सौंग पर जम कर अपनी फेक लवर से आजादी का जश्न मनाइए.

स्पाइनल इंजरी के बाद ऐसी होती है सैक्सुअल लाइफ

स्पाइनल इंजरी किसी के भी जीवन की त्रासदपूर्ण घटना हो सकती है. इस से व्यक्ति एक तरह से लकवाग्रस्त हो सकता है. इंजरी जब गरदन में हो तो इस से टेट्राप्लेजिया हो सकता है. यदि इंजरी गरदन के नीचे हो तो इस से पाराप्लेजिया यानी दोनों टांगों और इंजरी से निचले धड़ में लकवा हो सकता है. केंद्रीय स्नायुतंत्र का हिस्सा होने के कारण स्पाइनल कौर्ड की सेहत पर ही पूरे शरीर की सेहत निर्भर करती है. इंजरी से यौन सक्रियता भी प्रभावित हो सकती है. स्पाइनल कौर्ड इंजरी ऊंचाई से गिरने, सड़क दुर्घटना, हिंसक या खेल की घटनाओं के कारण हो सकती है. स्पाइनल कौर्ड इंजरी के नौनट्रोमेटिक कारणों में स्पाइन और ट्यूमर के टीबी जैसे संक्रमण शामिल हैं.

यौन सक्रियता जरूरी

स्पाइनल इंजरी से पीडि़त व्यक्ति को यथासंभव आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश होनी चाहिए. भारतीय समाज के एक बड़े हिस्से में यौन स्वास्थ्य पर चर्चा करना हमेशा वर्जित विषय माना जाता रहा है, इसलिए इस विषय पर बात करने से लोग कतराते हैं और मरीज खामोशी से इसे सहता रहता है. शिक्षा, ज्ञान और जागरूकता के अभाव में लोग ऐसे मरीजों के बारे में यह समझने लगते हैं कि वे यौनेच्छा एवं यौन उत्कंठा से पीडि़त हैं. लेकिन सच यह है कि सामान्य व्यक्ति की तरह ही स्पाइनल इंजरी से पीडि़त व्यक्ति के लिए भी यौन सक्रियता उतनी ही जरूरी है.

पार्टनर का अभाव

दरअसल, स्पाइन इंजरी इच्छाशक्ति का स्तर तो प्रभावित नहीं करती, लेकिन किसी व्यक्ति की यौन गतिविधि प्रभावित जरूर हो जाती हैं. कई बार ऐसा पार्टनर के अभाव में भी होता है. अन्य मामलों में यह मांसपेशियों पर नियंत्रण रखने वाले व्यायाम की कमजोर क्षमता के कारण भी हो सकता है. यौन अनिच्छा लिंग के आधार पर भी अलगअलग हो सकती है. पुरुष जहां उत्तेजना के अभाव के कारण प्रभावित होते हैं, वहीं महिलाएं आमतौर पर शिथिल पार्टनर होने के कारण इस से कम प्रभावित होती हैं खासकर भारतीय समाज में. लेकिन स्पाइनल इंजरी से पीडि़त व्यक्तियों की यौन अनिच्छा को सैक्सुअल रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम और निरंतर अभ्यास से बहुत हद तक दूर किया जा सकता है.

समस्या की अनदेखी

ऐसे मरीजों में आत्मविश्वास जगाना और यौन स्वास्थ्य के बारे में उन से खुल कर बात करना बहुत जरूरी होता है. इस में तंबाकू पूरी तरह से निषेध होना चाहिए. शारीरिक गतिविधियों के अभाव और दर्द के अलावा एससीआई मरीज आकर्षण, संबंधों और प्रजनन की क्षमता जैसे अन्य कारकों को ले कर भी चिंतित रहते हैं. समय के साथ जहां मरीज अपने नवजात शिशु के साथ जीना सीख जाते हैं और परिवर्तित जिंदगी अपना लेते हैं, वहीं वे अपने यौन स्वास्थ्य को ले कर अकसर अनजान रहते हैं. मरीज के शरीर की कुछ खोई गतिविधियां बहाल करने के लिए व्यापक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के दौरान भी यौन समस्या की अनदेखी ही की जाती है.

खुद पहल नहीं करतीं

एससीआई के मामले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए अकसर सैक्सुअल पार्टनर बनना ज्यादा आसान होता है जो न सिर्फ शारीरिक रचना के कारण, बल्कि सक्रियता के स्तर पर भी संभव होता है. भारत जैसे रूढिवादी समाज में महिलाओं से यौनइच्छा की उम्मीद करना मुश्किल है. भारत की 80% महिलाएं ऐसी पैसिव सैक्सुअल पार्टनर होती हैं जो खुद पहल नहीं करतीं. इसलिए पुरुषों की तुलना में उन के लिए यौन स्वास्थ्य वापस पाना ज्यादा आसान होता है और उन का मुख्य लक्ष्य यौन सक्रियता वापस पाना तथा संभोग करने की क्षमता हासिल करना होता है.

समस्या का समाधान

पुरुषों के मामले में समस्याएं उत्तेजना में कमी और स्खलन से ही जुड़ी होती हैं. उन की उत्तेजना क्षमता और स्खलन में बदलाव आने के अलावा कामोत्तेजना की यौन संतुष्टि भी एक ऐसा क्षेत्र है जो एससीआई पीडि़त पुरुषों के लिए चिंता का कारण होता है. एक अन्य चिंता स्पर्म की क्वालिटी पर होने वाले प्रभाव और स्पर्म काउंट को ले कर होती है. ज्यादातर स्पाइनल इंजरी के मामले में वियाग्रा जैसी दवा से उत्तेजना की समस्या दूर की जा सकती है. कुछ मामलों में वैक्यूम ट्यूमेसेंस कंस्ट्रक्शन थेरैपी (वीटीसीटी) या पैनाइल प्रोस्थेसिस जैसे उपकरण की भी जरूरत पड़ सकती है.

