News Story. विजय और अनामिका पिछले 2 दिन से चकराता, उत्तराखंड के खूबसूरत रिसोर्ट में थे. दोनों ने बहुत मस्ती की. टाइगर फाल्स में नहाए, चकराता का बाजार पैदल नापा, रिसोर्ट में कीवी के बगीचे में फोटो खिंचवाए और रात को अपने रूम में जीभर कर रोमांस भी किया.
7 सितंबर को उन्होंने अपनी कैब से दिल्ली की ओर वापसी की. अभी वे बादलों से घिरे उस इलाके से 10 किलोमीटर ही नीचे की ओर उतरे थे कि अचानक कैब थोड़ी सी गड़बड़ाई और ड्राइवर ने संभालते हुए गाड़ी एक महफूज जगह देख कर रोक दी. देखा तो पाया कि बाएं ओर का अगला टायर पंचर था.
‘‘गाड़ी को भी अभी धोखा देना था,’’ विजय बड़बड़ाया.
‘‘साहब, मैं एक बात बताना भूल गया,’’ ड्राइवर धीरे से बोला. ‘‘क्या हुआ? स्टैपनी तो है न?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘जी, है तो पर पंचर है. मु झे उसे ठीक कराना पड़ेगा,’’ ड्राइवर बोला.
‘‘क्या यार, इतनी लापरवाही कौन करता है…’’ विजय झल्लाया, ‘‘इतने बढि़या ट्रिप का सारा मजा किरकिरा कर दिया.’’
‘‘आप चिंता मत करो, मैं पास की ही छोटी सी बस्ती से टायर का पंचर लगवा कर आता हूं. तब तक आप इन पहाड़ों का और मजा लीजिए,’’ ड्राइवर ने अपनी झेंप मिटाते हुए कहा.
पर पहाड़ पर पंचर लगवाना इतना आसान काम नहीं है. ड्राइवर टायर लिए पहले तो किसी सवारी का इंतजार करता रहा. बड़ी मुश्किल से एक स्कूटी वाले ने लिफ्ट दी. ड्राइवर के लिए पिछली सीट पर बैठ कर उस टायर को संभालना बहुत बड़ा टास्क था. जैसेतैसे वह उस अनजान स्कूटी वाले के साथ अगली बस्ती की ओर निकला.
इधर, अनामिका और विजय पहाड़ों का इतना ज्यादा लुत्फ ले चुके थे कि अब वे जल्दी से जल्दी दिल्ली जाना चाहते थे. वे दोनों एक फास्ट फूड की टपरी ‘पहाड़ों की मैगी’ पर जा बैठे और चाय का और्डर कर दिया.
‘‘यार, यह पहाड़ की जिंदगी कितनी मुश्किल है. अभी हम ने रास्ते में देखा था कि सड़क पर पहाड़ का एक मामूली सा हिस्सा खिसक आया था. बारिश में लैंड स्लाइड होने पर तो जिंदगी रुक जाती है. अगर वही मलबा किसी घर पर गिर जाए तो क्या होता होगा…’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम सही कह रही हो. घर का भरभरा कर गिरना… यह सोच कर ही रूह कांप जाती है,’’ विजय बोला.
चाय की चुसकियों के साथ अनामिका मोबाइल पर दिल्ली की खबरें देखने लगी.
‘‘यह क्या कांड हो गया…’’ अनामिका एकदम से चिल्लाई.
‘‘अब क्या हुआ?’’ अब तो विजय पक गया था.
‘‘दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट इलाके में रविवार, 6 सितंबर की दोपहर को एक पांचमंजिला पीजी इमारत गिर गई. समाचार एजेंसी एएनआई ने एम्स के हवाले से बताया कि इस हादसे में मरने वालों की तादाद 6 हो गई है.’’
‘‘आज का दिन ही बेकार है. मु झे पूरी खबर बताओ…’’ विजय बोला.
