क्या एक्सरसाइज दे सकती है आपको चरम सुख ?

आप महिला हो या पुरुष अगर आपको बिस्तर में बोरियत होने लगती है तो इसका मतलब है आप जिम में, खेल के मैदान में या व्यायाम करने में अधिक समय नहीं गुजार रहे हैं. ऑनलाइन प्रकाशित एक महत्वपूर्ण शोध आलेख ‘एन इन्वेस्टिगेशन ऑफ़ द रिलेशनशिप बेटवीन फिजिकल फिटनेस, सेल्फ-कांसेप्ट एंड सेक्सुअल फंक्शनिंग’ के मुताबिक कसरत के जरिए आप अपना सेक्स जीवन बेहतर बना सकते हैं. कसरत से होता यह है कि आपके जिस्म के निचले हिस्से में खून का संचार बढ़ जाता है और आप मूड में आ जाते हैं. साथ ही फिट और टोंडअप होने की वजह से आपका प्रेम सत्र खासे लम्बे समय तक के लिए चलता है और नयी व दिलचस्प चाहतों के लिए आपका बदन लचीला रहता है.

व्यायाम और उसके बाद रक्त गुप्तांगों में प्रवाह करने लगता है. इससे जब आप मूड में आते हैं तो सेंसेशन बढ़ जाता है. इस तथ्य को साबित करने के लिए टेक्सास विश्वविद्यालय की एक रिसर्च टीम ने एक प्रयोग किया. उसने 18 से 34 वर्ष की महिलाओं को एक्सरेटिड फिल्म दो बार दिखायी. पहली बार फिल्म देखने से पहले महिलाओं ने लगभग बीस मिनट तक बहुत मेहनत से साइकिलिंग की थी. लेकिन दूसरी बार कोई कसरत नहीं करायी गयी थी. शोधकर्ताओं ने दोनों स्थिति में उनकी उत्तेजना स्तर को मापा एक ऐसे यंत्र से जो गुप्तांगों में खून के संचार को नाप सकता है. उन्होंने पाया कि व्यायाम करने के बाद उत्तेजना स्तर 169 प्रतिशत बढ़ जाता है. इसकी वजह यह है कि व्यायाम से ब्लड प्रेशर बेहतर हो जाता है.

कसरत सेक्स की इच्छा को भी बढ़ा देती है क्योंकि इससे इंड्रोफिंस नामक दिमागी रसायन सक्रिय हो जाते हैं. इन रसायनों की वजह से ही आप सेक्स के दौरान अच्छा महसूस करते हैं. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो महिलाएं नियमित कसरत करती हैं, वह संसर्ग से अधिक आनंदित होती हैं, उन महिलाओं की तुलना में जो व्यायाम को बोझ समझती हैं और आलसी होती हैं. कसरत से पुरुषों को महिलाओं से भी ज्यादा फायदा होता है. अध्ययन से मालूम हुआ कि अधेड़ उम्र के जो पुरुष व्यायाम नहीं करते थे, जब उन्हें एक-एक घंटे के लिए सप्ताह में तीन बार व्यायाम कराया गया तो उनका सेक्स जीवन बेहतर हो गया और वे अधिक संतुष्ट होने लगे. 20 से 30 मिनट तक रोजाना नियमित कसरत करने वालों को उन लोगों की तुलना में जो बिल्कुल व्यायाम नहीं करते, यौन शिथिलता की भी समस्या नहीं आती लेकिन ध्यान रहे कि अधिक कसरत भी अच्छी बात नहीं है; क्योंकि तब बेडरूम की हरकतों के लिए ऊर्जा ही नहीं बच पाती.

कसरत करने से आपका जिस्म चुस्त-दुरुस्त हो जाता है और आपमें अधिक आत्मविश्वास आ जाता है. आप नये प्रयोग करने में आराम महसूस करते हैं लेकिन दो-चार बार हाथ-पैरों को हिलाने से कसरत नहीं हो जाती. परिणाम हासिल करने के लिए कसरत करने के भी तरीके हैं. तैराकी इस सिलसिले में सबसे अच्छी कसरत है क्योंकि इससे आपका फिटनेस स्तर बढ़ जाता है और लव मेकिंग स्टेमिना भी. बिना उच्च प्रभाव के यह ऐरोबिकली तीव्र है. जो सेक्स के लिए आवश्यक मांसपेशियां हैं जैसे पेट, हाथ, हैमस्ट्रिंग आदि से वह मजबूत हो जाती हैं. दिल मजबूत हो जाता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर. तैराकी में भी ब्रेस्ट स्ट्रोक अधिक फायदेमंद है क्योंकि फ्राग किक से जांघों के अंदर की मांसपेशियां तगड़ी हो जाती हैं और आप अपने आपको नियंत्रित करना सीख जाते हैं.

अच्छे सेक्स के लिए जिस्म के निचले हिस्से को जिम में टोनिंग क्लासेस के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है. इससे वह सब मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं जो सेक्स के दौरान हरकत में आती हैं. इसे आज की भाषा में लेग, बम एंड टम कहते हैं और इससे कमर का निचला हिस्सा ताकतवर हो जाता है और मसल स्ट्रेन से आपको बचाता है. पाइलेट क्लासेस से पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियां ताकतवर हो जाती हैं और महिलाओं को चरम सुख हासिल करने में मदद करती हैं. इससे नये प्रयोग किये जा सकते हैं बिना टांगों और जांघों में क्रैम्प लाये.

दौड़ना भी अच्छी कसरत है. यह दिल को मजबूत, टांगों को टोन करता है और सेल्यूलाइट को खत्म कर देता है. दौड़ने से ऊर्जा और स्टेमिना बढ़ता है साथ ही बर्दाश्त करने के स्तर में इजाफा होता है और सांस पर नियंत्रण. अगर सेक्स के दौरान आप अपने सांस पर एकाग्रता रखें तो आप अपनी उत्तेजना के स्तर से अधिक परिचित रहेंगे, जिससे आप चरम आनंद को नियंत्रित कर सकते हैं. यह धारणा गलत है कि दौड़ने से सेक्स के लिए ऊर्जा खत्म हो जाती है. एथलीटों के अनुभव सुनें, तो वह बताते हैं कि दौड़ने ने उन्हें बिस्तर में अधिक सक्रिय बना दिया है.

आप किसी भी डांसर को देख लें, उसमें स्टेमिना भी होगा और उसका जिस्म भी टोंडअप होगा. बैले डांस तो अल्टीमेट वर्कआउट है. आपके ताकतवर हाथ-पैर कमर के निचले हिस्से पर पड़ने वाले दबाव को कम कर देते हैं जिससे आप बेडरूम में अधिक नियंत्रण प्रदर्शित कर सकते हैं. अधिक फायदा उठाने के लिए किसी डांस क्लास के सदस्य बन जाओ और फिर जीवन का आनंद उठाओ.

मेरी छाती लड़कियों की तरह फूल गई है, इलाज बताएं?

सवाल-

मैं एक 22 साल का लड़का हूं. मेरी छाती लड़कियों की तरह फूल गई है. इलाज बताएं?

जवाब-

आप गायनेकोमैस्टिया से पीड़ित हैं जो आप की उम्र के लड़कों में सामान्य बात है. इसे लिपोसक्शन और सर्जरी कर ऐक्स्ट्रा फैट और ग्लैंड्सयूलर टिशू को निकाल कर सर्जिकल तरीके से ठीक किया जा सकता है. यह सर्जरी लोकल या जनरल एनेस्थैटिक में की जा सकती है. इस के लिए आप को एक प्लास्टिक सर्जन से सलाह लेनी होगी.

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पूरे बदन की साफ-सफाई के प्रति लापरवाही न बरतने वाले मर्द भी अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई पर खास ध्यान नहीं देते हैं, जिस की वजह से वे कई तरह के खतरनाक इंफैक्शन के शिकार हो जाते हैं. आइए जानते हैं कि प्राइवेट पार्ट की साफसफाई कैसे की जाती है और उस से होने वाले फायदों के बारे में :

बालों की छंटाई करें

प्राइवेट पार्ट के आसपास के अनचाहे बालों की समयसमय पर सफाई करनी चाहिए, वरना बाल बड़े हो जाते हैं. इस की वजह से ज्यादा गरमी पैदा होती है और इन बालों की वजह से ज्यादा पसीना निकलने लगता है. बदबू भी आने लगती है. बैक्टीरिया पैदा होने से इंफैक्शन फैल जाता है. इस वजह से चमड़ी खराब हो जाती है. खुजली, दाद वगैरह की समस्या पैदा हो जाती है. देखा गया है कि अनचाहे बाल लंबे व घने हो जाने से उन में जुएं भी हो जाती हैं, इसलिए उन्हें समयसमय पर साफ करते रहना चाहिए. प्राइवेट पार्ट के अनचाहे बालों की सफाई के लिए कैंची से छंटाई करना अच्छा उपाय है. इस के अलावा ब्लेड  या हेयर रिमूवर क्रीम का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

सावधानी

प्राइवेट पार्ट के अनचाहे बालों की सफाई जल्दबाजी, हड़बड़ी या डर कर न करें. छंटाई के लिए छोटी धारदार कैंची का इस्तेमाल करें. अनचाहे बालों को अगर रेजर से साफ करना चाहते हैं, तो नए ब्लेड का इस्तेमाल करें. पहले इस्तेमाल किए ब्लेड से बाल ठीक तरह से नहीं कटते हैं. उलटा ब्लेड कभी न चलाएं, इस से चमड़ी पर फोड़ेफुंसी होने का डर रहता है. हेयर रिमूवर क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले एक बार टैस्ट जरूर कर लें. अगर उस से एलर्जी होती है, तो इस्तेमाल न करें.

अंग दिखेगा बड़ा

प्राइवेट पार्ट के एरिया में बाल बड़े हो जाने से अंग उन में छिप जाता है, जिस से उस का आकार छोटा दिखाई देने लगता है. अनचाहे बालों को साफ करने से अंग का आकार बड़ा दिखने लगता है. इसे देख कर आप की पार्टनर ज्यादा मोहित होती है. प्यार के पलों के समय वह ज्यादा सहज महसूस करती है.

सेहतमंद महसूस करेंगे

प्राइवेट पार्ट के एरिया को साफ रखने से अंग सेहतमंद दिखाई देता है. आप भी संतुष्ट महसूस करते हैं, क्योंकि आप निश्चिंत हो जाते हैं कि अब आप को किसी तरह का इंफैक्शन नहीं है.

यह भी करें

अंग की नियमित सफाई करें. अंग के ऊपर की त्वचा को सावधानी के साथ पीछे की ओर ले जाएं. वहां सफेदपीला क्रीमनुमा चीज जमा होती है. यह पूरी तरह से कुदरती होती है. इस की नियमित सफाई न करने से बदबू आने या इंफैक्शन फैलने का डर बना रहता है. रोजाना नहाते समय कुनकुने पानी से इसे साफ करना चाहिए.

पेशाब करने के बाद अंग को अच्छी तरह से हिला कर अंदर रुके पेशाब को जरूर निकाल दें. इसे अपनी आदत में शुमार करें, क्योंकि अंग के अंदर रुका हुआ पेशाब बुढ़ापे में प्रोटैस्ट कैंसर के रूप में सामने आ सकता है. माहिर डाक्टरों का कहना है कि अगर अंग के अंदर का पेशाब अच्छी तरह से निकाल दिया जाए, तो प्रोटैस्ट कैंसर का डर खत्म हो जाता है.

अंडरगारमैंट्स पर ध्यान दें

रोजाना नहाने के तुरंत बाद ही अपने अंडरगारमैंट्स को बदलें. कई दिनों तक इस्तेमाल किए गए अंडरगारमैंट्स पहनने से प्राइवेट पार्ट के एरिया में इंफैक्शन फैलने का डर बढ़ जाता है. दूसरों के अंडरगारमैंट्स, साबुन वगैरह इस्तेमाल न करें. इस से भी इंफैक्शन फैलने का डर रहता है. नहाने के बाद इस एरिया को तौलिए से अच्छी तरह से सुखा लें. हमेशा सूती अंडरगारमैंट्स पहनें. नायलौन के अंडरगारमैंट्स कतई न पहनें, क्योंकि उन में से हवा पास नहीं हो पाती है. इस वजह से प्राइवेट पार्ट के एरिया को भी अच्छी तरह से हवा नहीं मिल पाती है, जिस से कई तरह की बीमारियां पैदा हो सकती हैं.

सेक्स संबंध बनाने के बाद

सेक्स संबंध बनाने के बाद अंग को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए, क्योंकि सेक्स के समय व बाद में इस के अंदर कई तरह के स्राव बनते हैं. इन्हें साफ न करने पर इंफैक्शन हो सकता है. इस एरिया को पानी से साफ करें. सफाई करने के बाद अंग को अच्छी तरह से पोंछ कर सुखा लें.

Summer Special: गरमी में बेहद काम के हैं ये 3 मजेदार सेक्स टिप्स

सोचिए, दिल्ली में किसी की नईनई शादी हुई है और महीना है झुलसती मई का. कपल अभीअभी मनाली की सर्दियों में इश्क के पेंच लड़ा कर वापस लौटा है. हनीमून की मदमाती हवस अभी भी उस के दिलो दिमाग पर छाई हुई है पर दिल्ली का उबलता मौसम कह रहा है मुझ से पंगा मत लेना, पिघला कर रख दूंगा.

पर वह नयानवेला जोड़ा ही क्या जो अपनी सेक्स लाइफ पर मौसम की बेरुखी को हावी होने दे. वह तरहतरह के जतन करता है और दिल्ली में ही मनाली की मीठी सर्दी ले आता है ताकि बैडरूम में मिलन का माहौल बना रहे.

हम भी आप को सेक्स लाइफ को शानदार करने के कुछ टिप्स दे रहे हैं जो गरमी में भी आप को सर्दी का अहसास कराएंगे ताकि आप का प्रेम राग बजता रहे.

कमाल का ठंडा टुकड़ा

कई साल पहले चार्ली शीन और वलेरिया गोलिनो की एक इंगलिश कौमेडी फिल्म ‘हौटशौट’ आई थी जिस के एक सीन में प्यार करने के दौरान जब चार्ली शीन वलेरिया गोलिनो की नाभि पर बर्फ रगड़ता है तो वह उस के बदन की गरमाहट से पानी बुलबुले बन जाता है. यही बर्फ का टुकड़ा आप के फोरप्ले में भी प्यार का तड़का लगा सकता है. एक पंथ दो काज. आजमा कर देखिए, ठंडी बर्फ सेक्स की गरमाहट को यकीनन नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी.

मस्ती का फव्वारा

अब हिंदी फिल्मों की तरह भरी बरसात में आप अपने पार्टनर के साथ खुले में प्यार की पेंगे तो नहीं बढ़ा सकते हैं पर बाथरूम का शौवर आप की हसरतों को सांतवे आसमान पर जरूर ले जा सकता है. सस्ता और टिकाऊ साधन.

शौवर के नीचे आप दोनों तन और मौसम की गरमी से बहुत हद तक  राहत पा सकते हैं. बाथरूम में ही सही ‘टिपटिप बरसा पानी’ आप का सेक्स का मजा दोगुना कर देगा. अगर घर पर कोई नहीं है और घर में आंगन है तो खुले में पानी का फव्वारा और दो जिस्म माहौल को रंगीन और नम बनाने में कसर नहीं छोड़ेंगे.

स्विमिंग पूल बड़ा कूल

यहां मामला थोड़ा सा खर्चीला हो सकता है पर है बड़ा मस्त. किसी होटल में जाइए और अपने प्राइवेट पूल में सेक्स की गहराइयों तक गोते लगाइए. प्यार की भूख मिटाने के बाद अच्छे स्वादिष्ट खाने से पेट भरिए और अपनी जिंदगी की नई पारी की बेहतरीन शुरुआत कीजिए.

मेरे घरवाले मेरी शादी लड़की से कराना चाहते हैं पर मैं एक लड़के से प्यार करता हूं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 25 साल है. मेरे घर वाले एक ऐसी लड़की के साथ मेरी शादी कराना चाहते हैं, जो मुझे पसंद नहीं है. हकीकत तो यह है कि मैं किसी भी लड़की को पसंद नहीं करता हूं, बल्कि एक हमउम्र लड़के के साथ मेरी गहरी दोस्ती है या कह लें कि हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं. घर वालों को मनाने के लिए मैं क्या करूं?

जवाब-

आप घर वालों को साफसाफ बता दें कि आप शादी नहीं कर सकते और क्यों नहीं कर सकते, यह भी बता दें, क्योंकि आप का राज ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रह पाएगा. बताने के बाद का विरोध झेलने के लिए खुद को दिमागी तौर  पर तैयार रखें. पहले आप को नसीहतें मिलेंगी और उस के बाद धौंस.

मुमकिन है कि इस के बाद भी आप नहीं माने, तो आप को घर और समाज से भी निकाला जा सकता है. घर वालों के दबाव में शादी न करें. इस से आप की और जिस लड़की से आप शादी करेंगे, उस की भी जिंदगी बरबाद हो जाएगी. अपने दोस्त के साथ अलग रहने के अलावा आप के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें-  सरस सलिल-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

सेक्स के दौरान क्यों आता है खून? जानें कारण और इलाज

कई महिलाओं को संभोग के बाद रक्त स्त्राव होता है. वैसे तो यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है, लेकिन कुछ मामलों में यह अन्य समस्याओं की ओर भी इशारा करती है. पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से योनि से खून आता है. लेकिन, यह महिलाओं की योनि में सेक्स के समय लगी किसी चोट, संक्रमण व सर्वाइकल कैंसर का भी संकेत करता है. अगर सेक्स के बाद योनि से लगातार खून निकल रहा हो तो इस स्थिति में आपको तुरंत किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.

सेक्स करते समय खून क्यों आता है?

सेक्स के बाद योनि से खून आने की समस्या को चिकित्सा जगत में पोस्टकोइटल ब्लीडिंग (Postcoital bleeding) के नाम से जाना जाता है. यह समस्या किसी भी उम्र की महिला को हो सकती है. जो महिलाएं रजोनिवृत्ति की स्थिति में नहीं है, उनमें इस तरह की समस्या गर्भाशय ग्रीवा के कारण उत्पन्न होती है, जबकि रजोनिवृत्ति से गुजर रही महिलाओं में यह समस्या कई अन्य कारणों से भी होती हैं.

महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर एक चिंता का विषय है. खासकर रजोनिवृत्ति वाली महिलाओं को इसका खतरा अधिक होता है. सेक्स के बाद महिलाओं की योनि से इस कारण भी खून आता है.

इसके अलावा कुछ ऐसे कारण भी हैं, जिनकी वजह से सेक्स के बाद रक्त स्त्राव होता है.

संक्रमण होना कुछ संक्रमण में सूजन व ऊतक भी योनि से खून आने की वजह होते हैं. इसमें निम्न संक्रमण शामिल होते हैं –

श्रोणि में सूजन की बीमारी (Pelvic inflammatory disease)

  • एसटीडी- यौन संचारित रोग
  • गर्भावशय की ग्रीवा में सूजन (Cervicitis)
  • योनि में सूजन (Vaginitis; वैजिनाइटिस)

रजोनिवृत्ति में जेनिटोयुरनेरी सिंड्रोम – यह सिंड्रोम महिलाओं की योनि की सक्रियता को कम करने का इशारा करता है. यह रोग रजोनिवृत्ति के समय व अंडाशय निकालने के कारण होता है. महिलाओं की अधिक उम्र होने पर महवारी बंद हो जाती है और ऐसे उनके शरीर में एस्ट्रोजन के बनने का स्तर कम हो जाता है. एस्ट्रोजन महिलाओं के शरीर में प्रजनन के लिए जिम्मेदार होता है.

महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से कई तरह के रोग उत्पन्न होने लगते हैं. इससे महिलाओं की योनि में कम ल्युब्रिकेशन बनता है. जिससे महिलाओं की योनि में सूखापन व जलन होने लगती है. एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से योनि के लचिलेपन पर भी असर पड़ता है. योनि के ऊतक सिकुड़ जाते हैं. जिसकी वजह से सेक्स के समय दर्द, असहजता व खून आता है.

पोलिप्स (Polyps)

यह एक प्रकार का बैक्टीरिया होता है. इसके होने से कैंसर का खतरा नहीं रहता है. यह महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा व गर्भाशय की अंदरूनी परत में भी हो जाते हैं. यह गोल आकार के होते हैं. इनके सक्रिय होने पर यह ऊतकों में जलन व रक्त वाहिकाओं में ब्लीडिंग की वजह बनते हैं.

जोश में सेक्स करना

जोश के साथ सेक्स करना भी योनि से खून आने का कारण होता है, क्योंकि इस तरह के सेक्स में शारीरिक बल लगाया जाता है जिससे योनि में खरोंच आ जाती है. रजोनिवृत्ति, स्तनपान व योनि में रूखापन होने के कारण भी योनि से खून आता है.

कैंसर

योनि से लगातार खून आना या सेक्स के बाद खून आना सर्वाइकल व योनि के कैंसर का लक्षण होता है. इस तरह के लक्षण पाए जाने वाली कई महिलाओं की जांच में सर्वाइकल कैंसर पाया गया है. इसके अलावा कई मामलों में गर्भाशय के कैंसर को भी पाया गया.

योनि में सूखापन होना

योनि का सूखापन रक्त स्त्राव होने का आम कारण होता है. इसके अलावा भी योनि से खून बहने के निम्न अन्य कारण होते हैं –

  • स्तनपान कराना.
  • बच्चे के जन्म के बाद.
  • अंडाशय को निकालना
  • कई दवाएं, जैसे- सर्दी में ली जाने वाली दवाएं, अस्थमा की दवा, अवसाद को कम करने वाली दवाएं व एस्ट्रोजन को कम करने वाली दवाएं आदि.
  • किमोथेरेपी व रेडीएशन थेरेपी.
  • शारीरिक बल व जोश के साथ सेक्स करना.
  • किसी कैमिकल से योनि को साफ करना.

क्या सेक्स के बाद योनि से खून आना किसी समस्या की ओर संकेत करता है?

अगर आपको सेक्स के बाद खून आ रहा हो तो यह सामान्य स्तिथि होती है. लेकिन इस स्थिति के बारे में सही जानकारी के लिए आपको डॉक्टर से मिलना होगा. अगर आपको पीरियड्स के कुछ समय पहले या बाद के दौरान सेक्स करने के बाद खून आए तो आपको डॉक्टर से इस विषय पर अवश्य परार्मश कर लेना चाहिए. जब तक डॉक्टर की जांच की रिपोर्ट आपको न पता चले तब तक दोबारा सेक्स न करें. कई बार संक्रमण व किसी अन्य गंभीर समस्या के कारण भी संभोग के बाद योनि से खून आने लगता है.

सेक्स के बाद ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से कब मिलना है जरूरी

सेक्स के बाद खून आने के लक्षण इसके कारण के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं. अगर आपको सेक्स के बाद बेहद ही कम रक्त स्त्राव हो रहा हो, तो आपको इस स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है.

इन लक्षणों के दिखाई देने पर डॉक्टर से तुरंत मिलें.

  • योनि में खुजली और जलन,
  • मूत्रत्याग में जलन महसूस होना,
  • संभोग करते समय अधिक दर्द होना,
  • अधिक खून बहना,
  • पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द,
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द,
  • जी मिचलाना और उल्टी आना,
  • योनि से सफेद पानी आना इत्यादि.

संभोग के बाद खून बहने पर कौन से परीक्षण कराएं?

यौन संबंध के बाद खून बहना आमतौर पर योनि के रूखेपन के कारण होता है, लेकिन कई बार यह समस्या गंभीर भी हो सकती है. इसमें डॉक्टर सबसे पहले कैंसर की जांच करते हैं. जिसमें वह आपकी योनि व गर्भाशय ग्रीवा की जांच के लिए पैप स्मीयर (Pap Smear) टेस्ट करते हैं. कैंसर की पहचान होने पर कैंसर विशेषज्ञ के पास आपको भेज दिया जाता है.

यौन संबंध के बाद खून बहने के अतिरिक्त कारणों की जांच निम्न परीक्षण से की जाती है.

  • कोलपोस्कोपी (Coloscope) – इसमें महिलाओं की योनि व गर्भाशय ग्रीवा की जांच की जाती है.
  • ट्रांसवैजाइनल अल्ट्रासाउंड.
  • यूरीन टेस्ट (मूत्र का परीक्षण).
  • खून की जांच.
  • योनि से निकलने वाले सफेद पानी की जांच.

यौन संबंध बनाने के बाद खून आने का इलाज

यौन संबंध बनाने के बाद योनि से खून आने के कारणों के आधार पर इस समस्या का इलाज किया जाता है. जिनमें निम्न प्रमुख हैं –

ल्यूब्रिकेंट्स –

अगर आपकी योनि से खून आने की वजह रूखापन है तो आपको योनि में मॉइश्चराइजर लगना चाहिए. नियमित रूप से मॉइश्चराइजर को योनि की त्वचा पर लगाने से यह योनि की अंदरूनी त्वचा को मॉइश्चराइज करता है. इससे रूखापन खत्म होकर त्वचा में नमीं आने लगती है.

योनि के लिए आने वाले ल्यूब्रिकेंट्स के इस्तेमाल से संभोग के समय त्वचा के घर्षण से छिलने की समस्या कम हो जाती है. पानी युक्त ल्यूब्रिकेंट सेक्स के समय योनि से आने वाले खून को कम कर देता है. तेल युक्त ल्यूब्रिकेंट व कंडोम को साथ में इस्तेमाल करने से कंडोम के कटने या फटने का डर बना रहता है. इसलिए आप पानीयुक्त ल्यूब्रिकेंट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके साथ ही साथ यौन संबंध बनाते समय तेजी या जोश दिखाने की जरूरत नहीं हैं. अगर जोश में महिला को समस्या हो रही है तो आपको तुरंत रूक जाना होगा या इसको आराम से धीरे-धीरे करना होगा.

एस्ट्रोजन थेरेपी –

रजोनिवृत्ति या अंडाशय को बाहर निकलवाने से योनि में रूखापन आने की वजह में आप एस्ट्रोजन थेरेपी को अपना सकती हैं. योनि के लिए आने वाली एस्टोजन क्रीम व अन्य उपादों का इस्तेमाल कर सकती हैं. योनि से खून आने की स्थिति में आप एस्ट्रोजन अंगूठी (रिंग) का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इस लचीली अंगूठी को योनि में अंदर लगाई जाती है. यह सीमित मात्रा में एस्ट्रोजन को करीब 90 दिनों तक स्त्रावित करता है. ओरल हार्मोन थेरेपी में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टीन को बदल दिया जाता है.  इसके लावा भी महिलाओं के लिए कई अन्य विकल्प मौजूद है.

अन्य इलाज –

योनि में सूजन आना रूखेपन व संक्रमण की ओर संकेत करता है. इसके कारण अज्ञात हो सकते हैं. आपके डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली एंटीबॉटिक के कारण भी ऐसा हो सकता है. श्रोणी में दर्द व यौन संचारित रोगों की दवा के साथ भी आपको एंटीबॉयोटिक की दवा दी जा सकती है. इसके अलावा गर्भाशय ग्रीवा में संक्रमण होने पर भी डॉक्टर आपको कुछ ऐसी दवाएं दे सकते हैं, जिससे आपको योनि में रूखापन हो जाता है.

जानें महिला और पुरुष कब करना चाहते है सैक्स

महिलाओं और पुरुषों में यौनक्रीड़ा की इच्छा का समय अलग-अलग होता है. एक सर्वेक्षण से यह बात और स्पष्ट हो गई है कि महिलाओं में सोने से पहले रात के 11.21 बजे यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है. वहीं पुरुषों में सुबह के 7.54 बजे यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है.

सर्वेक्षण के शोध में पता चला है कि महिलाओं में रात के 11 बजे से दो बजे तक यौनसंबंध बनाने की इच्छा चरम पर होती है, जबकि पुरुषों में सुबह पांच बजे से नौ बजे तक यौन संबंध बनाने की इच्छा प्रबल होती है.

एक अखबार के मुताबिक, लवहनी के सहसंस्थापक रिचर्ड लांगहर्स्ट ने कहा, “पुरुष नाश्ते के पहले यौनसंबंध बनाने के लिए तैयार रहते हैं, जबकि महिलाएं रात के समय यौनसंबंध बनाना चाहती हैं.”

ब्रिटेन में 2,300 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण में यह भी निष्कर्ष निकला है कि लोग उस साथी के साथ घर बसाना चाहते हैं जिनमें यौन संबंध बनाने की समान प्रवृत्ति हो.

सेक्सटॉयज बनाने वाली कंपनी लवहनी द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में पता चला है कि 68 फीसदी महिलाओं और 63 फीसदी पुरुषों ने किसी ऐसे व्यक्ति से प्रेम संबंध बनाए हैं जिसकी यौन रुचि स्वयं की यौन रुचि से अलग थी.