गलत धारणा की वजह

सैक्सुअल काउंसलिंग और मैनेजमैंट विकासशील देशों में एससीआई के सब से उपेक्षित पहलुओं में से एक है. लेखकों के एक अध्ययन से पाया गया है कि एससीआई से पीडि़त 60% मरीजों और उन के 57% पार्टनरों ने पर्याप्त रूप से सैक्सुअल काउंसलिंग नहीं ली. जिन फैक्टर्स पर बहुत कम जोर दिया जाता है, उन में से एक है जागरूकता और सांस्कृतिक बदलाव. पति और पत्नी के बीच यौन संबंध का मकसद सिर्फ बच्चे पैदा करना ही माना जाता है. सैक्स के बारे में बातचीत को खराब माना जाता है. यौन समस्याएं न सिर्फ आम हो गई हैं, बल्कि सैक्स की अनदेखी, सैक्स के बारे में गलत धारणाओं और नकारात्मक सोच भी इस के मुख्य कारण माने जाते हैं. पारंपरिक वर्जना भी इस में अहम भूमिका निभाती है.

सैक्सुअलिटी को प्रभावित करने वाले अन्य सामाजिक, पारंपरिक फैक्टर्स में यौन संबंधी सोच, मातापिता के प्रति सम्मान तथा अन्य ऐसे कारण शामिल हैं, जिन में सैक्स को खराब माना जाता है और पुरुषों तथा महिलाओं के लिए बरताव के दोहरे मानदंड अपनाए जाते हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्थिति बदतर होती है.

आत्मविश्वास में कमी

एक अध्ययन के अनुसार, विकसित देशों की तुलना में भारत जैसे देश में स्पाइनल कौर्ड इंजरी से पीडि़त व्यक्तियों की यौन गतिविधि की बारंबारता कम रहती है. ज्यादातर मरीज इंजरी से पहले की तुलना में मौजूदा स्तर पर अपने सैक्स जीवन को कमतर आंकते हैं. यह शायद एससीआई की समस्याओं, इंजरी के बाद पार्टनर की असंतुष्टि, यौनक्रिया के दौरान पार्टनर से कम सहयोग, आत्मविश्वास में कमी तथा अपर्यात सैक्सुअल रिहैबिलिटेशन के कारण भी हो सकता है. पश्चिमी देशों के मामलों की तरह बहुत कम पार्टनर संतुष्ट होते हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाएं यौन संतुष्टि के अभाव की शिकायतें ज्यादा करती हैं. इस के पीछे प्रचलित सांस्कृतिक मान्यता है कि किसी बीमार महिला के साथ यौन संबंध बनाना नैतिकता के विरुद्ध है और इस से पुरुष पार्टनर में भी रोग संचारित हो सकता है. भारतीय समाज में महिलाओं की कमतर स्थिति, पार्टनर की भिन्न सोच, पाचनतंत्र आदि की गड़बड़ी और निजता का अभाव भी इस के कुछ अन्य संभावित कारण हो सकते हैं.

यौनजीवन का अंत नहीं

निष्कर्षतया स्पाइनल इंजरी को यौनजीवन का अंत नहीं मान लेना चाहिए. इस से इंजरी पीडि़त व्यक्ति को अपने नए शरीर में यौन सुख स्वीकार करने में मदद की जरूरत पड़ती है और कई बार उस के लिए अलग तरीके से सोचने की जरूरत होती है. परिवर्तित संवेदनशीलता, शारीरिक प्रतिबंध की स्वीकृति या उन्नत मसल कंट्रोल जैसे फैक्टर्स को समझने से स्पाइनल इंजरी मरीज को स्वस्थ यौनजीवन बहाल करने में मदद मिल सकती है. उस के सैक्सुअल रिहैबिलिटेशन के लिए मैडिकल प्रोफैशनल्स की मदद की जरूरत होती है. इस संबंध में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है खासकर भारतीय समाज तथा प्रोफैशनल्स के बीच.

(डा. एच.एस. छाबड़ा, इंडियन स्पाइनल इंजरीज सैंटर में स्पाइन सर्विस के प्रमुख और मैडिकल डायरैक्टर)

सेक्स से पहले ऐसे करें अपने पार्टनर को खुश

4 सहेलियां कुछ अरसे बाद मिली थीं. 2 की जल्दी शादी हुई थी तो 2 कुछ बरसों का वैवाहिक जीवन बिता चुकी थीं. ऐसा नहीं कि उन में और किसी विषय पर बात नहीं हुई. बात हुई, लेकिन बहुत जल्द ही वह पहली बार के अनुभव पर आ टिकी.

पहली सहेली ने पूछा, ‘‘तुम फोन पर ट्रेन वाली क्या बात बता रही थी? मेरी समझ में नहीं आई.’’

दूसरी बोली, ‘‘चलो हटो, दोबारा सुनना चाह रही हो.’’

तीसरी ने कहा, ‘‘क्या? कौन सी बात? हमें तो पता ही नहीं है. बता न.’’

दूसरी बोली, ‘‘अरे यार, कुछ नहीं. पहली रात की बात बता रही थी. हनीमून के लिए गोआ जाते वक्त हमारी सुहागरात तो ट्रेन में ही मन गई थी.’’

तीसरी यह सुन कर चौंकी, ‘‘हाउ, रोमांटिक यार. पहली बार दर्द नहीं हुआ?’’

दूसरी ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ खास तो नहीं.’’

तीसरी बोली, ‘‘चल झूठी, मेरी तो पहली बार जान ही निकल गई थी. सच में बड़ा दर्द होता है. क्यों, है न? तू क्यों चुप बैठी है? बता न?’’

चौथी सहेली ने कहा, ‘‘हां, वह तो है. दर्द तो सह लो पर आदमी भी तो मनमानी करते हैं. इन्होंने तो पहली रात को चांटा ही मार दिया था.’’

बाकी सभी बोलीं, ‘‘अरेअरे, क्यों?’’

चौथी ने बताया, ‘‘वे अपने मन की नहीं कर पा रहे थे और मुझे बहुत दर्द हो रहा था.’’

पहली बोली, ‘‘ओह नो. सच में दर्द का होना न होना, आदमी पर बहुत डिपैंड करता है. तुम विश्वास नहीं करोगी, हम ने तो शादी के डेढ़ महीने बाद यह सबकुछ किया था.’’

दूसरी और तीसरी बोलीं, ‘‘क्यों झूठ बोल रही हो?’’

पहली सहेली बोली, ‘‘मायके में बड़ी बहनों ने भी सुन कर यही कहा था, उन्होंने यह भी कहा कि लगता है मुझे कोई धैर्यवान मिल गया है, लेकिन मेरे पति ने बताया कि उन्होंने शादी से पहले ही तय कर लिया था कि पहले मन के तार जोडूंगा, फिर तन के.

‘‘मुझे भी आश्चर्य होता था कि ये चुंबन, आलिंगन और प्यार भरी बातें तो करते थे, पर उस से आगे नहीं बढ़ते थे. बीच में एक महीने के लिए मैं मायके आ गई. ससुराल लौटी तो हम मन से काफी करीब आ चुके थे. वैसे भी मैं स्कूली दिनों में खूब खेलतीकूदती थी और साइकिल भी चलाती थी. पति भी धैर्य वाला मिल गया. इसलिए दर्द नहीं हुआ. हुआ भी तो जोश और आनंद में पता ही नहीं चला.’’

पतिपत्नी के पहले मिलन को ले कर अनेक तरह के किस्से, आशंकाएं और भ्रांतियां सुनने को मिलती हैं. पुरुषों को अपने सफल होने की आशंका के बीच यह उत्सुकता भी रहती है कि पत्नी वर्जिन है या नहीं. उधर, स्त्री के मन में पहली बार के दर्द को ले कर डर बना रहता है.

आजकल युवतियां घर में ही नहीं बैठी रहतीं. वे साइकिल चलाती हैं, खेलकूद में भाग लेती हैं, घरबाहर के बहुत सारे काम करती हैं. ऐक्सरसाइज करती हैं, नृत्य करती हैं. ऐसे में जरूरी नहीं कि तथाकथित कुंआरेपन की निशानी यानी उन के यौनांग के शुरू में पाई जाने वाली त्वचा की झिल्ली शादी होने तक कायम ही रहे. कई तरह के शारीरिक कार्यों के दौरान पैरों के खुलने और जननांगों पर जोर पड़ने से यह झिल्ली फट जाती है, इसलिए जरूरी नहीं कि पहले मिलन के दौरान खून का रिसाव हो ही. रक्त न निकले तो पुरुष को पत्नी पर शक नहीं करना चाहिए.

अब सवाल यह उठता है कि जिन युवतियों के यौनांग में यह झिल्ली विवाह के समय तक कायम रहती है, उन्हें दर्द होता है या नहीं. दर्द का कम या ज्यादा होना झिल्ली के होने न होने और पुरुष के व्यवहार पर निर्भर करता है. कई युवतियों में शारीरिक कार्यों के दौरान झिल्ली पूरी तरह हटी हो सकती है तो कई में यह थोड़ी हटी और थोड़ी उसी जगह पर उलझी हो सकती है. कई में यह त्वचा की पतली परत वाली होती है तो कई में मोटी होती है.

स्थिति कैसी भी हो, पुरुष का व्यवहार महत्त्वपूर्ण होता है. जो पुरुष लड़ाई के मैदान में जंग जीतने जैसा व्यवहार करते हैं, वे जोर से प्रहार करते हैं, जो स्त्री के लिए तीखे दर्द का कारण बन जाता है. ऐसे पुरुष यह भी नहीं देखते कि संसर्ग के लिए राह पर्याप्त रूप से नम और स्निग्ध भी हुई है या नहीं. उन के कानों को तो बस स्त्री की चीख सुनाई देनी चाहिए और आंखों को स्त्री के यौनांग से रक्त का रिसाव दिखना चाहिए. ऐसे पुरुष, स्त्री का मन नहीं जीत पाते. मन वही जीतते हैं जो धैर्यवान होते हैं और तन के जुड़ने से पहले मन के तार जोड़ते हैं व स्त्री के संसर्ग हेतु तैयार होने का इंतजार करते हैं.

भले ही आप पहली सहेली के पति की तरह महीना, डेढ़ महीना इंतजार न करें पर एकदम से संसर्ग की शुरुआत भी न करें. पत्नी से खूब बातें करें. उस के मन को जानने और अपने दिल को खोलने की कोशिश करें. पर्याप्त चुंबन, आलिंगन करें. यह भी देखें कि पत्नी के जननांग में पर्याप्त गीलापन है या नहीं. दर्द के डर से भी अकसर गीलापन गायब हो जाता है. ऐेसे में किसी अच्छे लुब्रीकैंट, तेल या घी का इस्तेमाल करना सही रहता है. शुरुआत में धीरेधीरे कदम आगे बढ़ाएं. इस से आप को भी आनंद आएगा और पत्नी को दर्द भी कम होगा.

कई युवतियों के लिए सहवास आनंद के बजाय दर्द का सबब बन जाता है. ऐसा कई कारणों से होता है, जैसे :

कुछ युवतियों में वल्वा यानी जांघों के बीच का वह स्थान जो हमें बाहर से दिखाई देता है और जिस में वेजाइनल ओपनिंग, यूरिथ्रा और क्लीटोरिस आदि दिखाई देते हैं, की त्वचा अलग प्रकार की होती है, जो उन्हें इस क्रिया के दौरान पीड़ा पहुंचाती है. त्वचा में गड़बड़ी से इस स्थान पर सूजन, खुजली, त्वचा का लाल पड़ जाना और दर्द होने जैसे लक्षण उभरते हैं. त्वचा में यह समस्या एलर्जी की तरह होती है और यह किसी साबुन, मूत्र, पसीना, मल या पुरुष के वीर्य के संपर्क में आने से हो सकती है.

सहवास के दौरान दर्द होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए. सहवास से पहले पर्याप्त लुब्रीकेशन करना चाहिए. पुरुष को यौनांग आघात में बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए. वही काम मुद्राएं अपनानी चाहिए जिन में स्त्री को कम दर्द होता हो. इस से भी जरूरी बात यह है कि पहले मन के तार जोडि़ए. ये तार जुड़ गए तो तन के तार बहुत अच्छे और स्थायी रूप से जुड़ जाएंगे.    – सहवास के दौरान पर्याप्त लुब्रीकेशन न होने से भी महिला को दर्द का एहसास हो सकता है.

– महिला यौनांग में यीस्ट या बैक्टीरिया का इन्फैक्शन भी सहवास में दर्द का कारण बनता है.

– एक बीमारी एंडोमेट्रिआसिस होती है, जिस में गर्भाशय की लाइनिंग शरीर के दूसरे हिस्सों में बनने लगती है. ऐसा होने पर भी सहवास दर्दनाक हो जाता है.

– महिला के यौनांग की दीवारों के बहुत पतला होने से भी दर्द होता है.

– यूरिथ्रा में सूजन आ जाने से भी सहवास के दौरान दर्द होता है.

जब दिल में हो एक-दूसरे के लिए प्यार और सम्मान, तभी मिल सकता है सुकून और संतुष्टि

सेक्स का सीधा संबंध मन और मस्तिष्क से है. इसलिए आपस में सेक्स संबंध बनाने वाले कपल में एक दूसरे के लिए न केवल प्यार और सम्मान हो बल्कि भरपूर दोस्ताना भी हो. कोई किसी के साथ जोर जबरदस्ती न करे,न कोई किसी पर सिर्फ अपनी चाहत जबरदस्ती लादे . सेक्स में किसी भी तरह की कोई सीमा नहीं है, सीमा बस एक ही है आपके पार्टनर की सहमति. इसलिए सबसे पहली और जरूरी शर्त यह है कि जिसके साथ सेक्स संबंध बनाएं उसकी भावनाओं की कद्र करें, उसकी इज्जत करें, उसे सम्मान दें.

बकौल सेक्स एक्सपर्ट डेविड रूबीन, ‘सेक्स एक ऐसा खेल है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा खेला जाता है. जिसमें सबसे ज्यादा आनंद आता है. जिसे किसी को भी खेलने का हक है. जिसमें हर खिलाड़ी का बराबर का योगदान होता है. कोई पराजित नहीं होता हर कोई विजेता होता है. जब इस भावना से यह खेल खेला जाता है तो यह आनंद का सागर बन जाता है. सेक्स के खेल में छेड़छाड़, मनुहार, हंसी, आश्चर्य, नाटकीयता और भावुकता सब जायज है. सच तो यह है कि बिना नाटकीयता और  एक्साइटमेंट के यह खेल बिल्कुल नीरस लगता है.

वास्तव में सेक्स का हमारे मन और हमारे ख्यालों से बहुत गहरा रिश्ता है. आपमें कितनी ही शारीरिक उत्तेजना क्यों न हो, अगर मन किसी दूसरे काम या चिंता में फंसा हुआ है तो आप सेक्स नहीं कर सकते. करेंगे तो खुशी नहीं मिलेगी. इसलिए जब सेक्स करें तो उसमें खो जाएं. उस समय दीन-दुनिया के बारे में कुछ न सोचें. हर अदा की तरह सेक्स के भी दो रूप होते हैं. आप इसे नियंत्रित भी कर सकते हैं और बेकाबू होने पर आप इसके गुलाम भी हो सकते हैं. कहने का मतलब यह है कि सेक्स को दबाने की शक्ति तो आपमें होती है, लेकिन अगर यह बहुत प्रबल हो जाए तो किसी भी हाल में पार्टनर ढूंढ़ने लगता है.

सेक्स अगर दिल दिमाग पर हावी हो जाए और कोई वाजिब रास्ता ढूंढे न मिले तो रेप जैसे अपराध जन्म लेते हैं. सेक्स में जब दोनो पार्टनर की आपस में रजामंदी होती है तो आनंद की जबरदस्त लय बनती है. ऐसे कपल्स के बीच में ही प्रगाढ़ सेक्स संबंध बनते हैं. एक दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान के साथ किया गया सेक्स दो लोगों को एक ऐसी आत्मीयता की जंजीर से बांधता है जो जंजीर कभी नहीं टूटती. हालांकि सेक्स एक शारीरिक अभिव्यक्ति है, भूख है, पर सेक्स उत्पन्न केवल मन से होता है. मन स्वस्थ हेागा, तो सेक्स भी स्वस्थ होता है. शुरू में शारीरिक आकर्षण के चलते संबंध बनते हैं. लेकिन यदि मन के तार न मिले तो चेहरे चाहे कितने ही आकर्षक क्यों न हो, यह रिश्ता टूट जाता है.

मन के तार जब आपस में मजबूती से बंधे होते हैं तो हर बार के सेक्स संबंध मुकम्मल और संतुष्टि से भर देने वाले होते हैं. ज्यादातर पुरुषों में शीघ्रपतन और लिंग में तनाव न हो पाने की समस्या मानसिक तनाव के चलते ही आती है. 100 में 98-99 बार चेकअप के बाद पाया जाता है कि सब कुछ बिल्कुल ठीक है. लेकिन अगर पार्टनर के साथ प्यार भरे रिश्ते नहीं हैं तो दिल दिमाग में हमेशा एक धुकपुकी मची रहती है और इस धुकपुकी के चलते कुछ भी अच्छा नहीं होता, कई तरह की समस्याएं आ जाती हैं. इसलिए जब किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाएं उससे पहले उसके साथ दिल के, प्यार के और सम्मान के रिश्ते भी बनाएं.

एक संपूर्ण सुख से भरा संतुष्टिायक सेक्स तनाव से पूरी तरह मुक्ति दिलाता है. जबकि सेक्स से वंचित रहने पर या संतुष्टिदायक सेक्स न हासिल होने पर तनाव व चिड़चिड़ापन पैदा हो जाता है. अब आप सूरज और श्रद्धा की कहानी पर एक नजर दौड़ाएं. सूरज अभी अधेड़ नहीं हुए. लेकिन उनकी काया कह रही है कि जवानी उनका साथ छोड़ चुकी है. अधपके बाल, पिचके गाल, झुकी पीठ, बेहिसाब तोंद और ढीली लड़खड़ाहट भरी चाल. दरअसल, उनकी समस्या थी जबर्दस्त तनाव. दफ्तर में वे बारह से सोलह घंटे तक काम करते हैं. इसके बाद क्लब जाकर दो-तीन पैग पीते हैं. घर पहुंचते हैं रात में ग्यारह बजे के बाद. फिर जल्दी-जल्दी खाना और सोना. उनकी पत्नी श्रद्धा उनसे चैबीसों घंटे खफा रहती है.

श्रद्धा को लगता है कि उनके पति घर खर्च के पैसे देकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं. बेटा अपनी दुनिया में मस्त है. वह इस साल 12वीं में गया है. बेटी 7वीं की छात्रा है. श्रद्धा के निजी जीवन में बहुत तनाव है. उसकी सूरज के साथ अकसर किसी न किसी बात पर लड़ाई होती रहती है. सूरज भी इन बातों से तनाव में रहता है. एक रोज सूरज आॅफिस में बाॅस से हुई तनातनी के बाद अपना इस्तीफा उनके टेबल पर फेंक आए.

ये सारी स्थितियां श्रद्धा और सूरज के दाम्पत्य जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रही हंै. अंत में दोनो ने मनोचिकित्सक की सलाह लेने में ही भलाई समझी. मनोचिकित्सक ने उनसे छूटते ही पूछा, ‘दोनो के रिश्ते कैसे हैं?’ इस पर सूजर अचकचा गया. सूरज भी खामोश रहा और श्रद्धा भी कुछ नहीं बोली. डाॅक्टर ने सवाल इस बार और भी सपाट शब्दों में पूछा आप दोनो के बीच कितने दिन में शारीरिक सम्बंध बनते हैं? सूरज को वह दिन याद करने में काफी मुश्किल हुई. श्रद्धा ने ही धीमे स्वर में कहा तकरीबन 4 महीने गुजर हैं. उस रोज भी वे ठीक से परफाॅर्म भी नहीं कर पाए थे. श्रद्धा ने अपनी असंतुष्टि भी जता दी थी.

डाॅक्टर ने अगला सवाल किया, ‘क्या अब आप सेक्स मेें बिलकुल भी रूचि नहीं लेते?’ सूरज को मजबूरन कहना ‘मैं इतना व्यस्त रहता हूं कि समय ही नहीं मिलता. ऊपर से हर वक्त तनाव बना रहता है. आॅफिस में भी और घर में भी. ऐसे में सेक्स करें, तो कैसें?’ डाॅक्टर ने जब उन्हें बताया कि नियमित सेक्स से वे तनाव से निजात पा सकते हैं, तो सूरज को विश्वास नहीं हुआ. इतनी टेंशन, इतनी कुंठा- सेक्स से कैसे दूर हो सकती है? लेकिन वे उन्हें यकीन दिलाते हैं कि जब शारीरिक सम्बंध निरंतर विकसित होते हैं, निजी जीवन से तनाव दूर भाग जाता है.

अच्छा और रोमांटिक सेक्स तभी संभव है जब आप खुशबू का दामन छूते हैं. कहने का मतलब यह है कि कुछ परफ्यूम या प्राकृत सुगंध ऐसी होती है जो महिलाओं और पुरुषों को सेक्सुअली उत्तेजित करती है. ऐसे में जरूरी है कि दम्पति अपने जीवन को रोमांस से भरने के लिए उनका सहारा ले ताकि सेक्स में भी मजा आता रहे और तनाव से भर दूर हो जाएं.

जब पार्टनर टालने लगे शादी की बात

आजकल की जिंदगी में अगर लड़के की गर्लफ्रेंड न हो और लड़की का बौयफ्रेंड न हो तो दोस्त एक-दूसरे का मज़ाक बना लेते हैं इसलिए ये तो आजकल आम बात हो गई वैसे भी जिंदगी का एक मोड़ ऐसा आता है जब हर किसी को एक पार्टनर की जरूरत होती है. और जब उसे वो पार्टनर मिल जाता है तो उसके साथ बहुत से सपने संजोने लगते हैं.

