⚲

News Story : सत्य निकेतन में छात्रों पर गिरी मौत की इमारत

News Story. विजय और अनामिका पिछले 2 दिन से चकराता, उत्तराखंड के खूबसूरत रिसोर्ट में थे. दोनों ने बहुत मस्ती की. टाइगर फाल्स में नहाए, चकराता का बाजार पैदल नापा, रिसोर्ट में कीवी के बगीचे में फोटो खिंचवाए और रात को अपने रूम में जीभर कर रोमांस भी किया.

7 सितंबर को उन्होंने अपनी कैब से दिल्ली की ओर वापसी की. अभी वे बादलों से घिरे उस इलाके से 10 किलोमीटर ही नीचे की ओर उतरे थे कि अचानक कैब थोड़ी सी गड़बड़ाई और ड्राइवर ने संभालते हुए गाड़ी एक महफूज जगह देख कर रोक दी. देखा तो पाया कि बाएं ओर का अगला टायर पंचर था.

‘‘गाड़ी को भी अभी धोखा देना था,’’ विजय बड़बड़ाया.

‘‘साहब, मैं एक बात बताना भूल गया,’’ ड्राइवर धीरे से बोला.  ‘‘क्या हुआ? स्टैपनी तो है न?’’ अनामिका ने पूछा.

‘‘जी, है तो पर पंचर है. मु झे उसे ठीक कराना पड़ेगा,’’ ड्राइवर बोला.

‘‘क्या यार, इतनी लापरवाही कौन करता है…’’ विजय  झल्लाया, ‘‘इतने बढि़या ट्रिप का सारा मजा किरकिरा कर दिया.’’

‘‘आप चिंता मत करो, मैं पास की ही छोटी सी बस्ती से टायर का पंचर लगवा कर आता हूं. तब तक आप इन पहाड़ों का और मजा लीजिए,’’ ड्राइवर ने अपनी  झेंप मिटाते हुए कहा.

पर पहाड़ पर पंचर लगवाना इतना आसान काम नहीं है. ड्राइवर टायर लिए पहले तो किसी सवारी का इंतजार करता रहा. बड़ी मुश्किल से एक स्कूटी वाले ने लिफ्ट दी. ड्राइवर के लिए पिछली सीट पर बैठ कर उस टायर को संभालना बहुत बड़ा टास्क था. जैसेतैसे वह उस अनजान स्कूटी वाले के साथ अगली बस्ती की ओर निकला.

इधर, अनामिका और विजय पहाड़ों का इतना ज्यादा लुत्फ ले चुके थे कि अब वे जल्दी से जल्दी दिल्ली जाना चाहते थे. वे दोनों एक फास्ट फूड की टपरी ‘पहाड़ों की मैगी’ पर जा बैठे और चाय का और्डर कर दिया.

‘‘यार, यह पहाड़ की जिंदगी कितनी मुश्किल है. अभी हम ने रास्ते में देखा था कि सड़क पर पहाड़ का एक मामूली सा हिस्सा खिसक आया था. बारिश में लैंड स्लाइड होने पर तो जिंदगी रुक जाती है. अगर वही मलबा किसी घर पर गिर जाए तो क्या होता होगा…’’ अनामिका बोली.

‘‘तुम सही कह रही हो. घर का भरभरा कर गिरना… यह सोच कर ही रूह कांप जाती है,’’ विजय बोला.

चाय की चुसकियों के साथ अनामिका मोबाइल पर दिल्ली की खबरें देखने लगी.

‘‘यह क्या कांड हो गया…’’ अनामिका  एकदम से चिल्लाई.

‘‘अब क्या हुआ?’’ अब तो विजय पक गया था.

‘‘दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट इलाके में रविवार, 6 सितंबर की दोपहर को एक पांचमंजिला पीजी इमारत गिर गई. समाचार एजेंसी एएनआई ने एम्स के हवाले से बताया कि इस हादसे में मरने वालों की तादाद 6 हो गई है.’’

