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Missing Child Case: बहुरुपिया किन्नर निकला बच्चा चोर

Missing Child Case. रुखसाना पिछले एक हफ्ते से आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ देखने की जिद पति सोनू से कर रही थी, लेकिन सोनू अपने काम में व्यस्त था इसलिए वह पत्नी को फिल्म दिखाने के लिए टाइम नहीं निकाल पा रहा था. पत्नी के काफी कहने के बाद उस ने 2 जनवरी, 2017 को उसे फिल्म दिखाने का वादा कर दिया. इतना ही नहीं, उस ने 2 जनवरी को शाम के शो की 2 टिकटें भी बुक करा दीं. टिकट बुक हो जाने पर रुखसाना बहुत खुश हुई. 2 जनवरी, 2017 को रुखसाना और उस के पति सोनू को शाम के शो में पिक्चर देखने जाना था, इसलिए रुखसाना अपराह्न 3 बजे ही तैयार हो गई. वह पति से भी तैयार होने के लिए बारबार कह रही थी पर वह वाट्सऐप पर किसी से चैटिंग करने में लगा हुआ था. रुखसाना के कहने पर फोन टेबल पर रख कर वह नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया. इस के बाद रुखसाना अपनी ढाई साल की बेटी सोनी को भी तैयार करने लगी.

उसी समय उस के दरवाजे पर हलकी सी दस्तक के साथ किसी की आवाज आई, ‘‘भाभी, घर में हो क्या?’’

‘‘कौन?’’ रुखसाना ने पूछा. ‘‘मैं हूं इच्छा.’’ एक दुबलेपतले से युवक ने अंदर प्रवेश करते हुए कहा.

‘‘इच्छा, तुम कहां थे, 2 दिन से दिखे नहीं.’’ रुखसाना ने अपना दुपट्टा सीने पर ठीक करते हुए पूछा.

‘‘एक बड़ा प्रोग्राम था भाभी, अपनी मंडली के साथ मैं उसी में गया था. इधर आने का वक्त ही नहीं मिला.’’ कह कर इच्छा उर्फ राकेश रुखसाना की बेटी सोनी के पास बैठ कर उसे प्यार करने लगा.

‘‘पानी लोगे तुम?’’ रुखसाना ने पूछा. ‘‘नहीं भाभी, पानी नहीं, बस एक कप चाय पिला दो.’’ वह बोला.

‘‘चाय का समय भी है और तुम्हारे भाई को नहाने के बाद चाय पीने की आदत है. तब तक तुम सोनी से खेलो, मैं चाय बना कर लाती हूं.’’ कह कर रुखसाना किचन में चली गई.

‘‘क्या भाई घर पर ही हैं?’’ इच्छा ने चौंक कर पूछा तो रुखसाना ने मुसकरा कर कहा, ‘‘हां, बाथरूम में नहा रहे हैं. आज हम लोग पिक्चर देखने जा रहे हैं.’’

रुखसाना ने अभी चाय का पानी गैस पर चढ़ाया ही था कि इच्छा की आवाज उस के कान में पड़ी, ‘‘भाभी, मैं सोनी बेटी को चौकलेट दिलवाने के लिए दुकान पर ले जा रहा हूं.’’

‘‘अच्छा.’’ रुखसाना ने अंदर से ही कहा और चाय बनाने में व्यस्त हो गई.

चाय बनी तब तक सोनू भी नहा कर कमरे में आ गया. उसे सोनी नजर नहीं आई तो उस ने रुखसाना से पूछा, ‘‘सोनी कहां है?’’

‘‘इच्छा आया है, वही उसे चौकलेट दिलाने दुकान पर ले गया है. चाय भी उसी ने बनवाई है.’’ चाय की ट्रे टेबल पर रखते हुए रुखसाना बोली.

तैयार होने के बाद सोनू ने चाय पी ली लेकिन इच्छा सोनी को ले कर नहीं लौटा था. तब सोनू ने पत्नी से झल्ला कर पूछा, ‘‘चाय ठंडी हो रही है, कहां चला गया यह इच्छा?’’

‘‘चौकलेट लेने को कह कर गया है. अब तक तो उसे आ जाना चाहिए था.’’ रुखसाना के स्वर में परेशानी उभर आई, ‘‘दुकान भी ज्यादा दूर नहीं है.’’

‘‘तुम देख आओ रुखसाना, हमें फिल्म के लिए देर हो जाएगी.’’ सोनू ने कहा तो रुखसाना घर से निकल कर मोहल्ले की परचून वाली दुकान पर पहुंच गई. वह जब भी आता था, उसी दुकान से सोनी को चौकलेट दिलाता था.

उस दुकान पर इच्छा और उस की बेटी नहीं दिखी तो उस ने दुकानदार से पूछा. दुकानदार रुखसाना की बेटी सोनी को जानता था. वह दुकान पर आई नहीं थी, इसलिए उस ने मना कर दिया.

‘आखिर वह सोनी को ले कर किस दुकान पर गया है’, बुदबुदाते हुए वह दूसरी दुकान पर गई.

इस तरह एकएक कर के उस ने मोहल्ले की सारी दुकानें देख डालीं, पर इच्छा कहीं भी नजर नहीं आया. बाद में थकहार कर वह उदास चेहरा ले कर घर लौट आई. उस ने पति को बताया, ‘‘इच्छा मोहल्ले की किसी दुकान पर नहीं है. पता नहीं वह बेटी को ले कर कहां गया है.’’

इतना सुनते ही सोनू झल्ला उठा, ‘‘यह आज हमारा प्रोग्राम चौपट करवा देगा. तुम्हें उस के साथ बेटी को भेजना ही नहीं चाहिए था.’’

‘‘वह जब भी आता था तो सोनी को चौकलेट दिलाने दुकान पर ले जाता था. मैं ने सोचा 5-10 मिनट में आ ही जाएगा, इसलिए उसे जाने दिया.’’ वह बोली, ‘‘आप देख आइए, कहीं किसी परिचित से खड़ा बतिया तो नहीं रहा.’’

‘‘देख कर आता हूं.’’ कह कर सोनू इच्छा की तलाश में निकल गया. सोनू ने भी मोहल्ले की सभी दुकानें देख डालीं. इस के अलावा उस ने लोगों से इच्छा और अपनी बेटी सोनी के बारे में मालूम किया पर उन का कहीं पता नहीं लगा. बेटी को ले कर उस की घबराहट बढ़ने लगी. घर से निकले हुए आधा घंटा बीत चुका था. उसे अब अहसास होने लगा था कि इच्छा कुछ गड़बड़ कर गया है. परेशान हालत में वह घर लौटा तो रुखसाना भी घबरा कर रोने लगी. उस के रोने की आवाज सुन कर आसपास की औरतें भी उस के यहां आ गईं.

सोनू की आंखें भी बारबार नम हो रही थीं. इच्छा को मोहल्ले के सभी लोग जानते थे क्योंकि वह था तो लड़का पर हावभाव और स्वभाव लड़कियों की तरह था. और तो और वह जनाने कपड़े पहन कर किन्नरों के साथ रहता था. वह सोनी को क्यों ले गया, इस बात को कोई भी नहीं समझ पा रहा था. मोहल्ले के लड़के भी इच्छा को ढूंढने के लिए इधरउधर निकल पड़े. 2 घंटे बीतने के बाद भी जब वह नहीं मिला तो यह विश्वास हो गया कि इच्छा ने किसी योजना के तहत ही सोनी को गायब किया है. वह योजना फिरौती या फिर गलत नीयत में से कोई एक हो सकती थी.

सोनू की हैसियत फिरौती की रकम देने की नहीं थी, इसलिए सभी को यह शंका थी कि इच्छा ढाई साल की मासूम के साथ कुछ गलत हरकत न कर बैठे. जमाना है भी बहुत खराब. हवस की आग में जल रहे दुराचारियों के लिए क्या बुजुर्ग और क्या मासूम. हवस का कीड़ा उन्हें अंधा जो बना देता है.

रुखसाना और सोनू की समझ में नहीं आ रहा था कि वे क्या करें, क्या न करें. आखिर तय हुआ कि उन्हें पुलिस थाने में जा कर इस घटना की जानकारी दे देनी चाहिए. अभी यह विचार बना ही था कि किसी परिचित ने 100 नंबर पर फोन कर के इस घटना की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. सोनू अपनी पत्नी रुखसाना और ढाई साल की बेटी सोनी के साथ दिल्ली के मध्य जिला के पहाड़गंज क्षेत्र के  पानदरीबा में किराए पर रहता था. करीब 4 साल पहले वह यहां आया था. गुजरबसर के लिए उस ने यहीं पर पटरी लगानी शुरू कर दी थी. रुखसाना भी घर का काम निपटा कर उस के काम में हाथ बंटाती थी. इसी किराए के मकान में रुखसाना ने सोनी को जन्म दिया था. 20 साल का इच्छा उर्फ राकेश उर्फ फलक मूलरूप से राजस्थान के जोधपुर जिले का रहने वाला था. दिल्ली में वह कई सालों से रह रहा था. यहां वह किन्नरों के साथ लड़की की वेशभूषा में घूमता रहता था. किन्नर जहां भी नेग लेने जाते, वह उन के साथ जाता.

पहाड़गंज की पानदरीबा बस्ती में रहने वाले किन्नरों के पास भी उस का आनाजाना था. यहीं उस की पहचान सोनू और रुखसाना से हुई थी. बाद में वह उन का घनिष्ठ बन गया था. इच्छा जब भी रुखसाना के घर जाता तो उस की बेटी सोनी को चौकलेट दिलवाने के लिए पास की दुकान पर ले जाता था. यही कारण था कि आज जब शाम को इच्छा आया तो रुखसाना ने उसे सोनी को ले जाने से इनकार नहीं किया. रुखसाना को क्या मालूम था कि इच्छा आज उन के विश्वास को तारतार कर देगा.

रुखसाना का रोरो कर बुरा हाल था. जब उन की गली के सामने पुलिस वैन आ कर रुकी, रुखसाना विलाप ही कर रही थी. संग तराशान चौकीइंचार्ज एसआई देवेंद्र प्रणव 2 कांस्टेबलों के साथ रुखसाना के कमरे पर पहुंचे. सोनू भी वहीं मौजूद था. सोनू और उस की पत्नी ने एसआई देवेंद्र प्रणव को बेटी के गायब होने की बात विस्तार से बता दी.

‘‘इच्छा कहां रहता है?’’ एसआई ने पूछा. ‘‘सर, मैं ने उस का घर नहीं देखा.’’ सोनू बोला.

‘‘रुखसाना, क्या तुम ने इच्छा का घर देखा है?’’ एसआई प्रणव ने रोती हुई रुखसाना से पूछा.

‘‘नहीं जी, वह कहां रहता है, मैं नहीं जानती.’’ रुखसाना रोते हुए बोली. ‘‘तुम लोग कब से जानते हो उसे?’’ उन्होंने पूछा.

‘‘यही कोई 3-4 साल से साहब. वह इसी मोहल्ले में रहता होगा. क्योंकि 2-3 दिन में उस की हम से मुलाकात होती रहती थी.’’ सोनू ने बताया.

इस के बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा, ‘‘क्या तुम में से किसी ने इच्छा का घर देखा है?’’

इस प्रश्न पर सभी एकदूसरे का मुंह देखने लगे. इस से जाहिर हो रहा था कि उन में से कोई भी इच्छा के घर के बारे में नहीं जानता था. पुलिस के लिए यह एक हैरान कर देने वाली बात थी. इच्छा अगर इसी बस्ती में रहता है तो कोई उस के घर का पता क्यों नहीं जानता. एसआई प्रणव ने साथ आए एक कांस्टेबल को इच्छा के घर का पता लगाने के लिए भेज दिया और सोनू से इच्छा के हुलिए तथा अन्य जानकारी जुटाने में लग गए.

सोनू ने उन्हें इच्छा का हुलिया बताने के बाद यह जानकारी दी कि वह ज्यादातर किन्नरों के साथ रहता है. उन के साथ ही घूमता है. एसआई देवेंद्र प्रणव सोनू और रुखसाना को ले कर थाने लौट आए. देवेंद्र प्रणव उन दोनों को थानाप्रभारी इंद्रकुमार झा के कक्ष में ले गए. रुखसाना और सोनू से बात करने के बाद थानाप्रभारी ने सोनू की तरफ से इच्छा के खिलाफ भादंवि की धारा 363 के तहत रिपोर्ट दर्ज करवा दी. फिर तसल्ली दे कर रुखसाना और सोनू को घर भेज दिया.

उन के जाने के बाद थानाप्रभारी ने एसआई देवेंद्र से इस बारे में कुछ विचारविमर्श किया और मामले की जानकारी डीसीपी संदीप सिंह रंधावा को दे दी. चूंकि मामला अपहरण का था, इसलिए डीसीपी रंधावा ने उसी समय श्री झा को आवश्यक निर्देश दे कर इस मामले को जल्द से जल्द निपटाने का आदेश दिया. थानाप्रभारी ने एसआई देवेंद्र के साथ इस केस पर काम करना शुरू कर दिया तो पता चला कि इच्छा के पास कोई मोबाइल फोन नहीं है. यदि होता तो उस के सहारे उस तक पहुंचा जा सकता था. अब दूसरा रास्ता था किन्नरों से पूछताछ कर के. चूंकि वह किन्नरों के साथ रहता था इसलिए किन्नरों द्वारा ही उस के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद थी.

देवेंद्र पुन: पानदरीबा पहुंच गए. उन्होंने लोगों से बातचीत कर यह पता लगा लिया कि उस इलाके में किन्नर कहां रहते हैं. उन्होंने किन्नरों से इच्छा के बारे में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश शुरू कर दी. उन्हें उन में से ऐसा कोई किन्नर नहीं मिला जो इच्छा के निवास स्थान के बारे में जानता हो. आधी रात हो चुकी थी. इतनी सर्द रात में लोगों से पूछताछ करना उचित नहीं लगा इसलिए वह थाने लौट आए. अगले दिन तैयार हो कर वह थाने पहुंचे. थानाप्रभारी इंद्रकुमार झा थाने में ही रुके हुए थे. एसआई देवेंद्र ने उन्हें अपनी जांच की जानकारी दे दी. थानाप्रभारी ने आगे की जांच के लिए 4 कांस्टेबलों की एक टीम बनाई. थानाप्रभारी से दिशानिर्देश ले कर एसआई देवेंद्र टीम के साथ पानदरीबा पहुंच गए. उन्होंने अपनी पूछताछ उसी जगह से शुरू की, जहां पर छोड़ी थी.

2 घंटे की मेहनत के बाद उन्हें कुछ कामयाबी मिली. एक कांस्टेबल को चांदनी नाम का एक किन्नर मिला जो इच्छा को पहचानता था. चांदनी किन्नर मूलरूप से कानपुर का रहने वाला था. उस ने बताया कि इच्छा उर्फ राकेश त्रिलोकपुरी की झुग्गियों में रहता है. उस ने इच्छा का एक रंगीन फोटो भी पुलिस को दे दिया. एसआई देवेंद्र प्रणव टीम के साथ चांदनी किन्नर को ले कर त्रिलोकपुरी पहुंच गए. पर वह अपनी झुग्गी में नहीं मिला. तब पुलिस ने उस की आसपास तलाश की.

काफी भागदौड़ के बाद आखिर शाम को इच्छा पकड़ में आ गया. उस समय वह अपना हुलिया बदल कर बाजार में घूम रहा था. पर उस के साथ सोनी नहीं थी. पूछने पर उस ने बताया कि वह सोनी को बेचने की फिराक में था. फिलहाल उस ने उसे त्रिलोकपुरी में ही अपनी मौसी के घर में रखा है. पुलिस उसे ले कर उस की मौसी के यहां पहुंची. सोनी वहीं पर मिल गई. पुलिस ने सब से पहले सोनी को अपने कब्जे में लिया. उस की मौसी ने बताया कि इच्छा इस बच्ची को अपने दोस्त की बेटी बता कर यहां कुछ समय के लिए छोड़ गया था. इच्छा का इरादा क्या था, वह नहीं जानती.

पुलिस इच्छा को हिरासत में ले कर पहाड़गंज थाने लौट आई. यहां इच्छा से सख्ती से पूछताछ शुरू हुई तो चौंकाने वाली जानकारी मिली. उस ने बताया कि वह इस से पहले किन्नर वेश में 3 और बच्चों का अपहरण कर के उन्हें बेच चुका है. किन्नर तो वह दिखावे के लिए बना था. इस की वजह यह थी कि किन्नरों के साथ उसे मोहल्ले में घूमने में दिक्कत नहीं होती थी और कोई उस पर शक भी नहीं करता था. किन्नर होने की सहानुभूति बटोर कर वह छोटी बच्ची के मांबाप से दोस्ती गांठता फिर उन का विश्वास जीतने के बाद मौका पा कर उन की बच्ची ले उड़ता.

थानाप्रभारी इंद्रकुमार झा ने रुखसाना और सोनू को थाने बुला कर उन की बेटी सोनी उन के हवाले कर दी. बेटी को सुरक्षित पा कर दोनों खुश हो गए. 24 घंटे के अंदर इस केस को हल करने वाली टीम को डीसीपी संदीप सिंह रंधावा ने सराहना की. बच्ची का अपहरण करने वाले बहरूपिए से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उस ने कितने बच्चों का अपहरण किया और उन्हें कहां बेचा था. Missing Child Case

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित और सोनी काल्पनिक नाम है.

Crime Story : सरप्राइज गिफ्ट -अवैद्य संबंधों के शक में बीवी की हत्या

Crime Story.19 जून, 2017 की शाम मनोज बेहद खुश था. लेकिन उस के दोस्त अनुज को उस की यह बेवजह की खुशी समझ में नहीं आ रही थी. जब रहा न गया तो अनुज ने पूछ ही लिया, ‘‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना क्यों हो रहा है, कुछ बताएगा भी या यूं ही बकवास करता रहेगा.’’

