Hindi Story: पूरे गांव में दीनानाथ की थूथू हो रही थी. शादी से पहले ही उन की बेटी लक्ष्मी पेट से हो गई थी. इतने में गांव के एक लड़के प्रकाश ने लक्ष्मी का हाथ थामना चाहा. क्या था यह पूरा मामला? गां के कुछ लोग चौपाल पर बैठे थे. दीनानाथ उन से निगाह चुरा कर आड़ में छिप गए. इस समय शर्म से उन का चेहरा जमीन में गड़ा जा रहा था. वे गांव वालों के किसी सवाल का जवाब नहीं देना चाहते थे.

चौपाल पर बैठा एक आदमी बोला, ‘‘कुछ सुना आप लोगों ने?’’ ‘‘क्या कह रहे हो?’’ दूसरे ने पूछा. ‘‘यह जो दीनानाथ मुंह छिपाए खड़ा है, इस की बेटी लक्ष्मी ने मोड़ीराम के बेटे प्रकाश से गुपचुप मंदिर में जा कर शादी कर ली.’’
‘‘मगर उस की तो सगाई हो चुकी थी, फिर?’’
‘‘हां, सगाई तो हो चुकी थी, मगर लक्ष्मी पेट से है.’’
‘‘उस ने किस के साथ मुंह काला किया?’’
‘‘सुना है कि भवानी शंकर का बिगड़ैल बेटा दिनेश, जो शहर के कालेज में पढ़ रहा है, का पाप लक्ष्मी के पेट में पल रहा है.’’
‘‘अरे धीरे बोल, दीवारों के भी कान होते हैं. बात भवानी शंकर के कानों तक पहुंच गई , तब हमारी खैर नहींछोड़ो ये बातेंवैसे, लक्ष्मी के साथ बहुत बुरा हुआ.’’
‘‘जब उस के ससुराल वालों को पता चलेगा कि लक्ष्मी ब्याह के पहले ही पेट से है, तब कैसे करेंगे वे शादी.’’
‘‘इसलिए तो ताबड़तोड़ प्रकाश से शादी करा दी.’’


आगे दीनानाथ कोई बात सुन सके. वे चुपचाप गरदन नीची कर के वहां से चलते बने. अब तो पूरे गांव को पता चल चुका है कि लक्ष्मी पेट से है और प्रकाश ने उस से शादी कर ली है. प्रकाश ने किन हालात में यह शादी की, किसी को नहीं मालूम. मगर दाई से कब तक वे पेट छिपाते रहेंगे. जहां भी चार आदमी बैठते हैं,
यही चर्चा पूरे गांव में हो रही है. दीनानाथ ऊंचा मुंह कर के चल भी नहीं सकते हैं. उस दिन जब दीनानाथ खेत से घर लौटे, तब उन की पत्नी कावेरी लक्ष्मी पर चिल्ला कर कह रही थीं, ‘‘अरी नासपीटी, बता किस का पाप तेरे पेट में पल रहा है? अब तालू में जबान क्यों चिपक गई है तेरी? बोल कौन है वह? किस के साथ तू ने मुंह काला किया? आग लगे तेरी जबान को.’’


मगर लक्ष्मी कोई जवाब नहीं दे पाई. वह नीचे मुंह किए खड़ी रही. तब दीनानाथ ने कहा, ‘‘अरे कावेरी, क्यों लक्ष्मी पर चिल्ला रही हो?’’ ‘‘पूछो अपनी लाड़ली से, इस ने क्या गुल खिलाया हैं,’’ उसी तरह गुस्से से कावेरी बोलीं. ‘‘क्या गुल खिलाया इस ने, जो इस पर इतनी नाराज हो रही हो?’’ ‘‘अरे, इच्छा तो ऐसी हो रही है कि इसे गला घोंट कर मार दूं. करमजली ने हम को कहीं का नहीं छोड़ा. अब हम समाज में कैसे मुंह दिखाएंगे,’’ कावेरी का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था. दीनानाथ अब भी हालात को नहीं समझ पाए थे. वे कावेरी पर जोर देते हुए बोले, ‘‘अरे, कुछ बताओगी भी या यों ही इस तरह गुस्सा करती रहोगी?’’
‘‘तो सुन लो कान खोल कर, तुम्हारी लाड़ली पेट से है. किस के साथ इस ने काला मुंह किया, बता ही नहीं रही है,’’ यह कहते हुए कावेरी का गुस्सा सातवें आसमान पर था.


यह सुन कर दीनानाथ के होश उड़ गए. उन के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला. तब कावेरी गुस्से से बोलीं, ‘‘अब आप की जबान क्यों बंद हो गई यह सुन कर?’’ ‘‘क्यों बेटी, क्या यह सच है?’’ दीनानाथ ने जब शांत मन से यह पूछा, तब भी लक्ष्मी ने कोई जवाब नहीं दिया. कावेरी फिर गुस्से से बोलीं, ‘‘यही तो मैं पूछ रही हूं, मगर बता ही नहीं रही है.’’ ‘‘बताओ बेटी, घबराओ मतहम तुम्हारी मदद करेंगे,’’ दीनानाथ ने जब यह कहा, तब सिसकती हुई बापू के कंधे पर सिर रखती हुई लक्ष्मी मुश्किल से बोली, ‘‘बापू, भवानी शंकर के बिगड़ैल बेटे दिनेश का.’’


इस बात को सुन कर दीनानाथ और कोवरी को झटका लगा. वे दोनों कुछ बोल सके. भवानी शंकर गांव के सब से अमीर किसान थे. राजनीति में भी उन की अच्छी पकड़ थी. वे गांव के दबंग कहलाते हैं. किसी में भी हिम्मत नहीं है कि उन के खिलाफ कुछ बोले. भवानी शंकर का बिगड़ैल बेटा दिनेश शहर के कालेज में पढ़ रहा है. पढ़ क्या रहा है, वहां गुंडागर्दी कर रहा है. वह गांव में भी जिन गलियों से गुजरता है, औरतें और लड़कियां दरवाजे बंद कर लेती हैं. अगर थाने में भी रिपोर्ट लिखाओ, तब लेदे कर मामला रफादफा हो जाता है. कहने का मतलब यह है कि भवानी शंकर ने सब को खरीद लिया है. दीनानाथ ने लक्ष्मी से पूछा, ‘‘यह सब कैसे हुआ बेटी?’’


‘‘बापू, उस दिन आप शहर गए थे. खेत पर मैं अकेली ही काम कर रही थी. तभी दिनेश खेत पर आया और मुझे पकड़ लिया. मैं ने उस के चंगुल से निकलने की बहुत कोशिश की, मगर निकल सकी. उस ने मुझे जीप में डाल दिया. उस का साथी गाड़ी चला रहा था. वह उस के खेत वाली हवेली में ले गया…’’ आगे लक्ष्मी सिसकियां ले कर रोने लगी. इस समय कावेरी भी चुप हो गईं और दीनानाथ भी कुछ बोल सके. एक डर उन के भीतर बैठ गया, इसलिए उन को यह सच निगलते बन रहा है, उगलते. कावेरी का ऊपर का गुस्सा जरूर ठंडा हो गया, मगर भीतर तो भवानी शंकर के खिलाफ लावा सुलग रहा था. ‘‘अब क्या सोच रहे हो? सारे गांव में यह बात फैले, उस के पहले ही लक्ष्मण सिंह से मिल कर इस की शादी कर दो.’’  ‘‘अरे कावेरी, क्या लक्ष्मण सिंह को पता नहीं चला होगा?’’ दीनानाथ बीच में बात काट कर बोले. ‘‘अरे, आप तो यों ही बैठेबैठे बातें करते रहेंगे. जाओ, जल्दी से जल्दी शादी की तारीख तय कर के आओ,’’ जोर देते हुए कोवरी बोलीं.


‘‘जाता हूं,’’  कह कर दीनानाथ पास के गांव जाने के लिए बसस्टैंड पर कर बस का इंतजार करने लगे.
पूरे 5 घंटे बाद दीनानाथ मुंह लटकाए गांव में वापस आए. कावेरी उन का ही इंतजार कर रही थीं. वे बोलीं, ‘‘तारीख तय कर आए शादी की समधीजी से?’’ दीनानाथ ने कोई जवाब नहीं दिया, तो वे गुस्से से बोलीं, ‘‘अरे, क्या कहा समधीजी ने? यों मुंह लटकाए क्यों खड़े हो? बोलते क्यों नहीं?’’ ‘‘लक्ष्मण सिंह ने यह सगाई तोड़ दी,’’ दीनानाथ बोले. ‘‘क्यों तोड़ दी?’’ गुस्से से उफनती हुई कावेरी बोलीं. ‘‘किसी ने यह बात उन तक पहुंचा दी कि लक्ष्मी पेट से है.’’ ‘‘आग लगे उस को जिस ने यह बात उन तक पहुंचाई,’’ कावेरी बोलीं.
‘‘अब गाली देने से कुछ होगा कावेरी, फिर किसकिस को गाली देगी. इस बात का सभी को पता चल गया है,’’

दीनानाथ समझाते हुए बोले.
  ‘‘अब तो एक ही रास्ता है,’’ कावेरी बोलीं.
‘‘कौन सा?’’ 
‘‘दिनेश से कहें कि वह लक्ष्मी से शादी करे.’’
‘‘यह मुमकिन नहीं होगा कावेरी, वे बड़े लोग हैं.’’
‘‘बड़े हैं, तो इस का मतलब यह नहीं है कि ….’’
‘‘कावेरी, चुप हो जाओ. यह समय गुस्सा करने का नहीं है…’’ बीच में ही बात काट कर दीनानाथ बोले, ‘‘बड़े लोग यह साबित कर देंगे कि…’’
‘‘अरे, उस लक्ष्मी को ढूंढ़ कर लाओ, कहीं गुस्से में कर जान दे बैठे…’’ अचानक बीच में ही बात काटती हुई कावेरी बोलीं, ‘‘बिना कहे कहीं चली गई है.’’
‘‘एक मां हो कर भी तुम जवान लड़की पर अनापशनाप चिल्ला रही थीं, जबकि इतना गुस्सा करना ठीक नहीं है,’’

दीनानाथ बोले. ‘‘अरे, यह समय भाषण देने का नहीं है. जाओ उसे गांव में जा कर ढूंढ़ो. कहां गई है करमजली…’’ कावेरी फिर गुस्से से बोलीं, ‘‘फिर मैं तो उस पर गुस्सा इसलिए कर रही थी कि ऐसी हालत में अब उस से कौन करेगा शादी?’’
‘‘मैं कर रहा हूं लक्ष्मी से शादी,’’ अभी कावेरी की बात खत्म भी नहीं हुई थी कि मोड़ीराम के बेटे प्रकाश ने कर यह बात कह दी.
‘‘तुम करोगेमोड़ीराम क्या…?’’
‘‘छोड़ो बापू कोवे राजी नहीं होंगे. यही कहना चाहते हैं आप,’’ बीच में ही बात काट कर प्रकाश बोला, ‘‘मगर मैं आप की और लक्ष्मी की इज्जत की खातिर शादी करने को तैयार हूं. आप अपनी रजामंदी दें. मैं पढ़ालिखा हूं. लक्ष्मी भी पढ़ीलिखी है.
‘‘इस में लक्ष्मी का कहां कुसूर है? आएदिन इस देश में कई लड़कियों के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं. जो थाने तक पहुंचती हैं, वे तो उजागर हो जाती हैं, मगर मेरा फैसला अटल है.’’
‘‘मगर बेटा, लक्ष्मी घर में नहीं है, कहीं चली गई है,’’ कावेरी ने जब यह बात कही तब प्रकाश बोला, ‘‘मैं लक्ष्मी को यहां से 5 किलोमीटर दूर एक मंदिर में दोस्तों के साथ छोड़ कर आया हूं.’’
‘‘मगर तुम्हें लक्ष्मी मिली कहां?’’ दीनानाथ ने पूछा.
‘‘उसी भवानी शंकर के  कुएं पर खुदकुशी करने जा रही थी. जब मैं ने वजह पूछी, तब उस ने सब सचसच बताया. क्या सोच रहे हैं आप लोग?’’
वे दोनों तत्काल प्रकाश के साथ हो लिए. इस तरह प्रकाश और लक्ष्मी के बीच मंदिर में हुई शादी के वे दोनों सहभागी बने.


‘‘अरे दीनानाथ, किस धुन में जा
रहे हो. तुम्हारा घर तो पीछे छूट गया,’’ जब मानमल ने दीनानाथ से यह कहा
तब वे अतीत से वर्तमान में लौटे. वे पलट कर अपने घर में घुस गए.
घर में घुसते ही कावेरी बोलीं, ‘‘सारे गांव में हमारी थूथू हो रही है.’’
‘‘होने दो कावेरी, थोड़े दिन कह कर लोग चुप हो जाएंगे. मगर इनसानियत अब भी बची है कि प्रकाश ने लक्ष्मी से शादी कर के हमारी इज्जत बचा ली,’’ दीनानाथ ने यह बात कही.
कावेरी कुछ नहीं बोलीं, बल्कि गुमसुम खड़ी रहीं.     Hindi Story  

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