Gift for Sisters :रक्षाबंधन के इस फेस्टिवल पर प्यारी बहन को दें यूनिक गिफ्ट 600 रुपए तक

Gift for Sisters. रक्षाबंधन भाई-बहन का प्यारा सा पवित्र त्योहार है. जिस दिन बहनें अपने भाईयो को राखी बांध कर नसे अपनी रक्षा करने का वचन लेती है. साथ ही, भाईयों के लिए एक सवाल बना रहता है कि वह अपनी बहनों को क्यां गिफ्ट करें, क्योंकि बहनों को लिए सबसे खास इस त्योहार पर उनके लिए गिफ्ट होता है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी बहन यूनिक, कम रेट में अच्छा गिफ्ट दे सकें तो आज हम इस आर्टिकल में ऐसे ही कुछ स्पेशल गिफ्ट के बारें में बताएंगे जो आप 600 रुपए तक अपनी बहन को दे सके.

पर्सनल सेफ्टी अलार्म

यह एक छोटा सा अलार्म है, जो आपकी बहन की सेफ्टी के काफी काम आएगी. अगर आपकी बहन किसी खतरनाक जगह पर फंस जाएं तो आपकी बहन इस अलार्म को बजा सकती है. यह मुश्किल में आसपास के लोगों को बुलाने में काम आ सकता है. ये आपको 525 रुपय तक मिल जाएगा.

प्रेपर स्प्रे

हर महिला के पास पेपर स्प्रे जरूर होना चाहिए. इसे आत्मरक्षा स्प्रे भी कहते हैं. यह स्प्रे उन लड़कियों के काफी काम आता है, जो कि घर से बाहर रहती है. हर लड़की को अपने पर्स में पेपर स्प्रे रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल कर सकें. भाई अपनी बहन को पेपर स्प्रे गिफ्ट में दे सकते हैं. ये असानी से ओनलाइन मिल जाता है. जिसकी कीमत 150 रुपय से होती है.

ट्रैकिंग ऐप

अपनी बहन के फोन में मोबाइल में ट्रैकिंग ऐप्स इंस्टौल कर के भी आपको उसको एक गिफ्ट दें सकते है. अगर आपकी बहन ट्यूशन और कौलेज जाती है तो ये गिफ्ट देना एक अच्छी तरीका है.  इससे आप उनकी लोकेशन ट्रैक कर पाएंगे और इमरजेंसी में तुरंत मदद कर सकेंगे.

की-चेन

की-चेन में काफी सेफ्टी होती है. जैसे ग्लास ब्रेकर, सीट बेल्ट कटर और एक छोटा ब्लेड. इसे आसानी से बहन की चाबियों के साथ रखा जा सकता है जो इमरजेंसी में काम लाया जा सकता है.

मेकअप किट

लड़कियों को मेकअप का शौक होता है. ऐसे में अगर आप अपनी बहन के लिए रक्षाबंधन के इस त्यौहार को खास बनाना चाहते हैं तो उन्हें मेकअप कीट से जुड़ी चीजें जरूर गिफ्ट करे. आप अगर चाहें तो उनकी पसंदीदा लिपस्टिक शेड भी उन्हें गिफ्ट कर सकते हैं. आप अगर चाहें तो मेकअप से जुड़ी कुछ चीजों को एक बौक्स में सजाकर भी उन्हें गिफ्ट कर सकते हैं. इसके अलावा मार्केट में कई तरह के मेकअप किट मिलते है. आप मेकअप किट औनलाइन आर्डर भी कर सकते है.

Rakhi Special : एक बहन की चिट्ठी शहीद भाई के नाम

Rakhi Special –

हमारे प्रिय भैया,

आप मेरी चिट्ठी की बड़ी बेताबी से राह देखा करते हैं, यह मुझे मालूम है, क्योंकि लौटने पर आप ने खुद कहा था, ‘इस बार मेरे दोस्तों ने जब तक मुझ से पार्टी नहीं ले ली, मुझे तेरी राखी नहीं दी.’

उस नादान उम्र में भी मैं सोचा करती थी कि इस एक राखी ने भैया का कितना खर्च करवा दिया. पर, मैं जानती थी कि राखी बंधवाने की खुशी में आप कितने चहक उठते हैं.

जब आप यहां होते थे, तो राखियां और तोहफे भी आप ही ले आते थे. आप के चेहरे पर खिलखिलाती खुशी उस वक्त मेरी समझ से परे थी, पर आज उन्हीं पलों की याद में आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं.

आप कुछ दिनों की छुट्टी लेकर आए थे. आप ने जिद की थी, ‘चल, तेरी राखी की नई ड्रैस ले लें.’

तब मैं ने कहा था, ‘भैया, आप लौट आइए, फिर दिलवा देना.’

आप को पुलिस कमांडो की पोस्ट के लिए अकोला का ट्रांसफर और्डर मिल चुका था. हम बहुत खुश थे कि बस कुछ ही दिनों में आप फिर से हमारे साथ होंगे.

भैया, आप का चुलबुला स्वभाव सारे घर को हिला देता था. आप के आने पर सारा घर खुशी से झूम उठता था. आप ने कई पुरस्कार जीते थे. आप की दमदार आवाज में वह रचना तो मेरे दिलोदिमाग में बस सी गई है, जिस पर तालियों की आवाज गूंज उठी थी, ‘तन समर्पित, मन समर्पित, जीवन का कणकण समर्पित, चाहता हूं देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूं…’

देश पर कुरबान होने की चाह कई बार आप के मुंह से निकल जाया करती थी और आप की वह चाह पूरी भी हुई.

हम उन 13 दिनों का इंतजार कर रहे थे, जब आप लौट कर आने वाले थे. यही सोच कर मैं ने आप को चिट्ठी भी नहीं लिखी कि आप आने वाले ही तो हैं. पूरे घर में आप का पलपल इंतजार हो रहा था. आप के लौट आने में सिर्फ 2-3 दिन बाकी थे.

उस दिन सुबहसुबह आप के छोटे भाई घर आए और अब्बू की गोद में सिर रख कर रोने लगे. हमें लगा कि आप के घर पर कुछ हुआ है, शायद आप की मां या बाबूजी… पर, उन की भर्राई आवाज निकली, ‘राजू अब इस दुनिया में नहीं रहा,’ कानों पर यकीन नहीं हो रहा था, पर वे रोतेरोते कहे जा रहे थे.

गढ़चिरोली के अहेरी में पुलिस चौकी के उद्घाटन के लिए जाते समय सुरंग लगा कर नक्सलवादियों ने आप के ग्रुप की 3 जीपों को उड़ा दिया था, जिन में शहीद हुए 7-8 जवानों में से एक आप भी थे.

भैया, मैं तो आप की धर्म बहन हूं, आप के दोस्त की बहन. जब इन 20-22 सालों में हम आप को नहीं भुला पाए, तो सोचिए कि आप के बिना आप के मांबाबूजी की क्या हालत रही होगी? फर्ज की सूली पर चढ़ कर आप की आरजू पूरी हो गई… लेकिन, आप के साथ जीने की हमारी आरजू का क्या?

भैया, हमें नाज है कि आप ने अपने वतन की खातिर अपनी जान कुरबान की. उन लोगों को कौन समझए, जो इस तरह किसी की जान से भी प्यारों को बिना किसी गुनाह के अपनों से दूर कर देते हैं? क्यों उन्हें एहसास नहीं होता कि किसी अपने के चले जाने के बाद उस के परिवार वालों की हालत क्या होती होगी?

सच कहती हूं भैया, याद आप की बहुत आती है. छलक पड़ते हैं आंखों से आंसू, जब कोई बात आप की याद आती है.

आप की बहन,

अर्जिन.

Rakhi Special

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