Society. प्रेम और ज्योति दिल्ली में रहते हैं. उन की बेटी सलोनी मुंबई से एमबीए कर रही थी. वहां उस की निखिल से मुलाकात हुई, जो दोस्ती से प्यार में बदल गई, पर उन दोनों की जाति अलग थी.

इतना ही नहीं, सलोनी की जड़ें उत्तर प्रदेश से थीं, तो निखिल पश्चिम बंगाल से था. जाति के साथसाथ दोनों के परिवारों का रहनसहन, खानपान, रीतिरिवाज में भी बहुत ज्यादा फर्क था.

इस के बावजूद सलोनी ने अपने मांबाप से निखिल से शादी करने की बात कही तो उन्होंने निखिल से मिलने की बात कही. निखिल दिल्ली गया और सलोनी के मां बाप से मिला.

सलोनी हैरान रह गई कि इस शादी से उस के मांबाप को कोई दिक्कत नहीं थी. इस की सब से खास वजह यह थी कि उन्होंने निखिल से खुले मन से बात की थी. उस के भविष्य के प्लान के बारे में समझा  था और यह भी जाना था कि उस के मन में सलोनी को ले कर क्या चल रहा है.

पर हर कोई प्रेम और ज्योति की तरह इतनी खुली सोच का नहीं होता है, बल्कि यहां तो इस तरह की खबरें आती रहती है कि बेटी ने दूसरी जाति के लड़के से शादी की तो उस के परिवार वालों ने दामाद का खून कर दिया या उसे लड़की को फुसलाने के जुर्म में जेल करा दी.

मांबाप इतना खतरनाक कदम क्यों उठाते हैं? असल में जब कोई लड़की अपनी मरजी से दूसरी जाति के लड़के से शादी करती है तो मांबाप को यही लगता है कि उन्होंने अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के जो सपने देखे थे, वे चकनाचूर हो गए हैं. पर बेटी की खुशी के लिए बहुत से मांबाप को दिल बड़ा करना पड़ता है. यहां दामाद को ‘अपनाना’ मतलब जबरदस्ती होता है, क्योंकि उसे एक इनसान या परिवार के सदस्य के तौर इज्जत नहीं मिलती है.

ऐसे लोग अपनी बेटी के शादी के फैसले पर तो बहुत से सवाल उठा देते हैं, पर कुछ ऐसी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिन से उन्हें दूसरी जाति के दामाद को अपनाने में मदद मिल सकती है. जैसे, वे खुद से सवाल करें कि क्या उन की बेटी खुश है? अगर इस का जवाब ‘हां’ में है, तो सम?ा कि आप ने आधी लड़ाई जीत ली है.

लड़की के मांबाप खुद से दूसरा सवाल यह पूछें कि क्या उन का दामाद अच्छा इनसान है? कोई भी पढ़ीलिखी लड़की अपने लिए शराबी, मारपीट करने वाला, बेरोजगार लड़का तो कभी नहीं तलाश करेगी. वैसे भी इस तरह का अपनी जाति का लड़का भी बेकार है. इस के उलट सब की इज्जत करने वाला, कमाने वाला दूसरी जाति का लड़का भी हीरा है.

सच तो यह है कि जाति का टैग कुछ दिनों तक ही दामाद के गले मे टंगा दिखता है. अगर दामाद अच्छा है तो यकीन मानिए कि कुछ समय बाद किसी को याद नहीं रहेगा कि उस की जाति क्या है.

शुरुआत कैसे करें

पर इस सब की शुरुआत कैसे की जाए? अगर आप का दामाद दूसरी जाति का है, तो लड़की के मांबाप को कभी इस तरह नहीं कहना चाहिए कि ‘तेरा आदमी कहां है?’ इस के बजाय उस का नाम लो, ‘राहुल बेटा, पानी पियोगे?’ नाम से ही इज्जत है.

दामाद को खुले दिल से अपने घर में एंट्री दो. पहली बार घर आए तो दरवाजे पर मत रोको. चायपानी पूछो. आप का बंद दरवाजा, आप के बंद दिल की निशानी है.

दामाद के सामने कभी भी अपनी बेटी से यह सवाल मत पूछो, ‘तू खुश तो है न?’ अगर किसी बात का खटका है भी तो बेटी से अकेले में करो. सब के सामने पूछोगे तो दामाद को लगेगा कि उस की जाति की वजह से उस पर अभी भी शक करते हैं.

इन बातों का रखें खयाल

अगर दामाद लड़की की जाति का नहीं है तो कभी भी उसे यह ताना न मारें कि ‘हमारी जाति में तो…’ उस के समाज के भोजन, रीतिरिवाज की कभी भी तुलना मत करो. याद रखें कि वह कुछ बदलने नहीं आया है, बल्कि आप से जुड़ने आया है.

‘हम ने अपनी लड़की दे दी, वरना…’ इस तरह की बात अपने दामाद से बिलकुल करें. इस तरह इज्जत दोनों तरफ से होगी. साथ ही, उस की स्किल की तारीफ करो. जाति अपनेआप मिटती चली जाएगी.

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