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सेक्स और प्यार!

सच्चे प्रेम से खिलवाड़ करना किसी बड़े अपराध से कम नहीं है. प्रेम मनुष्य को अपने अस्तित्व का वास्तविक बोध करवाता है. प्रेम की शक्ति इंसान में उत्साह पैदा करती है. प्रेमरस में डूबी प्रार्थना ही मनुष्य को मानवता के निकट लाती है.

मुहब्बत के अस्तित्व पर सेक्स का कब्जा

आज प्रेम के मानदंड तेजी से बदल रहे हैं. त्याग, बलिदान, निश्छलता और आदर्श में खुलेआम सेक्स शामिल हो गया है. प्रेम की आड़ में धोखा दिए जाने वाले उदाहरणों की शृंखला छोटी नहीं है और शायद इसी की जिम्मेदारी बदलते सामाजिक मूल्यों और देरी से विवाह, सच को स्वीकारने पर डाली जा सकती है. प्रेम को यथार्थ पर आंका जा रहा है. शायद इसी कारण प्रेम का कोरा भावपक्ष अस्त हो रहा है यानी प्रेम की नदी सूख रही है और सेक्स की चाहत से जलराशि बढ़ रही है.

विकृत मानसिकता व संस्कृति

आज के मल्टी चैनल युग में टीवी और फिल्मों ने जानकारी नहीं मनोरंजन ही परोसा है. समाज द्वारा किसी भी रूप में भावनाओं का आदर नहीं किया जाता. प्रेम का मधुर एहसास तो कुछ सप्ताह तक चलता है. अब तन के उपभोग की अपेक्षा है.

क्षणिक होता मुहब्बत का जज्बा

प्रेम अब सड़क, टाकीज, रेस्तरां और बागबगीचों का चटपटा मसाला बन गया है. वर्तमान प्रेम क्षणिक हो चला है, वह क्षणभर दिल में तूफान ला देता है और अगले ही पल बिलकुल खामोश हो जाता है. युवा आज इसी क्षणभर के प्रेम की प्रथा में जी रहे हैं. एक शोध के अनुसार, 86% युवाओं की महिला मित्र हैं, 92% युवक ब्लू फिल्म देखते हैं, तो 62% युवक और 38% युवतियों ने विवाहपूर्व शारीरिक संबंध स्थापित किए हैं.

यही है मुहब्बत की हकीकत

एक नई तहजीब भी इन युवाओं में गहराई से पैठ कर रही है, वह है डेटिंग यानी युवकयुवतियों का एकांत मिलन. शोध के अनुसार, 93% युवकयुवतियों ने डेटिंग करना स्वीकार किया. इन में से एक बड़ा वर्ग डेटिंग के समय स्पर्श, चुंबन या सहवास करता है. इस शोध का गौरतलब तथ्य यह है कि अधिकांश युवक विवाहपूर्व यौन संबंधों के लिए अपनी मंगेतर को नहीं बल्कि किसी अन्य युवती को चुनते हैं. पहले इस आयु के युवाओं को विवाह बंधन में बांध दिया जाता था और समय आने तक जोड़ा दोचार बच्चों का पिता बन चुका होता था.

अमीरी की चकाचौंध में मदहोश प्रेमी

मृदुला और मनमोहन का प्रेम कालेज में चर्चा का विषय था. दोनों हर जगह हमेशा साथसाथ ही दिखाई देते थे. मनमोहन की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. वह मध्यवर्गीय परिवार से था, लेकिन मृदुला के सामने खुद को थोड़ा बढ़ाचढ़ा कर दिखाने की कोशिश में रहता था. वह मृदुला को अपने दोस्त की अमीरी और वैभव द्वारा प्रभावित करना चाहता था. दूसरी ओर आदेश पर भी अपना रोब गांठना चाहता था कि धनदौलत न होने पर भी वह अपने व्यक्तित्व की बदौलत किसी खूबसूरत युवती से दोस्ती कर सकता है. लेकिन घटनाचक्र ने ऐसा पलटा खाया कि जिस की मनमोहन ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी. उस की तुलना में अत्यंत साधारण चेहरेमुहरे वाला आदेश अपनी अमीरी की चकाचौंध से मृदुला के प्यार को लूट कर चला गया.

मनमोहन ने जब कुछ दिन बाद अपनी आंखों से मृदुला को आदेश के साथ उस की गाड़ी से जाते देखा तो वह सोच में पड़ गया कि क्या यह वही मृदुला है, जो कभी उस की परछाईं बन उस के साथ चलती थी. उसे अपनी बचकानी हरकत पर भी गुस्सा आ रहा था कि उस ने मृदुला और आदेश को क्यों मिलवाया. कालेज में मनमोहन की मित्रमंडली के फिकरों ने उस की कुंठा और भी बढ़ा दी.

प्रेम संबंधों में पैसे का महत्त्व

प्रेम संबंधों के बीच पैसे की महत्ता होती है. दोस्ती का हाथ बढ़ाने से पहले युवक की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर निर्णय लेना चाहिए. प्रेमी का यह भय सही है कि यदि वह अपनी प्रेमिका को महंगे उपहार नहीं देगा तो वह उसे छोड़ कर चली जाएगी. कोई भी युवती अपने प्रेमी को ठुकरा कर एक ऐसा नया रिश्ता स्थापित कर सकती है, जिस का आधार स्वाभाविक प्यार न हो कर केवल घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने की चाह हो. युवकों को पैसे के अनुभव के बावजूद अपनी प्रेमिकाओं और महिला मित्रों को प्रभावित करने के लिए हैसियत से ज्यादा खर्च करना होगा.

प्रेम में पैसे का प्रदर्शन, बचकानी हरकत

छात्रा अरुणा का विचार है कि अधिकतर युवक इस गलतफहमी का शिकार होते हैं कि पैसे से युवती को आकर्षित किया जा सकता है. यही कारण है कि ये लोग कमीज के बटन खोल कर अपनी सोने की चेन का प्रदर्शन करते हैं. सड़कों, पान की दुकानों या गलियों में खड़े हो कर मोबाइल पर ऊंची आवाज में बात करते हैं या गाड़ी में स्टीरियो इतना तेज बजाते हैं कि राह चलते लोग उन्हें देखें.

हैसियत की झूठी तसवीर पेश करना घातक

अरुणा कहती है कि कुछ लोग प्रेमिका से आर्थिक स्थिति छिपाते हैं तथा अपनी आमदनी, वास्तविक आय से अधिक दिखाने के लिए अनेक हथकंडे अपनाते हैं. इसी संबंध में उन्होंने अपने एक रिश्तेदार का जिक्र किया जो एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे. विवाह के तुरंत बाद उन्होंने पत्नी को टैक्सी में घुमाने, उस के लिए ज्वैलरी खरीदने तथा उसे खुश रखने के लिए इस कदर पैसा उड़ाया कि वे कर्ज में डूब गए. कर्ज चुकाने के लिए जब उन्होंने कंपनी से पैसे का गबन किया तो फिर पकड़े गए. परिणामस्वरूप अच्छीखासी नौकरी चली गई. इतना ही नहीं, पत्नी भी उन की ऐसी स्थिति देख कर अपने मायके लौट गई. अगर शुरू से ही वह चादर देख कर पैर फैलाते, तो यह नौबत न आती.

समय के साथ बदलती मान्यताएं

मीनाक्षी भल्ला जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, का कहना है कि प्यार में प्रेमीप्रेमिका दोनों ही जहां एकदूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने की भावना रखते हैं, वहीं अपने साथी से कुछ अपेक्षाएं भी रखते हैं.

व्यापार बनता आज का प्रेम

इस प्रकार के रवैए ने प्यार को एक प्रकार का व्यापार बना दिया है. जितना पैसा लगाओ, उतना लाभ कमाओ. कुछ मित्रों का अनुभव तो यह है कि जो काम प्यार का अभिनय कर के तथा झूठी भावुकता दिखा कर साल भर में भी नहीं होता, वही काम पैसे के दम पर हफ्ते भर में हो सकता है. अगर पैसे वाला न हो तो युवती अपना तन देने को तैयार ही नहीं होती.

नोटों की ऐसी कोई बौछार कब उन के लिए मछली का कांटा बन जाए, पता नहीं चलेगा. ऐसी आजाद खयाल या बिंदास युवतियों का यह दृष्टिकोण कि सच्चे आशिक आज कहां मिलते हैं, इसलिए जो भी युवक मौजमस्ती और घूमनेफिरने का खर्च उठा सके, आराम से बांहों में समय बिताने के लिए जगह का इंतजाम कर सके, उसे अपना प्रेमी बना लो.

शरीर के ये हिस्से बनाते हैं सेक्स को मजेदार

यदि आप उनके शरीर के कुछ विशेष हिस्सों पर ध्यान देंगी तो सेक्शुअल रिश्तों पर इसका जादुई असर होगा और आपकी सेक्शुअल लाइफ पहले से ज़्यादा संतुष्टिदायक हो जाएगी.

कमाल आंखों का!

कमरे के अलग-अलग हिस्सों पर खड़े होकर उन पर लगातार एक-दो सेकेंड तक नज़र डालें. नजरों से समझाएं कि आप उनका साथ चाहती हैं. ये प्रक्रिया जितनी शरारतभरी और फ्लर्ट अंदाज में होगी, उनका दिल उतने ही जोर से धड़केगा. और हां, हाई हील्स पहनिए. लंबे पैर हमेशा पुरुषों का ध्यान आकर्षित करते हैं. तब भी, जब आप चलते हुए उनसे दूर जा रही हों.

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सुगंध, जो मदहोश कर दे

शनेल नंबर 5, की खुशबू पुरुषों को आकर्षित नहीं करती. उन्हें मदहोश करनेवाली खुशबू है-पम्प्किन पाई की मीठी-तीखी सुगंध. ‘‘परफ्यूम्स को फेंक दीजिए और पम्प्किन पाई खरीद लाइए,’’ कहना है शिकागो के स्मेल ऐंड टेस्ट ट्रीटमेंट सेंटर के डॉ ऐलेन हिअर्श का.

शोध बताते हैं कि इसकी खुशबू पुरुषों को महिला की चाहत से भर देती है. यदि इसे लैवेंडर की खुशबू के साथ मिला देंगी तो आपको उनके उफान को शांत करने के लिए एक बाल्टी ठंडे पानी की ज़रूरत पड़ेगी. पम्प्किन की खुशबू से प्रतिभागियों के पीनियल (शिश्न) रक्त-प्रवाह में औसतन 40% की बढ़ोतरी पाई गई. वनीला की ख़ुशबू का भी जबरदस्त असर होता है. संतुष्टिदायक सेक्स जीवनवाले पुरुषों ने माना कि स्ट्रॉबेरी की महक भी उन्हें पसंद है.

हाथों का जादू

उनका हाथ थामे रहें. यूनिवर्सिटी कौलेज, लंदन द्वारा वर्ष 2013 में कराए गए एक अध्ययन के अनुसार, जब कभी आप तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हों अपने जीवनसाथी का हाथ थाम लें, ऐसा करने से मस्तिष्क का वह क्षेत्र शांत हो जाता है, जहां खतरे की आशंका की शुरुआत होती है. साथ ही, शरीर का तनाव कम हो जाता है.

कान महत्वपूर्ण हैं

कानों को हम भूल जाते हैं. लेकिन यह वो हिस्सा है जो सुखदायी होने के साथ-साथ उन्हें उत्तेजित कर सकता है. अपना अंगूठा और अनामिका उंगली उस जगह पर रखें, जहां उनका ईयर लोब और चेहरा आपस में मिलते हैं. हल्का-सा नीचे की ओर खींचते हुए अपनी उंगलियों को वहां फिसलने दें, ताकि आप दोबारा शुरू कर सकें. और देखें कि उनकी प्रतिक्रिया कैसी होती है.

होंठों का आकर्षण

पुरुष के होंठ स्वाभाविक जगह हैं, जहां स्पर्श उन्हें पसंद होता है. पर उनके निचले होंठ और ठोढ़ी के बीच की ढलान पर आपका स्पर्श उन्हें आनंद से भर देगा. ‘‘हमने पाया है कि ये छोटा, नाज़ुक और वक्रीय हिस्सा बहुत संवेदनशील नर्व रिसेप्टर है,’’ लो पेजेट ने अपनी किताब द बिग ओ में यह बात कही है.

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घुटनों का आनंद

घुटनों के पीछे की त्वचा नर्म-मुलायम होती है और पुरुषों को इसकी मालिश अच्छी लगती है. ‘‘शरीर के ऐसे हिस्से जहां कम बाल होते हैं, पुरुषों के लिए ज़्यादा संवेदनशील और उत्तेजक होते हैं,’’ कहना है न्यू यॉर्क की सेक्स कोच ऐमि लेविन का. ‘‘उनकी इच्छा को उभारने के लिए उनके घुटनों के पीछे के हिस्से की मालिश अपनी उंगलियों के पोरों से गोलाकार गति में करके देखिए.’’

पैरों से खेलें

एड़ी और टखने (ऐंग्कल) की हड्डी के बीच पीछे की ओर एक फ़िंगर-टिप साइज़ का प्रेशर पॉइंट है, जिसमें उत्तेजना की अपार संभावनाएं छिपी हैं, यह बात लॉरा नॉर्मैन ने अपनी किताब फीट फर्स्ट में बताई है. ‘‘यह जगह सेक्स अंगों से जुड़ी होती है,’’ लॉरा कहती हैं, जो आनंद का एहसास जगाती है. जरनल औफ सेक्शुअल मेडिसिन के सर्वे में भाग लेनेवाले आधे से ज्यादा पुरुषों का कहना था कि निपल (वक्षाग्र) पर किए गए स्पर्श ने न सिर्फ उनकी उत्तेजना को बढ़ाया, बल्कि उनके जोश को चरम पर पहुंचा दिया.

मर्द, डाक्टर से न झिझकें

हिंदी फिल्मों में समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात कहने की परंपरा रही है. इस कड़ी में आयुष्मान खुराना की फिल्मों को रखा जा सकता है, जिन में हमेशा ही किसी न किसी सामाजिक मुद्दे को उठाया जाता है, फिर चाहे उन की फिल्म ‘बाला’ हो या फिर ‘विकी डोनर’. इन दोनों ही फिल्मों में मर्दों के गंजेपन और बच्चे न हो पाने की समस्या पर रोशनी डाली गई है, जिन पर लोग अकसर ही बात करने से बचते हैं.

इसी लिस्ट में आयुष्मान खुराना की नई फिल्म ‘डाक्टर जी’ को रखा जा सकता है, जिस में वे अपने भाई की तरह और्थोपैडिक डाक्टर बनना चाहते हैं, लेकिन जब रैंक कम आती है तो उन्हें मजबूरी में गायनेकोलौजी ब्रांच लेनी पड़ती है. मतलब एक ऐसा डाक्टर, जो औरतों से जुड़ी बीमारियों का इलाज करता है.

पर क्या भारत जैसे देश में जहां औरतों को परदे में छिपा कर रखने को बढ़ावा दिया जाता है, वहां कोई मर्द डाक्टर उन के अंदरूनी अंगों की जांच कर सकता है? बड़े शहरों में शायद ऐसा मुमकिन हो, लेकिन गांवदेहात में तो यह अभी दूर की कौड़ी है.

फिल्म ‘डाक्टर जी’ के एक सीन से इस बात को समझते हैं. डाक्टर बने आयुष्मान खुराना चैकअप के लिए एक औरत से कपड़े ऊपर करने को कहते हैं, पर इतना सुनते ही वह औरत चिल्लाने लगती है. चीखपुकार सुन कर उस औरत का पति वहां आ जाता है और आयुष्मान खुराना को पीटने लगता है.

इसी सिलसिले में गायनेकोलौजिस्ट के तौर पर प्रैक्टिस करने वाले इंडियन मैडिकल एसोसिएशन के ईस्ट दिल्ली ब्रांच के अध्यक्ष डाक्टर कुमार गांधी ने ‘नवभारत गोल्ड’ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था, ‘वैसे तो इस पेशे में बहुत इज्जत मिलती है, लेकिन कभीकभार ऐसे वाकिए हो जाते हैं, जो नहीं होने चाहिए. कई बार हमें न चाहते हुए भी औरत से उन मुद्दों पर बात करनी पड़ती है, जिन के बारे में वह सब से बात नहीं करती. उस दौरान हम मरीज के कंफर्ट का बहुत ध्यान रखते हैं.’

जब कोई डाक्टर अपने मरीज के कंफर्ट लैवल की बात करता है, तो वह इस बारे में काफी संजीदा होता है. यह कंफर्ट लैवल औरतों और लड़कियों की ‘खास’ बीमारियों या समस्याओं पर पूरी तरह लागू होता है.

मान लो, किसी औरत या लड़की को माहवारी में दिक्कत आती है, तो बतौर डाक्टर पहला सवाल मन में यही उठता है कि कहीं वह पेट से तो नहीं है? लेडी गायनेकोलौजिस्ट के सामने मरीज बता सकती है कि उस की शादी हुई है या नहीं, या फिर उस ने सैक्स करते हुए कोई सावधानी बरती थी या नहीं, क्योंकि आज के जमाने में शादी होना और पेट से होना 2 अलग बातें हैं.

लेकिन अगर सामने कोई मर्द डाक्टर बैठा है तो मरीज को लगता है कि वह उस के करैक्टर पर सवाल उठा रहा है और वह असहज हो जाती है, जिस से कभीकभार मामला गंभीर भी हो जाता है. लेकिन इस से मरीज का ही नुकसान होता है, क्योंकि सामने जो डाक्टर बैठा है, वह औरतों की बीमारियों को ठीक करने में माहिर है और उस का एक ही मकसद है कि उसे मरीज की बीमारी के बारे में सभी बातें पता हों, तभी वह सही दवा या सलाह दे पाएगा.

जब से गांवदेहात में गरीब और निचली जाति की लड़कियां पढ़ने लगी हैं, तब से वे बहुत ज्यादा जागरूक होने लगी हैं. वे अपने और आसपास के परिवार की औरतों को समझा सकती हैं कि अगर कोई मर्द गायनेकोलौजिस्ट आप की अंदरूनी बीमारी का इलाज कर रहा है, तो अपनी झिझक छोड़ कर बात रखें.

गायनेकोलौजिस्ट को कभी भी मर्द या औरत डाक्टर के तराजू में न तोलें, क्योंकि वे आप की बीमारी में दिलचस्पी रखते हैं, न कि शरीर में. उन के सामने खुल कर अपनी समस्या बताएं और इन बातों का तो खास खयाल रखें :

* अगर आप की माहवारी अनियमित है और वह डेट से काफी पहले या देर से आती हो या फिर महीने में 2 बार आती हो, तो तुरंत माहिर डाक्टर को बताएं.

* माहवारी से जुड़ी कोई भी परेशानी हो, तो उस की अनदेखी न करें और बिना देर किए गायनेकोलौजिस्ट के पास जाएं.

* अगर आप गर्भनिरोधक गोलियां या किसी दर्द निवारक दवा का सेवन कर रही हों और इस से आप की सेहत पर असर हो रहा हो, पीरियड में तकलीफ हो या जिस्मानी रिश्ता बनाते समय दर्द महसूस होता हो, तो गायनेकोलौजिस्ट से खुल कर बात करें.

