Hindi Suspense Story. थिंपू को घेरे हुए ‘दुंगशिंग गांग’ की ऊबड़खाबड़ चोटियों पर जिद्दी कोहरे ने रेंगना शुरू कर दिया था. सूरज ढलते ही पहाड़ों की लंबी और डरावनी परछाइयां ताशी पेनजोर के ‘शोंगखांग’ (जनरल स्टोर) पर पसरने लगीं.
ताशी का यह स्टोर जिले की बड़ी और रसूखदार जगहों में गिना जाता था. शाम ठंडी थी. ऐसी शाम जो आमतौर पर सकून लाती है, मगर आज हवा में एक अजीब सी भारी चुप्पी थी.
ताशी अपनी भारी लकड़ी की कुरसी पर बैठा था, जो दुकान के ठीक सामने मशहूर ‘मेटोग’ फूलों की दुकान के सामने रणनीतिक रूप से रखी गई थी. उस ने दिन का अखबार खोला. शांत दुकान में पन्नों की सरसराहट कुछ ज्यादा ही तेज सुनाई दे रही थी.
तभी उस की नजर एक ऐसी सुर्खी पर पड़ी जिस ने शरीर में ठंडी लहर दौड़ा दी, ‘अपर मोतीथांग में अवैध जुए के अड्डे पर पुलिस का छापा’.
खबर में विस्तार से लिखा था कि कैसे ‘रौयल भूटान पुलिस’ ने एक दोपहर दबिश दे कर 8,50,000 न्युल्ट्रम जब्त किए और 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया.
तभी फोन की तीखी बीप ने ताशी की एकाग्रता भंग कर दी. यह उस के दोस्त थिनले का संदेश था. वही थिनले, जो एक नामी लौटरी एजेंट था और जिसे सब की टोह लेने और गपशप करने की खतरनाक आदत थी.
‘ओ ताशी, वह जुआ वाला अड्डा पर पुलिस रेड मार दिया रे’ मोबाइल की स्क्रीन चमकी.
ताशी ने अपना बायां हाथ धीरे से फैलाया और पत्थर जैसे भावहीन चेहरे के साथ टाइप किया, ‘तो मैं क्या करूं?’
ताशी ने फिर अपना ध्यान ‘कुनसेल’ अखबार की खबर पर लगाया. रिपोर्ट अब और भी सटीक हो रही थी, ‘संदिग्धों में एक महिला वांगमो (40 साल) और 30 की उम्र के 5 मर्द शामिल हैं, जिन में से 4 आदतन अपराधी हैं.’
फिर बीप हुई. थिनले की जिद दांत के दर्द की तरह चुभने वाली थी, ‘वांगमो अभी पुलिस कस्टडी में है.’
ताशी के माथे पर बल पड़ गए. सीने में हलकी सी जकड़न महसूस हुई, पर चेहरा शांत रहा. उस ने चिढ़ कर जवाब भेजा, ‘इस से मेरा क्या लेनादेना? नो प्रौब्लम, खे मी.’
थिनले का जवाब बिजली की तरह आया, जैसे वह परदे के पीछे इंतजार ही कर रहा हो, ‘पिछला हफ्ता तुम तो उधर गया था न?’
ताशी ठिठक गया. दुकान के भीतर की परछाइयां और गहरी लगने लगीं. उसने टाइप किया, ‘हां, गया था, तो क्या हुआ? साला फालतू आदमी, तुम भी तो वही किया था. तुम्हारा प्रौब्लम क्या है? छोई गी कान्येल गाची मो (तुझे क्या तकलीफ है?)?’
‘तुम्हारा वांगमो के साथ झगड़ा नहीं हुआ था क्या?’ थिनले का अगला संदेश बिना किसी दोस्ताना लहजे के आया.
ताशी को बेचैनी महसूस होने लगी. उसे वह धुंधला कमरा, सस्ते तंबाकू और ‘के5’ व्हिस्की की गंध याद आई. उसे अपनी ही आवाज की वह चुभती हुई कड़वाहट याद आई जो उस रात निकली थी. अब सब्र का बांध टूटा तो उस ने थिनले को फोन ही लगा दिया, ‘‘अरे भाई, यह सब बोल कर क्या फायदा?’’ ताशी ने पूर्वोत्तर के लहजे में कहा, ‘‘अपुन तो खाली अपना फेवरेट ड्रिंक मांगा था. तुम को तो मालूम है न वह वांगमो कैसा औरत है, कैसा टेढ़ा बात करती है.’’
