सरस सलिल विशेष

मर्दों के बजाय औरतों के नाजुक अंगों की बनावट इस तरह की होती है, जिन में बीमारियों वाले कीटाणु आसानी से दाखिल हो सकते हैं. इस की वजह से उन में तमाम तरह की बीमारियां देखने को मिलती हैं.

ये बीमारियां मर्दऔरत के असुरक्षित सैक्स संबंध बनाने, असुरक्षित बच्चा जनने, माहवारी के दौरान गंदे कपड़े का इस्तेमाल करने व अंगों की साफसफाई न रखने की वजह से होती हैं.

इस से औरतों के अंगों पर घाव होना, सैक्स संबंध बनाते समय खून का बहना व तेज दर्द, पेशाब में जलन व दर्द, अंग के आसपास खुजली होना, जांघों में गांठें होना व अंग से बदबूदार तरल जैसी चीज निकलने व मर्दों के अंग पर दाने, खुजली, घाव जैसी समस्याओं से दोचार होना पड़ता है.

अगर इन का समय से डाक्टरी इलाज न कराया जाए तो औरतों में बांझपन, एचआईवी एड्स, गर्भाशय में गांठ व कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां जन्म ले सकती हैं.

अकसर औरतों में होने वाली अंदरूनी बीमारियों में वे समय से इलाज न करा कर झाड़फूंक जैसे अंधविश्वासों में पड़ कर शारीरिक, माली व दिमागी शोषण का शिकार हो जाती हैं.

12वीं जमात तक पढ़ी शीला को कुछ दिनों से पेड़ू में दर्द की शिकायत थी. इस के बाद उस के अंग के आसपास दाने निकलने शुरू हो गए और फिर बदबूदार पानी बहने लगा.

शीला ने अपनी  यह समस्या पड़ोस की एक औरत को बताई, तो उस ने बताया कि उसे किसी बुरी आत्मा के साए ने जकड़ लिया है. एक तांत्रिक बाबा हैं, जो उस की इस समस्या का हल कर सकते हैं.

शीला बाबा के पास पहुंची, तो बाबा ने बताया कि उस के ऊपर किसी चुड़ैल का साया है, जिस की वजह से उसे यह समस्या हो रही है.

शीला ने बाबा से अपनी इस समस्या का उपाय पूछा, तो बाबा ने कहा कि इस के लिए अनुष्ठान करना पड़ेगा, जिस पर तकरीबन 20 हजार रुपए का खर्च आएगा.

शीला ने अपने पति को बिना बताए उस बाबा को 20 हजार रुपए दे दिए और झाड़फूंक कराना शुरू कर दिया. लेकिन जब 2 महीने बीतने के बाद भी शीला की समस्या घटने के बजाय और बढ़ गई, तो उस ने अपने पति को यह बात बताई.

शीला का पति पढ़ालिखा था. उस ने शीला को समझाबुझा कर एक लेडी डाक्टर को दिखाया, तो डाक्टर ने शीला को अंग की बीमारी बताई.

उस डाक्टर ने शीला और उस के पति का एकसाथ इलाज किया और शीला कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो गई.

इस सिलसिले में डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि अकसर मर्दऔरत द्वारा असुरक्षित सैक्स संबंध बनाने की वजह से अंग में इंफैक्शन की शिकायत हो जाती है. यह समस्या औरत से मर्द में या मर्द से औरत में फैलने की वजह बनती है.

अंग में इंफैक्शन की वजह से औरत में पेशाब करते समय दर्द या जलन की तकलीफ बढ़ जाती है. इस के अलावा संबंध बनाते समय औरत को तेज दर्द होता है, वहीं मर्दों में अंग से स्राव, अंडकोषों में दर्द, अंग पर दाने व पेशाब करते समय दर्द व जलन की समस्या देखने को मिलती है.

सरस सलिल विशेष

ये सभी समस्याएं इंफैक्शन की वजह से होती हैं, न कि भूतपे्रत या टोनेटोटके की वजह से. ऐसे में इन बीमारयों का इलाज झाड़फूंक से कराना कभीकभी जानलेवा भी साबित हो जाता है.

अगर किसी औरत या मर्द में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें अपने नजदीकी अस्पताल में जा कर जरूर डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए.

बांझपन में झाड़फूंक

अकसर औरतों में बच्चा न होने की समस्या देखने को मिलती है, जो कई वजह से होती है. अगर औरत की बच्चेदानी में किसी तरह की गांठ हो या उसे किसी तरह का इंफैक्शन हो, तो बच्चा पैदा होने में यह वजह रुकावट बनती है. ऐसे में बहुत सी औरतें बच्चा पाने की लालसा में झाड़फूंक करने वाले बाबाओं के पास चली जाती हैं, जहां उन्हें बच्चा तो नहीं पैदा होता है, बल्कि बाबाओं द्वारा माली व शारीरिक शोषण जरूर झेलना पड़ जाता है.

कभीकभी पाखंडी बाबाओं द्वारा बच्चा पैदा करने के नाम पर झाड़फूंक करने की आड़ में औरतों की इज्जत भी लूट ली जाती है, जिस के चलते कभीकभी उन के बच्चा ठहर जाता है. औरतें ये बातें इसलिए छिपा जाती हैं, क्योंकि उन्हें बांझपन के ताने से छुटकारा मिल जाता है.