* जिस्मानी रिश्ता बनाते समय अगर दर्द महसूस हो या फिर अंग से खून निकलने समेत कोई दूसरी परेशानी हो, तो घरेलू उपचार बिलकुल न करें और गायनेकोलौजिस्ट के पास जा कर अपना इलाज कराएं.

* अंग में खुजली होने या तेज बदबू आने पर तुरंत डाक्टर के पास जाना चाहिए.

* अगर आप के पेट, पीठ या कमर में कई दिन से दर्द हो रहा हो, तो इस की अनदेखी न करें और गायनेकोलौजिस्ट के पास जा कर इलाज कराएं.

औरतें और लड़कियां एक बात का तो खास खयाल रखें कि वे कभी भी पंडेपुजारियों, ओझातांत्रिकों और फकीरबाबाओं के चक्कर में पड़ कर अपनी अंदरूनी बीमारियों का रोना न रोएं, क्योंकि बहुत से पाखंडी उन की इसी बात का फायदा उठा कर शोषण करने की जुगत में रहते हैं. वे ऐसी औरतों और लड़कियों की शर्म का फायदा उठाते हैं और उन्हें पैसे और शरीर से नोंच डालते हैं.  डाक्टर का काम अपने मरीज की सेहत को ठीक करना होता है. अगर उसे बीमारी का ही नहीं पता चलेगा तो  दवा कैसे देगा? इस में मर्द या औरत डाक्टर का तो सवाल ही नहीं पैदा होता है. लिहाजा, औरतों को मर्द डाक्टर से बिलकुल नहीं झिझकना चाहिए.

मुझे लगता है कि मुझमें संबंध बनाने की कूवत नहीं है क्योंकि…

सवाल…

मैं 28 साल का हूं. मेरी शादी हो चुकी है. मुझे लगता है कि मुझ में संबंध बनाने की कूवत नहीं है, क्योंकि लगातार हस्तमैथुन करने से मेरा अंग छोटा व पतला हो गया है. क्या करूं?

जवाब…

हस्तमैथुन से संबंध बनाने की कूवत कम नहीं होती. छोटे-पतले अंग से भी इस काम में फर्क नहीं पड़ता. हमबिस्तरी से पहले बीवी के अंगों को सहला कर उसे तैयार करें, फिर कोई वहम लाए बिना संबंध बनाए.

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सवाल…

मैं 22 साल का हूं. एक लड़की मुझे पसंद करती है. लेकिन उस के भाई से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती है. अगर उसे पता चला तो हमारी दोस्ती में दरार भी आ सकती है. मुझे उचित राय दें?

जवाब

अगर आप दोनों एकदूसरे से?प्यार करते हैं तो कोई समस्या नहीं है. दोस्त की बहन से प्यार हो जाना कोई गुनाह नहीं?है. बेहतर होगा कि आप उस के घर के बड़ों को भरोसे में ले कर बात करें और दोस्त को भी सच बता दें. अगर वह समझदार होगा तो दोस्ती में दरार नहीं आएगी, बल्कि इस के रिश्तेदारी में तबदील होने की उम्मीद बढ़ जाएगी. और भी बेहतर होगा कि आप बात उजागर करने से पहले कुछ बन कर दिखाएं.

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क्या आप भी होते है कपल की ओर आकर्षित, तो Symbiosexual है आप

अब तक गे, होमोसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर, बाइसेक्शुअल तरह के लोग तो आपने सुने होंगे और देंखे भी हो. लेकिन अमेरिका ने एक और कम्युनिटी का खुलासा किया है. जिसमें पता चला है कि कुछ लोग जो दूसरे कपल में इंट्रस्ट दिखाते है वे सिम्बियोसेक्सुअल (Symbiosexual) होते है.

 

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इस नई सेक्सुएलिटी में व्यक्ति किसी ऐसे जोड़े की तरफ आकर्षित होता है, जो पहले से ही एक दूसरे के साथ रिश्ते में है. इंसानों की इस नई रुचि का खुलासा एक शोध में हुआ है. इस रिश्ते में आने वाले लोग सिर्फ अपनी फिजिकल नीड्स को पूरा करने के लिए आते हैं उनको किसी इसके अलावा किसी तरह का अटेचमेंट नहीं होता है.

अमेरिका में सिएटल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जो थ्योरी दी है उसमें इस नई सेक्सुएलिटी का खुलासा हुआ है. इस शोध को करने वाली प्रोफेसर डॉ. सैली जौनस्टन का कहना है कि जितना हम कामुकता के बारे में जानते हैं वो पूरा नहीं है, इसमें जानने के लिए और भी बहुत कुछ है.शोध में सामने आया कि जिस व्यक्ति को पता होता है कि वो सिम्बियोसेक्सुअल है तो उसको दो लोगों के बीच में तालमेल बैठाना अच्छा लगता है. मतलब वो इस जोड़े के साथ रिश्ते में आना पसंद करता है. इस तरह के केस हर तरह के लोगों में देखने को मिले हैं.

सैपियोसेक्शुअलिटी (SPIOSEXUAL)

ये भी एक तरह की कामुकता है. जिसमें कोई व्यक्ति दिमागी तौर पर किसी ओर कपल की तरफ आकर्षित होता है. ये दिमाग ही जो यौन आकर्षण को उत्तेजित करता है. इस तरह के लोगों में दूसरे की लव कपल के बारें गहरी बातें होती है.

गे (Gay)

गे उस तरह के युवक होते है जिमसे एक लड़का दूसरे लड़के को पसंद करता है उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है साथ ही, शादी भी रचा लेते है. इसे अग्रेंजी में गे कहते है.

लेस्बियन (Lesbian)

जब एक लड़की, दूसरी लड़की को दिल दें बैठती है और बात सैक्स तक पहुंच जाती है और समाजिक तौ पर एक दूसरे के हो जाते है तो इसे लेस्बियन कहते है.

बाईसेक्सुअल (Bisexual)

बाइसेक्शुअल – ऐसे महिला और पुरुष,  जो दोनों के प्रति आकर्षित होते हैं यानि महिला और पुरुष दोनों के साथ सेक्स करते हैं उन्हें बाइसेक्शुअल कहते हैं. लड़के और लड़कियां दोनों में बाइसेक्शुअल होते हैं.

