मायावती की सोच में राजनीतिक लचीलापन नहीं है. वह बहुजन समाज पार्टी को अपनी निजी जायदाद समझ कर काम कर रही हैं. यही वजह है कि 4 बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री रहने के बाद भी उनको राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं माना जाता.