Emotional Hindi Story. सूरज एक अच्छे घराने का लड़का था, फिर उस से गलती कैसे हो गई, वह यह समझ न सका. गलती क्या… गुनाह ही कहेंगे, ऐसा गुनाह जिस की कोई माफी नहीं… यहां तक कि वह किसी से कह भी नहीं सकता था कि उस ने क्या किया है?
सेठ दीनानाथ सहाय, जिन की शहर में 5 साडि़यों की बड़ी दुकानें थीं, उन का एकलौता बेटा था सूरज. 3 लड़कियों के बाद सेठजी के घर में बेटा हुआ था.
गौरी का बचपन से ही सेठजी के घर आनाजाना था. वह सेठजी के मैनेजर रामदयाल श्रीवास्तव की एकलौती लड़की थी. सेठजी की तीसरी बेटी रमा गौरी की पढ़ाई में मदद कर देती थी. वह गौरी से 4 साल बड़ी थी, फिर भी दोनों में गहरी दोस्ती थी.
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समय बीतता चला गया. सेठजी ने बड़ी लड़की की शादी तय कर दी. शादी में बहुत सारे लोग आए थे. उसी दौरान 18 साल के सूरज का दिल गुलाबी साड़ी में लिपटी 16 साल की गौरी पर आ गया. इस से पहले उस ने कभी इस बारे में सोचा नहीं था.
सूरज ने कई बार रमा दीदी के जरीए गौरी के पास अपने दिल का पैगाम भेजने की बात सोची, पर उस की हिम्मत नहीं हुई. न जाने रमा दीदी क्या सोचतीं? वे तो उसे अच्छा लड़का समझती थीं… आज भी समझती हैं, क्योंकि उन्हें पता नहीं कि सूरज ने एक ऐसी हरकत की है, जिस की जितनी भी सजा दी जाए कम है.
वह दिन सूरज को आज भी याद है. उस दिन रमा की शादी थी. शाम को बरात आने से पहले जब सूरज ने सितारों से जड़ी हलके हरे रंग की साड़ी में गौरी को देखा, तो उसे लगा मानो आसमान से कोई परी उतर कर आ गई हो.
उसे एकटक अपनी ओर देखता पा कर गौरी हंस दी… और सूरज के मन में एक आग सी लग गई… गौरी को पाने की प्यास सी जाग गई. पर उस ने अपने मन को संभाला और वहां से चला गया.
रात के 2 बज रहे थे. शादी की तमाम रस्में पूरी हो चुकी थीं. सूरज ने हवाईअड्डे जाने के लिए अपनी गाड़ी निकाली. उस की बूआ विदेश से आ रही थीं. 3 बजे उन की फ्लाइट उतरने वाली थी. बराती खापी कर सो गए थे. चारों तरफ सन्नाटा फैल चुका था.
जैसे ही सूरज ने गाड़ी गली से निकाली, हैडलाइट की रोशनी में हरे रंग की साड़ी में जड़े सितारे उस की आंखों में चमक उठे. उस ने गाड़ी रोक दी. हैडलाइट भी बंद कर दी. मन में जली आग और भी भड़क गई.
गौरी को पूरी तरह पाने की ख्वाहिश के आगे वह सबकुछ भूल गया. इस से पहले कि गौरी अपने घर पहुंचती, सूरज ने उसे रास्ते में ही दबोच लिया. गौरी को संभलने का मौका तक न मिला, न भागने का और न ही चिल्लाने का. जब उसे होश आया, तब तक उस का सबकुछ लुट चुका था.
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गौरी को वहीं छोड़ कर सूरज हवाईअड्डे चला गया. भले ही उस ने अपनी हवस पूरी कर ली थी, फिर भी वह अपराध भाव से भर उठा.
अगले दिन अपने परिवार के लोगों के सामान्य चेहरों को देख कर सूरज ने चैन की सांस ली कि गौरी के साथ हुए हादसे की जानकारी किसी को नहीं है.
वह पूरी तरह से बेफिक्र था कि गौरी ने उसे पहचाना नहीं होगा. रात के अंधेरे का हर तरह से फायदा मिला था उसे. फिर रहरह कर उस के अंदर से जैसे एक आवाज सी आती रही कि उस ने कुछ गलत किया है.
दिनभर सूरज सब के साथ हंसताबोलता रहा, पर उस की नजरें लगातार गौरी को खोज रही थीं. उस का मन इसी सोच में डूबा रहा कि कैसे वह अपनी इस गलती का सुधार करे? गौरी के ऊपर न जाने क्या बीत रही होगी? उस का मन गौरी को देखने के लिए बेचैन हो उठा, पर उस के अंदर गौरी से नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं बची थी.
अब सूरज इस फैसले पर पहुंचा कि वह गौरी से शादी कर लेगा और फिर अपने गुनाह की माफी मांग कर उसे दुनियाभर की खुशियां देगा.
रमा की विदाई के वक्त भी जब गौरी नहीं आई, तो रमा ने सूरज को बुला कर पता करने को कहा. सूरज गौरी के पिता के पास गया और कुछ हिचकिचाते हुए गौरी के बारे में पूछा.
‘‘देखो न बेटा, कल सुबह से तेज बुखार में पड़ी है. आज बुखार कुछ कम हुआ, तो उस ने हम सब को यहां विदाई में भेज दिया और खुद कमजोरी की वजह से घर पर आराम कर रही है,’’ गौरी के पिता रामदयाल श्रीवास्तव ने सामान्य लहजे में कहा.
विदाई के बाद सूरज आराम करने के खयाल से अपने कमरे में आ गया. अभी वह बिस्तर पर लेटा था कि अचानक बाहर से कुछ शोरगुल की आवाज आई. वह उठ कर बाहर गया.
‘‘वह पूरी तरह जल गई है,’’ सूरज के कानों में किसी की आवाज आई.
‘‘कौन जल गई है?’’ सूरज ने चौंक कर पूछा.
‘‘अरे, अपने श्रीवास्तवजी की बेटी गौरी,’’ यह सुन कर सूरज जैसे चक्कर खा कर गिरतेगिरते बचा.
फिर तो सूरज ने देर नहीं की. तुरंत अस्पताल के लिए निकल गया. वहां पहुंच कर उस ने देखा कि गौरी के मातापिता व भाई रो रहे थे. कुछ पुलिस वाले भी वहां खड़े थे.
‘‘यह क्या हो गया अंकल?’’ अपनी रुलाई को रोकते हुए सूरज ने बड़ी मुश्किल से पूछा.
‘‘गौरी ने खुदकुशी कर ली बेटा. जब हम सब तुम्हारे घर में थे, तब गौरी ने रसोईघर में अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा ली थी. आग रसोईघर में फैल गई और फिर गैस का सिलैंडर भी फट गया. जब तक हम घर पहुंचते, बहुत देर हो चुकी थी,’’ कह कर श्रीवास्तवजी रोने लगे.
पता चला कि आग लगी देख कर पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड को खबर कर दी थी, पर जब तक गौरी को वहां से निकाला गया, तब तक वह बुरी तरह जल चुकी थी.
श्रीवास्तवजी की कामवाली बाई के छोटे बच्चे ने एक लिफाफा उन्हें दिया, ‘‘दीदीजी ने यह आप को देने को कहा था. एक लिफाफा और था, जिसे दीदीजी ने डाकखाने में डलवा दिया.’’
इस लिफाफे में गौरी का सुसाइड नोट था. उस ने लिखा था कि वह खुदकुशी कर रही है और इस का जिम्मेदार किसी को न माना जाए.
इंस्पैक्टर व सूरज ने भी उस चिट्ठी को पढ़ा. सूरज समझ गया कि उसी हादसे की वजह से गौरी ने यह कदम उठाया था. गौरी के घर वालों का रोना तेज हो गया था.
सूरज ने गौरी की लाश देखी. उस के लंबे बाल जल चुके थे. गोरा रंग जल कर काला हो गया था. गौरी की वह मुसकराहट जिस पर सूरज फिदा था, वह हमेशा के लिए खत्म हो चुकी थी. जो बचा था, वह था एक भयानक जला, मरा चेहरा… सूरज से यह देखा न गया. अपने आंसू छिपाता हुआ वह चुपचाप वहां से चला आया.
शाम को सूरज अपने कमरे से बाहर निकला, तो सेठजी के कमरे से आती आवाजें सुन कर ठिठक गया.
‘‘अच्छा हुआ, सूरज बच गया. जरूर गौरी का चक्कर किसी के साथ होगा और वहीं से धोखा खाने पर उस ने खुदकुशी की होगी. आप सूरज से उस की शादी करने की सोच रहे थे,’’ सूरज की मां कविता सेठजी से कह रही थीं.
‘‘नहींनहीं, यह क्या कह रही हो? ऐसा नहीं हो सकता,’’ सेठजी बोले.
‘‘तो और क्या बात होगी? जवान लड़की अगर खुदकुशी करे, तो यही वजह होती है. मुझे तो लगता है कि वह जरूर पेट से रही होगी…’’
यह सुन कर सूरज ने चाहा कि वह जा कर मां से कह दे कि गौरी ऐसे चरित्र की नहीं थी. पर कुछ शर्म के चलते, कुछ डर की वजह से और कुछ अपने पिता की इज्जत का खयाल कर के वह चुप रह गया.
गौरी को पाने में सूरज ने जल्दबाजी कर दी थी और इस का खमियाजा गौरी को अपनी जान दे कर भुगतना पड़ा. सूरज को जितने लोग मिलते, गौरी के बारे में उतनी तरह की बातें करते और सूरज के पास चुप रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं था.
4-5 दिनों के बाद सूरज के पास डाक से एक लिफाफा आया. सूरज ने बेमन से लिफाफा खोला, तो अंदर से एक चिट्ठी निकली. चिट्ठी बिना किसी संबोधन के थी, ‘हम साथ पलेबढ़े, एकदूसरे को हम ने बचपन से देखासमझा था. बचपन की वह दोस्ती समय के साथसाथ मेरे मन में प्यार का रूप ले चुकी थी.
‘मैं ने सोचा था कि शायद आप भी मेरे बारे में वैसा ही सोचते हैं, पर मैं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस से मैं प्यार करती हूं, उस के खयालों में मेरी जगह सिर्फ एक देह भर की है.
‘मैं ने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरा प्यार ही मेरी इज्जत को यों बेदर्दी से तारतार कर देगा.
‘मैं आप को पहचान गई थी, पर फिर भी मैं ने आप के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया, क्योंकि आप के पिता ने मेरे घर वालों पर न जाने कितने एहसान किए हैं. आप की वजह से ऐसे देवता समान आदमी की इज्जत पर दाग लगे, ऐसा मैं नहीं चाहती थी.
‘फिर रमा दीदी के साथ भी आप के संबंध खराब हो जाते, क्योंकि वे जानती थीं कि मैं आप से कितना प्यार करती हूं, आप की कितनी इज्जत करती हूं.
‘आप की इस हरकत के लिए वे आप को कभी माफ नहीं करतीं, पर मैं इस कलंक के साथ जी भी तो नहीं सकती थी…’
सूरज के दिल पर वह चिट्ठी एक हथौड़े की तरह लगी. वह बिस्तर पर लेटा रोता रहा और गौरी से माफी मांगता रहा. पर अब तो कुछ नहीं हो सकता था.
गौरी तो आग में जल कर चंद घंटों की पीड़ा सह कर उस तकलीफ से नजात पा गई थी, पर सूरज को अपने गुनाह की आग में हर पल जलना था… कम से कम तब तक, जब तक उस की जिंदगी थी. Emotional Hindi Story
–कामायनी शांडिल्य




