Crime Story: सीमा पार इश्क के लिए 3 करोड़ की साइबर ठग

Crime Story:  कहते हैं कि इश्क सरहदें नहीं देखता. दूरी, देश, भाषा सब पीछे छूट जाते हैं. मोबाइल की स्क्रीन पर उभरता एक नाम धीरेधीरे आदत बन जाता है. दिन की शुरुआत उसी संदेश से होती है और रात उसी आवाज के साथ खत्म. भरोसा बनता है, सपने जुड़ते हैं और भविष्य की तसवीरें भी खिंचने लगती हैं. लेकिन जब यही रिश्ता पैसे के लेनदेन से जुड़ जाए, तो कहानी केवल प्यार की नहीं रहती. वह कानून, जांच और अदालत तक पहुंच जाती है.

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के डबलीराठान गांव का हरदीप सिंह इस समय ऐसी ही एक कहानी का केंद्र है. साइबर थाना पुलिस के मुताबिक उसे एक साइबर ठगी मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिस में तकरीबन 3 करोड़, 26 लाख रुपए डिजिटल तरीके से ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है. पुलिस का कहना है कि यह राशि क्रिप्टोकरैंसी के जरीए भेजी गई. मामला फिलहाल कोर्ट में कल रहा है.
हरदीप सिंह एक साधारण किसान परिवार से जुड़ा नौजवान था. उस के पिता खेती करते थे. घर की आमदनी लिमिटेड थी. उस ने गांव के स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की. आगे पढ़ाई जारी नहीं रख सका. बेहतर रोजगार की तलाश में उसने कंप्यूटर का काम सीखा. इंटरनैट और सोशल मीडिया उस के लिए नई उम्मीदों की दुनिया थे.

तकरीबन 2 साल पहले सोशल मीडिया के जरीए उस का मेलजोल पाकिस्तान की एक लड़की राबिया से हुआ. शुरुआत सामान्य बातचीत से हुई. फिर नियमित चैटिंग शुरू हुई. धीरेधीरे बातचीत निजी होती गई.
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह भावनात्मक रूप से जुड़ गया था. बातचीत में भविष्य और शादी तक की चर्चा होने की बात सामने आई है. जांच अफसरों के मुताबिक कुछ समय बाद पैसे से जुड़ी मदद की मांग शुरू हुई. शुरुआत छोटी रकम से हुई. कभी जरूरत का हवाला, कभी उपहार की बात. आरोपी ने कथिततौर पर कुछ भुगतान किया. लेकिन मांगों का दायरा बढ़ता गया. भावनात्मक दबाव और पैसे के बीच वह उल?ाता गया.

पुलिस के मुताबिक इसी दौर में आरोपी ने गैरकानूनी तरीके से पैसा कमाने की दिशा में कदम बढ़ाया. पूछताछ में उस ने बताया कि उसे साइबर ठगी के जरीए कमाई का सु?ाव मिला था. इस दावे की जांच जारी है. डिजिटल चैट, काल रिकौर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है. जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सस्ते सामान बेचने के नाम पर लोगों को आकर्षित किया गया. इश्तिहार में कीमत बाजार से कम बताई जाती थी. ग्राहकों से पहले भुगतान लिया जाता था. कई मामलों में भुगतान के बाद सामान नहीं भेजा गया. बाद में पीडि़तों ने शिकायत दर्ज कराई.

धीरेधीरे यह गतिविधि संगठित रूप लेने लगी. पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम अलगअलग खातों में जमा की जाती थी. आरोपी ने अपने गांव के कुछ लोगों को यह कह कर भरोसे में लिया कि उस का बैंक खाता अस्थायी रूप से बंद है और कुछ समय के लिए उन के खाते की जरूरत है. गांवदेहात के समाज में सामाजिक भरोसा मजबूत होता है. कुछ लोगों ने सहमति दे दी. जांच में सामने आया कि ठगी की रकम उन्हीं खातों में जमा की जाती थी. बाद में रकम निकाल कर डिजिटल वालेट में डाली जाती और फिर क्त्रिप्टोकरैंसी में बदली जाती थी.

पुलिस का दावा है कि तकरीबन 3 करोड़, 26 लाख रुपए यूएसडीटी के जरीए ट्रांसफर किए गए. यह रकम डिजिटल चैनलों से सीमा पार पहुंची होने की बात जांच में सामने आई. क्रिप्टोकरैंसी के इस्तेमाल ने मामले को और मुश्किल बना दिया. पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम में लेनदेन का रास्ता साफ रहता है. लेकिन डिजिटल टोकन के जरीए राशि कई वालेट में ट्रांसफर की जा सकती है. साइबर माहिरों के मुताबिक ऐसे मामलों में जिस के पास पैसा गया है, उस की पहचान करना चुनौती से भरा होता है. मामला तब उजागर हुआ जब हनुमानगढ़ के रहने वाले एक आदमी ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई. उस ने सोशल मीडिया पर सामान खरीदने के लिए भुगतान किया था, लेकिन सामान नहीं मिला.

बैंक लेनदेन की जांच करते हुए पुलिस आरोपी तक पहुंची. मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच में कई गलत ट्रांजैक्शन सामने आए. पुलिस के मुताबिक, आरोपी से 26 बैंक पासबुक, 8 चैकबुक, 18 एटीएम कार्ड, 8 सिम कार्ड और 3 मोबाइल फोन बरामद किए गए. पाकिस्तान से जुड़े कुछ दस्तावेज भी मिलने की बात कही गई. जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों से जुड़े 14 राज्यों में 36 साइबर ठगी शिकायतें दर्ज हैं. संबंधित राज्यों की एजेंसियों के साथ तालमेल किया जा रहा है. जिला पुलिस सुपरिंटैंडैंट के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने पाकिस्तान जा कर शादी करने की इच्छा जताई थी. उस ने वीजा के लिए अर्जी भी दी थी, लेकिन रजामंदी नहीं मिली. सीमापार मेलजोल और पैसे के लेनदेन की पूरी कड़ी की जांच जारी है.

राबिया के रोल की फिलहाल जांच चल रही है. डिजिटल सुबूतों की बुनियाद पर उस के जुड़े होने की तसदीक की जा रही है. आखिरी नतीजा अदालत में पेश सबूतों पर ही साफ होगा. यह मामला केवल 3 करोड़, 26 लाख रुपए के डिजिटल ट्रांसफर का नहीं है. यह उस बदलती डिजिटल संस्कृति का उदाहरण भी है, जिस में गांव का नौजवान भी वर्ल्ड नैटवर्क से जुड़ा है. इंटरनेट ने मौके दिए हैं, लेकिन जोखिम भी बढ़ाए हैं. सोशल मीडिया पर बनी पहचान असली भी हो सकती है और फर्जी भी. साइबर माहिर बताते हैं कि मौडर्न ठगी का बड़ा हिस्सा तकनीकी हैकिंग से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीकों से होता है. पहले विश्वास जीता जाता है. इनसान को भावना के लैवल पर जोड़ा जाता है. फिर पैसे की मांग जोड़ी जाती है.

इसे सोशल इंजीनियरिंग कहा जाता है. इस सब में इनसान खुद अपने पैसे सौंप देता है, क्योंकि उसे लगता है कि वह किसी अपने की मदद कर रहा है. नैशनल लैवल पर साइबर अपराध के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. औनलाइन शौपिंग धोखाधड़ी, इन्वैस्टमैंट ठगी और सोशल मीडिया से जुड़ी धोखाधड़ी बढ़ रही है. डिजिटल भुगतान की सुविधा जितनी आसान हुई है, अपराध का तरीका भी उतना ही तेज हुआ है. गांवदेहात के इलाकों में इंटरनैट की पहुंच बढ़ी है, लेकिन डिजिटल जागरूकता अभी भी कम है. गांव के लोगों के लिए बैंक खाता भरोसे का सिंबल है. कोई परिचित मदद मांगे तो शक कम होता है. यही भरोसा कई बार अपराध की कड़ी बन जाता है.

कानूनी नजरिए से ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराएं लागू हो सकती हैं. आर्थिक अपराध केवल पैसों का नुकसान नहीं करता, बल्कि सामाजिक इज्जत और भविष्य पर भी बुरा असर डालता है. यह घटना समाज के लिए चेतावनी है. इंटरनैट पर बने रिश्तों में पैसे के लेनदेन से पहले पूरी सावधानी जरूरी है. बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पिन या ओटीपी सा? करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है. साइबर ठगी में तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए. एक साधारण गांवदेहात का नौजवान, एक औनलाइन रिश्ता और 3 करोड़, 26 लाख रुपए का डिजिटल ट्रांसफर. यह कहानी अब अदालत के फैसले का इंतजार कर रही है. आखिरी फैसला कोर्ट करेगा. लेकिन यह घटना एक बड़ा मैसेज छोड़ती है. डिजिटल जमाने में भावनाएं तेज हैं, लेकिन कानून उस से भी तेज है. सीमा पार इश्क अगर पैसे के लेनदेन से जुड़ जाए, तो उस का अंजाम केवल निजी नहीं, कानूनी भी हो सकता है. इश्क अपनी जगह है. इंटरनैट अपनी जगह. लेकिन जिम्मेदारी और कानून दोनों से ऊपर हैं.   

राकेश खुडिया

Crime Story: औनर किलिंग-घर आए दामाद को दी दर्दनाक मौत

त्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एक बहुत पौश इलाका है आशियाना, जहांऔनर किलिंगका ऐसा कांड किया गया कि सुनने और देखने वाली की रूह कांप गई. वहां के सैक्टरआई में मंगलवार, 17 मार्च, 2026 की रात एक एडवोकेट तीरथ राज सिंह ने अपनी बेटी साक्षी के प्रेम विवाह से नाराज हो कर अपने ही दामाद विष्णु यादव की बेरहमी से हत्या कर दी, जिस से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया.

मिली जानकारी के मुताबिक, प्रतापगढ़ के सांगीपुर इलाके के रहने वाले 32 साल के विष्णु यादव ने महज 4 साल पहले एडवोकेट तीरथ राज सिंह की बेटी साक्षी से प्रेम विवाह किया था. पर तीरथ राज सिंह इस शादी के खिलाफ थे और तब से ही अपने दामाद और बेटी से  दुश्मनी पाल बैठे थे.विष्णु यादव और साक्षी अपनी 3 साल की बेटी अर्चिता के साथ प्रतापगढ़ में ही रहते थे. पर 17 मार्च को विष्णु यादव अपनी पत्नी साक्षी की जिद पर ससुराल में लखनऊ आए थे.

मंगलवार की रात को तकरीबन साढ़े 10 बजे विष्णु यादव और उन के ससुर तीरथ राज सिंह के बीच किसी बात को ले कर तीखी बहस शुरू हो गई और देखते ही देखते यह बहस हाथापाई में बदल गया.
घर के भीतर शोर सुन कर विष्णु यादव की सालियां और परिवार के दूसरे सदस्य भी वहां पहुंच गए. इसी बीच, गुस्से से तमतमाए तीरथ राज ने पास पड़ी चारपाई का पाया उठाया और विष्णु के सिर पर ताबड़तोड़ चोट कर दी, जिस से विष्णु का सिर फट गया और उस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. बीचबचाव करने साक्षी भी पिता के हमले में घायल हो गई.

इस हत्याकांड की सूचना मिलते ही पुलिस सुपरिंटैंडैंट (मध्य) विक्रांत वीर और एसीपी कैंट अभय प्रताप मल्ल भारी पुलिस बल और फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने मौका वारदात
से हत्या में इस्तेमाल चारपाई का पाया बरामद कर लिया, जबकि फोरैंसिक टीम ने मौके से फिंगरप्रिंट्स और दूसरे तमाम सुबूत जुटाए. इतना ही नहीं, पुलिस ने तीरथ राज सिंह और उन की चार बेटियों को हिरासत में ले लिया. पुलिस सुपरिंटैंडैंट विक्रांत वीर ने बताया कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस हत्याकांड की साजिश पहले से रची गई थी या यह अचानक हुए  का नतीजा है.   

Hindi Story: धोखाधड़ी

Hindi Story: अजय वर्मा ने अपना रेलवे टिकट का रिफंड मांगने का औनलाइन तरीका अपनाया और एक अनजान नंबर से आए लिंक पर क्लिक कर दिया. उस के बाद शुरू हुआ एक ऐसा खेल जो उन पर भारी पड़ा. क्या था माजरा?

मे  रा नाम अजय वर्मा है और मेरा रेलवे का टिकट रद्द किए हुए पूरा एक महीना बीत चुका था, लेकिन 12,850 रुपए का रिफंड अभी तक मेरे खाते में नहीं आया था. थकहार कर मैं ने रेलवे को एक ट्वीट कर दिया. उम्मीद थी कि एक हफ्ते में जवाब मिल जाएगा, पर जो हुआ, वह उम्मीद से तेज और अचरज से भरा हुआ था.


शिकायत डालने के कुछ ही मिनट बाद इनबौक्स में संदेश गया. प्रोफाइल पर रेलवे का लोगो था और संदेश जैन्युइन लग रहा था. संदेश बहुत भरोसेमंद अंदाज में लिखा हुआ था, ‘प्रिय ग्राहक, आप की शिकायत प्राप्त हुई. कृपया अपना संपर्क नंबर भेजें, ताकि तत्काल रिफंड प्रोसैस शुरू किया जा सके.’
दिल में एक उम्मीद जगी. मन में एक सवाल कौंध गया. क्या वाकई अब सरकारी तंत्र इतना तेज हो गया है?


मैं ने बिना देरी किए उसे अपना फोन नंबर भेज दिया. यह मेरी पहली और सब से बड़ी गलती थी.
कुछ ही पलों में मु? फोन गया. सामने एक आत्मविश्वासी आवाज थी, ‘सर, मैं रेलवे रिफंड सैल से बोल रहा हूं.’ उस आदमी की भाषा और लहजा बिलकुल आधिकारिक लग रहे थे. उस ने पूछा, ‘टिकट कहां से बुक किया था आप ने?’’


मैं ने अपने बैंक का नाम बताया और कहा, ‘‘इस के ईमोबाइल ऐप से.’’ उस ने कहा, ‘ठीक है सर, आप के अकाउंट को कन्फर्म करना होगा. कृपया अपना यूजरनेम बताएं.’ यहीं मु? थोड़ा शक हुआ. मैं ने फोन होल्ड कर अपने बेटे से पूछा, ‘‘यूजरनेम मांग रहा है. बता दूं क्या?’’ बेटा बोला, ‘‘दे दो पापा, इस में कोई दिक्कत नहीं है.’’


और हम ने उसे अपना यूजर नेम दे दिया. यह मेरी दूसरी गलती थी. अब वह आदमी सीधा मेरे बेटे से बात करने लगा, क्योंकि उसे लगा कि यह स्मार्ट तरीके से जवाब करेगा. उस आदमी ने कहा, ‘अभी एक लिंक भेज रहा हूं. अपना ईमोबाइल ऐप खोल कर लिंक पर क्लिक कर दीजिए. आप की रकम 12,850 रुपए आप के खाते में जाएंगे.’ कुछ ही सैकंड में उस आदमी का भेजा गया एक लिंक आया और हम ने क्लिक भी कर दिया, बिना पढ़े, बिना सोचे. वह लिंकपेमेंट रिक्वैस्टका था. यहीं से शुरू हुआ असली खेल.
जल्दी कीजिए सर,’ वह आदमी लगातार दबाव बना रहा था.


