सरस सलिल विशेष

राजस्थान में आम लोगों के होली खेलने के अगले दिन पुलिस वाले होली खेलते हैं. इस की वजह यह है कि होली पर पुलिस वाले आम लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात रहते हैं. इसलिए पुलिस विभाग अगले दिन होली खेलता है. उस दिन पुलिस वाले पूरी मस्ती में होते हैं. पुलिस अधिकारियों के घरों और रिजर्व पुलिस लाइनों में दोपहर तक यही सिलसिला चलता रहता है.

इस बार 13 मार्च को आम लोगों ने होली खेली थी, इसलिए पुलिस वालों ने 14 मार्च को होली खेली. दोपहर तक चली पुलिस वालों की होली की मस्ती की खुमारी शाम तक उतरने लगी थी. जयपुर के थाना मानसरोवर के ज्यादातर पुलिस वाले वरदी पहन कर अपनी ड्यूटी पर आ गए थे. 1-2 ही थे, जो किसी वजह से नहीं आए थे, इस से कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

शाम 6-7 बजे के बीच थाना मानसरोवर के लैंडलाइन फोन की घंटी बजी तो ड्यूटी अफसर ने रिसीवर कान से लगा कर कहा, ‘‘हैलो.’’

‘‘सर, आप थाना मानसरोवर से बोल रहे हैं न?’’ दूसरी ओर से पूछा गया.

‘‘जी कहिए, मैं थाना मानसरोवर से ही बोल रहा हूं?’’ ड्यूटी अफसर ने कहा.

‘‘सर, मैं हीरापथ से बोल रहा हूं.’’ दूसरी ओर से किसी आदमी की घबराई हुई सी आवाज आई, ‘‘सर, हीरापथ के मकान नंबर 55/31 से बहुत तेज दुर्गंध आ रही है. इस मकान में रहने वाले बापबेटे भी नजर नहीं आ रहे हैं. सर, मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है.’’

‘‘मकान से दुर्गंध कब से आ रही है?’’ ड्यूटी अफसर ने फोन करने वाले से पूछा.

‘‘सर, दुर्गंध तो होली के बाद से ही आ रही है, लेकिन अब असहनीय हो गई है.’’ फोन करने वाले ने कहा और फोन काट दिया.

फोन कटने के तुरंत बाद ड्यूटी अफसर ने फोन द्वारा मिली सूचना थानाप्रभारी सुरेंद्र सिंह राणावत को दे दी. सूचना की सच्चाई का पता करने के लिए थानाप्रभारी ने एक सबइंसपेक्टर और 4 सिपाहियों को हीरापथ पर भेज दिया. मानसरोवर जयपुर महानगर की सब से बड़ी आवासीय कालोनी है. मुख्य मार्ग को क्रौस करते हुए मुख्य सड़कों के नाम स्वर्णपथ, रजतपथ, किरणपथ, कावेरीपथ आदि हैं.

पुलिस को हीरापथ पर स्थित उस मकान को खोजने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी. हीरापथ पर आईसीआईसीआई बैंक के सामने 5 मंजिला एक निर्माणाधीन होटल के पास बहुत सारे लोग खड़े बातें कर रहे थे. पुलिस समझ गई कि घटना उसी मकान में घटी है.

पुलिस ने गाड़ी वहां जा कर रोक दी. सबइंसपेक्टर ने वहां खड़े लोगों से पूछा कि क्या बात है तो भीड़ में से एक अधेड़ ने आगे आ कर कहा, ‘‘साहब, आप यह जो होटल देख रहे हैं, यह मकान नंबर 55/31 पर बना हुआ है. इसी मकान से तेज दुर्गंध आ रही है. इस मकान में रहने वाले बापबेटे का भी कुछ अतापता नहीं है.’’

‘‘इस मकान में बापबेटे ही रहते थे?’’ सबइंसपेक्टर ने पूछा.

‘‘सर, हमें ज्यादा कुछ पता नहीं है. बस इतना पता है कि यहां कोई सक्सेना साहब रहते थे, साथ में उन का बेटा रहता था. परिवार में शायद कोई महिला नहीं है.’’ अधेड़ ने कहा.

‘‘आप को इन सक्सेना साहब के बारे में ज्यादा क्यों नहीं पता?’’

