Hindi Story: छुटकी नहीं… बड़की

 Hindi Story: फजल और हिना की शादी को 7 साल हो गए थे, पर उन्हें अभी तक एक भी औलाद नहीं हो सकी थी. लखनऊ के नामीगिरामी डाक्टरों का इलाज करवाया जा चुका था. हजारों रुपए के टैस्ट करवाए गए, पर सब फुजूलडाक्टरों ने हिना और फजल दोनों के टैस्ट की रिपोर्ट आने के बाद यही बताया था कि दोनों की जिस्मानी हालत बिलकुल ठीक नहीं है. हालांकि वे दोनों बच्चा पैदा करने में पूरी तरह से काबिल हैं, पर अगर फिर भी बच्चा नहीं हो रहा है तो सही समय का इंतजार करें. फजल के घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. वह घर में मंझला भाई था. बड़े भाई के 3 बच्चे थे, 2 बेटे और एक बेटी. फजल का एक छोटा भाई हैदर था, जिस का हाल ही में निकाह हुआ था.

फजल की कमाई का जरीया उस की आरा मशीन थी, जो घर से कुछ ही दूरी पर लगी हुई थी. उस पर इतना काम आता कि काम बंद करतेकरते ही रात के 9 भी बज जाते थे. तकरीबन 15 आरा मशीन पर नौकर लगे हुए थे, जो बड़ी ईमानदारी से काम करते थे. पुराने लखनऊ में तिमंजिला मकान होना अपनेआप में बहुत बड़ी बात थी और चारपहियों की 2 गाडि़यां भी फजल के दरवाजे पर खड़ी रह कर शान बढ़ाती थीं. फजल के पास तो काम की कमी थी और ही पैसे कीउस की और हिना की जिंदगी में एक औलाद की कमी जरूर थी और यह कमी फजल को अब और भी खलने लगी, जब छोटे भाई हैदर के निकाह के साल के अंदर ही वह भी एक चांद जैसी बेटी का बाप बन गया.

‘‘जीशादी के 2 सालों तक औलाद नहीं हुई तो अब हमें औलाद क्या होगी, इसीलिए मैं चाहती हूं कि हम कोई बच्चा गोद ले लें,’’ एक दिन हिना ने कहा. ‘‘तुम भी क्या बेकार की बात करती होडाक्टर ने कहा है कि मेरी मर्दानगी में कोई कमी नहीं है और ही तुम में कोई कमी है और फिर 2 सालों में तुम्हें 2 बार बच्चा ठहर भी तो चुका है‘‘अब यह अलग बात है कि तुम उन्हें संभाल नहीं पाई और तुम को 2 महीने
पर ही गर्भपात हो गयाहम फिर से कोशिश करेंगे और हमें औलाद जरूर होगी,’’ फजल ने हिना को समझाया. हिना की बच्चे को गोद लेने वाली बात से शायद फजल के आत्मसम्मान को ठेस लग गई थी, इसीलिए वह हिना पर झल्ला उठा था. हिना उस समय तो फजल की बात का कोई जवाब नहीं दे पाई, पर एक औलाद होने के गम में वह अंदर ही अंदर घुटने लगी और परेशान रहने लगी.

2 साल का समय और गुजर गया. अब भी हिना मां नहीं बन पाई थी और एक दिन अचानक वह बहुत बीमार पड़ गई. उसे डाक्टरों को दिखाया गया. ‘‘देखिए, इन्हें अंदरूनी कमजोरी है और ब्लड प्रैशर बढ़ा हुआ हैआप लोग इन्हें ज्यादा से ज्यादा खुश रखने की कोशिश कीजिएइन की बीमारी अपनेआप ठीक हो जाएगी,’’ डाक्टर कह कर चला गया. फजल को पता था कि हिना खुश क्यों नहीं रह पा रही है. शादी के इतने साल बाद भी वह मां नहीं बन पाई है. परेशान हालत में वह अपनी आरा मशीन पर बैठा हुआ लकडि़यों के एक ठूंठ को देख रहा था. ‘‘सब खैरियत तो है फजल बाबू,’’ आरा मशीन पर काम करने वाले सज्जाद मुंशी ने पूछा. ‘‘अरे कहां सज्जाद भाईमेरी दिक्कतें तो आप को पता ही हैंपर, अब हिना ने मां बन पाने की बात को अपने जेहन की गहराइयों में बिठा लिया हैलिहाजा, बीमार हो कर वह बिस्तर पर पड़ी है

‘‘हां, एक बार उस ने एक बच्चा गोद लेने की फरमाइश जरूर की थी, पर मैं ने उसे मना कर दिया, क्योंकि मुझे लगता है कि मेरे भाइयों के बच्चे भी तो मेरे बच्चे हैंतो भला बच्चा गोद लेने की जरूरत है?’’ फजल उसे बता रहा था. ‘‘तो इस में परेशानी क्या हैआप किसी बच्चे को गोद ले सकते हैं,’’ सज्जाद मुंशी ने कहा. ‘‘ऐसे हर किसी राह चलते का बच्चा तो गोद नहीं लिया जा सकता सज्जाद भाईकोई ऐसा हो, जिसे हम जानते होंउस के परिवार को जानते होंउन के परिवार में कोई ऐब हो तो ही ठीक हैवरना हम बेऔलाद ही मर जाएं तो बेहतर होगा,’’ फजल ने लंबी सांस भरते हुए कहा.

‘‘ऐसी बात मत कहिए हुजूरवैसे, अगर आप चाहें तो इस नाचीज का बच्चा गोद ले सकते हैं. अभी मेरी बीवी ने कोई 10 दिन पहले ही एक बेटी को जन्म दिया है. आप तो जानते ही हैं कि मेरे पहले से ही 3 लड़कियां हैंएक लड़के की चाह में मेरा परिवार बड़ा होता गया‘‘अब इतनी महंगाई के दौर में 4 लड़कियों को पालनामेरे लिए भी मुश्किल होगा शुरुआत से आप बच्ची को साथ रखेंगे, तो वह आप को अब्बू और हिना को अम्मी ही समझेगी,’’ सज्जाद मुंशी ने कहा. ‘‘तुम्हारी बेटी को मैं गोद ले लूं, पर क्या तुम्हारी बीवी इस के लिए राजी हो जाएगी?’’ फजल ने पूछा.

‘‘मेरी अपनी बीवी को तो मैं मना लूंगाऔर फिर मेरा बच्चा आप जैसे शरीफ आदमी के घर पलेगा तो इस से बड़ी सुकून देने वाली बात मेरे लिए और क्या होगीयह हम 2 लोगों की जबान का मामला है इस में किसी कोर्ट की जरूरत होगी और ही किसी कागजी कार्यवाही की‘‘मैं कसम खाता हूं कि इस बच्चे को आप को सौंपने के बाद उस पर कभी हक नहीं जताऊंगा,’’ सज्जाद ने कहा. सज्जाद मुंशी की बातों में फजल को सचाई नजर रही थी और उस की बातों से एक नया हौसला भी मिल रहा था. उसे यों सोच में पड़ा देख सज्जाद मुंशी बोला, ‘‘इतनी भी कोई जल्दी नहीं हैआप घर जा कर अच्छी तरह सोच लेनाघर पर सलाह कर लेना, तब मुझे बताना.’’ घर कर फजल ने एक बच्ची को गोद लेने वाली बात हिना से कही.

फजल की बातें सुन कर हिना की सूनी आंखों में मानो रोशनी गई. वह बिस्तर पर से उठ कर बैठ गई और बोली, ‘‘तो क्या मुझे भी कोई अम्मी कह कर पुकारेगा? मैं भी किसी को गोद में ले सकूंगी,’’ हिना की आंखों से आंसू छलक पड़े थे. काफी अच्छी तरह सोचविचार करने के बाद फजल सज्जाद मुंशी के घर जा कर उस की दुधमुंही बच्ची को अपने घर ले आया. दुनिया की कोई भी मां अपने दुधमुंहे बच्चे को अपने से अलग नहीं करना चाहती है, पर जब सज्जाद मुंशी ने अपनी बीवी को यह बात समझाई कि उस की बेटी इतने बड़े घर में जाएगी और वे लोग भी तुम्हारी बेटी को कितना लाड़ करेंगे, तब जा कर कहीं हामी भरी थी सज्जाद की बीवी ने. हिना बच्ची को देखदेख कर जीने लगी. उसे बोतल से दूध पिलाती और प्यार से छुटकी कह कर बुलाती. घर के और बच्चे भी इस छुटकी के जाने से बहुत खुश थे.

वे सब दिनभर हिना के कमरे में ही बने रहते और छुटकी को गोद में लेने के लिए आपस में झगड़ते भी रहते. ‘‘देखो, जरा हौले से छूना. छोटे बच्चे बहुत नाजुक होते हैंबिना हाथ धोए इन्हें हाथ लगाने से भी नुकसान हो सकता है,’’ हिना बच्चों को हिदायत देती. उस की इस हिदायत में भले ही एक मां का प्यार छिपा था, पर बड़ी भाभी निकहत और हैदर की बीवी रजिया को उस का एक गोद ली हुई लड़की के लिए इतना प्यार दिखलाना कतई नहीं सुहाता था. उन लोगों ने अपने बच्चों को भी हिना के कमरे में जाने से रोकने की कोशिश की, पर भला बच्चे कब मानने वाले थे. सालभर बाद सज्जाद मुंशी फजल के घर आए, तो उन की नजरें इधरउधर घूम रही थीं. फजल ने उन की इस बेचैनी को भांप लिया. वे अंदर जा कर छुटकी को ले आए और सज्जाद मुंशी की गोद में दे दिया.

‘‘लो सज्जाद भाई, जीभर कर प्यार कर लो इसे. तुम्हारी नजरें इसे ही तो देखना चाह रही थीं ?’’ उसे देख सज्जाद मुंशी की आंखें छलछला आई थीं. वे कुछ देर तक तो छुटकी को देखते ही रहे, फिर बोले, ‘‘जीफजल साहबमेरी नहीं यह आप की बेटी हैऔर आप के घर में कर इस की जिंदगी भी संवर जाएगीआप इसे पाल कर मुझ गरीब पर अहसान कर रहे?हैं.’’ ‘‘नहींनहीं सज्जाद भाईआप ये कैसी बातें कर रहे हैंअहसान तो आप का है, जो अपने घर की रौनक को हमें सौंपा है,’’ फजल ने सज्जाद को गले लगाते हुए कहा. फजल का मन भी आरा मशीन के काम में लगने लगा था और हिना भी दिनभर घर के काम के साथसाथ छुटकी का ध्यान भी खूब रखती. जब तक फजल ने छुटकी को गोद नहीं लिया था, तो हिना तनाव के चलते रात में सैक्स के मामले में फजल का बिस्तर पर बिलकुल भी साथ नहीं देती, पर अब हालात बेहतर हो गए थे.

रात में हिना रूमानी हो जाती और बिस्तर पर कभी नखरे नहीं करती और खुल कर फजल का साथ देती.
एक दिन जब हिना छुटकी के साथ खेल रही थी, तभी हिना को अचानक चक्कर गया और वह गिरतेगिरते बची, पर आम घरेलू औरतों की तरह उस ने भी एक सामान्य बात समझी, पर उसी शाम को जब हिना फजल को दूध का गिलास देने जा रही थी, तब एक बार फिर से हिना को चक्कर गया और दूध फर्श पर फैल गया. ‘‘अरे, यह क्या हुआ तुम्हें हिनाक्या बात है? तुम्हारी तबीयत तो ठीक?है ?’’ फजल ने हिना को सहारा दे कर उठाते हुए कहा. ‘‘नहींबस ऐसे हीजरा सा सिर घूम गया था,’’ हिना ने कहा. ‘‘सिर घूमने के भी कई कारण हो सकते हैंबेवजह तो कभी किसी को चक्कर नहीं आतामैं कल सुबह ही तुम्हें डाक्टर के पास ले कर जाऊंगा,’’ फजल ने कहा.

अगली सुबह फजल और हिना डाक्टर के पास पहुंचे और डाक्टर ने हिना का पूरा चैकअप किया. ‘‘मुबारक हो, आप मां बनने वाली हैं,’’ यह सुन कर हिना बुरी तरह चौंक गई थी. डाक्टर के शब्द चाशनी की तरह हिना के कानों में उतरते हुए चले गए. हिना ने जब यह खुशखबरी फजल को सुनाई, तो वह भी खुशी से झूम उठा. उस ने अपने भाइयों को भी फोन पर यह खुशखबरी सुना दी. जहां पहले हिना घर का सारा काम करती थी, वहीं अब उसे पूरा आराम दिया गया. हिना शान से पूरा दिन आराम करती और खानेपीने के लिए काजू, बादाम, दूध दही आदि किसी चीज की कमी नहीं थी. घर के कामकाज का जिम्मा निकहत भाभी और रजिया ने उठा लिया और छुटकी की भी जिम्मेदारी अब उन लोगों के सिर पर ही गई थी.

समय पूरा होने पर हिना ने एक बेटे को जन्म दिया. फजल की आंखों में खुशी के आंसू थे. मुबारकबाद देने वालों के फोन लगातार रहे थे, पर अब भला फजल को अपना होश ही कहां था. खूब मिठाइयां बांटी गईं और बेटे के पैदा होने की खुशी में आरा मशीन पर काम करने वाले मजदूरों को एक दिन की छुट्टी दे दी गई. हिना ने अपना पूरा ध्यान बेटे पर ही केंद्रित कर रखा था, पर खुशियों के इस माहौल में बेचारी छुटकी कहीं अकेली पड़ गई थी. हिना के पास जाती तो वह उसे अपने बेटे को छूने देती और कहती कि तुम अभी बाहर से खेल कर आई हो, बिना नहाए या बिना हाथ धोए छोटे बच्चे को हाथ मत लगाओ. छुटकी तो हिना को ही अपनी अम्मी समझे हुई थी, पर अब तक हिना ने भी उस के पालनपोषण में कोई कमी नहीं रखी थी. कोई इन कान भरने वालों से बचे भी तो कैसेये लोग तो कान भरने के हजार बहाने खोज ही लेते हैं और ऐसा ही बहाना हैदर की बीवी रजिया ने खोज लिया था.

‘‘देख हिनाअब तक तेरे औलाद नहीं हो रही थी, इसलिए तेरे उस छुटकी को गोद लेने पर मैं ने कोई एतराज नहीं जताया. पर अब तो तेरा अपना बेटा पैदा हो गया है और आगे तेरी कोख और भी फलेगीफूलेगीअब उस मुंशी की लड़की को भला घर में रखने की क्या जरूरत‘‘कल को उस की सारी जिम्मेदारियां तुम लोगों को ही तो उठानी पड़ेंगीवैसे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. तुम लोगों को ज्यादा लाड़ आता हो तो रखे रहो उस मुंशी की लड़की को अपने साथ,’’ जहर का बीज बो कर हैदर की बीवी रजिया वहां से चली गई. उसी समय छुटकी वहां आई और हिना से बिसकुट मांगने लगी. हिना अपने बेटे के पैरों में मालिश करने में मशगूल थी. ऐसे समय उसे छुटकी का यों जिद करना अखर सा रहा था, पर छुटकी ने फिर भी जिद बंद नहीं की तो हिना झल्ला उठी और एक जोरदार तमाचा उस ने छुटकी के गाल पर रसीद कर दिया.

फिर तो यह आएदिन होता ही रहता. छुटकी की हर बात पर उसे मारना और डांटना आम बात बन गई थी और फिर वह दिन भी गया, जब हिना ने फजल से कहा, ‘‘सुनो, अब तो हमारा बेटा जुनैद हमारी गोद में हैऔर फिर अब तो हम दोबारा भी मां बन सकते हैं. ऐसे में हमें छुटकी को उस के असली मांबाप को सौंप देना चाहिएउस के बड़े होने के साथ ही उस की जिम्मेदारी भी तो हमें लेनी पड़ेगी.’’
‘‘क्या बकवास बात हैहमारे आड़े वक्त में सज्जाद मुंशी ने अपनी बेटी हम बेऔलादों को सौंप कर हमें मुसकराने का मौका दिया और वह भी सिर्फ एक जबान परउन्होंने इस बात की कोई कागजी कार्यवाही भी नहीं कराईऔर आज जब हमारा खुद का बच्चा इस दुनिया में गया है, तो हम उन की बेटी को उन्हें वापस कर देंयह हमारी मौकापरस्ती नहीं कहलाएगी?’’ फजल नाराजगी दिखा रहा था.
उस समय तो हिना ने खामोश रहना ही सही समझा, पर उस के मन में अब छुटकी के लिए वह प्यार नहीं रहा था.

कहते हैं कि अच्छा समय बीतते ज्यादा वक्त नहीं लगता. ऐसा ही कुछ यहां भी हुआ. हिना और फजल के दोनों बच्चे जुनैद और छुटकी साथसाथ बड़े होने लगे और 10 साल कब चले गए, पता ही नहीं चला.
बच्चे तो बच्चे होते हैं, पर इनसान अपना जहर उगलने से कभी बाज नहीं आता. ऐसा ही जहर उगला था हिना की भाभियों, निकहत और रजिया ने. दोनों ने जुनैद को बताया कि छुटकी उस की सगी बहन नहीं है, बल्कि उसे तो सज्जाद मुंशी से गोद लिया गया था. ऐसा कर के जुनैद के मन में लोगों ने छुटकी के प्रति नफरत और अलगाव डालने की कोशिश की, पर जुनैद के मन में तो अपनी बहन छुटकी के लिए बेशुमार प्यार था और छुटकी भी उस पर जान न्योछावर करती थी. ‘‘अरे, मैं तो तुझे इसलिए पैसे देती हूं कि तू बाहर जा कर अपनी पसंद का जूस पी लिया कर. और तू है कि छुटकी के लिए उन पैसों को बचाबचा कर मिठाई ले आता?है,’’ हिना ने जुनैद को डांटते हुए कहा.

‘‘पर अम्मीदोनों साथ मिल कर खाते हैं, तो मजा दोगुना हो जाता हैहै ?’’ कह कर हिना के गालों को चूम लिया था जुनैद ने. जुनैद का छुटकी की तरफ झुकाव हिना को फूटी आंख सुहाता था. उस का बस चलता तो छुटकी को अब यहां रहने देती, पर फजल और जुनैद के आगे वह कुछ कह नहीं पाती थी, बस मन मसोस कर रह जाती. शहर में अचानक पीलिया फैल गया था. जाने कहां से हिना को भी इस बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था. वह कमजोर होने लगी थी. डाक्टर को दिखाया गया, तो उन्होंने दवा के साथसाथ पूरी तरह से उसे आराम करने की हिदायत दी. हिना को ऐसे समय पर सब से ज्यादा खानेपीने में एहतियात की जरूरत थी, पर निकहत और रजिया ने ऐसे मुश्किल समय में अपने हाथ खींच लिए और अपने बच्चों को भी हिना के कमरे में जाने से रोक दिया, क्योंकि उन का मानना था कि पीलिया छूत की बीमारी है और उन्हें और उन के बच्चों में भी फैल सकती है.

हिना अकेली पड़ गई थी, पर छुटकी अपनी अम्मी की हर छोटीबड़ी जरूरत का ध्यान रखती. डाक्टर की दी हुई कौन सी दवा कब देनी है, यह जिम्मा छुटकी ने अपने हाथों में ले रखा था. यहां तक कि अम्मी को उठानेबिठाने का काम भी छुटकी ने बखूबी किया, साथ ही फजल और जुनैद को भी खानेपीने और किसी भी तरह की कोई तकलीफ होने दी. दवा के असर से और छुटकी की देखरेख में हिना जल्दी ही ठीक होने लगी. हिना की शरीर की बीमारी के साथसाथ उस के मन की बीमारी भी जाने लगी. हिना के मन में छुटकी के लिए प्यार उमड़ आया और मन ही मन उसे पछतावा हो रहा था.

मैं कितनी खुदगर्ज हो गई थी और छुटकी को पराई लड़की समझ कर पिंड छुड़ा रही थी, पर छुटकी ने अपनी सेवा और प्यार से मेरा मन ही नहीं जीता, बल्कि मुझे एक नई सीख भी दी है, हिना ने सोचा और बोली, ‘‘अरे सुनअब तू छुटकी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी हो गई हैबड़की हैतू बड़की,’’ हिना ने प्यार से छुटकी को गले लगा लिया था. जुनैद भी दौड़ कर हिना और छुटकी से लिपट गया. पास में ही फजल खड़ा हुआ मुसकरा रहा था.           

Readers Problem: प्रेमी प्रेमिका का ब्रेकअप-गम काहे का

Readers Problem: 23 साल की संजना का अपने प्रेमी रोहन से ब्रेकअप हो गया था. वह कई सालों से उस से प्यार करती थी. वह इस ब्रेकअप के बाद काफी दुखी और हताश हो चुकी थी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि रोहन को कैसे समझाए कि वह उसे दिलोजान से प्यार करती है, जबकि रोहन ने कई बार अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी करने के बाद ‌उस से किनारा कर लिया था.

उन दोनों के बीच ब्रेकअप होने बड़ी वजह है थी रोहन का नताशा नाम की लड़की के प्यार में पड़ जाना. नताशा काफी बोल्ड किस्म की लड़की थी. अब‌ वे दोनों खुल कर मिल रहे थे. संजना यह सब देख कर जलभुन रही‌ है. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसे हालात में क्या किया जाए.

गहरी निराशा में एक दिन संजना ने ढेर सारी नींद की गोलियां खा कर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. उस के मातापिता ने समय रहते इलाज कराया, तब जा कर वह बच पाई.

20 साल की नाजिया अपने साथ पढ़ने वाले फरहान से प्यार करती थी, पर कुछ दिन से वह फरहान को अनदेखा करने लगी थी, क्योंकि वह अपने बचपन के दोस्त इकबाल से नजदीकियां बढ़ाने लगी थी. इस बात से फरहान काफी निराश और दुखी रहने लगा था और डिप्रैशन में चला गया था.

नाजिया से प्यार में धोखा खाने के बाद फरहान खुदकुशी करने की कोशिश करने लगा था, पर उस के एक खास दोस्त ने मौके पर पहुंच कर उसे बचा लिया था.

आज ज्यादातर नौजवान प्यार में नाकाम हो कर उलटीसीधी और ऊलजुलूल हरकते करने लगते हैं. कई बार तो भावनाओं में बह कर संजना और फरहान की तरह वे खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगते हैं या फिर खुदकुशी तक करने पर उतारू हो जाते हैं, जबकि यह नासमझी भरा कदम होता है.

2 लोगों के बीच का प्यार बहुत ही नाजुक अहसास होता है. जब कोई लड़की किसी लड़के से प्यार करती है तो उसे दिलोजान से चाहती है. उस के बिना अपनेआप को अधूरा समझने लगती है. यह बिलकुल स्वाभाविक है. यही लड़के के साथ भी होता है. कोई लड़का अगर किसी लड़की को दिल से चाहता है, तो उस के बिना अपनेआप को अधूरा समझने लगता है. जैसा कि फरहान अपनेआप को समझने लगा था और खुदकुशी करने पर उतारू हो गया था. वह तो गनीमत थी कि उस के दोस्त मौके पर पहुंच कर उसे बचा लिया था.

माना कि प्यार में धोखा खाने के बाद या ब्रेकअप होने के बाद के हालात असहज हो जाते हैं, लेकिन इतना भी नहीं होते कि एकदूसरे के बिना खुद को नुकसान पहुंचाया जाए या खुदकुशी जैसे अपराध को अंजाम दिया जाए.

इस से उलट आज की यंग जैनरेशन पुरानी सोच से परे हो कर ‘तू नहीं‌ कोई और सही’ के फार्मूले पर चलती है. प्यार में धोखे खाने पर वह भावनाओं में बह कर नहीं सोचती है, बल्कि उस से सीख ले कर अगली बार नए प्रेमी या प्रेमिका के साथ पिछले गलतियों को नहीं दोहराती है.

19 साल की कालेज में पढ़ने वाली अलका मौडर्न सोच की लड़की है. उस का कहना है, “मेरे एक नहीं, बल्कि 2-2 बौयफ्रैंड रह चुके हैं. मैं एक प्रेमी के साथ लिवइन में भी रह चुकी हूं. हालांकि जिस प्रेमी के साथ लिवइन में रही थी, उस के साथ बेहद ही बुरा अनुभव रहा था.

“मैं जिस लड़के के साथ जिंदगीभर का साथ निभाना चाहती थी, उस के बारे में धीरेधीरे बहुत कुछ जान गई थी. वह लड़का जीवनसाथी बनने लायक नहीं था, इसलिए मैं उस से समय रहते अलग हो गई. उस लड़के से मैं शुरुआती दिनों में बहुत प्यार करती थी, उसे दिलोजान से चाहती थी. उस से अलग होना इतना आसान नहीं था.”

आज अलका जिस लड़के के साथ जिंदगी बिताना चाहती है, वह उस के साथ कुछ दिन समय बिता कर संतुष्ट हो चुकी है. यह सब लंबे समय तक एकदूसरे के साथ घूमनेफिरने से ही मुमकिन हो पाया है. लेकिन बिना सोचेसमझे जल्दीबाजी में जिंदगी गुजारने की बात सोचना भी ठीक नहीं है.

किसी इनसान को देख लेने भर से और इधरउधर थोड़ाबहुत मिलनेजुलने से उस की अच्छाइयों या बुराइयों को हम बहुत जल्दी नहीं जान पाते हैं. आजकल के कुछ लड़केलड़कियां थोड़ीबहुत मुलाकात में अच्छा होने का नाटक तो जरूर करते हैं, लेकिन आप जैसेजैसे उन से खुलते जाएंगे या उन के साथ कुछ दिन बिता लेंगे, तो ज्यादातर चीजों के बारे में जान लेंगे.

लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या किसी प्रेमीप्रेमिका के चले जाने से जिंदगी रुक जाती है? क्या जिंदगी को अधूरा मान लेना चाहिए? नहीं. ऐसा करना शायद खुद के साथ बेईमानी होगा.

आज किसी भी लड़कालड़की को ब्रेकअप होने के बाद या उस के चाहने वाले के जिंदगी से अलग हो जाने के बाद यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उस के बिना जिंदगी अधूरी हो गई है, बल्कि यह सोचना चाहिए कि प्रेमीप्रेमिका का मिलना या बिछड़ना एक आम बात है.

सभी प्यार करने वाले या प्यार का दिखावा करने वाले जीवनसाथी बनने लायक नहीं होते हैं. ऐसे लोग लंबे समय तक जिंदगी में टिक भी नहीं पाते हैं. कहीं न कहीं उन की खामियां समय पर नजर आ ही जाती हैं और दोनों को अलग होने पर मजबूर कर देती हैं.

हां, ऐसे लोग जिंदगी में बहुत बड़ी सीख दे जाते हैं. आगे की जिंदगी में हमें सोचसमझ कर कदम उठाना होता है. अपने लिए बौयफ्रैंड या गर्लफ्रैंड का चुनाव करते समय सावधानी बरतनी होती है कि कहीं आगे किसी धोखे की गुंजाइश न रहे.

कई लोगों को प्यार नहीं हवस की भूख होती हैं. ऐसे लोग शारीरिक जरूरतें पूरी हो जाने के बाद किनारा कर लेते हैं या धीरेधीरे यह जता देते हैं कि हमारी जरूरत पूरी हो गई है.

ऐसे लोगों की नजर में आप की भावनाओं का कोई मोल नहीं होता है. आप के प्यार की कोई कद्र नहीं होती है. ऐसे में अपनेआप को नुकसान पहुंचाना समझदारी नहीं है, बल्कि समय रहते चेतने की जरूरत होती है.

अगली बार जब‌ आप अपने प्रेमीप्रेमिका का चुनाव करें तो सोचसमझ कर करें. उसे भावनात्मक रूप से समझने की कोशिश करें. जब आप का मन यह स्वीकार कर ले कि आप का प्रेमी या प्रेमिका आप के लिए परफैक्ट है, तभी उसे सबकुछ सौंपें.

Relationship Problem: मेरी गर्लफ्रैंड का अफेयर 3-4 लड़कों के साथ चल रहा है

Relationship Problem: अगर आप भी अपनी समस्या भेजना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें.

सवाल –

मैं उत्तर प्रदेश, आगरा का रहने वाला हूं और मेरी उम्र 23 साल है. मेरी एक गर्लफ्रैंड है जिस के साथ मैं पिछले 6 महीने से रिलेशनशिप में हूं और उसे बहुत प्यार करता हूं. यहां तक कि मैं ने उस लड़की के बारे में अपने घर वालों तक को बताया हुआ है, क्योंकि मैं अपनी गर्लफ्रैंड से इतना प्यार करता हूं कि उस से शादी करना चाहता हूं. पर हाल ही में मैं ने नोटिस किया कि उस का फोन अकसर रात के समय बिजी रहता है. जब मैं ने इस बारे में उस से पूछा तो वह हर बार अलगअलग बहाना बनाने लगी. मुझे शक हुआ तो मैं ने एक बार किसी बहाने से उस का फोन चैक किया और उस का फोन देखते ही मुझे बहुत दुख हुआ. मैं ने देखा वह सिर्फ मुझ से ही नहीं, बल्कि 4-5 लड़कों से बात करती है और सभी से उस ने रिश्ता बना रखा है. मैं ने उस लड़की से बेहद प्यार किया है और हमेशा वफादार रहा हूं, लेकिन वह इतने सारे लड़कों को डेट करेगी, मैं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा. मैं क्या करूं?

जवाब –

आज के समय में 1 से ज्यादा रिलेशनशिप्स रखना आम बात हो चुकी है क्योंकि प्यार के मायने धीरे धीरे खत्म होते जा रहे हैं. आप अपनी जगह बिलकुल ठीक हैं, क्योंकि उस ने न सही लेकिन आप ने अपनी मोहब्बत निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. आप का पार्टनर ऐसा निकला, इस में आपकी तो कोई गलती नहीं है.

आप को तो खुश होना चाहिए कि आप को समय रहते अपनी गर्लफ्रैंड की हकीकत पता चल गई, क्योंकि अगर ऐसा कुछ समय बाद या यों कहें कि शादी के बाद होता, तो आप को कैसा फील होता. इनसान की फितरत कभी नहीं बदलती, तो अगर आप से शादी के बाद वह लड़की किसी और के साथ रिलेशनशिप में आती, तब आप न इधर के रहते और न ही उधर के.

आप की बातों से ऐसा लग रहा है जैसे आप किसी पर भी बहुत जल्दी भरोसा कर लेते हैं तो आप को ऐसा नहीं करना चाहिए. आज के समय में हर किसी पर भरोसा कर लेना ठीक नहीं है. आप को आप का लाइफ पार्टनर खुद आ कर मिल जाएगा, तो ज्यादा परेशान न हों और जितना जल्दी हो सके उस लड़की से दूसरी बना लें.

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Relationship Issues: खेल के माहिर खिलाड़ी शादी में निकले अनाड़ी

Relationship Issues: दिव्या काकरान ‘अर्जुन’ अवार्ड विजेता पहलवान हैं. वे देश के लिए एशियाई खेलों के अलावा राष्ट्रमंडल खेलों में भी मैडल जीत चुकी हैं. वे 8 बार ‘भारत केसरी’ का खिताब हासिल कर चुकी हैं.

पर फिलहाल दिव्या काकरान अपने खेल के लिए नहीं, बल्कि निजी जिंदगी में मची हलचल के लिए सुर्खियों में हैं. उन्होंने ढाई साल के भीतर अपने पति सचिन प्रताप सिंह से तलाक ले लिया है. दिव्या और सचिन की शादी 21 फरवरी, 2023 को हुई थी. शादी से एक साल पहले यानी साल 2022 से वे दोनों रिलेशनशिप में थे. सचिन एक जिम ट्रेनर हैं और बौडी बिल्डिंग खेल से जुड़े हैं.

इसी तरह भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने भी सोशल मीडिया पर अपने पति और बैडमिंटन खिलाड़ी पी. कश्यप से अलग होने की जानकारी दी.

साइना नेहवाल ने 14 दिसंबर, 2018 को पी. कश्यप के साथ लव मैरिज की थी. दोनों साल 2007 से रिलेशनशिप में थे.

हालांकि, दिव्या काकरान और साइना नेहवाल ने सोशल मीडिया पर बड़ा भावुक सा संदेश लिख कर अपने जीवनसाथी से अलगाव की जानकारी दी, पर क्या वाकई तलाक लेना इतना आसान है कि आपसी रजामंदी हुई और अलग हो गए पतिपत्नी?

शायद नहीं. अगर खिलाडि़यों की बात करें तो उन की जिंदगी बड़ी नियम से बंधी और तेज रफ्तार होती है. इस में जुनून होता है और हर हाल में जीतने की जिद. जो खिलाड़ी 1-1 पौइंट के लिए सामने वाले खिलाड़ी से भिड़ जाते हैं,

वे अपनी जिंदगी के फैसले लेने में किसी का भी दखल बरदाश्त नहीं कर पाते हैं.

दिव्या काकरान ने एक अखबार को बताया भी था, ‘हम दोनों के बीच 4-5 महीने से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था. हम सोचते रहे कि ठीक हो जाएगा, लेकिन अब हम ने अलग होने का हार्ड डिसीजन लिया है.’

यह सबकुछ ठीक होना क्या है? क्या दिव्या और सचिन अपनी शादी से खुश नहीं थे? क्या खेल के चलते उन दोनों में दूरियां बढ़ रही थीं? क्या ढाई साल के बाद भी उन का मांबाप न बनने का फैसला इस शादी को बोझिल बना रहा था? क्या साथी की बेवफाई इस तलाक की वजह है?

इसे एक और खिलाड़ी की निजी जिंदगी से सम?ाते हैं. भारतीय मुक्केबाज स्वीटी बूरा ने कबड्डी खिलाड़ी दीपक हुड्डा से शादी की थी. दीपक हुड्डा फिलहाल भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं, पर इन दोनों की आपसी लड़ाई इतनी ज्यादा जगजाहिर हुई है कि खेल जगत में हलचल मच गई.

इस साल की शुरुआत में स्वीटी और दीपक की शादीशुदा जिंदगी इतने खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई कि दोनों ने तलाक की कार्यवाही के दौरान अपने परिवार वालों के सामने थाने में ही मारपिटाई कर दी.

स्वीटी ने दीपक को ‘राक्षस’ तक कहा और यह भी दावा किया कि दीपक कपड़े उतार कर उन के साथ पूरी रात मारपीट करता था. घर से बाहर नहीं निकलने देता था. उस ने स्वीटी की गाड़ी भी कब्जाई हुई थी.

घंटों तक कमरे में बंद रखता था. कब किस से फोन पर बात करनी है, यह भी वही तय करता था. स्वीटी ने यह भी दावा किया है कि दीपक के लड़कों के साथ रिलेशन हैं. शादी के एक महीने के बाद उन्होंने वीडियो देखी तो पता चला.

इन सब आरोपों के जवाब में दीपक हुड्डा के वकील सागर पंघाल ने कहा कि स्वीटी व दीपक साल 2015 से एकदूसरे को डेट कर रहे थे. लिवइन रिलेशनशिप में भी रहे थे, लेकिन स्वीटी ने उस समय यह बात क्यों नहीं कही, जबकि आज ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं?

उधर, दीपक हुड्डा ने भी स्वीटी बूरा पर रोहतक में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी, जिस में आरोप लगाया कि दीपक ने हिसार में एक प्लाट लिया था. इस की सारी पेमेंट उन्होंने की, मगर प्लाट सिर्फ उन के नाम के बजाय उन के और स्वीटी के नाम पर रजिस्टर करा दिया गया.

दीपक ने आरोप भी यह लगाया कि स्वीटी के पिता महेंद्र बूरा ने ब्याज पर देने के बहाने उन से लाखों रुपए ठगे. स्वीटी के भाई ने दीपक के घर पर रखे 12 लाख रुपए भी ले लिए. स्वीटी की बहन ने भी चैंपियनशिप के बहाने तकरीबन 9 लाख रुपए ट्रांसफर करा कर ठग लिए, जबकि वह ऐसे किसी कंपीटिशन में गई ही नहीं.

दीपक के मुताबिक, एक बार छोटी बहस होने पर स्वीटी ने उन पर चाकू से हमला कर दिया. इस से उन्हें टांके लगे. एक बार उस ने सोते हुए हमला कर दिया. इस में उन का सिर फट गया.

इस सब में एक बात और सामने आती है कि चूंकि दिव्या काकरान, साइना नेहवाल और स्वीटी बूरा तीनों ही खिलाड़ी हैं, तो इन में किसी से न हारने की सोच हावी दिखाई देती है. कुश्ती का मैट हो या बैडमिंटन का कोर्ट या फिर मुक्केबाजी का रिंग, ये खेल की तरह जिंदगी को भी जीतने की इच्छा रखती हैं और इस के लिए किसी तरह का समझौता करना अपनी तौहीन समझती हैं.

चूंकि ज्यादातर खिलाड़ी कम उम्र में ही अपने घर वालों से दूर रहते हैं, इधर से उधर सफर करते हैं, तो उन के लिए शादी से पहले संबंध बनाना उतना मुश्किल नहीं होता है. महिला खिलाड़ी शादी के कई साल तक बच्चा पैदा करने से बचती हैं और उन के हार्मोन इतने ज्यादा मजबूत होते हैं कि तन और मन से उन्हें संभाल पाना हर किसी के बस का नहीं होता है.

इस के अलावा खेल के चलते पतिपत्नी के बीच दूरी होना, उन का सामाजिक माहौल जुदा होना, खेल में बने रहने का तनाव, बेवफाई, आपसी तनातनी, समाजिक दबाव भी खिलाडि़यों के तलाक की अहम वजह बनते हैं. Relationship Issues

मेरी बीवी का सेक्स करने का मन नहीं करता है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 28 साल का हूं. मेरी शादी को ढाई साल हो चुके हैं. मेरा 11 महीने का एक बेटा भी है. दिक्कत यह है कि बीवी का हमबिस्तरी करने का मन नहीं करता. उसे काफी दर्द महसूस होता है. फोरप्ले करने से भी उस के अंग में गीलापन नहीं होता है. बताइए कि मैं क्या करूं?

जवाब

हमबिस्तरी का सारा खेल मन से जुड़ा होता है. अगर आप की बीवी इस में मन से भाग नहीं लेगी, तो उसे तकलीफ होगी ही. आप बीवी से खुल कर बात करें और कहें कि यह तो आप का हक है. उस से पूछें कि अगर उसे किसी तरह की कोई दिक्कत हो तो बताए, ताकि डाक्टर से उस का इलाज कराया जा सके. बीवी को प्यार से मनाएंगे, तो बात बन जाएगी.

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