इंडियन नैशनल लोकदल में इस वक्त कलह का साया गहराया हुआ है. पिछले कुछ समय से चौटाला परिवार के सदस्य 2 दलों में बंटने के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रहे हैं. हरियाणा में चौधरी देवीलाल की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए उन के बेटे ओमप्रकाश चौटाला आए. वे राज्य के मुख्यमंत्री रहे. मुख्यमंत्री रहते हुए शिक्षक भरती मामले में उन्हें जेल की सजा हुई. फिलहाल अपने बड़े बेटे और सांसद रह चुके अजय चौटाला के साथ जेल में हैं.
दरअसल, अजय चौटाला के बड़े बेटे हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला और उन के चाचा अभय चौटाला के बीच ठनी हुई है. दुष्यंत चौटाला और उन का छोटा भाई दिग्विजय चौटाला एकसाथ हैं जबकि ओमप्रकाश चौटाला अभय चौटाला का साथ दे रहे हैं.
इंडियन नैशनल लोकदल की गोहाना में हुई रैली के बाद परिवार में कलह ज्यादा बढ़ गई. अभी ओमप्रकाश चौटाला पैरोल पर जेल से बाहर आए हुए हैं. उन्होंने अपने पोते व सांसद दुष्यंत चौटाला और उन के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला को पार्र्टी से निलंबित कर दिया. युवा इकाई को भी भंग कर दिया. दिग्विजय चौटाला इस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.
इन दोनों को ही पार्टी से निकालने के बाद दिग्विजय चौटाला ने बागी तेवर दिखाने शुरू कर दिए. उन्होंने कहा कि युवा इकाई को भंग करने का अधिकार केवल अजय चौटाला या 26 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पास है.
राजनीतिक परिवार का यह झगड़ा नया नहीं है. बिहार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में भी उन के दोनों बेटों के बीच मनमुटाव की खबरें आती रही हैं. लालू प्रसाद भी इस वक्त जेल में हैं. उन के बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव के बीच सत्ता संघर्ष की खबरें आती रही हैं. उधर समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव, उन के बेटे अखिलेश यादव और मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के बीच मानो तलवारें खिंची हुई हैं.
साल 2016 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी जब सत्ता में थी तब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उन के चाचा शिवपाल यादव के बीच विवाद सुर्खियों में आए थे. इन दोनों की तनातनी में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव अपने भाई शिवपाल यादव के साथ खड़े हुए, फिर बेटे अखिलेश के साथ. यहां इस परिवार के बीच कलह की मूल जड़ अमर सिंह को माना गया था.
दक्षिण भारत में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम में एम. करुणानिधि के परिवार के सदस्यों एमके स्टालिन और अलागिरी के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है.
दरअसल, इन राजनीतिक परिवारों के सदस्यों के बीच दबदबे को ले कर यह जंग है. इन परिवारों की कलह में कांग्रेस और भाजपा को अपनेअपने फायदे दिख रहे हैं. अब इस समय जब विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की कवायद चल रही है, ऐसे में परिवार पर टिके इलाकाई दलों में फैली फूट विपक्षी एकता के लिए ही नहीं, बल्कि खुद इन दलों की मजबूती के लिए भी खतरनाक है.