सरस सलिल विशेष

रेस, रिलीजन, कास्ट, रंग के भेदभाव को चुनावी जंग में भुनाना निर्दोषों के लिए महंगा ही पड़ता है. अपने देश में अगर मुसलिम, दलित इस के शिकार बन रहे हैं तो पढ़ेलिखे, उदार, तार्किक अमेरिका में. वहां ‘ब्लैक लाइफ मैटर्स’ के नारे को ले कर लोग रोज जुलूस निकालते हैं क्योंकि देशभर में कालों के खिलाफ उन्माद सा फैलाया गया है. हर काले को नशेड़ी, अपराधी माना जा रहा है और जब चाहे गोरे पुलिस वाले उन्हें रोक कर उन की तलाशी लेनी शुरू कर देते हैं और जरा सा भी चूंचप्पड़ करने पर उन्हें गोली मार दी जाती है. अदालतें छोड़ ही देती हैं गोरे पुलिस वालों को.

यह कहर अब लेटिनो यानी दक्षिण अमेरिका से आए लोगों, चीनियों, वियतनामियों और सब से ज्यादा भारतीयों पर टूट रहा है. अमेरिका के एक शहर इडाहो में भारतीय मूल के टैक्सी ड्राइवर गगनदीप सिंह की 19 वर्षीय गोरे लड़के ने इसलिए हत्या कर डाली कि उसे एक भारतीय के कारण एक विश्वविद्यालय में सीट नहीं मिली. जैसे गोधरा कांड के बाद 2 हजार से ज्यादा मुसलमान आदमियों, औरतों, बच्चों को मारा गया था वैसे ही अमेरिका में भारतीयों को मारा जा रहा है, क्योंकि वे अपनी मेहनत से ऊंची जगह पा रहे हैं. कुछ समय पहले तो डौटबस्टर कह कर बिंदी लगाए काली युवतियों के साथ जम कर बदसुलूकी का दौर चला था.

ताजा मामले में जैकब कोलमैन का गुस्सा इतना था कि उस ने गगनदीप से रास्ते में टैक्सी रुकवाई, फिर एक दुकान से चाकू खरीदा और उस से उस की हत्या कर डाली. कोई रंजिश नहीं, कोई विवाद नहीं, केवल रेशियल भेदभाव.

भारत क्या इस का विरोध कर सकता है? किस मुंह से करेगा? यहां तो हर रोज गौमांस खाने के नाम मुसलिमों को मारा जा रहा है और निचला काम बेगार में न करने पर दलितों को. हम कैसे कहेंगे कि डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिका भेदभाव दूर करे जबकि वे चुनाव जीते ही इस भेदभाव को भुना कर हैं. उन्होंने कहा था कि वे श्वेतों का राज फिर कायम करना चाहते हैं. वे चीन की दीवार सी लंबी दीवार मैक्सिको और अमेरिका के बीच खड़ी करना चाहते हैं ताकि आधेकाले आधेगोरे उस के देश में आ ही न सकें. इसीलिए अमेरिकियों ने एक खब्ती को राष्ट्रपति चुन लिया.

बेवकूफ नेता देश का बड़ा नुकसान कर जाता है. हिटलर, मुसोलिनी ऐसे ही खब्ती, जिद्दी थे. उन्होंने रेस, जाति, धर्म का जम कर इस्तेमाल किया और अपने देश में ही कई फाड़ कर दिए. अमेरिका गोरों, कालों, भूरों, पीलों हिंदुओं, मुसलिमों के नाम पर बंट रहा है. इस का नुकसान होगा ही. इंटरनैट ने जोड़ा था अब यही ट्रंप के तोड़क संदेश को हर सिरफिरे तक पहुंचा रहा है.