Hindi Fiction Story. बिरजी अपने पति के साथ सड़क पर चनाभूजा का ठेला लगाती थी. तभी वहां फास्ट फूड का एक नया ठेला लगा, जिस से बिरजी का धंधा कम हो गया. उस ने नए ठेले वाले को अपनी जवानी से लुभाना चाहा. आगे क्या हुआ?

बि ‘टार्जन, ओ माई टार्जन

आजा मैं सिखा दूं

तुझे प्यार कैसे हो…

ओ ओ ओ…’

रजी ने मोबाइल की स्क्रीन पर देखा कि लाल रंग की ब्रा और लाल रंग की ही मिनी स्कर्ट पहने हुए किमी काटकर बहुत कामुक अंदाज में टार्जन बने फिल्मी हीरो हेमंत बिरजे के विशाल कसरती सीने को सहला रही थी और टार्जन भी किमी काटकर के चिकने बदन को सहलासहला कर चूम रहा था.

मोबाइल पर रील के रूप में आए हुए इस सैक्सी सीन को बिरजी ने बारबार देखा और इस कामुक सीन को देख कर बिरजी भी कामुकता से भर गई थी और उस का मन जोरदार सैक्स करने को करने लगा था.

बिरजी ने पास में सोते हुए अपने पति पर नजर डाली जो कि गहरी नींद में था. बिरजी ने फिर बिस्तर के पास जमीन पर नजर डाली जहां उस का भतीजा रंजीत सो रहा था, पर बिरजी का मन तो जोश से भर गया था, इसलिए वह अपने पति जीवनराम के सीने को सहला कर उसे जगाने की कोशिश करने लगी.

बिरजी के पति का सीना टार्जन की तरह तो बिलकुल नहीं था, बल्कि एकदम सपाट सा था. बिरजी जीवनराम के कानों को अपने होंठों से चूम रही थी.

पत्नी के द्वारा शरीर को सहलाए जाने के कारण जीवनराम की आंख तो खुल गई पर वह लेटा ही रहा. वैसे भी जीवनराम स्वभाव से ज्यादा औरतखोर नही था. सैक्स करने के लिए जीवनराम कभी भी पहल भी नहीं करता था और फिर नींद में होने के चलते उस का शरीर सैक्स के लिए तैयार भी नही था, इसलिए बिरजी ने ही मोरचा संभालने की बात सोची और अपनी साड़ी को घुटनों तक चढ़ा कर जीवनराम के ऊपर बैठ गई और जीवनराम के शरीर को अपने शरीर से कस कर सटा लिया.

सीत्कार कर उठी थी बिरजी और फिर वह अपनी कमर धीरेधीरे चलाने लगी. जीवनराम शांत लेटा रहा, पर कुछ देर बाद ही बिरजी कुछ ज्यादा ही कामुक हो गई थी और उस के मुंह से फुसफुसाहट भी निकलने लगी थी.

जीवनराम को थोड़ा अच्छा लग रहा था. वह और बिरजी सैक्स में लीन हुए ही थे कि बिस्तर के पास ही लेटे हुए रंजीत ने करवट ली तो बिरजी को लगा कि उस का भतीजा जाग गया है और वह तुरंत ही अपने पति के ऊपर से झुंझलाते हुए हट गई और चुपचाप सोने का बहाना करने लगी. उस का मूड बिगड़ गया.

आज भी बिरजी जोरदार सैक्स करने में नाकाम रही थी और यह पहली बार नहीं हुआ था. इस से पहले भी बिरजी और जीवनराम खुल कर सैक्स नही कर पाते थे, क्योंकि वे लोग एक किराए के एक छोटे से कमरे में रहते थे, जिस में एक चारपाई बामुश्किल ही पड़ पाती थी और उस में भी जीवनराम के बड़े भाई का बेटा रंजीत गांव से इन लोगों के पास रहने के लिए आ गया था, इसलिए उस को जमीन पर ही सोना पड़ता था.

भतीजे रंजीत के पास ही में सोने के चलते उन्हें सैक्स करने का मौका देख कर उठाना पड़ता था, नहीं तो भतीजे के द्वारा देख लिए जाने का खतरा लगा रहता था. जीवनराम और बिरजी का सैक्स भी ज्यादा मजेदार नहीं रह गया था, बल्कि एक जल्दी से निबटाने वाले किसी काम की तरह था.

