सरस सलिल विशेष

नए जमाने के एक प्रेमी ने जब अपनी प्यारी और चुलबुली प्रेमिका के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो उस की प्रेमिका ने अपनी शर्तों की लिस्ट उस के सामने पेश कर दी. ‘‘ठीक है. मैं तुम्हारा प्रस्ताव स्वीकार करती हूं. लेकिन, क्या तुम मेरी शर्तों के मुताबिक शादी के बाद मुझे खुश और सुखी रखोगे?’’

प्रेमी ने उस के नजदीक सरकते हुए कहा, ‘‘तुम जल्दीजल्दी अपनी शर्तें बताओ. मैं हर हाल में तुम्हें खुश और सुखी रखूंगा.’’

प्रेमिका ने एक मीठी मुसकान अपने गुलाबी होंठों पर लाते हुए कहा, ‘‘मैं नए जमाने की लड़की हूं. मुझे नएनए डिजाइन के बदलते फैशन के कपड़े पहनने का शौक है. क्या तुम मेरा यह शौक पूरा करोगे?’’

‘‘हां, बिलकुल. तुम अपनी दूसरी शर्त बताओ?’’ प्रेमी उतावला हुआ जा रहा था. ‘‘मुझे घूमनेफिरने का भी शौक है. क्या तुम मुझे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर घुमाने ले जाओगे? पैट्रोल पर पैसा खर्च करते वक्त अगर चीखोगेचिल्लाओगे, तो मैं तुम्हारे दिमाग की चकरी यानी पहिया घुमा दिया करूंगी,’’ प्रेमिका के गुलाबी होंठों पर फैली मीठी मुसकान में अब मजाक भी शामिल हो चुका था. ‘‘हांहां, मैं तुम्हें हफ्ते में 2-3 दिन दूर या नजदीक कहीं घुमानेफिराने ले जाया करूंगा. तुम अपनी तीसरी शर्त भी पेश करो?’’ वह बेकरार हुआ जा रहा था.

‘‘सुनो, आगे सुनो. शादी के बाद तुम मुझ से लड़ाईझगड़ा मत करना. गाली तो कभी मत देना. मैं तुम्हारे घर में जा कर कपड़े नहीं धोऊंगी. झाड़ूपोंछा नहीं लगाऊंगी. बरतन साफ नहीं करूंगी. बोलो, मेरी यह शर्त भी मंजूर है?’’ ‘‘डार्लिंग, तुम्हें कपड़े धोने, झाड़ूपोंछा लगाने, बरतन साफ करने का काम नहीं करना पड़ेगा. हमारे घर में ये सब काम एक बाई करती है…

‘‘हां, यह बताओ कि चाय या कौफी बना कर पिला दिया करोगी? खाना बना कर खिला दिया करोगी? कहीं बेलन का इस्तेमाल एक मिसाइल की तरह तो नहीं किया करोगी?’’ ‘‘मेरे महबूब, मैं उन मौडर्न लड़कियों में से नहीं हूं, जिन्हें चायकौफी बनाना नहीं आता. खाना पकाना नहीं आता. जिन का पकाया भोजन खा कर कोई भी बीमार हो जाए.

‘‘मैं ने अपनी मरजी से खाना वगैरह बनाने का काम अच्छी तरह सीखा हुआ है. बड़ेबड़े शैफ भी मेरी मम्मी का मुकाबला नहीं कर सकते.’’ ‘‘यों तो प्यारमुहब्बत में कोई शर्त नहीं होनी चाहिए. खैर… तुम्हारी कोई और शर्त हो, तो वह भी बताओ?’’ अपनी होने वाली सास की तारीफ सुन कर प्रेमी जैसे जलभुन गया था. उस की आवाज ही बदल गई थी. आवाज में खनक जैसे कहीं खो गई थी.

प्रेमिका सतर्क हुई, ‘‘क्या हुआ? अभी से रंग बदलने लगे? मेरी शर्तें सुनसुन कर बेचैन क्यों हो रहे हो? ऐ मेरे जानू, आजकल घर बसाना खालाजी का घर नहीं है कि कोई भी मुंह उठाए इस में घुसा चला आए.’’ प्रेमिका ने चुटकी लेते हुए आगे कहा, ‘‘मेरी अगली शर्त यह है कि मुझे मेकअप करने का बढि़या व महंगा सामान ले कर दिया करोगे या मुझे खुद खरीदने दिया करोगे. मुझे सजनेसंवरने का भी बहुत ज्यादा शौक है. मंजूर है?’’

‘‘तुम अपना यह शौक भी बेफिक्र हो कर हमारे घर में पूरा कर सकती हो. तुम कहोगी, तो मैं आसमान के तारे तोड़ कर तुम्हारी मांग में सजा दिया करूंगा, मेरी जानेमन. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं.’’ ‘‘देखो, फिल्मी डायलौग बोल कर मुझे लुभाने की कोशिश मत करो. यों भी मुझे मक्खनबाजी पसंद नहीं है. इस से दिमाग मोटा हो जाता है. यह तो शादी के बाद ही पता चलेगा कि तुम्हारा मेरे प्रति प्यार और लगाव कितने साल तक पूरे रंग में कायम रहता है.

‘‘कई मर्दों का प्यार घटिया और सस्ते मेकअप के सामान की तरह जल्दी फीका पड़ जाता है, बल्कि ऐक्सपायरी दवा की ऐलर्जी की तरह तड़पाने लगता है, सताने लगता है.’’ ‘‘ऐ मेरी महबूबा, कैसी बातें करती हो? मैं दूसरे मर्दों जैसा नहीं हूं. मुझ पर भरोसा रख कर अपनी अगली शर्त भी लगे हाथ पेश करो?’’

‘‘मुझे लैपटौप और स्मार्ट फोन पर अपनी फ्रैंड्स के साथ चैटिंग करने से न तो तुम रोकोगे और न ही तुम्हारे परिवार का कोई और सदस्य ऐसा करेगा. बोलो, मंजूर है?’’ ‘‘हां, मंजूर है. आगे बोलो?’’ प्रेमी ने पूरा मुंह खोल कर उबासी लेते हुए कहा. अपनी प्रेमिका की शर्तें सुनसुन कर उस के कानों में ‘सांयसांय’ की आवाज गूंजने लगी थी.

‘‘मैं ने अपने घर में रूखासूखा भोजन कभी नहीं खाया. दालें व सब्जियां महंगी होने के बावजूद तुम रोज बदलबदल कर चीजें लाया करोगे. और हां, साथ में अदरक, धनिया, टमाटर व सलाद का सामान भी. बिना सलाद के भोजन का क्या स्वाद?’’ ‘‘हमारा पूरा परिवार बेशक भूखे पेट रहे, लेकिन तुम्हें खानेपीने को मिलेगा.’’

‘‘शाबाश, मेरे प्रेमी. तुम सचमुच मुझे बहुत ज्यादा प्यार करते हो,’’ खुशी में प्रेमिका ने उसे चूम लिया. प्रेमी के मन में तरंगें पैदा हो गईं. पूरे तन में जैसे बिजली का हलका सा करंट दौड़ गया. प्रेमी के प्यार के लोहे को गरम देख कर प्रेमिका ने घर में एयरकंडीशनर फिट कराने की शर्त भी रख दी.

यह शर्त सुन कर प्रेमी के लहू में आया उबाल ठंडा पड़ गया. वह उस के पास से झट उठ खड़ा हुआ और बोला, ‘‘तुम्हारी बाकी सभी शर्तें मुझे स्वीकार हैं, लेकिन एयरकंडीशनर फिट कराने वाली शर्त मंजूर नहीं, क्योंकि बिजली इतनी ज्यादा महंगी हो चुकी है कि लोग पंखेकूलर चलाने में भी डरने लगे हैं. ‘‘बिजली के भारीभरकम बिल अदा करने में नाकाम रहने पर मेरे पापा घर छोड़ कर कहीं चले गए हैं. लाख ढूंढ़ने पर भी वे आज तक हमें नहीं मिले. मेरी मम्मी का रोरो कर बुरा हाल हो गया. क्या तुम चाहती हो कि शादी के बाद मैं भी घर छोड़ कर चला जाऊं और फिर कभी वापस न आऊं?’’

अब प्रेमिका का उतरा चेहरा देखने लायक था.