‘‘आज का दिन ही बेकार है. मु झे पूरी खबर बताओ…’’ विजय बोला.

‘‘बीबीसी की खबर के मुताबिक, एम्स ट्रौमा सैंटर में इस हादसे के शिकार 10 लोगों को लाया गया जिन में से 5 की पहले ही मौत हो चुकी थी. गंभीर रूप से घायल एक शख्स की बाद में मौत हो गई. 3 लोगों का इलाज चल रहा था और एक घायल को मामूली चोटों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

‘‘इमारत गिरने के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ (नैशनल डिजास्टर रिस्पौन्स फोर्स), दिल्ली डिजास्टर मैनेजमैंट अथौरिटी और कैट्स की टीमें मौके पर पहुंची थीं,’’ अनामिका बोली.

‘‘पर यह सब हुआ कैसे?’’ विजय ने पूछा.

‘‘समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली अग्निशमन विभाग को दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे एक इमारत गिरने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव अभियान शुरू कर दिया.

‘‘बीबीसी की खबर के मुताबिक, जिस समय इमारत ढही, इलाके में एक जोर का धमाका सुनाई दिया. पड़ोस की ही एक दुकान में बैठे एक चश्मदीद स्टूडैंट ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि धमाके की आवाज सुनते ही सारे लोग बाहर भागे.

‘‘उस स्टूडैंट ने आगे कहा, ‘अचानक भूकंप जैसी आवाज सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे. यहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर गई थी.’

‘‘उस स्टूडैंट ने इस से आगे कहा, ‘अभी भी मलबे के अंदर से आवाजें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं ‘हमें बचाओ, हमें बचाओ’… कम से कम 25-30 बच्चे हैं. यहां पास में लड़कों और लड़कियों के लिए पीजी था. इस इमारत के बेसमैंट में रेनोवेशन का काम चल रहा था.’

‘‘फिर वह स्टूडैंट आगे बोला, ‘इन इमारतों को 100 साल की लीज पर दिया गया है. अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए वे लोग नीचे बेसमैंट बना रहे थे. उन्होंने ऊपर की बिल्डिंग मजबूत कर दी, पर नीचे के पिलर कमजोर थे. जिस की वजह से वह बिल्डिंग गिरी है.’

‘‘उस स्टूडैंट ने आगे बताया,’’ बेसमैंट में कई मजदूर काम कर रहे थे. वे सभी दब गए हैं. साथ ही बिल्डिंग के सामने फल वगैरह बेचने वाले रेहड़ी पटरी वाले भी थे, वे भी दब गए हैं.’

‘‘एक और चश्मदीद स्टूडैंट ने एएनआई को बताया, ‘यह होस्टल डेज नाम की बिल्डिंग है. इस के ठीक बगल में एक और पीजी की इमारत भी गिर गई है. होस्टल डेज लड़कों के लिए बना पीजी है. यह पांचमंजिला इमारत थी. इस के बगल वाली इमारत भी गिर गई है. इस के बगल में 2 और इमारतें हिल रही थीं. इन में भी पीजी चलता है.’

‘‘मु झे तो बहुत डर लग रहा है. देशभर में छात्रों पर ही गाज क्यों गिर रही है? कहीं पेपर लीक हो रहा है तो कहीं इमारतें ही उन पर कहर बरपा रही हैं,’’ कहते हुए अनामिका का मूड खराब हो गया.

‘‘तुम टैंशन मत लो. यह इमारत है किस की और उस के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया?’’ विजय ने पूछा.

‘‘एक खबर के मुताबिक, इस खूनी लापरवाही के बाद पीजी का मालिक आनंद बंसल अचानक गायब हो गया है. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर उस की तलाश भी शुरू कर दी है. चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस डेंजरस बिल्डिंग को एक साल पहले ही खाली कराया गया था,

फिर भी नियमकायदों की धज्जियां उड़ा कर छात्रों की जान से यह खतरनाक खेल खेला जा रहा था,’’ अनामिका बोली.