ऐसे तमाम मामले सामने आते रहते हैं, जिन में झाड़फूंक करने वाले पाखंडी बाबाओं द्वारा औरतों की इज्जत लूटने की वारदातें सामने आती हैं. बाद में पोल खुलने पर इन बाबाओं को जेल की हवा भी खानी पड़ती है.

डाक्टर प्रीति मिश्रा के मुताबिक, अकसर किशोरावस्था से ही नाजुक अंगों की साफसफाई न करने की वजह से औरतों के अंग में इंफैक्शन हो जाता है, जो उन में बच्चा न पैदा होने की समस्या को जन्म देता है. इस हालत में औरतों को चाहिए कि वे अपने परिवार के लोगों के साथ बातचीत कर के किसी अच्छे डाक्टर को अपनी समस्या बताएं.

बांझपन आज के दौर में शाप नहीं रहा है, बल्कि इस का समय से इलाज कराने से औरतें आसानी से मां बन सकती हैं. अगर किसी औरत या मर्द की बच्चा पैदा करने की कूवत में किसी तरह की कमी होती है, तो पतिपत्नी आपसी रजामंदी से टैस्ट ट्यूब बेबी या किराए की कोख से भी औलाद का सुख ले सकते हैं.

एचआईवी का खतरा

सामाजिक संस्था ‘गौतम बुद्ध जागृति समिति’ के सचिव श्रीधर पांडेय का कहना है कि अकसर औरत या मर्द में से किसी एक के अंग में होने वाला इंफैक्शन उस के साथ सैक्स करने की वजह से दूसरे साथी में चला जाता है, जिसे एसटीडी यानी यौन संचारी रोग के नाम से जाना जाता है. यह बीमारी मर्द व औरत द्वारा मुख मैथुन या गुदा मैथुन, संक्रमित अंगों को आपस में रगड़ने की वजह से होती है.

इस के अलावा मर्द का इंफैक्शन वाला वीर्य जब औरत के अंग में जाता है, तो मर्द की बीमारी औरत को भी लग जाती है. इस हालत में इलाज की जगह बाबाओं से झाड़फूंक कराना न केवल घातक साबित होता है, बल्कि समय से इलाज न होने से औरत और मर्द में एचआईवी होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

श्रीधर पांडेय का आगे कहना है कि उन की संस्था नोएडा, उत्तर प्रदेश में एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहयोग से एचआईवी एड्स से बचाव को ले कर जागरूकता का काम कर रही है. इस दौरान वे तमाम ऐसे एचआईवी पीडि़तों से मिले, जो पहले अंग के इंफैक्शन से पीडि़त थे और झाड़फूंक व इलाज में देरी होने की वजह से इन का यह इंफैक्शन एचआईवी में बदल गया.

इस तरह के लोगों में औरतों की तादाद सब से ज्यादा थी, क्योंकि औरतें अकसर अपनी बीमारी का इलाज डाक्टर से कराने के बजाय झाड़फूंक में ज्यादा विश्वास रखती हैं, जिस की वजह से उन को इस तरह की घातक बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि अगर औरत या मर्द के अंगों में किसी तरह की खुजली, दाने या घाव दिखाई पड़ते हैं, तो इस का समय रहते इलाज शुरू कर देना चाहिए, जिस से बीमारी के फैलने का खतरा कम हो जाता है. अगर यह समस्या औरत या मर्द में से किसी एक को है, तो उस दौरान दोनों को आपस में संबंध बनाने से बचना चाहिए या सैक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए.

अंग के इंफैक्शन में साफसफाई का खास खयाल रखना चाहिए. साथ ही, किसी तरह के अंधविश्वास से दूरी बना कर रखने में ही भलाई होती है.

डाक्टर प्रीति मिश्रा कहती हैं कि औरतों में सैक्स संबंधी बीमारियों के नतीजे ज्यादा घातक होते हैं, जिस से वे तनाव का भी शिकार होती हैं. ऐसे में वे झाड़फूंक के अंधविश्वास में आसानी से पड़ जाती हैं.

अगर किसी औरत में अंग के इंफैक्शन के लक्षण दिखाई दें, तो उसे अपनी समस्या अपने पति व परिवार वालों को बिना संकोच के बतानी चाहिए, जिस का समय रहते इलाज किया जा सके.

डाक्टर प्रीति मिश्रा आगे बताती हैं कि अकसर अंग में इंफैक्शन की वजह से पैदा होने वाला बच्चा या तो समय से पहले पैदा हो जाता है या बेहद कमजोर व अंधा भी हो सकता है. मां में इंफैक्शन की वजह से उस के बच्चे को निमोनिया जैसी बीमारियां भी आसानी से जकड़ लेती हैं.

अगर कोई औरत अपने अंदरूनी अंग में इंफैक्शन से पीडि़त है, तो उस के पेट में लंबे समय तक दर्द बना रह सकता है. उस के गर्भाशय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी जन्म ले सकती है. एचआईवी होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

ऐसे में आज के जमाने में हर शख्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह विज्ञान के तर्कों पर चलते हुए समय पर अपना इलाज कराए, न कि पाखंडी बाबाओं के चक्कर में पड़ कर अपनी जान जोखिम में डाले.

Tags: