पटना। बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक बापू सभागार रविवार की शाम भोजपुरी सिनेमा की चमक-दमक, संगीत और सितारों की मौजूदगी से जगमगा उठा। अवसर था 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स समारोह का, जो पूरे भव्यता और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। शाम छह बजे शुरू हुआ यह समारोह देर रात तक चलता रहा और भोजपुरी फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकारों, गायकों, निर्देशकों, तकनीशियनों तथा सिने प्रेमियों की बड़ी उपस्थिति ने इसे एक यादगार सांस्कृतिक उत्सव बना दिया।
इस समारोह में लगभग 80 विभिन्न श्रेणियों में भोजपुरी सिनेमा के कलाकारों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भोजपुरी फिल्म जगत की कई चर्चित हस्तियों ने शिरकत की, जिससे सभागार में उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।

विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
अवॉर्ड समारोह में कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव, मंत्री श्री संजय सिंह, दिल्ली प्रेस के संपादक परेश नाथ, दिल्ली प्रेस के कार्यकारी प्रकाशक अनंत नाथ तथा इम्पा (IMPAA) के अध्यक्ष अभय सिन्हा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद मंच से भोजपुरी सिनेमा की उपलब्धियों और उसके भविष्य पर चर्चा की गई।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भोजपुरी सिनेमा आज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और लोक जीवन की झलक भी प्रस्तुत करता है। उन्होंने कलाकारों से समाज को सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्मों के निर्माण की अपील की।
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि भोजपुरी भाषा और संस्कृति की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और ऐसे आयोजनों से कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सिनेमा भारतीय संस्कृति की आत्मा को जीवित रखता है। मंत्री संजय सिंह ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि भोजपुरी सिनेमा में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और इस प्रकार के मंच कलाकारों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
अवॉर्ड समारोह केवल सम्मान देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक भव्य स्टार नाइट के रूप में भी सामने आया। मंच पर भोजपुरी संगीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
लोकप्रिय गायकों और कलाकारों ने अपने हिट गीतों पर प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सभागार में मौजूद दर्शकों ने हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक भोजपुरी लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिनमें लोकगीत और लोकनृत्य शामिल रहे। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।

डिजिटल युग के अनुरूप अवॉर्ड्स का नया स्वरूप
कार्यकारी प्रकाशक अनंत नाथ नें बताया कि इस वर्ष अवॉर्ड समारोह को डिजिटल युग के अनुरूप नया स्वरूप दिया गया। इस बार अवॉर्ड्स को तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया जिसमें थिएटर में रिलीज होने वाली फिल्में, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कंटेंट और यूट्यूब और टीवी प्लेटफॉर्म रिलीज फिल्मों की कैटेगरी बनाई गई थी. इन तीनों वर्गों के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में कलाकारों, निर्देशकों, गायकों, तकनीशियनों और अन्य रचनात्मक प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि आज के समय में डिजिटल माध्यमों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में इस मंच पर डिजिटल कंटेंट से जुड़े कलाकारों को भी पहचान देना आवश्यक है।

कलाकारों को मिला सम्मान
समारोह में भोजपुरी फिल्म उद्योग के कई चर्चित कलाकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अवॉर्ड पाने वाले कलाकारों में कई लोकप्रिय अभिनेता, अभिनेत्री, गायक और तकनीशियन शामिल रहे। जिसमें बेस्ट एक्टर का अवार्ड अरविंद अकेला कल्लू को उनकी मूवी मुझे मेरी बीवी से बचाओ के लिए दिया गया , इसी फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड रक्षा गुप्ता को मिला, इंटरनेशनल स्टेज स्टार अवॉर्ड निशा उपाध्याय, बेस्ट सिंगर एल्बम फीमेल अनुपमा यादव, बेस्ट सिंगर एल्बम ज्यूरी पुरस्कार मिला मोनू अलबेला को, बेस्टर एक्टर बनीं अंजना सिंह और बेस्ट एक्ट्रेस बने देव सिंह, बेस्ट लिरिसिस्ट के पुरस्कार से सम्मानित किए गए मनोज भावुक, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार अनूप अरोड़ा को दिया गया,  सिनेमाहॉल कैटेगरी में बेस्ट फिल्म अवार्ड संजय पांडे को दिया गया, बेस्ट एक्ट्रेस क्रिटिक का अवार्ड संजना पांडेय के नाम रहा,  इन कलाकारों ने भोजपुरी सिनेमा में अपने अभिनय, गायन और रचनात्मक कार्यों से दर्शकों का दिल जीता है।

भोजपुरी सिनेमा की उपलब्धियों का जश्न
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भोजपुरी फिल्म उद्योग की उपलब्धियों और उसके विकास की यात्रा पर भी प्रकाश डाला। पिछले कुछ वर्षों में भोजपुरी सिनेमा ने तेजी से प्रगति की है। फिल्मों की तकनीकी गुणवत्ता में सुधार हुआ है और कहानी तथा प्रस्तुति के स्तर पर भी नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं। भोजपुरी फिल्में अब केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे भोजपुरी भाषी लोगों के बीच भी काफी लोकप्रिय हो रही हैं। इससे इस उद्योग का बाजार लगातार बढ़ रहा है।

सरस सलिल अवॉर्ड्स की यात्रा
आयोजकों ने बताया कि सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी। इसके बाद अयोध्या, बस्ती और लखनऊ में इसके सफल आयोजन किए जा चुके हैं। हर वर्ष इस समारोह की लोकप्रियता और भव्यता बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित छठे संस्करण में 50 से अधिक श्रेणियों में कलाकारों को सम्मानित किया गया था। पटना में आयोजित सातवें संस्करण ने इस अवॉर्ड समारोह को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
दर्शकों और मीडिया की रही बड़ी भागीदारी
अवॉर्ड समारोह में बड़ी संख्या में सिने प्रेमियों और दर्शकों ने भाग लिया। सभागार खचाखच भरा हुआ था और कार्यक्रम के दौरान हर प्रस्तुति पर दर्शकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके साथ ही कई मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम को कवर करने के लिए उपस्थित रहे। मीडिया की व्यापक उपस्थिति ने इस समारोह को और अधिक चर्चा में ला दिया।

कलाकारों के लिए प्रेरणा का मंच
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। दिल्ली प्रेस से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि इस अवॉर्ड समारोह का उद्देश्य भोजपुरी सिनेमा के कलाकारों और तकनीशियनों को सम्मानित करना तथा क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस समारोह को और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा ताकि भोजपुरी सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान मिल सके।

भोजपुरी सिनेमा के लिए ऐतिहासिक आयोजन
पटना में आयोजित 7वां सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स समारोह भोजपुरी सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन साबित हुआ। यह केवल एक अवॉर्ड कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भोजपुरी सिनेमा की उपलब्धियों, उसकी लोकप्रियता और उसके उज्ज्वल भविष्य का उत्सव भी था। इस भव्य आयोजन ने यह साबित कर दिया कि भोजपुरी सिनेमा आज एक मजबूत और तेजी से आगे बढ़ता हुआ फिल्म उद्योग है, जो आने वाले समय में भारतीय सिनेमा के बड़े मंच पर अपनी अलग पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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