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अगर आप भी करते हैं सेक्स करना अवौएड, तो सकते हैं ये नुकसान

हमारे देश में सेक्स को ले कर इतनी हायतोबा मचाई जाती है मानो इस की बात करने पर प्रतिबंध हो. पोंगापंथी और धर्म के ठेकेदार सेक्स को गंदा काम बताते फिरते हैं. यह अलग बात है कि कई मुल्लामौलवी, बाबा और पादरी सैक्सुअल हैरासमैंट और रेप के मामलों में पकड़े जा चुके हैं.

सच यह है कि सेक्स एक शारीरिक जरूरत है, जो बेहद स्वाभाविक और प्राकृतिक है. लेकिन धर्म के ठेकेदारों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों और नकली बाबाओं द्वारा दिए गए उलटेसीधे प्रवचनों से प्रभावित हो कर भारतीय महिलाएं सेक्स को एक अधार्मिक क्रिया समझने लगती हैं और खुलेमन से इस का आनंद उठाने के बजाय इस से कतराने लगती हैं.

पति के लाख मनाने और समझाने के बावजूद वे उस का साथ देने और सेक्स का आनंद उठाने के लिए तैयार नहीं होतीं. कभी व्रतत्योहार का बहाना बना कर, तो कभी तबीयत खराब होने का बहाना बना कर ये महिलाएं ‘अपवित्र’ होने से बचती रहती हैं. लेकिन चिकित्सक, मनोविज्ञानी, व्यवहार विशेषज्ञ और समाजशास्त्री इस प्रवृत्ति को तन और मन की सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं.

पीरियड्स में बढ़ सकता है दर्द : आमतौर पर महिलाओं के मैन्सट्रुअल साइकिल के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है. लेकिन जो महिलाएं सैक्सुअल लाइफ को एंजौय नहीं करतीं उन में यह दर्द ज्यादा हो सकता है.

सेक्स ऐक्सपर्ट डा. लारेज स्ट्रीचर का कहना है कि पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से मैन्स्ट्रुअल क्रैंप में काफी कमी आ सकती है. यूट्रस एक मांसपेशी है जिस में सेक्स और्गेज्म के दौरान सिकुड़न होती है. इस से रक्तस्राव बेहद आसानी से हो जाता है और स्राव के समय होने वाले दर्द से महिलाओं को काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है. इस के साथ ही, यौन आनंद से एंडौर्फिन का स्राव होता है जो दर्द को कम करने में सहायक होता है.

वैजाइना की दीवार हो सकती है कमजोर : सेक्स थेरैपिस्ट सारी कूपर बताती हैं, ‘‘खुद को सेक्स से वंचित रखने वाली महिलाओं में वैजाइना की वाल धीरेधीरे कमजोर यानी पतली होने लगती है. विशेषरूप से मीनोपौज की उम्र में पहुंच चुकी महिलाएं जब सेक्स से दूरी बढ़ाती हैं तो उन में यह समस्या अधिक होती है.’’

वे कहती हैं, ‘‘नियमित सेक्स करते रहने से वैजाइना की वाल लचीली रहती है और ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता जबकि कभीकभी सेक्स करने में यह दर्द काफी ज्यादा महसूस हो सकता है. नौर्थ अमेरिकन मीनोपौज सोसायटी ने भी मीनोपौज के दौर से गुजरने वाली महिलाओं को नियमित पैनेट्रेटिव सेक्स करने की सलाह दी है.

बढ़ सकता है स्ट्रैस : जगजाहिर है कि सेक्स से तन और मन में आनंद की अनुभूति होती है. इस से दिमाग में खुशी के हार्मोन एंडौर्फिन व औक्सीटोसीन उत्सर्जित होते हैं. स्कौटलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया है कि  सेक्स से दूर रहने वाले लोेग पब्लिक स्पीकिंग या ऐसी दूसरी स्टै्रसफुल सिचुएशन को आसानी से हैंडल नहीं कर पाते, जबकि महीने में कम से कम 2 बार सेक्स करने वाले लोग इस में आसानी महसूस करते हैं. नियमित सेक्स करने की आदत को हैल्थ ऐक्सपर्ट स्ट्रैस बस्टर मानते हैं, सेक्स न करने वाले लोगों का ब्लडप्रैशर स्ट्रैस की सिचुएशन में काफी बढ़ जाता है.

पुरुषों में बढ़ सकती है प्रोस्टैट कैंसर की संभावना : हैल्थ ऐक्सपर्ट का मानना है कि जो पुरुष नियमित रूप से सेक्स नहीं करते उन में प्रोस्टैट कैंसर की संभावना बढ़ सकती है. सेक्स करने से प्रोस्टैट को सुरक्षा देने वाले कैमिकल्स रिलीज होते हैं. अमेरिकन यूरोलौजिकल एसोसिएशन द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से यौनसंबंध बनाने वाले पुरुषों में प्रोस्टैट कैंसर होने की संभावना 20 फीसदी तक कम हो जाती है क्योंकि समयसमय पर वीर्य स्खलन होने से प्रोस्टैट में मौजूद हानिकारक तत्त्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं.

संबंधों के प्रति आ सकता है असुरक्षा का भाव : जिन पतिपत्नी में सैक्सुअल संबंध लगभग खत्म हो जाते हैं उन में आपसी नजदीकी, माधुर्य और अपनापन भी कम होने लगता है. साथ ही, पति और पत्नी के मन में एकदूसरे के प्रति अविश्वास की भावना भी आ सकती है जिस से रिलेशनशिप में इनसिक्योरिटी का भाव आता है.

‘सेविंग योर मैरिज बिफोर इट स्टार्ट्स’ की लेखिका एवं मनोविज्ञानी लेस पैरोट कहती हैं, ‘‘सेक्स न करने से शरीर में औक्सीटोसिन व दूसरे बौंडिंग हार्मोन का लैवल कम होने लगता है. पति और पत्नी के मन में अपराधबोध की भावना आती है, सैल्फ एस्टीम में कमी आती है. साथ ही, मन में हमेशा संदेह रहता है कि कहीं आप अपनी सेक्स की जरूरत के लिए किसी दूसरे के संपर्क में तो नहीं. हालांकि, इस का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि बिना सेक्स के पतिपत्नी खुश रह ही नहीं सकते. उन्हें आपस में चुंबन लेना, हाथ पकड़ना, एकदूसरे को सहलाना आदि जारी रखने चाहिए.

बढ़ता है सर्दीजुकाम का खतरा : पैनसिलवानिया की विलकेस बौरे यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने अपने शोध में पाया कि जो लोग हफ्ते में एक या दो बार सेक्स करते हैं, उन में एंटीबौडीज का उत्पादन 30 फीसदी तक बढ़ जाता है. ये एंटीबौडीज तरहतरह के वायरस आदि के खिलाफ लड़ने में हमारे शरीर के डिफैंस सिस्टम की मदद करते हैं. सेक्स को इम्यूनिटी सिस्टम इंप्रूव करने वाला भी माना गया है.

यौनेच्छा में कमी आने लगती है : जब आप सेक्स से कतराने लगते हैं या इस की आदत धीरेधीरे छूटती जाती है तो आप की यौनेच्छा खुदबखुद कम होने लगती है. सेक्स थेरैपिस्ट सारी कूपर कहती हैं, ‘‘एक वक्त ऐसा आता है जब आप सेक्स करना चाह कर भी सेक्स नहीं कर पाते. सेक्स शारीरिक प्रक्रिया से ज्यादा एक मानसिक प्रक्रिया है. आदत छूटने या नियमित इस का उपभोग न करने पर आप का मन सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता. जब तक मन तैयार नहीं होता, तो तन का साथ देने का सवाल ही नही.

पुरुषों में इरैक्टाइल डिसफंक्शन : उपरोक्त कारण की वजह से पुरुषों में यौनांग सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता, यानी यौनांग में कठोरता नहीं आ पाती जिसे हैल्थ ऐक्सपर्ट इरैक्टाइल डिसफंक्शन कहते हैं.

अमेरिकी मैडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरुषों का यौनांग एक मांसपेशी है. जैसे हमारे शरीर की अन्य मांसपेशियों को नियमित ऐक्सरसाइज की जरूरत है, ठीक उसी तरह इस का भी नियमित इस्तेमाल जरूरी है, वरना इस में शिथिलता आने लगती है. कुछ वैज्ञानिकों ने सरल भाषा में इसे ‘यूज इट आर लूज इट’ कह कर समझाया है.

बने रहें जवां : शान से जिएं जिंदगी

बचपन, युवावस्था और वृद्धावस्था. जिंदगी के ये 3 पड़ाव हैं. बचपन और युवावस्था तो गुज़र जाते हैं लेकिन वृद्धावस्था इंसान के साथ आखिरी सांस तक रहती है. सच है कि उम्र का बढ़ना तय है और हर किसी को वृद्धावस्था यानी बुढ़ापा से दोचार होना है. बूढ़ा होने से कोई खुद को रोक तो नहीं सकता लेकिन उस अवस्था को भी एंजौय जरूर कर सकता है. यानी, एक तरह से वह जवां बना रह सकता है.

जिंदगी की व्यस्तताओं ने इंसान को रोबोट सा बना दिया है. सुबह उठने से ले कर रात को सोने तक काम, काम और काम. टेबल पर खाना खाता इंसान एक मशीन सा बन कर रह गया है. हालात और ज्‍यादा खराब हो जाते हैं  जब इंसान अपनी सेहत, भोजन और नींद को भी नजरअंदाज करने लगता है.

वहीं, सच यह है कि बढ़ती उम्र के प्रभाव को कोई भी अपने चेहरे पर जल्दी नहीं देखना चाहता. अपनेआप को स्मार्ट दिखाने के लिए हर कोई परेशान रहता है और इंसान पूरी कोशिश करता है कि उस की झलक सब से अलग दिखे.

पुरुष दें ध्यान :

पुरुषों को अपनी त्वचा का खयाल रखने के लिए छोटी से छोटी बात पर ध्यान देने की जरूरत है. पुरुषों की त्वचा सख्त होती है, वे लंबे समय तक जवां दिखना चाहते हैं तो उन्हें कुछ आदतों को छोड़ कर अच्छी आदतों को अपनाना होगा. ऐसा करने से होने वाले फायदे कुछ ही दिनों में ही ज़ाहिर होना शुरू हो जाते हैं.

शाम को भी साफ़ करें चेहरा :

हर इंसान अपना चेहरा धोता है, लेकिन आमतौर पर सिर्फ सुबह. और यह उस की बचपन से ही आदत होती है. अच्छी आदत है. चेहरे की स्किन ज्यादा उम्र तक जवां बनी रहे, इस के लिए रोजाना शाम को भी फेसवौश या साबुन से चेहरे को धोना/साफ़ करना बेहद ज़रूरी है. ऐसा करने के नतीजे में आप के चेहरे पर मौजूद दिनभर की गंदगी भी साफ हो जाएगी और आप का चेहरा साफ रहेगा. इतना ही नहीं, रोजाना चेहरा अच्छी तरह साफ करने के चलते आप कई तरह के स्किन इंफैक्शन से बचे भी रहेंगे.

क्रीम नहीं मौइस्चराइजर है अनिवार्य:

ज़्यादातर युवा नहाने के बाद किसी क्रीम को ही लगाते हैं. दरअसल, युवाओं के चेहरे के लिए यह ठीक नहीं है. इस के चलते उन्हें रिऐक्शन हो सकता है और चेहरे पर पिंपल व दागधब्बों से भी जूझना पड़ सकता है. 30 साल की उम्र पार करने के बाद पुरुषों को नियमितरूप से नहाने के बाद मौइस्चराइजर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए. यह स्किन पोर्स (त्वचा के महीनमहीन छिद्र) को खोलने में मदद करता है, जिस से चेहरे को खिलाखिला बनाए रखने में काफी मदद मिलती है. हां, मौइस्चराइजर के बाद चाहें तो कोई क्रीम लगा सकते हैं.

सप्ताह में 2 बार फेसपैक :

अकसर पुरुष समझते हैं कि फेसपैक का इस्तेमाल केवल महिलाएं करती हैं, जबकि ऐसा नहीं है. यह चेहरे पर मौजूद गंदगी को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, वह चेहरा महिला का हो या पुरुष का. इस के अलावा, यह चेहरे की स्किन को निखारने और दागधब्बे व मुहांसों को दूर करने के लिए भी काफी प्रभावी माना जाता है. यह चेहरे की रंगत को बरकरार रखता है और बढ़ती हुई उम्र के असर को भी चेहरे पर पूरी तरह से नहीं आने देता. फेसपैक किसी घरेलू नुस्खे के जरिए भी तैयार किया जा सकता है, अन्यथा बाज़ार में उपलब्ध हैं.

सप्ताह में स्क्रब जरूर :

चेहरा देख कर आमतौर पर लोग किसी की उम्र का पता लगा लेते हैं. बुढ़ापे का असर या कह लें ढलती हुई उम्र सब से पहले चेहरे पर अपना असर दिखाना शुरू कर करती है. इसलिए, चेहरे का खास खयाल रखते हुए हफ्ते में एक बार स्क्रब जरूर करें. स्क्रब किसी घरेलू नुस्खे के जरिए भी तैयार किया जा सकता है, अन्यथा बाज़ार में उपलब्ध हैं. स्क्रब करने से चेहरे की स्किन खिलीखिली लगती है.

बालों को भी दें समय :

चेहरे से ही इंसान जवां नहीं दिखता. जवां दिखने के लिए जरूरी नहीं कि कोई अपने जिस्म के सिर्फ एक हिस्से पर ही ध्यान दे बल्कि उस को सभी ब्यूटी टिप्स पर ध्यान देने की जरूरत है. बालों की अच्छी चमक हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है. पुरुषों को अपने बालों की भी खास केयर करनी चाहिए. बढ़ती उम्र के साथसाथ उन्हें समयसमय पर हेयरकेयर टिप्स का इस्तेमाल कर के बालों को हैल्दी बनाए रखना चाहिए. कुछ घरेलू नुस्खों के ज़रिए भी बालों को काला करने और उन्हें मजबूती देने के लिए खास हेयरमास्क का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

बुरी आदतों से बचें :

शराब का सेवन और स्मोकिंग करना जिस्म के लिए नुकसानदायक हैं. किसी को अगर ये आदतें हैं तो उसे इन आदतों को छोड़ना पड़ेगा वरना उम्र से पहले वह बूढा नज़र आने लगेगा. इन आदतों के चलते चेहरे की स्किन के साथसाथ पूरे जिस्म के अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. बढ़ती उम्र में ये बुरी आदतें जिस्म को विभिन्न प्रकार के नकारात्मक दोषों से नहीं बचा सकेंगी और इंसान के चेहरे पर बुढ़ापे की झलक साफ दिखने लगेगी.

जल्दी उठना, जल्दी सोना :

अर्ली टु बेड ऐंड अर्ली टु राइज… सुबह जल्दी उठने और रात में जल्दी सोने से इंसान की सेहत अच्छी रहती है. पुरुषों को सुबह जल्दी उठना चाहिए, यह उन की सेहत के लिए काफी अच्छा होता है. जल्दी उठने के लिए रात में जल्दी सोना होगा ताकि नींद का समय पूरा हो सके. वहीं, सुबह उठ कर बाहर टहलने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि सुबह की फ्रेश एयर इंसान के पूरे दिन को अच्छा बना देती है.

औयलीफूड और जंकफूड से बचें :

तेल की अधिक मात्रा में बने भोजन यानी औयलीफूड का सेवन कम से कम करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर की एनर्जी को जल्द खत्म कर देता है. इस के साथ ही रात को थोड़ा हलका खाना खाएं. घर के बने खाने में अच्‍छे तेल का उपयोग करें, क्योंकि खराब क्वालिटी वाला तेल सेहत पर काफी बुरा प्रभाव डालता है. पुरुषों को जंक फूड से भी परहेज करना होगा. इस के ज्यादा खाने से शुक्राणुओं की गुणवत्‍ता में गिरावट आ जाती है. इस की जगह  फ्रूट्स, अंकुरित अनाज और जूस लिया जा सकता है.

रोजा करें ऐक्‍सरसाइज़ :

पुरुषों को मोटापा कम करने औऱ फिट रहने के लिए रोजाना ऐक्‍सरसाइज़ करनी चाहिए. अगर आप ऐक्सरसाइज़ नहीं कर सकते हैं, तो थोड़ाबहुत उछलकूद ही करें यानी जिस्म को हरकत दें ताकि पूरा जिस्म फिट बना रहे. मौर्निंग वौक हर इंसान को करना चाहिए.

इस तरह, कोई भी इंसान अपने जीवन के हर पड़ाव को एंजौय कर सकता है. वह वृद्धावस्था में भी अपने को जवां महसूस कर सकता है चूंकि जिस्म से फिट जो है. सो, आप भी अंतिम क्षणों को तक जीवन को एंजौय करें, खुद को जवां फील करें.

अगर आप भी करते हैं तंबाकू का सेवन तो हो जाइए सावधान

तंबाकू से बनी बीड़ी व सिगरेट में कार्बन मोनोऔक्साइड, थायोसाइनेट, हाइड्रोजन साइनाइड व निकोटिन जैसे खतरनाक तत्त्व पाए जाते हैं, जो न केवल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जन्म देते हैं, बल्कि शरीर को भी कई खतरनाक बीमारियों की तरफ धकेलते हैं. जो लोग तंबाकू या तंबाकू से बनी चीजों का सेवन नहीं करते हैं, वे भी तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों खासकर बीड़ीसिगरेट पीने वालों की संगत में बैठ कर यह बीमारी मोल ले लेते हैं. इसे अंगरेजी भाषा में ‘पैसिव स्मोकिंग’ कहते हैं.

नुकसान ही नुकसान

तंबाकू के सेवन में न केवल लोगों की कमाई का ज्यादातर हिस्सा बरबाद होता है, बल्कि इस से उन की सेहत पर भी कई तरह के गलत असर देखने को मिलते हैं, जो बाद में कैंसर के साथसाथ फेफड़े, लिवर व सांस की नली से जुड़ी कई बीमारियों को जन्म देने की वजह बनते हैं. तंबाकू या सिगरेट का इस्तेमाल करने से सांस में बदबू रहती है व दांत गंदे हो जाते हैं. इस में पाए जाने वाला निकोटिन शरीर की काम करने की ताकत को कम कर देता है और दिल से जुड़ी तमाम बीमारियों के साथसाथ ब्लड प्रैशर की समस्या से भी दोचार होना पड़ता है.

पहचानें कैंसर को

डाक्टर वीके वर्मा का कहना है कि पूरी दुनिया में जितनी तादाद में मौतें होती हैं, उन में से 20 फीसदी मौतों की वजह सिर्फ कैंसर है. गाल, तालू, जीभ, होंठ व फेफड़े में कैंसर की एकमात्र वजह तंबाकू, पान, बीड़ीसिगरेट का सेवन है. अगर कोई शख्स तंबाकू या उस से बनी चीजों का इस्तेमाल कर रहा है, तो उसे नियमित तौर पर अपने शरीर के कुछ अंगों पर खास ध्यान देना चाहिए.

अगर आप पान या तंबाकू का सेवन करते हैं, तो यह देखते रहें कि जिस जगह पर आप पान या तंबाकू ज्यादातर रखते हैं, वहां पर कोई बदलाव तो नहीं दिखाई पड़ रहा है. इन बदलावों में मुंह में छाले, घाव या जीभ पर किसी तरह का जमाव, तालू पर दाने, मुंह का कम खुलना, लार का ज्यादा बनना, बेस्वाद होना, मुंह का ज्यादा सूखना जैसे लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जा कर अपनी जांच कराएं. बताए गए सभी लक्षण कैंसर की शुरुआती दशा में दिखाई पड़ते हैं.

बढ़ती तंबाकू की लत

अकसर स्कूलकालेज जाने वाले किशोरों व नौजवानों को शौक में सिगरेट के धुएं के छल्ले उड़ाते देखा जा सकता है. यह आदत वे अपने से बड़ों से सीखते हैं. सरकार व कोर्ट द्वारा सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है और अगर ऐसा करते हुए किसी को पाया जाता है, तो उस पर जुर्माना भी लगाए जाने का कानून है, लेकिन यह आदेश सिर्फ आदेश बन कर ही रह गया है. हम गुटका खा कर जहांतहां थूक कर साफसुथरी जगहों को भी गंदा कर बैठते हैं, जो कई तरह की संक्रामक बीमारियों की वजह बनता है.

पा सकते हैं छुटकारा

एक सर्वे का आंकड़ा बताता है कि 73 फीसदी लोग तंबाकू खाना छोड़ना चाहते हैं, लेकिन इस का आदी होने की वजह से वे ऐसा नहीं कर पाते हैं. अगर आप में खुद पर पक्का यकीन है, तो आप तंबाकू की बुरी लत से न केवल छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि तंबाकू को छोड़ कर दूसरों के लिए भी रोल मौडल बन सकते हैं.

तंबाकू या उस से बनी चीजों का सेवन करने वाला शख्स अगर कुछ देर इन चीजों को न पाए, तो वह अजीब तरह की उलझन यानी तलब का शिकार हो जाता है, क्योंकि उस का शरीर निकोटिन का आदी बन चुका होता है. ऐसे में लोग तंबाकू के द्वारा निकोटिन की मात्रा को ले कर राहत महसूस करते हैं, लेकिन यही राहत आगे चल कर जानलेवा लत भी बन सकती है.

इन सुझावों को अपना कर भी तंबाकू की लत से छुटकारा पाया जा सकता है:

* तंबाकू की लत को छोड़ने के लिए अपने किसी खास के जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी दूसरे खास दिन को चुनें और आदत छोड़ने के लिए इस दिन को अपने सभी जानने वालों को जरूर बताएं.

* कुछ समय के लिए ऐसी जगह पर जाने से बचें, जहां तंबाकू उपयोग करने वालों की तादाद ज्यादा हो, क्योंकि ये लोग आप को फिर से तंबाकू के सेवन के लिए उकसा सकते हैं.

* तंबाकू, सिगरेट, माचिस, लाइटर, गुटका, पीकदान जैसी चीजों को घर से बाहर फेंक दें.

* तंबाकू या उस से बनी चीजों के उपयोग के लिए जो पैसा आप द्वारा खर्च किया जा रहा था, उस पैसे को बचा कर अपने किसी खास के लिए उपहार खरीदें. इस से आप को अलग तरह की खुशी मिलेगी.

* तंबाकू की तलब होने के बाद मुंह का जायका सुधारने के लिए दिन में 2 से 3 बार ब्रश करें. माउथवाश से कुल्ला कर के भी तलब को कम कर सकते हैं.

* हमेशा ऐसे लोगों के साथ बैठें, जो तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं करते हैं और उन से इस बात की चर्चा करते रहें कि वे किस तरह से इन बुरी आदतों से बचे रहे हैं.

* बीड़ीसिगरेट पीने की तलब महसूस होने पर आप अपनेआप को किसी काम में बिजी करना न भूलें. पेंटिंग, फोटोग्राफी, लेखन जैसे शौक पाल कर तंबाकू की लत से छुटकारा पा सकते हैं.

इस मुद्दे पर डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि अकसर उन के पास ऐसे मरीज आते रहते हैं, जो किसी न किसी वजह से नशे का शिकार होते हैं और वे अपने नशे को छोड़ना चाहते हैं. लेकिन नशे के छोड़ने की वजह से उन को तमाम तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है, जिस में तंबाकू या सिगरेट छोड़ने के बाद लोगों में दिन में नींद आने की शिकायत बढ़ जाती है और रात को नींद कम आती है.

सिगरेट छोड़ने वाले को मीठा व तेल वाला भोजन करने की ज्यादा इच्छा होती है. इस के अलावा मुंह सूखने का एहसास होना, गले, मसूढ़ों व जीभ में दर्द होना, कब्ज, डायरिया या जी मिचलाने जैसी समस्या भी देखने को मिलती है. इस की वजह से वह मनोवैज्ञानिक रूप से मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाता है.

ऐसी हालत में तंबाकू की लत के शिकार लोगों को एकदम से इसे छोड़ने की सलाह दी जाती है, क्योंकि धीरेधीरे छोड़ने वाले अकसर फिर से तंबाकू की लत का शिकार होते पाए गए हैं. तंबाकू छोड़ने के बाद अकसर कोई शख्स हताशा का शिकार हो जाता है. इस हालत में उसे चाहिए कि वह समयसमय पर किसी अच्छे मनोचिकित्सक से सलाह लेना न भूले.

मैं पड़ोस की भाभी के साथ कई बार सेक्स कर चुका हूं. मेरी शादी नहीं हुई है, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल
मैं 22 साल का हूं और पड़ोस की भाभी से बहुत प्यार करता हूं. उन के साथ कई बार सेक्स कर चुका हूं. उन के 2 बच्चे हैं. मेरी शादी नहीं हुई है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
पड़ोस की भाभी के साथ मुफ्त की मलाई खाना बंद कर दें, वरना कभी भी बुरी तरह फंस सकते हैं. अगर कुछ कामधंधा करते हैं, तो शादी कर के घर बसा सकते हैं. भाभी व उन के बच्चों की जिंदगी तबाह न करें.

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सरिता घर से निकलीं तो बाहर बादल घिर आए थे. लग रहा था कि बहुत जोर से बारिश होगी. काश, एक छाता साथ में ले लिया होता पर अपने साथ क्याक्या लातीं. अब लगता है बादलों से घिर गई हैं. कभी सुख के बादल तो कभी दुख के. पता नहीं वे इतना क्यों सोचती हैं? देखा जाए तो उन के पास सबकुछ तो है फिर भी इतनी अकेली. बेटा, बेटी, दामाद, बहन, भाई, बहू, पोतेपोतियां, नाते-रिश्तेदार…क्या नहीं है उन के पास… फिर भी इतनी अकेली. किसी दूसरे के पास इतना कुछ होता तो वह निहाल हो जाता, लेकिन उन को इतनी बेचैनी क्यों? पता नहीं क्या चाहती हैं अपनेआप से या शायद दूसरों से. एक भरापूरा परिवार होना तो किसी के लिए भी गर्व की बात है, ऊपर से पढ़ालिखा होना और फिर इतना आज्ञाकारी.

बहू बात करती है तो लगता है जैसे उस के मुंह से फूल झड़ रहे हों. हमेशा मांमां कह कर इज्जत करना. बेटा भी सिर्फ मांमां करता है.  इधर सरिता खयालों में खो जाती हैं: बेटी कहती थी, ‘मां, तुम अपना ध्यान अब गृहस्थी से हटा लो. अब भाभी आ गई हैं, उन्हें देखने दो अपनी गृहस्थी. तुम्हें तो सिर्फ मस्त रहना चाहिए.’  ‘लेकिन रमा, घर में रह कर मैं अपने कामों से मुंह तो नहीं मोड़ सकती,’ वे कहतीं.  ‘नहींनहीं, मां. तुम गलत समझ रही हो. मेरा मतलब सब काम भाभी को करने दो न…’

ब्याह कर जब वे इस घर में आई थीं तो एक भरापूरा परिवार था. सासससुर के साथ घर में ननद, देवर और प्यार करने वाले पति थे जो उन की सारी बातें मानते थे. घर में किसी चीज की कमी नहीं थी पर बहुत पैसा भी नहीं था. घर का काम और बच्चों की देखभाल करते हुए समय कैसे बीत गया, वे जान ही न सकीं.

कमल शुरू से ही बहुत पैसा कमाना चाहते थे. वे चाहते थे कि उन के घर में सब सुखसुविधाएं हों. वे बहुत महत्त्वा- कांक्षी थे और पैसा कमाने के लिए उन्होंने हर हथकंडे का इस्तेमाल किया.   पैसा सरिता को भी बुरा नहीं लगता था लेकिन पैसा कमाने के कमल के तरीके पर उन्हें एतराज था, वे एक सुकून भरी जिंदगी चाहती थीं. वे चाहती थीं कि कमल उन्हें पूरा समय दें लेकिन उन को सिर्फ पैसा कमाना था, कमल का मानना था कि पैसे से हर वस्तु खरीदी जा सकती है. उन्हें एक पल भी व्यर्थ गंवाना अच्छा नहीं लगता था. जैसेतैसे कमल के पास पैसा बढ़ता गया, उन (सरिता) से उन की दूरी भी बढ़ती गई.

‘पापा, आज आप मेरे स्कूल में आना ‘पेरैंटटीचर’ मीटिंग है. मां तो एक कोने में खड़ी रहती हैं, किसी से बात भी नहीं करतीं. मेरी मैडम तो कई बार कह चुकी हैं कि अपने पापा को ले कर आया करो, तुम्हारी मम्मी तो कुछ समझती ही नहीं,’ रमा अपनी मां से शर्मिंदा थी क्योंकि उन को अंगरेजी बोलनी नहीं आती थी.

कमल बेटी को डांटने के बजाय हंसने लगे, ‘कितनी बार तो तुम्हारी मां से कहा है कि अंगरेजी सीख ले पर उसे फुरसत ही कहां है अपने बेकार के कामों से.’  ‘कौन से बेकार के काम. घर के काम क्या बेकार के होते हैं,’ वे सोचतीं, ‘जब घर में कोई भी नौकर नहीं था और पूरा परिवार साथ रहता था तब तो एक बार भी कमल ने नहीं कहा कि घर के काम बेकार के होते हैं और अब जब वे रसोईघर में जा कर कुछ भी करती हैं तो वह बेकार का काम है,’ लेकिन प्रत्यक्ष में कुछ नहीं कहा.

उस दिन के बाद कमल ही बेटी रमा के स्कूल जाने लगे. पैसा आने के बाद कमल के रहनसहन में भी काफी बदलाव आ गया था. अब वे बड़ेबड़े लोेगों में उठनेबैठने लगे थे और चाहते थे कि पत्नी भी वैसा ही करे. पर उन को ऐसी महफिलों में जा कर अपनी और अपने कीमती वस्त्रों व गहनों की प्रदर्शनी करना अच्छा नहीं लगता था.  एक दिन दोनों कार से कहीं जा रहे थे. एक गरीब आदमी, जिस की दोनों टांगें बेकार थीं फिर भी वह मेहनत कर के कुछ बेच रहा था, उन की गाड़ी के पास आ कर रुक गया और उन से अपनी वस्तु खरीदने का आग्रह करने लगा. सरिता अपना पर्स खोल कर पैसे निकालने लगीं लेकिन कमल ने उन्हें डांट दिया, ‘क्या करती हो, यह सब इन का रोज का काम है. तुम को तो बस पर्स खोलने का बहाना चाहिए. चलो, गाड़ी के शीशे चढ़ाओ.’

उन का दिल भर आया और उन्हें अपना एक जन्मदिन याद आ गया. शादी के बाद जब उन का पहला जन्मदिन आया था. उन दिनों उन के पास गाड़ी नहीं थी. वे दोनों एक पुराने स्कूटर पर चला करते थे. वे लोग एक बेकरी से केक लेने गए थे. कमल के पास ज्यादा पैसे नहीं थे पर फिर भी उन्होंने एक केक लिया और एक फूलों का गुलदस्ता लेना चाहते थे. बेकरी के बाहर एक छोटी बच्ची खड़ी थी. ठंड के दिन थे. बच्ची ने पैरों में कुछ भी नहीं पहना था. ठंड से वह कांप रही थी. उस की हालत देख कर वे रो पड़ी थीं. कमल ने उन को रोते देखा तो फूलों का गुलदस्ता लेने के बजाय उस बच्ची को चप्पलें खरीद कर दे दीं. उस दिन उन को कमल सचमुच सच्चे हमसफर लगे थे. आज के और उस दिन के कमल में कितना फर्क आ गया है, इसे सिर्फ वे ही महसूस कर सकती थीं.

तब उन की आंखें भर गई थीं. उन्होंने कमल से छिपा कर अपनी आंखें पोंछ ली थीं.  सरिता की एक आदत थी कि वे ज्यादा बोलती नहीं थीं लेकिन मिलनसार थीं. उन के घर में जो भी आता था वे उस की खातिरदारी करने में भरोसा रखती थीं पर कमल को सिर्फ अपने स्तर वालों की खातिरदारी में ही विश्वास था. उन्हें लगता था कि एक पल या एक पैसा भी किसी के लिए व्यर्थ गंवाना नहीं चाहिए.

सरिता की वजह से दूरदूर के रिश्तेदार कमल के घर आते थे और उन की तारीफ भी करते थे. ‘सरिता भाभी तो खाना खिलाए बगैर कभी भी आने नहीं देती हैं’ या फिर ‘सरिता भाभी के घर जाओ तो लगता है जैसे वे हमारा ही इंतजार कर रही थीं’, ‘वे इतने अच्छे तरीके से सब से मिलती हैं’ आदि.  लेकिन उन की बेटी ही उन्हें कुछ नहीं समझती है. रमा ने कभी भी मां को अपना हमराज नहीं बनाया. वह तो सिर्फ अपने पापा की बेटी थी. इस में उस का कोई दोष नहीं है. उस के पैदा होने से पहले कमल के पास बहुत पैसा नहीं था लेकिन जिस दिन वह पैदा हुई उसी दिन कमल को एक बहुत बड़ा और्डर मिला था और उस के बाद तो उन के घर में पैसों की रेलमपेल शुरू हो गई.

कमल समझते थे कि यह सब उस की बेटी की वजह से ही हुआ है. इसलिए वे रमा को बहुत मानते थे. उस के मुंह से निकली हर बात पूरा करना अपना धर्म समझते थे. जिस से रमा जिद्दी हो गई थी. सरिता उस की हर जिद पूरी नहीं करती थी, जिस के चलते वह अपने पापा के ज्यादा नजदीक हो गई थी.  धीरेधीरे रमा अपनी ही मां से दूर होती गई. कमल हरदम रमा को सही और सरिता को गलत ठहराते थे. एक बार सरिता ने रमा को किसी गलत बात के लिए डांटा और समझाने की कोशिश की कि ससुराल में यह सब नहीं चलेगा तो कमल बोल पड़े, ‘हम रमा का ससुराल ही यहां ले आएंगे.’

उस के बाद तो सरिता ने रमा को कुछ भी कहना बंद कर दिया. कमल रमा की ससुराल अपने घर नहीं ला सके. हर लड़की की तरह उसे भी अपने घर जाना ही पड़ा. जब रमा ससुराल जा रही थी तो सब रो रहे थे. सरिता को भी दुख हो रहा था. बेटी ससुराल जा रही थी, रोना तो स्वाभाविक ही था.  सरिता को मन के किसी कोने में थोड़ी सी खुशी भी थी क्योंकि अब उन का घर उन का अपना बनने वाला था. अब शायद सरिता अपनी तरह अपने घर को चला सकती थीं. जब से वे इस घर में आई थीं कोई न कोई उन पर अपना हुक्म चलाता था. पहले सास का, ननद का, फिर बेटी का घर पर राज हो गया था, लेकिन अब वे अपना घर अपनी इच्छा से चलाना चाहती थीं.

रमा अपने घर में खुश थी. उस ने अपनी ससुराल में सब के साथ सामंजस्य बना लिया था. जिस बात की सरिता को सब से ज्यादा फिक्र थी वैसी समस्या नहीं खड़ी हुई. सरिता भी खुश थीं, अपना घर अपनी इच्छा से चला कर, लेकिन उन की खुशी में फिर से बाधा पड़ गई. रमा घर आई और कहने लगी, ‘पापा, मां तो बिलकुल अकेली पड़ गई हैं. अब भैया की शादी कर दो.’  सरिता चीख कर कहना चाहती थीं कि अभी नहीं, कुछ दिन तो मुझे जी लेने दो. पर प्रत्यक्ष में कुछ नहीं कह पाईं और कुछ समय बाद रमा माला को ढूंढ़ लाई. माला उस के ससुराल के किसी रिश्तेदार की बेटी थी.

माला बहुत अच्छी थी. बिलकुल आदर्श बहू, लेकिन ज्यादा मीठा भी सेहत को नुकसान देता है. इसलिए सरिता उस से भी कभीकभी कड़वी हो जाती थी. माला बहुत पढ़ीलिखी थी. वह सरिता की तरह घरघुस्सू नहीं थी. वह मोहित के साथ हर जगह जाती थी और बहुत अच्छी अंगरेजी भी बोल लेती थी, इसलिए मोहित को उसे अपने साथ हर जगह ले जाने में गर्व महसूस होता था. उस ने रमा को भी अपना बना लिया था. रमा उस की बहुत तारीफ करती थी, ‘मां, भाभी बहुत अच्छी हैं. मेरी पसंद की हैं इसलिए न.’

सरिता को हल्के रंग के कपड़े पसंद थे. आज तक वे सिर्फ कपड़ों के मामले में ही अपनी मालकिन थीं लेकिन यहां भी सेंध लग गई. माला सरिता को सलाह देने लगी, ‘मां, आप इतने फीके रंग मत पहना करें, शोख रंग पहनें. आप पर अच्छे लगेंगे.’  कमल कहते, ‘अपनी सास को कुछ मत कहो, वे सिर्फ हल्के रंग के कपड़े ही पहनती हैं. मैं ने कितनी बार कोशिश की थी इसे गहरे रंग के कपड़े पहनाने की पर इसे तो वे पसंद ही नहीं हैं.’

‘कब की थी कोशिश कमल,’ सरिता कहना चाहती थीं, ‘एक बार कह कर तो देखते. मैं कैसे आप के रंग में रंग जाती,’ पर बहू के सामने कुछ नहीं बोलीं.

आज सुबह रमा को घर आना था. उन्होंने रसोई में जा कर कुछ बनाना चाहा. पर माला आ गई, ‘मां, लाइए मैं बना देती हूं.’

‘नहीं, मैं बना लूंगी.’

‘ठीक है. मैं आप की मदद कर देती हूं.’

उन्होंने प्यार से बहू से कहा, ‘नहीं माला, आज मेरा मन कर रहा है तुम सब के लिए कुछ बनाने का. तुम जाओ, मैं बना लूंगी.’

माला चली गई. पता नहीं क्यों खाना बनाते समय उन्हें जोर से खांसी आ गई. मोहित वहां से गुजर रहा था. वह मां को अंदर ले कर आया और माला को डांटने के लिए अपने कमरे में चला गया. सरिता उस के पीछे जाने लगीं ताकि उसे समझा सकें कि इस में माला का कोई दोष नहीं है. वे कमरे के पास गईं तो देखा दोनों भाईबहन बैठे हुए हैं. रमा आ चुकी थी और उन से मिलने के बजाय पहले अपनी भाभी से मिलने चली गई थी.

उन्होंने जैसे ही अपने कदम आगे बढ़ाए, रमा की आवाज उन के कान में पड़ी, ‘मां को भी पता नहीं क्या जरूरत थी किचन में जाने की.’

तभी मोहित बोल पड़ा, ‘पता नहीं क्यों, मां समझती नहीं हैं, हर वक्त घर में कुछ न कुछ करती रहती हैं जिस से घर में कलह बढ़ती है, मेरे और माला के बीच जो खटपट होती है उस का कारण मां ही होती हैं.’

‘क्या मैं माला और मोहित के बीच कलह का कारण हूं,’ सरिता सोचती ही रह गईं.

तभी माला की अवाज सुनाई पड़ी, ‘मैं तो हर वक्त मां का खयाल रखती हूं पर पता नहीं क्यों, मां को तो जैसे मैं अच्छी ही नहीं लगती हूं. अभी भी तो मैं ने कितना कहा मां से कि मैं करती हूं पर वे मुझे करने दें तब न.’

‘मैं समझती हूं, भाभी. मां शुरू से ही ऐसी हैं,’ रमा की आवाज आई.

‘मां को तो बेटी समझ नहीं पाई, भाभी क्या समझेगी,’ सरिता चीखना चाहती थीं पर आवाज जैसे गले में ही दब गई.

‘अच्छा, तुम चिंता मत करो, मैं समझाऊंगा मां को,’ यह मोहित की आवाज थी.

‘कभी मां की भी इतनी चिंता करनी थी बेटे,’ कहना चाहा  सरिता ने पर आदत के अनुसार फिर से चुप ही रहीं.

‘मैं देखती हूं मां को, कहीं ज्यादा तबीयत तो खराब नहीं है,’ माला बोली.

‘जब अपने ही मुझे नहीं समझ रहे तो तू क्या समझेगी जिसे इस घर में आए कुछ ही समय हुआ है,’ सरिता के मन ने कहा.

इधर, आसमान में बिजली के कड़कने की तेज आवाज आई तो वे खयालों की दुनिया से बाहर आ गईं. दरअसल, दोपहर का खाना खाने के बाद जब वे बाजार जाने के लिए घर से निकली थीं तो सिर्फ बादल थे पर जब जोर से बरसात होने लगी तो वे एक बारजे के नीचे खड़ी हो गई थीं. और अब फिर सोचने लगीं कि अगर वे भीग कर घर जाएंगी तो सब क्या कहेंगे? रमा अपनी आदत के अनुसार कहेगी, ‘मां को बस, भीगने का बहाना चाहिए.’

कमल कहेंगे, ‘कितनी बार कहा है कि गाड़ी से जाया करो पर नहीं’.  मोहित कहेगा, ‘मां, मुझे कह दिया होता, मैं आप को लेने पहुंच जाता.’

बहू कहेगी, ‘मां, कम से कम छाता तो ले ही जातीं.’

सरिता ने सारे खयाल मन से अंतत: निकाल ही दिए और भीगते हुए अकेली ही घर की तरफ चल पड़ीं.

सेक्स के बजाए ये बातें पुरुषों को ज्यादा रिझाती हैं

हमारे समाज में सेक्स को ले के एक अलग धारण बनी हुई है. सेक्स को ले कर पर्दा और हिचक ही कारण है कि लोगों में इसका पूरा ज्ञान नहीं है. हाल ही में एक शोध में ऐसी बात सामने आई है जो सेक्स को ले कर एक और मिथक को तोड़ती है.

ये बात आम है कि पुरुषों में सेक्स को ले कर ज्यादा उत्साह और जिज्ञासा होती है. एक हद तक इसे सही भी कहा जा सकता है, पर हाल में हुए एक शोध में ये बात सामने आई कि पुरुषों को सेक्स से ज्यादा प्यार से गले लगाने और किस में दिलचस्पी होती है. लड़के चाहते हैं कि उनका पार्टनर उन्हें प्यार से गले लगाए और किस करे. लम्बे समय तक चलने वाले रिश्तों पर किये एक अध्ययन में यह बात सामने आयी कि पुरुषों की खुशी और यौन संतुष्टि के लिए शारीरिक अंतरंगता होना बहुत जरूरी है.

इस शोध में शोधकर्ताओं ने जोड़ों के आपसी प्यार और अंतरंग संबंधों पर शोध किए. उसके बाद उन्होंने यह पता लगाने की कोशिश की कि यह सब उनकी खुशी और शारीरिक संतुष्टि को कैसे प्रभावित करती है. शोध में पाया गया कि जिन पुरुषों को उनकी महिला साथी बार बार किस करती हैं, गले लगती हैं और सेक्स के दौरान उनके साथ प्यार भरी छेड़छाड़ करती हैं, वे उन पुरुषों की तुलना में दोगुने खुश रहते हैं, जिन पुरुषों की पार्टनर उनके साथ ऐसे शारीरिक स्नेह नहीं जताती हैं.

प्रदूषण से बढ़ती हैं एलर्जी, जानें उपाय

प्रदूषण चाहे हवा का हो, पानी का हो या जमीन का, रोगों के पनपने का बड़ा कारण है. यह प्रकृति के नियमों में परिवर्तन करता है, प्रकृति के क्रियाकलाप में बाधा डालता है. प्रदूषण हवा, पानी, मिट्टी, रासायनिक पदार्थ, शोर या ऊर्जा किसी रूप में भी हो सकता है. इन सभी तत्त्वों का हमारे परिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर  पड़ता है जिस का प्रभाव मनुष्य के साथसाथ जानवरों और पेड़पौधों पर भी पड़ता है. चूंकि बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा संवेदनशील होते हैं, इसलिए इन जहरीले तत्त्वों का असर उन पर सब से अधिक पड़ता है.

प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं, जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मिट्टी का प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण. इन से कई प्रकार की खतरनाक बीमारियां और एलर्जी भी होती है.

वायु प्रदूषण की मार

वायु प्रदूषण में सौलिड पार्टिकल्स और कई तरह की गैसें शामिल होती हैं. दरअसल, एयर पौल्युटैंट हमारे शरीर में रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट (श्वास नली) और लंग्स (फेफड़ों) द्वारा प्रवेश करते हैं. इन्हें रक्तवाहिकाएं सोख लेती हैं, जो शरीर के अन्य अंगों तक प्रसारित हो जाते हैं.

वायु प्रदूषण कई रोगों का कारण बनता है जिस की शुरुआत एलर्जी के रूप में आंख, नाक, मुंह और गले में साधारण खुजली या एनर्जी लेवल के कम होने, सिरदर्द आदि से हो सकती है. इस से गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं.

  1. रेस्पिरेटरी और लंग्स डिजीज : किसी व्यक्ति में वायु प्रदूषण के चलते समस्या शुरू हो गई है तो उसे रेस्पिरेटरी और लंग्स डिजीज अपनी चपेट में ले सकती हैं.

इन के अंतर्गत अस्थमा अटैक, क्रोनिक औब्सट्रैक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), लंग्स का कम काम करना, पल्मोनरी कैंसर, (एक खास तरह का लंग कैंसर मेसोथेलियोमा जिस का संबंध आमतौर पर एस्बेस्टोस की चपेट में आने से है आमतौर पर इस की चपेट में आने के 20-30 साल बाद यह नजर आता है), निमोनिया आदि बीमारियां आती हैं.

2. कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक : सैकंडहैंड स्मोक के बारे में देखा गया है कि यह हृदय रोग को बढ़ाता है. कार्बन मोनोऔक्साइड और नाइट्रोजन डाईऔक्साइड भी इस में सहयोग देते हैं. वायु प्रदूषण को हृदय रोग का एक प्रमुख कारण माना जाता है क्योंकि एयर पौल्युटैंट लंग्स में प्रवेश करते हैं और रक्तवाहिकाओं में घुल जाते हैं जो इंफ्लेमेशन का कारण बनते हैं और हृदय की गति को बढ़ाते हैं. ये अस्थमा और लंग्स व सांस की एलर्जी का कारण बनते हैं.

3. न्यूरो बिहेवियरल (शारीरिक और मानसिक) डिसऔर्डर : वायु में उपस्थित विषाक्त तत्त्व जैसे मरकरी आदि न्यूरोलौजिकल समस्याएं और विकास में बाधा का कारण बनते हैं.

4. लिवर और दूसरे तरह का कैंसर : कार्सिनोजेनिक वोलाटाइल कैमिकल में सांस लेने से लिवर की समस्या और कैंसर हो सकता है. यह भी वायु प्रदूषण के चलते ही होता है.

एक अध्ययन के मुताबिक, धुएं और विभिन्न कैमिकल्स के चलते होने वाले वायु प्रदूषण के चलते प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है.

जल प्रदूषण के खतरे

जीवन के लिए जल जितना आवश्यक है उतना ही प्रदूषित जल हमारे जीवन के लिए खतरनाक साबित होता है. जल प्रदूषण से कई खतरनाक बीमारियां और एलर्जी होती हैं जो अकसर जानलेवा भी साबित होती हैं.

इंफेलाइटिस, पेट में मरोड़ और दर्द, उलटी, हेपेटाइटिस, रेस्पिरेटरी एलर्जी, लिवर का डैमेज होना आदि बीमारियां जल प्रदूषण के चलते हो सकती हैं. प्रदूषित जल में पाए जाने वाले कैमिकल्स के संपर्क की वजह से किडनी भी खराब हो सकती है.

दूषित जल के प्रयोग से कई प्रकार की एलर्जी भी हो सकती है जिस में त्वचा में जलन, लाल चकत्ते पड़ना और फुंसियां होना आम बात है.

  1. न्यूरोलौजिकल समस्याएं : पानी में आमतौर पर पैस्टिसाइड्स  (जैसे डीडीटी) जैसे कैमिकल्स की उपस्थिति के कारण नर्वस सिस्टम क्षतिग्रस्त हो सकता है.

2. प्रजनन संबंधी समस्या : प्रदूषित पानी के सेवन के चलते जिस्म के अंदरूनी तंत्र के क्षतिग्रस्त होने से लैंगिक विकास में बाधा, बांझपन, इम्यून फंक्शन का कमजोर होना, उर्वरता की क्षमता कम होना जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं.

जल प्रदूषण बढ़ने की वजह से मलेरिया का ब्रीडिंग ग्राउंड बन जाता है. यह मच्छरों द्वारा फैलता है. इसकी वजह से दुनियाभर में प्रतिवर्ष लगभग 10.2 लाख लोगों की मौत हो जाती है.

जल प्रदूषण के कारण कुछ सामान्य रोग भी होते हैं जो ज्यादा गंभीर नहीं होते, जैसे समुद्र प्रदूषित पानी में नहाना जिस से कई प्रकार की एलर्जी हो सकती है, जैसे रैशैज, कान में दर्द, आंखों का लाल होना आदि.

मिट्टी के प्रदूषण

हैवी मैटल्स, पैस्टिसाइड्स, सौल्वैंट्स और दूसरे मानव निर्मित कैमिकल्स, लेड और तेल की गंदगी आदि कुछ सामान्य तत्त्व हैं जो मिट्टी को प्रदूषित करने में अपना योगदान देते हैं. मिट्टी का प्रदूषण मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता को नष्ट कर देता है, उपयोगी सूक्ष्मजीवों को मार देता है और एक प्रकार से पैथोजैनिक सौइल इनवायरमैंट का निर्माण करता है.

मिट्टी प्रदूषण से होने वाले रोग प्रत्यक्षरूप से इस को प्रदूषित करने वाले तत्त्वों के संपर्क में आने से होते हैं, जैसे वायु में उत्पन्न तत्त्व में सांस लेना, फसलों पर ऐसे पानी का छिड़काव या ऐसी मिट्टी में फसल उगाना आदि. हालांकि मिट्टी प्रदूषण की चपेट में आना वायु और जल प्रदूषण की चपेट में आने जितना गंभीर नहीं होता. इसका खतरनाक असर बच्चों पर हो सकता है जो आमतौर पर जमीन पर खेलते हैं और इन जहरीले तत्त्वों के सीधे संपर्क में होते हैं.

प्रदूषित मिट्टी के कारण कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे सिरदर्द, चक्कर आना, थकान के अलावा त्वचा पर रैशेज, आंखों में खुजली और बाद में इन की गंभीर स्थिति वाली एलर्जी भी हो सकती है.

  1. मस्तिष्क को क्षति : जब बच्चे लेड से प्रभावित मिट्टी के संपर्क में आते हैं तो उन के मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम में क्षति हो सकती है. इस से उन के मस्तिष्क और न्यूरोमस्क्यूलर विकास प्रभावित होते हैं.

2. किडनी और लिवर को क्षति : मिट्टी में लेड की मिलावट लोगों को किडनी डैमेज के खतरे में डालती है. ऐसी मिट्टी के संपर्क में आना जिस में मरकरी और साइक्लोडाइन्स का मिश्रण हो, तो वह कभी न ठीक होने वाले किडनी रोग का कारण बन सकता है.

3. मलेरिया : जिन  क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होती है और वहां पानी निकलने की ठीक से व्यवस्था नहीं होती तो वहां पानी के साथ मिट्टी मिल जाती है जिस से वहां के लोगों का प्रत्यक्षरूप से मलेरिया के संपर्क में आना सामान्य बात है. मलेरिया प्रोटोजोआ के कारण होता है जो मिट्टी में पैदा होता है. बरसात का पानी प्रोटोजोआ और मच्छरों को आगे बढ़ाने में मदद करता है जिस का परिणाम मलेरिया होता है.

ध्वनि प्रदूषण के साइड इफैक्ट्स

ध्वनि प्रदूषण मनुष्य को चिड़चिड़ा बना देता है. ध्वनि प्रदूषण का मनुष्य पर कई रूपों में प्रभाव पड़ता है.

  1. दक्षता की कमी : कई तरह के शोधों के बाद यह बात साबित हुई है कि मनुष्य के काम करने की क्षमता शोर के कम होने से ज्यादा बढ़ती है. कारखानों का शोर अगर कम कर दिया जाए तो वहां के काम करने वालों की दक्षता को बढ़ाया जा सकता है. इस से यह साबित होता है कि मनुष्य के काम करने की दक्षता का संबंध शोर से है.

2. एकाग्रता में कमी : कार्य के बेहतर परिणाम के लिए एकाग्रता की आवश्यकता होती है. तेज आवाज की वजह से ध्यान भंग होता है. बड़े शहरों में आमतौर पर दफ्तर मुख्य मार्गों पर स्थित होते हैं, ट्रैफिक का शोर या विभिन्न प्रकार के हौर्न्स की तेज आवाजें दफ्तर में काम करने वाले लोगों की एकाग्रता को भंग करती हैं.

3. थकान : ध्वनि प्रदूषण के कारण लोग अपने काम में एकाग्रता नहीं ला पाते. परिणामस्वरूप उन्हें अपना काम पूरा करने में ज्यादा वक्त लगता है जिस की वजह से उन्हें थकान महसूस होती है.

4. गर्भपात : गर्भावस्था के दौरान शांत और सुकून देने वाला वातावरण आवश्यक होता है. अनावश्यक शोर किसी भी महिला को चिड़चिड़ा बना सकता है. कई बार शोर गर्भपात की भी वजह बनता है.

5. ब्लडप्रैशर : शोर व्यक्ति पर कई प्रकार से हमला करता है. यह व्यक्ति के मस्तिष्क की शांति पर हमला करता है. आधुनिक जीवनशैली के चलते पहले से तनाव में रह रहे व्यक्ति के शोर तनाव को बढ़ाने का काम करता है. तनाव की वजह से कई प्रकार के रोग पैदा होते हैं, जैसे ब्लडप्रैशर, मानसिक रोग, डायबिटीज के अलावा दिल की बीमारी आदि. इसलिए तनाव से व्यक्ति को दूरी बना लेने में ही भलाई है.

6. अस्थायी या स्थायी बहरापन : मैकेनिक्स, लोकोमोटिव ड्राइवर्स, टैलीफोन औपरेटर्स आदि सभी को कानों में तेज ध्वनि सुननी पड़ती है. हम सभी लगातार शोर की चपेट में रहते हैं. 80 से 100 डैसिबिल की ध्वनि असुरक्षित होती है. तेज आवाज अस्थायी या स्थायी बहरेपन का कारण भी बन सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कराए गए एक अध्ययन के अनुसार, हृदय रोगों के लिए जिम्मेदार कारकों में से एक ध्वनि प्रदूषण को माना जाता है. इस के अलावा ध्वनि प्रदूषण के कारण अनिद्रा और गंभीर चिड़चिड़ापन जैसे रोग भी होते हैं. एक अध्ययन के अनुसार, हर प्रकार के संक्रामक रोग में से 80 प्रतिशत जल प्रदूषण के कारण होते हैं. जल प्रदूषण के कारण दुनियाभर में लगभग 2.5 करोड़ लोगों की मौत हो जाती है.

प्रदूषण के जानलेवा आंकड़े

– वायु प्रदूषण के चलते प्रतिवर्ष 30 लाख लोगों की मौत होती है.

– 80 से 100 डैसिबिल की ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण की खतरनाक श्रेणी में आती है.

– दुनिया में हर साल 2.5 करोड़ लाख लोगों की मौत के पीछे की वजह जल प्रदूषण है.

– लगातार ध्वनि प्रदूषण की चपेट में रहने से शरीर में स्ट्रैस हार्मोंस जैसे एड्रेनालाइन, नोराड्रेनालाइन और कार्टीसोल का स्तर बढ़ जाता है. स्ट्रैस, जैसा कि माना जाता है, हार्ट फेलियर, इम्यूनिटी समस्या, हाइपरटैंशन और स्ट्रोक का कारण बनता है.

भोजन से जुड़ी अच्छी आदतें

भोजन करना हमारी बुनियादी जरूरत है. इस के बगैर काम करने की हमारी ताकत पर बुरा असर पड़ता है. ज्यादा दिनों तक भूखा रहने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है. क्या आप जानते हैं कि भोजन करना भी एक कला है और उस से जुड़ी कुछ आदतें ऐसी हैं, जो आप की सेहत बना सकती हैं:

1. भोजन करने से पहले अगर शौच की हाजत लगी है, तो उसे कर के ही भोजन करने बैठें. अगर पेशाब करने की इच्छा हो तो उसे कर लें.

2. भोजन करने से पहले साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है.

3. भोजन तभी करें, जब जोरों की भूख लगी हो.

4.  भोजन को ठीक से चबा कर खाना चाहिए. जल्दबाजी में भोजन को निगल लेने से वह ठीक से पचेगा नहीं. यही नहीं, दांतों का काम आंतों को करना होगा. एक ग्रास को कम से कम 25 से 30 बार चबाना चाहिए.

5. भोजन के ग्रास छोटेछोटे लें, ताकि उन्हें खाने, चबाने में सुविधा रहे. बड़ेबड़े ग्रास ले कर खाना बेहूदगी है.

6. भोजन के पहले या भोजन के दौरान और भोजन के तुरंत बाद ढेर सारा पानी न पीएं. इस से भोजन को पचाने में दिक्कत होती है. जरूरत पड़ने पर भोजन के दौरान 1-2 घूंट पानी ले सकते हैं, वरना भोजन के एक घंटा बाद ही पानी पीना चाहिए.

7. भोजन को शांत मन से करना चाहिए. जब आप दुखी हों, गुस्से या तनाव में हों, तब भोजन करने नहीं बैठना चाहिए. इस से न तो भोजन का स्वाद आएगा और न ही आप भरपेट भोजन कर सकेंगे.

8. एक ही बार में ठूंसठूंस कर खाने के बजाय हर 4 घंटे बाद थोड़ाथोड़ा खा लेना चाहिए. इस से पाचन सही रहता है और हर समय ऊर्जा बनी रहती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए तो टुकड़ेटुकड़े में भोजन करना बेहद जरूरी है. इस से उन की शुगर सामान्य स्तर पर बनी रह सकती है.

9.  अपने भोजन में सभी चीजों को शामिल करें. किसी पसंदीदा चीज को खाना व दूसरी चीजों को चखना तक मंजूर न होना, यह आदत ठीक नहीं. घर में जोकुछ बना हो, खाना चाहिए. इस से आप का भोजन पौष्टिक व संतुलित होगा.

10. शादीब्याह या पार्टी में जाएं तो व्यंजन को देख कर ललचाएं नहीं. स्वाद के बजाय सेहत पर ध्यान दें. उतना ही खाएं, जिसे आप पचा सकें.

11. भोजन करें तो उन चीजों से परहेज करें जो आप के लिए मना है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो मीठे से तोबा करें. अगर हाई ब्लडप्रैशर है तो नमक कम खाएं. दालसब्जियों में ऊपर से नमक न डालें. अगर दिल की बीमारी है तो ज्यादा वसा यानी फैट वाला भोजन न लें. इस के अलावा भी अगर फूड एलर्जी है तो ऐसी चीजों के सेवन से बचें.

12. भोजन एकांत में नहीं परिवार वालों के साथ करें, तो उस का मजा ही अलग है. टैलीविजन के सामने बैठ कर भोजन न करें.

13. भोजन हमेशा ताजा, पचने वाला करना चाहिए.

14. भोजन की थाली से बीच में उठ कर जाना ठीक नहीं. अगर कोई काम है तो पहले उसे निबटा लें.

15. भोजन चाहे घर में करें या बाहर, उतना ही थाली में लें, जितना खा सकें.

16. कोशिश करें कि रोजाना तय समय पर ही भोजन करें.

17. भोजन के ठीक पहले या तुरंत बाद चायकौफी, आइसक्रीम व कोल्ड ड्रिंक का सेवन नहीं करना चाहिए. इस से पाचन क्रिया पर बुरा असर होता है.

18. भोजन हमेशा बैठ कर खाना चाहिए. खड़ेखड़े खाने की आदत ठीक नहीं है.

19. जहां तक मुमकिन हो, बाजार के खाने से बचें. मेले, ठेलों पर बिकने वाले चाटपकौड़ी या दूसरी चीजों का सेवन न करें, तो ही अच्छा है.

20. भोजन जैसा भी बना हो, उसे मन से खाएं. उस में मीनमेख न निकालें.

21. भोजन को इतमीनान से करें. उसे करने में 20 से 30 मिनट का समय लगना चाहिए. 5 मिनट में फटाफट खाने की आदत ठीक नहीं है.

22.  अगर भोजन करते समय खांसी आने लगे या ठसका लग जाए, तो वहां से उठ जाएं. राहत मिलने पर दोबारा भोजन शुरू करें.

23.  भूख से हमेशा थोड़ा कम खाएं, तो बेहतर रहेंगे. डट कर खाने से सुस्ती, आलस, घबराहट, बेचैनी वगैरह की शिकायत होगी.

24. अगर आप को एसिडिटी की शिकायत है, तो ज्यादा समय खाली पेट न रहें. नाश्ता जरूर लें. इस से एसिडिटी नहीं होगी.

25. भोजन करें तो 2 बेमेल चीजें एकसाथ न लें, जैसे खीर के साथ दही, अचार वगैरह का सेवन न करें.

26. अगर भोजन के पहले या उस के बाद कोई दवा लेना जरूरी है, तो उसे जरूर लें, खासतौर पर डायबिटीज के मरीज.

27. भोजन के बाद प्लेट या थाली में हाथ न धोएं. घर हो या बाहर, हर जगह इस बात का ध्यान रखना चाहिए.

28.  भोजन करने के फौरन बाद कड़ी मेहनत वाला काम नहीं करना चाहिए. भोजन के तुरंत बाद दौड़ना, तेज चलना, सीढि़यां चढ़ना, कसरत करना, जिस्मानी संबंध बनाना वगैरह काम नहीं करना चाहिए. इसी तरह भोजन के बाद मालिश करना, नहाना जैसे काम भी नहीं करने चाहिए.

29. भोजन करते ही सो जाना ठीक नहीं. दोपहर के भोजन के आधा घंटे बाद 20 मिनट की  झपकी ली जा सकती है. रात का भोजन करने के 2 घंटे बाद ही सोना चाहिए.

30.  भोजन के बाद ठीक से कुल्ला करना जरूरी है, ताकि दांतों में फंसे भोजन के कण बाहर निकल जाएं और बदबू पैदा न करें. रात के भोजन के बाद ब्रश कर के ही सोना चाहिए.

स्किन के लिए भी फायदेमंद है केले से जुड़े ये 5 टिप्स

केला एक ऐसा फल है जो अकसर सभी को पसंद आता है. वजन घटाने से लेकर वजन बढ़ाने तक ये फल काफी हेल्प करता है. पर सेहत के साथ-साथ ये आपकी स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद है. ब्रेकफास्ट टेबल पर केले लगभग हर घर में होते हैं. पर क्या केले खाने के बाद आप भी इसका छिलका डस्टबिन में डाल देते हैं?

अगर ऐसा करते है तो अगली बार ये करने से पहले ये जान लें कि स्किन के लिए केला उतने ही फायदेमंद हैं जितना कि कोई भी अच्छा फेशियल. लड़को की स्किन वैसे भी लड़कियों के मुकाबले ज्यादा रफ होती है ऐसे में उनको ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है. इसलिए आज हम लेकर आए हैं आपके लिए कुछ ऐसे टिप्स, जिन्हें आजमाकर स्किन में ग्लो आएगा और साथ ही कई तरह की स्किन प्रौबलम्स से भी निजात मिलेगा.

केले के 5 टिप्स

1. छिलके के भीतरी हिस्से को चेहरे और गर्दन पर रगड़ें और लगभग आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से धो लें. रेगुलर करने पर इससे झुर्रियां खत्म हो जाएंगी.

2. केले में एंटीऔक्सिडेंट्स पाए जाते हैं जो दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाते हैं और त्वचा में चमक लाते हैं. ये एंटी-एजिंग क्रीम से ज्यादा असरदार होते हैं.

3. केले के छिलके से सफेद रेशे को निकालकर एलोवेरा जेल में मिलाएं और आंखों के आसपास लगाएं. ऐसा करने से डार्क सर्कल्स कम होंगे.

4. छिलके का एक छोटा टुकड़ा काट लें और इसे एक्ने प्रोन स्किन पर धीरे-धीरे रगड़ें. 10 मिनट तक ऐसा करें और फिर गुनगुने पानी से चेहरा धो लें.

5. केले के छिलके को मस्से पर लगाने से मस्से दब जाते हैं और नए नहीं निकलते. इसके लिए छिलके की भीतरी परत को त्वचा पर मलें.

तो ये है केले के 5 टिप्स जिसे आप यूज कर अपने चहरे को निखार सकते है.

नशे को छोड़कर जिंदगी को चुनें

नशे की लत वह भयंकर बीमारी है, जो न केवल उस शख्स को, बल्कि उस के पूरे परिवार को खोखला कर देती है. इस की भयावहता का अंदाजा उस परिवार को देख कर आसानी से लगाया जा सकता है, जिस का मुखिया ही नशे की गिरफ्त में हो. नशेड़ी बेरोजगार हो जाता है और तरहतरह की बीमारियों का शिकार हो जाता है. उस के परिवार की हालत दरदर भटकते भिखारी जैसी हो जाती है और उस की समाज में इज्जत वगैरह सब खत्म हो जाती है. नशेड़ी 2 तरह के होते हैं. एक वे, जो नशा करने को बुरा नहीं मानते हैं. दूसरे वे, जो इसे बुरा मानते हैं, पर लत से मजबूर हैं. जो बुरा नहीं मानते हैं, उन को कुछ भी समझाओ, उन के पास जवाब पहले से हाजिर होते हैं. आओ उन के जवाब देखते हैं :

सवाल : अरे भैया, देखो तो नशे से तुम्हारा शरीर कैसा हो गया है?

नशेड़ी : कैसा हो गया है. एक दिन तो सब का शरीर मिट्टी में मिलना ही है.

सवाल : पर उस दिन के आने से पहले ही क्यों मरना चाहते हो?

नशेड़ी : आप को पता है क्या, मौत कब आएगी? मौत तो जब आनी है, तब आएगी.

सवाल : देखो कितना पैसा इस में लग जाता है. सही कहा न?

नशेड़ी : मैं अपने पैसे की पीता हूं, आप से मांगने तो नहीं आता?

सवाल : तुम्हारी पत्नी, मांबाप, बच्चे सब दुखी होंगे?

नशेड़ी : उन की चिंता मुझे करनी है. आप अपने काम से काम रखो.

इस दर्जे के नशेडि़यों से नशा नहीं छुड़ा सकते. नशा छुड़ाने के लिए इन्हें ‘नशा मुक्ति केंद्र’ में ले जाना ही उचित रहेगा. दूसरे नशेड़ी वे हैं, जो नशे को बुरा मानते हैं. वे इसे छोड़ना भी चाहते हैं, पर लत से मजबूर हैं. ऐसे नशेड़ी अगर कोशिश करें, तो नशा छोड़ सकते हैं. कुछ सुझाव पेश हैं:

1. बुरी संगत से दूर रहें

नशा देखादेखी का शौक है. अगर ऐसे लोगों से दूर रहें जो नशा करते हैं, तो आप की इच्छा नहीं होगी या इच्छा होगी भी, तो आप दबा पाएंगे. ऐसे लोगों को आप को बताना भी नहीं चाहिए कि आप ने नशा करना छोड़ दिया है, वरना वे आप को जबरदस्ती उस जगह ले जाएंगे और तरहतरह से आप को फुसलाएंगे. फिर आप खुद को रोक नहीं पाएंगे, इसलिए ठीक यही है कि ऐसे लोगों की संगत से दूर रहें.

2. अपनी सेहत पर ध्यान दें

कभी जिम में जाना शुरू करें, सुबह घूमने जाना शुरू करें. हर रोज आईने में देखें और अपनेआप से कहें कि अब चेहरा कितना सुंदर होता जा रहा है. अच्छे कपड़े पहनें और बनठन कर रहना शुरू करें.

3. परिवार के साथ रहें

आमतौर पर नशे की तलब एक खास समय पर होती है. उस समय अपने परिवार के साथ बिताएं. परिवार को भी चाहिए कि उस समय नशे करने वाले सदस्य को जितना हो सके, बिजी रखें. प्यार भरा बरताव करें और किसी भी बात पर उन्हें गुस्सा न दिलाएं.

4. जेब में पैसे न रखें

जहां तक हो सके, जेब में पैसे ही न रखें या बहुत ही कम रखें. जब जेब में पैसे ही नहीं होंगे, तो आप नशा खरीद नहीं पाएंगे और तलब का समय निकल जाएगा.

5. ऐसी जगह से बचें

आनेजाने का रास्ता बदल लें, जहां आप नशा करते थे. कितनी भी तलब उठे, उस जगह न जाएं. इसी तरह से शादी या दूसरे कार्यक्रमों में जहां नशे की पार्टी चल रही हो, वहां न जाएं. आप खुद को शाबाशी दें कि आप में कितनी मजबूती है. इस से तलब धीरेधीरे कम हो जाएगी. शुरू में ज्यादा तलब होगी, पर अगर आप मन को मजबूत रखेंगे और नशा नहीं करेंगे, तो जैसेजैसे दिन बीतते जाएंगे, आप की तलब कम होती जाएगी और धीरेधीरे खत्म हो जाएगी.

6. शपथ ले लीजिए

आप शपथ भी ले सकते हैं कि चाहे कोई मुझ पर कितना भी दबाव डाले, मैं  प्रतिज्ञा करता हूं कि अब किसी तरह का नशा नहीं करूंगा.

इसे रोजाना 3 बार बोलिए. जब भी आप को नशे की तलब उठे, तो मन को मजबूत बनाए रखें. कुलमिला कर आप को हर हाल में अपने मन की मजबूती बनाए रखनी है. न तो यह सोचें कि आज नशा कर लेते हैं, कल से नहीं लेंगे. बहादुर बनिए. गम का डट कर सामना कीजिए. इस बात पर भरोसा रखिए कि समय के साथसाथ सब ठीक हो जाता है. पहले भी आप की जिंदगी में कितने ही गम आए होंगे, पर आज वे बीती बात बन गए हैं. इसी तरह से ये भी आने वाले समय में बीती बात बन जाएंगे. आप इस दुनिया में नशेड़ी बनने के लिए नहीं आए हैं. आप की जिंदगी बहुत कीमती है. यह दोबारा नहीं मिलेगी. इसे नशे की भेंट न चढ़ाइए.

आखिर क्यों यौन अक्षमता से पीड़ित होती हैं महिलाएं, जानें कारण

अगर आपका पार्टनर लम्‍बे समय से सेक्‍स के लिए न कह रही है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. ये भी संभव है कि आपकी पार्टनर सेक्‍स के प्रति रुझान न होने की समस्‍या से जूझ रही है. इसे महिला यौन अक्षमता भी कहा जाता है.

इस शब्द का उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति को परिभाषित करने के लिए किया जाता है जो अपने साथी को सेक्‍स के दौरान सहयोग नहीं करता. महिलाओं में एफएसडी यानी फीमेल सेक्सुअल डिसफंक्शन होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे सेक्स के दौरान दर्द या मनोवैज्ञानिक कारण. 

ज्यादातर मामलों में, हालांकि, एफएसडी को मनोवैज्ञानिक कारणों के लिए जिम्मेदार माना जाता है. इस परिदृश्य में, महिलाओं के लिए किसी पेशेवर से मदद लेना महत्वपूर्ण होता है.

इस समस्या के 3 मुख्य कारण हैं ;

1. मनोवैज्ञानिक कारण

पुरुषों के लिए सेक्‍स एक शारीरिक मुद्दा हो सकता है, लेकिन महिलाओं के लिए यह एक भावनात्मक मुद्दा है. पिछले बुरे अनुभवों के कारण कुछ महिलाएं भावनात्मक रूप से टूट जाती हैं. वर्तमान में बुरे अनुभवों के कारण मनोवैज्ञानिक मुद्दे या फिर अवसाद इसका कारण हो सकता है.

2. और्गेज्‍म तक न पहुंच पाना

एफएसडी का दूसरा भाग एनोर्गस्मिया कहलाता है. यह स्थिति तब होती है जब व्‍यक्ति को या तो कभी और्गेज्‍म नहीं होता या वह कभी इस तक पहुंच ही नहीं पाता. और्गेज्‍म तक पहुंचने में असमर्थता भी एक मेडिकल कंडीशन है. सेक्स में रुचि की कमी और और्गेज्‍म तक पहुंचने में असमर्थता दोनों ही स्थिति गंभीर हैं. 

यह मुख्य रूप से इसलिए होता है क्योंकि महिलाएं अधिक फोरप्ले पसंद करती हैं. अगर ऐसा नहीं हो रहा तो और्गेज्‍म तक पहुंचना मुश्किल है. इसका मनोचिकित्सा के माध्यम से इलाज किया जा सकता है. महिलाओं को अपने रिश्ते में सेक्स के साथ समस्याएं होती हैं. यदि आपको ऐसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो आपको अपने एंड्रोलौजिस्ट को जल्द से जल्द दिखाना चाहिए ताकि समस्या संबंधों को प्रभावित न करे.

3.  फीमेल सेक्सुअल डिसफंक्शन का इलाज और उपचार

जहां तक घरेलू उपचार का सवाल है, एफएसडी के इलाज में वास्तव में यह बहुत प्रभावी नहीं होते. बाजार में कई तरह के महिला वियाग्रा मौजूद हैं लेकिन ये आमतौर पर अपेक्षित नतीजे नहीं दे पाते. महिलाएं लेजर के साथ योनि कायाकल्प ट्राई कर सकती हैं. आप चाहें तो प्लेटलेट रिच प्लाज़्मा (पी आर पी ) थेरेपी भी अपना सकती हैं. इस क्षेत्र में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करने के लिए योनि के पास इंजेक्शन दिया जाता है. इसे ओ-शौट के रूप में जाना जाता है.

यदि आप यौन संबंध का आनंद नहीं ले रहे हैं तो डाक्टर को दिखाना जरूरी है। उसके बाद डाक्टर जांच करेगा. दोनों भागीदारों के लिए यौन परामर्श उपयोगी हो सकता है. दिनचर्या बदलने और अलग-अलग पदों की कोशिश करके इसे और अधिक रोचक बनाने की कोशिश करना उपयोगी हो सकता है. योनि क्रीम या स्नेहक की कोशिश की जा सकती है.

ज्यादातर महिलाओं को, विशेष रूप से जब वे बूढी हो जाती हैं तो संभोग शुरू करने से पहले अधिक उत्तेजना और फोरप्ले की आवश्यकता होती है. योनि प्रवेश के साथ ज्यादातर महिलाओं को संभोग के दौरान संतुष्टि नहीं होती है. उन्हें अपने साथी द्वारा अपने निप्पलस और क्लिटोरिस को संभोग करने में सक्षम होने के लिए चूमने, छूने इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है. हस्तमैथुन या मौखिक सेक्स जैसी अन्य यौन गतिविधियों की कोशिश की जा सकती है.

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