Hindi Story: फरवरी महीना आते ही दिल्ली की सर्दी पर वैलेंटाइन डे की गरमी चढ़ने लगी थी. इस बार विजय और अनामिका ने सूरजकुंड मेला देखने का प्लान बनाया था. पर अचानक से अनामिका ने अपना मोबाइल फोन औफ कर दिया था. पहले तो विजय को लगा कि कोई खास वजह होगी, पर जब 2 दिन हो गए तो उसे थोड़ी चिंता हुई.
‘‘मम्मी, अनामिका मेरा फोन नहीं उठा रही है. क्या उस ने आप से कुछ कहा था?’’ विजय ने अपनी मम्मी
से पूछा. ‘‘नहीं तो. क्या हुआ?’’ मम्मी ने रसोई में सब्जी छोंकते हुए कहा. ‘‘ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है. वह अगर अपने घर मम्मीपापा से भी मिलने जाती है तो मु?ो बता देती है. फोन तो वह कभी औफ करती नहीं है,’’ विजय ने चिंता जताई.
‘‘तुम उस के घर क्यों नहीं चले जाते?’’ पापा ने विजय से कहा.
‘‘लेकिन पापा, मु?ो तो एक हफ्ते के लिए दिल्ली से बाहर जाना है. आज
1 तारीख है, मैं 7 तारीख तक वापस आ जाऊंगा,’’ विजय ने कहा.
‘‘पर तुम्हें एक बार उस का हालचाल ले लेना चाहिए,’’ मम्मी ने कहा.
‘‘मैं उसे फोन कर लूंगा,’’ विजय ने कहा और जयपुर चला गया.
विजय ने वहां से अनामिका को कई बार फोन किया, पर उस से बात
न हो पाई. जैसे ही वह 7 तारीख को दिल्ली वापस आया तो सीधा अनामिका के घर गया.
घर पर कोई नहीं था, पर दरवाजे पर ताला भी नहीं लगा था. विजय ने कई बार डोरबैल बजाई, पर कोई दरवाजे पर नहीं आया.
लेकिन विजय का मन नहीं मान रहा था. उसे महसूस हो रहा था कि अनामिका घर पर ही है और उस के साथ कुछ सही नहीं हुआ है. वह एक खिड़की के रास्ते उस के घर में घुसने की कोशिश कर रहा था. बड़ी मुश्किल से वह घर में दाखिल हुआ. भीतर अंधेरा था. अनामिका के बैडरूम का दरवाजा भी बंद था. विजय ने खटखटाया, तो काफी देर के बाद अनामिका ने दरवाजा खोला, पर विजय को देखते है उस ने दरवाजा बंद करने की कोशिश की. विजय ने धक्का दे कर दरवाजा खोला और गुस्से में अनामिका से पूछा, ‘‘क्या हुआ है तुम्हें? तुम मेरे फोन का जवाब क्यों नहीं दे रही?’’
‘‘तुम से मतलब… मु?ो अकेला छोड़ दो. मैं कुछ दिन किसी से बात नहीं करना चाहती,’’ अनामिका बोली.
‘‘पर तुम ऐसा क्यों कर रही हो? हुआ क्या है?’’ विजय ने पूछा. ‘‘मु?ो कुछ नहीं हुआ है, बस मु?ो अकेले रहना है,’’ अनामिका बोली. ‘‘सब करो अपनी मरजी. मैं भी अपनी मरजी करता हूं और इस बालकनी से छलांग लगा देता हूं,’’ कह कर विजय अनामिका की बालकनी की रेलिंग पर चढ़ने लगा.
यह सुन कर अनामिका डर गई. उस ने विजय को कस कर पकड़ लिया और बोली, ‘‘तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो… आज के बाद कभी ऐसा मत करना.’’
‘‘क्यों नहीं कर सकता ऐसा… गाजियाबाद में भी तो 3 लड़कियों ने खुदकुशी कर ली. सब जगह यही तो
हो रहा है. जरा सा मन उदास हुआ नहीं कि दे दो अपनी जान,’’ विजय झल्ला कर बोला.
‘‘गाजियाबाद में क्या हुआ है?
तुम वहां की क्यों बात कर रहे हो?’’ अनामिका ने हैरान हो कर पूछा.
विजय थोड़ा रुक गया. उस के चेहरे पर अभी भी परेशानी के भाव थे. एक ठंडी सांस ले कर उस ने बताया, ‘‘गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में चेतन अपनी 2 पत्नियों और 5 बच्चों के साथ रहते थे. 4 फरवरी, 2026 की रात को उन की 15 साल की बड़ी बेटी निशिका, 14 साल की मं?ाली बेटी प्राची और 11 साल की छोटी बेटी पाखी ने अपने अपार्टमैंट की 9वीं मंजिल से कूद कर खुदकुशी कर ली थी.’’
‘‘यह तो बहुत बुरा हुआ. कहीं
यह किसी की साजिश तो नहीं थी?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘खबरों के मुताबिक, ट्रांस हिंडन जोन के डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया कि पुलिस ने मौके की जगह पर सीन रिक्रिएट कर के यह परखा था कि कहीं बच्चियों को जबरन धक्का देने या नीचे फेंके जाने की संभावना तो नहीं थी.
‘‘जांच में सामने आया कि जिस स्लाइडिंग खिड़की से कूदने की बात सामने आई, वहां से एक समय में केवल एक शख्स ही बाहर निकल सकता था. इस से यह साफ हुआ कि तीनों बहनों ने बारीबारी से छलांग लगाई. हालांकि, यह साफ नहीं हो सका था कि सब से पहले किस बहन ने छलांग लगाई थी.’’
‘‘यह तो बहुत ही दर्दनाक हादसा है. पुलिस ने और क्या बताया?’’ अनामिका ने चिंता जताई.
‘‘डीसीपी निमिष पाटिल ने आगे बताया कि कमरे के अंदर संघर्ष या जबरदस्ती के कोई निशान नहीं मिले थे. कमरा अंदर से बंद था, जिसे पुलिस को तोड़ कर खोलना पड़ा. खिड़की के शीशे और पूजा घर से फिंगरप्रिंट लिए गए, जिन्हें फोरैंसिक जांच के लिए भेजा गया.
‘‘पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कमरा काफी सलीके से सजाया गया था. फर्श पर परिवार के साथ लड़कियों की तसवीरें सजा कर रखी गई थीं. कमरे से एक डायरी और मोबाइल फोन अलग रखे हुए मिले थे. खिड़की तक पहुंचने के लिए प्लास्टिक के स्टूल का इस्तेमाल किया गया था.’’
‘‘उस डायरी में क्या लिखा था?’’ अनामिका ने जानना चाहा.
‘‘पुलिस के मुताबिक, डायरी में मिले सुसाइड नोट से लड़कियों के मानसिक तनाव की ?ालक मिली थी. नोट में लिखा था, ‘मार खाने से बेहतर मर जाना है’. डायरी में शादी को ले कर डर और तनाव का भी जिक्र था.
‘‘पुलिस का कहना था कि पिता द्वारा मोबाइल फोन छीने जाने और कोरियन ड्रामा देखने को ले कर हुए विवाद ने भी बच्चियों को गहरे मानसिक दबाव में डाल दिया था.’’
‘‘यह कोरियन ड्रामा क्या बला है?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘मैं ने बीबीसी की रिपोर्ट में पढ़ा था, जिस में डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया था कि इस मामले की शुरुआती जांच में यह सम?ा आया कि फोन और कोरियाई संस्कृति के प्रति लड़कियों का जुनून इस घटना की मेन वजह हो सकती है.’’
‘‘कोरियाई संस्कृति का मतलब?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘पुलिस के मुताबिक वे तीनों लड़कियां कोरियाई संगीत, ड्रामा, हस्तियों, जापानी फिल्मों और ‘डोरेमोन’ के अलावा ‘शिन चैन’ जैसे कार्टूनों
के साथसाथ औनलाइन गेम्स की
शौकीन थीं.
‘‘साथ ही वे कोरियाई कल्चर से इस हद तक प्रभावित थीं कि उन्होंने अपने नाम भी बदल लिए थे. लेकिन ‘ब्लू व्हेल’ जैसे टास्क देने से जुड़े गेम को
इस घटना की एकमात्र या मेन वजह नहीं माना जा सकता.
‘‘पोस्टमौर्टम रिपोर्ट में बताया गया कि तीनों बच्चियों की मौत शरीर से ज्यादा खून निकलने और चोट से हुई. ऊंचाई से गिरने के चलते कई हड्डियां टूटी हुई थीं. ‘‘डीसीपी निमिष पाटिल ने आगे कहा कि सुसाइड नोट में एक लाइन मारपीट की थी, लेकिन पोस्टमौर्टम रिपोर्ट में ऐसी कोई चोट नहीं मिली है. यह परिवार पैसे की तंगी की मार ?ोल रहा था और घर में मची कलह ने भी चीजें मुश्किल बना दी थीं.
‘‘कोविड के बाद परिवार को पैसे का भारी नुकसान उठाना पड़ा और
काफी कर्ज में आ गया. कुछ साल
पहले लड़कियों को परिवार ने स्कूल से निकाल लिया था.
‘‘परिवार में ?ागड़े भी होते थे. पिता बेटियों को ले कर बहुत कड़ाई बरतते थे. शुरू में इन बच्चियों के पास 2 मोबाइल थे, जिसे वे सा?ा करती थीं. लेकिन पैसे के दबाव के चलते पिता ने 6 महीने पहले एक मोबाइल को बेच दिया. फिर दूसरा मोबाइल घटना के 10-15 दिन पहले बेच दिया था.’’
‘‘क्या इस परिवार को पैसे की तंगी थी? इस मामले में आसपास के लोग क्या बोल रहे हैं?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘जब पैसे की तंगी के बारे में इन मारी गई लड़कियों के पिता चेतन कुमार से पत्रकारों ने सवाल पूछा, तो उन का कहना था, ‘‘मु?ो 20-30 लाख रुपए का नुकसान जरूर हुआ था, लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि बच्चे खुदकुशी जैसा कदम उठा लें. बच्चों ने अपने नाम तक बदल लिए थे.
‘‘पुलिस ने बताया कि चेतन कुमार की 2 पत्नियां हैं, जो आपस में सगी बहनें हैं. घर में उन के साथ उन की एक साली भी रहती हैं. अपनी दोनों पत्नियों से उन के कुल 5 बच्चे हैं.
‘‘चेतन पेशे से स्टौक ब्रोकर हैं. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उन की बेटियां कहती थीं कि पापा हम कोरिया जाएंगी. उन्हें भारतीय नामों से चिढ़ होने लगी थी.
‘‘बीबीसी ने स्थानीय लोगों से इस घटना के बारे में बात की तो सोसाइटी में इन बच्चियों के घर से ठीक 2 फ्लोर नीचे रहने वाले आरके सिंघानिया की उस रात नींद एक धमाके की आवाज से टूटी. ‘‘आवाज सुनने के बाद सोसाइटी के लोग घर से बाहर आने लगे और देखा कि जमीन पर 3 बच्चियों के शव थे, जिस के बाद पुलिस को सूचना दी गई. ‘‘सोसाइटी के सचिव राहुल कुमार ?ा ने बीबीसी न्यूज हिंदी को बताया कि जब मैं प्राइमरी एविडैंस के तौर पर ऊपर गया, तो वह कमरा अंदर से बंद था. इसी कमरे से बच्चियों के कूदने की बात कही जा रही है. पुलिस ने उस दरवाजे को तोड़ा. अंदर फैमिली की तसवीरें पूरे फर्श पर बिखरी हुई थीं और कमरे में एक सुसाइड नोट भी मिला, जिस में ‘सौरी पापा’ लिखा हुआ था.’’
‘‘यह तो बहुत उल?ा हुआ मामला है. वहां तो दहशत का माहौल बन गया होगा?’’ अनामिका बोली.
‘‘इस घटना के बाद बच्चों के बीच फोन एडिक्शन को ले कर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं. उस सोसाइटी की रहने वाली कुसुम ने मीडिया को बताया कि हमारे बच्चे रात को सो नहीं पा रहे हैं. वे इतने डरे हुए हैं. मैं मानती हूं कि कम से कम मांबाप को पता होना चाहिए कि बच्चे फोन में क्या चला रहे हैं.
‘‘वैसे, डीसीपी निमिष पाटिल ने इस मामले में बताया कि बच्चियों के सुसाइड नोट में गेमिंग ऐप्स का भी जिक्र था, जो उन की दिमागी सेहत पर नैगेटिव असर डाल रहे थे.’’
‘‘कौन से गेमिंग ऐप्स?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘बताया जा रहा है कि ये गेम्स ‘पौपी प्लेटाइम’, ‘द बेबी इन यैलो’, ‘ईविल नन’, ‘आइसक्रीम मैन’ हैं.’’
‘‘इन गेम्स में क्या है?’’ अनामिका ने हैरान हो कर पूछा.
‘‘पौपी प्लेटाइम एक डरावने माहौल का खेल है, जो बच्चों को एक सुनसान खिलौना फैक्टरी में ले जाता है, जहां अजीबोगरीब गुडि़या, अंधेरे कोने और अचानक डराने वाले सीन मौजूद होते हैं.
‘‘इस का किरदार ‘हगी वगी’ भले ही टीनएजर्स को ध्यान में रख कर बनाया गया हो लेकिन माहिर मानते हैं कि यह कंटैंट बड़े बच्चों के लिए भी मानसिक रूप से भारी पड़ सकता है.
‘‘द बेबी इन यैलो नाम का यह गेम जितना मासूम लगता है, असल में उतना ही खौफनाक है. इस में खिलाड़ी एक ऐसे बच्चे की देखभाल करता है जिस के साथ धीरेधीरे अलौकिक घटनाएं जुड़ती जाती हैं.
‘‘मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों की देखभाल जैसे सामान्य विषय को हौरर से जोड़ना छोटे बच्चों के लिए भरम और डर पैदा कर सकता है.
‘‘ईवल नन गेम में खिलाड़ी को एक डरावने स्कूल में बंद कर दिया जाता है, जहां से एक खतरनाक नन से बच कर निकलना होता है, जबकि आइस स्क्रीम गेम में एक आइसक्रीम बेचने वाले विलेन की कहानी है, जो बच्चों का अपहरण करता है. भले ही इन गेम्स का ग्राफिक्स कार्टून जैसा हो लेकिन इन
के विषय डर, कैद और अपहरण संवेदनशील बच्चों में चिंता और डर को बढ़ा सकते हैं.’’
‘‘सरकार इस बारे में क्या कर रही है?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार से सिफारिश की है कि इन गेम्स पर तुरंत बैन लगाया जाए, साथ ही यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भी भेजा जाएगा. ‘‘घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने पीडि़त परिवार से मुलाकात की. उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश देने की बात कही है कि स्कूलों को जमात 5 तक के बच्चों को मोबाइल फोन पर प्रोजैक्ट या असाइनमैंट भेजने से रोका जाए, ताकि बच्चों की मोबाइल लत को कम किया जा सके.’’ ‘‘कह तो तुम सही रहे हो. बच्चे क्या हम बड़े भी मोबाइल के फेर में फंसे हुए हैं. अगर थोड़ी देर के लिए भी मोबाइल न देखें तो ऐसा लगता है कि कुछ छूट रहा है. हम लोग किताबों और पत्रिकाओं से दूर हो रहे हैं, जबकि उन्हें पढ़ने की आदत हमें डालनी होगी.
‘‘सरकार को ऐसे गेम्स पर लगाम लगानी चाहिए, जो बच्चों को हिंसक बना रहे हैं, टास्क क्लियर करने के
नाम पर उन्हें बरगलाया जा रहा है,’’ अनामिका ने अपनी बात रखी. ‘‘और तुम ने भी मु?ो डरा दिया था. कोई इस तरह दुनिया से कटता है क्या, जो तुम पिछले इतने दिन से गायब सी हो गई थी,’’ विजय ने कहा.
‘‘सौरी विजय, हो सके तो मु?ो माफ कर देना. मेरी हरकत वाकई बचकाना थी. मैं आगे से ध्यान रखूंगी,’’ अनामिका ने इतना कहा और विजय के गले से लग गई. Hindi Story