‘‘ओह, फिर वह लालच. याद है जब दिल्ली की तेज बारिश में करोलबाग के बेसमैंट में फंस कर बहुत से स्टूडैंट्स काल के गाल में समा गए थे. तुम ने तो बहुतों को बचाया भी था,’’ विजय ने याद दिलाया.

‘‘मैं वह दिन कभी नहीं भूल सकती. उस दिन मु झे अपने मछुआरा होने पर गर्व महसूस हुआ था… पर कल तो और भी बुरा हुआ है,’’ अनामिका धीरे से बोली.

‘‘इस कांड पर सियासत भी होने लगी होगी…’’ विजय ने कहा.

‘‘वह तो होना ही था. इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संवेदना जाहिर करते हुए राहत और बचाव कार्य में हरमुमकिन मदद देने की बात कही, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद चंद्रशेखर आजाद, सांसद पप्पू यादव, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की.

‘‘राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘स्टूडैंट का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था… अब हालात जानलेवा है. कालेज या विश्वविद्यालय में अच्छे होस्टल न होने के कारण स्टूडैंट पीजी में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं. हर स्टूडैंट की जान कीमती है और उस की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए.’’’

‘‘कौकरोच जनता पार्टी ने तो खूब हल्ला किया होगा?’’ विजय ने पूछा.

‘‘घटना के तुरंत बाद कौकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राहत और बचाव को ले कर ‘एक्स’ पर एक वीडियो सा झा किया. उन्होंने लिखा, ‘स्टूडैंट्स मलबे के नीचे दबे हैं और स्थानीय लोग अपने हाथों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन का एक भी व्यक्ति नजर नहीं आ रहा. जब जिंदगी बचाने के लिए हर मिनट कीमती है, प्रशासन कहां है? यह सब कब तक चलता रहेगा?’

‘‘अभिजीत दीपके ने एक और पोस्ट में लिखा, ‘कल पीएम ने डीयू का दौरा किया, राजनीतिक भाषण दिया और ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी इस्तेमाल किया, जबकि उन्होंने हमारी शिक्षा व्यवस्था की खराब हालत के बारे में बहुत कम बात की. आज साउथ कैंपस में एक होस्टल की इमारत गिर गई है और आशंका है कि मलबे के नीचे स्टूडैंट फंसे हो सकते हैं. अभी तक कितने लोगों की जान गई है, इस की जानकारी नहीं है.’

‘‘उन्होंने आगे लिखा, ‘आखिर कब तक इस देश के स्टूडैंट को खराब व्यवस्था और लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ेगी? आदिवासी इलाकों में देखभाल और मदद की कमी के कारण आदिवासी स्टूडैंट की जान जा रही है और देश की राजधानी में पढ़ने वाले स्टूडैंट भी सुरक्षित नहीं हैं.’

‘‘आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘सत्य निकेतन में एक और इमारत गिर गई. यह डीयू के साउथ कैंपस के कालेज छात्रों के लिए पीजी आवास था. करीब 30-40 छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका है.’

‘‘उन्होंने आगे और तीखा लिखते हुए कहा, ‘एमसीडी के बिल्डिंग विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के ट्रांसफर की दर 1.25 करोड़ रुपए है, इसलिए यह रुकने वाला नहीं है. यह साकेत में इमारत गिरने जैसी ही कहानी है. आडिट के नाम पर एक बार फिर कारोबारियों, जिम, होटल और अस्पतालों से करोड़ों रुपए वसूले जाएंगे. कुछ भी नहीं बदलेगा,’’’

‘‘तुम सही कह रही हो. देश में घूसखोरी का कोई भी परमानैंट इलाज नहीं है. इस हादसे में घायल और मारे गए लोगों को मुआवजा दे दिया जाएगा. कार्रवाई के नाम पर कुछ लीपापोती हो जाएगी, और फिर सब ढर्रे पर चलने लगेगा. नेता लोगों को अपनी लुभावनी बातों में उल झाए रखेंगे और जनता यों ही पिसती रहेगी,’’ विजय बोला.

इतने में दूर से ड्राइवर किसी बाइक पर आता दिखा. उस के चेहरे की मुसकान बता रही थी कि टायर का पंचर लग गया है.

विजय और अनामिका ने राहत की सांस ली, पर सत्य निकेतन की खबर से उन दोनों का मन कसैला हो गया था. हलकीहलकी बौछार शुरू हो गई थी.  News Story

Tragedy: होटल में आग, 21 जिंदगियां हुईं खाक

Tragedy. दिल्ली सरकार ने हाल ही में अपनी होमस्टे पौलिसी के ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे थे, जिस के तहत एयरबीएनबी जैसे मौडल को मंजूरी देने की तैयारी थी, ताकि घर मालिक अपने खाली कमरों में टूरिस्टों को ठहरा सकें और कानूनी रूप से एक्स्ट्रा इनकम कमा सकें.

पूरी दिल्ली में लागू होने वाली इस पौलिसी में लाइसैंस की वैलिडिटी 5 साल के लिए प्रपोज की गई थी. इस पौलिसी का मकसद टूरिज्म को बढ़ावा देना, होटलों पर बढ़ते दबाव को कम करना, आम लोगों को एक्स्ट्रा इनकम का मौका देना और टूरिस्टों को सस्ती और स्थानीय अनुभव वाली ठहरने की सहूलियत मुहैया कराना था.

हालांकि, इस पौलिसी के तहत बी एंड बी (बैड एंड ब्रेकफास्ट) यूनिटों को होटल, गैस्टहाउस या लौज की तरह चलाने करने की इजाजत नहीं थी. पर मालवीय नगर में बने एक होटल में लगी आग के बाद यह योजना ही सवालों के घेरे में आ गई.

यह अग्निकांड 3 जून, 2026 की सुबह हुआ था. होटल का नाम था ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’, जो मालवीय नगर के हौज रानी इलाके की एक तंग गली में बना था. आग इतनी भयंकर थी कि देखते ही देखते विकराल रूप ले बैठी और जब तक फायर बिग्रेड द्वारा राहत का काम किया जाता, तब तक जान और माल का नुकसान हो चुका था. 21 लोगों ने अपनी जान गंवा दी और बहुत से गंभीर रूप से घायल हो गए.

चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के दौरान धुएं के साथ आग इतनी तेजी से फैली कि ज्यादातर लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला. भीषण आग के चलते होटल का मेन गेट ही बंद हो गया. इस से लोग वहां से नहीं निकल पाए और ऊपर की ओर भागे. छत की ओर जाने पर 1-2 लोग ही निकल पाए, तब तक आग के चलते वह दरवाजा जाम हो गया. इस के बाद बाकी लोग वहीं फंस गए.

नतीजतन, जान बचाने के लिए होटल के कमरों में मौजूद कुछ लोगों ने खिड़कियां तोड़ कर नीचे छलांग लगा दी. इसी बीच स्थानीय लोगों ने सूझबूझ  दिखाते हुए नीचे गद्दे बिछा दिए थे, ताकि लोग उन पर कूद सकें और कम से कम घायल हों.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मरने वालों में 10 भारतीय और 11 विदेशी नागरिक थे. इन में 9 अफ्रीकी और 2 तुर्कमेनिस्तान के थे. मरने वाले 10 भारतीयों में से 8 तो रिश्तेदार थे. इन में 3 राजस्थान के और 5 हरियाणा के रहने वाले थे.

आग की इस घटना ने दिल्ली में होटल को लाइसैंस देने की नीति और निगरानी सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर कर दिया है. एक अखबार की खबर के मुताबिक, यह होटल जिस इमारत में चल रहा था, उस के पास न तो होटल चलाने का लाइसैंस था और न ही महानगर पालिका के रिकौर्ड में वह होटल के रूप में दर्ज था.

