Crime Story: देवर के चक्कर में पति की हत्या

Crime Story: हरियाणा के सोनीपत जिले के थाना गन्नौर क्षेत्र के गांव झरगढ़ी के रहने वाले शाहनवाज की शादी 9 साल पहले साल 2016 में उत्तर प्रदेश के शामली जिले के थाना कांधला क्षेत्र के गांव गढ़ी दौलत की रहने वाली महफरीन से हुई थी.


शादी के बाद शाहनवाज और महफरीन की जिंदगी मजे से चल रही थी. शाहनवाज दिनभर काम कर के जब शाम को घर वापस लौटता, को महफरीन उस पर अपना भरपूर प्यार लुटाती थी. दोनों की जिंदगी हंसीखुशी से गुजर रही थी. इस दौरान महफरीन ने 2 बच्चों को जन्म दिया. पहला लड़का तकरीबन
8 साल का है, जबकि दूसरा लड़का तकरीबन 4 साल का है. जैसा कि सभी परिवारों में होता है, रिश्तेदार आतेजाते रहते हैं. शाहनवाज के मामा का लड़का तसव्वुर का भी वहां आनाजाना था. जब कभी तसव्वुर और महफरीन मिलते तो देवरभाभी होने के नाते एकदूसरे से हंसीमजाक भी करलेते थे.

शाहनवाज इसे यह सोच कर नजरअंदाज कर देता था कि देवरभाभी में मजाक तो चलता ही रहता है.
पिछले तकरीबन 6 महीने से महफरीन और तसव्वुर में अचानक से नजदीकियां ज्यादा बढ़ गई थीं. दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर भी शेयर कर लिया था.
‘‘भाभी, आप मु? बहुत अच्छी लगती हो,’’ एक दिन तसव्वुर ने महफरीन से कहा.
इस पर महफरीन ने जवाब दिया, ‘‘रहने दो.’’ ‘‘रब करे आप को किसी की नजर लगे…’’ तसव्वुर ने कहा, ‘‘मैं आप को दिल से कह रहा हूं कि आप बहुत खूबसूरत हो.’’ हिम्मत कर के तसव्वुर ने अपने दिल की बात भी कह दी, ‘‘भाभी, मैं तुम से प्यार करता हूं और तुम्हारे बगैर रह नहीं सकता.’’


तसव्वुर के मुंह से यह बात सुन कर महफरीन को थोड़ी देर के लिए अजीब सा लगा, लेकिन जब दोनों में काफी देर तक बात हुई, तो महफरीन भी तसव्वुर को अपना दिल दे बैठी.
इस के बाद तो उन दोनों में घंटों बात होने लगी, फिर दोनों चोरीछिपे मिलने भी लगे. दोनों ने प्यार की तमाम हदों को पार कर दिया.


पर जब देखो तब और घंटों तसव्वुर से बात करने पर शाहनवाज को महफरीन पर शक हो गया. उस ने 1-2 बार महफरीन को समझाया भी, लेकिन वह नहीं मानी और लगातार तसव्वुर से संबंध जारी रखे.
3 अगस्त की रात को शाहनवाज ने महफरीन को मोबाइल पर किसी से बात करते रंगे हाथ पकड़ लिया, ‘‘किस से बात कर रही थी? क्या चल रहा है?’’ महफरीन बोली, ‘‘कुछ भी नहीं, मैं तो बस…’’शाहनवाज ने गुस्से में उस का फोन छीना और देखा कि कौल लौग में बारबार तसव्वुर का नाम था. वह भड़क उठा और महफरीन की पिटाई कर दी.


उस रात महफरीन की आंखों में सिर्फ आंसू नहीं थे, नफरत और बदले की आग भी थी. महफरीन ने उसी रात तसव्वुर को  फोन कर कहा, ‘‘अब बहुत हो गया, उसे रास्ते से हटाना होगा.’’रात में ही महफरीन और तसव्वुर ने एक ऐसी योजना बनाई, जिस का किसी को अंदाजा भी नहीं था. इस के बाद महफरीन ने शाहनवाज से ऐसा बरताव किया जैसे पिटाई के बाद वह शाहनवाज की बात मान गई हो.

उस ने शाहनवाज को इस का जरा भी अहसास नहीं होने दिया कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है.
7 अगस्त, 2025 को शामली जनपद के गांव खुरगान के बाशिंदे और शाहनवाज के ममेरे साले इमलाक की शादी थी. महफरीन और शाहनवाज ने मिल कर शादी में जाने का प्रोग्राम बनाया.


महफरीन बोली, ‘‘हम बाइक पर जाएंगे, ताकि जल्दी पहुंच सके, क्योंकि हरियाणा की बसों में बहुत भीड़ चल रही है. फिर गांव तक पहुंचने के लिए साधन भी नहीं मिलता है. बसअड्डे पर खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है. अपनी बाइक होगी तो आसानी से घर तक पहुंच जाएंगे.’’


