Marriage Conflict Story. निजाम बिजनौर जिले के नारायणपुर गांव का रहना वाला था. उस के अब्बा उस गांव के प्रधान थे, जो अपने आखिरी समय में निजाम के लिए काफी जमीन और पैसा छोड़ कर इस दुनिया से चल बसे थे.
निजाम की उम्र उस समय 30 साल थी, जब उस की शादी साजिदा से हुई थी. साजिदा बिजनौर जिले के भागुवाले गांव की रहने वाली एक गरीब परिवार की बेटी थी.
साजिदा की उम्र उस समय महज 16 साल थी, जब उस की शादी निजाम से हुई थी.
साजिदा के अब्बा ने उस की शादी निजाम से इस लालच में करा दी थी, क्योंकि वह अपने बाप का एकलौता बेटा था और जिस के पास काफी जमीन और पैसा था, भले ही उस की उम्र साजिदा से दोगुनी थी.
साजिदा थी बड़ी खूबसूरत और गदराए बदन की मलिका. गोरीचिट्टी, बड़ीबड़ी आंखें, गुलाबी होंठ, सुर्ख गाल जिसे देखते ही निजाम उस का ऐसा दीवाना बन बैठा कि उसे न खाने का होश था, न कमाने का. वह तो बस रातदिन साजिदा की बांहों मे पड़ा रहता और उस के इर्दगिर्द मंडराता रहता.
निजाम साजिदा को जीजान से चाहता था. उस के मुंह से निकली हर बात को पूरा करना उस का मकसद रहता था.
साजिदा समझ चुकी थी कि निजाम उस का दीवाना बन गया है, वह जो कहेगी निजाम वही करेगा.
साजिदा ने अपनी जिंदगी में नया मोड़ लाना शुरू कर दिया. वह निजाम से मुंहमांगे पैसे लेती और मनमाने ढंग से खर्च करती. उस ने अपनेआप को एक देहाती औरत के बजाय मौडर्न बनाना शुरू कर दिया और निजाम से एकएक कर के जमीन बिकवाने लगी और खूब खर्च करने लगी.
साजिदा ने 10 साल में 2 बेटों और 2 बेटियों को जन्म दिया. निजाम और साजिदा दोनों खुश थे. उन के घर में किसी बात की कोई कमी न थी.
निजाम खेतीबारी करता था, पर उस के घर का खर्चा उस की कमाई से ज्यादा था, जिस की मुख्य वजह थी साजिदा का मनमाने ढंग से घूमनेफिरने में खर्च करना.
जब कभी निजाम साजिदा को फुजूलखर्च के लिए रोकता तो साजिदा उस से नाराज हो जाती और उसे अपने पास फटकने न देती. मजबूर हो कर निजाम को साजिदा की बात माननी पड़ती.
समय बीतता गया. बच्चे बड़े होते गए. बड़े लड़के रईस को एक लड़की से प्यार हो गया, तो उस ने उस से शादी कर ली और उसे ले कर देहरादून चला गया और वहीं कोई कामकाज करने लगा.
इधर साजिदा की फुजूलखर्ची और घूमनेफिरने की आदत से घर के कुछ सदस्य नाराज थे, तो एक बेटी अमीना उस के कहने में थी. वह भी उसी के रास्ते पर चल कर अपनी जिंदगी जी रही थी.
साजिदा 50 की उम्र में भी 30 की लगती थी. उस ने अपने हुस्न और जिस्म को इस तरह मेंटेन कर के रखा था कि कोई उसे जब निजाम के साथ देखता तो उन दोनों को बापबेटी समझता था. गांव के कई लड़के आज भी उस पर मरमिटते थे और मौका देख कर अपने प्यार का इजहार भी कर देते थे. साजिदा की एक कातिल मुसकान उन का दिल धड़का देती थी.
निजाम बूढ़ा होता जा रहा था. साजिदा की जिस्मानी जरूरत पूरी करने में अब वह कमजोर हो चुका था, जिस से साजिदा अब उस से कतराने लगी थी. यही वजह थी कि वह गांव के कई लड़कों से अपनी जिस्मानी जरूरत पूरी करने लगी थी.
