Funny Story in Hindi : शादी का पहाड़ा जो कोई बांचे

Funny Story in Hindi. वे काफी देर तक ऐसे बैठे रहे, जैसे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए हों. उन्हें झकझोरा गया, तब बड़े अफसोस के साथ उन्होंने आहिस्ता से अपना सिर हिलाया.

गहरे कुएं से आती हुई आवाज में वे बोले, ‘‘अच्छे दिनों के हल्ले में कैसे बुरे दिन आ गए हैं कि अभी एक दुलहन ने विवाह मंडप में शादी करने से इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि दूल्हा 15 का पहाड़ा नहीं बोल पाया. लाख मिन्नतों के बावजूद दूल्हे को बैरंग लौटना पड़ा.’’

‘‘यह कहो न कि सेर को सवा सेर मिलने की टीस है. इसे ही अच्छे दिन कहते हैं कि आज की लड़कियां होने वाले पति के हिसाबकिताब करने की ताकत को चैक कर रही हैं, वरना अभी तक तो मर्द ही औरत के हुनर का इम्तिहान लेता आया है,’’ मैं ने इतना कहा, तो उन्होंने मुझे यों घूरा, जैसे वह ठुकराया हुआ दूल्हा मैं ही होऊं.

वे मुझे नीचे से ऊपर तक घूरते हुए बोले, ‘‘चलो, एकबारगी बोल भी देता तो क्या, सारे पहाड़े तो वैसे भी शादी के बाद भूल जाने थे.’’

‘‘लगता है कि एक दुलहन द्वारा ठुकराए जाने पर तुम्हारे जैसे मर्दों की मर्दानगी को ठेस पहुंची है.’’

‘‘देखो, तुम मुझे गलत समझ रहे हो. दरअसल, बात यह है कि…’’

बात को बीच में ही काटते हुए मैं ने टोका, ‘‘तो तुम क्या समझाना चाहते हो? हम जब कोई सामान खरीदते हैं, तो पहले अच्छी तरह ठोंकबजा कर देखते हैं कि नहीं? वैसे भी यह तो होना ही था. बैरंग लौटने वालों की फेहरिस्त अब बढ़ती ही जा रही है.

‘‘अभी पिछले दिनों एक दूल्हे ने वरमाला डालते समय गरदन नहीं झुकाई, तो दुलहन ने उसे चलता कर दिया. एक दूल्हे के मुंह से शराब की गंद आई, तो फेरे उलटे पड़ गए.

‘‘इस से भी आगे बढ़ते हुए एक दूल्हे ने दुलहन की सहेलियों पर थोड़ा बेहूदा कमैंट कर दिया, बस फिर क्या था. दूल्हे को कमैंट करना ही भुला दिया गया, इसलिए यह वक्त चोट खाए जख्मों को सहलाने का नहीं, बल्कि सोचनेविचारने का है.’’ वे रोंआसे हो गए और अफसोस में सिर हिलाते हुए बोले, ‘‘काश, किसी ने मुझ से भी शादी के वक्त पहाड़ा बुलवाया होता.’’

‘‘अगर बुलवाया होता, तो आप तो फर्राटे से पहाड़ों के पहाड़ पर चढ़ जाते. शादी का लड्डू जो खाने को बेताब थे,’’ मैं ने मजाकिया लहजे में कहा.

मेरे दोस्त खिसियानी हंसी हंसते हुए कहने लगे, ‘‘बात तो तुम्हारी सच है, लेकिन क्या है कि हम गणित में बचपन से ही कमजोर थे. किसी तरह बोर्ड का वाघा बौर्डर पार कर पाए थे. हमारी किस्मत ही खराब थी, जो किसी ने मंडप में हम से पहाड़ा नहीं बुलवाया, वरना हम तो वहीं फेल हो जाते. फिर ताउम्र जिम्मेदारियों के पहाड़े रटने से छुटकारा पा जाते और इस तरह अच्छीखासी जिंदगी पहाड़ा नहीं होती.’’

उन के दर्द का समंदर जैसे बह निकला था. वे कहते गए, ‘‘सारी उम्र रिश्तों के फौर्मूले सुलझाने में गुजार दी, मगर जोड़ हमेशा गलत ही बैठा. किसी ने सही कहा है कि शादी चार दिन की चांदनी है, फिर अंधेरी रात है. चमकता जुगनू है, जिस की कुछ पलों की चमक अच्छी लगती है.’’

‘‘दोस्त, नर हो न निराश करो मन को… धीरज धरो. वैसे, तुम क्या समझ कर शादी के झाड़ पर चढ़े थे?’’

‘‘काहे के नर, बस वानर समझो, जिन के हिस्से में उछलकूद है. किसी शायर ने सही कहा है, ‘शादी आग का दरिया है और डूब के जाना है’. कई लोग यह कह कर उकसाते पाए जाते हैं कि ‘जो डूबा सो पार गया’, लेकिन यहां जो डूबा, फिर क्या खाक उबरा.

‘‘शादीशुदा जिंदगी नदी के दो किनारों की तरह है, जो जिंदगीभर मिलने की कोशिश करते हैं, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी मिल नहीं पाते हैं. शादी धरती व आसमान का वह किनारा है, जिस में सिर्फ मिलने का भरम है. पास जाओ, तो सबकुछ साफ है.’’

‘‘दुखी आत्मा, जिसे तुम आग का दरिया कह रहे हो, वह शादी नहीं इश्क है. दो किनारों की खूबसूरती इसी में है कि वे तमाम उम्र चाहत, जुनून और जोश के साथ मिलने की कोशिश में लगे रहें. इस से उन का आपसी खिंचाव बना रहता है.’’

‘‘यह शादी का दार्शनिक पक्ष है जनाब, हकीकत इस के उलट है. यह ऐसा लड्डू है, जिसे देशी घी के भरम में बड़े चाव से मुंह में डालते हैं और वैजीटेबल घी से ठग लिए जाते हैं. वैसे, इश्क हो तो आग का दरिया क्या, तलवार की धार पर भी दौड़ जाएं. मेरा तो इतना कहना है कि शादी सुख का विलोम है,’’ वे बोले.

‘‘यदि यह विलोम है, तो अनुलोम का अभ्यास कर के इसे एक लय देनी चाहिए. वैसे, अनुलोमविलोम से एक लयकारी, संतुलनकारी रिद्म बनती है. शादी एक अनुशासन पर्व है, सुव्यवस्थित जीवनशैली का नाम है. लेकिन मर्दों के लंपट मन को अनुशासन में बांधना शेरों को ब्रश कराने से कम नहीं है. कोई कोशिश कर ले, तो तिलमिला जाते हैं. सबकुछ छूट रहा है, मगर हेकड़ी नहीं जाती. यही तो मर्दवादी नजरिया है.’’

वे हमारी बातें चुपचाप सुनते रहे, अफसोस में घोड़े की तरह हिनहिनाते रहे, लेकिन मानने को तैयार नहीं दिखे. जिन्हें मनाता समय है, उन्हें तो यही कह सकते हैं कि अबे, मान भी जाओ मर्द, वरना बहुत पछताओगे. Funny Story in Hindi

Humor : मिस सेजल का स्वयंवर

Humor. मिस सेजल की उम्र 30 पार हो चुकी थी, लेकिन उन की शादी नहीं हुई थी. जब वे 17-18 साल की थीं, तब महल्ले के तकरीबन सारे लड़के उन के ऊपर फिदा थे. आतेजाते मुसकराते और उन को लव लैटर देते थे. उन को देख कर आहें भरते थे, लेकिन मिस सेजल किसी को भाव नहीं देती थीं.

मिस सेजल जब कालेज जाती थीं, तो कितने ही आवारा और मजनू किस्म के लड़के उन को देख कर मुस्कुरा कर मरमर जाते थे, लेकिन वे पलट कर देखती तक नहीं थीं.

इस वजह से मिस सेजल के बारे में धीरेधीरे महल्ले के लड़कों में यह बात फैल गई कि वे बहुत हद तक नकचढ़ी हैं और आसानी से किसी के हाथ नहीं आने वाली हैं.

जब मिस सेजल 24-25 साल की हुईं, तो उन के मांबाप को उन की शादी की चिंता हुई. मिस सेजल के पिताजी पड़ोसियोंरिश्तेदारों वगैरह के कहने पर इधरऊधर लड़का देखने जाते थे, लेकिन मिस सेजल को तो अपने सपनों का राजकुमार चाहिए था, जो लाखोंकरोड़ों में एक हो.

मिस सेजल अपने मांबाप की एकलौती औलाद थीं. मांबाप ने उन को बड़े नाजों से पाला था. उन की हर बात मांबाप मानते थे.

मिस सेजल के लिए जब लड़का देखने की शुरुआत हुई, तो लड़के वालों के लिए उन की बहुत सी शर्तें थीं. यह इतिहास में शायद पहली बार हो रहा था कि एक लड़की की शर्तों पर शादी होनी थी. और जो इन शर्तों को पूरा करता, वही मिस सेजल का पति बनता.

मिस सेजल ने शादी को कभी गंभीरता से नहीं लिया. आसपड़ोस, नातेरिश्तेदार सब लोग 30 की उम्र होने के बाद जोर देने लगे, लेकिन मिस सेजल के कान पर जूं नहीं रेंग रही थी. वे पहले कैरियर बनाना चाह रही थीं. इसी खब्त में उन के शादी के दिन निकलने लगे.

मिस सेजल को लगता था कि शादी ही तो है, कोई बहुत बड़ी चीज तो है नहीं. ताजमहल नहीं है, जिस को बनवाने में 20 साल लगे थे. पलक झपकते ही हो जाएगी. कामयाब होने के बाद तो लोग उन के आगेपीछे शादी करने के लिए घूमेंगे.

खैर, इसी उधेड़बुन में समय निकलता रहा. मिस सेजल का न तो कैरियर बन सका, न ही शादी ही हो सकी. लिहाजा, उन को भी लगा कि चलो कैरियर तो न बना सकी, अब शादी कर ही लेनी चाहिए.

लेकिन मिस सेजल ऐसीवैसी लड़की नहीं थीं. वे व्यवस्था से टकराने वाली और कुछकुछ क्रांतिकारी थीं. उन्होंने कानून की पढ़ाई की थी. लिहाजा, उन के खून में हमेशा गरमी रहती थी.

मिस सेजल की शादी के लिए बहुत सी शर्तें थीं, जैसे लड़का पानबीड़ी, सिगरेट, तंबाकू जैसी किसी नशीली चीज का सेवन न करता हो. शराबियों से तो मिस सेजल को सख्त नफरत थी.

इतना ही नहीं, लड़का अकेला होना चाहिए यानी उस के कोई भाईबहन नहीं होने चाहिए. लड़का गांव में नहीं रहता हो, बल्कि शहर में रहता हो. घर अच्छा होना चाहिए, फिल्मी दुनिया में लगाए गए सैटों की तरह. घर अच्छी जगह पर होना चाहिए. लड़का गोराचिट्टा होना चाहिए. लड़के की कमाई 20-25 लाख रुपए सालाना होनी चाहिए. मतलब, लड़का लाखों में एक नहीं, बल्कि करोड़ों में एक हो.

मिस सेजल की और भी कई छोटीबड़ी शर्तें थीं, जैसे शादी के बाद मिस सेजल को खाना बनाना, कपड़े धोना, बरतन मांजना, घर की साफसफाई करना न पड़े. उन को तो  कदमकदम पर नौकरचाकर दिखने वाला घर चाहिए था.

इस के अलावा शादी के तुरंत बाद मिस सेजल को मां नहीं बनना था. 5-7 साल के बाद ही वे मां बनना चाहेंगी. वे बच्चे को अपना दूध पिलाना पसंद नहीं करेंगी, बल्कि डब्बे का दूध पिलाएंगी… और भी बहुतकुछ.

जब अब मिस सेजल 35 की नहीं, बल्कि 40 साल की हो गई हैं और उन की डिमांड के मुताबिक लड़का नहीं मिल रहा है, तो उन के मांबाप ने स्वयंवर का आयोजन किया है. जो लोग मिस सेजल की शर्तों के साथ शादी करना चाहते हैं, वे तुरंत संपर्क करें.

इस स्वयंवर की घोषणा हुए भी 2 साल बीत गए हैं, लेकिन किसी ने स्वयंवर में आने का कष्ट नहीं उठाया. लिहाजा, औनलाइन आवेदन भेजने की तारीख को अगले 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया है.

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