VIP Culture : हवा होते सपने

VIP Culture. सपना एयरपोर्ट के मेन गेट पर खड़ीखड़ी थक गई थी. यहां तो उस ने सुना था कि सभी काम समय पर होते हैं, मगर वह जिन नेता के इंतजार में खड़ी की गई थी, उन का कहीं अतापता नहीं था.

कोई बलदेव भाई किसी मशीन की तरह अलर्ट मोड में खड़े थे जैसे. कहीं कोई कमी न रह जाए, इस बात का बलदेव को खास खयाल था. उन्हीं ने करुणा चाची को फोन किया था कि तकरीबन आधा घंटे में एक सजीधजी लड़की चाहिए.

यह सुन कर करुणा चाची सपना के पास सुबहसुबह ही आ धमकी थीं. वे बोली थीं, ‘‘थोड़ी देर की तो बात है. बस जो मेहमान हैं, उन पर फूल की पंखुडि़यां बिखेरनी हैं, टीका लगाना है, आरती उतारनी और और माला पहनानी है. इसी के 2,000 रुपए मिल रहे हैं, तो क्या बुरा है. बस, शर्त यही है कि तुझे आधा घंटे में ही तैयार हो कर निकल लेना है.’’

‘‘ठीक है, मैं आज कालेज नहीं जाऊंगी…’’ सपना थोड़ा कशमकश में थी, ‘‘लेकिन किसी के स्वागत के लिए मैं ऐसे ही कैसे चली जाऊं? माना कि मुझे वहां जा कर कुछ खास नहीं करना है. लेकिन ऐसे हर काम के पहले मुझे ब्यूटीपार्लर जाना होता है. किसी के स्वागत में लोग मुझसे से क्या उम्मीद रखते हैं, उस का तो मुझे खयाल रखना ही होगा न?’’

‘‘उन के पास समय नहीं है. वे बड़े लोग हैं. उन्हें मना नहीं करना चाहिए…’’ करुणा चाची गिड़गिड़ाईं, ‘‘तुम वैसे ही बहुत खूबसूरत हो. कुछ भी पहन लोगी, तो खूबसूरत ही लगोगी. वैसे, तुम्हारे पास जो गुलाबी रंग का घाघराचोली है, वह पहन लेना और कुछ मेकअप कर लेना. इमिटेशन वाले आभूषण तो तुम्हारे पास ढेर सारे हैं ही. कुछ ढंग का पहन लेना.

‘‘राधिका भी तो साथ जा ही रही है.  जाओ, जल्दी तैयार हो जाओ. गाड़ी आती ही होगी. मैं ने तुम्हारी तरफ से हां कर दिया है.’’ अब आधा घंटे में कोई कैसे तैयार हो सकता है. वह तो गनीमत है कि सपना कालेज जाने के लिए नहा चुकी थी. कोई बात नहीं, वह तैयार हो लेगी. घर बैठे काम मिले, तो दिक्कत क्या है. उस के लिए तो यह अच्छा ही है.

जल्दीजल्दी तैयार हो कर सपना चौराहे के पास गाड़ी का इंतजार कर ही रही थी कि थोड़ी देर में ही गाड़ी भी आ गई थी.

सपना को एक तरह से खुशी ही हुई. आमतौर पर शादीब्याह, रिसैप्शन वगैरह में वह यही काम करती थी. किसी सजीधजी गुडि़या की तरह मेन गेट पर खड़ी रहो और लोगों पर फूल की पंखुडि़यां छितरा कर उन्हें टीका लगाओ. इसी काम के उसे 1,000 रुपए मिल जाते थे, तो उसे लगता था कि यह बहुत बड़ी नेमत है.

पड़ोस की करुणा चाची ने सपना को पहलेपहल यह काम दिलवाया था कि तू तो बड़ी खूबसूरत है और पार्टियों में तो ऐसे ही चेहरों की डिमांड रहती है. करना क्या है, बस सजधज कर खड़ी रहना है. मेहमानों को जरा मुसकरा कर देखना है, ताकि वे खुश हो जाएं. इन पार्टियों या रिसैप्शन में चायनाश्ता और रात का राजसी भोजन अलग से मिलता है. क्या पता, कोई खुश हो कर टिप भी दे दे.

करुणा चाची शहर की जानीमानी समाज सेविकाओं में गिनी जाती थीं. तकरीबन रोज ही उन का कहीं न कहीं आनाजाना लगा रहता था. अब तो वे राजनीतिक सभाओं और सम्मेलनों में भी जाती थीं. उन का शाही खर्च ऐसे ही नहीं चलता.

करुणा चाची के कहने पर सपना महंगी चीजें खरीदती थी. पहले तो वह किराए के कपड़ों से काम चलाती थी, मगर इधर उस ने कुछ अच्छे कपड़े खरीद भी लिए थे. बहुत मन था कि उस के पास अपना बढि़या घाघराचोली हो. कुछ संयोग ऐसा लगा कि उसे पिछले सीजन में लगातार काम मिले, तो उस की

अच्छी कमाई हो गई. तब उस ने पूरे 10,000 रुपए में गुलाबी रंग का सलमेसितारों से टंका घाघराचोली खरीद लिया था. अच्छे कपड़े रहने से एक फायदा यह तो है ही कि डिमांड बढ़ जाती है. फिर उस के किराए के पैसे बच जाते थे. दूसरे लौटाने की हड़बड़ी नहीं रहती. न यह डर कि कहीं फट जाए, तो दुगनाचौगुना जुर्माना भरो.

आमतौर पर इस काम में ब्यूटीपार्लर का भी खर्च शामिल रहता है. यह अलग बात है कि सपना पार्टियों से ब्यूटीपार्लर के खर्च का चार्ज अलग से लेती है.

अब वह इस पर खर्च क्यों करे. उसे सजनाधजना आता है. कुछ ब्यूटीपार्लर के टिप्स उस ने देखसुन कर सीख भी लिए हैं. सो, अपनी अलमारी में वह कुछ लिपस्टिक, पाउडर, स्नो, क्रीम वगैरह रखती भी है. ये सब इतने महंगे भी हैं कि उन के दाम सुन कर कलेजा मुंह को आता है. मगर अब जरूरी है, तो है. खरीदना तो पड़ेगा ही.

इमिटेशन के आभूषणों के अनेक सैट सपना के पास हैं. जब वह तैयार हो कर निकलती है, तो कितना कुछ सुनना भी तो पड़ता है उसे. मगर अब उस ने इसे नजरअंदाज करना सीख लिया है. इस में गलत क्या है. वह खूबसूरत है तो है. वह इस के बदले कीमत वसूल करती है, तो क्या बुरा है.

करुणा चाची ने बताया था कि आज के मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए कोई नेता दिल्ली से आने वाले हैं, जिन के स्वागत के लिए उसे एयरपोर्ट जाना होगा, तो वह खुश हो गई थी. उन नेता का नाम क्या है, वे कहां के रहने वाले हैं, इस से उसे कोई मतलब नहीं. करोड़ों में खेलने वाले इन नेताओं का नामपता जान कर करना भी क्या है.

दरअसल, उन नेता को अंदाजा नहीं था कि उन्हें मंत्रिमंडल में लिया जाएगा, इसलिए अपनी रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए वे दिल्ली चले गए थे. एक दिन पहले ही पार्टी हाईकमान से खबर मिली कि उन्हें मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना है, तो वे भागेभागे चले आए थे हवाईजहाज से. उन के समर्थकों की तो पौबारह हो गई. जब उन का आदमी मंत्री बनेगा, तभी तो उन को मलाई और मिठाई रूपी ठेका और सप्लाई का काम मिलेगा.

आननफानन में नेता के स्वागत की तैयारी होने लगी थी और यह एयरपोर्ट से ही शुरू होना था. उस कालेकलूटे, गोभी के पकौड़े जैसे बड़े नाक, थुलथुल काया वाले नेता का स्वागत एयरपोर्ट पर कोई सुंदरी करे, तो दिन बेहतर होगा और इसी के लिए सपना का नाम आया था.

फट से करुणा चाची का संदेश सपना के पास गया था और वह तैयार हो कर लगभग भागते हुए गाड़ी से 8 बजे सुबह ही यहां आ पहुंची थी. अब वह यहां चाय मांगे, तो किस से? चाय पीने के चक्कर में लिपस्टिक बिगड़ भी तो सकती है.

आज तक सपना एयरपोर्ट नहीं आई थी. उस का भी बहुत मन करता था कि वह देखे कि हवाईजहाज कैसे उड़ता है और जमीन पर कैसे उतरता है. इसी बहाने आज उस की सालों की साध भी पूरी हो जाएगी.

एयरपोर्ट को देख कर तो सपना एकदम से दंग रह गई. राधिका भी इसी काम के लिए उसी के साथ आई थी. दरअसल, पहले तो एक लड़की ही को बुलाया गया था, मगर दल के नेता ने फरमान जारी किया कि 2 लड़कियां सम्मान करेंगी, तो ज्यादा अच्छा होगा, इसलिए आननफानन सपना को भी बुला लिया गया था.

लड़की को तैयार होने में देर तो लगेगी ही. तब और, जब किसी के स्वागत के लिए सजनासंवरना हो. और यहां एयरपोर्ट पर इतनी साफसफाई और सजावट. लकदक करती कुरसियां और सोफा सैट. ऊंची छतों पर लगे भव्य ?ाड़फानूस और दीवारों पर टंगी खूबसूरत बड़ीबड़ी पेंटिंग्स.

सुबह होने के बावजूद वहां भीड़ थी. हो भी क्यों नहीं. नई सरकार बनने की खुशी में या हड़बड़ी में वीआईपी लोगों का आनाजाना जारी था. चार्टर्ड हवाईजहाजों के बीच पब्लिक हवाईजहाज से उतरने वाले शायद वे आखिरी नेता थे.

10 बजे हवाईजहाज को उतरना था. मगर वीआईपी को लाने वाली फ्लाइट को प्राथमिकता दी जा रही थी. ऐसे में पब्लिक फ्लाइट हवा में ही मंडराती रही. उन नेता का हवाईजहाज कभी बनारस, तो कभी गया की ओर हवा में ही चक्कर काटता रहा.

साढ़े 11 बजे हवाईजहाज उतरा, तो वे नेता बेहद हड़बड़ी में थे. एयरपोर्ट के मेन गेट पर सपना से उन्होंने जल्दीजल्दी टीका लगवाया, माला पहनी. राधिका ने उन की जल्दीजल्दी आरती उतारी. नेताजी ने उतनी ही तेजी से माला उतारी और उसे नोंच कर किनारे फेंक कर बाहर की ओर भागे.

सुबह के 11 बजे से कार्यक्रम शुरू होना था और अभी यहीं साढ़े 11 बज रहे थे. मुख्यमंत्री से भी लेट पहुंचेंगे क्या वे नेता राजभवन? इस तुनकमिजाज मुख्यमंत्री का कोई भरोसा नहीं. कहीं देरी का बहाना कर मंत्रिमंडल में शामिल करने से इनकार कर दे, तो कोई क्या कर लेगा.

इन लोगों ने आज भारी अफरातफरी मचाई पटना एयरपोर्ट पर. नीचे उतरने ही नहीं दिया पब्लिक फ्लाइट को, इसलिए तो देर हो गई न. मुसाफिरों को लिए हवाईजहाज डेढ़ घंटे चक्कर काटता रहा हवा में, आसमान में. कभी मुजफ्फरपुर के आसमान में, तो कभी गया या बक्सर के आसपास.

भारी अफरातफरी के बीच मेन हाईवे को भी रोक दिया गया था. यह कोई बात नहीं. मगर किसी को आसमान में भी यों रोका जाता है क्या. गाड़ी में बैठ कर छूमंतर होते ही उन के समर्थकों की भीड़ भी दूसरी गाडि़यों में बैठ कर छूमंतर हो गई थी.

सपना और राधिका को पता नहीं था कि जिन नेता की उन्होंने आरती उतारी है, चंदन का टीका लगाया है, गुलाब की पंखुडि़यां उन पर निछावर की हैं, उन का नाम क्या है. एक खतरनाक से दिखने वाले आदमी ने सपना को बताया था कि यही हैं नेताजी. इन्हें टीका लगाओ, माला पहनाओ.

सपना और राधिका ने वह कर दिया था. ताबड़तोड़ तसवीरें भी ली गई थीं. पर हड़बड़ी में उन्होंने घर से अपना पर्स भी नहीं लिया था, जिस से उन के हाथ खाली थे. अब घर वापसी के लिए शेयर आटोरिकशा के लिए भी तो कुछ पैसे चाहिए न.

अचानक उन दोनों को वह आदमी बलदेव दिखा. वह अपनी बुलेट में किक मार रहा था कि राधिका ने उसे जा पकड़ा और पैसे मांगे. ‘‘तुम्हारे पैसे बाद में मिल जाएंगे…’’ बलदेव बोला, ‘‘अभी जल्दी है. मुझे राजभवन जाना है. अभी मुझे जाने दो.’’