अगर लडकियों की बात करें तो लड़कियां इस मामले में ज्यादा इमोशनल होती हैं और साथ ही उनकी अपने पार्टनर से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें होने लगती हैं लेकिन जब उनका पार्टनर उन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता तो वो अंदर से टूट जाती हैं लेकिन इन सब के बाद भी उनके अंदर एक उम्मीद होती है कि उनका पार्टनर उससे शादी जरूर करेगा लेकिन लड़के अक्सर शादी की बात को टालने लगते हैं लड़की जब भी इस बारे में बात करती हैं तो या तो बात को गोल-मोल घुमा देते हैं और या तो उस बात को पलट देते हैं या कहते हैं मैं अभी रेडी नहीं हूं उस वक्त लड़की को अनसिक्योर फील होता है जो कहीं न कहीं सही है.ऐसे में लड़कियों को कुछ सलाह है जो उन्हें करना चाहिए.

सबसे पहले तो आप एक लड़की हैं ये सोच कर कभी चुप मत रहिए.अगर आपको लगे की आपका पार्टनर शादी की बात टाल रहा है जरूर कुछ गड़बड़ है तो तुरन्त बिना वक्त गवाएं उससे फेस टू फेस बात करें और मामला क्लियर करें क्योंकि बिना क्लियर किए रिश्ता निभाना बहुत मुश्किल है. फिर भी अगर आपका पार्टनर इधर-उधर की बातें करे तो आपको उससे कड़ाई से ये सवाल करना चाहिए कि वो शादी के लिए तैयार है या नहीं.

अक्सर लड़कियां प्यार मोहब्बत की बातें सुनकर भावुकता में बह जाती हैं तो ऐसा बिल्कुल भी न करें अपनी जिंदगी को किसी पर निर्भर न होने दें और ना ही किसी उम्मीद को पलने दें क्योंकि जिंदगी कब क्या मोड़ लेले ये किसी को भी नहीं पता.आप खुद को इस तरह स्ट्रांग बनाए कि अगर आपका पार्टनर शादी न करें तो आप भी उसके पीछे अपना समय न गवाएं क्योंकि उसके छोड़कर जाने से आपकी जिंदगी खतम नहीं हो जाएगी.

जब आपको ये लगने लगे कि अब ज्यादा हो रहा है आपकी शादी वाली बात आपका पार्टनर सुनने के लिए रेडी नहीं हैं और अगर सुनने पर भी बार-बार टालता हैं तो आपको अपनी लाइफ में मूवऑन करना चाहिए
क्योंकि रिश्ता इसी तरह खतम हो जाता है. क्योंकि आप जितना उससे जुड़ी रहेंगी आपको बाद में उतनी ही तकलीफ होगी.

अगर आपको लगने लगे कि अब आपका पार्टनर आपमें दिलचस्पी नहीं ले रहा है और शादी की बातें भी नहीं करता तो उससे दूर हो जाना ही ज्यादा अच्छा होता है क्योंकि आपकी अपनी भी खुद की एक जिंदगी है जिसे आपको जीने का पूरा हक है अपनी जिंदगी को खुल कर बिना किसी दबाव के जीना चाहिए.

ऐसा नहीं है कि हर प्यार करने वाले पार्टनर धोखा देते हैं बल्कि कभी-कभी किसी की मजबूरी के कारण भी दो लोग अलग हो जाते हैं तो ऐसे में आपको ऐसा ही करना होगा और खुद को संभालना होगा अपनी
जिंदगी में आगे बढ़ना होगा.

बिना कंडोम फटे भी ठहर सकता है गर्भ, जानें कैसे करें बचाव?

बर्थ कंट्रोल के लिए आज सभी कंडोम से परिचित है. जिसका यूज सेक्स के दौरान अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने के लिए किया जाता है, लेकिन कई बार ऐसे केसेस भी सुनने को मिलते है कि कंडोम के इस्तेमाल के बावजूद भी गर्भ ठहर जाता है. कई बार सेक्स के दौरान कंडोम फट जाता है, जिससे प्रेग्नेंसी का खतरा रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं, कंडोम का सही इस्तेमाल करने के बाद भी कई महिलाएं प्रेग्ननेंट हो जाती हैं.

वैसे तो बर्थ कंट्रोल के लिए सबसे बेहतर कंडोम माना जाता है, लेकिन कई बार ये तरीका भी फेल हो जाता है. डौक्टरों के मुताबिक कंडोम यूज करने पर भी प्रेग्नेंसी के चांसेज हो सकते हैं. चलिए जानते हैं, आखिर कंडोम  यूज करने के बाद भी प्रेग्नेंसी की संभावना क्यों होती है?

फेल हो जाते हैं कंडोम

एक्सपर्ट्स के मुताबिक सही समय में कंडोम का यूज न किया जाए, तो प्रेग्नेंसी के चांंसेज होते हैं, क्योंकि यह जानना भी जरुरी है कि प्री-कम में भी स्पर्म होते हैं. तो ऐसा नहीं है कि जब एजैक्युलेशन हो उससे ही गर्भ ठहरेगा. कंडोम फटने से भी गर्भ ठहर जाएगा.

जेब में न रखें कंडोम

एक्सपर्ट्स ये भी बताते हैं कि अगर आप प्रेग्नेंसी नहीं चाहती हैं, तो उसके लिए आप कोई दूसरा कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. वही, ठीक तरीके से पहनने से भी इसके फेल होने के चांसेज कम होते हैं. इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते है कि वॉलट, कार या अपनी जेब में रखे कंडोम यूज न करें. इन्हे ठंडी जगह पर ड्रॉर में रखना चाहिए. शरीर की गर्मी या फ्रिक्शन से इनके खराब होने का खतरा ज्यादा रहता है.