‘‘साहब, वह झगड़ालू किस्म के आदमी थे, इसलिए उन की किसी से ज्यादा पटती नहीं थी.’’ अधेड़ ने कहा.

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‘‘ठीक है, चलो देखते हैं.’’ सबइंसपेक्टर ने कहा.

सबइंसपेक्टर होटल की ओर बढ़े तो दुर्गंध की वजह से उन्हें नाक पर रूमाल रखनी पड़ी. मकान में बने होटल का गेट धक्का देते ही खुल गया. शायद वह खुला ही पड़ा था. पुलिस होटल के अंदर घुसी तो सामान इधरउधर बिखरा पड़ा था. होटल निर्माण का भी कुछ सामान पड़ा था. इधरउधर पड़े सामान से सहज ही अंदाजा लग गया कि इस घर को होटल में तब्दील किया जा रहा था और इन दिनों निर्माणकार्य चल रहा था.

पुलिस ने मकान की तलाशी ली तो ग्राउंड फ्लोर पर पीछे के कमरे में एक बुजुर्ग का शव पड़ा मिला. शव के सीने पर पानी की टंकी का ढक्कन रखा था. वहीं एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था. पत्थर पर खून के निशान थे. इस से लगा कि बुजुर्ग की हत्या सिर पर पत्थर मार कर की गई थी.

इस के बाद पुलिस पहली मंजिल पर पहुंची तो वहां एक युवक का शव पड़ा मिला. युवक के हाथ कपड़े से आगे की ओर बंधे थे. उस के कपड़े खुले थे. दोनों शवों से तेज बदबू आ रही थी. सबइंसपेक्टर ने आसपास के लोगों से शवों की शिनाख्त कराई. लोगों ने उन की शिनाख्त राजनारायण सक्सेना और उन के बेटे सौरभ सक्सेना के रूप में की.

सबइंसपेक्टर ने यह सूचना थानाप्रभारी सुरेंद्र सिंह राणावत को दी तो उन्होंने उच्चाधिकारियों को इस जानकारी से अवगत करा दिया. इस के बाद थानाप्रभारी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए. डौग स्क्वायड और फोरैंसिक एक्सपर्ट को भी बुला लिया गया.

फोरैंसिक एक्सपर्ट ने तो साक्ष्य जुटा लिए, पर डौग स्क्वायड से पुलिस को कोई खास मदद नहीं मिली. लाशों को देख कर ही लग रहा था कि ये हत्याएं 3-4 दिन पहले की गई थीं. स्थितियों से यही लग रहा था कि बदमाशों ने सौरभ को बंधक बना कर राजनारायण सक्सेना से कोई सौदा करने या लूटपाट की कोशिश की थी. सौरभ को चोट लगने पर राजनारायण ने भागने की कोशिश की होगी तो बदमाशों ने उन्हें मार दिया. उस के बाद सौरभ को भी मार डाला.

इस बात पर भी विचार किया गया कि पितापुत्र का अपने किसी परिचित या रिश्तेदार से प्रौपर्टी को ले कर कोई विवाद तो नहीं चल रहा था, तमाम कोणों पर विचार किए गए, लेकिन पुलिस को हत्या की वजह पता नहीं लग सकी. उसी दिन थाना मानसरोवर में इस दोहरे हत्याकांड का केस दर्ज कर लिया गया.

पुलिस आयुक्त ने अधिकारियों के साथ मीटिंग कर हत्या के इस मामले पर व्यापक विचारविमर्श किया. इस के बाद पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) मनीष अग्रवाल और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) योगेश गोयल ने सहायक पुलिस आयुक्त देशराज यादव के निर्देशन में थानाप्रभारी सुरेंद्र सिंह राणावत के नेतृत्व में 3 टीमें गठित कर दीं, जिस में थाना शिप्रापथ और मानसरोवर के तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया.

पुलिस टीमों ने आसपास के लोगों से पूछताछ कर राजनारायण सक्सेना और उन के बेटे सौरभ के बारे में जानकारी जुटाई. पता चला कि करीब 73 साल के राजनारायण सक्सेना कृषि विभाग में उपनिदेशक के पद से रिटायर हुए थे. करीब 43 साल के उन के बेटे सौरभ सक्सेना ने मुंबई से इलैक्ट्रिकल में इंजीनियरिंग की थी.

करीब 6 साल पहले उस की शादी हुई थी, लेकिन उस का वैवाहिक जीवन सुखद नहीं रहा. शादी के 4-5 साल बाद ही उस का पत्नी से तलाक हो गया था. राजनारायण सक्सेना की पत्नी इंद्रा की डेढ़ साल पहले मौत हो गई थी. उस के बाद घर में बापबेटे ही रह गए थे.

राजनारायण सक्सेना ने 3 साल पहले अपने मकान को होटल में तब्दील करने का फैसला लिया और उसे तोड़वा कर होटल का रूप देने लगे थे. पत्नी की मौत के बाद काम रोक दिया गया था. इधर कुछ महीने पहले फिर से निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया था. अब तक निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था. कमरों में पीओपी करवाई जा रही थी. फिनिशिंग और सजावट का पूरा काम बाकी था.

जांच में पता चला कि सौरभ सक्सेना के पास कई मोबाइल फोन थे. जो पुलिस को मिल गए थे. उन की काल डिटेल्स की जांच की गई तो पता चला उस के पास गोवा, मुंबई, असम और कोलकाता से फोन आते थे. इस से पुलिस को शक हुआ कि सौरभ कहीं किसी तरह की सट्टेबाजी का काम तो नहीं करता था?

पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि 10 मार्च की रात करीब साढ़े 10 बजे सौरभ ने अपने घर के पास ही एक मोबाइल फोन की दुकान से अपने एक मोबाइल में बैलेंस डलवाया था, उस समय उस के साथ एक आदमी और था. इस से अंदाजा लगाया गया कि सौरभ की हत्या 10 मार्च की रात साढ़े 10 बजे के बाद की गई थी. सक्सेना के घर के आंगन में 12 मार्च के अखबार पड़े थे, जिन्हें खोला नहीं गया था.

जांच में एक बात यह भी सामने आई कि 14 मार्च की रात करीब 8 बजे के बाद पितापुत्र की हत्या का पता चला था, उस से करीब 4 घंटे पहले शाम 4 बजे के करीब एक महिला सक्सेना के घर से लैपटौप वाला बैग और एकदूसरे अन्य बैग में कुछ सामान ले कर निकली थी. वह महिला साड़ी पहने थी और उस की उम्र 30-35 साल थी.

एक पड़ोसी ने जब उसे टोका तो उस ने कहा था कि सौरभ भैया ने बुलाया था. सौरभ के पास कभीकभी महिलाएं आतीजाती रहती थीं. इसलिए उस पड़ोसी ने महिला पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

पड़ोसियों से पता चला था कि सौरभ रात को अपने घर के अंदर और बाहर की सभी लाइटें जला कर रखता था, लेकिन होली की रात को उन के घर में अंधेरा छाया था. इस से पड़ोसियों ने अनुमान लगाया था कि दोनों बापबेटे कहीं गए हैं. चूंकि वे दोनों झगड़ालू थे और पड़ोसियों से बिना बात झगड़ा कर लेते थे, इसलिए किसी ने सक्सेना के घर की ओर ज्यादा ताकझांक नहीं की. जांच में पता चला था कि सौरभ ने घटना से कुछ दिनों पहले अपने घर के ग्राउंडफ्लोर पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे. पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की तलाश की तो वह घर में बने पानी के टैंक में टूटे हुए मिले. इन कैमरों का रिकौर्डर भी नहीं मिला. इस से अनुमान लगाया गया कि हत्यारे को सक्सेना के घर की पूरी जानकारी थी.

यह भी पता चला था कि निर्माणकार्य के दौरान मेहनतमजदूरी को ले कर बापबेटे का कई बार मजदूरों और मिस्त्रियों से झगड़ा हुआ था. सौरभ की मजदूरों से मारपीट भी हुई थी. इस से यह भी सोचा गया कि रुपयों के लेनदेन को ले कर किसी मजदूर या मिस्त्री ने तो इन बापबेटे की हत्या नहीं कर दी?