ट्रांसजेंडर (Transgender)

ट्रांसजेंडर लोग वे लोग होते हैं जिनकी लिंग पहचान उस लिंग से अलग होती है. जिसे वे जन्म के समय मानते थे. “ट्रांस” शब्द का इस्तेमाल अक्सर ट्रांसजेंडर के लिए संक्षिप्त रूप में किया जाता है. जब हम पैदा होते हैं, तो डॉक्टर आमतौर पर हमारे शरीर की बनावट के आधार पर हमें पुरुष या महिला बताते हैं. जिसमे व्यक्ति अपनी लिंग बदलवा लेते है.

एंड्रोसेक्सुअल (Androsexual)

ये एक ऐसा शब्द है जिसका उपयोग पुरुषों के लिए इस्तेमाल होता है. ये शब्द ब्यौज के लिए बना हे. जिसमें लड़कियों लड़को की मसकुलर बौड़ी देखकर अट्रैक्ट होती है.

तृप्ति और खुशियों का खजाना भी हैं कामुक किताबें

ज्ञान हासिल करना है तो किताबें पढ़ें, किसी की सक्सेज स्टोरी जाननी हो तो किताबें पढ़ें, तनाव खत्म करना हो तो किताबें पढ़ें, यहां तक कि दिल में बेचैनी हो, किसी चीज में मन न लग रहा हो, सब कुछ बोझिल सा महसूस हो रहा हो तो मनोविद कहते हैं कि कामुक किताबें पढ़ें. जी हां, आप बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं. किताबें सेक्स में काफी सहायक सिद्ध होती हैं. हालांकि पिछले कुछ सालों से बड़े पैमाने पर किताबों को वीडियो ने रिप्लेस करने की कोशिश की है, लेकिन एक तो अभी ज्यादातर वीडियोज में उस तरह की मैच्योरिटी नहीं है, जो किताबों में है.

दूसरी बात वीडियो चूंकि हर कोई बना रहा है, चाहे उसे उस विषय के बारे में कोई ज्ञान हो या न हो, इसलिए अभी वीडियोज में वह स्टैंड नहीं है, जैसा किताबों में है. निःसंदेह बहुत सारे वीडियोज ऐसे हैं, लेकिन आमतौर पर वीडियोज किताबों से अभी बेहतर नहीं है.

खैर हमें तुलना में नहीं उलझना सिर्फ यह जानना है कि विशेषज्ञ आखिर कामुक किताबों के पढ़ने के फायदे क्या बताते हैं? कुछ सालों पहले एक अध्ययन में पाया गया कि कामुक कहानियां या फिर फोटोग्राफ्रस देखने से दिल तरोताजा हो जाता है. यही नहीं, ये कहानियां और तस्वीरें स्वास्थ्य के नजरिये से भी बहुत लाभदायक पायी गईं. यह सामग्री खास तौरपर उन कपल्स के लिए तो बहुत ही उपयोगी हैं, जिन्हें उत्तेजित होने में वक्त लगता है. शायद यूं ही नहीं कहा गया है कि किताबें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं. यह न सिर्फ तकनीकी रूप से मित्र होती हैं बल्कि ये हमारे एहसास का हिस्सा भी होती हैं.

दरअसल प्रेम कहानियां व साहित्य, कामुक कहानियां यह सब सीधे हमारे दिल के तार से जुड़ जाती हैं जिससे ये हमें सेक्सुअल एहसास में कई गुना ज्यादा आनंदित करती हैं. मनोविदो के मुताबिक कामुक किताबें हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं. मनोविद उन दंपतियों को जो काफी मुश्किल से या देर से उत्तेजित होते हैं, उन्हें सेक्स से पहले कुछ इरोटिक किताबें पढ़ने का सुझाव देते हैं.

अगर किताबें उपलब्ध न हों तो इंटरनेट में जाकर पोर्न साइट्स को भी देखा जा सकता है. आजकल भारत में भी ऐसा खुलापन देखा जा रहा है. लड़कियां ऐसी साइट्स देखने में हिचकिचाती नहीं हैं बल्कि अपने पार्टनर को पूरा सपोर्ट करती हैं. उन्हें इस बात से कोई गुरेज नहीं है कि उनका पार्टनर इन साइट्स को देखने व दिखाने में इंटरेस्ट दिखा रहा है बल्कि अपने साथी को पूरा सहयोग करती हैं. वो भी दिल खोलकर. आमतौर पर सेक्सोलॉजिस्ट स्वीकारते हैं कि पोर्नोग्राफी और इरोटिक विषय, दिमाग से तनाव को दूर करते हैं. सो इसे रोगोपचार भी कहा जा सकता है.

यह एक ऐसा नुस्खा है जिसमें कोई चिकित्सा नहीं मगर बेहतर स्वास्थ्य पर बेहतर असर है. इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि अगर दंपति या पार्टनर्स साथ-साथ ऐसी किताबें पढ़ें तो उनके लिए ज्यादा लाभदायक होती हैं.

मुम्बई स्थित केईएम अस्पताल के डॉ-प्रकाश कोठारी बताते हैं कि उनके पास जितने भी दंपति चिकित्सा के लिए आते हैं उनमें से ज्यादातर इरोटिक किताबें, पोर्न साइट्स देखना पसंद करते हैं. वह कहते हैं, फ्इरोटिक किताबें पढ़ना आज के दौर में जीवन का एक हिस्सा जैसा बनता जा रहा है. यह एक किस्म से फोरप्ले का काम करता है. इससे उत्तेजित होने में आसानी होती है. इससे दोनों पार्टनर्स बहुत ही जल्द एक दूसरे में खो जाते हैं.य् चाहे नवदंपति हाें या फिर किसी की शादी के 20 साल गुजर चुके हों.

अगर सेक्स में नयापन चाहिए या फिर सेक्स में एकरसता आ गई हो और उसे दूर करना चाहते हों तो सबसे आसान उपाय यही है कि कुछ ऐसी तस्वीरें देखी जाएं जो उत्तेजित कर सकें या फिर ऐसी साइट सर्च की जाए जिसमें तस्वीरों के साथ-साथ रोमांच कर देने वाली कहानियां हाें.

इससे जीवन में खुशियां नए सिरे से शामिल हो जाएंगी. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दंपति कितने नए हैं या कितने पुराने हैं. यह न सिर्फ बिस्तर में काम करता है बल्कि सोच को भी सकारात्मक कर देता है.

ये कहानियां या किताबें कल्पनाओं तक सीमित होती हैं और कल्पनाओं की कोई सीमा नहीं होती. इसलिए हम जो कुछ अपनी कल्पनाओं में कर सकते हैं या करते हैं वह हम हकीकत में करने की सोच भी नहीं सकते. इस किस्म की किताबों को पढ़ने से हमारी सोच में तब्दीलियां आएंगी. एक किस्म से यह व्यक्ति के अंदर मौजूद ऊर्जा को बढ़ाती हैं. यह सिर्फ शारीरिक तौरपर ही लाभदायक नहीं हैं. इससे रिश्ते भी मजबूत होते हैं और भविष्य बेहतर होने की संभावना बरकरार रहती है. कई चिकित्सकों का मानना है कि अगर हम ‘फोरप्ले’ शब्द को परिभाषित करते हैं तो यह एक बहुत बड़ा विषय है जिसका विवरण हम चंद शब्दों में नहीं दे सकते.

इसलिए अगर कहें कि किताबें पढ़ना एक तरह से फोरप्ले ही है तो गलत न होगा. वास्तव में यह आसानी से पुरुषों को उत्तेजित कर सकता है और सेक्स के दौरान उन तमाम घटनाओं को अपनी कल्पना में शामिल कर सकता है जो कि उसने पढ़ी थी.

सेक्सोलॉजिस्ट, मनोविद और विशेषज्ञ ही इन तमाम बातों से सहमत नहीं हैं. इन तमाम बाताें को अपने जीवन में इख्तियार करने वाले दंपति भी इससे सहमत हैं. कामुक कहानियां पढ़ने वाले या इस तरह के साहित्य को किसी भी फॉर्मेट में देखने, सुनने या पढ़ने वाले दंपति जब एक दूसरे को छूते हैं तो उनका स्पर्श इतना प्यार भरा होता है कि शब्दों में बयान करना नामुमकिन होता है. इससे उनका सारे दिन का तनाव भी खत्म हो जाता है और हर आने वाला दिन नई ऊर्जा से भरा होता है.

लेकिन कई ऐसे दंपति भी हैं जो इस बात से सहमत नहीं हैं. ऐसा नहीं है कि वह किताबें पढ़ने या तस्वीर देखने को उत्तेजक न मानते हों. वह इसके खिलाफ भी नहीं हैं. दरअसल कई महिलाओं को लगता है कि हमारे पास जितनी भी किताबें या साइट्स में कहानियां या फोटोग्राफ उपलब्ध हैं, वह कहीं न कहीं हर रूप में मेल ओरिएंटेड यानी पुरुषों को जहन में रखकर बनाई गई हैं.

इसलिए उसमें महिलाओं को उत्तेजित करने वाले तथ्य मौजूद नहीं होते. पुरुष ही इन किताबों को पढ़कर उत्तेजित होते हैं. उत्सुक होते हैं और इस वजह से बिस्तर में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं_ लेकिन इसमें महिलाओं को कोई खास मदद नहीं मिलती.

इसलिए कई दंपति ऐसे हैं जहां पुरुष इन किताबों को अकेला पढ़ता है. उनकी पत्नियां उनका इन किताबों को पढ़ने में साथ देने को, अपने वक्त को जाया करना मानती हैं. लेकिन किसी हद तक यह भी सच है कि महिलाएं भी इन किताबों का पूरा आनंद लेना चाहती हैं. एक दौर था जब महिलाएं कामुक किताबों को पढ़ना तो दूर उन्हें अपने घर पर रखने की इजाजत भी नहीं देती थीं. मगर आज यह गुजरे जमाने की बीती बातें हो चुकी हैं.

आज हम इन पौराणिक विचारधाराओं को अपने जीवन से कोसो दूर छोड़ चुके हैं. आज न सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाएं भी इन तमाम विषयों में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी दर्शाती हैं. कई अविवाहित नवयुवक अपनी शारीरिक मांग को इन किताबों के जरिए शांत करते हैं.

उनका मानना है कि यह शरीर को ठंडक पहुंचाती है. यह इतना प्रभावशाली होता है कि इन कामुक किताबों को पढ़ने के बाद कोई भी कठिन से कठिन उलझन भी आसानी से सुलझ जाती है. सेक्सोलॉजिस्टों के मुताबिक पोर्नोग्राफी वाकई शरीर को तृप्त करने का एक बेहतरीन साधन है. अगर हम देखें कि जितने भी साधन किताबों, नेट या फिर कहीं भी उपलब्ध होते हैं, उनमें जो तस्वीरें मौजूद होती हैं वह पुरुषों को ज्यादा आकर्षित करती हैं, जबकि लिखित मैटर महिलाओं की उत्तेजना को बढ़ाता है.

खैर! जो भी है, हकीकत यही है कि इसमें सेक्स की कोई समस्या नहीं होती. किसी किस्म का कोई दबाव नहीं होता, किसी खास की तलाश करने की भी कोई जरूरत नहीं होती. यह तो कल्पनाओं की उड़ान को ऊंचा और ऊंचा और भी ऊंचा ले जाती है. जहां कोई तनाव, समस्या, परेशानियां नहीं होतीं.

आपकी सेक्स लाइफ खराब कर रहा है टीवी, जानें कैसे

दिनभर के काम के बाद सबसे आरामदेह होता है मैड मेन के क्रेडिट्स पर आंखे गड़ाना और फिर अपने बिस्तर के आगोश में समा जाना. यदि आप अकेली हैं तो ऐसा करना बिल्कुल सही है, लेकिन यदि आप अपने पार्टनर के साथ हैं और फिर भी उनसे बात करने के बजाय डेरेक ऐंड मेरेडिथ देखना पसंद करती हैं तो ये चिंता की बात है.

केवल एक आप ही नहीं हैं, जिसके अच्छे-भले सेक्शुअल जीवन में, दोस्त समझे जानेवाले बुद्धू बक्से ने सेंध लगा दी है. इटली में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, ऐसे जोड़े जिनके बेडरूम में टीवी है, उनके बीच सेक्शुअल संबंधों की संख्या, ऐसे जोड़े की तुलना में जिनके बेडरूम में टीवी नहीं है, आधी होती है.

मुंबई के सेक्शुअल मेडिसिन कंसल्टेंट राज ब्रह्मभट्ट इस अध्ययन का समर्थन करते हैं. ‘‘बेडरूम में टीवी आपके सेक्शुअल जीवन को बर्बाद कर देता है,’’ वे आगे बताते हैं,‘‘इन दिनों घर के हर कमरे में टीवी होना फैशन बन गया है. लेकिन इसका विपरीत परिणाम ये है कि कई कपल्स सेक्स के लिए समय निकालने के बजाय सीरियल देखना पसंद करते हैं.’’

सेक्स विनाशक

‘‘मैं अपना पसंदीदा टीवी सीरियल, लिविंग रूम के बजाय आराम से अपने बेडरूम में देखना पसंद करूंगी,’’ कहना है पीआर एग्जेक्यूटिव रितिका साहनी, का. ‘‘पर समस्या ये है कि मेरे और मेरे पति के पसंदीदा प्रोग्राम अलग-अलग हैं. जब तक मैं अपना सीरियल देखकर सोने के लिए तैयार होती हूं, वे अपने प्रोग्राम्स, खबरें या ऐक्शन मूवीज देखना शुरू कर देते हैं. सेक्स का तो नंबर ही नहीं आ पाता.’’

एक तर्क ये हो सकता है कि रिमोट उठाकर टीवी को बंद करने की ही देर है कि अंतरंग पल जिए जा सकते हैं, लेकिन ये इतना आसान नहीं है. ‘‘कई बार कोई सेक्सी फिल्म देखने के बाद हम निजी पल जीने के मूड में आ जाते हैं,’’ ये बताते हुए मीडिया प्रोफेशनल तनिका बसक कहती हैं, ‘‘पर अधिकतर समय हम न्यूज देखते हैं और इसे देखकर निजता की कोई भावना नहीं उभरती.’’

रचनात्मक तरीके

राज बताते हैं, ‘‘मेरे बहुत-से पेशेंट्स बेडरूम से टीवी हटाने के मेरे सुझाव का विरोध करते हैं. पर ये महसूस करना ज़रूरी है कि एल्कोहल की ही तरह टीवी देखने से इच्छाएं तो बढ़ती हैं, लेकिन सक्रियता कम हो जाती है. अत: इसे लिविंग रूम में रखें, ताकि आप इसे अन्य परिजनों के साथ ही देखें. आप इसे देखने के समय में कटौती करने से भी शुरू कर सकते हैं. यदि आप रोज छह घंटे टीवी देखती हैं तो इसे तीन घंटों तक सीमित कर दें. और ये समय ऐसा रखें कि आप दोनों को दाम्पत्य जीवन के सहज पलों को साथ बिताने का पूरा समय मिले.’’

ये कठिन ज़रूर है, पर पूरी तरह संभव है. अपने सेक्शुअल संबंधों की गर्माहट को पुनर्जीवित करें. फिर आपको ख़ुद ही महसूस होने लगेगा कि वास्तविक जीवन का यह एपिसोड टीवी सीरियल्स के एपिसोड से कहीं ज्यादा अच्छा अनुभव है.

5 टिप्स: सिंगल सेक्स को लेकर युवतियों के बदलते विचार

परिवर्तन के इस दौर में न सिर्फ युवतियों के विचार बदले हैं बल्कि उस से कई कदम आगे वे दैहिक स्वतंत्रता की बोल्ड परिभाषा को नए कलेवर में गढ़ती और बुनती नजर आ रही हैं.

1. सेक्सुअलल बोल्डनैस का बोलबाला

आज युवतियों ने सेक्स को अपने बोल्ड व बिंदास अंदाज से बदल दिया है. युवतियां न केवल सोशल फोरम में व सार्वजनिक जगहों पर सेक्स जैसे बोल्ड इश्यू को सरेआम उठा रही हैं बल्कि उस के पक्ष में अपना मजबूत तर्क भी पेश कर रही हैं. वे कैरियर ओरिऐंटिड होने के साथसाथ सेक्स ओरिऐंटिड भी हैं. सेक्स के टैबू होने के मिथक को वे काफी पीछे छोड़ चुकी हैं. वे सेक्स को बुराई नहीं समझतीं बल्कि उस का भरपूर लुत्फ उठाना चाहती हैं.

2. सिंगल सेक्स की पैरोकार आज की युवतियां

कुछ समय पहले तक युवतियों के अकेले रहने या सफर करने पर सवाल उठाए जाते थे, पर जवान होती युवापीढ़ी ने वर्षों से चली आ रही नैतिक व सेक्स से जुड़े सामाजिक मूल्यों की अपनी तरह से व्याख्या की है. सहशिक्षा व बौद्धिक विकास ने इसे बदलने में काफी सहायता की है. शिक्षित स्वतंत्र कम्युनिटी के इस बोल्ड अंदाज ने आम मध्यवर्गीय सोच में भी अपनी पैठ बना ली है. निम्न वर्गों में तो पहले से ही स्वतंत्रता थी. बगावती सुरों ने आजादी पाने की राह आसान कर दी है. युवतियों की आर्थिक स्वतंत्रता ने भी इस में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.  सिंगल रहने वाली अधिकतर युवतियां इस सेक्सुअलल फ्रीडम का बेबाकी से फायदा उठाती नजर आती हैं. वे सेक्स को ऐंजौय करने में हिचकिचाती नहीं हैं. यह भी शरीर की एक आवश्यकता है.

3. सेफ सेक्स, सेफ लाइफ का फंडा

आधी आबादी का एक बड़ा वर्ग सेफ सेक्स को तरजीह देता है. सेक्स अब इंटरकोर्स का माध्यम मात्र नहीं बल्कि सुरक्षित व आनंददाई बन गया है. युवतियां अलर्ट हैं, जागरूक हैं और अपनी सेहत को ले कर सजग भी हैं. सेक्सुअलल इंटरकोर्स के दौरान वे दुनियाभर के उपाय जैसे पिल्स, कंडोम आदि का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर रही हैं. सिंगल रहने वाली युवतियां अब सेक्स का भी मजा ले रही हैं और फिटनैस भी बरकरार रख रही हैं.

4. सिंगल सेक्स के फायदे

वर्जनाएं अब टूट रही हैं. पढ़ाई, नौकरी या कामकाज के सिलसिले में युवतियां अपनी जद की सीमाएं लांघ रही हैं. ऐसे में बेरोकटोक वाली एकाकी जिंदगी उन्हें ज्यादा रास आ रही है. माना कि आम भारतीय परिवारों में विवाहपूर्व सेक्स को अभी भी वर्जित समझा जाता है और इसे चोरीछिपे ही अंजाम दिया जाता है, लेकिन यही रोकटोक युवाओं को सेक्स के और अधिक करीब खींच कर ला रही है. वैसे तो सिंगल सेक्स अपनेआप में एक फ्रीडम का एहसास कराता है, पर इस के कुछ फायदे भी हैं जैसे :

  •    इस से बोल्डनैस का एहसास होता है.
  •    यह कथित वर्जनाओं को तोड़ने का चरम एहसास कराता है.

माना कि सिंगल सेक्स आप को रियल सेक्सुअलल फन दे सकता है, पर अपनी सेक्सुअलल प्राइवेसी को ले कर सतर्क भी रहें. सेक्सुअलल फ्रीडम की भी लिमिट तय करें तभी आप इस के आनंद के चरम पर पहुंच सकती हैं और इस के बिंदास अंदाज में रंग सकती हैं. सेक्सुअलल इंडिपैंडैंसी जहां आप को बेबाक व बोल्ड बनाती है वहीं मोरल पुलिसिंग का शिकार भी इसलिए फन के साथ केयर का भी खयाल रखें.

5. सिंगल सेक्स के नुकसान

भले ही सिंगल रहने वाली युवतियां सेक्स को ले कर मुखरित हों पर इस के अपने कुछ नुकसान भी हैं:

  •   मल्टी पार्टनर्स से संक्रमण के खतरे बढ़ जाते हैं.
  •  चीटिंग का खतरा हमेशा बना रहता है.
  •  लंबे समय तक ऐसी फ्रीडम आप को फिजिकल प्रौब्लम्स भी दे सकती है.

कुछ समय पहले मेरे पेशाब के साथसाथ धातु गिरती थी, इस बात से मैं बहुत तनाव में हूं. सलाह दें?

सवाल-

मेरी उम्र 25 साल है. कुछ समय पहले मेरे अंग से पेशाब के साथसाथ धातु गिरती थी. इस सिलसिले में एक झोलाछाप डाक्टर ने मुझ से कहा था कि तुम गुप्त रोग से पीडि़त हो. इस से तुम्हारी शादी पर बुरा असर पड़ेगा. इस बात से मैं बहुत तनाव में हूं. सलाह दें?

जवाब-

धातु एक ऐसा लक्षण है जो आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृतियों में पाया जाता है. इस में मरीजों को समय से पहले पस्त होना या नामर्दी की शिकायत होती है और उन्हें लगता है कि उन के पेशाब के साथ वीर्य भी निकलता है.

इस का इलाज दवाओं से किया जाता है और साथ ही, गलत धारणाओं को दूर करने में मनोवैज्ञानिक सलाह भी कारगर साबित होती है.

मेरी पत्नी सैक्स में डिफरेंट पोश्चर ट्राई करना चाहती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी हालफिलहाल में शादी हुई है. हम दोनों हैप्पी मैरिड कपल हैं. हम दोनों में सैक्स रिलेशन भी अच्छे हैं, लेकिन नईनई शादी और सैक्स संबंध में मेरी पत्नी की मुझ से सैक्स को ले कर अलगअलग डिमांड रहती है. वह चाहती है कि मैं डिफरैंट पोजीशन ट्राई करूं, जिस के लिए मैं खुद को परफेक्ट नहीं समझता हूं, लेकिन मैं भी करना चाहता हूं. इसे ले कर हम दोनों में तनाव रहता है. इस के लिए मैं क्या करूं?

जवाब

पत्नी का साथ दें

यह सुन कर अच्छा लगा कि आप दोनों न्यू कपल हैं और आप के बीच सब ठीक चल रहा है. आप की वाइफ आप से सैक्स रिलेशन में डिमांड करती है, यह भी अच्छी बात है. इस से आप का रिलेशन मजबूत होगा. इस में आप को अपनी पत्नी का साथ देना होगा, क्योंकि इस से पतिपत्नी का रिश्ता स्ट्रौंग होगा. साथ ही, वह यह भी समझेगी कि आप उस की भावनाओं की कदर कर रहे हैं, जिस से आप के लिए इज्जत भी बढ़ेगी और रिश्ते में मिठास आएगी.

आप भी एंजौय करेंगे

अगर आप की पत्नी सैक्स में डिफरैंट पोजीशन ट्राई करने के लिए कहती है, तो उसे आप एंजौय करें. अगर आप नहीं जानते हैं कि किस तरह से करना है, तो आप किताबों और सोशल मीडिया पर अच्छी जगह से मदद ले सकते है. इस से आप का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और आप के अंदर एक पौजिटिव ऐनर्जी भी आएगी. साथ ही, प्रोसैस को जान कर एंजौय भी करेंगे. यह प्रक्रिया एक दिन की नहीं है, जिसे आप एक दिन करें और छोड़ दें. वाइफ को हैप्पी रखने के लिए आप बारबार डिफरैंट पोजीशन ट्राई कर सकते हैं. हैल्दी और हैप्पी सैक्स रिलेशन के लिए यह जरूरी है और आप की वाइफ डिमांड करती है, तो आप जरूर करते रहें.

सैक्स में डिफरैंट तरीके रिश्ते को मजबूत करते हैं

सैक्स में जितना आप सिंपल रहेंगे उस से आप कभी मजबूती नहीं पा पाएंगे. इस के लिए जरूरी है कि आप सैक्स में डिफरैंट स्टाइल अपनाएं. इसे सैक्स में मनोरजंन भी बना रहेगा और आप खुश भी रहेंगे.

ट्राई करें ये डिफरैंट पोजीशन

(Lotus) लोट्स सैक्स पोजीशन– इस सैक्स पोजीशन में एक साथी क्रौस-लैग्ड बैठा होता है और दूसरा उस का सामना करते हुए सामने बैठता है. यह 2 आमनेसामने के शरीरों को एकसाथ कस कर दबा हुआ होत है, जो अंतरंग मधुर और सैक्सी होता है.

(face to face Position) फेस टू फेस पोजीशन– इस पोजीशन में दोनों आपस में बैठ कर, लेट कर, खड़े हो कर, घुटनों के बल बैठ कर भी सैक्स कर सकते हैं. जरूरी यह है कि इस में दोनों साथी एकदूसरे के आमनेसामने होते हुए सैक्स करते हैं.

(Doggy Style) डौगी स्टाइल सैक्स पोजीशन– डौगी पोजीशन काफी कंफर्टेबल मानी जाती है और इसे करने में महिलाओं को थकान नहीं होती है. इस सैक्स पोजीशन को काफी आराम से और पेशेंस के साथ करना चाहिए, तभी इस का असली मजा ले पाएंगे. इस स्थिति में मेल पार्टनर आसानी से वैजाइना तक पहुंच जाता है.

(Criss Cross) क्रिस क्रौस सैक्स पोजीशन– इस पोजीशन में सैक्स करने से शरीर में ज्यादा भार नहीं पड़ता है. इस सैक्स पोजीशन में महिला साथी नीचे होती है और पुरुष महिला के टांगों के बीच से निकल कर कैंची की तरह की शेप बनाते हैं यानी मेल पार्टनर क्रौस लैग कर के बैठता है.

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