Emotional Hindi Story : नई सुबह

Emotional Hindi Story. रात के 11 बजे थे. शहर की चमकती सड़कों पर नियौन लाइटें ऐसे झिलमिला रही थीं मानो अंधेरे की देह पर किसी ने रंगीन कांच टांक दिए हों. रेलवे स्टेशन के सामने बने छोटे से होटल ‘सिल्वर पाम’ की तीसरी मंजिल पर बैठा राघव खिड़की से बाहर झांक रहा था. नीचे टैक्सियों की कतार थी, ऊपर आसमान में धुंध और भीतर उस के मन में एक अजीब खालीपन.

राघव राजस्थान के छोटे कसबे से पहली बार महानगर आया था. गांव के लोगों ने कहा था कि ‘मुंबई आदमी को या तो सोना बना देती है या धुआं’.

राघव पर्यटन कंपनी में नौकरी करता था. उस का काम बाहर से आने वाले पर्यटकों को शहर घुमाना था. दिनभर वह विदेशी सैलानियों को समुद्र, गेटवे औफ इंडिया, फिल्मी सितारों के बंगले और चमचमाते बाजार दिखाता, मगर रात होते ही शहर का दूसरा चेहरा सामने आ जाता.

उस रात कंपनी के मालिक ने कहा, ‘‘कुछ विदेशी मेहमान हैं, उन्हें नाइट लाइफ भी दिखानी पड़ेगी.’’

राघव झिझका. वह संस्कारों में पला लड़का था पर नौकरी की मजबूरी लोहे की बेड़ी होती है, चलना पड़ता है. वे लोग एक बार में पहुंचे. बाहर बड़े अक्षरों में लिखा था ‘मूनलाइट क्लब’. भीतर धुएं, शराब और तेज संगीत का ऐसा घालमेल था कि आदमी अपने विचार तक सुन न सके. मंच पर लड़कियां नाच रही थीं. चमकते कपड़े, बनावटी मुसकान और आंखों में थकान का गहरा समंदर.

राघव की नजर एक लड़की पर जा कर ठहर गई. उस का चेहरा बाकी लड़कियों से अलग था. नाचते हुए भी उस में एक उदासी थी, जैसे किसी ने चिडि़या के पंखों पर ग्लिटर तो लगा दिया हो, मगर उड़ान छीन ली हो.

कार्यक्रम खत्म होने के बाद वही लड़की पीछे गलियारे में मिली. उस ने पानी मांगा. राघव ने बोतल बढ़ाई.

लड़की मुसकराई, ‘‘थैंक्स.’’

‘‘नाम क्या है आप का?’’ राघव ने पूछा. ‘‘हमारे नाम बदलते रहते हैं साहब…’’ उस लड़की ने हलकी हंसी में कहा, ‘‘यहां असली नाम कोई नहीं पूछता.’’

कुछ देर बाद उस लड़की ने खुद बताया, ‘‘मेरा नाम मीरा है.’’

मीरा उत्तर प्रदेश के छोटे शहर से आई थी. पिता बीमार, घर कर्ज में डूबा और रिश्तेदारों की सलाह कि ‘शहर जा, कुछ काम कर’. काम की तलाश उसे इस बार तक ले आई थी.

‘‘लोग समझते हैं हम बड़ी ऐश में हैं…’’ मीरा बोली, ‘‘पर सच कहूं तो यहां हर रात आत्मा थोड़ाथोड़ा टूटती है.’’

राघव खामोश रहा. उसे लगा जैसे शहर की सारी रोशनी अचानक फीकी पड़ गई हो.

अगले कुछ दिनों में राघव की मुलाकात मीरा से होती रही. वह समझ गया कि बार की चमक बाहर वालों के लिए थी, भीतर तो कई जिंदगियां किस्तों में बिक रही थीं. कोई बहन की पढ़ाई चला रही थी, कोई मां का इलाज करा रही थी, कोई पति की मार से भाग कर यहां आ गई थी.

एक रात मीरा ने पूछा, ‘‘तुम्हें कभी डर नहीं लगता इस शहर से?’’ राघव हंसा, ‘‘लगता है पर गांव में भूख थी, यहां भीड़ है. आदमी आखिर जाए कहां?’’

मीरा कुछ देर तक चुप रही, फिर बोली, ‘‘सच कहूं… यहां लोग शरीर देखने आते हैं, इनसान नहीं.’’

मीरा के शब्द राघव के भीतर की दीवार पर हथौड़े की तरह लगे.

धीरेधीरे दोनों के बीच अपनापन बढ़ने लगा. राघव ने मीरा को सलाह दी कि वह कोई दूसरा काम ढूंढ़ ले.

मीरा मुसकरा देती, ‘‘गरीब आदमी के सपने भी किराए के मकान जैसे होते हैं साहब, कभी भी खाली करवाए जा सकते हैं.’’

लेकिन एक दिन अचानक बार पर पुलिस की छापेमारी हुई. अखबारों में खबरें छपीं. मालिक गायब हो गया. लड़कियां इधरउधर भटकने लगीं.

राघव ने मीरा को ढूंढ़ा. वह स्टेशन पर बैठी थी, हाथ में छोटा बैग और आंखों में टूटा हुआ आसमान लिए.

‘‘अब कहां जाओगी?’’ राघव ने धीरे से पूछा.

मीरा ने सूनी हंसी हंस दी, ‘‘शायद वापस घर या शायद किसी और शहर. गरीब की जिंदगी तो मेले में छूटे बच्चे जैसी होती है.’’

राघव ने पहली बार उस का हाथ पकड़ा, ‘‘अगर नई जिंदगी शुरू करना चाहो तो मैं मदद करूंगा.’’

मीरा की आंखें भर आईं. बरसों बाद शायद किसी ने उसे इनसान समझ  कर बात की थी.

कुछ महीने बाद राघव ने अपने कसबे में छोटी पर्यटन एजेंसी शुरू की. वहां स्थानीय हस्तशिल्प, लोकनृत्य और गांव की संस्कृति दिखाने का काम होता था.

मीरा अब उसी एजेंसी में काम करती थी. वह विदेशी महिलाओं को राजस्थानी लोकगीत सिखाती, बच्चों को डांस सिखाती और कभीकभी मुसकरा कर कहती, ‘‘देखो, जिंदगी भी अजीब नाच है. कभी आदमी ताल पर नाचता है, कभी मजबूरी पर.’’

राघव जानता था कि कुछ घाव भरते नहीं, बस जीना सिखा देते हैं.

और शहर? वह आज भी चमक रहा था. बस फर्क इतना था कि अब राघव उस शहर की रोशनी के पीछे का अंधेरा पहचान चुका था.  Emotional Hindi Story

–पूनम पांडे

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