Bhojpuri Cinema. भोजपुरी सिनेमा को ले कर पिछले कुछ समय से एक सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या दर्शक अब अच्छी कहानी और पारिवारिक भावनाओं वाली फिल्मों को स्वीकार करेंगे?
एसआरके म्यूजिक की फिल्म ‘प्रेम विवाह’ इस सवाल का जवाब काफी मजबूती से देती है. YouTube पर रिलीज के महज 4 दिनों में 30 लाख व्यूज का आंकड़ा पार करना सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि भोजपुरी दर्शकों की बदलती पसंद का संकेत भी है.
फिल्म यह बताती है कि दर्शक को अगर उस की भाषा, उसकी संस्कृति, उस के परिवार और उस के रिश्तों से जुड़ी कहानी ईमानदारी से दी जाए तो वह उसे अपना बनाने में देर नहीं करता.
कल्लू का ‘प्रेम’—नैचुरल अभिनय और सहज अंदाज
फिल्म में अरविंद अकेला कल्लू ने प्रेम का किरदार निभाया है. कल्लू की सब से बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने किरदार को जरूरत से ज्यादा अभिनय करने के बजाय अपने सहज और नैचुरल अंदाज में जिया है.
संयुक्त परिवार में रहने वाले प्रेम की शादी के लिए रोज लड़कियों की तसवीरें आती हैं. परिवार चाहता है कि प्रेम की शादी पारंपरिक तरीके से तय हो जाए. लेकिन कहानी उस समय दिलचस्प मोड़ लेती है, जब प्रेम की मुलाकात काजल राघवानी के किरदार से होती है और पहली नजर में ही दोनों के बीच प्रेम की शुरुआत हो जाती है.
कल्लू ने प्रेम के किरदार में प्रेम, उलझन, हास्य और भावनाओं के अलगअलग रंगों को सहजता से प्रस्तुत किया है. उन का अभिनय फिल्म को बोझिल नहीं होने देता.
काजल राघवानी—सिर्फ प्रेमिका नहीं, कहानी का मजबूत किरदार
काजल राघवानी का किरदार फिल्म की कहानी को एक अलग दिशा देता है. वह पढ़ीलिखी और नौकरी करने वाली युवती है, जिस की अपनी सोच और आत्मसम्मान है.
कहानी में जब प्रेम के परिवार की महिलाएं शादी के लिए काजल के घर पहुंचती हैं और रिश्ता लगभग तय हो जाता है, तब एक छोटी सी बात बड़ा विवाद पैदा कर देती है. घर के काम को ले कर काजल का स्पष्ट रुख संयुक्त परिवार की पारंपरिक अपेक्षाओं से टकराता है.
काजल का सवाल सिर्फ काम करने या न करने का नहीं है. उस के संवाद के पीछे यह सवाल भी है कि शादी के बाद लड़की को केवल घर संभालने वाली बहू के रूप में देखा जाएगा या उस की अपनी पहचान और नौकरी का भी सम्मान होगा? यहीं फिल्म मनोरंजन के साथ एक सामाजिक सवाल भी खड़ा करती है.
4 सास और 4 ननद वाला परिवार, लेकिन कहानी सिर्फ मजाक नहीं
फिल्म में संयुक्त परिवार को जिस तरह दिखाया गया है, वह इस की सबसे खास बातों में से एक है. एक तरफ परिवार में 4 सास और 4 ननदों की मौजूदगी है, दूसरी तरफ प्रेम और सौहार्द भी है.
काजल का परिवार में आने से पहले ही यह सवाल उठाना कि वह केवल घर का काम करने के लिए बहू बन कर नहीं आ रही, कहानी में एक दिलचस्प टकराव पैदा करता है.
काजल प्रेम को भी उस के निठल्लेपन के लिए ताना देती है. यही छोटेछोटे संवाद फिल्म में हास्य पैदा करते हैं और दर्शकों को लगातार मनोरंजन देते हैं.

संजय पांडे ने निभाई जिम्मेदार पिता की भूमिका
काजल के पिता के किरदार में संजय पांडे ने प्रभावशाली काम किया है. वे बेटी की भावनाओं को समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन साथ ही चाहते हैं कि उन की बेटी ऐसे परिवार में जाए जहां रिश्तों की गरमाहट बनी रहे. वे काजल की शादी संयुक्त परिवार में इसलिए करना चाहते हैं ताकि बेटी भविष्य में अकेलेपन का शिकार न हो. लेकिन काजल के मन में कंचन नाम की लड़की से जुड़ी एक गलतफहमी घर कर चुकी है, जो आगे चल कर रिश्ते में बड़ी बाधा बनती है. यहीं से कहानी केवल प्रेमीप्रेमिका की कहानी न रह कर परिवार और रिश्तों की कहानी बन जाती है.
एक शादी टूटती है और पूरा परिवार बिखर जाता है
काजल के घर वालों और प्रेम के परिवार के बीच शादी को ले कर बात बिगड़ती है और रिश्ता टूट जाता है. लेकिन कहानी का असली असर इस के बाद सामने आता है.
शादी टूटने के बाद परिवार की महिलाएं आपस में उलझने लगती हैं और देखते ही देखते संयुक्त परिवार में बंटवारे की नौबत आ जाती है. यह फिल्म का एक महत्वपूर्ण मोड़ है. जिस परिवार में कुछ समय पहले शादी और खुशियों की तैयारियां हो रही थीं, वही परिवार रिश्तों की छोटीछोटी गलतफहमियों के कारण टूटने लगता है. यहां फिल्म बेहद सरल तरीके से यह सवाल पूछती है—परिवार को जोड़ कर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है या अपनीअपनी बात पर अड़े रहना?
काजल को अपनी गलती का अहसास
जब परिवार टूटने लगता है तो प्रेम काजल के पास जाता है और उसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी देता है. इसी दौरान काजल को एहसास होता है कि कंचन की वजह से उस के मन में प्रेम और उस के परिवार को ले कर गलत धारणा बनी थी. काजल अपनी गलती स्वीकार करती है और एक और मौका मांगती है.
इस के बाद कहानी एक और दिलचस्प मोड़ लेती है, जब प्रेम और काजल परिवार को दोबारा जोड़ने की कोशिश करते हैं.
नकली शादी और परिवार को जोड़ने की कोशिश
कहानी का यह हिस्सा फिल्म को मनोरंजक भी बनाता है और भावुक भी. प्रेम और काजल नकली शादी कर के परिवार में लौटते हैं. काजल अब उस परिवार को जोड़ने की कोशिश करती है, जिस से कुछ समय पहले वह खुद परेशान होकर दूर हो गई थी. वह रिश्तों के बीच आई दूरियों को खत्म करने की कोशिश करती है. लेकिन आखिरकार नकली शादी का सच सामने आ जाता है.
इसके बाद फिल्म एक और भावनात्मक मोड़ लेती है, जहां पता चलता है कि घर की माताओं ने परिवार को टूटने से बचाने के लिए बंटवारे का नाटक रचा था. आखिरकार प्रेम और रश्मि यानी काजल की शादी फिर से होती है और कहानी अपने सुखद मुकाम तक पहुंचती है.
फिल्म की असली ताकत—इमोशन और कौमेडी का संतुलन
‘प्रेम विवाह’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि फिल्म अपने संदेश को भाषण बना कर नहीं परोसती.
फिल्म में कौमेडी है, प्रेम है, पारिवारिक ड्रामा है, गलतफहमी है और इमोशन भी है. दर्शक एक तरफ हंसता है तो दूसरी तरफ परिवार टूटने के दृश्य उसे भावुक करते हैं. यही संतुलन फिल्म को मनोरंजक बनाए रखता है.
भोजपुरी सिनेमा में पारिवारिक फिल्में कोई नई चीज नहीं हैं, लेकिन चुनौती हमेशा यही रहती है कि कहानी उपदेशात्मक न लगे. ‘प्रेम विवाह’ काफी हद तक इस संतुलन को साधने में सफल होती है.
संजय कुमार श्रीवास्तव का मजबूत निर्देशन
फिल्म का निर्देशन संजय कुमार श्रीवास्तव ने किया है. कहानी में कई मोड़ हैं—प्रेम, रिश्ता, शादी की बातचीत, विवाद, गलतफहमी, परिवार का बंटवारा, नकली शादी और फिर परिवार का दोबारा जुड़ना.
इतने सारे ट्रैक को एक साथ संभालना आसान नहीं होता. निर्देशक ने फिल्म को मुख्य रूप से परिवार और प्रेम की केंद्रीय कहानी के आसपास रखा है और कौमेडी तथा भावनात्मक दृश्यों के जरिए दर्शकों को जोड़े रखने की कोशिश की है.
भोजपुरी सिनेमा के लिए ‘प्रेम विवाह’ का संदेश
पिछले कुछ समय से भोजपुरी सिनेमा में अच्छी और पारिवारिक फिल्मों की कमी को ले कर चर्चा होती रही है. ऐसे समय में ‘प्रेम विवाह’ का डिजिटल प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण संकेत देता है. 4 दिन में 30 लाख व्यूज इस बात का प्रमाण हैं कि भोजपुरी दर्शक अच्छी फिल्म को देखने के लिए तैयार हैं. जरूरत सिर्फ इतनी है कि उन्हें ऐसी कहानियां दी जाएं जो उन की अपनी जिंदगी से जुड़ी हों.
भोजपुरी दर्शक परिवार को समझता है, रिश्तों की कीमत समझता है और अपनी भाषा में कही गई कहानी से भावनात्मक रूप से जल्दी जुड़ता है. ‘प्रेम विवाह’ इसी भावनात्मक जुड़ाव को पकड़ने की कोशिश करती है.
कलाकारों का अभिनय भी फिल्म की बड़ी ताकत
‘प्रेम विवाह’ की सफलता में पूरी कलाकार मंडली ने फिल्म को प्रभावी बनाने में अपनी भूमिका निभाई है. अरविंद अकेला कल्लू ने प्रेम के किरदार को अपने सहज और नेचुरल अंदाज में निभा कर अपनी अलग छाप छोड़ी है. वहीं काजल राघवानी ने रश्मि के किरदार में प्रेम, आत्मसम्मान, उलझन और परिवार के प्रति बदलते नजरिए को अच्छी तरह परदे पर उतारा है.
संजय पांडे ने काजल के पिता के किरदार में खास प्रभाव छोड़ा है. उन के किरदार में बेटी के प्रति चिंता और उसके बेहतर भविष्य की चाह साफ दिखाई देती है. परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिकाओं में नजर आए कलाकारों ने भी अपनेअपने किरदारों को सहजता से निभाया है.

फिल्म में समर्थ चतुर्वेदी, रीना रानी, विनोद मिश्रा, श्रद्धा नवल, अनीता रावत, रामसुजान सिंह, संतोष श्रीवास्तव, अनामिका पांडे, संजीव मिश्रा, साहिल सिद्दीकी, दीपिका सिंह, सपना यादव, अंशु तिवारी, सोनी राज, शबनम खान, सुप्रिया कुशवाहा, सनी शर्मा, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, धीरेंद्र प्रजापति, मिंटू गुप्ता, प्रभात लहरी, प्रशांत द्विवेदी, अजीत भारद्वाज, इंद्रजीत कुमार सिंह, प्रीति कनौजिया, डौली गुप्ता, सीमा यादव, गीता नायक, अंजू रस्तोगी, अनामिका राजपूत और विहान राजपूत समेत पूरी टीम ने फिल्म के पारिवारिक माहौल को जीवंत बनाने में योगदान दिया है.
खास बात यह है कि फिल्म की कहानी एक बड़े संयुक्त परिवार के इर्दगिर्द घूमती है, इसलिए छोटेबड़े सभी किरदार मिल कर उस परिवार की दुनिया तैयार करते हैं. यही सामूहिक अभिनय फिल्म को ज्यादा विश्वसनीय बनाता है.
मजबूत तकनीकी पक्ष
फिल्म के तकनीकी पक्ष की बात करें तो प्रण नाथ की कहानी को प्रियांशु सिंह, रौशन सिंह, आरआर पंकज और सरगम आकाश के संगीत ने अच्छा सहारा दिया है, जबकि सुमित सिंह चंद्रवंशी, आशुतोष तिवारी, आरआर पंकज, मनोज भावुक, छोटू यादव, अभिषेक भोजपुरीया और सूरज सिंह के गीत कहानी के भाव और मनोरंजन को आगे बढ़ाते हैं. डीओपी सिद्धार्थ सिंह की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के पारिवारिक माहौल और दृश्यों को प्रभावी ढंग से कैमरे में उतारती है तथा जितेंद्र सिंह ‘जीतू’ की एडिटिंग कहानी की गति बनाए रखने में मदद करती है. कानू मुखर्जी की कोरियोग्राफी, असलम सुरती का बैकग्राउंड म्यूजिक और कृष्णा विश्वकर्मा की साउंड मिक्सिंग फिल्म के तकनीकी स्तर को मजबूती देते हैं. वहीं हम्मिंग बर्ड वीएफएक्स, 3 स्टूडियो, प्रोडक्शन टीम, आर्ट, मेकअप और कौस्ट्यूम विभाग समेत परदे के पीछे काम करने वाली पूरी टीम का योगदान फिल्म को एक संपूर्ण रूप देने में दिखाई देता है.
कुलमिला कर, ‘प्रेम विवाह’ केवल कलाकारों के अभिनय पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि कहानी से ले कर कैमरा, संगीत, संपादन, ध्वनि और तकनीकी प्रस्तुति तक पूरी टीम मिल कर फिल्म के अनुभव को बेहतर बनाने में योगदान देती है.
SRK Music की लगातार सक्रियता भी महत्वपूर्ण
इस फिल्म के पीछे SRK Music की टीम की सक्रियता भी ध्यान खींचती है. शर्मिला आर. सिंह और रोशन सिंह लगातार भोजपुरी दर्शकों के लिए फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं और दर्शकों के बीच अपनी फिल्मों को पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.
‘प्रेम विवाह’ की डिजिटल सफलता इस बात का संकेत है कि सही कहानी और सही प्रस्तुति के साथ भोजपुरी फिल्मों के लिए YouTube जैसे डिजिटल प्लेटफार्म पर भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं.
‘प्रेम विवाह’ कोई ऐसी फिल्म नहीं है जिसे सिर्फ उस के 30 लाख व्यूज की वजह से अच्छी कहा जाए. इस की असली उपलब्धि यह है कि फिल्म उन भावनाओं को छूती है जो भोजपुरी समाज में आज भी बेहद महत्वपूर्ण हैं—परिवार, प्रेम, सम्मान, गलतफहमी और रिश्तों को बचाने की कोशिश.
फिल्म की कुछ जगहों पर कहानी और अधिक कसावट मांगती है और कुछ घटनाक्रमों को ज्यादा स्वाभाविक बनाया जा सकता था. लेकिन इन कमियों के बावजूद फिल्म अपने उद्देश्य में सफल होती है—दर्शक का मनोरंजन करना और अंत में उसे रिश्तों की अहमियत का एहसास कराना.
सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘प्रेम विवाह’ भोजपुरी दर्शकों के बारे में बनी उस धारणा को चुनौती देती है कि उन्हें केवल मसाला चाहिए. दर्शक अच्छी कहानी चाहता है. दर्शक अपने परिवार की कहानी चाहता है. दर्शक मनोरंजन के साथ भावना चाहता है. और जब उसे यह सब अपनी भाषा में मिलता है, तो वह फिल्म को सचमुच सिरआंखों पर बिठाता है.
फिल्म से जुड़े कलाकार और टैक्निशियंस को मिल चुका है सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड
इस फिल्म की सफलता से जुड़े अधिकांश कलाकारों और टैक्निशियंस को सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड से नवाजा जा चुका है. जिस में फिल्म निर्माता रौशन सिंह और शर्मिला सिंह, निर्देशक संजय कुमार पांडेय, अभिनेता अरविंद अकेला कल्लू, संजय पांडेय, विनोद मिश्र, समर्थ चतुर्वेदी, रीना संतोष श्रीवास्तव, साहिल सिद्दीकी, सहित तकनीकी पक्ष से आशुतोष तिवारी, प्रियांशु सिंह और मनोज भावुक का नाम शामिल है.
⭐⭐⭐⭐ रेटिंग: 4/5
किस के लिए देखें :
परिवार के साथ भोजपुरी फिल्म देखना पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म एक अच्छा विकल्प है. खासकर अगर आपको प्रेम कहानी के साथ संयुक्त परिवार, रिश्तों की खटासमीठास और कौमेडी पसंद है, तो ‘प्रेम विवाह’ निराश नहीं करेगी.




