औनर किलिंग- भाग 1: आखिर क्यों हुई अतुल्य की हत्या?

हत्या की सूचना पाकर पुलिस जब एक पुरानी फैक्टरी के पास पहुंची, तो उसे वहां खून से सनी एक लाश मिली. मरने वाला शख्स यही कोई 25-26 साल का नौजवान था. हत्यारे ने बड़ी बेरहमी से उस की हत्या की थी. पुलिस को यही लग रहा था कि हत्या लूट के चलते की गई थी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता चला है कि हत्या किसी लूट के इरादे से नहीं, बल्कि आपसी रंजिश के चलते हुई थी.

हत्या करने वाला एक नहीं, बल्कि  2 आदमी थे और दोनों के हाथों में धारदार चाकू थे. उन दोनों आदमियों ने उस नौजवान की बहुत पिटाई की थी. वह अपने दोनों हाथ जोड़ कर जान की भीख मांगता दिख रहा था, मगर उन दोनों ने बारीबारी से उस के पेट में चाकू से इतने वार किए कि मौके पर ही उस की मौत हो गई.

पुलिस को वहां गुनाह के कोई सुबूत नहीं मिल पाए और न ही गुनाहगारों की कोई पहचान हो पाई, क्योंकि दोनों  हत्यारों का चेहरा पूरी तरह से ढका  हुआ था.

गुनाहगारों की केवल 2 आंखें ही दिखाई दे रही थीं. उन दोनों ने अपने हाथों में दस्ताने पहने हुए थे और पैरों में जूते, इसलिए पुलिस पता नहीं लगा पा रही थी कि हत्यारे कौन हैं और उन्हें कैसे पकड़ा जाए?

बहुत खोजबीन करने के बाद पास की  झाडि़यों में पुलिस को खून लगी कमीज, जींस और चाकू पड़ा मिला, जिस से उस शख्स की हत्या की गई थी. लेकिन फिर भी यह कैसे पता लगाया जाए कि गुनाहगार कौन है?

उस पुरानी फैक्टरी के आसपास और सड़कों पर पुलिस के कुत्ते भी दौड़ाए गए, लेकिन हर बार वे कुछ दूर जा कर लौट आते थे. इस का मतलब यही था कि वे हत्यारे किसी गाड़ी में बैठ कर वहां से भाग गए होंगे, ऐसा पुलिस अंदाजा लगा रही थी.

मरने वाले शख्स की जेब से एक पर्स मिला, जिस से यही पता चल पाया कि उस नौजवान का नाम अतुल्य था और वह पास के ही एक गांव का रहने वाला था. उस के आइडैंटिटी कार्ड से पता चला कि वह एक कंपनी में नौकरी करता था और शायद छुट्टी में अपने गांव आ रहा था और रास्ते में ही उस के साथ यह वारदात हो गई.

जांचपड़ताल के लिए पुलिस जब उस के गांव पहुंची, तो पता चला कि अतुल्य अपने बूढ़े मांबाप का एकलौता बेटा था.

बेटे की मौत की खबर सुन कर उस की मां तो वहीं खड़ेखड़े ही बेहोश हो कर गिर पड़ीं और पिता जहां खड़े थे, वहीं जड़ हो गए.

पुलिस की गाड़ी देख कर गांव के बहुत से लोग भी वहां जुट गए और  यह सुन कर वे भी हैरान रह गए.

गांव की एक बुजुर्ग औरत ने अतुल्य की मां के चेहरे पर पानी की छींटें मारीं और उन्हें होश में लाईं. बेटे की मौत की सोच कर मां अपनी छाती पीटपीट कर यह बोल कर रोने लगीं, ‘‘हाय, अपने बेटे के जन्मदिन पर मैं ने उस के लिए खीर बनाई थी. मैं तो उस का इंतजार कर रही थी. लेकिन यह क्या हो गया? उस ने किस का क्या बिगाड़ा था? क्यों किसी ने मेरे एकलौते सहारे को मु झ से छीन लिया?’’

दूसरी तरफ पुलिस के बहुत पूछने पर अतुल्य के पिता फफकफफक कर रोते हुए बताने लगे, ‘‘हमारा बेटा एक कंपनी में नौकरी करता था. आज वह गांव आने वाला था, क्योंकि आज उस का जन्मदिन था और हम बड़ी बेसब्री से उस का इंतजार कर रहे थे.

‘‘वह तो बहुत सीधासरल लड़का था. कभी किसी से मुंह उठा कर बात भी नहीं करता था, फिर कौन उस का दुश्मन हो सकता है और क्यों मारा हमारे बेटे को?’’

बूढ़े मांबाप को रोतेबिलखते देख इंस्पैक्टर माधव भी भावुक हो गए. अतुल्य के मांबाप को हिम्मत बंधा कर पुलिस यह बोल कर वहां से चली गई कि जल्द ही हत्यारों को उन के गुनाह की सजा जरूर मिलेगी.

पुलिस हर तरह से जांच कर के थक गई, पर उन हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था. आखिर हत्या की कोई तो वजह होगी न? कोई पागल तो नहीं होगा, जो आ कर यों ही किसी के पेट में चाकू मार कर भाग जाएगा?

फुटेज में साफसाफ दिख रहा था कि पूरी साजिश के तहत उस लड़के की हत्या की गई थी. हत्यारे पूरी तैयारी के साथ आए थे.

इस हत्या की वजह से पुलिस की रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया था. ऊपर से दबाव आ रहा था, सो अलग. पुलिस अब निराश हो चली थी. लग रहा था कि अब यह केस कभी सुल झेगा ही नहीं.

तभी एक दिन पुलिस स्टेशन में दौड़तीहांफती एक लड़की दाखिल हुई और कहने लगी कि इस हत्या के बारे में उसे पता है. वह जानती है कि अतुल्य की हत्या किस ने की है.

23-24 साल की वह दुबलीपतली लड़की बहुत डरी हुई थी. वह अपने दुपट्टे से बारबार अपना मुंह पोंछ रही थी और पीछे मुड़मुड़ कर देख भी रही थी कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है.

‘‘एक मिनट… पहले तुम बैठो…’’ इंस्पैक्टर माधव ने अपने सामने खड़े हवलदार को इशारे से उस लड़की को पानी देने को कहा, ‘‘तुम डरो मत… यहां कोई नहीं आ सकता. तुम इतमीनान से अपनी बात कह सकती हो…’’ उस लड़की के सामने पानी का गिलास बढ़ाते हुए इंस्पेक्टर माधव बोले, ‘‘लो, पानी पी लो पहले.’’

मनमोहिनी – भाग 3 : एक संगदिल हसीना

अब वह किसी और स्कूल में अपना जलवा बिखेरने की तैयारी कर चुकी थी. मोहकलाल ने उसे भावभीनी विदाई दी.

मनमोहिनी उड़ी तो मोहकलाल कुछ दिन तक मजनू बने रहे. उन का मन स्कूल के किसी काम में नहीं लगता था. स्कूल के कौरिडोर उन्हें सूनेसूने से लगते. अपना गम भुलाने के लिए वे म्यूजिक रूम का रुख करते. तब वहां से दुखभरे फिल्मी नगमों की तान सुनाई पड़ती… ‘मेरी किस्मत में तू नहीं शायद जो तेरा…’, ‘आ लौट के आजा…’

इस पर कौरिडोर में चाय की खाली ट्रे ले जाती फूलवती आया अपने लहजे में जवाब देती, ‘‘अब तो वह चली गई, अब काहे बावरा हो रिया.’’

लेकिन बेचारी फूलवती को क्या पता था कि वियोग क्या होता है. वियोग तो अच्छेअच्छों को कवि बना देता है, तभी तो सुमित्रानंदन पंत ने कहा था :

‘वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान, निकल कर आंखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान.’

लेकिन इसी के साथ एक काम और हुआ. फूलवती की अनजाने में कही

गई बात किसी मुंहफट टीचर के कान

में पड़ गई. फिर तो वह बात स्कूल में सभी टीचरों के ‘हंसोड़खाने’ की आवाज बन गई.

इस बात को टीचर एकदूसरे को चटकारे लेले कर सुनाते और मजे लेते हैं. फूलवती को आज तक नहीं पता कि उस ने अनजाने में कितने काम की बात कही थी.                            द्य

जुम्मन और अलगू का बदला – भाग 1

आज अलगू की खुशी देखते ही बनती थी. सुबह से चहकाचहका घूम रहा था और सभी मिलने वालों से बड़ी हंसीखुशी से बात कर रहा था. कहां तो बंदे के चेहरे पर हमेशा एक सर्द खामोशी चस्पां रहती थी, पर आज तो वह बेवजह हंसा जा रहा था. उस के खुश रहने की वजह यह थी कि उस का बचपन का दोस्त जुम्मन वापस जो आ रहा था.

जुम्मन और अलगू एकसाथ खेले और बड़े हुए थे, पर तकरीबन 10 साल पहले ही जुम्मन गांव से शहर की ओर कमाने चला गया था. उस समय जुम्मन की उम्र महज 18 साल थी और अब वह 28 साल का हो गया था.

इन सालों में जुम्मन ने शहर में मोटर मेकैनिक का काम किया और एक से एक महंगी गाड़ी को अच्छे ढंग से  बनाना सीखा. अब तो वह किसी भी गाड़ी के मर्ज को मिनटों में भांप लेता था.

‘‘बाकी तो सब बात सही है, पर मुझे यह बताओ कि तुम गांव छोड़ कर चले गए थे और शहर में तुम्हारा रोजगार भी अच्छा चल रहा था, तब वापस क्यों आ गए?’’ अलगू ने जुम्मन से गले मिलते ही पहला सवाल दाग दिया.

जुम्मन ने अलगू को अपने प्लान के बारे में बताया, ‘‘शहर में रह कर मोटर मेकैनिक का काम करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि इस लाइन में होड़ बहुत है. हर गलीमहल्ले में एकाध मेकैनिक मिल जाता है.

‘‘यहां गांव के सामने से ही तो शहर की ओर जाती हुई एक चौड़ी सड़क है, एकदम हाईवे टाइप. बस, इसी रोड के किनारे अपनी कार और मोटरसाइकिल रिपेयरिंग की दुकान खोलूंगा. सड़क पर गाडि़यों की आवाजाही रहेगी तो काम भी खूब मिलेगा. और फिर जब गांव में ही रोजगार मिल रहा है, तो शहर जाने की क्या जरूरत है?’’

जुम्मन ने बेशक गांव वापस आने के पक्ष में ये सारी दलीलें दे डाली थीं, पर अंदर ही अंदर अलगू अच्छी तरह से जानता था कि हकीकत कुछ और ही है और वह हकीकत थी रन्नो से जुम्मन की मुहब्बत.

जुम्मन और रन्नो शादी करना चाहते हैं, पर दिक्कत यह है कि जुम्मन एक मुसलमान परिवार से है और रन्नो हिंदू लड़की है.

कमबख्त जातपांत का लफड़ा तो रास्ते में रोड़ा बन कर आएगा ही, पर एक बार धंधा अच्छी तरह से जम जाए, तब खुद जा कर जुम्मन शान से रन्नो का हाथ मांग लेगा और अगर लड़की के पिता जातिधर्म की दुहाई देंगे तो उन्हें आज के जमाने की हकीकत से रूबरू कराते हुए बता देगा कि पुराना जमाना बदल रहा है, आजकल हिंदूमुसलिम कोई नहीं देखता, बस अपनी लड़की और लड़के की खुशी का ध्यान रखते हैं  मांबाप.

अगर वे लोग इतनी बात से सबकुछ समझ गए तो ठीक है, नहीं तो फिर जुम्मन और भी कच्चाचिट्ठा खोल देगा और यह बताने से बिलकुल नहीं डरेगा कि इस गांव में दूसरे धर्म की लड़की से प्यार करने वाला वह अकेला नहीं है, बल्कि और लोग भी हैं जो अलग धर्म में मुहब्बत करते हैं और शादी भी करना चाहते हैं.

अरे, फिर तो जुम्मन नाम बताने से भी नहीं चूकेगा, भले ही उस का दोस्त अलगू उस से नाराज हो जाए. अलगू, अरे हां भाई, अलगू ही तो है उस का दोस्त और उसे प्यार है एक मुसलिम लड़की से. अब अलगू को सलमा से प्यार है और सलमा भी तो अलगू से मुहब्बत करती है और यह मुहब्बत कोई जानबूझ कर नहीं की जाती, यह तो बस हो जाती है.

पर यह बात बाहुबली जिगलान को समझ आए तब तो. जिगलान इस गांव में रहने वाला खानदानी ठाकुर था. वह 48 साल का था, पर शरीर में जवानों जैसा कसाव और चेहरे पर ताजगी. उस की तलवारकट मूंछ उसे एक रोबीला इनसान बनाती थी.

हालांकि ठाकुर जिगलान को राजनीति में कोई पद तो हासिल नहीं था, पर बड़ेबड़े नेता उस के पैर छूने आते थे. इस की वजह सिर्फ एक थी कि चुनाव में ठाकुर जिगलान सभी गांव वालों के वोट दिलाने की गारंटी लेता था और बदले में नेता उसे पैसे देते थे.

हालांकि इस गांव में हिंदू तकरीबन 60 फीसदी और मुसलिम तकरीबन 40 फीसदी थे, फिर भी ठाकुर जिगलान ने अपनी इमेज एक सैक्युलर की बना रखी थी, जबकि वह गांव के हिंदूमुसलिमों को आपस में लड़ा कर रखता और अपना उल्लू सीधा करता था.

ठाकुर जिगलान जानता था कि अगर गांव के लोगों में एकता हो गई, तो वह अपनी मरजी गांव के लोगों पर नहीं चला पाएगा.

ठाकुर जिगलान के चारों तरफ उस के चमचे रहते थे, जो गांव की जवान होती लड़कियों पर बुरी नजर रखते थे.  गांव के लोग चाह कर भी इस बात का विरोध नहीं कर पाते थे, क्योंकि ठाकुर जिगलान के पास पैसा भी था और लोगों का समूह भी, जो उस के एक इशारे पर कुछ भी करगुजरने को तैयार रहते थे.

ठाकुर जिगलान अपने इर्दगिर्द इकट्ठे जवान लड़कों की कमजोर नस को अच्छी तरह जानता था और वह कमजोर नस थी दारू और मांस. तकरीबन हर दूसरे दिन ही ठाकुर  जिगलान की बगिया के कोने में बने बड़े से चूल्हे पर मांस पकाया जाता और सूरज डूबतेडूबते दारू और मांस खाने वाले इकट्ठे होने लगते थे.

जब कभी ठाकुर जिगलान का मन किसी लड़की पर आ जाता, तो वह उसे उठवा लेता और रेप कर देता था.कभीकभी तो ठाकुर जिगलान के मुंह लगे मुंशी जानकीदास को हैरानी होती कि साहब खुद इतने रसूख वाले हैं, पर कभीकभी इन्हें न जाने क्या हो जाता है.

खेत में पसीने में तर हो कर काम कर रही होती किसी भी औरत, जिस की खुली पीठ और काली रंगत की कमर कहीं से भी आकर्षक नहीं लग रही होती थी, उसे भी उठवा कर वे उस का रेप करने का मजा लेते हैं. अरे, कम से कम अपना रसूख भी तो देखें.

एक दिन जब 25 साल के जानकीदास से रहा नहीं गया, तो वह ठाकुर जिगलान से कह बैठा और उस की बात का ठाकुर ने मुसकराते हुए जवाब दिया, ‘‘अरे जनकिया, ठकुराई हमें विरासत में मिली है. यह सब करना हमारे खून में है और खून का असर जल्दी नहीं जाता.

‘‘हम जानते हैं कि वह लड़की जाति से छोटी है, फिर भी उस का रेप करते हैं, क्योंकि ये लोग हमारी जांघ के नीचे रहने लायक ही हैं.’’

ठाकुर जिगलान की बात जानकीदास की समझ में आई या नहीं, पर उस ने हां की मुद्रा में अपना सिर जरूर हिला दिया.

ठाकुर जिगलान की पत्नी, जो उम्र में महज 30 साल की थी, खामोशी से यह सब देखा करती थी. उस ने कई बार अपने पति को समझाना भी चाहा तो बदले में ठाकुर की डांट ही मिली और खामोश रहने की ताकीद भी.

बेचारी ठकुराइन समझ गई थी कि खामोशी को उसे अपना सिंगार बनाना होगा. उस ने तो जबान ही सिल ली थी.चूंकि गांव वाले ठाकुर जिगलान के रोब से अच्छी तरह वाकिफ थे, इसलिए लड़कियों के रेप के बाद भी कोई चूं तक नहीं करता और ज्यादातर मामलों में तो लड़की के मांबाप ही लड़की को नहलाधुला कर बैठा लेते और लड़की से भी चुप रहने को कह देते.

चाहत के वे पल: पत्नी की बेवफाई का दर्द

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