दिल्ली सरकार के टूरिज्म डिपार्टमैंट से ‘बैड एंड ब्रेकफास्ट’ का लाइसैंस और महानगर पालिका से चाय बेचने की इजाजत ले कर 25 कमरों का होटल चलाया जा रहा था.

महानगर पालिका के बड़े अफसरों के मुताबिक, ‘बैड एंड ब्रेकफास्ट योजना’ मूल रूप से निजी मकानों में सीमित संख्या में टूरिस्टों को ठहराने के लिए बनाई गई है, जिस में अधिकतम 4 कमरों तक मेहमान रखने की इजाजत होती है.

दमकल महकमे के मुताबिक, होटल ‘फ्लोरिश स्टे बीएंडबी’ में बेसमैंट में 2 कमरे और एक रसोई थी. ग्राउंड फ्लोर पर 3 कमरे और एक और रसोई बनाई गई थी. ऊपर की पांचों मंजिलों पर 4-4 कमरे बनाए गए थे.

इतना ही नहीं, इमारत में सही से इमर्जैंसी एग्जिट नहीं था. ज्यादातर खिड़कियां शीशों से पूरी तरह बंद थीं.

किसी भी मंजिल पर बालकनी नहीं थी. बेसमैंट के लिए बाहर की ओर बना एक्स्ट्रा एग्जिट गेट बंद था.

आग बेसमैंट से शुरू हुई और लपटें सीढि़यों के रास्ते ऊपर की मंजिलों तक फैल गईं. सीढ़ी आग की चपेट में आ गई, जिस से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया.

इधर, घटना के कुछ घंटों बाद पुलिस ने होटल के मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में ले लिया. उस ने बताया कि वह खुद होटल की निगरानी नहीं करता था. उस ने होटल के मैनेजमैंट, बिलिंग और अकाउंट्स का काम किसी और को दिया था. उस ने यह भी कहा कि होटल में कमरे बड़े करने और दूसरे बदलावों की सलाह भी किसी और ने ही दी थी.

लवकेश बजाज ने यह दावा भी किया कि सलाह देने वाले आदमी ने उस से कहा था कि होटल में ये सारे मौडिफिकेशन नौर्मल हैं और दिल्ली में सब चलता है.

यह ‘सब चलता है’ वाली सोच ऐसे हादसों की जड़ बन जाती है. एक खबर के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में दावा किया गया है कि राजधानी दिल्ली में तकरीबन 1,000 लाइसैंसी होटल और गैस्टहाउस हैं, लेकिन केवल 52 के पास लीगल फायर नो औब्जैक्शन सर्टिफिकेट है. इस साल 7 जनवरी को कोर्ट ने दिल्ली सरकार, महानगर पालिका और नई दिल्ली नगर पालिका को फायर सेफ्टी पर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था.

याचिका दायर करने वाले एडवोकेट अर्पित भार्गव का कहना था कि बड़ी तादाद में होटल और गैस्टहाउस जरूरी अग्नि सुरक्षा मानकों के बिना चल रहे हैं. सुनवाई के तकरीबन 5 महीने बाद अब हादसा हो गया.

इन बातों का जरूर रखें खयाल 

* हर कमरे, लौबी, किचन, स्टोर में धुआं उठते ही अलार्म बजने का सिस्टम लगा हो.

* हर फ्लोर पर मैन्युअल काल पौइंट को आग लगने पर कोई भी बजा सके.

* स्प्रिंकलर सिस्टम लगा हो, जो पूरे होटल में सीलिंग पर आग पर औटोमैटिक पानी गिराता है.

* हर 15 मीटर पर फायर एक्सटिंग्विशर लगा हो. यह किचन आदि में छोटी आग तुरंत बुझाने के काम आता है.

* फायर हाइड्रैंट सिस्टम हो ताकि आग लगने पर बिल्डिंग के बाहर फायर ब्रिगेड डायरैक्ट पानी ले सके.

* हर सीढ़ी के पास हर फ्लोर के लिए फायर वाले पाइप लगा कर ऊपर तक पानी पहुंचाने का इंतजाम हो.

* हर फ्लोर से निकलने के लिए 2 अलग सीढि़यां हों. एक में आग लगे तो दूसरी इस्तेमाल हो. फायर एग्जिट पर ताला कभी मत लगाओ.

* ग्रीन ग्लो साइन से ‘एग्जिट’ का निशान हो. कमरे के गेट के पीछे फ्लोर का मैप चिपका होना चाहिए. ‘आप यहां हैं, सब से पास का एग्जिट उधर है’ की जानकारी जरूर हो.

* बिजली जाते ही बैटरी वाली लाइट चालू हो जाए. धुएं में सीढ़ी दिखनी चाहिए.

*होटल से तकरीबन 50 मीटर दूर खुली जगह पर ‘एसैंबली पौइंट’ तय करो. आग लगे तो सब वहीं इकट्ठा हों, ताकि गिनती हो सके.

* आग में लिफ्ट इस्तेमाल कभी नहीं करें.

* छत पर कम से कम 10,000 लिटर का अलग फायर टैंक रखो.

* अगलबगल के दुकान वालों का फोन नंबर रखो. आग लगे तो वे भी अपनी दुकान खाली कर दें.

* होटल के बाहर साइन बोर्ड या एयरकंडीशनर के कारण फायर ब्रिगेड की सीढ़ी न अटके. होटल का फ्रंट खुला रखो.

* ऐसा पाया गया है कि रात 11-6 के बीच सब से ज्यादा आग लगती है. इस शिफ्ट में अलर्ट स्टाफ रखो, सोने वाला गार्ड नहीं चलेगा.

भीड़भाड़ वाले इलाके के होटल में आग से बचाव के उपाय

भीड़भाड़ वाले इलाके में बने होटल में आग लगने का रिस्क दोगुना होता है. पहला आग लगी तो भगदड़ और दूसरा आसपास की इमारतों में फैलने का खतरा. पर चूंकि बहुत सारे होटल ऐसे ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में बने हैं, तो आग लगने जैसी आफत कभी भी आ सकती है. तो फिर उपाय क्या है?

बचाव ही इलाज है. इस के लिए होटल वाले हर 6 महीने में लाइसैंस्ड इलैक्ट्रिशियन से वायरिंग चैक कराएं. ओवरलोडिंग रोकने को एमसीबी, आरसीसीबी लगवाएं. सस्ती लोकल वायर या स्विच इस्तेमाल न करें.

अगर लगने की दूसरी वजह किचन हो सकती है, इसलिए कमर्शियल किचन में चिमनी के ऊपर आटो फायर सप्रेशन सिस्टम लगवाएं. एलपीजी पाइपलाइन आईएसआई मार्क वाली हो, लीकेज डिटेक्टर लगा होना चाहिए. गैस बैंक किचन से बाहर खुली जगह में हो.

तुरंत आग पकड़ लेने वाले सामान को सावधानी से सुरक्षित जगह पर रखें. डीजल, पेंट, थिनर स्टोररूम में होटल से अलग हो तो बेहतर रहता है या फिर सब से ऊपर की मंजिल पर रखा जाना चाहिए. होटल में स्मोकिंग जोन बालकनी में बना हो. कमरों में बीड़ीसिगरेट पीना सख्त मना हो.

इस के अलावा स्टाफ को भी आग बुझाने की ट्रेनिंग मिली होनी चाहिए. हो सके तो हर महीने मौक ड्रिल की जाए और हर शिफ्ट में 2 लोग फायर फाइटर ट्रेंड हों. उन्हें पता हो कि मेन बिजली और गैस कहां से बंद होती है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें