सरस सलिल विशेष

उत्तर प्रदेश में भले ही भाजपा के पास एक मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्री हों, पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लखनऊ में ‘सुपर सीएम’ के अंदाज में नजर आये. संगठन से लेकर सरकार तक के लोग उनके आगे पीछे घूमते नजर आये. संगठन से अधिक प्रदेश के मुख्यमंत्री और उसके मंत्रिमंडल के सहयोगी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगे पीछे घूमते नजर आये. भाजपा के प्रदेश कार्यालय में जब अमित शाह प्रदेश के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के साथ प्रेसवार्ता करते दिखे, तो प्रदेश से जुडे सारे सवालों पर अमित शाह ने खुद ही जवाब दिये. हालांकि प्रेसवार्ता में कोई ऐसा सवाल न पूछा जाये जो असहज कर जाये इसका ख्याल पहले से ही रखा गया था.

अमित शाह के स्वागत में राजधानी लखनऊ को बैनर पोस्टर से पाट दिया गया था. सबसे आश्चर्य वाली बात यह थी कि सड़क पर आदमकद कटआउट लगे थे, उनमे केवल दो लोगों को ही शामिल किया गया था. अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कटआउट ही लगा था. लखनऊ में राजनाथ सिंह जैसे बड़े नेताओं को भी कोई महत्व नहीं दिया गया. उनकी फोटो दूसरे नेताओं के साथ फिलर की तरह ही लगी दिखी.

अमित शाह ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी के 3 विधान परिषद सदस्यों को  भाजपा में शामिल किये जाने को हरी झंडी दिखाई. पहले इनको अमित शाह के सामने ही पार्टी में शामिल होना था. बाद में अमित शाह दिल्ली चले गये तो प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य ने इनको पार्टी में शामिल किया. भाजपा ने एक तरह से विरोधी दलों को तोडफोड की अपनी फिल्म का ‘ट्रेलर’ दिखाया. ऐसे में भाजपा के लोग यह कह रहे है कि विरोधी दलों के लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं. भाजपा इस बात का बार बार कह रही है कि आने वाले दिनों में केवल भाजपा ही रह जायेगी.

प्रदेश में भाजपा खुद को अखिलेश यादव और केन्द्र में इंदिरा गांधी से बेहतर है यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कही. सरकार और संगठन दो अलग अलग होते हैं. मुख्यमंत्री और उसका पूरा मंत्रिमंडल जिस तरह से अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की आगवानी से लेकर दिशा निर्देश लेने में लगा रहा उससे साफ लग रहा था कि अमित शाह ‘सुपर सीएम’ हैं. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के समय अमित शाह ने दलित कार्यकर्ता के घर खाना खाया था. इस बार उन्होंने पिछडे जाति के कार्यकर्ता के घर खाना खाया. भाजपा अब प्रदेश में अगडों की जगह पिछडों और दलितों को ज्यादा प्रभाव देती नजर आयेगी.

अमित शाह के आने से पहले प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य के दिल्ली जाने की अटकले लग रही थी. अमित शाह के लखनऊ दौरे के बाद केशव मौर्य काफी मजबूत हालत में पहुंच गये हैं. अमित शाह ने ज्यादातर समय केशव मौर्य के साथ बिताया और उनकी नाराजगी को खत्म कर दिया. उपमुख्यमंत्री बनने के बाद केशव मौर्य के अपने प्रभाव को लेकर असहज महसूस करने की खबरे आ रही थी. ऐसे में अमित शाह के आने से वह नई ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं.