उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रा योगी आदित्यनाथ चुनाव प्रचार में ‘स्टार प्रचारक’ माने जाते हैं. भाजपा के लिये प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उनकी नम्बर दो की रेटिंग है. योगी को संत मान कर लोग उम्मीद करते है कि वह कुछ गंभीर मुद्दों पर बात करेगे. योगी अपने बडबोलेपन की वजह से हास्य परिहास का विषय होकर रह जा रहे है. राजस्थान के चुनावी प्रचार में योगी ने अलवर में कहा कि ‘हनुमान दलित थे’. योगी संत है. धर्म के बड़े जानकार हैं. ऐसे में यह भी नहीं कहा जा सकता है कि वह गलत बोल रहे होंगे. योगी के बयान को तर्क के आधर पर देखे तो यह बात सही भी लगती है. हनुमान जंगल और पहाड़ पर रहते थे. ऐसे में हनुमान दलित से अधिक आदिवासी माने जा सकते हैं. ऐसे में उनको दलित यानि एससी की जगह पर एसटी माना जा सकता था. योगी ने हनुमान को दलित, वनवासी, गिरवर और वंचित भी कहा है.

जिस तरह से हनुमान को राम का भक्त यानि दास बताया गया उससे भी साफ लगता है कि वह सवर्ण जाति के राजा राम की सेवा ही करते थे. हनुमान को हमेशा राम के पैरों के पास ही बैठा देखा गया है. अगर पूजा की नजर से देखें तो हनुमान ही सबसे उपेक्षित दिखते हैं. सभी भगवान की पूजा के लिये बड़े बड़े मंदिर बनते हैं, हनुमान अकेले ऐसे हैं जिनकी पूजा करने के लिये भव्य मंदिर की जरूरत नहीं है. कहीं भी किसी भी जगह पर ईट और पताका मतलब लाल कपड़े की झंडी लगाकर पूजा शुरू की जा सकती है. ऐसे में वह सवर्ण देवताओं के मुकाबले दलित ही लगते हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर विरोधी दलों से पहले सवर्णों का ही विरोध शुरू हो गया है. राजस्थान की ब्राह्मण सभा ने योगी को कानूनी नोटिस भेजा है. योगी सरकार के अंदर काम करने वाले डाक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोपफेसर मनोज दीक्षित ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा ‘देवी देवता आपके लिये राजनीति का विषय हो सकते है पर हमारे लिये वह आस्था का विषय है. ऐसे में देवीदेवताओं में जाति और धर्म न तलाशें.’

योगी के बयान पर भाजपा के ही सांसद उदित राज ने कहा ‘योगी के बयान से साफ हो गया कि रामराज में भी दलित थे. जाति व्यवस्था थी. संविधान कहता है कि जाति के नाम पर वोट नहीं मांगने चाहिये, जाति के आधार पर वोट ज्यादा पड़ते हैं. योगी का बयान उसी अपील के लिये देखा जा सकता है.’ राजस्थान के चुनाव में दलित वोट की नजर से इस बयान को देखा जा रहा है. अब केवल हनुमान को दलित नहीं माने जाते बल्कि राक्षसों को दलित माना जाता है. योगी के इस बयान से यह साफ हो गया है कि रामराज में भी जाति प्रथा थी.

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