पुलिस को राजनारायण सक्सेना के कुछ रिश्तेदारों का पता चला तो उन से भी बात की गई. लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस की जांच ज्योंज्यों आगे बढ़ रही थी, बापबेटों के बारे में नईनई बातें सामने आ रही थीं. लेकिन हत्या के बारे में कोई सुराग नहीं मिल रहा था.

तमाम लोगों से पूछताछ और जांच के बाद पुलिस को यह अंदाजा जरूर हो गया कि हत्यारों का सुराग निर्माणकार्य में लगे मजदूरों और मिस्त्रियों से ही मिल सकता है. इस के बाद पुलिस ने मानसरोवर इलाके में वीटी रोड की चौखटी पर बैठने वाले मिस्त्रियों, मजदूरों और ठेकेदारों से पूछताछ शुरू की. कुछ महिलाओं से भी पूछताछ की गई.

इस काररवाई के बाद पुलिस ने 19 मार्च को 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इन में टोंक जिले के उनियारा के लतीफगंज पायगा गांव का रहने वाला राकेश मीणा, उस के साथ 5 साल से लिवइनरिलेशन में रह रही करौली निवासी गीता उर्फ पूजा मीणा तथा करौली के गुणेसरा का रहने वाला रमेश सैनी था.

पुलिस ने तीनों से पूछताछ की तो इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा हो गया. पता चला कि सौरभ सक्सेना के शराब और शबाब के शौक ने ही उस की और उस के पिता की जान ली थी. पुलिस द्वारा तीनों से की गई पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

राजनारायण सक्सेना और उन के बेटे सौरभ 3 साल से अपने मकान को होटल बनवा रहे थे. इस के लिए वे मानसरोवर के वीटी रोड की चौखटी से खुद ही मिस्त्री और मजदूर लाते थे. इसलिए उस इलाके के ज्यादातर मजदूरों और मिस्त्रियों को इस बात का पता था कि सौरभ की मां की मौत के बाद से घर में बापबेटे ही रहते हैं.

राकेश मीणा मकानों में मार्बल और टाइल्स लगाने का काम करता था. रमेश सैनी मार्बल घिसाई का काम करता था. मकान का काम करने के दौरान ही राजनारायण और सौरभ से इन की जानपहचान हुई थी. तभी उन्हें बापबेटों की कमजोरियों का पता चल गया था.

सौरभ के कहने पर ही कुछ दिनों पहले राकेश और रमेश ने उसे एक महिला उपलब्ध कराने की बात कही. उस के हां करने पर राकेश ने अपने साथ लिवइन रिलेशन में रह रही गीता उर्फ पूजा को इस के लिए तैयार कर लिया.

करीब 2 महीने पहले राकेश ने रमेश और गीता के साथ मिल कर योजना बनाई कि सक्सेना के घर शराब की पार्टी की जाए. जब दोनों नशे में हो जाएं तो एकएक कर उन्हें मार कर उन के घर रखी नकदी और ज्वैलरी लूट ली जाए.

इस के बाद राकेश अपने साथियों के साथ अकसर सौरभ के यहां आने लगा और रात में शराब की पार्टी करने लगा. उसी बीच उस ने सौरभ की तमाम व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने के साथ यह भी जान लिया कि घर में नकदी व गहने कहां रखे हैं. सारी जानकारी जुटा कर राकेश रमेश और गीता उर्फ पूजा के अलावा 6 साल की बेटी को ले कर 10 मार्च की रात सौरभ के घर पहुंचा.

उस ने कहा कि एक दिन बाद होली है, इसलिए होली से पहले वे शराब की पार्टी करना चाहते हैं. इसी के साथ राकेश ने गीता की ओर आंख मार कर सौरभ से कहा कि अगर वह चाहे तो इस के साथ मौजमस्ती भी कर सकता है. गीता की गदराई जवानी को देख कर सौरभ का मन मचल उठा और वह शराब की पार्टी करने को तैयार हो गया.

इस के बाद राकेश और रमेश ने सौरभ के साथ शराब पी. इस बीच गीता और राकेश की बेटी उसी कमरे में एक कोने में बैठ कर नमकीन और स्नैक्स खाती रहीं. सौरभ को जब नशा चढ़ा तो वह गीता को ले कर मकान की पहली मंजिल पर चला गया. कुछ देर बाद गीता और सौरभ नीचे आ गए.

सौरभ ने एक पैग शराब और पी और नशे में झूमने लगा. वह एक ओर चला गया तो कुछ देर बाद राकेश ने उधर देखा, जहां उस की बेटी बैठी थी. वहां उसे बेटी दिखाई नहीं दी तो वह बेटी को ढूंढता हुआ पहली मंजिल पर पहुंचा.

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वहां उस ने देखा कि सौरभ उस मासूम बच्ची के साथ गलत हरकतें कर रहा था. यह देख कर उस का सारा नशा उतर गया. उस की आंखों से अंगारे बरसने लगे. उस ने सौरभ को पकड़ कर उस का गला दबा दिया. सौरभ बेहोश हो गया. शोरशराबा सुन कर नीचे से रमेश और गीता भी पहली मंजिल पर आ गए. तीनों ने उस के हाथपैर बांध दिए और उस का गला दबा कर मार डाला.

सौरभ की हत्या कर सभी नीचे उतर रहे थे, तभी शोरशराबा सुन कर ग्राउंड फ्लोर से राजनारायण सक्सेना चिल्लाने लगे. राकेश ने पानी के टैंक का ढक्कन उठा कर उन के सिर पर दे मारा. बुजुर्ग राजनारायण गिर पड़े तो सभी ने उन का भी गला दबा दिया. उन की भी सांसें थम गईं.

बापबेटे को मौत की नींद सुला कर रमेश सक्सेना के घर से करीब 2 लाख रुपए के गहने और नकदी के अलावा मोबाइल फोन आदि ले कर साथियों के साथ चला गया. ये सभी पुलिस की गतिविधियों पर पूरी तरह नजर रखे हुए थे, साथ ही दिन में 1-2 चक्कर सक्सेना के घर के लगा लेते थे, ताकि पता चलता रहे कि पुलिस क्या कर रही है?

3-4 दिनों तक कोई हलचल नहीं हुई तो ये लोग निश्ंिचत हो गए कि बापबेटे अकेले ही रहते थे, इसलिए उन के मरने का किसी को पता नहीं चलेगा. इस के बाद 14 मार्च की दोपहर को राकेश और गीता सक्सेना के घर गए और वहां से एलईडी टीवी, सीपीयू, कंप्यूटर मौनिटर, प्रोजेक्टर और वीडियो कैमरा उठा लाए.

उसी दिन शाम को राकेश गीता के साथ उत्तर प्रदेश के शहर मथुरा चला गया, जहां उन्होंने गोवर्धन परिक्रमा की. 16 मार्च को वह वहां से रमेश सैनी के घर करौली चला गया. एक दिन बाद गीता के साथ मेंहदीपुर बालाजी के दर्शन कर के जयपुर लौट आया. पुलिस ने 19 मार्च को उसे और गीता को जयपुर से और रमेश सैनी को करौली रामपुर गांव से गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में राकेश ने अपने गांव का पता गलत बताने के साथ कहा कि उस के मातापिता भी नहीं हैं. लेकिन जांच में उस का गांव टोंक जिले का लतीफगंज पाया गया. उस के मातापिता भी जीवित मिले.

10 साल से वह मोहिनी देवी उर्फ गीता के साथ लिवइन रिलेशन में रहता था, जिस के तथा मिल कर उस ने दोनों बापबेटों की हत्या की थी. गीता को पूर्व पति धनराज मीणा से एक बेटा और एक बेटी है. राकेश ने सौरभ की हत्या की वजह बेटी से गलत हरकत करना बताया है, लेकिन पुलिस का मानना है कि राकेश ने अपने बचाव के लिए यह बयान दिया है. पुलिस ने बच्ची का मैडिकल करवाया है, जिस से ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

राकेश और उस के साथियों ने अगर अपराध किया है तो कानून उन्हें सजा देगा, लेकिन सौरभ के शराब और शबाब के शौक ने उस की तो जान ले ही ली, बूढे़ पिता को भी जान से हाथ धोना पड़ा.

जयपुर महानगर की सब से बड़ी और व्यस्त कालोनी में शिक्षित लोगों के साथ ऐसी वारदात होगी, किसी ने सोचा भी नहीं था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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