थीन कंडोम करें यूज

बचाव का एक सही तरीका ये भी है कि आप सेक्स के दौरान पर्याप्त संतुष्टि पाने के लिए एक्स्ट्रा थिन कंडोम या अल्ट्रा-थिन कंडोम का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस तरह के कंडोम इस्तेमाल करने पर इसके होने का अहसास भी नहीं होता.

ये सेक्स पौजिशन पड़ सकती है पुरुषों को भारी

सेक्स का भरपूर आनंद लेने के लिए कई तरह की पौजिशन का जिक्र किया गया है, वूमन औन टौप उन्हीं में से एक है. कई पुरुषों की ये पसंदीदा पौजिशन होती है और उन्हें महिलाओं को ऊपर (वूमन औन टौप) रखने से अधिक आनंद की अनुभूति होती है, लेकिन ऐसा करना पुरुषों के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है और हो सकता है कि वे कभी सेक्स कर भी न पाएं.

दरअसल वूमन औन टौप पौजिशन में पुरुषों के जननांग (penis) में फ्रैक्चर (पेनाइल फ्रैक्चर) होने का अंदेशा रहता है. रिसर्च के अनुसार पेनाइल फ्रैक्चर के अधिकांश मामले इसी सेक्स पोजिशन के कारण सामने आते हैं.

वूमन औन टौप पोजिशन सबसे खतरनाक : रिसर्च

कनाडा के एक रिसर्च दल के मुताबिक वूमन औन टौप पौजिशन सबसे खतरनाक सेक्स पौजिशन है, जिससे हमेशा पेनाइल फ्रैक्चर का खतरा बना रहता है.  इस अध्ययन के लिए ब्राजील के शहर कैंपिनास के तीन अस्पतालों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया. इस दौरान उन्होंने 13 साल के टाइम पीरियड में संदिग्ध पेनाइल फ्रैक्चर के शिकार लोगों का इंटरव्यू लिया. इनमें से आधे लोगों ने कहा कि पेनिस में दर्द महसूस होने से पहले उन्हें टूटने की आवाज सुनाई दी. जबकि कुछ ने सूजन होने की भी बात कही.

खतरा क्यों होता है

रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है कि वूमेन औन टौप पोजिशन में प्राय: महिला अपने पूरे वजन के साथ गति को नियंत्रित करती है. इस दौरान लिंग के गलत दिशा में अचानक प्रवेश से पेनाइल फ्रैक्चर होता है. साथ ही कहा गया कि वहीं इसके उलटे इसी पौजिशन में जब गति का नियंत्रण पुरुष के हाथ में होता है तो पेनाइल फ्रैक्चर की संभावना कम हो जाती है.

सेक्स के समय ध्यान रखें कहीं गर्भ न ठहर जाए

आजकल के युवा जितनी जल्दी फ्रैंडशिप करते हैं उतनी ही जल्दी रिलेशन भी बना लेते हैं, जिस का नुकसान उन्हें ताउम्र भुगतना पड़ सकता है. कई बार तो सावधानी बरतने के बावजूद गर्भ ठहर जाता है और उन्हें समझ नहीं आता कि क्या करें, किस से सलाह लें. ऐसे में घर में पता चलने के डर से व समाज में बदनामी से बचने के लिए वे कैमिस्ट से ऐबौर्शन पिल्स ले आते हैं जिस के उन के शरीर पर घातक परिणाम भी देखने को मिलते हैं. कई बार तो जान जाने का खतरा बन जाता है. ऐसे में जरूरत है यह समझने की कि यहां तक नौबत ही न आए और अगर आ भी गई है तो डरें नहीं बल्कि प्रौब्लम को फेस करें और किसी अनुभवी डाक्टर से संपर्क कर के ही ऐबौर्शन करवाएं.

इस संबंध में फोर्टिस हौस्पिटल की सीनियर गाइनोकोलौजिस्ट डा. बंदिता सिन्हा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि भारत में अविवाहित युवतियों के ऐबौर्शन के केसेज पहले की तुलना में काफी बढ़े हैं, क्योंकि आज वे जल्दीजल्दी पार्टनर चेंज करने में विश्वास करने लगे हैं. ऐसे में वे खुद की फीलिंग्स पर कंट्रोल नहीं कर पाने के कारण जोश में आ कर होश खो बैठते हैं जिस से उन के सामने जटिल परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है और वे इस से नजात पाने के लिए जहां कहीं से भी ऐबौर्शन पिल्स अरेंज करते हैं, चाहे इस के लिए कितने ही पैसे खर्च हों, वे देने के लिए तैयार रहते हैं.

इतना ही नहीं कईर् डाक्टर्स भी इस स्थिति का फायदा उठा कर मरीज से ढेरों रुपए ऐंठने में नहीं सकुचाते. इन्हीं सब बातों को देखते हुए पिछले 3-4 साल से सरकार ने ऐबौर्शन पर बैन लगाया है कि अगर कोई भी डाक्टर ऐबौर्शन करते हुए या फिर एमटीपी पिल्स देते पकड़ा गया तो उस का लाइसैंस रद्द कर दिया जाएगा. आप सिर्फ एमटीपी मान्यता प्राप्त नर्सिंग होम और अस्पताल में ही गर्भपात करवा सकते हैं.

रोक का खास कारण यह भी

पुरुष प्रधान देश में यही माना जाता है कि अगर वंश को आगे बढ़ाना है तो उस के लिए परिवार में पुत्र का जन्म होना बहुत जरूरी है. ऐसे में जब परिवार वालों को सोनोग्राफी के माध्यम से यह पता चलता है कि गर्भ में बेटी है तो वे डाक्टर को मुंहमांगी रकम दे कर ऐबौर्शन करवाने के लिए तैयार हो जाते हैं. इसी का नतीजा है कि हरियाणा के 70 गांवों में पिछले कुछ सालों से लड़कियों ने जन्म नहीं लिया. आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं कि वहां पता लगते ही कि गर्भ में लड़की है, ऐबौर्शन करवा दिया जाता है.

लेकिन फिर भी कुछ स्थितियों में युवतियों व महिलाओं को बिना परेशानी के ऐबौर्शन कराने का अधिकार है, जो हैं :

–      अगर युवती या महिला जबरदस्ती किसी के यौन शोषण का शिकार हुई है और वह इस बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती तो उसे ऐबौर्शन करवाने का पूरा अधिकार है.

–   यदि इस से महिला या युवती के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता हो.

–      अगर यह पता लगे कि गर्भ में  पल रहे बच्चे का विकास सही ढंग से नहीं हो रहा और उसे 9 माह तक गर्भ में रखना सही नहीं है, तो ऐसी स्थिति में भी ऐबौर्शन करवाया जा सकता है. इसे डाक्टरी भाषा में मैडिकल टर्मिनेशन औफ प्रैग्नैंसी कहते हैं.

क्या है मैडिकल टर्मिनेशन औफ प्रैग्नैंसी

एमटीपी प्रक्रिया, जिस में डाक्टर की देखरेख में ऐबौर्शन को अंजाम दिया जाता है, को हर डाक्टर अंजाम नहीं दे सकता. सिर्फ अनुभवी गाइनोकोलौजिस्ट या सिर्फ वे डाक्टर्स जिन्होंने एमटीपी की ट्रेनिंग ली होती है, इसे अंजाम दे सकते हैं, क्योंकि वे जरूरत पड़ने पर अपने अनुभव के बल पर स्थिति को संभाल सकते हैं.

डाक्टरी देखरेख में ऐबौर्शन 2 तरीके से होते हैं :

ऐबौर्शन पिल्स

इस तरीके से ऐबौर्ट करने के लिए सब से पहले यह देखा जाता है कि कितने माह का गर्भ है. अगर गर्भ 6 से 8 सप्ताह के बीच है तो उसे पिल्स द्वारा रिमूव किया जा सकता है और इस का पता लगाने के लिए डाक्टर अल्ट्रासाउंड करता है. एमटीपी पिल डाक्टर की सलाह पर ही दी जाती है. यह पिल असल में गर्भाशय से पदार्थ को बाहर निकालने का काम करती है.

डाक्टर बताते हैं कि दवाएं कितने समय के अंतराल में लेनी हैं, क्योंकि जरा सी लापरवाही पूरे कोर्स को खराब कर सकती है. सिर्फ  दवाएं लेने से ही काम पूरा नहीं होता बल्कि डाक्टर 15 दिन के बाद अल्ट्रासाउंड के लिए बुलाता है जिस से करंट सिचुएशन के बारे में पता चल जाता है. अगर कोई पीस वगैरा रह गया होता है तो इस प्रोसैस को पुन: दोहराया जाता है या फिर सर्जरी से बाहर निकाला जाता है.

सर्जरी से

इस में बेहोश कर के ऐबौर्शन किया जाता है. इसे तब किया जाता है जब 8 सप्ताह से ज्यादा का गर्भ हो चुका होता है, क्योंकि इस के बाद पिल्स असर नहीं करतीं. इसे डाइलेशन ऐंड क्रूटेज प्रोसैस कहते हैं. इस में आप डाक्टर्स की देखरेख में रहते हैं और आप को प्रौपर केयर मिलती है. यह काफी सेफ प्रोसैस माना जाता है.

डाक्टर से करवाना क्यों फायदेमंद

गर्भपात के लिए कैमिस्ट वगैरा से दवा लेना हानिकारक होता है क्योंकि उन्हें आप की इंटरनल स्टेज के बारे में तो पता नहीं होता, इसलिए कौंप्लिकेशंस पैदा होने का भय रहता है. इस से आप की जान भी जोखिम में पड़ सकती है. कभीकभी ओवर ब्लीडिंग होने से सिचुएशन आउट औफ कंट्रोल भी हो सकती है. इसलिए जरूरी है डाक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें.

अगर आप को अस्थमा, एनीमिया वगैरा की शिकायत है तो डाक्टर चैकअप के बाद ही बताते हैं कि गोली देना सही रहेगा या नहीं. यहां तक कि सर्जरी के वक्त कंसर्ल्ट फौर्म भी भरवाया जाता है, जिस में पूरी जानकारी दी जाती है. यह भी बताया जाता है कि आप को औपरेशन के कितने दिन बाद दिखाने के लिए आना है. इस से आप काफी सेफ रहते हैं.

ऐबौर्शन के बाद क्या क्या सावधानियां बरतें

  –  इस दौरान भारी चीजें उठाने व झुकने वगैरा से थोड़े समय तक परहेज करना चाहिए.

– किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन भूल कर भी न करें.

– डाइटिंग न करें, क्योंकि इस दौरान लंबे समय तक भूखे रहना सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है.

–  एकदम से सैक्स न करें, खुद को थोड़ा समय दें, क्योंकि कई बार ऐसा करने से दोबारा प्रैग्नैंसी का खतरा बन जाता है.

–  इस समय आप जितना अच्छा खाएंगी व अच्छा सोचेंगी उतनी ही जल्दी फिट हो पाएंगी.

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