प्यार, आकर्षण और वासना के बीच एक महीन सीमारेखा होती है. कोई इस की सीमाएं लांघता है तो कोई इस में उलझ जाता है. अस्मिता भी इसी के दरम्यान कहीं उलझ सी गई थी.
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