16 अक्तूबर, 2016 की दोपहर को यही कोई डेढ़ बजे पुर्निषा उर्फ गुड्डी मम्मी रेखा पालेचा के साथ एक्टिवा स्कूटी से जोधपुर शहर की मानसरोवर कालोनी में रहने वाले अपने मामा रितेश भंडारी के घर पहुंची. बहन और भांजी को देख कर वही नहीं, घर के सभी लोग खुश हो गए. नाश्तापानी और थोड़ी बातचीत के बाद पुर्निषा अपने 5 साल के ममेरे भाई युग को खिलाने लगी.

बेटे युग के अलावा रितेश की एक 10 साल की बेटी भी थी. पुर्निषा जब भी मामा के घर आती थी, अपने ममेरे भाईबहनों के साथ खेलने में मस्त हो जाती थी. वह दोनों को खूब प्यार करती थी. करीब आधे घंटे बाद पुर्निषा युग को अपनी स्कूटी पर बिठा कर चौकलेट दिलाने के लिए ले गई.

पुर्निषा जब भी मामा के यहां आती थी, युग को खानेपीने की चीजें दिलाने या स्कूटी पर घुमाने ले जाती थी. उस के साथ युग के जाने पर किसी को कोई शक वगैरह होने की गुंजाइश भी नहीं थी.

युग और पुर्निषा को घर से गए आधे घंटे से ज्यादा का वक्त हो गया और दोनों लौट कर नहीं आए तो घर वालों का ध्यान उन के ऊपर गया. प्यार से पुर्निषा को सभी गुड्डी कहते थे. घर वालों को चिंता हुई कि गुड्डी युग को ले कर कहां चली गई कि अभी तक लौट कर नहीं आई.

घर के सभी लोग इसी बात पर विचार कर रहे थे कि तभी रितेश के फोन की घंटी बजी. रितेश ने फोन की स्क्रीन देखी तो उस पर उन की भांजी गुड्डी का नंबर था. उन्होंने फोन रिसीव कर के पूछा, ‘‘हां गुड्डी, बताओ, इस समय तुम कहां हो? बहुत देर हो गई, अभी तक घर क्यों नहीं लौटी?’’

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