Hindi Funny Story. आ इए, आप का चालान काटते हैं. आप का चालान कभी भी और कहीं भी कट सकता है. इस के लिए आप हमेशा ही तैयार रहिए.
आप अपनी जेब को हलका करने के लिए हमेशा आप तैयार रहिए. आजकल सीसीटीवी कैमरों से आप की निगरानी की जा रही है. आप बिना हैलमैट, बिना लाइसैंस के गाड़ी चला रहे हैं. कोई बात नहीं. पहले ट्रैफिक हवलदार डंडा ले कर या चला कर आप को रोकता था, अब मुसकरा कर काम चलाता है. बंदा जाएगा कहां. मुल्ले की दौड़ मसजिद तक. आना और जाना आप को इसी सड़क से है. जाइएगा कहां.
आप का लाइसैंस फेल है. आप का गाड़ी नंबर डाला और आप की कुंडली निकल कर बाहर आ गई. आप का क्याक्या फेल है. सब जानकारी हाजिर. आप के लिए बड़ेबड़े गड्ढे खोदे गए हैं. कहीं न कहीं आप को फंसना ही है. आप ट्रैफिक पुलिस के चक्कर में पड़े नहीं कि आप को छठी का दूध याद आ जाता है.
आप का लाइसैंस फेल है. नहीं फेल है. अच्छा, कोई बात नहीं. आप का प्रदूषण तो फेल होगा ही. प्रदूषण ठीक है, तो गाड़ी के पेपर दिखाइए. अच्छा, गाड़ी के पेपर भी ठीक हैं. तब आगे बढि़ए. आप का स्वागत टोल प्लाजा पर हो रहा है. वहां टोल तो देना ही है.
हमारे शहर में एक दिन ट्रैफिक पुलिस कुछ ज्यादा सक्रिय हो गई और तितरबितर और इधरउधर खड़ी गाडि़यों का चालान कटना शुरू किया. लोगों में चर्चा होने लगी. चालान कटना या कोई अच्छीबुरी घटना हम भारतीयों के लिए एक उत्सव की तरह होता है.
सब के चेहरे चकल्लस हो रहे थे. बहुत तरह के चर्चे होने लगे. चालान किस का किस का कटा है. कुछ ने कहा. चारपहिए और निजी वाहनों का. एक सज्जन बिदक कर बोले. अच्छा, टैंपो वालों को छोड़ दिया. यह तो बहुत बुरा हुआ. चालान निजी और सार्वजनिक वाहनों दोनों का कटना चाहिए था.
हालात ये हैं कि लोग चालान कटने से पहले ही परेशान हैं. उलटा किसी को यह दुख सता रहा है कि चालान सिर्फ और सिर्फ निजी वाहनों का क्यों
काटा गया. यह तो बहुत नाइंसाफी है. क्या मोटरसाइकिल वालों का नहीं काटा? ऐसा भी कहीं होता है भला कि चारपहिया निजी वाहनों का चालान काटा और दुपहिया वाहनों का नहीं काटा. यह तो बहुत बुरा हुआ.
तभी एक तीसरे सज्जन पहुंच गए. चौथे सज्जन से बोले यार, श्यामलाल का चालान आज कट गया. गनीमत है मैं ने आज कार निकाली ही नहीं, नहीं तो बेकार में 2,000 का फटका लगता. तीसरे सज्जन अपनी होशियारी दिखा कर शेखी बघार रहे थे.
5वें सज्जन बोले. यह यहां की टीम नहीं थी. बाहर की टीम थी. हां, ठीक बोल रहे हैं. बाहर से आई थी. उन की बातों से लग रहा था कि जैसे उन के चचा सीबीआई में थे.
हमारे यहां गुटखा बैन है. एक बार एक मैजिस्ट्रेट हमारे यहां गुटखा की छापेमारी करने के लिए आए. गुटखा की छापेमारी वे क्या करते, वे पीछे चल रही भीड़ से परेशान थे. सब दुकानदार हुजूम बना कर मैजिस्ट्रेट के पीछेपीछे चल रहे थे. सब को उत्सुकता थी कि किस के यहां रेड में कितना पैकेट गुटखा मिला है.
ऐसे लोग चलतेफिरते दूरबीन की तरह होते हैं, जो जान लेते हैं कि किस के पेट में कितना पानी है.
एक सज्जन बोले. जानते हैं, चुन्नूजी का चालान आज सुबहसुबह कट गया. 25,000 फाइन लगा है. सुबहसुबह 2 बोरा गुटखा ले कर पुलिस गई है उन के यहां से.
दूसरे सज्जन बोले. अरे, मुझे तो कल रात ही पता चल गया था कि अगले दिन गुटखा बेचने वालों के यहां रेड पड़ने वाली है. सारा माल दुकान से उठा कर घर ले कर चला गया था.
मेरे यहां भी मैजिस्ट्रेट आया था. दुकान में कुछ नहीं मिला. मैं ने इतनी होशियारी जरूर दिखाई. ऐसा लगता था मानो वे सज्जन अंतर्यामी हों.
ऐसे बहुत से लोग हैं जो होशियार होते हैं और मौका देखदेख कर इन की होशियारी ऐसेवैसे मौकों पर कूदकूद कर बाहर निकल आती है. ऐसे होशियारचंद लोगों की वजह से ही ‘होशियारी’ शब्द जिंदा है. ऐसे लोगों को दूसरों की बदहाली और बरबादी देखने में बड़ा मजा आता है. उस पर रस लेले कर वे घंटों चर्चा करते हैं. उस के स्वाद में जो मजा है, उस के क्या कहने.
एक समय की बात है. उन दिनों कोरोना बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ था. ये उन दिनों राज्य में गुटखे की बिक्री बंद थी. जुगाड़ से गुटखा बिक रहा था.
एक दिन थाने के एक वजनदार थानेदार ने दुकानदार से 4 पुडि़या गुटखा फ्री में मांग लिया. दुकानदार ने देने से मना कर दिया. थानेदारजी ने जहमत उठाई. उन को हर चीज फ्री में खाने की आदत थी, लिहाजा थाने के सज्जनजी बिलबिलाए और राज्य सरकार को पत्र लिख दिया. यह सूचित करने की जहमत उठाई कि हमारे राज्य में गुटखा पहले से ही प्रतिबंधित है और अमुक दुकानदार गुटखे को फलां जगह धुआंधार तरीके से बेच रहा है.
खैर, पुलिस आई और सारा गुटखा जब्त कर के ले गई. दुकानदार पर केस हो गया. अदालत से बेल करवानी पड़ी. दुकानदार पहले से ही खीजा हुआ था. बोला कि हम को पकड़ने से कुछ नहीं होगा. रिटेलर को मत पकडि़ए. जो होलसेल कर रहा है उस को पकडि़ए. इस तरह दुकानदार की उदारता के कारण बड़ी मछली भी पकड़ में आ गई.




