सरस सलिल विशेष

यह दिलचस्प और हैरान कर देने वाला वाकिआ मध्य प्रदेश में भोपाल के परवलिया थाना इलाके का है. 9 जुलाई, 2016 को एक नौजवान जीवनलाल (बदला हुआ नाम) 20 साला सविता (बदला हुआ नाम) को गाजेबाजे के साथ ब्याह कर लाया था.  जिस ने भी बहू का मुंह देखा, वह उस की तारीफ किए बगैर नहीं रह सका.

मेहमानों की आवाजाही हफ्तेभर तक चली और बाकायदा सारे नेगदस्तूर भी हुए. जीवनलाल के घर वालों की थकान अभी पूरी तरह उतरी भी नहीं थी कि शादी के ठीक 10 दिन बाद यानी 19 जुलाई, 2016 को सविता के पेट में दर्द होने लगा.

बहू की हालत देख घबराए घर वाले उसे अस्पताल ले गए, तो पता चला कि यह कोई मामूली पेट दर्द नहीं था, बल्कि सविता मां बनने वाली थी. इस बात पर जीवनलाल और उस के घर वालों के पैरों के नीचे की जमीन ही खिसक गई.

सविता ने अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया, तो बजाय बधाइयों के उसे ताने सुनने पड़े.

गुस्साए ससुराल वालों ने सविता के मायके वालों को शादी के महज 10 दिन बाद बच्चा होने की खबर इस चेतावनी के साथ भेजी कि तुरंत आ कर बात करो, तो सविता के घर वाले भागेभागे यह सोचते हुए आए कि यह चमत्कार कैसे हो गया.

ज्यादती कहें या…

अब एक सविता ही थी, जो इस राज से परदा हटा सकती थी. लिहाजा, दोनों के घर वालों ने उस से कड़ाई से पूछा, तो उस ने सच उगल दिया.

तकरीबन एक साल पहले गांव के कांशीराम नाम के शख्स ने उस से ज्यादती की थी और धौंस दी थी कि अगर किसी को बताया तो खैर नहीं. उस ने सविता को बदनाम करने और जान से मारने की धमकी भी दी थी.

डरीसहमी सविता चुप रही, तो कांशीराम उस के साथ ज्यादती करने लगा. पर अपने पेट से हो जाने की बात सविता नहीं समझ पाई. इसी दौरान उस की सगाई जीवनलाल से हो गई और सालभर बाद शादी भी हो गई, तो वह ससुराल परवलिया चली आई.

बात पुलिस तक पहुंची, तो उस ने सविता के बयान के बिना पर कांशीराम को बलात्कार के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया. पर इधर जीवनलाल की हालत खस्ता थी, जो शादी के 10 दिन बाद ही बाप बन बैठा था.

इस दिलचस्प वाकिए में एक और मोड़ सविता ने यह कहते हुए भी पैदा कर दिया कि सगाई के बाद अकसर जीवनलाल भी उस से मिलने आता रहता था. चूंकि वह उस का होने वाला पति था, इसलिए वह उसे भी सैक्स करने से मना नहीं कर पाती थी.

लिहाजा, एक उम्मीद इस बात की भी उस ने पैदा कर दी कि मुमकिन है कि बच्चे का बाप कांशीराम नहीं, बल्कि जीवनलाल ही हो.

चूंकि सविता दोनों के साथ एक ही वक्त में सैक्स कर रही थी, इसलिए यह तय कर पाना मुश्किल हो गया था कि आखिरकार बच्चे का असली बाप कौन है?

बीच का रास्ता पुलिस वालों ने यह निकाला कि बेहतर होगा कि सविता और कांशीराम का डीएनए टैस्ट कराया जाए, जिस से यह साबित हो सके कि आखिरकार बच्चा है किस का? उन दोनों के खून का सैंपल जांच के लिए पुलिस वालों ने लैबोरेटरी भेज दिया.

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अगर और मगर

जांच रिपोर्ट जब आएगी, तब आएगी, जिस में अगर बच्चे का पिता वह नहीं निकला, तो भी वह इस बात पर कलपता रहेगा कि उस की बीवी अपने ही पड़ोसी की ज्यादती का शिकार हुई थी और उस ने यह बात सगाई के बाद भी छिपा कर रखी थी, यानी होने वाले पति पर भरोसा नहीं किया था.

लेकिन अगर बच्चा कांशीराम का निकला, तो भी वह कहीं का नहीं रह जाएगा. वजह, मुकदमा तो कांशीराम पर चलेगा, लेकिन अदालत का फैसला आने तक एक तरह से सजा उसे ही भुगतनी पड़ेगी.

शादी के 10 दिन बाद ही बच्चा हो जाने पर लोग और नातेरिश्तेदार उस पर हंस रहे हैं. इस पर सविता ने यह खुलासा कर नया सस्पैंस पैदा कर दिया कि वह तो होने वाले पति के साथ भी हमबिस्तर होती थी.

चूंकि पुलिस ने कांशीराम के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया है, इसलिए जीवनलाल सविता पर बदचलनी का इलजाम भी नहीं लगा सकता. यानी तलाक की वजह बीवी से शादी के 10 दिन बाद ही बच्चा पैदा होना वह बताएगा तो भी तलाक की राह आसान नहीं होगी, क्योंकि सविता की इस में कोई कानूनन गलती नहीं मानी जाएगी.

ऐसी सूरत में जीवनलाल के वकील की दलील अगर यह रहेगी कि सविता और कांशीराम के संबंध रजामंदी से बने थे, तो यह बात कांशीराम के फायदे की होगी और वह इस बाबत जीवनलाल की हां में हां ही मिलाएगा, ताकि बलात्कार के इलजाम से बरी हो सके.

होती है सौदेबाजी

इस मामले का पूरा सच सामने आने में अभी वक्त है, लेकिन भोपाल के एक वकील विजय श्रीवास्तव की मानें तो ऐसे मामले कभीकभार सामने आते हैं, जिन में सजा बेगुनाह पति को भुगतनी पड़ती है.

भोपाल की जिला अदालत में इस अनूठे केस की चर्चा बड़े दिलचस्प तरीके से हो रही है, जिस का एक पहलू यह भी है कि गांवदेहात तो दूर की बात है, शहरों में भी पेट से हो आई लड़कियों की शादी आम बात है. जिस के बाबत तगड़ी कीमत दहेज की शक्ल में लड़की वाले लड़के वालों को देते हैं.

उन का मकसद लड़की की गलती छिपाना और अपनी इज्जत बचाना रहती है, क्योंकि बिनब्याही लड़की के मां बनने पर जो बदनामी होती है, वह पैसे से कहीं ज्यादा अहम होती है.

कई मामलों में तो पहले ही लड़के और उस के घर वालों को पेट से होने की बात बता दी जाती है, जिस से लड़की को बाद में परेशानी न उठानी पड़े. इस बाबत मुंहमांगी कीमत लड़के को दे दी जाती है.

आमतौर पर पेट से हुई ऐसी लड़कियों को अपनाने वाले लड़के निकम्मे या जरूरतमंद बेरोजगार या फिर किसी ऐब की गिरफ्त में आए हुए होते हैं. जिन के लिए शादी का मकसद एक घरवाली होना भर है.

कुछ मामलों में कमजोरी और नामर्दी के शिकार भी आंखों देखी मक्खी निगलने की कीमत वसूलते हैं.

लेकिन जीवनलाल जैसे आम पतियों की आफत किसी सुबूत की मुहताज नहीं. जिन के लिए शादी जी का जंजाल बन जाती है और जो किसी तरह की दरियादिली दिखाने में भरोसा नहीं करते. इस के बाद भी तलाक के लिए उन्हें अदालत के चक्कर काटने पड़ें और बीवी को गुजारा भत्ता देना पड़े, तो यह उन के साथ ज्यादती ही कही जाएगी.

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