बिरजी सुबह उठी तो उस का मन सैक्स पूरा न हो पाने के कारण झुंझलाहट से भरा हुआ था. उस ने आईने में अपना चेहरा देखा. भले ही थोड़ी थकावट थी उस के चेहरे पर, लेकिन एक गजब का आकर्षण था. 30 साल की उम्र वाली और सांवले रंग की बिरजी एक लंबे कद की औरत थी.

बिरजी का कसावट भरा सीना उस की खूबसूरती में चार चांद लगाता था और जब बिरजी अपने सांवले पेट पर नाभि के नीचे साड़ी बांधती तो देखने वाले आहें भरने लगते थे.

एक तरफ जहां बिरजी एक भरेपूरे जिस्म की मालकिन थी, वहीं दूसरी तरफ जीवनराम साढ़े 4 फुट का कमजोर सा आदमी था, जिस के चेहरे पर हमेशा ही एक लाचारी का भाव रहता था.

बिरजी और जीवनराम अपने कसबे से शहर जाने वाली रोड पर लइया चना, रामदाना भूजा और पानी की बोतल आदि का ठेला लगाते थे. आतीजाती बसें और ट्रक वाले कसबे की इस जगह पर रुकते और भूखेप्यासे मुसाफिर जीवनराम के ठेले से चीजें खरीद कर खाते थे.

बिरजी का रोल मुसाफिरों को अपनी तरफ खींचने में अहम हो जाता था. जैसे ही वह किसी बस को आते हुए देखती तो अपनी साड़ी का पल्ला जरा सा खिसका देती, जिस से उस के सीने की गोलाइया हलकी सी दिखाई देने लगतीं और कुछ मुसाफिर बिरजी के जिस्म को घूरने के बहाने उस के ठेले से काफीकुछ खरीद लेते थे.

बिरजी इन लोगों से हंसते हुए कुछ भद्दे मजाक भी करती थी, जिस से इन मुसाफिरों को और भी मजा आता था. जीवनराम को बिरजी की इन बातों पर कोई एतराज नही होता था, क्योंकि वह जानता था ये सब लटकेझटके धंधे को चलाने के लिए जरूरी हैं और फिर धंधा तो ठीक ही चल रहा था.

पर एक दिन तब सबकुछ ठहर गया जब अचानक कहीं से एक चमचमाता हुआ ठेला आया और बिरजी के ठेले से कुछ दूरी पर खड़ा हो गया.

बिरजी ने देखा कि ठेला स्टील के फ्रेम का बना हुआ था और इस पर एक मजबूत बदन का आदमी खड़ा हुआ था जो शायद इस ठेले मालिक था.

इस आदमी की शक्ल कुछकुछ नेपाल के आदमियों की तरह थी और इस के ठेले पर फ्रैंच फ्राइज, मोमो, चाऊमीन जैसा फास्ट फूड रखा हुआ था.

आज भी बस रुकी. कुछ मुसाफिर तो बिरजी के पास पहुंचे, पर ज्यादातर मुसाफिरों ने चनाभूजा खरीदने के बजाय एक साफसुथरे और नए चमकते ठेले से फास्ट फूड खरीद कर अपनी भूख मिटाना ज्यादा ठीक समझा.

2-4 दिन तो बिरजी ने इंतजार  किया पर फिर उसे लगने लगा कि बस और ट्रक में आने वाले लोग अब चना और भूजा खाने के बजाय उस नेपाली आदमी के पास से फास्ट फूड लेते हैं, जिस से उस की आमदनी लगातार घटती जा रही थी.

‘‘हमारा चनाभूजा तो बहुत फायदेमंद है, फिर भी लोग मैदे से बना फास्ट फूड बड़े चाव से खाते हैं. ऐसा ही रहा तो हमारा रोजगार तो खत्म ही हो जाएगा,’’ यह कहते हुए जीवनराम के चेहरे पर जमानेभर की उदासी थी.

पति की बात सुन कर बिरजी भी कुछ न कह सकी. उस के दिमाग में ढेर सारे विचार एकसाथ चल रहे थे.

बिरजी ने सोचा कि कोई ऐसा कायदाकानून तो था नहीं जो उस नेपाली से लगने वाले आदमी को उस जगह पर ठेला लगाने से रोक सके या फिर अगर बिरजी ही उस आदमी से यहां से चले जाने को कहती है, तो भी भला वह क्यों चला जाएगा?

अब तो बिरजी को त्रिया चरित्र का सहारा ले कर ही उस आदमी को यहां से हटाना होगा, पर वह फास्ट फूड वाला भी तो यह जानता है कि चनाभूजा लगाने वाले लोग उसे किसी तरह के जाल में फंसा सकते हैं, इसलिए वह भी तो अलर्ट होगा और उसे किसी तरह के जाल में फंसाना भी आसान नहीं होगा.

बिरजी लगातार सोचे जा रही थी, फिर आखिरकार उस के चेहरे पर हलकी सी चमक उभरी जो यह बता रही थी कि उसे कोई आइडिया मिल गया है.

अगले दिन सुबह तकरीबन दिन के 11 बजे बिरजी अकेले ही बस रुकने वाली जगह पर पहुंची. इस समय उस के बाल बिखरे और कपड़े बिखरे हुए थे.

वह उस नेपाली आदमी, जिस का नाम सूरज था, के ठेले के आसपास घूमने लगी. वह बारबार परेशानी दिखाते हुए मोबाइल अपने कानों से लगा लेती थी और किसी से बातचीत का नाटक कर रही थी.

बिरजी को बारबार ऐसा करते देख कर आखिरकार सूरज ने पूछ ही लिया, ‘‘अरे, क्या बात है? क्यों परेशान लग रही हो? और आज तुम लोगों का चनाभूजा वाला ठेला कहां है?’’ थोड़ा मसखरापन था सूरज के शब्दों में.

बिरजी को तो मानो इसी बात का इंतजार था. वह तुरंत ही सूरज के पास पहुंच गई और उस से अपनापन दिखाते हुए बताने लगी कि उस का पति बिरजी के शरीर की ज्यादा लंबाई के लिए उसे ताने देता है और वह खुद छोटे कद की औरतों को ही पसंद करता है और उस का चक्कर बगल वाली औरत के साथ चल रहा है, जिसे आज ही बिरजी ने रंगे हाथ पकड़ लिया है और पकड़े जाने पर उस का मर्द उलटा सीनाजोरी कर रहा था और बिरजी के मरद ने उस के साथ मारपीट भी की है.

यह सब बड़ी जल्दी से सुना डाला था बिरजी ने, जिस से सूरज के चेहरे पर थोड़ी नरमी झलकने लगी थी, ‘‘कोई बात नहीं. तुम घबराओ मत. कभी किसी मदद की जरूरत हो तो मुझे बेझिझक बताना,’’ सूरज ने बिरजी को दिलासा देते हुए कहा.

बिरजी मन ही मन खुश हो गई थी कि उस का तीर ठीक निशाने पर जा कर लगा है.

उस दिन के बाद बिरजी ही अकेले ठेला लाती और शाम तक अकेले ही बिक्री का काम करती. जब उस के ठेले पर कोई कस्टमर नहीं होता तो वह सूरज के पास जा कर उस के ठेले पर कुछ देर खड़ी रहती और कभीकभी तो उस का हाथ भी बंटाने लगती.

सूरज को इस तरह से बिरजी के द्वारा काम में हाथ बंटाना बहुत अच्छा लग रहा था. उस ने बिरजी को मोमो खाने को दिए तो बिरजी ने बड़े चाव से खाए और इसे बनाने की विधि पूछी तो सूरज ने उसे बताया कि इसे बनाने का तरीका जानने के लिए तो बिरजी को उस के घर आ कर सूरज की पत्नी से मिलना पड़ेगा, क्योंकि सूरज की पत्नी ही मोमो बनाती है. यह बात सुन कर बिरजी सिर्फ मुसकरा दी.

अब जितना भी लइयाचना और भूजा बिरजी अपने ठेले पर ले कर आती थी उस में से ज्यादा बिक्री न हो पाने के कारण वापस ले जाना पड़ता था, पर बिरजी निराश नहीं थी. वह जानती थी कि एक न एक दिन वह सबकुछ सही कर लेगी.

एक दिन की बात है. सूरज की बिक्री ठीकठाक ढंग से हो रही थी. तभी अचानक से आसमान में बेमौसम बादल घिर आए और जोर की बरसात शुरू हो गई.

इस बारिश के लिए सूरज या बिरजी ने कोई तैयारी तो की नहीं थी, बस सूरज के पास एक बड़ा सा तिरपाल टाइप का कवर था जिस से उस ने अपने ठेले को ढक दिया और खुद को भीगने से बचाने के लिए कुछ ही दूरी पर बने एक पुराने से खंडहरनुमा प्राइमरी स्कूल में जाने लगा. उस के पीछेपीछे बिरजी भी भाग चली थी.

दोनों ने उस स्कूल में जा कर ही सांस ली. दोनों चुपचाप खड़े थे. बारिश तेज थी. सूरज की नजर बिरजी के सीने पर जा कर चिपक गई थी. सांवला मांसल बदन पानी में भीगने के बाद और भी सैक्सी लगने लगा था.

सूरज ने देखा कि बिरजी की साड़ी भीगने के बाद उस की कमर से चिपक गई थी और बिरजी की गहरी नाभि के अंदर पानी की बूंदें ढुलक कर जा रही थीं.

इस समय बिरजी बहुत ही खूबसूरत लग रही थी. सूरज ने कुछ नहीं कहा, बल्कि अपनी नजरें हटाते हुए वहीं जमीन पर बैठ गया. बिरजी भी सूरज के पास में ही चिपक कर बैठ गई. बीचबीच में सूरज बिरजी के जिस्म को जीभर कर घूर लेता था.

‘‘इस तरह चोरों की तरह क्या देख रहे हो? साफसाफ बोल दो न क्या चाहते हो?’’ हवस भरे अंदाज में बिरजी ने कहा तो सूरज ने अपनी नजरें सीधे बिरजी के सीने पर गड़ाए रखीं.

बिरजी को तो इसी पल का इंतजार था. उस ने अपने होंठ सूरज के होंठों से सटा दिए और दोनों की सांस एकदूसरे से घुलने लगी.

सूरज भी जोशीला हो गया था. उस के हाथ बिरजी के भीगे बदन पर फिसल रहे थे. बारिश की रफ्तार तेज हो गई थी. दूरदूर तक कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था. इसी बीच सूरज ने हौले से बिरजी को नीचे लिटा दिया और उस के कपड़े हटाते हुए उस में समा गया.

बिरजी ने विरोध जताया और कसमसाने लगी. वह लगातार बोले जा रही थी, ‘‘नहीं, छोड़ दो मुझे. ऐसा मत करो. छोड़ दो मुझे.’’

सूरज पर हवस का भूत सवार था. उस ने सोचा कि बिरजी इंगलिश फिल्म की हीरोइनों की तरह जबरदस्ती का नाटक कर रही है, इसलिए वह नहीं रुका और कुछ देर बाद निढाल हो कर बिरजी के सीने पर ही ढेर हो गया.

बिरजी ने तुरंत ही सूरज को धक्का दिया, अपने कपड़े सही किए और तेज बारिश में ही वहां से भाग खड़ी हुई.

सूरज को कुछ समझ नहीं आया था, पर इस बात से उसे क्या… वह तो बिरजी के कसावट भरे जिस्म के मजे लेने के बाद अभी तक ढीला पड़ा हुआ था और आनंद के सागर में गोते लगा रहा था.

अगले दिन मौसम साफ हो चुका था. सूरज के ठेले पर बिक्री तेजी से हो रही थी, पर बिरजी का ठेला अभी तक नहीं आया था. सूरज बारबार बिरजी के आने की दिशा में देखता था, पर निराशा ही हाथ लगती थी.

आखिरकार शाम के समय बिरजी आती दिखाई दी. पर उस के साथ कोई नहीं था. न ही उस का पति और न ही उस का ठेला.

सूरज अभी भी ग्राहकों में बिजी था. थोड़ी देर बाद जब भीड़ कम हुई तो उस ने बिरजी को मोमो की एक प्लेट थमाई और खुद भी एक प्लेट में मोमो ले कर खाने लगा.

‘‘तुम कहते हो कि इन्हें बनाने का तरीका जानने के लिए मुझे तुम्हारे घर आना पड़ेगा, तो सुन लो मैं तुम्हारी बीवी से मिलने आऊंगी जरूर, पर इस के साथ,’’ यह कहते हुए बिरजी ने अपने मोबाइल से सूरज के मोबाइल पर एक वीडियो मैसेज के रूप में भेजा.

बिरजी ने इशारे से सूरज को वह  मैसेज देखने को कहा तो सूरज ने जल्दी से अपने मोबाइल को खोला और मैसेज देखने लगा. उस की आंखें फटी रह गईं.

यह तो बारिश के दिन वाला वीडियो था. इस वीडियो में सूरज बिरजी के अधनंगे बदन पर सवार था और बिरजी लगातार चिल्ला रही थी.

‘‘तुम ने चुपके से वीडियो बना लिया, पर क्यों? इसे डिलीट कर दो बिरजी. इस से हमारी फजीहत हो सकती है,’’ सूरज बोला.

बिरजी ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘असली फजीहत तो तब होगी जब यह वीडियो पुलिस के पास जाएगा और तुझ पर रेप का आरोप लगेगा. फिर यह वीडियो तेरी पत्नी के पास जाएगा. कुलमिला कर तेरा धंधा और जिंदगी दोनों बरबाद हो जाएंगे.’’

बिरजी ने देखा कि सूरज बुरी तरह से घबरा रहा था. उस के माथे पर पसीने की बूंदें उभर आई थीं, ‘‘ऐसा मत करो. तुम कुछ पैसे ले लो और यह वीडियो पुलिस को मत देना. मेरी बीवी को भी यह वीडियो मत दिखाना.’’

बिरजी ने सूरज को धमकाते हुए कहा ‘‘यह सब एक औरत के जिस्म से खेलने से पहले सोचना चाहिए था. अब गिड़गिड़ाने से क्या फायदा?’’

‘‘मुझे माफ कर दो. तुम क्या चाहती हो?’’ सूरज बोला.

बिरजी ने एक गहरी सांस ली और सूरज को बताया, ‘‘जब से तुम ने फास्ट फूड का ठेला लगाना शुरू किया था, तब से हमारा धंधा ठप पड़ गया था और रोजीरोटी के भी लाले पड़ गए, इसलिए मैं चाहती हूं कि तुम अपना ठेला किसी दूसरी जगह लगा लो. मेरे अब तक के नुकसान की भरपाई के 30,000 रुपए दो, नहीं तो यह वीडियो पुलिस के पास जाने में देर नहीं लगेगी.’’

सूरज अब तक समझ चुका था कि किस तरह से बिरजी ने उसे अपना शिकार बनाया है, पर अब सूरज के पास बिरजी को पैसे देने और यहां से चले जाने के अलावा और कोई चारा नहीं था, इसलिए उस ने 1-2 दिन में पैसे देने की बात कही और जल्द से जल्द यह जगह छोड़ कर चले जाने के लिए हामी भी भर ली.

एक हफ्ते के बाद फिर से आसमान में बादल घिर आए थे और हलकी बारिश शुरू हो गई थी, पर बिरजी ने अपना ठेला लगाए रखा था, क्योंकि अब उस के पास एक बड़ा सा तिरपाल था, जिसे फैला लेने पर बारिश की एक भी बूंद अंदर नहीं आ सकती थी.

और वैसे भी उसे अब सूरज के फास्ट फूड के ठेले से डरने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि अब सूरज यह जगह छोड़ कर न जाने कहां चला गया था.

जाने से पहले वह बिरजी को पूरे 30,000 रुपए दे कर गया था, ताकि बिरजी उसे ब्लैकमेल करना छोड़ दे और वह वीडियो डिलीट कर दे, पर बिरजी ने वह वीडियो अपने मोबाइल में छिपा कर स्टोर कर रखा था. क्या पता कब उस की जरूरत पड़ जाए…

उस रात जब दिनभर के काम से थक कर बिरजी और उस का मरद जीवनराम चारपाई पर लेटे थे और उन का भतीजा रंजीत नीचे जमीन पर सो रहा था.

तभी जीवनराम से सवाल पूछा, ‘‘यह समझ नहीं आया कि अचानक से सूरज अपना जमाजमाया फास्ट फूड का धंधा छोड़ कर क्यों और कहां चला गया?’’

अपने मरद की बात सुन कर बिरजी के चेहरे पर ऐसी मुसकराहट थिरक उठी, जिस का मतलब सिर्फ वही जान सकती थी.

बिरजी ने अपना सिर जीवनराम के सीने पर टिका दिया और अपने मरद के जिस्म को कामुक अंदाज में सहलाने लगी फिर मादक स्टाइल में कहने लगी, ‘‘तुम तो आराम से आम खाओ, पेड़ गिनना छोड़ दो. इस सब काम के लिए तो बिरजी ही काफी है. बिरजी आम खाना भी जानती है और गुठलियों के दाम भी जानती है.’’  Hindi Fiction Story

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