Geo Politics. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार की गैरकानूनी घुसपैठियों की धरपकड़ और कानूनी ढंग से आए छोटे से गुनाहगारों को वापस भेजने की पौलिसी ने अब देश के बेरोजगार युवाओं का अमेरिकी ड्रीम खत्म कर दिया है. खेत और मकान बेच कर लाखों रुपए लगा कर असलीनकली वीजा ले कर अमेरिका या कई देशों में घूमनेघामने के लिए घुसना अब बेकार है. हालांकि अभी भी लाखों भारतीय लड़के वहां हैं और कम से कम भारत से ज्यादा कमा रहे हैं.
अमेरिका में कमाई इसलिए हो रही है क्योंकि गोरे अमेरिका ने अपना कुछ खास सामान जैम मोबाइल की तकनीक, इंटरनैट, यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स दुनियाभर को खरीदने की लत डाल दी है. कुछ अमेरिकी युवाओं की देन जिस पर बाहर के अक्लमंद लोगों ने दिमाग लगाया, ने अमेरिका को मालामाल कर दिया है और वहां के गोरे समझ रहे हैं कि उन के पास दुनिया की चाबी है.
अमेरिकी ड्रीम अभी फिलहाल ठंडा हुआ है पर बंद नहीं हुआ है क्योंकि अब गोरे अमेरिकी उसी तरह मौजमस्ती के आदी हो गए हैं जैसे हमारे यहां के पंडेपुजारी और उन के पौलिटिकल सरकारी नौकर व बिजनैसमैन भक्त. अमेरिकियों से अब काम नहीं हो पाएगा. अमेरिका में सैकड़ों पंजाबी युवा बड़ेबड़े ट्रक चला रहे हैं क्योंकि गोरे हट्टेकट्टे भी उस तरह की मुसीबत वाला मेहनती काम नहीं करना चाहते. खेतों में ट्रैक्टरों, थ्रैशरों को चलाना, लोडिंगअनलोडिंग करना, टैक्सियां चलाना, सफाई करना जैसा काम या तो वहां के कालों के हाथों में है या भारत जैसे देशों से गए लोगों के हाथों में.
पंजाब से गए लड़कों को न कर के भी इतनी अंगरेजी आ जाती है कि वे दूसरे देशों के भगोड़ों से ज्यादा अच्छा काम पा लेते हैं. इस के बावजूद डंकी रूट अब ठंडा तो रहेगा. दूसरे देशों में भाषा की दिक्कत रहेगी. यूरोप के देशों में अब भारतीय मूल के लोग दिख जाएंगे पर उन्हें यूरोप में सैटल होने में वक्त लगता है. यूरोप के देश छोटेछोटे हैं, लोग छोटेसंकरे मकानों में रहते हैं, जहां छिपने की जगहें कम हैं. यूरोपीय दूसरे लोगों को आसानी से मिलाते भी नहीं हैं.
जरमनी, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस सब देशों में अब बाहरी लोगों को आने से रोकने की मांग बढ़ने लगी है. जब से मुसलिम कट्टरपंथी गोलियों की बरसात करने लगे हैं और हिंदू कट्टरपंथी हर गोल पत्थर को पूजने लगे हैं व हर पेड़ की जड़ को पानदान समझने लगे हैं, साफसुधरा, डिसिप्लिन वाले यूरोपीयन बाहरी लोगों को सिरदर्द समझने लगे हैं.
भारत के युवा वर्ग के पास अब एक ही काम है, किसी मंदिर, मसजिद, गुरुद्वारे से चिपक जाओ और मुफ्त की खाओ. जब तक इस देश में बेवकूफ भक्त हैं, बहुत से अपनी मेहनत का एकचौथाई तक निठल्लों के खिला देंगे. डोनाल्ड ट्रंप की पुलिस के डर में रहने से यहां रहो और दूसरों को डरा कर रहो. हाथ में एक लाठी और अपने जैसे 6-7 का साथ होना वसूली के लिए काफी है.
कांग्रेस को केरल में कौर्पोरेशनों, नगर निकायों, जिला पंचायतों के चुनावों में अपनी ही तरह के भाजपा विरोधी लैफ्ट फ्रंट के मुकाबले अच्छी बढ़त मिली है. हालांकि भाजपा को भी कुछ फायदा हुआ है पर यदि भाजपा की अलगाववादी हिंदूमुसलिम पौलिसियां चलती रहीं और वहां भी हर चर्च और मसजिद के नीचे हिंदू मंदिर निकलने लगे तो वह लैफ्ट और कांग्रेस दोनों को हरा देगी.
भाजपा की खासीयत है कि उस की पुरोहितों की जमात पिछले 50 सालों से रातदिन एक कर के लोगों को पौराणिक हिंदू धर्म का पाठ बड़ी तेजी से पढ़ा रही है. चूंकि पौराणिक हिंदू धर्म के शिकार के लोगों के पास न लिखने की कलम है, न पढ़ने की समझने वे बहकावे में आ कर अपनी रोजीरोटी की जगह राम, शिव और किसी और देवीदेवता को बचाने में जुट जाते हैं.
अगर एक को सिर्फ 5 लोग 500 लोगों को हर रोज बारबार सुनाते रहें तो कुछ दिनों में 500 में से
200-250 उस को सच मानने लगते हैं. भाजपा ने ऐसे लोगों की फौज तैयार कर ली है जो ?ाठ को फैलाने की ही नौकरी करते हैं. उन्हें पैसे भी मिलते हैं, साधन भी मिलते हैं और चूंकि उन के पास केंद्र सरकार है, वे सैकड़ों के फंसे काम भी करवा सकते हैं.
जब अपना काम निकलवाना होता है तो सच मानने में हर्ज नहीं होता. हर राज्य हमेशा यही करता रहा है. आखिर यह देश यों ही 2,000 साल उन लोगों का गुलाम नहीं बना जो यहां सिर्फ व्यापार करने या इसे लूट कर लौट जाना चाहते थे. इन लुटेरों और व्यापारियों को जल्दी ही पता चल गया था कि यहां के लोग आसानी से ?ाठ का शिकार बन जाते हैं. उन्होंने पहले यहीं के बोलने को साथ मिला लिया, उन को उन का हिस्सा दिया पर खुद बड़ा हिस्सा खाने लगे, यहीं रह कर.
1947 में हम आजाद हुए पर नाकाम करने वाले से छुटकारा न मिला. वे अलगअलग शक्ल में आते रहे हैं. कभी एक पार्टी और ?ांडे के नाम पर तो कभी दूसरी के नाम पर. जो सुधार दिखता है वह साइंस की बदौलत है. यह सुधार अफ्रीका में भी हुआ, तिब्बत में भी हुआ, सहारा के रेगिस्तान में भी हुआ. आज देश में फिर मंदिर ज्यादा बन रहे हैं, फैक्टरियां कम. धर्म की दुकानें ज्यादा बन रही हैं, स्कूलकालेज कम.
लोगों को बहकाने और बरगलाने की कीमत देश ने पहले भी दी है, आज भी दे रहा है और आगे भी देगा. केरल एक कोना बचा था जहां लोग समझदार, पढ़ेलिखे थे. अब वह भी अनपढ़ों का राज्य बनता जा रहा है, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान की तरह का. Geo Politics