‘‘बताऊंगा, पर ऐसे नहीं. पहले मिल कर थोड़ा जश्न मनाते हैं. फिर अपनी खुशी का राज जाहिर करूंगा. ये ले पैसे और औफिसर्स चौइस की बोतल, तले हुए काजू, नमकीन और सिगरेट का पैकेट ले आ. सोच ले, आज मैं तुझे अपनी आजादी की पार्टी दे रहा हूं.’’ कह कर उस ने पर्स से 2 हजार रुपए का नोट निकाल कर अनुज को दे दिया.

अनुज की समझ में तो कुछ नहीं आया, लेकिन उस ने मनोज के हाथों से 2 हजार रुपए का नोट ले कर जेब में रखा और शराब के ठेके की ओर चला गया. कुछ देर बाद वह सारा सामान ले आया तो दोनों कमरे में पीने बैठ गए. मनोज ने 2 पैग बनाए और जाम से जाम टकराने के बाद दोनों शराब पीने लगे. जब मनोज पर नशे का सुरूर चढ़ा तो उस ने कहना शुरू किया, ‘‘अनुज, जानते हो मैं आज इतना खुश क्यों हूं.’’

‘‘जब तक तू बताएगा नहीं, तब तक मैं कैसे जानूंगा कि तेरे मन में किस बात को ले कर लड्डू फूट रहे हैं.’’ नशे की झोंक में अनुज उस की ओर देख कर बोला.

Crime Story

‘‘बेटे, आज मैं आजाद हो गया हूं.’’

‘‘पहेलियां न बुझा कर सीधी तरह बता, तेरी इस खुशी का राज क्या है?’’ अनुज ने चौथा पैग पीते हुए उत्सुकता से पूछा.

‘‘मैं ने तेरी भाभी को खुदागंज रवाना कर दिया है. मुझे उस से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है.’’

मनोज की बात सुन कर अनुज को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उस ने पूरी बात बताई तो उसे लगा कि हो न हो मनोज ने कोमल की हत्या कर दी है. अनुज का सारा नशा काफूर हो गया. थोड़ी देर तक वह मनोज की बात सुनता रहा, फिर पीना छोड़ कर उठ खड़ा हुआ और घर में किसी जरूरी काम का बहाना कर के वहां से चला गया.

बाहर आ कर वह कुछ दोस्तों से मिला और मनोज की बात उन्हें बताई. सब ने उसे यही सलाह दी कि इस बात की सूचना पुलिस को दे देनी चाहिए, क्योंकि बाद में वह भी पुलिसिया लफड़े में फंस सकता है. सोचविचार कर उस ने यह सूचना कंझावला थाने की पुलिस को दे दी.

पति द्वारा किसी औरत की हत्या की सूचना मिलते ही कंझावला थाने की पुलिस हरकत में आ गई. जेजे कालोनी सवदा पहुंच कर पुलिस ने मनोज गुजराती को हिरासत में ले लिया. थाने में जब मनोज से पूछताछ शुरू हुई, तब तक उस का नशा कम हो चुका था. पहले तो उस ने एसआई निखिल को बताया कि शराब के नशे में वह यह सब अपने दोस्त पर रौब जमाने के लिए  कह रहा था. लेकिन निखिल का एक करारा थप्पड़ उस के गले पर पड़ा तो उस के होश ठिकाने आ गए.

उस ने बताया कि वह अपनी पत्नी कोमल की हरकतों से बहुत परेशान था. इसलिए उस ने उसे बोंटा पार्क के जंगल में ले जा कर उस की हत्या कर दी है. बोंटा पार्क दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास है. कंझावला थाने से वह काफी दूर था. तब तक काफी रात हो चुकी थी, इसलिए अगली सुबह निखिल कांस्टेबल महेश और नरेश को साथ ले कर उत्तरी दिल्ली के मोरिसनगर थाने पहुंचे और वहां की थानाप्रभारी इंसपेक्टर आरती शर्मा को उन के इलाके के बोंटा पार्क में एक लड़की की हत्या किए जाने की सूचना दी.

17 जून, 2017 को कंझावला पुलिस द्वारा मिली इस सूचना को थाना मौरिसनगर के डीडी नंबर 14 ए में दर्ज करवा कर इंसपेक्टर आरती शर्मा ने अतिरिक्त थानाप्रभारी इंसपेक्टर  वीरेंद्र सिंह को इंसपेक्टर राकेश कुमार, एएसआई बिजेंद्र, हैडकांस्टेबल राजकुमार, सुखवीर, कांस्टेबल श्याम सैनी तथा महिला कांस्टेबल मधु को आरोपी मनोज और कंझावला पुलिस के साथ बोंटा पार्क भेजा.

पुलिस टीम पार्क के गेट नंबर 6 से अंदर दाखिल हुई. अंदर जा कर पुलिस कोमल की लाश की तलाश में जुट गई. मनोज ठीक से उस जगह के बारे में नहीं बता पा रहा था, जहां उस ने अपनी पत्नी कोमल की हत्या कर के उस की लाश छिपाई थी. पुलिस की तलाशी 12 घंटे तक जारी रही, लेकिन कोमल की लाश नहीं मिली. रात घिर आई थी, फिर भी तलाशी चलती रही.

रात के करीब 12 बजे मनोज पुलिस टीम को एक छोटी चट्टान के पास ले कर गया, जहां 22-23 साल की एक लड़की की लाश पड़ी थी. वह गुलाबी रंग का टौप और नीले रंग की जींस पहने थी. लाश की छानबीन करते समय इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह ने देखा कि उस के दाहिने हाथ पर कोमल गुदा हुआ था.

आरोपी मनोज ने लाश की ओर इशारा कर के बताया कि यह उस की पत्नी कोमल की लाश है, जिसे उस ने कल शाम को धोखे से यहां ला कर उस की हत्या कर दी थी. लाश की फोटोग्राफी कराने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए सब्जीमंडी मोर्चरी भेज दिया गया, साथ ही कोमल के घर वालों को फोन कर के उस की लाश की शिनाख्त के लिए सब्जी मंडी मोर्चरी बुला लिया गया.

17 जून को कोमल की बड़ी बहन गौरी सब्जी मंडी पहुंची,जहां लाश देखने के बाद उस ने उस की पहचान अपनी छोटी बहन और मनोज गुजराती की पत्नी कोमल के रूप में कर दी. कोमल की लाश की शिनाख्त होने के बाद गौरी की तहरीर पर उसी दिन कोमल की हत्या का मामला उस के पति मनोज गुजराती के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत दर्ज कर लिया गया. इस मामले की विवेचना इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह को सौंपी गई. गौरी के बयान तथा मनोज गुजराती के बयानों के बाद 2 साल की लव मैरिज का जो दर्दनाक वाकया सामने आया, वह इस प्रकार था—

कोमल के पिता चमनलाल का परिवार नांगलोई के चंचल पार्क में रहता था. उन के परिवार में पत्नी कमलेश के अलावा 4 बेटियां तथा 2 बेटे थे. इन में कोमल पांचवे नंबर की थी. घर के लोग उसे प्यार से कमली कह कर पुकारते थे. कोमल के बड़े भाई गंगाराम की शादी 8 साल पहले दिव्या से हुई थी. मनोज गुजराती दिव्या का चचेरा भाई था.

मनोज का परिवार कंझावला इलाके के सावदा गांव में रहता था. उस के परिवार में उस के अलावा इस के पिता राजू गुजराती, मां कमलेश तथा एक बहन परवीन थी. घर के बाहरी कमरे में मनोज की परचून की दुकान थी. दुकान अच्छीखासी चलती थी, जिस की वजह से मनोज की जेब हमेशा भरी होती थी. वह शौकीनमिजाज युवक था और हमेशा बनठन कर रहता था. चूंकि दोनों के परिवार आपस में रिश्तेदार थे, इसलिए समय समय पर उन का एकदूसरे के यहां आनाजाना लगा रहता था.

2 साल पहले एक दिन मनोज अपने दोस्तों के साथ मस्ती करने गुरुग्राम के सहारा मौल पहुंचा. वहां उस की नजर एक लड़की पर पड़ी, जो शक्लसूरत से जानीपहचानी लग रही थी. वह कोमल थी. मौडर्न कपड़ों, गहरे मेकअप और फ्लड लाइट की रंगबिरंगी रोशनी में कोमल बहुत ही सुंदर लग रही थी. दरअसल, कोमल वहां एक पब में नौकरी करती थी.

मनोज ने किसी बहाने से कोमल को अपने पास बुलाया तो दोनों ने एकदूसरे को पहचान लिया. बातोंबातों में मनोज ने उस का मोबाइल नंबर ले लिया और जल्द ही उस के घर चंचल पार्क आने का वादा किया. कोमल ने मनोज की खूब आवभगत की और उसे अपने साथ काम करने वाली कुछ सहेलियों से भी मिलवाया.

कोमल के लटकेझटके देख कर मनोज पहली ही नजर में उसे दिल दे बैठा. इधर कोमल भी मनोज के प्रति आकर्षित हो गई. उस दिन मनोज घर लौटा तो उस के दिलोदिमाग में कोमल की मनमोहिनी सूरत बसी हुई थी. वह जल्दी से जल्दी उसे अपनी बना लेना चाहता था.

उस दिन के बाद दोनों एकदूसरे को फोन कर के अपने दिल की बातें शेयर करने लगे. कोमल मनोज को हमेशा मौल में आने वाले हाईफाई लोगों के बारे में तरहतरह के किस्से सुनाती, जो मनोज को बहुत अच्छे लगते. वह कोमल को प्रभावित करने के लिए उसे महंगे तोहफे देने लगा. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों के घर वाले इस सब से कब तक अनजान रह सकते थे. उन्हें भी उन के प्यार की जानकारी हो गई.

मनोज और कोमल के घर वाले यों तो रिश्तेदार थे, लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें यह रिश्ता मंजूर नहीं था. कोमल के पिता चमनलाल को लगता था कि मनोज उन की बेटी को ज्यादा दिनों तक खुश नहीं रख पाएगा. मनोज सावदा गांव में रहता था, जहां के लोगों का रहनसहन पुराने जमाने जैसा था.

उधर मनोज के घर वालों की सोच भी कुछ ऐसी ही थी. जब मनोज और कोमल ने अपनेअपने घरों में अपनी पसंद जाहिर की तो उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया. लेकिन प्यार इन बंदिशों को कहां मानता है. वैसे भी दोनों ही अपने पैरों पर खड़े थे. इसलिए 5 जून, 2015 को कोमल ने अपने मम्मीपापा की मर्जी के खिलाफ जा कर तीसहजारी कोर्ट में मनोज से शादी कर ली. शादी के बाद दोनों रघुबीर नगर में किराए का मकान ले कर रहने लगे.

8-10 महीने तो दोनों ने खूब मौजमस्ती की, लेकिन बाद में मनोज को कोमल का सहारा मौल में काम करना बुरा लगने लगा. उस ने कोमल से यह काम छोड़ देने के लिए कहा, पर वह इस के लिए तैयार नहीं थी. उसे मौल में जा कर परफौरमेंस देना और नएनए लोगों से मिल कर हंसनाबोलना अच्छा लगता था. बात आगे बढ़ी तो दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए. पड़ोसियों ने दोनों को समझाया तो कोमल मनोज के घर जेजे कालोनी, सावदा में रहने को तैयार हो गई.

इस के बाद कोमल अपने पति मनोज के साथ सावदा में जा कर रहने लगी. लेकिन घर छोटा होने के कारण उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. मनोज की एक बहन परवीन थी, जिस से उस की कतई नहीं बनती थी. यह देख कर मनोज ने दूसरी जगह किराए पर एक घर ले लिया और दोनों उसी में रहने लगे. कुछ दिनों तक दोनों सुखचैन से रहे. मनोज की जिंदगी में अचानक भूचाल तब आया, जब एक दिन वह कोमल के सूटकेस में रखी उसकी एलबम देख रहा था. एक फोटो में वह एक लड़के के साथ बहुत खुश दिख रही थी.

मनोज ने कोमल को वह फोटो दिखा कर उस लड़के के बारे में पूछा तो कोमल ने बताया कि यह अमित है और उस के साथ सहारा मौल में नौकरी करता था. अमित महज उस का दोस्त है. लेकिन मनोज को कोमल की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. उस ने कोमल के जानकारों से अमित के बारे में पूछा तो पता चला कि शादी से पहले अमित कोमल का बौयफ्रैंड था. मनोज को यह जानकारी मिली तो वह परेशान हो गया. कोमल के बारे में यह जानकारी मिलने के बाद मनोज उस से उखड़ाउखड़ा रहने लगा.

कुछ ही दिनों बाद उन के बीच फिर से झगड़े शुरू हो गए. कोमल ने अपने घर में फोन कर के बताया कि मनोज उस से दहेज लाने के लिए दबाव डालता है और मना करने पर उस के साथ मारपिटाई करता है.

एक महीने बाद कोमल मनोज की मारपिटाई से दुखी हो कर अपनी बड़ी बहन किरण के पास रहने के लिए रघुवीरनगर चली गई. मनोज सावदा स्थित अपने घर में अकेला रह गया. एक दिन उसे पता चला कि कोमल फिर से अपने पुराने बौयफ्रैंड अमित से मिलने लगी है. यह जान कर मनोज को चिंता हुई कि कोमल कहीं उस से किनारा न कर ले. यही सोच कर उस ने कोमल के मोबाइल पर बात करने की कोशिश की. कुछ दिन तो कोमल मनोज के फोन को नजरअंदाज करती रही, लेकिन धीरेधीरे दोनों में बातचीत शुरू हो गई.

एक महीना पहले कोमल ने मनोज को बताया कि वह बहन पर बोझ नहीं बनना चाहती, इसलिए उस ने रघुवीरनगर के ही डी ब्लौक में अपने लिए अलग कमरा ले लिया है, जहां रह कर अब वह फिर से जौब पर जाएगी. घर में बैठेबैठे उस का मन नहीं लगता. दूसरे बिना पैसों के जिंदगी भी नहीं चलती. मनोज को उस की यह बात अच्छी नहीं लगी तो उस ने उस के नौकरी करने का विरोध करते हुए वापस घर लौट आने के लिए कहा. इस पर कोमल ने ऐतराज करते हुए मनोज से कहा कि वह उस के साथ गांव में नहीं रहेगी, क्योंकि वह उस के  साथ गालीगलौच करने के साथ मारपीट करता है. ऐसा जीवन वह नहीं जी सकती.

15 जून, 2017 को मनोज अपनी दुकान छोड़ कर कोमल से मिलने उस के घर पहुंचा. मनोज को आया देख कर उस ने उसे और उस के परिवार वालों को बहुत बुराभला कहा. कोमल की बातों से मनोज को लगा कि वह उस के साथ नहीं रहना चाहती. उसे बहुत गुस्सा आया. घर पहुंच कर वह सोचने लगा कि उस ने कोमल से कोर्टमैरिज की है और वह उस की पत्नी है. अगर वह उस के साथ नहीं रहेगी तो वह भी उसे उस की मनमर्जी से नहीं जीने देगा.

अगले दिन सुबह उस ने एक मोबाइल शौप पर जा कर नया सिम खरीदा और एक मैकेनिक के यहां से क्लच वायर ले आया. उसी सिम से उस ने कोमल से बड़े प्यार से बात की. बातोंबातों में उस ने कोमल को घूमने जाने के लिए राजी कर लिया. उस दिन काफी बारिश हुई थी, जिस से मौसम सुहाना हो गया था.

16 जून को मनोज ने कोमल को फिर फोन कर के मिलने के लिए सीमेंट गोदाम के पास बुलाया. कोमल ने कहा कि वह उस के पास पहुंच जाएगी. 2 बजे मनोज अपनी मोटरसाइकिल से सीमेंट गोदाम के पास पहुंचा तो थोड़ी देर बाद कोमल आ गई. उस ने कोमल को मोटरसाइकिल की पिछली सीट पर बिठाया और रिंगरोड होते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी के बोंटा पार्क जा पहुंचा.

पार्क के गेट पर मोटरसाइकिल खड़ी कर के वह कोमल के साथ अंदर चला गया. कोमल को विश्वास में लेने के लिए वह उस से रोमांटिक बातें कर रहा था. वहां झाडि़यों के पास कई युवा जोड़े प्रेमालाप में मग्न थे. यह देख कर कोमल भी रोमांटिक हो गई. कोमल से प्यारीप्यारी बातें करते हुए मनोज उसे एकांत में ले गया, जहां दोनों एक साफसुथरी चट्टान पर बैठ गए. मनोज ने उसे बांहों में ले कर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी और फिर से ऐसा न करने की कसम खाई तो कोमल खुश हो गई.

जब मनोज को लगा कि मौका एकदम सही है तो उस ने कोमल से कहा, ‘‘तुम अपना मुंह पीछे की तरफ कर लो, मैं तुम्हारे लिए एक सरप्राइज गिफ्ट लाया हूं.’’

कोमल ने खुश हो कर मुंह पीछे की ओर कर लिया. उचित मौका देख कर मनोज ने जेब में रखा क्लच वायर निकाला और कोमल की गर्दन पर लपेट कर कस दिया. कोमल ने मनोज को वायर ढीला करने के लिए कहा, साथ ही बचने के लिए बहुत हाथपैर मारे, जिस की वजह से मनोज के हाथों में खरोंचे भी आ गईं. लेकिन उस ने वायर को ढीला नहीं किया.

कुछ ही पलों में कोमल ने आखिरी हिचकी ली और उस की गर्दन एक ओर लुढ़क गई. कोमल की लाश को परे धकेल कर वह पार्क से बाहर आ गया और अपनी मोटरसाइकिल पर सवार हो कर घर लौट आया. इस के बाद उस ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए अपने दोस्त अनुज के साथ शराब की पार्टी की, जहां कोमल की हत्या का राज उस पर जाहिर कर दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने 17 जून, 2017 को मनोज को तीसहजारी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Crime Story

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— 2017 में प्रकाशित

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