घबराहट में हम ने सबमिट बटन दबा दिया और तुरंत मैसेज आया, ‘12,850 रुपए आप के खाते से डैबिट किए गए.’ मैं दंग रह गया, ‘‘अरे, हमारे पैसे कैसे कट गए?’’ सामने से आवाज आई, ‘नो प्रौब्लम सर, यह सिर्फ डमी ट्रांजैक्शन है. अभी नया लिंक भेजता हूं, उस से आप को रिफंड जाएगा.’ और हम ने वही गलती दोहराई, एक बार 2 बार कुल 5 बार. अब हमारे खाते से 64,250 रुपए निकल चुके थे. जब उस ने छठी बार 10,000 रुपए का नया लिंक भेजा, बेटे ने कांपती आवाज में पूछा, ‘‘बारबार पैसे कट रहे हैं पापा, रिफंड क्यों नहीं रहा?’’


फोन पर आदमी झल्ला गया, ‘सर, यह कन्फर्मेशन है. फास्ट करिए.’ बेटे ने बैंक ऐप खोला और उस ने देखा तो पता चला पूरे 64,250 रुपए हमारे खाते से निकल चुके थे. हम ने उसे एक भद्दी सी गाली दी और उस ने तुरंत फोन काट दियाअब हम ने बैंक की हैल्पलाइन से बात की. जवाब मिला, ‘यह फिशिंग फ्रौड है. तुरंत साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज करें.’ मेरा मन बहुत बो?िल हो गया था. मरता क्या करता. 2 घंटे में हम ने एफआईआर से ले कर औनलाइन शिकायत तक सबकुछ पूरा किया.


लेकिन अगले ही दिन सुबह एक चमत्कार हुआ. फोन खोला तो देखा पूरर 64,250 रुपए वापस मेरे खाते में जमा हो गए थे. खुशी के आंसू गए. पहली बार लगा कि सरकारी विज्ञापन सच बोलते हैं, ‘तुरंत शिकायत करो, पूरा पैसा वापस मिल जाएगा.’ एक महीना बीत गया. जिंदगी धीरेधीरे सामान्य हो चली थी, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. बैंक से फिर हमें 4 एसएमएस मिले. चैक किया तो पता चला कि कुल 5 में से 4 रिफंड वापस ले लिए गए थे. मतलब 51,400 रुपए फिर से काट लिए गए थे.


मैं ने घबरा कर बैंक को फोन लगाया. जवाब मिला, ‘सर, हम ने रिफंड की पुष्टि के लिए आप को फोन किया था. आप ने रिसीव नहीं किया, इसलिए रकम वापस डैबिट हो गई है.’ मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई. ठगी से बचने के डर ने मु? अनजान फोन उठाने नहीं दिया और अब उसीसतर्कताकी सजा मिल गई थी. हम ने बैंकिंग लोकपाल में शिकायत की. एक महीने बाद जवाब आया, ‘आप की शिकायत निराधार है.’


सरकारी तंत्र ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के नाम पर बस औपचारिकता कर दी थी. उस दिन सम? में आया कि खतरा सिर्फ ठगों से नहीं, खतरा उस व्यवस्था से भी है, जो जनता से जागरूकता की उम्मीद तो करती है, पर खुद कभी संवेदनशीलता नहीं दिखाती. अब मु? एक ही बात सम? में रही थी, वह यह थी कि सावधानी कोई औप्शन नहीं, बल्कि आज की पहली जरूरत है. एक गलत क्लिक हमारी सारी सिक्योरिटी में सेंध लगा सकता है. किसी तंत्र, संस्था या नियम से पहले अपनी सोच पर भरोसा करना ही सब से बड़ा कवच है.    Hindi Story                     

Crime Story: गोंडा में औनर किलिंग – लड़की को करंट लगा कर मारा

Crime Story: उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला अपनी चीनी इंडस्ट्री के लिए मशहूर है, पर यहीं से एक ऐसी खबर आई है, जो समाज और परिवार में फैले जहर की दर्दनाक मिसाल है. यहां के पांडेय बाबा पुरवा इलाके में रहने वाली 19 साल की शिवानी पांडेय की 30 जनवरी, 2026 की सुबह संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. इस बारे में शिवानी के पिता चंद्र प्रकाश पांडे और भाई राहुल ने सुबह 7 बजे पुलिस को सूचना दी और बताया कि शिवानी कपड़े इस्तरी कर रही थी और करंट लगने से उस की मौत हो गई.


पर यह मामला इतना सीधा था नहीं, क्योंकि इसी बीच शिवानी के प्रेमी ने उस के पिता और भाई के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करा दिया. इस के बाद पुलिस मौके पर पहुंची. शिवानी की लाश को पोस्टमौर्टम के लिए भेज कर जांच शुरू की. साथ ही, पुलिस को यह भी पता चला कि शिवानी का गांव में रहने वाले परमेश्वर पाठक से तकरीबन 5 साल से अफेयर चल रहा था. जब यह बात शिवानी के पिता और भाई को मालूम हुई, तो उन्होंने शिवानी को सम?ाने की कोशिश की, लेकिन शिवानी यह रिश्ता तोड़ने के लिए तैयार नहीं थी.


इस के बाद पुलिस ने शिवानी के भाई और पिता को गिरफ्तार कर लिया. कड़ाई से हुई पूछताछ में उन दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. क्यों हुआ यह कांड 28 मई, 2025 को शिवानी के प्रेमी परमेश्वर पाठक ने उस के पिता चंद्र प्रकाश पांडे से शादी को ले कर बात की थी, लेकिन उन्होंने शादी करने से इनकार कर दिया. बाद में किसी तरह नवंबर, 2025 में शादी तय हुई, लेकिन उस से पहले ही परमेश्वर पाठक के पिता की मौत हो गई और यह शादी टल गई.


हाल ही में फिर से शादी की बात उठी, लेकिन शिवानी के घर वालों ने साफ मना कर दिया. इतना ही नहीं, वे शिवानी के साथ मारपीट भी करने लगे. इस बात से तंग आई शिवानी ने अपने प्रेमी परमेश्वर पाठक को 2 बार चिट्ठी लिख कर भेजी और उस ने डर जाहिर किया कि उस के साथ कुछ भी गलत हो सकता है. इधर, शिवानी के पिता और भाई गुस्से में थे. पुलिस पूछताछ में इन दोनों आरोपियों ने बताया कि वारदात वाले दिन शिवानी सुबह के तकरीबन 5 बजे घर से चुपचाप भागने की फिराक में थी. यह पता चलने पर वे शिवानी को कमरे में ले गए और भाई राहुल ने उसे तख्त पर लिटा दिया, फिर उस के हाथों को मफलर से बांध दिया.


इस के बाद पिता चंद्र प्रकाश ने शिवानी के मुंह को दुपट्टे से बांधा और बिजली की इस्तरी के तार से उस के पैर में करंट लगाया गया. इस से कुछ देर में तड़पतड़प कर उस की मौत हो गई. इस पूरे मामले के बारे में एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि बेटी की पिता और भाई ने मिल कर हत्या की थी और पुलिस को गुमराह करने के लिए करंट से मौत की सूचना दी थी, पर पोस्टमौर्टम रिपोर्ट और आरोपियों के कुबूलनामे
से मामले का खुलासा हो गया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.                                

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