शास्त्र के अनुकूल विवाह दांपत्य से जो संतान जन्म लेती है वह पाप से उत्पन्न नहीं होती. उस संतान को पाप से उत्पन्न कहना मातापिता को गाली देना होगा. तो पंडितपुरोहित पूजाअर्चना के बाद यजमान से क्यों कहलवाते हैं कि ‘मैं पापी हूं,’ यह कैसी पंडिताई है?