Feature Story: बॉक्सर मैरी कॉम सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल हो रही हैं, कारण है उनका तलाक, 1 मीडिया इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया अपनी 20 साल की शादी को तोड़ने का और अपने पति से अलग होने के विषय में और उनके दिए बयान की वजह से उन्हें ट्रोल किया जा रहा है.

मैरी कॉम कहती हैं कि उनके पति ने जीवन में कोई काम नही किया. उनका कोई कैरियर ही नहीं रहा, वे बस घर बैठकर उनकी कमाई खाते रहे और उनके सारे पैसे नशे और जुए की लत में उड़ा दिए. उनका बैंक बैलेंस खाली कर दिया.

मैरी कॉम को ट्रोल वे लोग कर रहे हैं जिन्होंने अपने जीवन मे कुछ नहीं किया. वैसे, बॉक्सर मैरी कॉम के इस बयान से समाज में एक नई बहस छिड़ गई है. लोग अब बात कर रहे हैं कि पुरुष कमाए तो घर चलाए महिला कमाई तो घर और पति सब छोड़ आई. पुरुष पढ़े सफल हुए तो अनपढ़ महिला ब्याह लाए. महिलाएं पढ़ीं, सफल हुईं तो अपना बसा-बसा घर छोड़ आईं. मैरी कॉम का निजी जीवन का फैसला समाज में नए विमर्श का विषय बन गया है.

पर जो लोग इसे महिला बनाम पुरुष कर रहे हैं वे भूल गए हैं कि इस समाज में अनपढ़ महिला का पढ़ेलिखे पुरुष के साथ ब्याहे जाने में महिलाओं की भलाई कतई नहीं थी. उन्हे ब्याहा गया पुरुषों की दासी बनाने के लिए, स्त्रियों को अनपढ़ रखा गया पढ़े-लिखे पुरुषों से ब्याहे जाने के लिए. ये स्त्रियां अगर पढ़-लिख जातीं तो अपने अधिकारों की बात करतीं, अपनी स्वतंत्रता की बात करतीं, आपसे तर्क करतीं, आपमें भरे तमाम दोषों के बावजूद आपको स्वीकारे जाने के फैसले पर विचार करतीं और ठुकरा देतीं. छोड़ जाती आपको अपने स्वाभिमान को ठेस पहुचाए जाने पर,आपके अहंकार की बलि न चढ़तीं, सवाल उठाती उन तमाम मेल प्रिविलेजेस पर जो आपको मिल रही सिर्फ पुरुष होने के नाते, आपकी दासी न बनतीं, वे तमाम रीति-रिवाज, नियमों को ठुकरातीं जो पुरुषों को स्त्रियों से श्रेष्ठ दिखाते हैं. अपने फैसले स्वच्छंद होकर स्वयं लेतीं, सोचो जरा और क्या होता अगर स्त्रियां पढ़-लिख जातीं.

बॉक्सर मैरी कॉम का जीवन भी इन संघर्षों से होकर गुजरा. उनके लिए शिखर की ऊंचाई पर पहुंचना आसान नहीं था. खेल जगत में उनका आसाधरण योगदान है. आज वे तमाम लड़कियों की प्रेरणास्रोत हैं.

मैरी का जन्म 24 नवंबर, 1982 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के छोटे से गांव कंगथेई में हुआ. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा लोकटक क्रिश्चियन मॉडल हाई स्कूल (मोइरंग) और सेंट जेवियर स्कूल से की. 9 और 10 की पढ़ाई के लिए इंफाल के आदिम जाति हाई स्कूल गईं. मैरी कॉम बॉक्सिंग में इतनी व्यस्त हो गईं कि वे अपनी मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा पास नहीं कर पाईं. उन्होंने स्कूल छोड़ दिया, लेकिन हार नहीं मानी. बाद में उन्होंने NIOS (National Institute of Open Schooling) से अपनी स्कूली परीक्षा पूरी की. मणिपुर के चुराचांदपुर कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन (स्नातक) पूरी की.

मैरी कॉम के पिता को मुक्केबाजी पसंद नहीं थी क्योंकि उन्हें डर था कि इससे मैरी का चेहरा खराब हो जाएगा और उनकी शादी में दिक्कत आएगी. मैरी कॉम बचपन में एथलेटिक्स (दौड़) में रुचि रखती थीं, लेकिन उनकी रुचि मुक्केबाजी में तब जागी जब 1998 में मणिपुर के बॉक्सर डिंग्को सिंह ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. मैरी ने कई सालों तक अपने पिता से छिपकर ट्रेनिंग ली. उनके पिता को तब पता चला जब 2000 में उनकी फोटो अखबार में छपी कि उन्होंने स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीत ली है.

2005 में मैरी कॉम ने कुरंग ओन्लर कॉम (Karung Onler Kom) से शादी की. उनके चार बच्चे हैं. 2007 में उन्होंने जुड़वां बेटों (रेचुंगवर और खुपनेइवर) को जन्म दिया. इसके बाद 2013 में एक और बेटा (प्रिंस) और 2018 में उन्होंने एक बेटी (ऑटम) को गोद लिया.

मैरी कॉम ने 2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018 में गोल्ड मैडल जीते. विश्व चैंपियनशिप के इतिहास में 8 पदक (6 स्वर्ण, 1 रजत, 1 कांस्य) जीतने वाली वे एकमात्र मुक्केबाज (पुरुष या महिला) हैं. जब पहली बार महिला मुक्केबाजी को ओलंपिक में शामिल किया गया, तब मैरी कॉम ने कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर इतिहास रच दिया. वे ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बनीं.
2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता. वे एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं. इसके अलावा उन्होंने 2010 में कांस्य पदक भी जीता था. 2018 के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

मैरी कॉम का एशिया में एकतरफा दबदबा रहा है: उन्होंने इस प्रतियोगिता में कुल 5 स्वर्ण (Gold) और 2 रजत (Silver) पदक जीते हैं.

खेलों में मैरी कॉम के असाधारण योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा गया है : पद्म विभूषण (2020): भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान. पद्म भूषण (2013): भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान. मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2009): भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान. पद्मश्री (2006): चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान. अर्जुन पुरस्कार (2003): खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए.

2016 में भारत के राष्ट्रपति ने मैरी कॉम को संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) के लिए मनोनीत किया. वे दुनिया की नंबर 1 महिला मुक्केबाज (48 किलोग्राम वर्ग) रह चुकी हैं. उन्होंने शादी और जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद रिंग में वापसी की और विश्व चैंपियन बनीं, जो खेल जगत में दुर्लभ माना जाता है.

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