आप डैमीसैक्सुअल तो नहीं

आप ने अब तक सैक्सुअलिटी को ले कर कई शब्द सुने होंगे जैसे बाईसैक्सुअल, पैनसैक्सुअल, पौलिसैक्सुअल, असैक्सुअल, सेपोसैक्सुअल और भी कई तरह के शब्द. पर अब एक और नया शब्द सैक्सुअलिटी को ले कर एक नए रूप में आ रहा है और वह है डैमीसैक्सुअल. ये वे लोग हैं जो असैक्सुअलिटी के कगार पर हो सकते हैं पर पूरी तरह से अलैंगिक नहीं हैं. यदि आप किसी से सैक्सुअली आकर्षित होने से पहले अच्छे दोस्त होना पसंद करते हैं तो आप निश्चित रूप से डैमीसैक्सुअल हैं.

1. सैक्सुअलिटी की पहचान

यह जानने के कई तरीके हैं कि आप डैमीसैक्सुअल हैं या नहीं. सब से मुख्य तरीका यह है कि जब तक आप किसी से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ते, आप सैक्सुअल फीलिंग्स महसूस नहीं करते. आप के लिए भावनाएं महत्त्वपूर्ण हैं. आप सारी उम्र एक ही व्यक्ति से संबंध बना कर रह सकते हैं. आप प्रयोग से डरते हैं.

आप सैक्सुअल इंसान नहीं हैं, इस में कोई बुराई नहीं है. सैक्स के पीछे भागने से ज्यादा आप को जीवंत, वास्तविक बातचीत करना ज्यादा अच्छा लगता है. यदि आप किसी से रिलेशनशिप में हैं और उस से इमोशनली जुड़ हुए हैं तभी आप अपने पार्टनर के प्रति सैक्सुअली आकर्षित होते हैं. यदि आप सिंगल हैं, तो आप निश्चित रूप से सैक्स से ज्यादा पार्क में एक अच्छी सैर या अपनी पसंद की कोई चीज खाना पसंद करेंगे.

जिसे आप पसंद करती हैं, उस से मिलने के बाद आप उस के व्यक्तित्व से प्रभावित होंगी, उस के लुक्स से नहीं, इसलिए किसी भी चीज से पहले आप की उस से दोस्ती होगी. आप किसी से मिलने पर सैक्सुअल होने या फ्लर्टिंग में विश्वास नहीं रखते. यदि एक व्यक्ति ने आप को अपने व्यक्तित्व से प्रभावित किया है तो आप पहले दोस्ती में अपना हाथ बढ़ाएंगे. घंटों, हफ्तों, महीनों में ही डेटिंग शुरू करने की आप सोच भी नहीं सकते, फ्लर्टिंग आप के दिमाग में आती ही नहीं है.

2. आकर्षण के प्रकार

आकर्षण 2 तरह का होता है-प्राइमरी और सैकेंडरी. प्राइमरी आकर्षण में आप किसी के लुक्स से आकर्षित होते हैं और सैकेंडरी आकर्षण में आप किसी के व्यक्तित्व से प्रभावित होते हैं. यदि आप डैमीसैक्सुअल हैं तो आप निश्चित रूप से सैकेंडरी पर्सनैलिटी टाइप में फिट बैठते हैं. अब इस का मतलब यह नहीं है कि आप को कोई आकर्षित नहीं करता. बहुत लोग आप को आकर्षक लगे होंगे पर आप लुक्स पर ही संबंध नहीं बना सकते. आप तभी आगे बढ़ते हैं जब किसी का व्यक्तित्व आप को प्रभावित करता है.

जब आप के दिल में किसी के लिए फीलिंग्स पैदा होने लगती हैं, विशेषरूप से सैक्सुअल फीलिंग, तो आप दुविधा में पड़ जाते हैं, क्योंकि आप उतने सैक्सुअल पर्सन नहीं हैं. आप नहीं जानते कि इन फीलिंग्स पर क्या प्रतिक्रिया दें या उस व्यक्ति से कैसे शारीरिक कनैक्शन बनाएं. एक बार आप घबराहट और दुविधा की स्थिति से बाहर निकल गए, तो आप अपने पार्टनर से ही सैक्स करना चाहेंगे और किसी से भी नहीं. किसी से सैक्सुअली खुलने के लिए उसे बताएं कि आप उसे कितना प्यार करते हैं, क्योंकि आप बहुत भावुक हैं और फिर सैक्स आप दोनों के लिए बहुत कंफर्टेबल हो जाएगा.

3. लोगों का आप के प्रति नजरिया

क्योंकि आप सैक्स को ले कर ज्यादा नहीं सोचते, लोग सोच सकते हैं कि आप विवाह होने का इंतजार कर रहे हैं. वे आप को घमंडी और पुराने विचारों का समझ सकते हैं पर इस से आप विचलित न हों. जैसे हैं वैसे ही रहें. आप किसी स्विच को औनऔफ करने की तरह किसी से भी सैक्स नहीं कर सकते. लोगों को अपने मनोभावों पर स्पष्टीकरण देने की चिंता में पड़ें ही नहीं. आप को अपने आसपास हाइली सैक्सुअल लोगों से कोई समस्या भी नहीं होती है. बस आप स्वयं इस स्थिति से खुद को दूर रखते हैं, क्योंकि आप वैसे नहीं हैं. आप सही इंसान का इंतजार कर रहे हैं और अपना जीवन उस के साथ ही सैक्स कर के बिताना चाहते हैं. इस में कुछ भी गलत नहीं है.

डैमीसैक्सुअल होने का मतलब यह नहीं है कि आप को सैक्स पसंद नहीं है. आप को सैक्स पसंद है, सब को सैक्स पसंद होता है पर आप उसी के साथ सैक्स करना चाहते हैं जिस से आप का भावनात्मक जुड़ाव हो. जब सही इंसान आप को मिलता है, आप सैक्सुअली उस से जुड़ जाते हैं. बातचीत और बौंडिंग दोनों आप के लिए ज्यादा महत्त्व रखते हैं.

आप डैमीसैक्सुअल हैं तो आप को यह नहीं सोचना है कि यह कुछ गलत है. आप भावुक हैं, मन के मिले बिना तन से न जुड़ पाएं, तो इस में बुरा क्या है और मन मिलने पर तो आप खुल कर जीते ही हैं. यह बहुत अच्छा है. तो अपनी पसंद का व्यक्ति मिलने पर जीवन का आनंद उठाएं, प्रसन्न रहें.

होटल में सैक्स से मिलता है चरम सुख

पार्टनर के बीच प्यार,बातें और हर चीज शेयर हो लेकिन शारिरीक सुख न हो तो पार्टनर एक दूसरे से परेशान होने लगते है. दो पार्टनर के लिए ये जरूरी है कि उन्हे सैक्स का आनंद जरुर मिले. जिसके लिए वे कभी या कभी गार्डन या होटलों में सैक्स करना पसंद करते है लेकिन कहां कब ज्यादा सुख मिल सकता है इस बात की जानकारी इस आर्टिकल में देंगे.

जी हां, सुनकर आपको हैरानी हो लेंकिन पार्ट्नर्स को सैक्स का सुख होटल के कमरे में मिलता है. अक्सर लोग महसूस करते हैं कि होटल के कमरे में अपने साथी के साथ बनाया गया सैक्स संबंध घर के बेडरूम की तुलना में ज्यादा आनंददायक और संतुष्टि भरा होता है. यह किसी एक या दो व्यक्ति की सोच नहीं है, बल्कि 11 देशों में 2,200 लोगों पर किए गए शोध के दौरान यह बात सामने आई थी.

निष्कर्ष के मुताबिक, अधिकांश लोगों का जवाब था कि होटल में बनाए गए सेक्सुअल रिलेशन की अवधि घर की अपेक्षा काफी ज्यादा लगभग 25 से 49 मिनट के बीच रही. और यही नहीं, तीन में से एक के मुताबिक, घर की तुलना में होटल में सैक्स के दौरान उन्हें चरम सुख मिला.

इस शोध में कनाडा और ओस्ट्रेलियाई लोगों का पता चला कि वे घर से ज्यादा होटल में सैक्स रिलेशन बनाना पसंद करते है. उनकी सैक्स पावर भी घर के रुम से ज्यादा लिमिटेड टाइम पर होती है. जिससे वे सैक्स का भरपूर आनंद ले पाते ैहै.

ऐसा भारत देश में भी है ज्वाइंट फैमिली, सिंगल फैमिली होते है औरत और मर्द संबंध बनाने के लिए रात को इंतजार करते है और एक समय निधारित करते है इससे आप एक कंट्रोल में आ जाते है जबकि सैक्स एक प्राकृतिक एनर्जी की तरह काम करती है जो किसी भी वक्त हो सकती है.

घर का माहौल ही पारिवारिक होता है जहां बच्चा बूढ़ा सभी होते है तो सैक्स का अच्छा समय बाहर रूमे में करना होता है. इससे सैक्स में फोकस भी बना रहता है और आप अपने पार्टनर के साथ अच्छे से सैक्स भी कर सकते है. इससे आपको सैक्स में सुख मिलेगा और सैक्स के बाद होने वाली खुशी भी मिलेंगी. इसके साथ ही आप कुछ रोमांटिक पोज भी ट्राएं कर सकते है.

  • बटरफ्लाई सैक्स पोजीशन
  • डौगी स्टाइल
  • स्टैंडिंग अप

होटल का माहौल

सैक्स ड्राइव का मजा लेने के लिए होटल का माहौल बहुत ज्यादा मायने रखता है. आरामदायक बिस्तर , धीमी सी लाइट किसी को भी उत्साहित करने के लिए काफी है. होटल के कमरे में मिनीबार वहां का एक और आकर्षण हो सकता है जो आपके प्रवास के दौरान यौन कामेच्छा को बढ़ाएगा.

6 टिप्स: जानें सेक्स के दौरान महिलाओं को कौन सी चीज बना देती है दीवाना

महिलाओं का सेक्स आनंद एक ऐसा विषय है जिस पर अक्सर काफी अध्ययन और सर्वे किया जाता रहा है. लेकिन अब तक की गई रिसर्च सामान्य ही रही है. जैसे कि यह एक जाना माना तथ्य है कि फोरप्ले और विविधता लड़कियों के चरम के लिए अच्छे हैं.

  1. रसभरी जानकारियां

किन्तु विशिष्ट जानकारी का क्या? जब बात महिलाओं को एक विशेष तरीके से स्पर्श करने की आती है, तो शायद अब तक की गई शोध कोई खास मददगार साबित नही हो पाती. उंगली को असल में कहां घुमाना है, किस तरह से घुमाना है और कितना स्पर्श जरूरी है.

महिलाओं के ओर्गास्म और सेक्स आनंद की रसभरी और विशिष्ट जानकारी पाने के लिए प्रतिबद्ध शोधकर्ता समूह ने अलग अलग उम्र की 1000 महिलाओं पर एक सर्वे किया. यह सर्वे ओ एम जी व्हाई रिसर्च कंपनी की प्लेजर रिपोर्ट सर्वे का हिस्सा था. यह संस्थान महिला सेक्स आनंद से जुड़े तथ्यों पर वेबसाइट चलाता है.

गोपनीय रखे गए सर्वे में महिलाओं से शोधकर्ताओं ने इस तरह के प्रश्न पूछे, जैसे कि: कितना दबाव पर्याप्त लगता है? आपके साथी के कौनसे स्पर्श ने आपको सबसे ज़्यादा आनंद दिया? कुछ ओर्गास्म दूसरे ओर्गास्म से बेहतर क्यों लगते हैं? आपको एक से अधिक ओर्गास्म एक साथ होते हैं?

2. एहसास को लाजवाब क्या बनाता है?

रिसर्चकर्ताओं ने जाना कि सहवास के दौरान होने वाले ओर्गास्म में भगशिश्न (क्लाइटोरिस) की अहम भूमिका है. करीब 36 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि इसके बिना उन्हें ओर्गास्म नही होता और 36 प्रतिशत ने कहा कि क्लाइटोरिस उत्तेजन उनके ओर्गास्म को बेहतर बना देता है.

बेहतर ओर्गास्म की बात की जाए तो महिलाओं ने माना कि ओर्गास्म के आनंद का स्तर अलग अलग होता है. तो एक ओर्गास्म को दूसरे से बेहतर कैसे किया जा सकता है? 75 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उत्तेजना यदि धीरे धीरे बने, तो उसका अंत फल ज्यादा मीठा महसूस होता है. करीब आधी महिलाओं का ये भी कहना था कि अगर उनके साथी के प्रति उनका भावनात्मक जुड़ाव हो तो भी ओर्गास्म बेहतर महसूस होता है. एक दिलचस्प तथ्य ये था कि अधिकतर महिलाओं ने कहा कि सेक्स के देर तक चलने का ओर्गास्म के बेहतर होने से कोई संबंध नहीं है.

3. सही स्पर्श

जननांग के स्पर्श  के मामले में सही जगह और तरीका काफी हद तक महिला विशेष की पसंद पर ही निर्भर था. जैसे कि करीब हर 3 में से 2 महिलाओं ने कहा कि क्लाइटोरिस पर सीधा स्पर्श उन्हें पसंद था जबकि 45 प्रतिशत को सीधा स्पर्श नापसन्द था.

अधिकतर महिलाओं को हल्का, कम दबाव का स्पर्श पसंद था. रिसर्चकर्ताओं ने यह भी पाया कि केवल 10 प्रतिशत महिलाओं को अधिक दबाव से अच्छा महसूस होता है.

4. गति की महत्ता

गति का महत्व भी इस रिसर्च में समझाया गया. 60 प्रतिशत महिलाओं को ऊपर नीचे की लय पसंद थी, जबकि आधी से ज़्यादा को गोल गति. 20-30 प्रतिशत महिलाओं को एक तरफ़ से दूसरी तरफ़ की गति और दबाव अधिक सुहाता था.

कुछ तकनीक महिलाओं को बेसुध कर देने में सक्षम है, शोधकर्ताओं ने जाना. एक विशेष लय में स्पर्श, गोलाई में छुअन और फिर गतियों और लय का मिश्रण- ये सभी अच्छे तरीके हैं. तीव्रता में भी विविधता लाना आवश्यक है.

5. आनंद वृद्धि

ओर्गास्म को विलम्बित करना सेक्स के आनंद को दोगुना करने में सक्षम हो सकता है. आखिर ये कैसे किया जाता है? अध्ययन में भाग लेने वाली महिलाओं ने बताया कि उत्तेजक अंगों पर स्पर्श रोक कर कुछ पल बाद फिर से कम तीव्र लय से शुरुआत करने से ऐसा किया जा सकता है.

करीब आधी महिलाओं को बहु ओर्गास्म हो चुके थे. 53 प्रतिशत के अनुसार ओर्गास्म के बाद फिर से शुरुआत से शुरू करना बेहतर है, 33 प्रतिशत ने माना कि ओर्गास्म के बाद उत्तेजन वहीं से जारी बेहतर है और इसी संख्या में महिलाओं ने कहा कि ओर्गास्म के बाद कुछ अलग तरह के उत्तेजन की आवश्यकता होती है.

6. संवाद कुंजी है

ये तो स्पष्ट है कि महिलाओं के सेक्स आनंद में काफी विभिन्नताएं हैं. शोधकर्ता मानते हैं कि धीरे, तेज, ऊपर नीचे, हल्का दबाव, ज़्यादा दबाव, हर महिला की व्यक्तिगत पसंद नापसंद हो सकती है.

इसलिए समझने वाली बात ये है कि अंदाजा लगाने की बजाय महिला की पसंद जानने के लिए दोनों साथियों के बीच बेहतर संवाद हो. बेहतर आनंद के लिए चार बातें पता लगाना जरूरी है – स्थान, दबाव, लय और गति.

पूरे दिन में ये है सेक्स के लिये सबसे बेहतर समय

सेक्स के लिये दोपहर तीन बजे का समय सबसे बेहतर माना जाता है लेकिन ये बात अलग है कि उस समय ज्यादातर लोग औफिस में होते हैं.

हार्मोन विशेषज्ञ एलिसा विटी के अनुसार ये वो समय होता है जब पुरुष और महिला की सेक्स की इच्छा बराबर की होती है. दोपहर को महिला का हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है जिससे वह अधिक ऊर्जावान हो जाती है. इसी समय पुरुष का भी एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ा रहता है जिसकी वजह से सेक्स के दौरान दोनों भावनात्मक रुप से एक दूसरे के और करीब आ जाते हैं.

एलिसा का कहना है कि दोपहर के समय सेक्स करने से सबसे ज्यादा संतुष्टि मिलती है. इस समय जहां महिला को जहां पुरुष से भावनात्मक लगाव मिलता है वही सेक्स का परम आनंद भी प्राप्त होता है.

एलिसा के अनुसार सोते समय पुरुष के शरीर में टेस्टोस्टेरोन बनता है जो उत्तेजना के बेहद जरुरी हार्मोन होता है. इसका स्तर बहुत सुबह या कुछ देर बाद चरम पर पहुंच जाता है, इसलिये ये समय सेक्स के लिये बेहतर होता है. इस समय सेक्स करने करने के लिये पहल करने की पुरुषों की ज्यादा दिलचस्पी रहती है और वे बेहतर तरीके से सेक्स करते हैं.

लेकिन पुरुषों के लिये सेक्स करने का दोपहर का भी समय बोहतर होता है क्योंकि जहां उनका टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है वहीं एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है.

एलिसा का ये भी कहना है कि अंडोत्सर्ग (ovulation) के दस दिन के बाद का समय सेक्स के लिये बहुत अच्छा होता है, क्योंकि इस समय महिला का एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है जिससे सेक्स की तीव्र इच्छा पैदा होती है.

इसके पहले के शोध में कहा गया है कि सुबह सेक्स के लिये सबसे अच्छा समय होता है क्योंकि उस समय पुरुष और महिला एकदम तरोताज़ा रहते हैं.

जानें महिला और पुरुष कब करना चाहते है सैक्स

महिलाओं और पुरुषों में यौनक्रीड़ा की इच्छा का समय अलग-अलग होता है. एक सर्वेक्षण से यह बात और स्पष्ट हो गई है कि महिलाओं में सोने से पहले रात के 11.21 बजे यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है. वहीं पुरुषों में सुबह के 7.54 बजे यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है.

सर्वेक्षण के शोध में पता चला है कि महिलाओं में रात के 11 बजे से दो बजे तक यौनसंबंध बनाने की इच्छा चरम पर होती है, जबकि पुरुषों में सुबह पांच बजे से नौ बजे तक यौन संबंध बनाने की इच्छा प्रबल होती है.

एक अखबार के मुताबिक, लवहनी के सहसंस्थापक रिचर्ड लांगहर्स्ट ने कहा, “पुरुष नाश्ते के पहले यौनसंबंध बनाने के लिए तैयार रहते हैं, जबकि महिलाएं रात के समय यौनसंबंध बनाना चाहती हैं.”

ब्रिटेन में 2,300 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण में यह भी निष्कर्ष निकला है कि लोग उस साथी के साथ घर बसाना चाहते हैं जिनमें यौन संबंध बनाने की समान प्रवृत्ति हो.

सेक्सटॉयज बनाने वाली कंपनी लवहनी द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में पता चला है कि 68 फीसदी महिलाओं और 63 फीसदी पुरुषों ने किसी ऐसे व्यक्ति से प्रेम संबंध बनाए हैं जिसकी यौन रुचि स्वयं की यौन रुचि से अलग थी.

सर्वेक्षण में पता चला है कि पुरुषों में सुबह के समय यौनसंबंध बनाने की इच्छा प्रबल होती है, लेकिन इस दौरान मात्र 11 फीसदी महिलाओं में ही यौनसंबंधों की इच्छा होती है. वहीं सोने से पहले केवल 16 फीसदी पुरुष ही यौन संबंध बनाने के इच्छुक होते हैं.

जानिए आखिर महिलाएं सेक्स क्यों करती हैं

महिलाएं किसी पुरुष को आखिर क्‍यों पसंद करती हैं? और ऐसी कौन सी खास बात है जिससे प्रभावित होकर वह किसी पुरुष के साथ सेक्‍सुअल संबंध बनाने के लिए अपने आप को राजी करती हैं? इस तथ्‍य पर रिसर्च करने के बाद टैक्‍सास विवि के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर्स सिंडी मेस्टन और डेविड बस ने एक किताब लिखी है. इस किताब का नाम है वॉय वुमन हैव सेक्‍स. किताब सेक्‍स संबंधों को लेकर महिलाएं क्‍या सोचती हैं? इस सवाल पर कई रोचक खुलासे करती है, किताब में इस बात के 200 कारण बताए गए है, जिनके चलते महिलाएं किसी पुरुष के साथ सेक्‍सुअल संबंध बनाती हैं या उसे पसंद करती हैं.

टेक्सस यूनिवर्सिटी में साइकॉलजी के प्रोफेसर्स सिंडी मेस्टन और डेविड बस की लिखी किताब – वाय वुमेन हेव सेक्स ( महिलाएं सेक्स क्यों करती हैं ) में करीब 200 कारणों को बताया गया है.

रिसर्च के दौरान देखा गया कि ज्यादातर पुरुषों को महिलाएं सेक्सुअली अट्रैक्टिव लगती हैं , जबिक महिलाओं को पुरुषों में ऐसी कोई बात नज़र नहीं आती. रिसर्च के दौरान 1000 महिलाओं का इंटरव्यू किया , जिसमें महिलाओं ने पुरुषों के साथ सोने के अपने कारण बताए.

एक महिला ने बताया – वह सेक्स इसलिए करती है ताकि बोरियत दूर कर सके क्योंकि सेक्स करना लड़ने से कहीं आसान है. जबकि कुछ दूसरी महिलाओं के लिए यह माइग्रेन और सिरदर्द दूर भगाने का उपचार है.

रिसर्च में कुछ महिलाओं ने ऐसी बातें भी कहीं जिन्हें सुनकर हैरानी हो सकती है. कुछ महिलाएं महज दया की वजह से पुरुषों के साथ सोती हैं जबकि कुछ महिलाएं अपने स्वार्थ के लिए सेक्स का इस्तेमाल करती हैं जैसे रुपये – पैसों के लिए और दूसरी कीमतों चीजों को हासिल करने के लिए.

कुछ ने कहा – मैंने किसी पुरुष के साथ इसलिए संबंध बनाए क्योंकि उसने मेरे लिए एक शानदार डिनर का आयोजन किया या उसने मुझ पर काफी रुपये खर्च किए.

यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों पर किए गए इस सर्वे में 10 में से 6 ने माना कि वह आमतौर पर ऐसे पुरुष के साथ सो चुकी हैं जो उनका बॉयफ्रेंड नहीं हैं. कुछ ने कहा – वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि अपनी सेक्सुअल परफॉर्मंस को इंप्रूव कर सकें. यही बताते हुए एक विद्यार्थी ने कहा – मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ इसलिए सेक्स किया ताकि मैं अपने सेक्सुअल स्किल्स को और बेहतर बना सकूं.

इस रिसर्च में यह भी पता चला कि महिलाएं ऐसे पुरुषों पर ज्यादा आकर्षित होती हैं जो लंबे हों, जिनकी आवाज़ रौबदार हो और जिनके शरीर से मदहोश कर देने वाली महक आती हो.

पिता बनने में परेशानी बन सकता है गलत अंडरवियर, जानें कैसे

Sex News in Hindi: ज्यादातर पुरुष 2 ही तरह के अंडरवियर पहनना पसंद करते है और वे दो हैं बौक्सर और ब्रीफ. मार्केट में बिकने वाले हजारों में से अपने लिए सही अंडरवियर चुनना काफी मुश्किल हो सकता है. क्या आप जानते हैं कि गलत अंडरवियर आपके लिए काफी सारी परेशानियां खड़ी कर सकता है और उन बीमारियों में से एक मुख्य बीमारी है शुक्राणुओं की कमी.

25 प्रतिशत तक कम हो सकता है स्पर्म काउंट…

जी हां गलत अंडरवियर पहनने से आपका पिता बनना मुश्किल हो सकता है. एक रिसर्च के मुताबिक जो पुरुष टाइट अंडरवियर पहनते हैं उन पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या 25 प्रतिशत तक कम हो सकती है और यही नहीं बल्कि टाइट अंडरवियर से स्पर्म काउंट और क्वालिटी दोनों कम हो सकते हैं.

अगर कंपेयर किया जाए तो जो पुरुष टाइट अंडरवियर ना पहन के ढीले अंडरवियर पहनना पसंद करते हैं उन पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी काफी बेहतर होती है उन पुरुषों से जो टाइट अंडरवियर पहनते हैं. स्पर्म काउंट और क्वालिटी पुरुषों के पिता बनने में काफी प्रभाव डालता है.

स्टाइलिश के साथ खतरनाक भी है टाइट अंडरवियर…

बौक्सर अंडरवियर हमारी जांघों के पास से ढीले होते हैं जो काफी कंफरटेबल होते हैं और वहीं दूसरी तरफ ब्रीफ अंडरवियर की शुरुआत बौक्सर के मुताबिक काफी समय बाद हुई था और ब्रीफ अंडरवियर बिकनी की तरह बौडी से चिपका होता है और इसकी टाइट फिटिंग की वजह से ये काफी स्टाइलिश लगता है. यही कारण है कि आज कल के लड़के ब्रीफ पहनना ज्यादा पसंद करते हैं.

अंडकोषों का तापमान होना चाहिए कम…

टाइट अंडरवियर पहनने से स्पर्म क्वालिटी काफी हद तक प्रभावित होती है क्योंकि पुरुषों में स्पर्म टेस्टिस यानी अंडकोष में होता है जिसका तापमान से काफी असर पड़ता है. हमारे शरीर का तापमान वैसे ही काफी गरम होता है और हमारे शरीर के अनुसार अंडकोषों का तापमान 2-4 डिग्री सेल्सियस तक कम काफी जरूरी है.

यही कारण है कि टाइट अंडरवियर पहनने से शरीर से निकलने वाली गर्मी के कारण अंडकोष भी गर्म हो जाते हैं और स्पर्म क्वालिटी खराब हो जाती है. हमें जितना हो सके ढीले अंडरवियर पहनने चाहिए ताकी हमारे शरीर के अनुसार अंडकोषों का तापमान कम रह सके.

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