सरस सलिल विशेष

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘पद्मावती’’ से जुड़ा विवाद ठंडा होने का नाम ही नहीं ले रहा है. राजपूत करणी सेना सहित कुछ संगठनों ने जिस तरह से पद्मावती का किरदार निभाने वाली अदाकारा दीपिका पादुकोण की नाक काटने व उन्हें जिंदा जलाने की घोषणाओं से शबाना आजमी सहित बौलीवुड की सभी अभिनेत्रियों को गुस्सा आ गया.

इन सभी ने दावा किया कि उनके सब्र का बांध टूट चुका है और सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास संयुक्त हस्ताक्षर वाली एक पिटीशन भेजकर कहने का निर्णय लिया कि ‘अभी नहीं,तो कभी नहीं. इस पेटीशन में लिखा गया कि फिल्म उद्योग से जुड़े लोग इंसान हैं, कोई पपेट नहीं, जिनके बारे में राजनीतिक फायदे के लिए कुछ भी बोल दिया जाए. बौलीवुड की अदाकाराओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा.’

प्रधानमंत्री को भेजने के लिए इस पिटीशन पर अभिनेत्रियों ने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया और हर अखबार के पन्नों के साथ ही टीवी के समाचार चैनलों पर जमकर वाहवाही लूटी. मगर यह पिटीशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी जाती, उससे पहले ही यह फुसफुसा पटाखा साबित हो गया.

क्योंकि राजनीतिज्ञों पर राजनीतिक फायदे का आरोप लगाने वाले बौलीवुड से जुड़ा हर इंसान सिर्फ अपना फायदा देखता है इनके लिए ‘बाप न बड़ा भईया, सबसे बड़ा रूपया’ ही मूल मंत्र है. बौलीवुड से जुड़ी अभिनेत्रियां भी इसी मूल मंत्र पर चलती हैं. इनके लिए पैसा ही सर्वोपरि है तभी तो प्रधानमंत्री को पिटीशन नहीं भेजी गयी और न ही भेजी जाएगी.

सूत्र बताते हैं कि जैसे ही अदाकाराओं की इस पिटीशन के बारे में फिल्म ‘‘पद्मावती’’ के निर्माण से जुड़े कंपनी ‘‘वायकाम 18’’ को पता चला. इस स्टूडियो ने तुरंत फरमान जारी कर दिया कि इस तरह की कोई पिटीशन बौलीवुड की कोई भी अदाकारा प्रधानमंत्री को नहीं भेजेगी. इस फरमान के बाद सभी अभिनेत्रियां अपने अपने दरवाजो में बंद हो गयी. यहां तक कि इस पिटीशन की अगुवाई करने वाली शबाना आजमी भी चुप हैं.

सूत्रों की माने तो ‘वायकौम 18’ को डर सता रहा है कि यदि यह पिटीशन भेजी गयी, तो भाजपा का आक्रोश फिल्म ‘‘पद्मावती’’ को झेलना पड़ सकता है. अभी से भाजपा शासित चार राज्यों में इस फिल्म को बैन किया जा चुका है. इसलिए उसने इस पिटीशन को रोकने का फरमान जारी किया, जिसे सभी अभिनेत्रियों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया.

यदि यह सच है, तो इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा व अहम सवाल उठता है कि अभिव्यक्ति की आजादी, अपने मन की बात कहने की हक की बात कहने की स्वतंत्रता आदि के हनन का आरोप लगाने वाले बौलीवुड का हर इंसान इस तरह के फरमान पर खामोश क्यों है.

किसी ने भी ‘वायकाम 18’ के इस फरमान का विरोध नहीं किया. क्या अब किसी की भी अभिव्यक्ति की आजादी, मन की बात कहने की आजादी का हनन नहीं हुआ?

उधर सूत्र यह भी दावा करते हैं कि कलाकार को स्टूडियो ‘वायकाम 18’ की सुननी पड़ेगी, क्योंकि स्टूडियो की वजह से कलाकारों को लंबी रकम पारिश्रमिक राशि के रूप में मिल पा रही है.

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