‘‘बीबीसी की खबर के मुताबिक, एम्स ट्रौमा सैंटर में इस हादसे के शिकार 10 लोगों को लाया गया जिन में से 5 की पहले ही मौत हो चुकी थी. गंभीर रूप से घायल एक शख्स की बाद में मौत हो गई. 3 लोगों का इलाज चल रहा था और एक घायल को मामूली चोटों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
‘‘इमारत गिरने के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ (नैशनल डिजास्टर रिस्पौन्स फोर्स), दिल्ली डिजास्टर मैनेजमैंट अथौरिटी और कैट्स की टीमें मौके पर पहुंची थीं,’’ अनामिका बोली.
‘‘पर यह सब हुआ कैसे?’’ विजय ने पूछा.
‘‘समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली अग्निशमन विभाग को दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे एक इमारत गिरने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव अभियान शुरू कर दिया.
‘‘बीबीसी की खबर के मुताबिक, जिस समय इमारत ढही, इलाके में एक जोर का धमाका सुनाई दिया. पड़ोस की ही एक दुकान में बैठे एक चश्मदीद स्टूडैंट ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि धमाके की आवाज सुनते ही सारे लोग बाहर भागे.
‘‘उस स्टूडैंट ने आगे कहा, ‘अचानक भूकंप जैसी आवाज सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे. यहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर गई थी.’
‘‘उस स्टूडैंट ने इस से आगे कहा, ‘अभी भी मलबे के अंदर से आवाजें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं ‘हमें बचाओ, हमें बचाओ’… कम से कम 25-30 बच्चे हैं. यहां पास में लड़कों और लड़कियों के लिए पीजी था. इस इमारत के बेसमैंट में रेनोवेशन का काम चल रहा था.’
‘‘फिर वह स्टूडैंट आगे बोला, ‘इन इमारतों को 100 साल की लीज पर दिया गया है. अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए वे लोग नीचे बेसमैंट बना रहे थे. उन्होंने ऊपर की बिल्डिंग मजबूत कर दी, पर नीचे के पिलर कमजोर थे. जिस की वजह से वह बिल्डिंग गिरी है.’
‘‘उस स्टूडैंट ने आगे बताया,’’ बेसमैंट में कई मजदूर काम कर रहे थे. वे सभी दब गए हैं. साथ ही बिल्डिंग के सामने फल वगैरह बेचने वाले रेहड़ी पटरी वाले भी थे, वे भी दब गए हैं.’
‘‘एक और चश्मदीद स्टूडैंट ने एएनआई को बताया, ‘यह होस्टल डेज नाम की बिल्डिंग है. इस के ठीक बगल में एक और पीजी की इमारत भी गिर गई है. होस्टल डेज लड़कों के लिए बना पीजी है. यह पांचमंजिला इमारत थी. इस के बगल वाली इमारत भी गिर गई है. इस के बगल में 2 और इमारतें हिल रही थीं. इन में भी पीजी चलता है.’
‘‘मु झे तो बहुत डर लग रहा है. देशभर में छात्रों पर ही गाज क्यों गिर रही है? कहीं पेपर लीक हो रहा है तो कहीं इमारतें ही उन पर कहर बरपा रही हैं,’’ कहते हुए अनामिका का मूड खराब हो गया.
‘‘तुम टैंशन मत लो. यह इमारत है किस की और उस के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया?’’ विजय ने पूछा.
‘‘एक खबर के मुताबिक, इस खूनी लापरवाही के बाद पीजी का मालिक आनंद बंसल अचानक गायब हो गया है. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर उस की तलाश भी शुरू कर दी है. चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस डेंजरस बिल्डिंग को एक साल पहले ही खाली कराया गया था,
फिर भी नियमकायदों की धज्जियां उड़ा कर छात्रों की जान से यह खतरनाक खेल खेला जा रहा था,’’ अनामिका बोली.
‘‘ओह, फिर वह लालच. याद है जब दिल्ली की तेज बारिश में करोलबाग के बेसमैंट में फंस कर बहुत से स्टूडैंट्स काल के गाल में समा गए थे. तुम ने तो बहुतों को बचाया भी था,’’ विजय ने याद दिलाया.
‘‘मैं वह दिन कभी नहीं भूल सकती. उस दिन मु झे अपने मछुआरा होने पर गर्व महसूस हुआ था… पर कल तो और भी बुरा हुआ है,’’ अनामिका धीरे से बोली.
‘‘इस कांड पर सियासत भी होने लगी होगी…’’ विजय ने कहा.
‘‘वह तो होना ही था. इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संवेदना जाहिर करते हुए राहत और बचाव कार्य में हरमुमकिन मदद देने की बात कही, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद चंद्रशेखर आजाद, सांसद पप्पू यादव, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की.
‘‘राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘स्टूडैंट का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था… अब हालात जानलेवा है. कालेज या विश्वविद्यालय में अच्छे होस्टल न होने के कारण स्टूडैंट पीजी में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं. हर स्टूडैंट की जान कीमती है और उस की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए.’’’
‘‘कौकरोच जनता पार्टी ने तो खूब हल्ला किया होगा?’’ विजय ने पूछा.
‘‘घटना के तुरंत बाद कौकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राहत और बचाव को ले कर ‘एक्स’ पर एक वीडियो सा झा किया. उन्होंने लिखा, ‘स्टूडैंट्स मलबे के नीचे दबे हैं और स्थानीय लोग अपने हाथों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन का एक भी व्यक्ति नजर नहीं आ रहा. जब जिंदगी बचाने के लिए हर मिनट कीमती है, प्रशासन कहां है? यह सब कब तक चलता रहेगा?’
‘‘अभिजीत दीपके ने एक और पोस्ट में लिखा, ‘कल पीएम ने डीयू का दौरा किया, राजनीतिक भाषण दिया और ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी इस्तेमाल किया, जबकि उन्होंने हमारी शिक्षा व्यवस्था की खराब हालत के बारे में बहुत कम बात की. आज साउथ कैंपस में एक होस्टल की इमारत गिर गई है और आशंका है कि मलबे के नीचे स्टूडैंट फंसे हो सकते हैं. अभी तक कितने लोगों की जान गई है, इस की जानकारी नहीं है.’
‘‘उन्होंने आगे लिखा, ‘आखिर कब तक इस देश के स्टूडैंट को खराब व्यवस्था और लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ेगी? आदिवासी इलाकों में देखभाल और मदद की कमी के कारण आदिवासी स्टूडैंट की जान जा रही है और देश की राजधानी में पढ़ने वाले स्टूडैंट भी सुरक्षित नहीं हैं.’
‘‘आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘सत्य निकेतन में एक और इमारत गिर गई. यह डीयू के साउथ कैंपस के कालेज छात्रों के लिए पीजी आवास था. करीब 30-40 छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका है.’
‘‘उन्होंने आगे और तीखा लिखते हुए कहा, ‘एमसीडी के बिल्डिंग विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के ट्रांसफर की दर 1.25 करोड़ रुपए है, इसलिए यह रुकने वाला नहीं है. यह साकेत में इमारत गिरने जैसी ही कहानी है. आडिट के नाम पर एक बार फिर कारोबारियों, जिम, होटल और अस्पतालों से करोड़ों रुपए वसूले जाएंगे. कुछ भी नहीं बदलेगा,’’’
‘‘तुम सही कह रही हो. देश में घूसखोरी का कोई भी परमानैंट इलाज नहीं है. इस हादसे में घायल और मारे गए लोगों को मुआवजा दे दिया जाएगा. कार्रवाई के नाम पर कुछ लीपापोती हो जाएगी, और फिर सब ढर्रे पर चलने लगेगा. नेता लोगों को अपनी लुभावनी बातों में उल झाए रखेंगे और जनता यों ही पिसती रहेगी,’’ विजय बोला.
इतने में दूर से ड्राइवर किसी बाइक पर आता दिखा. उस के चेहरे की मुसकान बता रही थी कि टायर का पंचर लग गया है.
विजय और अनामिका ने राहत की सांस ली, पर सत्य निकेतन की खबर से उन दोनों का मन कसैला हो गया था. हलकीहलकी बौछार शुरू हो गई थी. News Story