‘‘हां, यह सही रहेगा गरमी भी बहुत ज्यादा है. अपना साधन होगा तो पहुंचने में आसानी रहेगी,’’ शाहनवाज ने जवाब दिया, फिर थोड़ा रुक कर बोला, ‘‘एक दिन पहले चलेंगे. काफी दिन हो गए, तुम्हारे परिवार वालों से भी नहीं मिला हूं मैं. वे भी कहते रहते हैं…’’‘‘रात को तुम्हारे मायके गांव गढ़ी दौलत चलेंगे अगले दिन वहीं से खुगरान चलेंगे,’’ शाहनवाज ने अपना प्लान बताया.


जैसा कि महफरीन और शाहनवाज ने शादी के लिए प्रोग्राम बनाया था, उसी के मुताबिक 6 अगस्त, 2025 को दोनों बाइक पर सवार हो कर गांव गढ़ी दौलत पहुंच गए.शाहनवाज को देख कर महफरीन के मायके वाले भी बहुत खुश हुए. सभी ने घर और परिवार का हालचाल पूछा. दामादजी घर पर आए थे, तो शाहनवाज की खातिरदारी भी अच्छी तरह से हुई.


7 अगस्त की सुबह शाहनवाज अपनी बीवी महफरीन को बाइक पर बैठा कर गांव खुरगान के लिए निकल पड़ा. गांव में पहुंचने से पहले कसबा कैराना में उस ने कुछ सामान भी खरीदा और फिर से चल पड़ा.
बाइक पर पीछे बैठी महफरीन फोन पर बारबार किसी से बात कर रही थी. बाइक की स्पीड तेज होने के चलते वह समझ नहीं पा रहा था. उसे केवल इतना ही समझ आया कि शायद शादी वाले घर से फोन रहे होंगे कि कितनी देर में पहुंचोगे.


लेकिन महफरीन किसी से कोडवर्ड में बात कर रही थी. उस ने बोला, ‘मंजिल आने वाली है…’ थोड़ा आगे चलने पर उस ने फिर से कोडवर्ड में बात की, ‘पुल पार करोऔर इस के बाद फोन पर फिर से कहाबस थोड़ा इंतजार करो.’ महफरीन के इन कोडवर्ड से खून और धोखे की गंध रही थी. सुबह के 10 बज रहे थे. शाहनवाज और महफरीन की बाइक नैशनल हाईवे पर दौड़ी जा रही थी.

जब वे पानीपतहरिद्वार नैशनल हाईवे पर बने एक फ्लाईओवर से थोड़ा आगे बेरी के बाग के निकट पहुंचे, तो पीछे से 2 बाइकों पर सवार 4 लड़कों ने ओवरटेक कर शाहनवाज की बाइक में टक्कर मार दी और शाहनवाज को डंडा मार कर बाइक रुकवा ली. उन्होंने चाकू से शाहनवाज पर ताबड़तोड़ कई वार किए. एक लड़के ने उस पर तमंचे से गोली चलाई. गंभीर रूप से घायल शाहनवाज सड़क पर नीचे गिर गया. वारदात को अंजाम देने के बाद वे सभी हमलावर फरार हो गए.


शाहनवाज की आंखों में दर्द और धोखे कीलक थीशायद आखिरी बार उस ने महफरीन को देखा, जो चुपचाप खड़ी थी. महफरीन ने डायल 112 को फोन किया और पुलिस को सूचना दी, ‘‘हम पर हमला हुआ है. बदमाशों ने मेरे पति को मार डाला.’’ पुलिस मौके पर पहुंची और सड़क पर घायल पड़े शाहनवाज को अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मरा हुआ घोषित कर दिया. जानकारी पा कर सोनीपत से शाहनवाज के परिवार वाले भी कैराना पहुंच गए. उन्होंने पुलिस को डेढ़ लाख रुपए की दूल्हे के लिए ले जाई जा रही नोटों की माला और बाइक लूटने की सूचना दी.


एसपी रामसेवक गौतम, एएसपी संतोष कुमार सिंह और सीओ कैराना श्याम सिंह मौके पर पहुंचे. इस दौरान पुलिस ने मौके से शाहनवाज की बाइक भी बरामद की. फोरैंसिक टीम ने पहुंच कर सुबूत जुटाए.
वहीं, अस्पताल में महफरीन जमीन पर गिर कर बारबार बेहोशी का नाटक करने लगी, रोती रही. महफरीन की तरफ से कैराना कोतवाली में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई.

2 डाक्टरों की टीम द्वारा शाहनवाज की लाश का पोस्टमार्टम कराया गया
तो उस के शरीर में गोली लगना भी पाया गया, चाकुओं से वार किए गए थे, सो अलग.कैराना पुलिस के मुताबिक, महफरीन के बयान लिए तो उस ने पुलिस को चाकुओं से हमला करना ही बताया. पुलिस को महफरीन की बातों में दम नहीं लगा. उस की आंखों में पति की मौत के आंसू जरूर थे, लेकिन पकड़े जाने का डर भी साफ दिख रहा था.


पुलिस ने महफरीन को दोबारा से बयान लेने के लिए बुलाया, तो उस ने बयान देने से मना कर दिया. इस पर पुलिस को शक हुआ तो पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए उठा लिया. इसी दौरान केस के खुलासे के लिए लगाई गई टीमों ने जब महफरीन की कौल डिटेल खंगाली तो सारे राज खुलते चले गए.
तसव्वुर से महफरीन की लगातार बातचीत और लोकेशन शेयरिंग से पूरा राज खुला. पुलिस की कड़ी पूछताछ में महफरीन टूट गई.


‘‘हांमैं ने करवाया मर्डरतसव्वुर से प्यार करती हूं. शाहनवाज ने मारा था  पिटाई सह नहीं पाई.’’
महफरीन ने आगे बताया कि शाहनवाज ने उसे तसव्वुर से मोबाइलपर बात करते हुए रंगे हाथ पकड़ा था. इस के बाद दोनों के बीच  झगड़ा हुआ. शाहनवाज ने उस की पिटाई भी की थी. इसी के बाद उस ने प्रेमी तसव्वुर के साथ मिल कर शाहनवाज की हत्या की योजना बनाई. उस का काम सिर्फ लोकेशन देना था.

हत्या की प्लानिंग के तहत उसे शाहनवाज को सही समय पर सही जगह तक ले जाना था.
कैराना और आसपास लगे 10 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों में 2 बाइकों पर सवार 4 हमलावर नजर आए.फुटेज से उन की बाइक का नंबर मिला. इस के कुछ ही घंटों में हत्या के आरोपी तसव्वुर और शोएब को पकड़ लिया गया. पुलिस की जांच में सामने आया है कि हत्या में इस्तेमाल तमंचा और चाकू गढ़ी दौलत गांव के एक नौजवान ने मुहैया कराए थे.   

लेखक     महेश कांत शिवा

Family Murder: दामाद की बेरहमी से हत्या, शव के किए तीन टुकड़े

Family Murder: मंजू पूरी रात अपने बेटे संजय के घर लौटने का इंतजार करती रही, लेकिन वह नहीं लौटा. सुबह होने पर मंजू ने संजय के दोस्तों से बेटे के बारे में पता किया तो दोस्तों ने बताया कि उस के 3-4 दोस्त उसे अपने साथ ले कर कहीं गए थे. मंजू ने उन दोस्तों के बारे में पता लगाना शुरू किया तो जो बात मालूम हुई, उसे सुन कर वह परेशान हो उठी.  उसे जानकारी मिली कि वहीदा का भाई सलीम संजय को शराब पिलाने की पार्टी में शामिल होने के लिए अपने साथ ले गया था. सलीम के साथ और भी युवक थे. वह संजय के ऊपर यह सोच कर झुंझला रही थी कि जब जाना ही था तो क्या उसे साथ जाने के लिए सलीम ही मिला था.

क्योंकि सलीम की बहन वहीदा को ले कर संजय की उस से दुश्मनी चल रही थी. अब मंजू का मन तरहतरह की आशंकाओं से घिरने लगा. उसे बेटे के गायब होने के पीछे किसी साजिश की बू आने लगी. सलीम अपने अब्बा फजरुद्दीन, मां मदीना और बहन वहीदा के साथ हरियाणा के जिला फरीदाबाद की नेहरु कालोनी में मंजू के पड़ोस में ही रहता था. मंजू का मन नहीं माना तो देर शाम वह सलीम के घर पहुंच गई. उस ने सलीम से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह संजय को अपने साथ ले कर तो जरूर गया था, मगर पार्टी खत्म होने के बाद घर जाने की बात कह कर संजय कहां चला गया, यह उसे नहीं मालूम.

जब संजय के बारे में कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली तो 19 अगस्त को मंजू थकहार कर बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना डबुआ कालोनी पहुंची. पुलिस ने जब उस से किसी पर शक होने के बारे में पूछा तो उस ने शक जाहिर किया कि उस के बेटे को गायब करने में पड़ोस में रहने वाले सलीम और उस के पिता फजरुद्दीन का हाथ हो सकता है. फजरुद्दीन उस की इसलिए हत्या करना चाहता था, क्योंकि संजय ने उस की मरजी के खिलाफ उस की बेटी वहीदा से लव मैरिज कर ली थी. मंजू की शिकायत पर उसी दिन डबुआ थाने में भादंवि की धारा 346 के तहत मुकदमा दर्ज कर संजय की तलाश शुरू कर दी. संजय 16 अगस्त, 2018 से गायब था. उसे गायब हुए 3 दिन गुजर चुके थे. पुलिस ने संजय के सभी दोस्तों से पूछताछ की लेकिन उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

थानाप्रभारी ने यह सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी. तब अपर पुलिस उपायुक्त (एनआईटी) निकिता अग्रवाल ने इस हत्याकांड के रहस्य से परदा उठाने के लिए एक टीम का गठन किया, जिस में एसआई ब्रह्मप्रकाश, ओमप्रकाश, एएसआई कप्तान सिंह, हैडकांस्टेबल ईश्वर सिंह, कांस्टेबल संदीप, रविंद्र, अनिल कुमार, बिजेंद्र, संजय आदि शामिल थे. इस टीम का नेतृत्व पुलिस इंसपेक्टर नवीन पाराशर कर रहे थे. उन्होंने मृतक संजय की मां मंजू तथा परिवारजनों से घटनाक्रम के बारे में पूछताछ की, तब उन्हें पता चला कि संजय ने अपने पड़ोस में रहने वाली दूसरे समुदाय की वहीदा से उस के परिजनों की मरजी के खिलाफ घर से भाग कर शादी कर ली थी.

इसी वजह से लड़की के भाई और अब्बा उस की जान के दुश्मन बने हुए थे. पुलिस आयुक्त अमिताभ ढिल्लो ने क्राइम ब्रांच (डीएलएफ) को भी थाना पुलिस के साथ जांच में लगा दिया. 3 टुकड़ों में मिली (Murder Story) लाश   मुकदमा दर्ज होने के तीसरे दिन 21 अगस्त को पता चला कि किसी युवक की लाश सैनिक कालोनी से थोड़ी दूर झाडि़यों में पड़ी है. यह जानकारी मिलने पर पुलिस टीम सैनिक कालोनी के पास उस जगह पर पहुंची, जहां लाश पड़ी होने की सूचना मिली थी. पुलिस को वहां एक युवक की सड़ीगली लाश मिली. लाश काफी विकृत अवस्था में थी. वह 3 टुकड़ों में थी.

लाश देख कर लग रहा था कि उस की हत्या कई दिन पहले हुई होगी. इस सड़ीगली लाश की शिनाख्त मंजू ने अपने गुमशुदा बेटे संजय के रूप में की. पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए रोहतक पीजीआई भेज दी और एफआईआर में आईपीसी की धारा 302 जोड़ दी गई. लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने आरोपी फजरुद्दीन और उस के बेटे की तलाश शुरू कर दी. उसी दिन पुलिस को सलीम के बारे में एक गुप्त सूचना मिली, जिस के आधार पर पुलिस ने सलीम को गिरफ्तार कर लिया. उसे उसी दिन कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया गया.

सलीम से की गई पूछताछ के बाद पुलिस ने अगले दिन उस के पिता फजरुद्दीन उर्फ फजरू तथा सुमित उर्फ सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया. सभी आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने संजय की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. संजय की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली.  मंजू अपने 2 बेटों संजय और अजय के साथ फरीदाबाद की नेहरू कालोनी में किराए के मकान में रहती थी. उस के पति रूप सिंह की कई साल पहले मौत हो चुकी थी. उस के पड़ोस में फजरुद्दीन अपने परिवार के साथ रहता था. दोनों परिवार अलगअलग समुदाय के थे लेकिन उन के बीच काफी अपनापन था. त्यौहारों के मौकों पर वे एकदूसरे की खुशी में जरूर शरीर होते थे.

पारिवारिक संबंध होने की वजह से दोनों ही परिवारों का एकदूसरे के यहां खूब आनाजाना था. फजरू की बेटी वहीदा बला की हसीन होने के साथसाथ बालिग हो चुकी थी. उधर मंजू का बेटा संजय भी 23 साल का हो चुका था. दोनों ही एकदूसरे को जीजान से प्यार करने लगे थे. दोनों का प्यार गुपचुप तरीके से काफी दिनों से चल रहा था. फजरुद्दीन और उस की बेगम मदीना को बेटी के प्रेम प्रसंग की जानकारी नहीं थी. वे समझते थे कि दोनों बच्चे यूं ही आपस में कभीकभार मिलने पर हंसीठिठोली कर लेते हैं. उन्होंने कभी भी इन संबंधों के बारे में ध्यान नहीं दिया था.

गहराता गया प्यार सब कुछ ठीक ही चल रहा था. इधर वहीदा और संजय का प्यार और गहराता जा रहा था. उन्होंने आपस में शादी करने का फैसला कर लिया था लेकिन उन की शादी के बीच धर्म और समाज की अदृश्य दीवार सामने आ रही थी, जिसे किसी भी हालत में गिराना असंभव ही नहीं बल्कि एकदम से नामुमकिन था. इसलिए संजय का वहीदा ने आपस में सोचविचार कर अपने घरों से भाग कर कहीं बाहर   शादी करने की योजना तैयार कर ली. फिर योजना के अनुसार, वे पहली सितंबर, 2017 को किसी काम के बहाने अपनेअपने घरों से बाहर निकले. कालोनी से काफी दूर जा कर वहीदा संजय से लिपटते हुए बोली, ‘‘संजय, मुझे अपने साथ एक ऐसी दुनिया में ले चलो जहां हमारे प्यार के बीच कोई दीवार न बन सके.’’

संजय ने उसे विश्वास दिलाते हुए कहा, ‘‘वहीदा, तुम चिंता मत करो. अब दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती.’’

वहीदा को अपने प्यार पर खुद से बढ़ कर भरोसा था, इसलिए उस ने खुद को अपने प्रेमी संजय के भरोसे छोड़ दिया. संजय उसे ले कर राजस्थान स्थित अपने पैतृक गांव पहुंचा. वहां कुछ दिन रुकने के बाद उस ने वहीदा से कोर्टमैरिज कर ली. शादी के अगले दिन वहीदा घर की अन्य औरतों के परिधान के अनुसार अपनी गोरी कलाई में चूड़ा, मांग में सिंदूर, हाथ में मेहंदी लगा कर संजय के सामने पहुंची तो इस रूप में देख कर उस की आंखें फटी की फटी रह गईं. वह दुलहन के शृंगार में और भी ज्यादा खूबसूरत दिख रही थी. संजय वहीदा को अपनी पत्नी बना कर अपने आप को दुनिया का सब से भाग्यशाली समझने लगा. दोनों वहीं रहने लगे. चूंकि उस ने घर से भाग कर शादी की थी, इसलिए घर से कम ही निकलती थी.

संजय पर हुआ शक उस का डर बेवजह नहीं था. उधर वहीदा के घर नहीं लौटने पर मदीना और उस के शौहर फजरुद्दीन को जैसे सांप सूंघ गया. उन्हें यह भी पता लग गया कि संजय भी घर से गायब है. अब उन के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि जरूर संजय की वहीदा को भगा कर ले गया होगा. किसी तरह उन लोगों ने संजय के राजस्थान स्थित पैतृक गांव की भी जानकारी हासिल कर ली. फिर फजरू ने अपने जानकार लोगों को राजस्थान भेजा लेकिन काफी कोशिश के बाद भी वे वहीदा का पता नहीं लगा सके. आखिर निराश हो कर वे घर लौट आए. वहीदा अपनी अम्मी मदीना को बहुत प्यार करती थी. कुछ महीने गुजरने के बाद वहीदा को जब अम्मी की याद आई तो उस ने अम्मी के फोन पर संपर्क कर बताया कि वह इस संजय के साथ है और यहां बेहद खुश है. इसलिए वह उस की जरा भी चिंता न करें.

मंजू को भी बेटे ने फोन कर पूरी घटना के बारे में जानकारी दे दी थी. मंजू वहीदा को बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था. जब संजय ने बताया कि करवाचौथ पर उस ने उस के लिए व्रत रखा और चांद निकलने पर पानी का घूंट हलक के नीचे उतारा तो बेटे के प्रति बहू के मन में प्रेम देख कर मंजू की खुशी के मारे आंखें भर आईं. उस ने फोन पर वहीदा से काफी देर तक बातें कीं और उसे सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद दिया. इस के बाद मंजू की अपने बेटेबहू से अकसर बातचीत होती रहती थी. संजय इसलाम धर्म स्वीकारने को था तैयार कुछ दिनों के बाद वहीदा के पांव भारी हो गए तो संजय के लिए उस की देखभाल करना कठिन हो गया. एक दिन वह वहीदा को ले कर फरीदाबाद लौट गया ताकि घर पर मां उस की ठीक से देखभाल करती रहे.

संजय और वहीदा के घर में आने की बात सुन कर वहीदा के अम्मीअब्बू संजय के घर आ कर अपनी बेटी और संजय से मिले. संजय उन का अपराधी था, इसलिए वह उन की हर शर्त माने के लिए तत्पर था. फजरू और उस की बेगम मदीना ने आपस में बातें करने के बाद संजय से कहा कि अगर उसे वहीदा के संग जीवन गुजारना है तो वह इसलाम धर्म अपना ले. संजय के ऊपर वहीदा की मोहब्बत का नशा इस कदर चढ़ा था कि वह उस के लिए धर्म परिवर्तन के लिए तैयार हो गया. लेकिन इस में पेंच तक फंस गया जब संजय के मामा और चाचा ने इस का जम कर विरोध किया. उन के विरोध के कारण संजय का धर्म परिवर्तन नहीं हो सका. इसी घटनाक्रम के बीच मदीना ने जबरन वहीदा का गर्भपात करवा दिया. इन बातों से दुखी और परेशान हो कर संजय का परिवार दूसरी जगह शिफ्ट हो गया.

दूसरी जगह जाने के बाद भी दोनों परिवारों के बीच उपजा तनाव कम नहीं हुआ. कुछ दिनों के बाद वहीदा को फिर गर्भ ठहर गया. इस का पता चलते ही फजरू ने वहीदा और संजय को अलग होने का फैसला सुना दिया. संजय की हत्या होने से 2 महीने पहले एक दिन फजरू और उस के दोनों बेटे संजय और वहीदा को ले कर उन के बीच तलाक कराने कोर्ट गए लेकिन संजय ने वहीदा को तलाक देने से इनकार कर दिया. अलबत्ता अपने अम्मीअब्बा के द्वारा संजय की हत्या कर दिए जाने की धमकी से डर कर वहीदा संजय के घर से अपने घर लौट गई. वहीदा के चले जाने के बाद संजय की दुनिया एकदम वीरान हो गई. बुरी तरह हताश और निराश हो कर संजय फरीदाबाद को छोड़ कर राजस्थान चला गया, जबकि उस की मां, भाई और बहन ने नेहरू कालोनी में रहना जारी रखा.

15 अगस्त, 2018 को वहीदा के भाई सलीम ने राजस्थान में रह रहे संजय को फोन कर के बताया कि मामला अब शांत हो गया है, इसलिए बात को खत्म करने के लिए फरीदाबाद लौट आओ. आखिर साजिश में फंस गया संजय अगले दिन संजय यह सोच कर फरीदाबाद आ गया कि जल्दी से यह मामला निपट जाए तो वहीदा और वह दोनों शांति के साथ अपना जीवन गुजार सकेंगे. उसे क्या मालूम था कि सलीम और उस का बाप उस की हत्या के लिए उसे मामला खत्म करने का सुनहरा ख्वाब दिखा रहे थे. संजय उन की चाल में बुरी तरह फंस गया. उसी दिन सलीम संजय को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर शराब पार्टी में शामिल होने की बात कह कर अपने साथ ले गया. सलीम संजय को 3 नंबर पहाड़ी की सुनसान जगह पर ले गया, जहां पर उस का पिता फजरू, दोस्त सुमित और मोहम्मद अली उन के आने का इंतजार कर रहे थे.

सुमित उर्फ सोनी और मोहम्मद अली सलीम के दोस्त थे. चारों ने पहले तो मीठीमीठी बातों में फंसा कर उसे इतनी अधिक शराब पिला दी कि वह अपनी सुधबुध खो बैठा. इस के बाद सभी ने संजय की इतनी पिटाई की कि वह अधमरा हो गया. पिटतेपिटते संजय जब बेहोश हो गया तो सलीम ने चाकू से गोद कर उसे मौत (Murder Story) के घाट उतार दिया. झाडि़यों में डाल दिए. फिर सभी वहां से फरार हो गए.

पुलिस ने सलीम, फजरुद्दीन उर्फ फजरू और सुमित उर्फ सोनी से पूछताछ करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. इस के 2 दिन बाद ही पुलिस ने चौथे आरोपी मोहम्मद अली को भी गिरफ्तार कर उस से पूछताछ की. उस ने भी अपना अपराध कबूल कर लिया. पुलिस ने उसे भी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया. कथा लिखने तक चारों आरोपी जेल में बंद थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में वहीदा परिवर्तित नाम है. Family Murder

बेटा करना चाहता था तीसरी शादी, कर डाला मांबाप का कत्ल

कोई प्रेमिका के प्रेम में अंधा हो कर मांबाप का ही कत्ल कर दे, सुन कर थोड़ा अजीब लगता है. लेकिन यह भी हकीकत है कि प्यार के नशे में डूब कर आदमी अंधा हो जाता है. अब्दुल रहमान का भी यही हाल था. लेकिन…  

28अप्रैल, 2018 को दिल्ली के कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि जाकिर नगर की गली नंबर 7 में रहने वाले शमीम अहमद का दरवाजा अंदर से बंद है. काफी आवाजें देने के बावजूद भी उन के कमरे से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही. चूंकि यह मामला दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना जामिया नगर के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से वायरलेस द्वारा यह सूचना थाना जामिया नगर को दे दी गई. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी संजीव कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. वहां पर शमीम अहमद के बेटे अब्दुल रहमान के अलावा आसपास के लोग भी जमा थे.

अब्दुल रहमान ने पुलिस को बताया कि कल रात खाना खाने के बाद उस के अम्मीअब्बू अपने कमरे में सोने के लिए चले गए थे, जबकि वह दूसरे कमरे में सो गया था. रोजाना उस के अम्मीअब्बू ही सुबह पहले उठते थे. वही उसे जगाते भी थे, लेकिन आज वह अभी तक नहीं उठे. मैं ने काफी देर दरवाजा खटखटाया इस के बावजूद भी अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही. वहां मौजूद पड़ोसियों ने भी अब्दुल रहमान की हां में हां मिलाई. अब्दुल रहमान की बात सुनने के बाद थानाप्रभारी संजीव कुमार ने भी दरवाजा खटखटाया लेकिन वास्तव में अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उन्हें भी शक होने लगा. तब उन्होंने लोगों की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ दिया. दरवाजा तोड़ने के बाद जैसे ही पुलिस अंदर घुसी तो पहले कमरे में ही फर्श पर शमीम अहमद और उन की पत्नी तसलीम बानो की लाशें पड़ी थीं.

रहस्यमय मौतें अम्मी और अब्बू की लाशें देख कर रहमान दहाडें मार कर रोने लगा. पड़ोसी भी हतप्रभ थे कि दोनों की मौत कैसे हो गई. उन के शरीर पर किसी चोट आदि का निशान भी नहीं था. दोनों की मौत कैसे हुई उस समय इस का पता लगाना संभव नहीं था. थानाप्रभारी संजीव कुमार ने इस मामले की जानकारी डीसीपी चिन्यम बिश्वाल को दे दी. साथ ही क्राइम इन्वैस्टीगेशन टीम को भी मौके पर बुलवा लिया. थानाप्रभारी ने मौकामुआयना किया तो पता चला कि उस दरवाजे पर औटोमैटिक लौक लगा हुआ था, जो अंदर और बाहर दोनों तरफ से बंद हो जाता था. उन के कमरे में सवा 5 लाख रुपए की नकदी के अलावा ज्वैलरी भी मिली. इस से वहां पर लूट की संभवना नजर नहीं आई. कमरे में 2 लोग सो रहे थे, दोनों की ही संदिग्ध मौत हो गई थी

ऐसा भी नहीं था कि उन की मौत कमरे में मौजूद किसी जहरीली गैस की वजह से हुई हो क्योंकि जब कमरे का दरवाजा तोड़ा गया था तो उस समय कमरे में किसी जहरीली गैस आदि की स्मैल भी नहीं रही थी. यानी उस समय कमरे में पर्याप्त मात्रा में औक्सीजन थी. लग रहा था कि उन दोनों के खाने में कोई जहरीली पदार्थ मिला दिया गया होगा. बहरहाल इन दोनों की मौत कैसे हुई यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता लग सकता था. लिहाजा थानाप्रभारी ने जरूरी काररवाई कर के दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. डीसीपी चिन्मय बिश्बाल ने भी घटनास्थल का दौरा किया. अब्दुल रहमान शमीम अहमद का इकलौता बेटा था. वही उन के साथ रहता था, इसलिए पुलिस ने अब्दुल रहमान से कहा कि जब तक इस केस की जांच पूरी न हो जाए वह दिल्ली छोड़ कर कहीं न जाए.

2-3 दिन बाद पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि उन की मौत दम घुटने की वजह से हुई थी. यानी किसी ने उन का दम घोट कर हत्या की थी. पुलिस इस बात का पता लगाने में जुट गई कि उन का कातिल कौन हैउधर मृतकों का बेटा अब्दुल रहमान थाने और डीसीपी औफिस के चक्कर काट कर अपने मातापिता के हत्यारे का पता लगा कर उसे गिरफ्तार करने की मांग कर रहा था. जबकि पुलिस अलगअलग तरीके से जांच कर केस को खोलने की कोशिश में लगी थी. इस दौरान थानाप्रभारी संजीव कुमार ने अब्दुल रहमान से भी 2 बार पूछताछ की थी. लेकिन उस से कोई क्लू नहीं मिल सका था. उन के यहां जिनजिन रिश्तेदारों या परिचितों का आनाजाना था, पुलिस ने उन्हें भी थाने बुला कर पूछताछ की

इतना ही नहीं पुलिस ने उन पेशेवर हत्यारों को भी उठा लिया जो उस समय जेल से बाहर थे. लेकिन उन से भी कोई जानकारी नहीं मिली. इधर मामले को ले कर पुलिस भी परेशान थी. घटना के 3 सप्ताह बाद पुलिस ने अब्दुल रहमान को एक बार फिर थाने बुलाया. थाना प्रभारी और इंसपेक्टर भारत कुमार की टीम ने उस से फिर पूछताछ की. सख्ती से की गई पूछताछ में अब्दुल रहमान ने अपना मुंह खोलते हुए कहा कि अपने मांबाप का हत्यारा मैं ही हूं. मैं ने ही अपने दोस्तों के साथ उन की हत्या की थी. उस की बात सुन कर एक बार तो पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई कि वह अपने मांबाप का एकलौता बेटा था तो ऐसी क्या बात हो गई कि घर के इसी चिराग ने अपने मांबाप का ही खून कर दिया. पुलिस ने अब्दुल रहमान से मांबाप की हत्या करने की वजह जानने के लिए पूछताछ की तो उस ने उन की हत्या की जो कहानी बताई वह हैरान करने वाली थी.

फेसबुक की दोस्त बनी महबूबा अब्दुल रहमान अपने मांबाप की इकलौती संतान था. पिता शमीम अहमद और मां तसलीम बानो ने उसे हमेशा अपनी पलकों पर बिठा कर रखा था. वह उस की हर फरमाइश पूरी करते थे. मांबाप का लाडला अब्दुल रहमान पढ़ाई में भी होशियार था. उस का माइंड क्रिएटिव था इसलिए उस ने एनिमेशन में डिप्लोमा किया. मांबाप चाहते थे कि उन के बेटे की कहीं अच्छी जगह नौकरी लग जाए. शमीम अहमद ने करीब डेढ़ साल पहले उस की शादी कर दी थी, लेकिन किसी वजह से उस की पत्नी से नहीं बनी. दोनों के विचारों में विरोधाभास था, इसलिए उस ने पत्नी को तलाक दे दिया.

इस के बाद फेसबुक के माध्यम से अब्दुल रहमान की दोस्ती कानपुर की रहने वाली एक लड़की से हो गई. यह दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे. यहां तक कि दोनों शादी के लिए भी तैयार हो गए. लड़की ने कह दिया कि वह उस के लिए अपने घर वालों तक को छोड़ने के लिए तैयार है. अब बात अब्दुल रहमान को फाइनल करनी थी. वह तो तैयार था लेकिन उसे उम्मीद थी कि शायद उस के घर वाले कानपुर वाली उस की दोस्त से शादी करने के लिए तैयार नहीं होंगे. फिर भी अब्दुल रहमान ने अपने मातापिता से कानपुर वाली अपनी दोस्त के बारे में बताया और कहा कि वह उस से शादी करना चाहता है. शमीम अहमद ने साफ कह दिया कि वह अपनी बिरादरी की लड़की के साथ ही उस की शादी करना पसंद करेंगे. इसलिए कानपुर वाली उस लड़की को वह भूल जाए. उस के साथ उस की शादी नहीं हो सकती.

मांबाप पर भारी पड़ी प्रेमिका पिता ने जितनी आसानी से भुला देने वाली बात कही थी, वह अब्दुल रहमान के लिए उतनी आसान नहीं थी. बहरहाल घर वालों की बातों को दरकिनार करते हुए वह अपनी उस फेसबुक फ्रेंड के संपर्क में बना रहा. इतना ही नहीं वह उस से मिलने भी जाता थाइसी दौरान घर वालों ने अब्दुल रहमान की दूसरी शादी कर दी. घर वालों के दबाव में उस ने शादी कर जरूर ली थी लेकिन उस के दिल में तो उस की कानपुर वाली प्रेमिका बसी हुई थी. दूसरी शादी हो जाने के बाद भी वह अपनी प्रेमिका को नहीं भूला था. वह एक काल सेंटर में नौकरी करता था, इसलिए प्रेमिका को महंगे गिफ्ट आदि देने और उस से मिलने के लिए कानपुर जाता रहता था. वह अब्दुल रहमान पर शादी के लिए दबाव डाल रही थी. वह भी सोचता था कि यदि प्रेमिका ही उस की पत्नी बन जाए तो उस का जीवन हंसीखुशी से बीतेगा. लेकिन इस काम में सब से बड़ी रुकावट उस के मांबाप ही थे

अब्दुल रहमान ने एक बार फिर से अपने मांबाप को मनाने की कोशिश की कि वह उस की कानपुर वाली दोस्त के साथ उस की शादी कर दें. लेकिन शमीम अहमद ने बेटे को न सिर्फ जम कर फटकार लगाई बल्कि हिदायत भी दी कि वह उस लड़की को भूल कर अपनी घरगृहस्थी में ध्यान लगाए. अब्दुल रहमान की कोशिश नाकाम हो चुकी थी पर वह हारना नहीं चाहता था. आखिर उस ने भी एक सख्त फैसला ले लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए वह अपनी प्रेमिका को दुलहन बना कर घर लाएगा. इस के लिए उस ने अपने मांबाप को रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. यानी प्रेमिका की खातिर उस ने मांबाप तक की हत्या करने की ठान ली.

इतना बड़ा काम वह खुद नहीं कर सकता था. इस बारे में उस ने दिल्ली के नांगलोई इलाके के रहने वाले अपने दोस्त नदीम खान (32) और गुड्डू से बात की. दोनों ढाई लाख रुपए में यह काम करने के लिए तैयार हो गए. तीनों ने शमीम अहमद और तसलीम बानो की हत्या करने की पूरी योजना बना ली. योजना के अनुसार 27-28 अप्रैल की रात नदीम खान और गुड्डू जाकिर नगर इलाके में गए. अब्दुल रहमान के मातापिता जब खाना खा कर अपने कमरे में सोने के लिए चले गए तो रात 11 बजे के करीब अब्दुल रहमान ने फोन कर के अपने दोनों दोस्तों को घर बुला लिया. उन के घर आने के बाद अब्दुल रहमान उन्हें अपने मातापिता के कमरे में ले गया. उन के दरवाजे पर आटोमैटिक लौक लगा था जो दोनों तरफ से बंद हो जाता था.

इन लोगों ने मुंह पर तकिया रख कर एकएक कर दोनों का दम घोंट दिया और उन की लाशें बेड से उतार कर फर्श पर डाल दीं. इस के बाद अब्दुल रहमान ने दरवाजे को बंद कर दिया. अपना काम कर के नदीम खान और गुड्डू रात में ही वहां से चले गए. अब्दुल रहमान अपने कमरे में गया. इस के बाद उसे रात भर नींद नहीं आई. सुबह होने पर उस ने मोहल्ले के लोगों को यह कह कर इकटठा कर लिया कि पता नहीं क्यों आज अम्मी और अब्बू दरवाजा नहीं खोल रहे. अब्दुल रहमान से पूछताछ के बाद पुलिस ने नदीम खान को भी गिरफ्तार कर लिया जबकि गुड्डू फरार हो गया था. दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.

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