सेक्स से पहले ऐसे करें अपने पार्टनर को खुश

4 सहेलियां कुछ अरसे बाद मिली थीं. 2 की जल्दी शादी हुई थी तो 2 कुछ बरसों का वैवाहिक जीवन बिता चुकी थीं. ऐसा नहीं कि उन में और किसी विषय पर बात नहीं हुई. बात हुई, लेकिन बहुत जल्द ही वह पहली बार के अनुभव पर आ टिकी.

पहली सहेली ने पूछा, ‘‘तुम फोन पर ट्रेन वाली क्या बात बता रही थी? मेरी समझ में नहीं आई.’’

दूसरी बोली, ‘‘चलो हटो, दोबारा सुनना चाह रही हो.’’

तीसरी ने कहा, ‘‘क्या? कौन सी बात? हमें तो पता ही नहीं है. बता न.’’

दूसरी बोली, ‘‘अरे यार, कुछ नहीं. पहली रात की बात बता रही थी. हनीमून के लिए गोआ जाते वक्त हमारी सुहागरात तो ट्रेन में ही मन गई थी.’’

तीसरी यह सुन कर चौंकी, ‘‘हाउ, रोमांटिक यार. पहली बार दर्द नहीं हुआ?’’

दूसरी ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ खास तो नहीं.’’

तीसरी बोली, ‘‘चल झूठी, मेरी तो पहली बार जान ही निकल गई थी. सच में बड़ा दर्द होता है. क्यों, है न? तू क्यों चुप बैठी है? बता न?’’

चौथी सहेली ने कहा, ‘‘हां, वह तो है. दर्द तो सह लो पर आदमी भी तो मनमानी करते हैं. इन्होंने तो पहली रात को चांटा ही मार दिया था.’’

बाकी सभी बोलीं, ‘‘अरेअरे, क्यों?’’

चौथी ने बताया, ‘‘वे अपने मन की नहीं कर पा रहे थे और मुझे बहुत दर्द हो रहा था.’’

पहली बोली, ‘‘ओह नो. सच में दर्द का होना न होना, आदमी पर बहुत डिपैंड करता है. तुम विश्वास नहीं करोगी, हम ने तो शादी के डेढ़ महीने बाद यह सबकुछ किया था.’’

दूसरी और तीसरी बोलीं, ‘‘क्यों झूठ बोल रही हो?’’

पहली सहेली बोली, ‘‘मायके में बड़ी बहनों ने भी सुन कर यही कहा था, उन्होंने यह भी कहा कि लगता है मुझे कोई धैर्यवान मिल गया है, लेकिन मेरे पति ने बताया कि उन्होंने शादी से पहले ही तय कर लिया था कि पहले मन के तार जोडूंगा, फिर तन के.

‘‘मुझे भी आश्चर्य होता था कि ये चुंबन, आलिंगन और प्यार भरी बातें तो करते थे, पर उस से आगे नहीं बढ़ते थे. बीच में एक महीने के लिए मैं मायके आ गई. ससुराल लौटी तो हम मन से काफी करीब आ चुके थे. वैसे भी मैं स्कूली दिनों में खूब खेलतीकूदती थी और साइकिल भी चलाती थी. पति भी धैर्य वाला मिल गया. इसलिए दर्द नहीं हुआ. हुआ भी तो जोश और आनंद में पता ही नहीं चला.’’

पतिपत्नी के पहले मिलन को ले कर अनेक तरह के किस्से, आशंकाएं और भ्रांतियां सुनने को मिलती हैं. पुरुषों को अपने सफल होने की आशंका के बीच यह उत्सुकता भी रहती है कि पत्नी वर्जिन है या नहीं. उधर, स्त्री के मन में पहली बार के दर्द को ले कर डर बना रहता है.

आजकल युवतियां घर में ही नहीं बैठी रहतीं. वे साइकिल चलाती हैं, खेलकूद में भाग लेती हैं, घरबाहर के बहुत सारे काम करती हैं. ऐक्सरसाइज करती हैं, नृत्य करती हैं. ऐसे में जरूरी नहीं कि तथाकथित कुंआरेपन की निशानी यानी उन के यौनांग के शुरू में पाई जाने वाली त्वचा की झिल्ली शादी होने तक कायम ही रहे. कई तरह के शारीरिक कार्यों के दौरान पैरों के खुलने और जननांगों पर जोर पड़ने से यह झिल्ली फट जाती है, इसलिए जरूरी नहीं कि पहले मिलन के दौरान खून का रिसाव हो ही. रक्त न निकले तो पुरुष को पत्नी पर शक नहीं करना चाहिए.

अब सवाल यह उठता है कि जिन युवतियों के यौनांग में यह झिल्ली विवाह के समय तक कायम रहती है, उन्हें दर्द होता है या नहीं. दर्द का कम या ज्यादा होना झिल्ली के होने न होने और पुरुष के व्यवहार पर निर्भर करता है. कई युवतियों में शारीरिक कार्यों के दौरान झिल्ली पूरी तरह हटी हो सकती है तो कई में यह थोड़ी हटी और थोड़ी उसी जगह पर उलझी हो सकती है. कई में यह त्वचा की पतली परत वाली होती है तो कई में मोटी होती है.

स्थिति कैसी भी हो, पुरुष का व्यवहार महत्त्वपूर्ण होता है. जो पुरुष लड़ाई के मैदान में जंग जीतने जैसा व्यवहार करते हैं, वे जोर से प्रहार करते हैं, जो स्त्री के लिए तीखे दर्द का कारण बन जाता है. ऐसे पुरुष यह भी नहीं देखते कि संसर्ग के लिए राह पर्याप्त रूप से नम और स्निग्ध भी हुई है या नहीं. उन के कानों को तो बस स्त्री की चीख सुनाई देनी चाहिए और आंखों को स्त्री के यौनांग से रक्त का रिसाव दिखना चाहिए. ऐसे पुरुष, स्त्री का मन नहीं जीत पाते. मन वही जीतते हैं जो धैर्यवान होते हैं और तन के जुड़ने से पहले मन के तार जोड़ते हैं व स्त्री के संसर्ग हेतु तैयार होने का इंतजार करते हैं.

भले ही आप पहली सहेली के पति की तरह महीना, डेढ़ महीना इंतजार न करें पर एकदम से संसर्ग की शुरुआत भी न करें. पत्नी से खूब बातें करें. उस के मन को जानने और अपने दिल को खोलने की कोशिश करें. पर्याप्त चुंबन, आलिंगन करें. यह भी देखें कि पत्नी के जननांग में पर्याप्त गीलापन है या नहीं. दर्द के डर से भी अकसर गीलापन गायब हो जाता है. ऐेसे में किसी अच्छे लुब्रीकैंट, तेल या घी का इस्तेमाल करना सही रहता है. शुरुआत में धीरेधीरे कदम आगे बढ़ाएं. इस से आप को भी आनंद आएगा और पत्नी को दर्द भी कम होगा.

कई युवतियों के लिए सहवास आनंद के बजाय दर्द का सबब बन जाता है. ऐसा कई कारणों से होता है, जैसे :

कुछ युवतियों में वल्वा यानी जांघों के बीच का वह स्थान जो हमें बाहर से दिखाई देता है और जिस में वेजाइनल ओपनिंग, यूरिथ्रा और क्लीटोरिस आदि दिखाई देते हैं, की त्वचा अलग प्रकार की होती है, जो उन्हें इस क्रिया के दौरान पीड़ा पहुंचाती है. त्वचा में गड़बड़ी से इस स्थान पर सूजन, खुजली, त्वचा का लाल पड़ जाना और दर्द होने जैसे लक्षण उभरते हैं. त्वचा में यह समस्या एलर्जी की तरह होती है और यह किसी साबुन, मूत्र, पसीना, मल या पुरुष के वीर्य के संपर्क में आने से हो सकती है.

सहवास के दौरान दर्द होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए. सहवास से पहले पर्याप्त लुब्रीकेशन करना चाहिए. पुरुष को यौनांग आघात में बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए. वही काम मुद्राएं अपनानी चाहिए जिन में स्त्री को कम दर्द होता हो. इस से भी जरूरी बात यह है कि पहले मन के तार जोडि़ए. ये तार जुड़ गए तो तन के तार बहुत अच्छे और स्थायी रूप से जुड़ जाएंगे.    – सहवास के दौरान पर्याप्त लुब्रीकेशन न होने से भी महिला को दर्द का एहसास हो सकता है.

– महिला यौनांग में यीस्ट या बैक्टीरिया का इन्फैक्शन भी सहवास में दर्द का कारण बनता है.

– एक बीमारी एंडोमेट्रिआसिस होती है, जिस में गर्भाशय की लाइनिंग शरीर के दूसरे हिस्सों में बनने लगती है. ऐसा होने पर भी सहवास दर्दनाक हो जाता है.

– महिला के यौनांग की दीवारों के बहुत पतला होने से भी दर्द होता है.

– यूरिथ्रा में सूजन आ जाने से भी सहवास के दौरान दर्द होता है.

जब दिल में हो एक-दूसरे के लिए प्यार और सम्मान, तभी मिल सकता है सुकून और संतुष्टि

सेक्स का सीधा संबंध मन और मस्तिष्क से है. इसलिए आपस में सेक्स संबंध बनाने वाले कपल में एक दूसरे के लिए न केवल प्यार और सम्मान हो बल्कि भरपूर दोस्ताना भी हो. कोई किसी के साथ जोर जबरदस्ती न करे,न कोई किसी पर सिर्फ अपनी चाहत जबरदस्ती लादे . सेक्स में किसी भी तरह की कोई सीमा नहीं है, सीमा बस एक ही है आपके पार्टनर की सहमति. इसलिए सबसे पहली और जरूरी शर्त यह है कि जिसके साथ सेक्स संबंध बनाएं उसकी भावनाओं की कद्र करें, उसकी इज्जत करें, उसे सम्मान दें.

बकौल सेक्स एक्सपर्ट डेविड रूबीन, ‘सेक्स एक ऐसा खेल है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा खेला जाता है. जिसमें सबसे ज्यादा आनंद आता है. जिसे किसी को भी खेलने का हक है. जिसमें हर खिलाड़ी का बराबर का योगदान होता है. कोई पराजित नहीं होता हर कोई विजेता होता है. जब इस भावना से यह खेल खेला जाता है तो यह आनंद का सागर बन जाता है. सेक्स के खेल में छेड़छाड़, मनुहार, हंसी, आश्चर्य, नाटकीयता और भावुकता सब जायज है. सच तो यह है कि बिना नाटकीयता और  एक्साइटमेंट के यह खेल बिल्कुल नीरस लगता है.

वास्तव में सेक्स का हमारे मन और हमारे ख्यालों से बहुत गहरा रिश्ता है. आपमें कितनी ही शारीरिक उत्तेजना क्यों न हो, अगर मन किसी दूसरे काम या चिंता में फंसा हुआ है तो आप सेक्स नहीं कर सकते. करेंगे तो खुशी नहीं मिलेगी. इसलिए जब सेक्स करें तो उसमें खो जाएं. उस समय दीन-दुनिया के बारे में कुछ न सोचें. हर अदा की तरह सेक्स के भी दो रूप होते हैं. आप इसे नियंत्रित भी कर सकते हैं और बेकाबू होने पर आप इसके गुलाम भी हो सकते हैं. कहने का मतलब यह है कि सेक्स को दबाने की शक्ति तो आपमें होती है, लेकिन अगर यह बहुत प्रबल हो जाए तो किसी भी हाल में पार्टनर ढूंढ़ने लगता है.

सेक्स अगर दिल दिमाग पर हावी हो जाए और कोई वाजिब रास्ता ढूंढे न मिले तो रेप जैसे अपराध जन्म लेते हैं. सेक्स में जब दोनो पार्टनर की आपस में रजामंदी होती है तो आनंद की जबरदस्त लय बनती है. ऐसे कपल्स के बीच में ही प्रगाढ़ सेक्स संबंध बनते हैं. एक दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान के साथ किया गया सेक्स दो लोगों को एक ऐसी आत्मीयता की जंजीर से बांधता है जो जंजीर कभी नहीं टूटती. हालांकि सेक्स एक शारीरिक अभिव्यक्ति है, भूख है, पर सेक्स उत्पन्न केवल मन से होता है. मन स्वस्थ हेागा, तो सेक्स भी स्वस्थ होता है. शुरू में शारीरिक आकर्षण के चलते संबंध बनते हैं. लेकिन यदि मन के तार न मिले तो चेहरे चाहे कितने ही आकर्षक क्यों न हो, यह रिश्ता टूट जाता है.

मन के तार जब आपस में मजबूती से बंधे होते हैं तो हर बार के सेक्स संबंध मुकम्मल और संतुष्टि से भर देने वाले होते हैं. ज्यादातर पुरुषों में शीघ्रपतन और लिंग में तनाव न हो पाने की समस्या मानसिक तनाव के चलते ही आती है. 100 में 98-99 बार चेकअप के बाद पाया जाता है कि सब कुछ बिल्कुल ठीक है. लेकिन अगर पार्टनर के साथ प्यार भरे रिश्ते नहीं हैं तो दिल दिमाग में हमेशा एक धुकपुकी मची रहती है और इस धुकपुकी के चलते कुछ भी अच्छा नहीं होता, कई तरह की समस्याएं आ जाती हैं. इसलिए जब किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाएं उससे पहले उसके साथ दिल के, प्यार के और सम्मान के रिश्ते भी बनाएं.

एक संपूर्ण सुख से भरा संतुष्टिायक सेक्स तनाव से पूरी तरह मुक्ति दिलाता है. जबकि सेक्स से वंचित रहने पर या संतुष्टिदायक सेक्स न हासिल होने पर तनाव व चिड़चिड़ापन पैदा हो जाता है. अब आप सूरज और श्रद्धा की कहानी पर एक नजर दौड़ाएं. सूरज अभी अधेड़ नहीं हुए. लेकिन उनकी काया कह रही है कि जवानी उनका साथ छोड़ चुकी है. अधपके बाल, पिचके गाल, झुकी पीठ, बेहिसाब तोंद और ढीली लड़खड़ाहट भरी चाल. दरअसल, उनकी समस्या थी जबर्दस्त तनाव. दफ्तर में वे बारह से सोलह घंटे तक काम करते हैं. इसके बाद क्लब जाकर दो-तीन पैग पीते हैं. घर पहुंचते हैं रात में ग्यारह बजे के बाद. फिर जल्दी-जल्दी खाना और सोना. उनकी पत्नी श्रद्धा उनसे चैबीसों घंटे खफा रहती है.

श्रद्धा को लगता है कि उनके पति घर खर्च के पैसे देकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं. बेटा अपनी दुनिया में मस्त है. वह इस साल 12वीं में गया है. बेटी 7वीं की छात्रा है. श्रद्धा के निजी जीवन में बहुत तनाव है. उसकी सूरज के साथ अकसर किसी न किसी बात पर लड़ाई होती रहती है. सूरज भी इन बातों से तनाव में रहता है. एक रोज सूरज आॅफिस में बाॅस से हुई तनातनी के बाद अपना इस्तीफा उनके टेबल पर फेंक आए.

ये सारी स्थितियां श्रद्धा और सूरज के दाम्पत्य जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रही हंै. अंत में दोनो ने मनोचिकित्सक की सलाह लेने में ही भलाई समझी. मनोचिकित्सक ने उनसे छूटते ही पूछा, ‘दोनो के रिश्ते कैसे हैं?’ इस पर सूजर अचकचा गया. सूरज भी खामोश रहा और श्रद्धा भी कुछ नहीं बोली. डाॅक्टर ने सवाल इस बार और भी सपाट शब्दों में पूछा आप दोनो के बीच कितने दिन में शारीरिक सम्बंध बनते हैं? सूरज को वह दिन याद करने में काफी मुश्किल हुई. श्रद्धा ने ही धीमे स्वर में कहा तकरीबन 4 महीने गुजर हैं. उस रोज भी वे ठीक से परफाॅर्म भी नहीं कर पाए थे. श्रद्धा ने अपनी असंतुष्टि भी जता दी थी.

डाॅक्टर ने अगला सवाल किया, ‘क्या अब आप सेक्स मेें बिलकुल भी रूचि नहीं लेते?’ सूरज को मजबूरन कहना ‘मैं इतना व्यस्त रहता हूं कि समय ही नहीं मिलता. ऊपर से हर वक्त तनाव बना रहता है. आॅफिस में भी और घर में भी. ऐसे में सेक्स करें, तो कैसें?’ डाॅक्टर ने जब उन्हें बताया कि नियमित सेक्स से वे तनाव से निजात पा सकते हैं, तो सूरज को विश्वास नहीं हुआ. इतनी टेंशन, इतनी कुंठा- सेक्स से कैसे दूर हो सकती है? लेकिन वे उन्हें यकीन दिलाते हैं कि जब शारीरिक सम्बंध निरंतर विकसित होते हैं, निजी जीवन से तनाव दूर भाग जाता है.

अच्छा और रोमांटिक सेक्स तभी संभव है जब आप खुशबू का दामन छूते हैं. कहने का मतलब यह है कि कुछ परफ्यूम या प्राकृत सुगंध ऐसी होती है जो महिलाओं और पुरुषों को सेक्सुअली उत्तेजित करती है. ऐसे में जरूरी है कि दम्पति अपने जीवन को रोमांस से भरने के लिए उनका सहारा ले ताकि सेक्स में भी मजा आता रहे और तनाव से भर दूर हो जाएं.

ये सेक्स पौजिशन पड़ सकती है पुरुषों को भारी

सेक्स का भरपूर आनंद लेने के लिए कई तरह की पौजिशन का जिक्र किया गया है, वूमन औन टौप उन्हीं में से एक है. कई पुरुषों की ये पसंदीदा पौजिशन होती है और उन्हें महिलाओं को ऊपर (वूमन औन टौप) रखने से अधिक आनंद की अनुभूति होती है, लेकिन ऐसा करना पुरुषों के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है और हो सकता है कि वे कभी सेक्स कर भी न पाएं.

दरअसल वूमन औन टौप पौजिशन में पुरुषों के जननांग (penis) में फ्रैक्चर (पेनाइल फ्रैक्चर) होने का अंदेशा रहता है. रिसर्च के अनुसार पेनाइल फ्रैक्चर के अधिकांश मामले इसी सेक्स पोजिशन के कारण सामने आते हैं.

वूमन औन टौप पोजिशन सबसे खतरनाक : रिसर्च

कनाडा के एक रिसर्च दल के मुताबिक वूमन औन टौप पौजिशन सबसे खतरनाक सेक्स पौजिशन है, जिससे हमेशा पेनाइल फ्रैक्चर का खतरा बना रहता है.  इस अध्ययन के लिए ब्राजील के शहर कैंपिनास के तीन अस्पतालों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया. इस दौरान उन्होंने 13 साल के टाइम पीरियड में संदिग्ध पेनाइल फ्रैक्चर के शिकार लोगों का इंटरव्यू लिया. इनमें से आधे लोगों ने कहा कि पेनिस में दर्द महसूस होने से पहले उन्हें टूटने की आवाज सुनाई दी. जबकि कुछ ने सूजन होने की भी बात कही.

खतरा क्यों होता है

रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है कि वूमेन औन टौप पोजिशन में प्राय: महिला अपने पूरे वजन के साथ गति को नियंत्रित करती है. इस दौरान लिंग के गलत दिशा में अचानक प्रवेश से पेनाइल फ्रैक्चर होता है. साथ ही कहा गया कि वहीं इसके उलटे इसी पौजिशन में जब गति का नियंत्रण पुरुष के हाथ में होता है तो पेनाइल फ्रैक्चर की संभावना कम हो जाती है.

सैक्स और ताकत की दवा, जरा संभल कर करें इस्तेमाल

“भैया, आप से एक बात करनी है,” 25 साल के मदन ने अपने बड़े भाई जैसे दोस्त जितेंद्र से एक दिन अचानक कहा.

“बोलो, क्या बात है?” जितेंद्र बोला.

“भैया, आप शादीशुदा हैं, इसलिए जरूर समझेंगे. यह थोड़ी निजी समस्या है. आप इसे गंभीरता से लेना,” मदन धीरे से बोला.

जितेंद्र ने कहा, “ज्यादा पहेली न बुझाओ. गर्लफ्रैंड का चक्कर है क्या?”

मदन बोला, “हां, पर समस्या गर्लफ्रैंड से नहीं है. वहां तो सब सही है, लेकिन मैं जब भी सैक्स करता हूं तो बिना ताकत की दवा के मजा ही नहीं आता है. बिना उस के तो मैं जल्दी पस्त हो जाता हूं, पर दवा लेते ही घोड़ा बन जाता हूं.”

“तो समस्या क्या है?” जितेंद्र ने पूछा.

“कहीं मुझे ताकत की दवा लेने की लत तो नहीं लग गई है?” मदन ने अपने दिल की बात रखी.

“अच्छा, तो यह बात है. देखो मदन, मुझे लगता है कि तुम मन से यह मान चुके हो कि बिना ताकत की दवा के सैक्स का पूरा मजा ले ही नहीं सकते हो. अपनी गर्लफ्रैंड पर मर्दानगी जताने के लिए तुम ऐसा कर रहे हो. तुम्हें लगता है कि अगर गर्लफ्रैंड प्यासी रह जाएगी, तो वह तुम्हें छोड़ कर चली जाएगी,” जितेंद्र ने कहा.

“यही बात मुझे खाए जा रही है भैया. मैं अब इस जंजाल से निकलना चाहता हूं. मेरा खुद पर से यकीन कम होता जा रहा है. मुझे इन दवाओं से छुटकारा दिखाओ,” मदन असली मुद्दे पर आया.

“एक दोस्त होने के नाते मैं तुम्हें यही सलाह दूंगा कि इस तरह की ताकत की दवाएं तुम किसी माहिर डाक्टर की सलाह पर ही लेना. मुझे लगता है कि सैक्स को ले कर तुम में आत्मविश्वास की कमी है. हर किसी के साथ ऐसा हो सकता है कि उस में सैक्स करने की नाकामी का डर बैठ जाए,” जितेंद्र ने अपनी सलाह दी.

यह समस्या अकेले मदन की नहीं है, बल्कि बहुत से नौजवान, यहां तक कि अधेड़ और बूढ़े भी अपनी मर्दानगी बढ़ाने, लंबे समय तक सैक्स का मजा लेने और अपने पार्टनर के सामने शर्मिंदा न हों, इस डर से सैक्स की ताकत बढ़ाने की दवा का इस्तेमाल बिना किसी डाक्टरी सलाह के करते हैं.

आमतौर पर सैक्स की ताकत बढ़ाने वाली दवाएं अपना काम कर देती हैं, लेकिन इन का असर सभी पर एक जैसा पड़े, यह जरूरी नहीं है. होता क्या है कि ऐसी दवाएं शरीर में नाइट्रिक औक्साइड की मात्रा बढ़ा देती हैं, जिस से नसें मोटी हो जाती हैं और शरीर में खून का दौरा बढ़ जाता है. इस से अंग में तनाव में पैदा हो जाता है.

लेकिन बहुत से लोगों में ऐसी दवाओं के सेवन के बाद साइड इफैक्ट भी देखे गए हैं, जैसे सिरदर्द होना, चक्कर आना, देखने में कमी आना, गरमी लगना, नाक का बंद होना, जी मिचलाना वगैरह.

पर ये सामान्य लक्षण होते हैं. कई बार समस्या गंभीर भी हो जाती है, जिस में सीने में दर्द, दिखना बंद होना, सांस लेने में दिक्कत, घुटन महसूस होना, चेहरे पर सूजन की समस्या पैदा हो जाती है.

लिहाजा, जिन लोगों को सीने में दर्द की समस्या रहती है, तो उन्हें इस तरह की दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए. अगर किसी को हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक हो चुका है, तो वह ऐसी दवा का इस्तेमाल न करे.

अगर कोई ब्लड प्रैशर की दवा ले रहा है या किसी को डाइबिटीज है, तो भी इस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. किडनी की परेशानी है, तो बिना डाक्टरी सलाह के इस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

प्लास्टिक, कौस्मैटिक सर्जन और एंड्रोलौजिस्ट डाक्टर अनूप धीर ने बताया, “इस तरह की हर दवा का अपना फायदा और नुकसान होता है. लिहाजा, डाक्टर की सलाह पर ही दवा का सेवन करना चाहिए, क्योंकि वह बेहतर जानता है कि कौन सी दवा कितने समय तक लेनी चाहिए.

“डाक्टर ने जितने समय के लिए ऐसी दवा लेने की सलाह दी है, उस के बाद सेवन नहीं करना चाहिए. एक और बात कि इन दवाओं की लत नहीं लगती है, पर कुछ लोग इन के आदी हो जाते हैं, जो सही नहीं है.”

भारत जैसे देश में तो यह समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है, जहां सैक्स जैसे मुद्दे पर खुल कर बातें नहीं होती हैं, तभी तो लोग ऐसी दवाओं का इस्तेमाल बिना सोचेसमझे करते हैं.

बहुत से लोग तो कैमिस्ट के पास जा कर भी दवा नहीं मांग पाते हैं, तो वे ऐसी दवाएं औनलाइन खरीद लेते हैं, जहां पता ही नहीं चल पाता है कि औनलाइन कंपनी सही है या नहीं. फिर बिना डाक्टरी सलाह के बहुत से लोग अपनी डोज बढ़ा देते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित हो सकती है.

बहुत से लोग तो सड़कछाप नीमहकीम की शिलाजीत के नाम पर खरीदी गई चटनी, नीलीपीली गोलियों और मर्दाना तेल को ही सैक्स की ताकत बढ़ाने का फार्मूला मान लेते हैं और पैसे व सेहत से लुट जाते हैं.

कही आप भी तो नहीं कर रहे प्रेग्नेंसी में बिना कंडोम के सेक्स

प्रेग्नेंसी नारी जीवन की ऐसी अवस्था है जिसमें एक महिला को जितना ध्यान अपने खानपान पर देना होता है उतना ही अपने लाइफस्टाइल पर भी देना होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह से एक आम महिला और एक गर्भवती महिला की संरचना में काफी अंतर होता है. ठीक उसी तरह एक ​महिला के गर्भवती होते ही उसका लाइफस्टाल भी अन्य महिलाओं से अलग हो जाता है. लेकिन कई बार महिलाएं इसे जल्दी से स्वीकार करने से परहेज करती हैं और अपनी मस्ती में रहती हैं. उन महिलाओं को शायद इस बात की जानकारी नहीं होती है कि उनकी इन हरकतों का सीधा असर उनके शिशु पर पड़ रहा है.

सेक्स हर व्यक्ति की जिंदगी का वो पल होता है जिसे करते वक्त बेहद आनंद और खुशी मिलती है. प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करना अन्य अवस्थाओं से बहुत अलग होता है. यहां हम आपको बता रहे हैं कि गर्भवती महिला को सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल क्यों करना चाहिए.

अक्सर लोग ये सोचते हैं कि प्रेग्नेंसी के वक्त अगर वो बिना कंडोम के सेक्स करते हैं तो कोई नुकसान नहीं होगा. क्योंकि जब एक महिला प्रेग्नेंट है तो फिर ना तो गर्भवती होने के चांस रहते हैं और ना ही वैजाइना में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो ये आपके लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. क्योंकि गर्भावस्था में कंडोम के बिना सेक्स करने से एसटीडी, एड्स, वैजाइनल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे मां और शिशु दोनों को गहरा खतरा होने के चांस रहते हैं.

प्रेगनेंसी के दौरान सर्विक्स म्यूकल प्लग से बंद हो जाता है जिससे गर्भाशय में स्पर्म घुस नहीं पाते हैं. जिसके चलते वैजाइना के अलावा शरीर के दूसरे अंगों में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है. प्रेग्नेंसी के वक्त इस बात का खास ध्यान रखें कि भूल कर भी कंडोम के बिना सेक्स ना करें.

प्रेग्नेंसी के चलते अगर आप एसटीडी के उपचार के लिए कोई दवा लेते हैं तो ये आपके शिशु के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचा सकती है. प्रेग्नेंट महिला को एसटीडी के अलावा क्लामिडिया, सिफिलिस, हर्पिस, हेपाटाइटिस बी, ग्रोनोरियाम, एचआईवी/एड्स हो सकता है. इसका सीधा असर डिलीवरी के वक्त मां और शिशु दोनों पर पड़ता है. ध्यान रखें कि प्रेंग्नेसी की प्लानिंग से पहले ही अपना एसटीडी और अन्य चेकअप करा लें. क्योंकि प्रेग्नेंसी के वक्त इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत मुश्किल हो जाता है.

मेरा मन अपने बौयफ्रेंड को किस करने का करता है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 14 साल की हूं, दिल्ली में रहती हूं. कुछ दिन पहले मेरी और मेरे ट्यूशन में पढ़ने वाले लड़के की बातचीत होनी शुरू हुई. वह और मैं एकदूसरे को बहुत पसंद करते हैं. वह 15 साल का है, बहुत स्मार्ट और इंटैलिजैंट भी है. उस की और मेरी बात होनी शुरू हुई तो हमें एकदूसरे की फीलिंग्स का पता चला. हम दोनों ही एकदूसरे को चाहते थे. सो, रिलेशनशिप में आ गए.

यह हम दोनों की पहली रिलेशनशिप है, इसलिए अब तक हम किसी भी तरह से फिजिकली क्लोज नहीं आए हैं. लेकिन, मैं उसे किस करना चाहती हूं, गले लगाना चाहती हूं, पर मैं बहुत डरती हूं कि उसे कैसे बताऊं या पूछूं.

हम कभी किसी अकेली जगह पर पहले मिले नहीं और उस ने मुझे सामने से किस के लिए कभी पूछा भी नहीं. क्या मुझे उस से पूछना चाहिए या इस के लिए आगे बढ़ना चाहिए?

जवाब-

इस उम्र में आप का फोकस आप का बौयफ्रैंड या उस को किस करना नहीं होना चाहिए बल्कि आप की पढ़ाई होनी चाहिए. किस करने को तो आप कर लेंगी लेकिन उस के बाद होगा क्या, वह भी जान लीजिए. 14 साल की उम्र और पहलापहला प्यार अकसर ऐसे होते हैं कि इन में हुई चीजें हमारे मनमस्तिष्क पर गहरा असर छोड़ जाती हैं.

आप किस करेंगे और एक महीने तक इसी खुशी में घूमते रहेंगे, फिर बारबार किस करने का मन करने लगेगा और पढ़ाई से ध्यान खुदबखुद हट जाएगा. इस के बाद कल को यदि लड़ाई हो गई तो उस गम में न पढ़ाई होगी न चैन आएगा. जिंदगी जितनी सुकूनभरी अभी है, किस के बाद नहीं रहेगी. बेहतर यही होगा कि चीजें स्लो पेस पर चलने दें और अपनी इच्छाओं को कुछ समय के लिए मन में दबा लें. पहले पढ़ाई और कैरियर पर फोकस करें. अभी तो पूरी जिंदगी पड़ी है किस करने और रिलेशनशिप में आने के लिए. इस के लिए आप को इंतजार नहीं करना पड़ेगा. वक्त के साथ यह सब होता चला जाएगा. चिंता मत करिए.

मुहब्बत पर सेक्स का कब्जा क्यों?

सच्चे प्रेम से खिलवाड़ करना किसी बड़े अपराध से कम नहीं है. प्रेम मनुष्य को अपने अस्तित्व का वास्तविक बोध करवाता है. प्रेम की शक्ति इंसान में उत्साह पैदा करती है. प्रेमरस में डूबी प्रार्थना ही मनुष्य को मानवता के निकट लाती है.

मुहब्बत के अस्तित्व पर सेक्स का कब्जा

आज प्रेम के मानदंड तेजी से बदल रहे हैं. त्याग, बलिदान, निश्छलता और आदर्श में खुलेआम सेक्स शामिल हो गया है. प्रेम की आड़ में धोखा दिए जाने वाले उदाहरणों की शृंखला छोटी नहीं है और शायद इसी की जिम्मेदारी बदलते सामाजिक मूल्यों और देरी से विवाह, सच को स्वीकारने पर डाली जा सकती है. प्रेम को यथार्थ पर आंका जा रहा है. शायद इसी कारण प्रेम का कोरा भावपक्ष अस्त हो रहा है यानी प्रेम की नदी सूख रही है और सेक्स की चाहत से जलराशि बढ़ रही है.

विकृत मानसिकता व संस्कृति

आज के मल्टी चैनल युग में टीवी और फिल्मों ने जानकारी नहीं मनोरंजन ही परोसा है. समाज द्वारा किसी भी रूप में भावनाओं का आदर नहीं किया जाता. प्रेम का मधुर एहसास तो कुछ सप्ताह तक चलता है. अब तन के उपभोग की अपेक्षा है.

क्षणिक होता मुहब्बत का जज्बा

प्रेम अब सड़क, टाकीज, रेस्तरां और बागबगीचों का चटपटा मसाला बन गया है. वर्तमान प्रेम क्षणिक हो चला है, वह क्षणभर दिल में तूफान ला देता है और अगले ही पल बिलकुल खामोश हो जाता है. युवा आज इसी क्षणभर के प्रेम की प्रथा में जी रहे हैं. एक शोध के अनुसार, 86% युवाओं की महिला मित्र हैं, 92% युवक ब्लू फिल्म देखते हैं, तो 62% युवक और 38% युवतियों ने विवाहपूर्व शारीरिक संबंध स्थापित किए हैं.

यही है मुहब्बत की हकीकत

एक नई तहजीब भी इन युवाओं में गहराई से पैठ कर रही है, वह है डेटिंग यानी युवकयुवतियों का एकांत मिलन. शोध के अनुसार, 93% युवकयुवतियों ने डेटिंग करना स्वीकार किया. इन में से एक बड़ा वर्ग डेटिंग के समय स्पर्श, चुंबन या सहवास करता है. इस शोध का गौरतलब तथ्य यह है कि अधिकांश युवक विवाहपूर्व यौन संबंधों के लिए अपनी मंगेतर को नहीं बल्कि किसी अन्य युवती को चुनते हैं. पहले इस आयु के युवाओं को विवाह बंधन में बांध दिया जाता था और समय आने तक जोड़ा दोचार बच्चों का पिता बन चुका होता था.

अमीरी की चकाचौंध में मदहोश प्रेमी

मृदुला और मनमोहन का प्रेम कालेज में चर्चा का विषय था. दोनों हर जगह हमेशा साथसाथ ही दिखाई देते थे. मनमोहन की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. वह मध्यवर्गीय परिवार से था, लेकिन मृदुला के सामने खुद को थोड़ा बढ़ाचढ़ा कर दिखाने की कोशिश में रहता था. वह मृदुला को अपने दोस्त की अमीरी और वैभव द्वारा प्रभावित करना चाहता था. दूसरी ओर आदेश पर भी अपना रोब गांठना चाहता था कि धनदौलत न होने पर भी वह अपने व्यक्तित्व की बदौलत किसी खूबसूरत युवती से दोस्ती कर सकता है. लेकिन घटनाचक्र ने ऐसा पलटा खाया कि जिस की मनमोहन ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी. उस की तुलना में अत्यंत साधारण चेहरेमुहरे वाला आदेश अपनी अमीरी की चकाचौंध से मृदुला के प्यार को लूट कर चला गया.

मनमोहन ने जब कुछ दिन बाद अपनी आंखों से मृदुला को आदेश के साथ उस की गाड़ी से जाते देखा तो वह सोच में पड़ गया कि क्या यह वही मृदुला है, जो कभी उस की परछाईं बन उस के साथ चलती थी. उसे अपनी बचकानी हरकत पर भी गुस्सा आ रहा था कि उस ने मृदुला और आदेश को क्यों मिलवाया. कालेज में मनमोहन की मित्रमंडली के फिकरों ने उस की कुंठा और भी बढ़ा दी.

प्रेम संबंधों में पैसे का महत्त्व

प्रेम संबंधों के बीच पैसे की महत्ता होती है. दोस्ती का हाथ बढ़ाने से पहले युवक की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर निर्णय लेना चाहिए. प्रेमी का यह भय सही है कि यदि वह अपनी प्रेमिका को महंगे उपहार नहीं देगा तो वह उसे छोड़ कर चली जाएगी. कोई भी युवती अपने प्रेमी को ठुकरा कर एक ऐसा नया रिश्ता स्थापित कर सकती है, जिस का आधार स्वाभाविक प्यार न हो कर केवल घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने की चाह हो. युवकों को पैसे के अनुभव के बावजूद अपनी प्रेमिकाओं और महिला मित्रों को प्रभावित करने के लिए हैसियत से ज्यादा खर्च करना होगा.

प्रेम में पैसे का प्रदर्शन, बचकानी हरकत

छात्रा अरुणा का विचार है कि अधिकतर युवक इस गलतफहमी का शिकार होते हैं कि पैसे से युवती को आकर्षित किया जा सकता है. यही कारण है कि ये लोग कमीज के बटन खोल कर अपनी सोने की चेन का प्रदर्शन करते हैं. सड़कों, पान की दुकानों या गलियों में खड़े हो कर मोबाइल पर ऊंची आवाज में बात करते हैं या गाड़ी में स्टीरियो इतना तेज बजाते हैं कि राह चलते लोग उन्हें देखें.

हैसियत की झूठी तसवीर पेश करना घातक

अरुणा कहती है कि कुछ लोग प्रेमिका से आर्थिक स्थिति छिपाते हैं तथा अपनी आमदनी, वास्तविक आय से अधिक दिखाने के लिए अनेक हथकंडे अपनाते हैं. इसी संबंध में उन्होंने अपने एक रिश्तेदार का जिक्र किया जो एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे. विवाह के तुरंत बाद उन्होंने पत्नी को टैक्सी में घुमाने, उस के लिए ज्वैलरी खरीदने तथा उसे खुश रखने के लिए इस कदर पैसा उड़ाया कि वे कर्ज में डूब गए.

कर्ज चुकाने के लिए जब उन्होंने कंपनी से पैसे का गबन किया तो फिर पकड़े गए. परिणामस्वरूप अच्छीखासी नौकरी चली गई. इतना ही नहीं, पत्नी भी उन की ऐसी स्थिति देख कर अपने मायके लौट गई. अगर शुरू से ही वह चादर देख कर पैर फैलाते, तो यह नौबत न आती.

समय के साथ बदलती मान्यताएं

मीनाक्षी भल्ला जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, का कहना है कि प्यार में प्रेमीप्रेमिका दोनों ही जहां एकदूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने की भावना रखते हैं, वहीं अपने साथी से कुछ अपेक्षाएं भी रखते हैं.

व्यापार बनता आज का प्रेम

इस प्रकार के रवैए ने प्यार को एक प्रकार का व्यापार बना दिया है. जितना पैसा लगाओ, उतना लाभ कमाओ. कुछ मित्रों का अनुभव तो यह है कि जो काम प्यार का अभिनय कर के तथा झूठी भावुकता दिखा कर साल भर में भी नहीं होता, वही काम पैसे के दम पर हफ्ते भर में हो सकता है. अगर पैसे वाला न हो तो युवती अपना तन देने को तैयार ही नहीं होती.

नोटों की ऐसी कोई बौछार कब उन के लिए मछली का कांटा बन जाए, पता नहीं चलेगा. ऐसी आजाद खयाल या बिंदास युवतियों का यह दृष्टिकोण कि सच्चे आशिक आज कहां मिलते हैं, इसलिए जो भी युवक मौजमस्ती और घूमनेफिरने का खर्च उठा सके, आराम से बांहों में समय बिताने के लिए जगह का इंतजाम कर सके, उसे अपना प्रेमी बना लो.

एकतरफा नहीं, दोनों की मंजूरी से Enjoy करें सेक्स

पार्टनर के साथ संबंध बनाना एक सुखद अनुभूति प्रदान करता है. लेकिन इसमें आनंद के लिए शारीरिक जुड़ाव के साथसाथ भावनात्मक लगाव होना भी बहुत जरुरी होता है तभी इसका जी भरकर मज़ा लिया जा सकता है. लेकिन कई बार पार्टनर को सेक्स के दौरान इतना अधिक दर्द महसूस होता है कि वे सेक्स से कतराने लगती है और यह पल उसके लिए खुशी देने के बजाए दर्द देने वाला एहसास बनकर रह जाता है. ऐसे में अगर आप इस पल का बिना किसी रूकावट आनंद लेना चाहते हैं तो अपनाएं ये टिप्स.

1. लुब्रीकेंट से लें मजा

प्लेज़र के लिए कुछ भी करने से शर्माए नहीं बल्कि वो सब करें जिससे दोनों को मज़ा आए और आप उस पल को याद कर पूरा दिन खुद को फ्रेश फील कर सकें. जैसे आप लुब्रीकेंट का इस्तेमाल करें. ये आपको जेल फौर्म, सिलिकौन फौर्म या ऑयल बेस्ड फौर्म में मिल जाएगा. इसे सेक्स के दौरान महिला व पुरुष दोनों इस्तेमाल कर सकते है. इसके इस्तेमाल से पेनिटेशन के दौरान वेजिना सेक्स के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है. क्योंकि इससे खिंचाव व इरिटेशन जो कम होती है. कई महिलाओं को सेक्स के दौरान यह समस्या आती है कि उनकी वेजिना ड्राई हो जाती है. ऐसा अक्सर एस्ट्रोजन लेवल के कम होने के कारण होता है.

2. दोनों का मूड होना जरूरी

सेक्स का आनंद तभी भरपूर लिया जा सकता है जब दोनों की मरज़ी हो वरना सेक्स एकतरफा बनकर रह जाता है. इसके लिए जब आप पार्टनर के करीब जाएं तो उसकी इच्छा व मूड जानें. अगर लगे कि मूड सेक्स के अनुकूल है तो सेक्स आपको वो मज़ा दे देगा जिसकी आपको इच्छा थी. यकीन मानिये ये अनुभूति आपको दर्द का अनुभव भी नहीं होने देगी.

3. माहौल हो अनुकूल

शादी के बाद कपल हनीमून पर बेहतर जगह व माहौल में एकदूसरे के करीब आने के साथ एकदूसरे को जानने की कोशिश करते हैं और उनके ये दिन उनकी ज़िन्दगी के यादगार पल बन जाते हैं. ऐसे में जब भी आप पार्टनर के साथ संबंध बनाएं और उसे यादगार बनाना चाहे तो ध्यान रखें कि कमरे का माहौल खुशनुमा व सैक्स के अनुकूल हो. इससे पार्टनर दिल से उस पल को एन्जॉय कर पाएगा. और यह सभी जानते हैं कि जो चीज़ दिल से महसूस होती है उसमें दर्द की नहीं बल्कि प्यार की अनुभूति होती है.

4. करें प्यार से शुरुआत

सेक्स के लिए लुब्रिकेशन बहुत जऱूरी होता है और इसके लिए पहले पार्टनर के साथ आप शारीरिक जुड़ाव बनाएं. जैसे उसके हाथपैरों पर स्पर्श आदि करें . इससे पार्टनर सेक्स के लिए तैयार हो जाता है और फिर पार्टनर के साथ सेक्स का जो मज़ा आता है उसका कहना ही क्या.

5. प्यारप्यारी बातों से लाएं करीब

जब भी आपका सेक्स का मूड हो तो अपने पार्टनर से प्यार भरी बातें करें. जैसे तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो, तुम्हारे हाथ कितने सौफ्ट हैं , तुम्हे तो आज जी भरकर देखने को दिल कर रहा है. आपकी ऐसे बातें न चाहते हुए भी उसे सेक्स करने के लिए मजबूर कर देगी और वे खुद ब खुद आपके करीब आने को मज़बूर हो जाएगी. आप भी तो यही चाहते है न.

चैटिंग से सैक्सटिंग तक काम आएंगे ये इमोजी

सैक्ंिस्टग का अपना मजा होता है. ऊपर से इमोजी इसे दोगुना कर देते हैं पर तभी जब अपने इमोशन के लिए सही इमोजी का यूज करना आता हो. जानें ऐसे ही इमोजी के बारे में. कहते हैं परफैक्ट पिक्चर वही है जो आप के हजारों शब्दों को बयां कर दे.

सोशल मीडिया ने कम्युनिकेशन के तमाम रास्ते खोले हैं. अब गलीमहल्ले के दायरों से दूर सोशल मीडिया पर प्यार के कई रास्ते खुल गए हैं. इन्हीं पर चलते हुए लव रिलेशनशिप बने हैं, पके हैं और कुछ तनातनी के बाद टूट भी गए हैं. रिलेशनशिप के बनने और टूटने के बीच एक समय ऐसा भी होता है जब प्यार सातवें आसमान पर रहता है.

चांद सा मुखड़ा, सोलहसत्रह सितारे तोड़ने के वादे के बाद जिस्म की खुशबू और गरमी के एहसास की इच्छा करती है, यानी इंटिमेसी हाई रहती है.  हर बात डबल मीनिंग सी महसूस होती है, बात पैरों की पायल और हाथ के कंगन से ऊपर बढ़ जाने की होती है. इन बातों में जिस्म के उतारचढ़ाव का जिक्र होने लगता है, एक हद पार कर जाने का मन करने लगता है, यानी सैक्ंिस्टग करने का मन करता है. सैक्ंिस्टग यानी ऐसी चैटिंग जिस में सैक्स टौक हो.  पर समस्या यह है कि सोशल मीडिया पर चैट करते हुए अपनी बातों को कैसे सामने रखा जाए कि वल्गर भी न लगे और बात इजिली कन्वे हो जाए, वह भी बिना लागलपेट के.

अच्छी बात यह है कि आज चैटिंग करते हुए तमाम सोशल मीडिया प्लेटफौर्म्स ऐसे ‘इमोजी’ के औप्शंस साथ में देते हैं जिस से आप अपने इमोशन को दिखा सकते हैं. गूगल वैब के अनुसार, ‘इमोजी’ का मतलब एक छोटी डिजिटल छवि या आइकन, जिस का यूज किसी इमोशन को व्यक्त करने के लिए किया जाता है. ‘इमोजी’ शब्द जापानी भाषा से आया है. जैपनीज में ‘इ’ का अर्थ होता है ‘चित्र’ और ‘मोजी’ का अर्थ होता है वर्ड. व्हाट्सऐप में देखेंगे तो चैट करते हुए यह बाईं तरफ होता है.

आजकल इसे अपडेट कर लिया गया है तो साथ में जीआईएफ इमेज का भी औप्शन दिखाई देता है. वहीं, अगर इंस्टाग्राम की बात करें तो यह मैसेज करते हुए दाईं तरफ स्पीकर व पिक्चर की साइड में होता है. यहां इमोजी पहले से एडवांस हो गए हैं. अब स्टीकर इमोजी भी देखने को मिल जाते हैं. पर खास बात यह है कि हर बात को एक्सप्रैस करने का एक तरीका होता है.

आप अगर अपने पार्टनर से सैक्सटिंग कर रहे हैं तो सही इमोजी भेजना जरूरी है वरना हीट एंड हौट कन्वर्सेशन में इमोशन दबे रह जाते हैं. मस्क्ल्युलिन इमोजी सैक्सटिंग कपल के बीच प्राइवेट कन्वर्सेशन होती है. बहुत बार चैट करते हुए इमोजीबौक्स में दिखाए गए इमोजी समझ से बाहर हो सकते हैं कि इन का काम क्या है. लेकिन यदि कपल अच्छे मूड में हैं तो कुछ इमोजी हैं जिन का इस्तेमाल वे अपने कन्वर्सेशन में कर सकते हैं.

मेल पेनिस के रिप्रेजेंटेशन करने के लिए किसी भी लंबे, फौलिक साइज वाले इमोजी का यूज किया जा सकता है. इस के लिए वे चीजें भी यूज की जा सकती हैं जो खाने की होती हैं. जैसे, बैगन, हौट डौग, केला, ब्रैड का लंबा टुकड़ा, गाजर, मक्का, सांप, मुरगा. फिमाइन इमोजी चैट करते हुए ऐसी कई इमोजी हैं जो इनडायरैक्ट फीमेल जेनेटल को रिप्रेजेंट करती हैं. इन सब का इस्तेमाल वैसे तो किसी भी तरह से किया जा सकता है पर बात जब सैक्ंिस्टग की आती है तो ये इमोशन को सीधे कन्वे कर देते हैं. जैसे ट्यूलिप, पीस सिंबल, टाको, शहद का पौट, सुशी, कुकीज, बिल्ली.

अन्य हिस्सों को ले कर शरीर के दूसरे हिस्सों के लिए अधिकांश ऐसी ढेर सारी इमोजी हैं जो होती तो अलग हैं लेकिन उन्हें सैक्ंिस्टग करते हुए बराबर यूज किया जा सकता है. जो कपल के रोमांच को बढ़ाने का ही काम करते हैं, जैसे आड़ू से ले कर नाशपाती और सेब तक के आकारों का यूज किया जा सकता है. जैसे पीच, सेब, नाशपाती, चेरी, ओके सिंबल, डोनट. प्ले बौल एमोजी बहुत सारी बातें ऐसी होती हैं जिन पर शुरुआत करते हैं तो हिचकिचाहट हो सकती है.

ऐसे में सिंबल का यूज किया जा सकता है जिस से बात कन्वे भी हो जाए और सामने पार्टनर को आक्वर्ड भी न लगे. जैसे, ब्रैस्ट के बारे में बात करते हुए ऐसे सिंबल के बारे जिक्र किया जा सकता है जिस से इमोशन समझ आ जाए. जैसे चेरीज, 2 तरबूजों का जोड़ा, शौकर बौल, बास्केट बौल. एक्सप्लोसिव इमोजी, दे सेम फील जब क्लाइमैक्स की बात आती है तो हिंदी में ऐसे वर्ड नहीं हैं जो सही हों और कहते हुए ठीक लगें.

इस के लिए ऐसे इमोजी का यूज किया जा सकता है जो चैट में भेजते हुए आप के इमोशन को बयां कर सकें, जैसे, फायरवर्क्स, एक्सप्लोजन, बौम्ब, रौकेट शिप, पोपिंग शैंपेन बौटल, माइंड ब्लोइंग फेस, पानी की बूंदें. अन्य इमोजी कुछ ऐसी इमोजी हैं जो सैक्ंिस्टग करते हुए जरूर काम का सकती हैं. इन के मीनिंग तभी सटीक बैठेंगे जब सही जगह इस्तेमाल किए जाएं. जैसे जीभ, लौलीपौप, स्पैकिंग, शौवर सैक्स, रैसिप्रोकल ओरल सैक्स.

डिजिटल ऐरा में डेटिंग ऐप्स एंड रिलेशनशिप

भारतीय युवाओं के लिए डेटिंग ऐप्स किसी डेटिंग क्रांति से कम नहीं हैं. यहां अपने लिए पार्टनर आसानी से ढूंढ़े जा सकते हैं. ये ऐप्स युवाओं के लिए कन्वीनिएंट हैं पर तभी जब सिर्फ पार्टनर ढूंढ़ने का माध्यम समझा जाए, सही पार्टनर ढूंढ़ना आप की अंडरस्टैंडिंग पर निर्भर करेगा. वक्त बदल रहा है, दुनिया बदल रही है और उस के साथ बदल रहे हैं प्यार ढूढ़ने के तरीके. इंटरनैट और सोशल मीडिया के इस दौर में यंगस्टर्स अपने सराउंडिंग से कटते जा रहे हैं.

घर की चारदीवारी से बाहर निकलना बड़ा एक्सपैंसिव हो गया है. ऐसे में उन के लिए गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड ढूंढ़ना मुश्किल होता जा रहा है. रिश्तों की तलाश के दायरे बढ़ते जा रहे हैं. गलीमहल्ले से निकल कर यंगस्टर्स दुनियाभर में अपने कुछ वक्त या लाइफटाइम के लिए पार्टनर की तलाश कर रहे हैं.

यही वजह है कि यंगस्टर्स अब सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स का सहारा ले रहे हैं. यह एक अच्छा माध्यम है दुनियाभर के लोगों से जुड़ने का. टिंडर, बंबल, मिंगल और हिंगे जैसे डेटिंग ऐप्स प्यार और रोमांस के पारंपरिक तरीके से हट कर नए मौके दे रहे हैं. भारत में डेटिंग ऐप्स पिछले कुछ सालों से ज्यादा ऐक्टिव हुए हैं, खासकर कोरोना के वक्त से जब लोगों का घर से बाहर निकलना नामुमकिन था.

उस वक्त यंगस्टर्स अपनी बोरियत दूर करने के लिए लोगों को औनलाइन तलाश कर रहे थे. कोरोना महामारी ने यंगस्टर्स की आदतों को भी हमेशा के लिए बदल दिया है. अधिक से अधिक भारतीय युवा, यहां तक कि छोटे शहरोंकसबों के भी, प्यार और साथ पाने के लिए डेटिंग ऐप्स पर भरोसा कर रहे हैं. एकदूसरे को जानने के लिए पर्सनली मिलने के बजाय वीडियो कौल को चूज कर रहे हैं और फिर लोगों से मिल रहे हैं.

जैसेजैसे भारत में डेटिंग कल्चर बढ़ा, वैसेवैसे ही डेटिंग ऐप्स की लोकप्रियता भी बढ़ी. लोग नए मौके तलाश रहे हैं. वे स्कूलकालेजों से निकल कर नैशनल और इंटरनैशनली डेटिंग के अनुभव तलाश रहे हैं. सोशल ऐक्सेप्टेंस से बदलता नजरिया डेटिंग ऐप्स अब भारतीय सोसाइटी का एक हिस्सा बन गए हैं.

यंगस्टर्स, एडल्ट, नौकरीपेशा भी कैजुअल डेटिंग या लाइफपार्टनर ढूंढ़ने के लिए इन प्लेटफौर्मों का इस्तेमाल कर रहे हैं और वे कामयाब भी हो रहे हैं. अपने मनपसंद पार्टनर, जिन से उन के विचार मिलते हों, पाने के लिए वे इन प्लेटफौर्मों का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं. एक वक्त था जब आप के मम्मीपापा जिद पर अड़ जाते थे कि आप का लाइफपार्टनर वे ही ढूंढ़ेंगे.

बदलते वक्त के साथ अब मांबाप इस की जिम्मेदारी बच्चों पर छोड़ने लगे हैं, इस के लिए वे खुद यंगस्टर्स को डायरैक्टइनडायरैक्ट डेटिंग ऐप्स का हिंट कर देते हैं. इस से यह दिखता है कि सोसाइटी भी इसे ऐक्सैप्ट करने लगी है. टिंडर ने जिस तरह डेटिंग ऐप्स की एक नकारात्मक छवि सोसाइटी में तैयार की थी, अब वह बदल गई है. टिंडर वैस्टर्न डेटिंग तौरतरीकों के लिए ज्यादातर फेमस था.

विदेश में इस ने खूब कामयाबी पाई. हालांकि इस का इस्तेमाल करने वाले भारत में भी रहे. इस में ओवरएक्सपोजर और वल्गैरिटी भी थी. लेकिन भारत में आने वाले बंबल, हिंगे, ट्रूली मैडली और मिंगल जैसे ऐप्स लगातार इस छवि को सुधारने में लगे हैं और डेटिंग ऐप्स को एक मींटिगरूम बनाने की कोशिश कर रहे हैं जिस में ये कामयाब भी रहे हैं.

क्यों इस्तेमाल करें डेटिंग ऐप्स अब बात आती है कि क्यो करें डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल? भारत में कितने ही लोग अब औनलाइन डेटिंग ऐप्स की दुनिया में कदम रख रहे हैं. 27 साल की सुधा मिंगल पर ऐक्टिव है, वह कहती है कि असल जिंदगी में आप के पास औप्शन कम होते हैं. आजकल सब की अपनीअपनी प्रायोरिटी होती है. अपनीअपनी पार्टनर प्रेफरैंस होती है जिसे ढूंढ़ पाना आसान नहीं होता. इसलिए डेटिंग ऐप्स का सहारा लेना कन्वीनिएंट लगता है.

औनलाइन डेटिंग ऐप्स आप को कामयाबी मिलने की गारंटी नहीं देता क्योंकि ऐप्स सिर्फ एक मुलाकात का जरिया है. इस के अलावा कुछ नहीं. वैसे भी, यह पूरी तरह आप पर ही निर्भर करता है. भारत में इस का विरोध करने वालों की भी कमी नहीं है. उन के अनुसार डेटिंग का मतलब सैक्स या शादी. अकसर इसीलिए इस का विरोध होता आया है लेकिन वक्त के साथसाथ ये धारणाएं भी बदल रही हैं और भारत में डेटिंग ऐप्स के यूजर्स लगातार बढ़ रहे हैं.

भारत में डेटिंग ऐप यूजर भारत दुनिया का 5वां सब से तेजी से बढ़ने वाला डेटिंग ऐप बाजार है. यहां इसे इस्तेमाल करने वाले हर साल लाखों खर्च करते हैं, जो कि वैश्विक औसत 12 फीसदी की सालदरसाल वृद्धि से कहीं अधिक है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंजूमर ने डेटिंग और फ्रैंडशिप ऐप्स पर दिसंबर 2022 तक 9.9 मिलियन डौलर खर्च किए.

यह 2021 की तुलना में दोगुने से भी अधिक था. यंगस्टर्स ज्यादा स्वाइप या परफैक्ट मैच पाने के लिए और अपनी प्रोफाइल की रीच बढ़ाने के लिए इन ऐप्स की सर्विस खरीदने के लिए पैसे खर्च करते हैं. यह नंबर लगातार बढ़ता जा रहा है और भविष्य में इस के और बढ़ने की पौसिबिलिटी है. इस्टेटिस्टा डौट कौम ने भारत में औनलाइन डेटिंग का कारोबार 2021 में 454 मिलियन डौलर से बढ़ कर 2024 तक 783 मिलियन डौलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई थी.

फिलहाल डेटिंग ऐप्स भारत की कुल आबादी के 2.2 फीसदी तक पहुंचते हैं, जिस के 2024 तक 3.6 फीसदी होने का अनुमान है. 5 वर्षों पहले तक लगभग 20 मिलियन भारतीय डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे और अब यह आंकड़ा 293 फीसदी की भारी वृद्धि के साथ 2023 में 82.4 मिलियन तक पहुंच गया. डेटिंग ऐप्स के इस्तेमाल में वृद्धि विशेष रूप से मैट्रो शहरों के बाहर काफी ज्यादा हो रही है जहां अब टिंडर, बंबल और ट्रूली मैडली जैसे डेटिंग ऐप्स के 70 फीसदी उपयोगकर्ता हैं और यह नंबर लगातार बढ़ रहा है. सावधानी भी जरूरी आज देश में डेटिंग को ले कर माहौल बदल रहा है.

डेटिंग का डिजिटलाइजेशन होने की वजह से उस में धोखाधड़ी भी उतनी ही व्यापक है जितनी कि सामान्य दुनिया में. इसलिए सावधानी के साथ इस का इस्तेमाल करते हुए बदलती दुनिया के साथ तालमेल बैठाना चाहिए. भारतीय युवाओं के लिए डेटिंग ऐप्स किसी डेटिंग क्रांति से कम नहीं हैं जहां लड़केलड़कियों को एकसाथ दिख भर जाने से सवाल खड़े होते हैं. ऐसे में इन ऐप्स का इस्तेमाल युवा पीढ़ी को बड़ा कन्वीनिएंट लगता है, लेकिन हां. सावधान रहने की जरूरत है.

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