‘‘हां, मेरे को सब याद है,’’ थिनले ने दूसरी तरफ से कहा, ‘‘मेरे को वह सीन भी याद है जब तुम रिनचेन दोरजी को बोला था कि वह कार्ड्स में बेईमानी कर रहा है. तुम्हारा आवाज इतना जोर था कि बाकी लोग भी गरम हो गया था.’’
‘‘अरे, वह तो कुछ सीरियस नहीं था रे,’’ ताशी ने जवाब दिया, हालांकि उस के पैर ठंडे पड़ रहे थे, ‘‘अपुन लोग तो हमेशा ऐसा करता है न? गेम में ऐसा थोड़ाबहुत चिल्लाना तो चलता है.’’
थिनले का अगला जवाब किसी मौत के फरमान जैसा था, ‘‘लेकिन वांगमो ऐसा नहीं सोचती. तुम को याद है वह क्या बोला था? वह तुम्हारा आंख में आंख डाल कर फुसफुसाया था, ‘मैं तुम सब को देख लूंगी. मेरा लिंक बड़ेबड़े गुंडों के साथ है.’ उस टाइम वह मजाक नहीं कर रही थी ताशी.’’
ताशी का जबड़ा भिंच गया. उस ने कोई जवाब नहीं दिया. उस ने जबरदस्ती अपनी नजरें अखबार पर टिका दीं, पर शब्द पन्ने पर नाच रहे थे. उस की आंखें 2011 के दंड संहिता (संशोधन) अधिनियम पर टिक गईं. जुआ खेलना एक मामूली अपराध था… एक महीने से एक साल तक की जेल. लेकिन दोबारा अपराध करने वालों के लिए यह सजा 3 साल या उस से भी ज्यादा हो सकती थी.
थिंपू की सर्द हवाएं जब ताशी पेनजोर की दुकान के शटरों को ?ाक?ार रही थीं, तब उस के मन में बस एक ही डर कौंध रहा था. क्या वांगमो के वे ‘लिंक्स’ वरदीधारी पुलिस वालों के कान में उस का नाम फुसफुसा चुके होंगे? उस के हाथ में थमा अखबार अचानक किसी भारी पत्थर जैसा लगने लगा.
अगली सुबह घाटी को एक गाढ़े, चिपचिपे कोहरे ने अपने आगोश में ले लिया था, लेकिन यह कोहरा उन अफवाहों की आग को नहीं बु?ा सका जिस ने पूरे शहर को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था. एक नई सुर्खी उभरी थी, जिस ने पिछले दिन के छापे की खबर को भी फीका कर दिया, हिरासत में ली गई वांगमो का सौतेला भाई, रिनचेन दोरजी, शहर के बाहरी इलाके में एक सुनसान और जंग लगे गोदाम के पीछे मरा पाया गया था.
दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था. शरीर को इतनी बेरहमी से काटा गया था कि पहचानना नामुमकिन था. और सब से सिहरन पैदा करने वाली बात यह थी कि लाश का सिर पूरी तरह से गायब था.
ताशी पेनजोर अपने ‘शोंगखांग’ की मंद रोशनी में बैठा था और माथे पर ठंडी पट्टी दबाए हुए था. भोर से ही उस की कनपटी में एक न सहन होने वाली टीस मारता सिरदर्द जड़ जमा चुका था, जो दीवार घड़ी की टिकटिक के साथ ताल मिला रहा था. कांच के काउंटर पर रखे उस के फोन में कंपन हुआ. थिनले का संदेश था.
फोन उठाते ही थिनले की आवाज गूंजी, जिस में उस की पुरानी मजाक वाली रंगत गायब थी, ‘‘ओ ताशी, सुना क्या?’’ थिनले हांफते हुए बोला, ‘‘अरे बाबा, वह रिनचेन दोरजी. उस का बौडी मिला पुराना डिपो के पास, पूरा काट डाला है रे. और मारने वाला उस का मुंडी भी साथ ले गया, जैसे कोई ट्रौफी हो.’’
ताशी ने आंखें मूंद लीं, उस की आवाज फटी हुई सी निकली, ‘‘देख थिनले, आज अपुन का यह भूतप्रेत का कहानी सुनने का हिम्मत नहीं है. सिर ऐसा फट रहा है जैसे कोई कुल्हाड़ी मार रहा हो.’’
‘‘गा ची मो (क्या बोला?)?’’ थिनले फुसफुसाया, ‘‘भूत का कहानी नहीं है रे. पुलिस लोग पूरा सड़क पर उतरा है. वे लोग उस को ढूंढ़ रहा है जिस का भी वह फैमिली के साथ लफड़ा हुआ था. और पिछला हफ्ता तुम कैसे चिल्लाया था कार्ड्स को ले कर, सब लोग देखा है तुम को.’’
‘‘अरे, कार्ड्स खेलते वक्त तो सब चिल्लाता है न…’’ ताशी भड़क उठा, हालांकि उस की गरदन पर ठंडे पसीने की एक बूंद लुढ़क गई, ‘‘मेरे को अकेला छोड़ दे. बहुत हो गया तेरा. गोंग बोम मे (माफ कर दे भाई).’’
दोपहर के खाने के वक्त जब दुकान की टिमटिमाती रोशनी बरदाश्त से बाहर हो गई, तो ताशी अपने सहायक वांगदी के भरोसे दुकान छोड़ कर पास ही अपने घर चला गया. उसे लगा जैसे सड़कें पहले से संकरी हो गई हैं और राहगीरों की नजरें उस पर भारी पड़ रही हैं.
ताशी के जाने के कुछ ही देर बाद, एक डिलीवरी वाला, जिस का चेहरा टोपी के नीचे छिपा था, दुकान में दाखिल हुआ. उस ने तेल के धब्बों वाले भूरे कागज में लिपटा एक भारी, चौकोर पार्सल मुख्य काउंटर पर रख दिया, ‘‘तुम्हारा मालिक, पेनजोर ला के वास्ते है,’’ उस आदमी ने बुदबुदाते हुए कहा.
वांगदी एक ग्राहक में बिजी था, उस ने बस सिर हिला दिया, ‘‘उधर टेबल पर रख दे भाई. मालिक आएगा तो देख लेगा.’’
वह पार्सल चावल की बोरियों और कैरोसिन के डब्बों के बीच एक खामोश मेहमान की तरह रखा रहा. उस में से कुछ भी रिस नहीं रहा था, फिर भी उस से एक ऐसी ठंडक फूट रही थी जिस ने आसपास की हवा को बो?िल कर दिया था.
तीसरे पहर तक भारी जूतों की आहट लकड़ी के फर्श पर गूंजी. रौयल भूटान पुलिस के 2 अफसर पहुंचे, उन के चेहरों पर कत्ल की तफतीश की गंभीरता साफ ?ालक रही थी. उन्होंने वांगमो और उस के भाई से जुड़े हर शख्स से पूछताछ शुरू कर दी थी.
‘‘ताशी पेनजोर ला,’’ बड़े अफसर ने ताशी की आंखों में देखते हुए कहा, जो अभीअभी वापस लौटा था.
‘‘मालूम पड़ा है कि मोतीथांग वाले अड्डे पर तुम्हारा कुछ… अनबन हुआ था? मरने वाले के साथ तुम्हारा कोई बहसबाजी हुआ था क्या?’’
ताशी काउंटर का सहारा ले कर खड़ा हो गया, चेहरा पीला था पर आवाज स्थिर, ‘‘साहब, खेल में तो थोड़ाबहुत खटपट होता ही है न. गुस्से में आदमी क्याकुछ नहीं बोल देता. अभी तुम क्या एक इज्जतदार दुकानदार को यह खूनी खेल के लिए शक करेगा?’’
पुलिस वाले एक घंटे तक गिद्धों की तरह सवाल घुमाते रहे, मगर ताशी के जवाब किसी तराशे हुए पत्थर की तरह चिकने और अभेद्य थे. उन्हें उस की बातों में कोई दरार नहीं मिली. जब वे जाने के लिए मुड़े, तो बड़े अफसर की नजर साइड टेबल पर रखे उस भूरे कागज वाले पार्सल पर पड़ी, ‘‘नया माल आया क्या?’’ उस ने सहज भाव से पूछा.
‘‘हां, साहब,’’ ताशी ने जवाब दिया, उस का दिल अचानक किसी कैद परिंदे की तरह पसलियों से टकराने लगा था.
दरवाजा बंद हुआ और ताशी उस पार्सल के साथ अकेला रह गया. सिरदर्द फिर से तेजी से उभरा था और दुकान में अब ऐसी खामोश पसरी थी जो किसी भारी बो?ा जैसी महसूस हो रही थी.
सूरज पहाड़ों की काली लकीरों के पीछे डूब चुका था, जिस से ‘शोंगखांग’ के भीतर एक अजीब सी खौफनाक उदासी पसर गई थी. ताशी पेनजोर उस पार्सल के ऊपर ?ाका हुआ था, उस की आंखों में गहरी चिड़चिड़ाहट और शक के बादल थे. दुकान की टिमटिमाती ट्यूबलाइट के नीचे वह तेल के धब्बों वाला भूरा कागज जैसे धड़कता हुआ महसूस हो रहा था.
‘‘यह कौन ले कर आया रे,’’ ताशी की आवाज धीमी पर तीखी थी, जिस ने दुकान के सन्नाटे को चीर दिया.
वांगदी ने बहीखाते से सिर उठाया, उस का चेहरा पीला पड़ चुका था, ‘‘वह एक डिलीवरी वाला आया था पेनजोर ला. उस ने अपना नाम ‘सिंग्ये पासांग’ बताया था शायद.’’
वह नाम ठंडी धुंध की तरह हवा में तैरने लगा. ताशी की उंगलियां कांप रही थीं जब उस ने थिनले को मैसेज करने के लिए फोन निकाला.
‘सिंग्ये पासांग कौन है?’
जवाब तुरंत आया, ‘अपुन को नहीं मालूम.’
ताशी की नब्ज तेज हो गई, उस ने वापस टाइप किया, ‘वांगमो का कोई गुंडा लोग है क्या यह नाम का? मेरे को पक्का यकीन है, एकदम पक्का कि इस पार्सल के अंदर क्या है.’
रिनचेन दोरजी के बिना सिर वाले धड़ की याद उस की आंखों के सामने बिजली की तरह कौंधी. उसे उस भारी पैकिंग के भीतर से खून की लोहे जैसी गंध महसूस होने लगी. कनपटी की टीस अब एक ठंडे और गहरे खौफ में बदल चुकी थी. उस ने तुरंत थिनले और अपने सा?ा दोस्त न्गावांग को एक गंभीर चर्चा के लिए अपने घर बुलाया.
जब वे पहुंचे, तो ताशी अपनी बैठक के अंधेरे कोने में बैठा था. वह पार्सल उन के बीच एक छोटे मेज पर किसी जिंदा बम की तरह रखा था.
‘‘अरे खोल कर देख न ताशी,’’ न्गावांग फुसफुसाया, हालांकि उस ने खुद उसे छूने की हिम्मत नहीं की.
‘‘हो सकता है कोई तुम से मजाक कर रहा हो.’’
‘‘नहीं,’’ ताशी की आवाज किसी अनजाने डर से भारी हो गई थी. एक ही दोपहर में उस का चेहरा दस साल बूढ़ा लगने लगा था. लकीरें खिंची हुईं और आंखें दहशत से फटी हुई थीं.
‘‘अगर अपुन ने इस को खोला, तो मैं इस डरावने सपने का गवाह बन जाएगा. और अगर पुलिस ने मेरे को इस के साथ पकड़ लिया… जो मेरे को लगता है इस के अंदर है… तो फिर कोई सुनवाई नहीं होगा, सीधा ‘फोर्थ डिगरी’ का सजा मिलेगा.’’
आखिरकार, वे एक खौफनाक सहमति पर पहुंचे. वे इस के अंदर नहीं देखेंगे. वे इस पार्सल को हमेशा के लिए कहीं दफन कर देंगे.
आधी रात के काले साए में, तीनों आदमी गाड़ी ले कर नदी की ओर चल दिए. कार की हैडलाइट्स पहाड़ के घुमावदार कोहरे को चीर रही थीं. वे किसी साजिश करने वाले की तरह हिल रहे थे, कड़ाके की ठंड में उन की सांसें धुएं की तरह निकल रही थीं. पुल पर पहुंच कर उन्होंने एक मोटे औद्योगिक रस्से से पार्सल को एक भारी पत्थर के साथ बांध दिया.
सब ने मिल कर जोर लगाया और उसे शून्य में उछाल दिया. एक दबी हुई आवाज के साथ वह पार्सल नदी के गहरे और उफनते पानी में समा गया.
घर लौट कर ताशी पेनजोर अपनी कुरसी पर ढह गया और एक लंबी, कंपकंपाती हुई राहत की सांस ली. वह बो?ा, जो 2 दिनों से उस के सीने को कुचल रहा था, आखिरकार नदी की गहराई में समा गया था.
अगली दोपहर थिंपू की हवा कुछ हलकी महसूस हो रही थी, मानो नदी ने न केवल उस पार्सल को, बल्कि पिछले दिनों के उस डरावने माहौल को भी निगल लिया हो.
ताशी पेनजोर के चेहरे की रौनक लौटने लगी थी. उस ने अपनी इलैक्ट्रौनिक की दुकान चलाने वाले पुराने दोस्त दावा वांगचुक से मिलने का मन बनाया.
दावा वांगचुक की दुकान मशीनों की गुनगुनाहट और अमीर ग्राहकों की खास महक से भरी एक सुरक्षित पनाहगाह जैसी थी. ताशी और दावा के बीच करीब एक घंटे तक दिल खोल कर बातें हुईं, आयात की बढ़ती कीमतों से ले कर पहाड़ों के दर्रों पर पिघलती बर्फ और वसंत की खूबसूरती तक. यह वैसी ही बातचीत थी जो किसी भी इनसान को उस की साधारण और सुकून भरी दुनिया से वापस जोड़ देती है.
ज ब ताशी जाने के लिए खड़ा हुआ और एक नए जोश के साथ अपना पारंपरिक ‘घो’ ठीक करने लगा, तभी दावा कांच के काउंटर पर थोड़ा ?ाकते हुए बोला, ‘‘अरे, रुकोरुको पेनजोर ला,’’ दावा को अचानक कुछ याद आया, ‘‘मैं पूछने ही वाला था, तुम को वह नया वाला ‘सैमसंग’ म्यूजिक सिस्टम मिल गया न? कुछ हफ्ता पहले तुम कितना पीछे पड़ा था उस के लिए.’’
ताशी जैसे वहीं जम गया. पिछले चौबीस घंटों में उस ने शांति का जो महल बड़ी मुश्किल से खड़ा किया था, वह.एक ?ाटके में कांच के आईने की तरह चकनाचूर हो गया. कनपटी की वह पुरानी टीस पहले से कहीं ज़्यादा तेजी से वापस लौटी.
‘‘वह… म्यूजिक सिस्टम?’’ ताशी की आवाज किसी मुरदे जैसी निकली, ‘‘तुम्हारा मतलब है… कोई पार्सल?’’
‘‘हां भाई, वही. अब तुम अपना मनपसंद गाना ब्लूटूथ लगा कर बजा सकता है, जैसा तुम को मांगता था. तुम भूल कैसे गया रे? तुम ही तो बोला था कि तुम्हारा ब्रांड न्यू सैमसंग सिस्टम सैट करने को,’’ दावा एक मददगार मुसकान के साथ बोला. वह इस बात से पूरी तरह अनजान था कि उस के दोस्त के चेहरे पर दहशत की कितनी गहरी परछाईं उतर आई है.
दावा कहता रहा, ‘‘माल कल सुबह ही पहुंचा. मेरा एक नया कामगार लड़का है, गांव से आया है, उसी को बोला था लंच टाइम पर तुम्हारा दुकान पर दे आने को. मैं ने उस को बोला था कि यह स्पैशल और्डर है.’’
ताशी पेनजोर पत्थर का बुत बना खड़ा रहा. उस की आंखों के सामने उस काली गहरी नदी, भारी पत्थर और एलईडी फिटेड साइनबोर्ड्स के मंजर घूमने लगे. उसे तेल के धब्बों वाला वह भूरा कागज याद आया और उस का वो अटूट विश्वास… कि वह रिनचेन दोरजी का कटा हुआ सिर ठिकाने लगा रहा है.
‘‘अच्छा वह लड़का…’’ ताशी फुसफुसाया, उस की आंखें फटी की फटी रह गईं, ‘‘लड़के का नाम क्या है?’’
‘‘अरे, वह तो सीधासादा बच्चा है…’’ दावा ने अपनी ठुड्डी खुजलाते हुए कहा, ‘‘नाम जान कर क्या करेगा? पर तुम इतना पीला क्यों दिख रहा है भाई?’’
ताशी पेनजोर ने कोई जवाब नहीं दिया. वह दरवाजे की ओर मुड़ा, उस के होंठ धीरेधीरे हिल रहे थे, ‘‘वह वांगदी… बेवकूफ. ओह वांगदी. दुकान के शोरशराबे में उस लड़के ने ‘सैमसंग’ बोला होगा और इस गधे ने ‘सिंग्ये पासांग’ सुन लिया.’’
ताशी ने खाली सड़क की ओर देखा, जहां दूर कहीं नदी के बहने का शोर सुनाई दे रहा था. थिंपू घाटी की गहराइयों में कहीं एक ब्रांड न्यू म्यूजिक सिस्टम हमेशाहमेशा के लिए दफन हो चुका था. Hindi Suspense Story
–गौतम भट्टाचार्य




