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Sachhi Salah : कालेज के बाहर गुंडेमवालियों का जमावड़ा रहता है

Sachhi Salah-

सवाल : मैं 22 साल की लड़की हूं और उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में रहती हूं. जिस कालेज में मैं पढ़ती हूं उस के बाहर गुंडेमवालियों का जमावड़ा रहता है खासकर छुट्टी के समय. वे हर लड़की पर फब्तियां कसते हैं और गंदे इशारे भी करते हैं. एक बार तो एक गुंडे ने एक लड़की की चुन्नी खींच ली थी.

हम ने इस बात की शिकायत कालेज प्रशासन से भी की पर कोई खास फायदा नहीं हुआ. पुलिस भी खानापूरी के लिए वहां गश्त लगा कर अपनी ड्यूटी पूरी कर लेती है. आजकल लड़कियों के साथ बहुत बुरी वारदात होती रहती हैं. क्या जब कोई ऐसी वारदात हो जाएगी, तभी प्रशासन और सरकार जागेगी. आप सलाह दीजिए कि हम लड़कियां क्या करें?

जवाब: प्रशासन और सरकार के जागने जैसी क्रांतिकारी बातें मीडिया वालों के लिए छोड़ दें. अगर कालेज और पुलिस प्रशासन अपनी ड्यूटी को सही से अंजाम नहीं दे रहा है तो आप सभी लड़कियों को एकजुट हो कर गुंडेमवालियों का सामना करना चाहिए. हर लड़की को तन और मन से बनना जरूरी है.

एकाध बार सभी लड़कियां मिल कर एकाध गुंडे की धुनाई बीच सड़क पर कर दें तो इन गुंडेमवालियों के हौसले पस्त होंगे और कोई भी बदतमीजी करने से पहले वे हजार बार सोचेंगे.

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सवाल:   मैं 21 साल का लड़का हूं और राजस्थान के जयपुर शहर में रहता हूं. हमारे यहां विदेशी सैलानी बहुत आते हैं, जिन्हें गाइड की बहुत जरूरत पड़ती है. मेरी अंगरेजी अच्छी है और मु झे अपने शहर की जानकारी बहुत है. मैं काफी बार बतौर गाइड विदेशी टूरिस्ट के साथ किलों में भी जा चुका हूं, पर मु झ में एक हीनता है कि मेरी सूरत ज्यादा अच्छी नहीं है. मैं रंग का भी दबा हुआ हूं. हालांकि, कभी किसी टूरिस्ट ने कोई शिकायत नहीं की, पर मैं यह बात अपने मन से नहीं निकाल पा रहा हूं. मु झे क्या करना चाहिए?

जवाब: आप की हीनता आप के ही अंदर का कौम्प्लैक्स है, इसलिए बेकार का तनाव न लें.  हमेशा टिपटौप और बनसंवर कर रहा करें. किसी की भी पहचान उस के काम से होती है. अभी तक किसी टूरिस्ट ने इस बाबत कुछ नहीं कहा है इसलिए यह कोई खास चिंता की बात नहीं है. रंग निखारने के लिए स्किन ट्रीटमैंट ले सकते हैं.

अपनी अंगरेजी और सुधारें और यह याद रखें कि जैसे हमें सभी विदेशी गोरे लगते हैं वैसे ही सभी गोरों को हम भारतीय एक से काले लगते हैं. दूसरे, वे भारत घूमने के लिए आते हैं किसी की शक्लसूरत देखने और जांचने नहीं आते.

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सवाल: मैं 22 साल की लड़की हूं और चंडीगढ़ में रहती हूं. मेरा एक बौयफ्रैंड है और उस की उम्र 25 साल है. हम दोनों ने खूब हमबिस्तरी की है. मैं ने 2 बार अबौर्शन भी कराया है. पर अब वह लड़का मु झ में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है.

ऐसा लगता है उस की पुरानी गर्लफ्रैंड उस की जिंदगी में दोबारा लौट आई है. वह उस से मोबाइल पर खूब चैटिंग करता है और बात भी करता है. पूछने पर बोलता है कि उस लड़की को कोई काम था, वह तो बस उस की मदद कर रहा है.

मुझे बस एक बार क्लियर करना है कि वह असल में चाहता क्या है ताकि मैं अपने भविष्य को ले कर कोई फैसला कर सकूं. मेरे घर वाले जल्द ही मेरी शादी कर देना चाहते हैं. मैं क्या करूं?

जवाब : महज शक की बिना पर कोई फैसला न लें. अगर कंफर्म हों तो बेहतर होगा कि अपने बौयफ्रैंड से दूरी बना लें जो अब आप के लिए थोड़ा दिक्कत वाला काम है. असल में आप भी उस की और हमबिस्तरी की आदी हो चुकी हैं और 2 बार अबौर्शन भी करा चुकी हैं.

जाहिर है, जज्बाती तौर पर भी आप उस से बहुत कनैक्ट हो गई हैं. यह सोचना बेमानी है कि वह पुरानी गलफ्रैंड के बाबत सच बताएगा और बता भी देगा तो आप क्या ही कर लेंगी. अपने किए पर ही खीजेंगी. आप के लिए बेहतर यही होगा कि घर वाले जहां कहें शादी कर लें.

ब्रेकअप के पहले प्यार से या किसी बहाने से बौयफ्रैंड का मोबाइल  झटक कर अपने फोटो व चैट डिलीट करने की कोशिश करें.

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें. मोबाइल नंबर : 08826099608

Healthy Lifestyle : न जाति न रंग हैल्थ और ब्यूटी जरूरी

Healthy Lifestyle.दिल्ली की एक मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू चल रहा था. करीब 24 साल की नेहा भी उम्मीदवारों की लंबी कतार में खड़ी थी. वहां ज्यादातर लड़कियां भारी मेकअप और ब्रांडेड कपड़ों में दिख रही थीं, मगर नेहा ने महंगे ब्रांड के कपड़े नहीं पहने थे, न ही चेहरे पर भारी मेकअप था.

नेहा ने सिर्फ सादे और साफसुथरे कपड़े पहन रखे थे. लेकिन उस के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी. वह आत्मविश्वास से भरी हुई थी, उस की मुस्कान सहज थी और बातचीत में ऊर्जा साफ दिखाई दे रही थी.

इंटरव्यू के बाद कंपनी के एचआर अधिकारी ने नेहा से मुसकरा कर कहा, ‘‘आप की सब से बड़ी ताकत आप की डिगरी नहीं, बल्कि आप का आत्मविश्वास है. आप को हमारी कंपनी में काम कर के अच्छा लगेगा और हमें भी आप जैसे ऊर्जावान वर्कर्स को पा कर ख़ुशी होगी.’’

यह सिर्फ नेहा की कहानी नहीं है. आज हजारों लड़कियों के सामने यही चुनौती है कि वे खूबसूरत दिखने की दौड़ में अपनी सेहत को कहीं पीछे छोड़ देती हैं.

दिल्ली की मनोचिकित्सक डाक्टर सुगंधा गुप्ता की राय है कि लड़कियों को अपने तन और मन की सेहत पर ज्यादा फोकस करने की जरूरत है. ब्यूटी या ड्रैसिंग सैंस के साथ सेहत का अच्छा होना बहुत जरूरी है. आजकल दफ्तरों में जाति नहीं पूछते, बल्कि अगर आप की सेहत अच्छी है, आप ऊर्जावान हैं तो उस की चमक आपके चेहरे से ही दिखने लगती है और आप को खूबसूरत बनाती है.

डाक्टर सुगंधा गुप्ता की बात सौ फीसदी सच है. आज का दौर पहले से बिलकुल अलग है. लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. वे डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, पायलट, खिलाड़ी, पुलिस अफसर, उद्यमी और बड़े कौरपोरेट संस्थानों की प्रमुख तक बन रही हैं.

ऐसे समय में केवल खूबसूरत दिखना या फैशनेबल कपड़े पहनना ही काफी नहीं है. असली ताकत अच्छी सेहत, आत्मविश्वास और ऊर्जा में छिपी होती है. यही वह चीज है जो किसी भी लड़की की शख्सीयत को सब से अलग बनाती है.

सोशल मीडिया के दौर में अकसर लड़कियों पर ‘परफैक्ट दिखने’ का दबाव बनाया जाता है. महंगे कपड़े, महंगा मेकअप, गोरी त्वचा और पतली कमर को ही खूबसूरती का पैमाना बना दिया गया है.

लेकिन यह सोच अधूरी है. यदि शरीर सेहतमंद नहीं है, हर समय थकान रहती है, खून की कमी है, तनाव बना रहता है या बारबार बीमारी घेर लेती है, तो महंगे से महंगे कपड़े और कौस्मैटिक क्रीम भी चेहरे पर असली चमक नहीं ला सकते.

आज कंपनियां और संस्थान केवल किसी की जाति, धर्म या बाहरी रूप देख कर नौकरी नहीं देते हैं. वे ऐसे लोगों को अहमियत देते हैं, जो मानसिक और शारीरिक रूप से सेहतमंद हों, जिन में काम करने की ऊर्जा हो, सीखने की समझ  हो और जो लंबे समय तक असरदार ढंग से काम कर सकें.

‘‘एक ऊर्जावान इनसान का आत्मविश्वास उस के चेहरे, बातचीत और काम करने के तरीके में साफ दिखाई देता है. यही कुदरती चमक सब से आकर्षक होती है.

भारत में महिलाओं की सेहत के हालात अभी भी चिंता की बात हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के मुताबिक, 15 से 49 साल की तकरीबन आधी महिलाएं एनीमिया यानी खून की कमी से जू?ा रही हैं. खून की कमी के चलते कमजोरी, चक्कर आना, जल्दी थक जाना और पढ़ाई या नौकरी में प्रदर्शन पर असर पड़ता है.

दूसरी ओर, शहरी इलाकों में मोटापा, मधुमेह, तनाव और हार्मोन संबंधी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. इस की एक बड़ी वजह गलत लाइफस्टाइल, जंक फूड और शारीरिक एक्टिविटी की कमी है.

अच्छी सेहत का मतलब है संतुलित भोजन, सही नींद, रोजाना कसरत, मानसिक शांति और समय पर सेहत की जांच. अगर कोई लड़की रोज कम से कम 30 मिनट तेज चलती है, कसरत करती है या कोई खेल खेलती है, तो उस का शरीर ही नहीं, बल्कि उस का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है. रोजाना कसरत से तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ाता है और शरीर को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखता है.

खानपान पर भी खास ध्यान देना जरूरी है. अकसर पढ़ाई या नौकरी के तनाव में कई लड़कियां नाश्ता छोड़ देती हैं या पूरे दिन चायकौफी व पैकेट वाले स्नैक्स पर निर्भर रहती हैं. यह आदत धीरेधीरे शरीर को कमजोर करती है.

कामकाजी लड़कियों की मानसिक सेहत अच्छी होना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक सेहत. लगातार तुलना, सोशल मीडिया का दबाव, पढ़ाई, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां कई बार तनाव बढ़ा देती हैं. अगर मन सही नहीं होगा तो शरीर भी प्रभावित होगा, इसलिए पूरी नींद लेना, परिवार और दोस्तों से खुल कर बात करना, अपनी रुचियों के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए.

आखिरकार, यह समझना होगा कि खूबसूरती केवल चेहरे की नहीं, बल्कि पूरी शख्सीयत की होती है. अच्छी सेहत से मिलने वाली चमक किसी भी मेकअप से ज्यादा टिकाऊ और असरदार होती है. सेहतमंद शरीर, पौजिटिव सोच और आत्मविश्वास मिल कर ऐसी पहचान बनाते हैं, जिसे कोई फैशन कभी पीछे नहीं छोड़ सकता.

आज की लड़कियों के लिए सब से बड़ा फैशन ट्रैंड महंगे कपड़े या ब्रांडेड मेकअप नहीं, बल्कि फिट और सेहतमंद लाइफस्टाइल होनी चाहिए, क्योंकि जब शरीर सेहतमंद होता है, मन खुश होता है और ऊर्जा भरपूर होती है, तब कामयाबी भी कदम चूमती है और चेहरे पर वह कुदरती चमक दिखाई देती है, जिसे दुनिया की कोई भी कौस्मैटिक क्रीम नहीं दे सकती. यही असली खूबसूरती है और यही हर लड़की की सब से बड़ी पूंजी है.    Healthy Lifestyle

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