‘‘अरे, हमारा मेहनताना बाद में देना,’’ मुंहफट राधिका तुरंत बोली, ‘‘हमें इतनी जल्दी सुबहसुबह आप लोगों ने बुला लिया. हम अपना पर्स भी नहीं ले पाई हैं. सुबह से मुंह में एक दाना नहीं डाला, चाय का एक कप भी नहीं. पर कोई बात नहीं. लेकिन हमें घर जाने का किराया तो दे जाओ. हम 10 किलोमीटर दूर पैदल तो अपने घर नहीं जा सकती हैं न.’’

बलदेव ने तुरंत अपनी जेब को टटोला और 50 रुपए का एक नोट निकाल कर उन की ओर उछाल दिया. बुलेट की ‘फटफट’ आवाज के बीच वे दोनों एकदूसरे का मुंह देख रही थीं. इज्जत करने वालों की इसी तरह बेइज्जती होती है शायद.

पैसे वाले और पैसा बनाते जाएंगे और उन जैसे लोग इसी तरह चंद रुपयों के लिए रौंदे जाते रहेंगे. सामंतवाद और पूंजीवाद का यही बिगड़ा रूप है. काम खत्म होने के बाद भी मेहनताने की गारंटी नहीं. चाय का एक प्याला तक उन्हें इस एयरपोर्ट पर पीने को नहीं मिला. फिर भी उन्हें इस पूंजीवादी सामंतवाद की इसी तरह आरती उतारनी होगी, टीका लगाना होगा, फूलों की पंखुडि़यां निछावर करते हुए माला पहनाते समय मुसकराना होगा. बदले में वे देंगे नफरत भरा बरताव और वे मुंह से उफ तक नहीं कर पाएंगी. VIP Culture

क्या इस खुलासे के बाद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं?

विरोधियों के निशाने पर रहने वाले केजरीवाल ने यों तो दिल्ली में कई साहसिक घोषणाएं की हैं और उसे लागू भी कराया है. स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और पानी की मुफ्त योजनाओं को लागू कर वाहवाही बटोरने वाली केजरीवाल सरकार अब अपने ही स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी एक रिपोर्ट में घिरती नजर आ रही है.
दरअसल, मुख्य विपक्षी पार्टी के एक विधायक ने केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से एक रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार जो हकीकत सामने आया है वह काफी चौंकाने वाला है.

सिर्फ घोषणा ही बन कर रह गई

दरअसल, 2015 में दिल्ली की सत्ता में आने के वाद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि दिल्ली के अस्पतालों में बेड की क्षमता 10 हजार से बढा कर 20 हजार करेंगे. मगर रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रही है.
दिल्ली विधानसभा में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सत्ता में आने से पहले दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 10,969 स्वीकृत बेड थे जबकि 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में 11,353 बेड ही सरकारी अस्पतालों में हैं. यानी इस दौरान महज 394 बेड ही सरकार बढा पाई.

वैंटिलेटर्स भी पर्याप्त नहीं

एक सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने दिल्ली में वैंटिलेटर की वर्तमान स्थिति पर भी स्थिति साफ की और कहा कि दिल्ली के अस्पतालों में 440 वैंटिलेटर्स हैं जिन में से मात्र 396 वैंटिलेटर्स ही ऐक्टिव हैं. आश्चर्य की बात तो यह कि पूरी दिल्ली में सिर्फ लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में ही एमआरआई की सुविधा है.

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घिरती नजर आ रही है सरकार

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री के इस खुलासे से दिल्ली सरकार खुद ही घिरती नजर आ रही है.
प्रमुख विपक्षी पार्टियां भाजपा और कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की स्वास्थ्य योजनाओं को जनता के साथ छलावा बताया और कहा कि जिस सरकार की महात्वाकांक्षी योजना स्वास्थ्य सेवाओं को ले कर थी और जिन्होंने स्वास्थ्य सेवा को ले कर बङीबङी घोषणाएं की थीं, उस का पोल खुद सरकार के मंत्री ने खोल दी हैं.

नए प्रोजैक्ट की रफ्तार भी बेहद धीमी

उधर, दिल्ली सरकार द्वारा 3 नए सरकारी अस्पतालों के निर्माण की वर्तमान स्थिति पर भी सरकार ने जो रिपोर्ट दी है वह भी काफी निराशाजनक है. दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि दिल्ली में 3 नए सरकारी अस्पतालों के प्रोजैक्ट पर काम चल रहा है.
जबकि हकीकत तो यह है कि अंबेडकर नगर अस्पताल का निर्माण कार्य फरवरी, 2019 में होना था, जिस का लक्ष्य अब नवंबर, 2019 रखा गया है.
बुराङी अस्पताल प्रोजैक्ट पूरा होने का समय मार्च, 2019 था जो नवंबर, 2019 कर दिया गया है.
इंदिरा गांधी अस्पताल का प्रोजैक्ट तो इतना सुस्त है कि इसे मार्च 2019 में ही पूरा होना था, जिसे बढा कर मार्च, 2020 कर दिया गया है.
जाहिर है, इस मुद्दे को ले कर अब विपक्षी पार्टियां केजरीवाल सरकार को घेरने का काम करेगी जिस का जवाब खुद दिल्ली सरकार को देना भी भारी पङेगा.

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वाहवाही बटोर चुकी है सरकार

मगर सचाई यह भी है कि कुछ योजनाओं को लागू कर दिल्ली सरकार ने न सिर्फ दिल्ली में बल्कि विदेशों में भी वाहवाही बटोर चुकी है. सरकार की महात्वाकांक्षी योजनाएं मोहल्ला क्लीनिक और महिलाओं को मुफ्त मैट्रो में यात्रा कराने को ले कर सरकार की प्रशंसा पहले ही की जा चुकी है.

 

अजीत-माया गठबंधन: अगर “हम साथ साथ” होते!

छत्तीसगढ़ में तीसरे मोर्चे के रूप में उभर कर राज्य की सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी का टूट कर बिखर चुका है . प्रदेश की राजनीति को अपनी उंगलियों पर कठपुतली की भांति नचाने का गुरूर अजीत जोगी की आंखों में, बौडी लैंग्वेज में अब दिखाई नहीं देता…इन दिनों आप प्रदेश की राजनीति मैं हाशिए पर है .

मगर जब अजीत प्रमोद कुमार जोगी ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस आलाकमान के सामने खम ठोंक कर जनता कांग्रेस ( जे ) का गठन किया था तब उनके पंख आकाश की ऊंचाई को छूने बेताब थे . यही कारण है कि अजीत जोगी के विशाल कद को देखकर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने उनसे हाथ मिलाया और कांग्रेस के खिलाफ दोनों ने मिलकर छत्तीसगढ़ में अपनी अलग जमीन तैयार करने की कोशिश की जो असफल हो गई . अजीत जोगी के सामने 2018 का विधानसभा चुनाव नई आशा की किरणों को लेकर आया था . राजनीतिक प्रेक्षक यह मानने से गुरेज नहीं करते की अजीत जोगी जहां से खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से प्रारंभ होती है . मगर विधानसभा चुनाव के परिणामों ने अजीत जोगी और मायावती दोनों पर मानो “पाला” गिरा दिया. दोनों चुनाव परिणाम से सन्न, भौचक रह गए और अंततः यह गठबंधन आज टूट कर बिखर गया है .

अजीत जोगी : अकेले हम अकेले तुम
विधानसभा चुनाव के परिणाम के पश्चात अजीत जोगी और मायावती की राह जुदा हो गई . यह तो होना ही था क्योंकि अजीत जोगी और मायावती दोनों ही अति महत्वाकांक्षी राजनीतिज्ञ हैं . साथ ही जमीन पर पुख्ताई से पांव रखकर आगे बढ़ने वाले राजनेता भी माने जाते हैं. विधानसभा चुनाव में इलेक्शन गेम में अजीत जोगी ने कोई कमी नहीं की थी. यह आज विरोधी भी मानते हैं उन्होंने अपने फ्रंट को तीसरी ताकत बनाया उन्होंने जनता के नब्ज पर हाथ भी रखा था . संपूर्ण कयास यही लगाए जा रहे थे कि अजीत जोगी के बगैर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक हवाओं में पत्ते भी नहीं हिलेंगे.
अगर कांग्रेस को दो चार सीटें कम पड़े तो अजीत जोगी साथ देंगे अगर भाजपा को दो चार सीटे कम मिली तो अजीत जोगी कठिन डगर में साथ देंने हाजिर हो जाएंगे . मगर प्रारब्ध किसको पता है ? छत्तीसगढ़ में अनुमानों को तोड़ते ढहाते हुए छत्तीसगढ़ की आवाम ने कांग्रेस को ऐतिहासिक 68 सीटों पर विजय दिलाई और सारे सारे ख्वाब, सारे मंसूबे चाहे वे अजीत जोगी के हो या मायावती के ध्वस्त हो गए .