जब साजिदा के बच्चों को उस की इस हरकत का पता चला तो उन्होंने उस के बाहर आनेजाने पर रोक लगा दी. सब बच्चे साजिदा के खिलाफ हो गए, सिर्फ अमीना उस के साथ थी, जिस का फायदा साजिदा को यह मिला कि जब भी वह अपने किसी आशिक से मिलने जाती तो अमीना को भी साथ ले जाती.
अमीना की उम्र उस समय 16 साल थी. सब यही समझते थे कि अमीना के साथ होते हुए साजिदा कोई गलत हरकत नहीं कर सकेगी, पर उन का यह समझना भूल था.
साजिदा की हरकतों से अमीना अच्छीखासी वाकिफ थी और उसे भी अपनी अम्मी के रास्ते पर चलना अच्छा लगता था.
अमीना भी खूबसूरती की एक जीतीजागती मिसाल थी. कम उम्र में ही उस के आशिकों की एक अच्छीखासी तादाद हो गई थी.
साजिदा जब अमीना के सामने ही अपने आशिकों की बांहों में सिमट कर खूब मजे लेती, तो अमीना की भी हवस जाग जाती और वह भी अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए बेताब हो उठती.
साजिदा भी अमीना को किसी लड़के के साथ तनहा छोड़ देती, ताकि वह भी अपने जिस्म के मजे ले सके, ताकि साजिदा के नाजायज रिश्ते को अमीना छिपा ले.
एक दिन साजिदा अमीना के साथ खेत में टहलने गई थी, जहां साजिदा का आशिक उसे अपनी बांहों में भर कर मजे ले रहा था. दूसरी तरफ साजिदा के आशिक का बेटा अमीना को अकेली देख कर उस पर आशिक हो गया और अमीना को अपनी बांहों में भर कर उस के शरीर से खेलने लगा.
अमीना ने उस का कोई विरोध नहीं किया, क्योंकि उस पर तो सैक्स का भूत सवार रहता ही था. जब वे दोनों खेत में जिस्म की आग को ठंडा कर रहे थे, तभी गांव के किसी बुज़ुर्ग ने उन्हें देख लिया और उस ने सारी घटना आ कर साजिदा के छोटे बेटे और उस के शौहर निजाम को बता दी.
यह सुन कर निजाम को इतना गुस्सा नहीं आया जितना उस के बेटे रिहान को आया.
कुछ देर बाद साजिदा जैसे ही घर में घुसी तो निजाम उसे डांटने लगा. साजिदा भी बिना डरे उस से जबान चलाने लगी.
यह देख कर रिहान को गुस्सा आ गया और उस ने पास रखे डंडे से अपनी मां की पिटाई कर दी और जान से मारने की धमकी भी दी.
रिहान की धमकी से साजिदा घबरा गई और अब उस की हिम्मत जवाब दे गई. उस ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया.
कुछ दिनों में निजाम ने अपनी दोनों बेटियों की शादी कर दी, क्योंकि उसे अब डर था कि कहीं वे भी अपनी मां के रास्ते पर चल कर गलत न हो जाएं. उसे अपनी बड़ी बेटी सायरा पर तो भरोसा था, पर छोटी बेटी अमीना पर नहीं था, क्योंकि वह अकसर अपनी अम्मी का पक्ष लेती थी और उसी के साथ घूमतीफिरती थी.
सायरा की शादी दिल्ली में हो गई और अमीना की शादी मुंबई में. समय बीतता गया. अमीना की डिलीवरी के समय साजिदा उस के पास मुंबई चली गई.
अमीना ने कुछ ही दिनों में एक बेटी को जन्म दिया, जिसे पा कर साजिदा का दामाद इरफान और बेटी अमीना बहुत खुश हुए.
इरफान एक अच्छा कारोबारी था. उस के घर में खानेपीने की कोई कमी न थी. साजिदा को इरफान के घर रहना अच्छा लग रहा था, इसलिए वह अपने गांव वापस जाने का नाम ही नहीं ले रही थी.
निजाम ने कई बार साजिदा को आने के लिए कहा, पर वह कोई न कोई बहाना बना कर टाल गई.
निजाम ने इरफान को फोन कर के कहा कि वह अपनी सास पर लौटने का दबाव डाले, पर अपनी अम्मी के गांव जाने की बात सुन कर अमीना गुस्सा हो गई और बोली, ‘‘मेरी अम्मी कही नहीं जाएंगी. वे मेरे साथ ही रहेंगी.’’
‘‘घर पर अब्बा परेशान हैं. वे अम्मी को बुला रहे हैं. तुम क्यों इन्हें रोक रही हो?’’
यह सुन कर साजिदा बोली, ‘‘मेरी बेटी मुझ से प्यार करती है और मैं भी उस से बहुत प्यार करती हूं.’’
इरफान बोला, ‘‘घर पर अब्बा भी तो परेशान हैं. आजकल उन की तबीयत भी सही नहीं रहती और उन्होंने मुझे सख्ती से कहा है कि अपनी सास को घर भेज दो.’’
अमीना चिल्लाई, ‘‘अम्मी कहीं नहीं जाएंगी, बस यह मेरा आखिरी फैसला है.’’
यह सुन कर इरफान को गुस्सा आ गया और बोला, ‘‘आखिर कब तक रहेंगी ये यहां?’’
‘‘जिंदगीभर, क्योंकि ये मेरी अम्मी हैं,’’ कहते हुए अमीना अपने कमरे मे चली गई और गुस्से ने दरवाजा बंद कर लिया.
अमीना की इस हरकत से इरफान को काफी गुस्सा आया और उस ने अमीना और साजिदा से बात करना बंद कर दिया. उस ने सोचा कि अगर वह कुछ दिन अमीना से बात नहीं करेगा तो उसे अपनी गलती का अहसास होगा, पर ऐसा नहीं हुआ.
इस बीच साजिदा ने अपने एक मिलने वाले बिल्डर से अमीना को मिलवा दिया, जो देखने मे इरफान से ज्यादा हैंडसम और अमीर था. देखते ही देखती उन दोनों मे दोस्ती हो गई और साजिदा ने इस दोस्ती को इतना बढ़ावा दिया कि वे दोनों इरफान की गैरमौजूदगी में घर में ही मिलने लगे और साजिदा उन दोनों को अकेला घर में छोड़ कर बाहर निगरानी करने लगी.
जल्द ही उन दोनों के बीच जिस्मानी ताल्लुकात बन गए और अमीना अब उस बिल्डर की दीवानी हो गई.
इरफान ने देखा कि अमीना को अपनी गलती का अहसास नहीं है, तो वह खुद ही अमीना को मनाने उस के करीब गया तो अमीना ने उसे झिड़क कर दूर कर दिया. अमीना की इस हरकत से इरफान दंग रह गया.
कुछ ही दिनों में अमीना और इरफान के बीच झगड़ा शुरू होने लगा और अमीना अब इरफान की सूरत भी देखना गवारा नहीं कर रही थी और अपने आशिक के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी.
कुछ ही दिनों मे साजिदा और अमीना के हाथ इरफान के रखे हुए पैसे और जेवर लग गए, जिन्हें उन्होंने गायब कर दिया. जब इस बात पर बहस हुई तो अमीना और साजिदा इरफान का घर छोड़ कर कहीं चली गईं.
इरफान अमीना की हरकतों से पहले ही तंग आ चुका था, इसलिए उस ने अमीना को उस के हाल पर छोड़ दिया.
कुछ दिनों बाद इरफान ने दूसरी शादी कर ली और अपनी बेटी और नई बीवी के साथ बिजी हो गया.
अमीना और साजिदा कहां गायब हुईं, इस का कुछ पता न चला. कई महीने साजिदा का इंतजार करने के बाद आखिरकार निजाम ने बिजनौर के महिला परामर्श केंद्र की शरण ली.
वहां की इंस्पैक्टर संध्या ने साजिदा का मोबाइल नंबर लिया. अनजान नंबर से आई काल को साजिदा ने उठा लिया और उसे बिजनौर के परामर्श केंद्र मे आने को कहा गया.
यह सुन कर साजिदा घबरा गई और एक हफ्ते बाद आने का वादा कर लिया तो इंस्पैक्टर संध्या ने निजाम को भी बिजनौर आने के लिए फोन कर दिया.
एक हफ्ते बाद वे दोनों महिला परामर्श केंद्र पहुंचे. उन दोनों की बात इंस्पैक्टर संध्या ने सुनी तो वे साजिदा से बोलीं, ‘‘तुम अपने शौहर से दूर कहां रह रही हो? तुम इन के साथ क्यों नहीं रहती हो?’’
साजिदा बोली, ‘‘ये मुझे खर्चा भी नहीं देते और कुछ कामकाज भी नहीं करते. मैं इन के साथ नहीं रह कती.’’
इंस्पैक्टर संध्या ने कहा, ‘‘ये तुम्हें खर्च देंगे. जैसा खुद खाएंगे, वैसा तुम्हें भी खिलाएंगे.’’
साजिदा बोली, ‘‘मुझे इन के साथ नहीं रहना. इन का बेटा मुझे मारता है. एक बार उस ने मेरे पैरों पर इतनी तेज लाठी मारी थी कि मैं कई दिन तक उठ भी नहीं पाई थी. वह मुझे जान से मारने की धमकी देता है.’’
इस पर इंस्पैक्टर संध्या ने निजाम पर गुस्सा होते हुए कहा, ‘‘अपने बेटे को भी यहां बुलाओ. उस ने अपनी मां को क्यों मारा और क्यों जान से मारने की धमकी देता है?’’
निजाम बोला, ‘‘इस का आएदिन बिना बताए घर से गायब हो जाना और गांव वालों से इस के बारे में उलटीसीधी बातें सुन कर उसे गुस्सा आ गया था, इसलिए उस ने ऐसी हरकत की.’’
इंस्पैक्टर संध्या बोलीं, ‘‘क्यों साजिदा, यह सब क्या सुन रही हूं मैं…’’
साजिदा रोते हुए बोली, ‘‘ये सब मेरे ऊपर झुठा इलजाम लगा रहे हैं. मैं इन के साथ नहीं रहूंगी.’’
इस पर निजाम बोला, ‘‘इस ने तो अपनी बेटी का घर भी उजाड़ दिया है. वह भी अपने शौहर को छोड़ कर कहीं चली गई तो उस ने दूसरी शादी कर ली.’’
इंस्पैक्टर संध्या ने साजिदा से उस की बेटी के बारे मे पूछा तो वह बोली, ‘‘उस का शौहर भी उसे मारतापीटता था, इसलिए वह उस का घर छोड़ कर अलग रह रही है. हम दोनों साथ ही रहते हैं.’’
काफी देर के बाद भी साजिदा यही कहती रही कि उसे इन के साथ नहीं रहना, तो इंस्पैक्टर संध्या ने साजिदा को छोड़ दिया और निजाम से बोली, ‘‘हम जबरदस्ती साजिदा को तुम्हारे साथ नहीं भेज सकते और अगर भेज भी देंगे तो यह तुम्हारे साथ नहीं रहेगी, क्योंकि यह अब तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती.’’
निजाम हताश हो कर घर वापस आ गया. कई साल गुजर गए पर आज तक दोनों मांबेटी का कुछ पता न चला.
साजिदा एक ऐसी बेवफा औरत निकली, जिस ने अपना तो बसाबसाया घर उजाड़ा ही, साथ में अपनी बेटी अमीना का घर भी बरबाद कर दिया. Marriage Conflict Story
-अंसारी जीशान अहमद