सर्वेक्षण में पता चला है कि पुरुषों में सुबह के समय यौनसंबंध बनाने की इच्छा प्रबल होती है, लेकिन इस दौरान मात्र 11 फीसदी महिलाओं में ही यौनसंबंधों की इच्छा होती है. वहीं सोने से पहले केवल 16 फीसदी पुरुष ही यौन संबंध बनाने के इच्छुक होते हैं.

जानें आखिर क्या है सेक्सरिंग: कहीं प्यार के नाम पर आप भी ना फंस जाएं

युवाओं का पहला आकर्षण प्रेम ही होता है. शायद ही कोई ऐसा युवा होगा जो रोमांस के इस फेज में न फंसा हो. कोई अपना लव इंटरैस्ट अपनी क्लासमेट में ढूंढ़ता है तो कोई पासपड़ोस की ब्यूटीफुल युवती पर फिदा हो जाता है. युवावस्था के आकर्षण से जुड़े हारमोंस ही हमें किसी विपरीतलिंग की तरफ आकर्षित करते हैं.

हालांकि हर बार यह प्यार सच्चा हो, इस की कोई गारंटी नहीं. प्यार के नाम पर कैमिकल लोचा भी हो सकता है, प्यार एकतरफा भी हो सकता है और कई बार लव को लस्ट यानी वासना की शक्ल में भी देखा जाता है. इन सब प्यार की अलगअलग कैटेगरीज से गुजरता हर युवा मैच्योर होतेहोते सीखता है कि लव के असल माने क्या हैं?

इस रोमांटिक फेज में उपरोक्त कैटेगरीज के अलावा एक और खतरनाक फेज होता है सेक्सरिंग का यानी प्यार के नाम पर जब कोई युवती किसी युवा को फंसा ले तो वह सेक्सरिंग में उलझ कर रह जाता है.

प्यार में सौदा नहीं

अचानक लड़की आप के करीब आ जाए तो उस पर लट्टू होने के बजाय जरा दिमाग लगा कर सोचिए कि इस नजदीकी की वजह प्यार है या आप की मोटी जेब, क्योंकि प्यार कोई सौदेबाजी नहीं होती. जो लड़की आप से प्यार करेगी वह बातबात पर महंगे गिफ्ट्स नहीं मांगेगी और न ही हर समय आप की जेब ढीली करेगी. अगर आप की गर्लफ्रैंड भी आप से ज्यादा आप के तोहफों पर ध्यान देती है तो समझ जाइए कि आप भी सेक्सरिंग में फंसने वाले हैं.

सिंगल होना शर्मिंदगी नहीं

सेक्सरिंग का सब से आसान शिकार युवतियां ज्यादातर उन युवकों को बनाती हैं जो सिंगल होते हैं. साइकोलौजिस्ट भी मानते हैं कि हमारे समाज व युवाओं का रवैया कुछ ऐसा है कि जो लड़के सिंगल होते हैं उन का मजाक बनाया जाता है, उन पर जल्द से जल्द गर्लफ्रैंड बनाने का दबाव डाला जाता है. मानो किसी युवक की गर्लफ्रैंड नहीं है तो उस में कोई न कोई कमी होगी.

इस मनोवैज्ञानिक दबाव के तले दब कर युवक अपनी सोचसमझ खो कर एक अदद युवती की तलाश में जुट जाता है जो जल्दी से जल्दी उस की गर्लफ्रैंड बनने को तैयार हो. भले इस के लिए उसे कोई भी कीमत चुकानी पड़े. इसी जल्दबाजी व मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा चालाक व शातिर युवतियां उठाती हैं और सिंगल युवकों को झूठे प्यार के सेक्सरिंग में फांस कर उन की जेबें ढीली करती हैं. कई मामलों में तो उन की पढ़ाईलिखाई व कैरियर तक बरबाद कर डालती हैं.

युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि सिंगल होना कोई  शर्मिंदगी की बात नहीं है. जब तक कोई ईमानदार या सच्चा प्यार करने वाली युवती न मिले, सिंगल रहना बेहतर है. पढ़ाई, कैरियर, शौक व दोस्तों को समय दे कर सेक्सरिंग से बचने में ही समझदारी दिखाने वाले युवा कुछ बन पाते हैं.

इमोशनल अत्याचार के साइड इफैक्ट्स

अकसर युवतियों से धोखा खाए या यों कहें कि सेक्सरिंग के शिकार युवक भावनात्मक तौर पर टूट जाते हैं और प्रतिक्रियास्वरूप कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो उन के भविष्य को खतरे में डाल देता है.

जनवरी 2017, दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके के रोहन को जब एक युवती ने झूठे प्यार के जाल में फंसा कर चूना लगाया तो उस ने उस से बदला लेने की ठान ली व एक दिन स्कूल से लौटते समय युवती के चेहरे पर ब्लैड मार दिया.

घायल युवती के परिजनों ने रोहन के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी. इस तरह मामला उलटा पड़ गया. युवती का तो कुछ नहीं बिगड़ा, रोहन को जरूर हवालात की हवा खानी पड़ी.

अकसर सेक्सरिंग के शिकार युवा इमोशनली इतने डिस्टर्ब हो जाते हैं कि धोखा खाए प्रेमी की तरह उस युवती से बदला लेने की ठान लेते हैं. आएदिन हम प्रेम में ठुकराए प्रेमियों की आपराधिक कृत्यों की खबरें पढ़ते रहते हैं. कोई तेजाब से हमला करता है तो कोई युवती का अपहरण तक कर डालता है. कोई सेक्स संबंधों की  पुरानी तसवीरों, सेक्स क्लिप्स या प्रेमपत्रों के नाम पर लड़की को सबक सिखाना चाहता है.

प्यार से अपराध की ओर न जाएं

याद रखिए ये तमाम हिंसात्मक व अनैतिक रास्ते अपराध की उन गलियों की ओर ले जाते हैं, जहां से युवाओं के लिए वापस आना नामुमकिन सा हो सकता है. एक तो पहले ही युवती ने फंसा कर आप का धन व समय बरबाद कर दिया. उस पर उस से बदला लेने के लिए अतिरिक्त समय, धन व भविष्य दांव पर लगाना कहां की समझदारी है?

बेहतर यही है कि उस बात को भूल कर आप अपने कैरियर पर ध्यान दें. एक न एक दिन आप को सच्चा प्यार जरूर मिलेगा. इस धोखेभरी लवस्टोरी से इतना जरूर सीखिए कि अगली बार जब कोई युवती आप की भावनाओं से खिलवाड़ कर आप पर सेक्सरिंग का वार करे तो उस के झांसे में न आएं.

सेक्सरिंग के लक्षण

कोई युवती आप से सचमुच प्यार करती है या फंसा रही है, उसे समझने के लिए सेक्सरिंग के कुछ लक्षण समझना जरूरी है. निम्न पौइंट्स से समझिए कि कौन सी युवती स्वाभाविक तौर पर सेक्सरिंग के जाल में आप को फंसाना चाहती है :

–       जब बातबात पर शौपिंग, पार्टी या महंगे गिफ्ट्स की डिमांड करे.

–       जब खुद से जुड़ी जानकारियां छिपाए व आप की हर बात जानना चाहे.

–       आप के दोस्तों या परिवार से मिलने से कतराए.

–       अपने फैमिली या फ्रैंड सर्किल से मिलवाते वक्त आप की पौकेट खाली करवाए.

–       बातबात पर आप की तारीफ करे और आप की हर बात पर सहमति जताए.

–       हर जरूरत पर आर्थिक मदद की डिमांड करे.

–       झगड़े की वजहों में पैसों का ताना मारे.

–       आप के अमीर व संपन्न दोस्तों से करीबी बढ़ाए.

–       आप की आर्थिक मदद करने से कतराए या बहाने बनाए.

–       प्यार के नाम पर भावनात्मक सहारे के बजाय सिर्फ फिजिकल रिलेशन को तरजीह दे.

अगर इन तमाम पौइंट्स पर आप की गर्लफ्रैंड खरी उतर रही हो तो सावधान हो जाइए. आप पर सेक्सरिंग फेंका जा चुका है. सही मौका पाते ही सेक्सरिंग का छल्ला गले से निकाल फेंकिए और ब्रेकअप सौंग पर जम कर अपनी फेक लवर से आजादी का जश्न मनाइए.

सैक्स एजुकेशन : इशारों में बात करने का समय नहीं रहा

हिंदी फिल्म ‘पति, पत्नी और वो’ के एक सीन में हीरो कार्तिक आर्यन बोलता है, ‘‘बीवी से सैक्स मांग लें तो हम भिखारी. बीवी को सैक्स के लिए मना कर दें तो हम अत्याचारी. और किसी तरह जुगाड़ लगा के उस से सैक्स हासिल कर लें तो बलात्कारी भी हम हैं.’’

इस संवाद पर बवाल हुआ था और बहुत से लोगों को यह एतराज था कि इस तरह के संवाद मैरिटल रेप (शादी के बाद पत्नी के साथ जबरदस्ती या बहलाफुसला कर सैक्स करना) को बढ़ावा देता है और मर्दों की घटिया सोच को भी दिखाता है. कोई भी मर्द सैक्स पाने के लिए भिखारी, अत्याचारी और यहां तक कि बलात्कारी भी बन सकता है.

क्या वाकई ऐसा है? क्या जब कोई लड़की ‘नो मींस नो’ बोलती है, तो मर्द को सम?ा जाना चाहिए कि उसे अपनी हद नहीं पार करनी चाहिए? लेकिन क्या लड़कियों, खासकर भारतीय समाज में जहां लड़की को मर्दवादी सोच के चलते दोयम दर्जे का सम?ा जाता है, को इतनी सम?ा भी है कि वे सैक्स के लिए कब हां करनी और कब मना करना है, पर अपनी राय मजबूती के साथ रख सकें?

शायद नहीं, तभी तो भारत में सैक्स को ले कर आज भी उतनी गंभीरता से बहस नहीं होती है, जितनी पश्चिमी देशों में. यही वजह है कि जब पतिपत्नी या कोई और जोड़ा बिस्तर पर होते हैं, तो वे सैक्स पर अपनी बात कहने से घबराते हैं.

लड़की को लगता है कि अगर कहीं वह ज्यादा खुल गई, तो उसे धंधे वाली या सैक्स के लिए उतावली सम?ा लिया जाएगा. लड़का भी यही सोच कर चुप्पी साध लेता है कि अगर कहीं लड़की ने बोल दिया कि उसे मजा नहीं आया, तो वह अपना मुंह कैसे उसे दिखा पाएगा.

भारत में अमूमन घरों में भी औरतें या मर्द आपस में ऐसे जुमले बोलते हैं कि सैक्स को ले कर बात भी हो जाती है और किसी को भनक तक नहीं लगती है. बड़ी औरतें नई ब्याही लड़की से जब पूछती हैं कि पति से ‘सही’ निभ रही है न, तो इस ‘सही’ का मतलब यही होता है कि सैक्स लाइफ में कोई दिक्कत तो नहीं है.

सुहागरात पर ‘बिल्ली मारना’ मुहावरा भी यही बात कहता है कि पति को पहली रात को ही अपनी मर्दानगी का नमूना दिखा देना चाहिए, ताकि पत्नी उम्रभर उस के काबू में रहे. ‘सुहागरात पर दूध का असर हुआ या नहीं’, ‘मैं ने तो हनीमून पर छत और पंखा ही देखा’, ‘पलंग सहीसलामत है न’, ‘पति ने छतरी का इस्तेमाल किया या नहीं’ जैसे बहुत से वाक्य हैं, जो सैक्स लाइफ को ही कोडवर्ड में बयां करते हैं.

दरअसल, भारत में सैक्स ऐजूकेशन की कमी के चलते ऐसा है. बच्चों को जो जानकारी परिवार के बड़े लोगों से आसान भाषा में सहज रूप से मिलनी चाहिए, वह नदारद है. परिवार में सैक्स पर बात करना अच्छा नहीं माना जाता है.

लेकिन बच्चे अपनी जिज्ञासा के चलते कहीं से तो जानकारी लेंगे ही, फिर वे उन के दोस्त हों या सोशल मीडिया, अधकचरी जानकारी को ही वे सही मान लेते हैं. इस का नतीजा भयावह भी हो सकता है.

उदाहरण के तौर पर, हमारे समाज में यह सोच बनी हुई है कि अगर सुहागरात पर सैक्स करने के दौरान अगर लड़की के खून नहीं आया तो वह कुंआरी नहीं है, बल्कि खेलीखाई है. पर हकीकत इस से अलग भी हो सकती है, क्योंकि लड़की के अंग की ?िल्ली तो किसी और वजह जैसे खेलकूद या साइकिल चलाने से भी टूट सकती है.

इसी तरह अगर कोई लड़का शादी की पहली रात को अपने साथी को सैक्स का पूरा सुख नहीं दे पाया या वह सैक्स करने में ही नाकाम रहा, तो वह खुद को नामर्द मान लेता है और फिर तनाव में जीने लगता है, जबकि इन दोनों समस्याओं का समाधान उस जोड़े की आपसी बातचीत से ही निकल सकता है.

हाल के सालों में टैलीविजन के इश्तिहारों में माहवारी और कंडोम को ले कर जो खुलापन दिख रहा है, पहले वैसा नहीं था. यहां तक कि ब्रा और पैंटी के इश्तिहार भी छिपेछिपाए से होते थे. इश्तिहार तो बदल गए, पर समाज की सोच अभी भी पुरानी ही है.

मांबाप को आज भी यह लगता है कि अगर उन के बच्चों को कम उम्र में ही सैक्स की जानकारी मिल गई, तो वे उसे अपनी नादानी में आजमाना चाहेंगे, पर ऐसा नहीं है. अगर उन्हें अपने मांबाप से ही सटीक जानकारी मिलने लगेगी तो उन की सैक्स को ले कर फैंटेसी से भी परदा हटने लगेगा. सरकार जो खर्चा एड्स जैसी बीमारियों से जागरूक बनाने के लिए कर रही है, उसे अगर सैक्स ऐजूकेशन पर खर्च करे तो ऐसी बीमारियां बहुत कम पनपेंगी.

लिहाजा, इशारों की भाषा में सैक्स को  सम?ाने के दिनों को अब भूल जाना चाहिए और साफ और सरल अंदाज में बच्चों को इस की तालीम देनी चाहिए. यह परिवार और सरकार दोनों की बराबर की जिम्मेदारी है. फिर किसी मर्द को भिखारी, अत्याचारी या बलात्कारी बनने की नौबत ही नहीं आएगी.

स्पाइनल इंजरी के बाद ऐसी होती है सैक्सुअल लाइफ

स्पाइनल इंजरी किसी के भी जीवन की त्रासदपूर्ण घटना हो सकती है. इस से व्यक्ति एक तरह से लकवाग्रस्त हो सकता है. इंजरी जब गरदन में हो तो इस से टेट्राप्लेजिया हो सकता है. यदि इंजरी गरदन के नीचे हो तो इस से पाराप्लेजिया यानी दोनों टांगों और इंजरी से निचले धड़ में लकवा हो सकता है. केंद्रीय स्नायुतंत्र का हिस्सा होने के कारण स्पाइनल कौर्ड की सेहत पर ही पूरे शरीर की सेहत निर्भर करती है. इंजरी से यौन सक्रियता भी प्रभावित हो सकती है. स्पाइनल कौर्ड इंजरी ऊंचाई से गिरने, सड़क दुर्घटना, हिंसक या खेल की घटनाओं के कारण हो सकती है. स्पाइनल कौर्ड इंजरी के नौनट्रोमेटिक कारणों में स्पाइन और ट्यूमर के टीबी जैसे संक्रमण शामिल हैं.

यौन सक्रियता जरूरी

स्पाइनल इंजरी से पीडि़त व्यक्ति को यथासंभव आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश होनी चाहिए. भारतीय समाज के एक बड़े हिस्से में यौन स्वास्थ्य पर चर्चा करना हमेशा वर्जित विषय माना जाता रहा है, इसलिए इस विषय पर बात करने से लोग कतराते हैं और मरीज खामोशी से इसे सहता रहता है. शिक्षा, ज्ञान और जागरूकता के अभाव में लोग ऐसे मरीजों के बारे में यह समझने लगते हैं कि वे यौनेच्छा एवं यौन उत्कंठा से पीडि़त हैं. लेकिन सच यह है कि सामान्य व्यक्ति की तरह ही स्पाइनल इंजरी से पीडि़त व्यक्ति के लिए भी यौन सक्रियता उतनी ही जरूरी है.

पार्टनर का अभाव

दरअसल, स्पाइन इंजरी इच्छाशक्ति का स्तर तो प्रभावित नहीं करती, लेकिन किसी व्यक्ति की यौन गतिविधि प्रभावित जरूर हो जाती हैं. कई बार ऐसा पार्टनर के अभाव में भी होता है. अन्य मामलों में यह मांसपेशियों पर नियंत्रण रखने वाले व्यायाम की कमजोर क्षमता के कारण भी हो सकता है. यौन अनिच्छा लिंग के आधार पर भी अलगअलग हो सकती है. पुरुष जहां उत्तेजना के अभाव के कारण प्रभावित होते हैं, वहीं महिलाएं आमतौर पर शिथिल पार्टनर होने के कारण इस से कम प्रभावित होती हैं खासकर भारतीय समाज में. लेकिन स्पाइनल इंजरी से पीडि़त व्यक्तियों की यौन अनिच्छा को सैक्सुअल रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम और निरंतर अभ्यास से बहुत हद तक दूर किया जा सकता है.

समस्या की अनदेखी

ऐसे मरीजों में आत्मविश्वास जगाना और यौन स्वास्थ्य के बारे में उन से खुल कर बात करना बहुत जरूरी होता है. इस में तंबाकू पूरी तरह से निषेध होना चाहिए. शारीरिक गतिविधियों के अभाव और दर्द के अलावा एससीआई मरीज आकर्षण, संबंधों और प्रजनन की क्षमता जैसे अन्य कारकों को ले कर भी चिंतित रहते हैं. समय के साथ जहां मरीज अपने नवजात शिशु के साथ जीना सीख जाते हैं और परिवर्तित जिंदगी अपना लेते हैं, वहीं वे अपने यौन स्वास्थ्य को ले कर अकसर अनजान रहते हैं. मरीज के शरीर की कुछ खोई गतिविधियां बहाल करने के लिए व्यापक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के दौरान भी यौन समस्या की अनदेखी ही की जाती है.

खुद पहल नहीं करतीं

एससीआई के मामले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए अकसर सैक्सुअल पार्टनर बनना ज्यादा आसान होता है जो न सिर्फ शारीरिक रचना के कारण, बल्कि सक्रियता के स्तर पर भी संभव होता है. भारत जैसे रूढिवादी समाज में महिलाओं से यौनइच्छा की उम्मीद करना मुश्किल है. भारत की 80% महिलाएं ऐसी पैसिव सैक्सुअल पार्टनर होती हैं जो खुद पहल नहीं करतीं. इसलिए पुरुषों की तुलना में उन के लिए यौन स्वास्थ्य वापस पाना ज्यादा आसान होता है और उन का मुख्य लक्ष्य यौन सक्रियता वापस पाना तथा संभोग करने की क्षमता हासिल करना होता है.

समस्या का समाधान

पुरुषों के मामले में समस्याएं उत्तेजना में कमी और स्खलन से ही जुड़ी होती हैं. उन की उत्तेजना क्षमता और स्खलन में बदलाव आने के अलावा कामोत्तेजना की यौन संतुष्टि भी एक ऐसा क्षेत्र है जो एससीआई पीडि़त पुरुषों के लिए चिंता का कारण होता है. एक अन्य चिंता स्पर्म की क्वालिटी पर होने वाले प्रभाव और स्पर्म काउंट को ले कर होती है. ज्यादातर स्पाइनल इंजरी के मामले में वियाग्रा जैसी दवा से उत्तेजना की समस्या दूर की जा सकती है. कुछ मामलों में वैक्यूम ट्यूमेसेंस कंस्ट्रक्शन थेरैपी (वीटीसीटी) या पैनाइल प्रोस्थेसिस जैसे उपकरण की भी जरूरत पड़ सकती है.

गलत धारणा की वजह

सैक्सुअल काउंसलिंग और मैनेजमैंट विकासशील देशों में एससीआई के सब से उपेक्षित पहलुओं में से एक है. लेखकों के एक अध्ययन से पाया गया है कि एससीआई से पीडि़त 60% मरीजों और उन के 57% पार्टनरों ने पर्याप्त रूप से सैक्सुअल काउंसलिंग नहीं ली. जिन फैक्टर्स पर बहुत कम जोर दिया जाता है, उन में से एक है जागरूकता और सांस्कृतिक बदलाव. पति और पत्नी के बीच यौन संबंध का मकसद सिर्फ बच्चे पैदा करना ही माना जाता है. सैक्स के बारे में बातचीत को खराब माना जाता है. यौन समस्याएं न सिर्फ आम हो गई हैं, बल्कि सैक्स की अनदेखी, सैक्स के बारे में गलत धारणाओं और नकारात्मक सोच भी इस के मुख्य कारण माने जाते हैं. पारंपरिक वर्जना भी इस में अहम भूमिका निभाती है.

सैक्सुअलिटी को प्रभावित करने वाले अन्य सामाजिक, पारंपरिक फैक्टर्स में यौन संबंधी सोच, मातापिता के प्रति सम्मान तथा अन्य ऐसे कारण शामिल हैं, जिन में सैक्स को खराब माना जाता है और पुरुषों तथा महिलाओं के लिए बरताव के दोहरे मानदंड अपनाए जाते हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्थिति बदतर होती है.

आत्मविश्वास में कमी

एक अध्ययन के अनुसार, विकसित देशों की तुलना में भारत जैसे देश में स्पाइनल कौर्ड इंजरी से पीडि़त व्यक्तियों की यौन गतिविधि की बारंबारता कम रहती है. ज्यादातर मरीज इंजरी से पहले की तुलना में मौजूदा स्तर पर अपने सैक्स जीवन को कमतर आंकते हैं. यह शायद एससीआई की समस्याओं, इंजरी के बाद पार्टनर की असंतुष्टि, यौनक्रिया के दौरान पार्टनर से कम सहयोग, आत्मविश्वास में कमी तथा अपर्यात सैक्सुअल रिहैबिलिटेशन के कारण भी हो सकता है. पश्चिमी देशों के मामलों की तरह बहुत कम पार्टनर संतुष्ट होते हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाएं यौन संतुष्टि के अभाव की शिकायतें ज्यादा करती हैं. इस के पीछे प्रचलित सांस्कृतिक मान्यता है कि किसी बीमार महिला के साथ यौन संबंध बनाना नैतिकता के विरुद्ध है और इस से पुरुष पार्टनर में भी रोग संचारित हो सकता है. भारतीय समाज में महिलाओं की कमतर स्थिति, पार्टनर की भिन्न सोच, पाचनतंत्र आदि की गड़बड़ी और निजता का अभाव भी इस के कुछ अन्य संभावित कारण हो सकते हैं.

यौनजीवन का अंत नहीं

निष्कर्षतया स्पाइनल इंजरी को यौनजीवन का अंत नहीं मान लेना चाहिए. इस से इंजरी पीडि़त व्यक्ति को अपने नए शरीर में यौन सुख स्वीकार करने में मदद की जरूरत पड़ती है और कई बार उस के लिए अलग तरीके से सोचने की जरूरत होती है. परिवर्तित संवेदनशीलता, शारीरिक प्रतिबंध की स्वीकृति या उन्नत मसल कंट्रोल जैसे फैक्टर्स को समझने से स्पाइनल इंजरी मरीज को स्वस्थ यौनजीवन बहाल करने में मदद मिल सकती है. उस के सैक्सुअल रिहैबिलिटेशन के लिए मैडिकल प्रोफैशनल्स की मदद की जरूरत होती है. इस संबंध में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है खासकर भारतीय समाज तथा प्रोफैशनल्स के बीच.

(डा. एच.एस. छाबड़ा, इंडियन स्पाइनल इंजरीज सैंटर में स्पाइन सर्विस के प्रमुख और मैडिकल डायरैक्टर)

मेरे पापा मेरा हर काम इग्नोर कर देते हैं, ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए ?

सवाल

मेरे पापा और मेरी आपस में नहीं बनती. मैं कोई अच्छा काम कर के उन्हें दिखाता हूं, तो वे अनदेखा करते हैं. उपाय बताएं?

जवाब

अकसर अलगअलग पीढि़यों के बीच मतभेद होते हैं. आप को कोशिश कर के वही काम करने चाहिए, जो आप के पापा को पसंद हों.

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फोबिया के कारण

शोधकर्ता अभी फोबिया के सही कारणों के बारे में आश्वस्त नहीं हैं. हालांकि आम धारणा यही है कि जब कोई फोबिया होता है तो कुछ खास प्रकार के कारकों की समानता देखी जा सकती है. इन कारकों में शामिल हैं :

आनुवंशिक : शोध से पता चला है कि परिवार में किसी खास प्रकार का फोबिया होता है. मसलन, अलगअलग जगह पलेबढ़े बच्चों में एक ही प्रकार का फोबिया हो सकता है. हालांकि एक प्रकार के फोबिया वाले कई लोगों की परिस्थितियों का आपस में कोई संबंध नहीं होता.

सांस्कृतिक कारक : कुछ फोबिया किसी खास प्रकार के सांस्कृतिक समूहों में ही पाए जाते हैं. यह एक ऐसा भय है जिस में लोग सामाजिक परिस्थितियों के कारण दूसरों पर हमला करते हैं या उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं. यह परंपरागत सोशल फोबिया से बिलकुल अलग होता है क्योंकि सोशल फोबिया में पीडि़त व्यक्ति अपमानित होने पर व्यक्तिगत शर्मिंदगी झेलने की आशंका से ग्रसित रहता है. सो संभव है कि फोबिया विकसित करने में संस्कृति की भूमिका हो.

जिंदगी के अनुभव : कई प्रकार के फोबिया वास्तविक जिंदगी की घटनाओं से जुड़े होते हैं जिन्हें होशोहवास में याद किया भी जा सकता है और नहीं भी. मसलन, किसी कुत्ते का फोबिया, यह व्यक्ति को उसी वक्त से हो सकता है जब बहुत छोटी उम्र में वह कुत्ते का हमला झेल चुका हो. सोशल फोबिया नाबालिग उम्र के अल्हड़पन या बचपन की शैतानी से विकसित हो सकता है.

हो सकता है कि इन कारकों का एक मिश्रित रूप किसी फोबिया के विकसित होने का कारण बना हो लेकिन निर्णायक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अभी और ज्यादा शोध की आवश्यकता है. किसी व्यक्ति में कोई फोबिया बचपन से ही होता है या किसी को बाद की उम्र में पनप सकता है. कोई भी फोबिया बचपन, जवानी या किशोरावस्था के दौरान विकसित हो सकता है. फोबिया से ग्रस्त लोगों का ताल्लुक अकसर किसी डरावनी घटना या तनावपूर्ण माहौल से रहा है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कुछ खास प्रकार के फोबिया क्यों विकसित होते हैं.

फोबिया के इलाज

फोबिया से पीडि़त व्यक्ति की सोच में बदलाव लाने में मदद करते हुए उन के फोबिक लक्षणों को कौग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी यानी सीबीटी से कमी लाने में बहुत हद तक सफलता मिली है. यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सीबीटी का इस्तेमाल 3 तकनीकों से किया जाता है :

शिक्षाप्रद सामग्री : इस चरण में व्यक्ति को फोबिया व इस के इलाज के बारे में शिक्षित किया जाता है और उसे उपचार के लिए सकारात्मक उम्मीद बनाए रखने में मदद की जाती है. इस के अलावा फोबिया से पीडि़त व्यक्ति को सहयोग देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है.

संज्ञानात्मक अवयव : इस से विचारों तथा कल्पनाओं की पहचान करने में मदद मिलती है, जिस से व्यक्ति का बरताव प्रभावित होता है, खासकर ऐसे लोगों का जो पहले से ही खुद को फोबियाग्रस्त होने की धारणा पाल बैठते हैं.

व्यावहारिक अवयव : इस के तहत फोबियाग्रस्त व्यक्ति को समस्याओं से अधिक प्रभावी रणनीतियों के साथ निबटने की शिक्षा देने के लिए व्यवहार संशोधन तकनीक इस्तेमाल की जाती है.

फोबिया कई बार अवसादरोधी या उत्तेजनारोधी उपचार से भी ठीक किया जाता है, जिस से प्रतिकूल स्थिति पैदा करने वाले शारीरिक लक्षणों में कमी लाई जाती है और शरीर में उत्तेजना का प्रभाव अवरुद्ध किया जाता है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem
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