अगर “हम साथ साथ होते” !
मायावती ने निसंदेह जल्दी बाजी की और छत्तीसगढ़ की राजनीति में अजीत जोगी और अपनी पार्टी के लिए स्वयं गड्ढा खोदा . विधानसभा चुनाव के अनुभव अगरचे मायावती और अजीत जोगी देश की 17 वीं लोकसभा समर में साथ होते तो कम से कम दो सीटें प्राप्त कर सकते थे . विधानसभा चुनाव में बिलासपुर संभाग की तीन लोकसभा सीटों पर इस गठबंधन को बेहतरीन प्रतिसाद साथ मिला था . और यह माना जा रहा था कि बिलासपुर और कोरबा लोकसभा सीट पर बसपा और जोगी कांग्रेस कब्जा कर सकते हैं . इसके अलावा तीसरी सीट जांजगीर लोकसभा में बहुजन समाज पार्टी के दो विधायक के साथ अच्छी बढ़त मिली जिससे यह माना जा रहा था कि यह गठबंधन बड़ी आसानी से यह लोकसभा सीट पर पताका फहरा सकता है . मगर बहन मायावती ने भाई अजीत जोगी जैसे मजबूत खंबे पर विश्वास नहीं किया और अपने प्रत्याशियों को मैदान-ए-जंग में उतारा . अजीत जोगी मन मसोस कर रह गए .

लोकसभा में दोनों की साख बढ़ती
यहां यह बताना आवश्यक है कि अजीत जोगी और मायावती की पार्टियों को विधानसभा चुनाव में आशा के अनुरूप भले ही परिणाम नहीं मिले मगर यह मोर्चा तीसरे मोर्चे के विरुद्ध समर्पित हो गया अजीत जोगी को 5 सीटें मिली और मायावती को सिर्फ दो विधान सभा क्षेत्रों मैं सफलता मिली . संभवत: इसी परिणाम से मायावती नाराज हो गई . क्योंकि छत्तीसगढ़ में बसपा को 2 से 3 सीटों पर तो विजयश्री मिलती ही रही है . ऐसे में यह आकलन की अजीत जोगी से गठबंधन का कोई लाभ नहीं मिला तो सौ फीसदी सही है मगर इसके कारणों का भी पार्टी को चिंतन करना चाहिए था जो नहीं किया गया और लोकसभा में अपनी-अपनी अलग डगर पकड़ ली गई जो भाजपा और कांग्रेस के लिए मुफीद रही .
लोकसभा समर में बसपा को कभी भी एक सीट भी नहीं मिली है अगरचे यह गठबंधन मैदान में होता तो बसपा आसानी से एक सीट पर विजय होती . यह क्षेत्र है जांजगीर लोकसभा का . मगर बसपा ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली भाजपा के नये चेहरे की राह आसान कर दी . दूसरी तरफ जोगी और उनकी पार्टी का भविष्य भी अंधकारमय हो चला .

नगरीय-निकाय चुनाव में क्या होगा ?
अजीत जोगी ने विधानसभा चुनाव में हाशिए पर जाते ही पार्टी की कमान अपने सुपुत्र अमित ऐश्वर्य जोगी को सौंप दी है . प्रदेश में वे अपना मोर्चा खोलकर आए दिन रूपेश सरकार की नाक में दम किए हुए हैं . अपने हौसले की उड़ान से अमित जोगी ने यह संदेश दिया है कि वे आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती भाजपा और कांग्रेस के लिए बनेंगे . उन्होंने अकेले दम पर नगरीय चुनाव पंचायती चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है . इधर बीएसपी ने भी अपने बूते चुनाव लड़ने की घोषणा की है मगर बीएसपी नगरीय चुनाव में कभी भी अपना एक भी महापौर जीता पाने में सफलीभूत नहीं हुई है .

यह तथ्य समझने लायक है कि अजीत जोगी और मायावती की युती छत्तीसगढ़ में बड़े गुल खिला सकती थी. अजीत जोगी की रणनीति और घोषणा पत्र को कांग्रेस ने कापी करना शुरू किया और अपने बड़े संगठनिक ढांचे के कारण कांग्रेस आगे निकल गई अन्यथा अजीत जोगी के 2500 रुपए क्विंटल धान खरीदी और बिजली बिल हाफ फार्मूला को अगर कांग्रेस नहीं चुराती तो जोगी और बसपा की स्थिति आश्चर्यजनक गुल खिला सकती थी . राजनीति में संभावनाओं के द्वार खुले रहते हैं ऐसे में भविष्य में क्या होगा यह आप अनुमान लगा सकते हैं.

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