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कही आप भी तो नहीं कर रहे प्रेग्नेंसी में बिना कंडोम के सेक्स

प्रेग्नेंसी नारी जीवन की ऐसी अवस्था है जिसमें एक महिला को जितना ध्यान अपने खानपान पर देना होता है उतना ही अपने लाइफस्टाइल पर भी देना होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह से एक आम महिला और एक गर्भवती महिला की संरचना में काफी अंतर होता है. ठीक उसी तरह एक ​महिला के गर्भवती होते ही उसका लाइफस्टाल भी अन्य महिलाओं से अलग हो जाता है. लेकिन कई बार महिलाएं इसे जल्दी से स्वीकार करने से परहेज करती हैं और अपनी मस्ती में रहती हैं. उन महिलाओं को शायद इस बात की जानकारी नहीं होती है कि उनकी इन हरकतों का सीधा असर उनके शिशु पर पड़ रहा है.

सेक्स हर व्यक्ति की जिंदगी का वो पल होता है जिसे करते वक्त बेहद आनंद और खुशी मिलती है. प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करना अन्य अवस्थाओं से बहुत अलग होता है. यहां हम आपको बता रहे हैं कि गर्भवती महिला को सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल क्यों करना चाहिए.

अक्सर लोग ये सोचते हैं कि प्रेग्नेंसी के वक्त अगर वो बिना कंडोम के सेक्स करते हैं तो कोई नुकसान नहीं होगा. क्योंकि जब एक महिला प्रेग्नेंट है तो फिर ना तो गर्भवती होने के चांस रहते हैं और ना ही वैजाइना में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो ये आपके लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. क्योंकि गर्भावस्था में कंडोम के बिना सेक्स करने से एसटीडी, एड्स, वैजाइनल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे मां और शिशु दोनों को गहरा खतरा होने के चांस रहते हैं.

प्रेगनेंसी के दौरान सर्विक्स म्यूकल प्लग से बंद हो जाता है जिससे गर्भाशय में स्पर्म घुस नहीं पाते हैं. जिसके चलते वैजाइना के अलावा शरीर के दूसरे अंगों में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है. प्रेग्नेंसी के वक्त इस बात का खास ध्यान रखें कि भूल कर भी कंडोम के बिना सेक्स ना करें.

प्रेग्नेंसी के चलते अगर आप एसटीडी के उपचार के लिए कोई दवा लेते हैं तो ये आपके शिशु के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचा सकती है. प्रेग्नेंट महिला को एसटीडी के अलावा क्लामिडिया, सिफिलिस, हर्पिस, हेपाटाइटिस बी, ग्रोनोरियाम, एचआईवी/एड्स हो सकता है. इसका सीधा असर डिलीवरी के वक्त मां और शिशु दोनों पर पड़ता है. ध्यान रखें कि प्रेंग्नेसी की प्लानिंग से पहले ही अपना एसटीडी और अन्य चेकअप करा लें. क्योंकि प्रेग्नेंसी के वक्त इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत मुश्किल हो जाता है.

मेरा मन अपने बौयफ्रेंड को किस करने का करता है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 14 साल की हूं, दिल्ली में रहती हूं. कुछ दिन पहले मेरी और मेरे ट्यूशन में पढ़ने वाले लड़के की बातचीत होनी शुरू हुई. वह और मैं एकदूसरे को बहुत पसंद करते हैं. वह 15 साल का है, बहुत स्मार्ट और इंटैलिजैंट भी है. उस की और मेरी बात होनी शुरू हुई तो हमें एकदूसरे की फीलिंग्स का पता चला. हम दोनों ही एकदूसरे को चाहते थे. सो, रिलेशनशिप में आ गए.

यह हम दोनों की पहली रिलेशनशिप है, इसलिए अब तक हम किसी भी तरह से फिजिकली क्लोज नहीं आए हैं. लेकिन, मैं उसे किस करना चाहती हूं, गले लगाना चाहती हूं, पर मैं बहुत डरती हूं कि उसे कैसे बताऊं या पूछूं.

हम कभी किसी अकेली जगह पर पहले मिले नहीं और उस ने मुझे सामने से किस के लिए कभी पूछा भी नहीं. क्या मुझे उस से पूछना चाहिए या इस के लिए आगे बढ़ना चाहिए?

जवाब-

इस उम्र में आप का फोकस आप का बौयफ्रैंड या उस को किस करना नहीं होना चाहिए बल्कि आप की पढ़ाई होनी चाहिए. किस करने को तो आप कर लेंगी लेकिन उस के बाद होगा क्या, वह भी जान लीजिए. 14 साल की उम्र और पहलापहला प्यार अकसर ऐसे होते हैं कि इन में हुई चीजें हमारे मनमस्तिष्क पर गहरा असर छोड़ जाती हैं.

आप किस करेंगे और एक महीने तक इसी खुशी में घूमते रहेंगे, फिर बारबार किस करने का मन करने लगेगा और पढ़ाई से ध्यान खुदबखुद हट जाएगा. इस के बाद कल को यदि लड़ाई हो गई तो उस गम में न पढ़ाई होगी न चैन आएगा. जिंदगी जितनी सुकूनभरी अभी है, किस के बाद नहीं रहेगी. बेहतर यही होगा कि चीजें स्लो पेस पर चलने दें और अपनी इच्छाओं को कुछ समय के लिए मन में दबा लें. पहले पढ़ाई और कैरियर पर फोकस करें. अभी तो पूरी जिंदगी पड़ी है किस करने और रिलेशनशिप में आने के लिए. इस के लिए आप को इंतजार नहीं करना पड़ेगा. वक्त के साथ यह सब होता चला जाएगा. चिंता मत करिए.

मुहब्बत पर सेक्स का कब्जा क्यों?

सच्चे प्रेम से खिलवाड़ करना किसी बड़े अपराध से कम नहीं है. प्रेम मनुष्य को अपने अस्तित्व का वास्तविक बोध करवाता है. प्रेम की शक्ति इंसान में उत्साह पैदा करती है. प्रेमरस में डूबी प्रार्थना ही मनुष्य को मानवता के निकट लाती है.

मुहब्बत के अस्तित्व पर सेक्स का कब्जा

आज प्रेम के मानदंड तेजी से बदल रहे हैं. त्याग, बलिदान, निश्छलता और आदर्श में खुलेआम सेक्स शामिल हो गया है. प्रेम की आड़ में धोखा दिए जाने वाले उदाहरणों की शृंखला छोटी नहीं है और शायद इसी की जिम्मेदारी बदलते सामाजिक मूल्यों और देरी से विवाह, सच को स्वीकारने पर डाली जा सकती है. प्रेम को यथार्थ पर आंका जा रहा है. शायद इसी कारण प्रेम का कोरा भावपक्ष अस्त हो रहा है यानी प्रेम की नदी सूख रही है और सेक्स की चाहत से जलराशि बढ़ रही है.

विकृत मानसिकता व संस्कृति

आज के मल्टी चैनल युग में टीवी और फिल्मों ने जानकारी नहीं मनोरंजन ही परोसा है. समाज द्वारा किसी भी रूप में भावनाओं का आदर नहीं किया जाता. प्रेम का मधुर एहसास तो कुछ सप्ताह तक चलता है. अब तन के उपभोग की अपेक्षा है.

क्षणिक होता मुहब्बत का जज्बा

प्रेम अब सड़क, टाकीज, रेस्तरां और बागबगीचों का चटपटा मसाला बन गया है. वर्तमान प्रेम क्षणिक हो चला है, वह क्षणभर दिल में तूफान ला देता है और अगले ही पल बिलकुल खामोश हो जाता है. युवा आज इसी क्षणभर के प्रेम की प्रथा में जी रहे हैं. एक शोध के अनुसार, 86% युवाओं की महिला मित्र हैं, 92% युवक ब्लू फिल्म देखते हैं, तो 62% युवक और 38% युवतियों ने विवाहपूर्व शारीरिक संबंध स्थापित किए हैं.

यही है मुहब्बत की हकीकत

एक नई तहजीब भी इन युवाओं में गहराई से पैठ कर रही है, वह है डेटिंग यानी युवकयुवतियों का एकांत मिलन. शोध के अनुसार, 93% युवकयुवतियों ने डेटिंग करना स्वीकार किया. इन में से एक बड़ा वर्ग डेटिंग के समय स्पर्श, चुंबन या सहवास करता है. इस शोध का गौरतलब तथ्य यह है कि अधिकांश युवक विवाहपूर्व यौन संबंधों के लिए अपनी मंगेतर को नहीं बल्कि किसी अन्य युवती को चुनते हैं. पहले इस आयु के युवाओं को विवाह बंधन में बांध दिया जाता था और समय आने तक जोड़ा दोचार बच्चों का पिता बन चुका होता था.

अमीरी की चकाचौंध में मदहोश प्रेमी

मृदुला और मनमोहन का प्रेम कालेज में चर्चा का विषय था. दोनों हर जगह हमेशा साथसाथ ही दिखाई देते थे. मनमोहन की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. वह मध्यवर्गीय परिवार से था, लेकिन मृदुला के सामने खुद को थोड़ा बढ़ाचढ़ा कर दिखाने की कोशिश में रहता था. वह मृदुला को अपने दोस्त की अमीरी और वैभव द्वारा प्रभावित करना चाहता था. दूसरी ओर आदेश पर भी अपना रोब गांठना चाहता था कि धनदौलत न होने पर भी वह अपने व्यक्तित्व की बदौलत किसी खूबसूरत युवती से दोस्ती कर सकता है. लेकिन घटनाचक्र ने ऐसा पलटा खाया कि जिस की मनमोहन ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी. उस की तुलना में अत्यंत साधारण चेहरेमुहरे वाला आदेश अपनी अमीरी की चकाचौंध से मृदुला के प्यार को लूट कर चला गया.

मनमोहन ने जब कुछ दिन बाद अपनी आंखों से मृदुला को आदेश के साथ उस की गाड़ी से जाते देखा तो वह सोच में पड़ गया कि क्या यह वही मृदुला है, जो कभी उस की परछाईं बन उस के साथ चलती थी. उसे अपनी बचकानी हरकत पर भी गुस्सा आ रहा था कि उस ने मृदुला और आदेश को क्यों मिलवाया. कालेज में मनमोहन की मित्रमंडली के फिकरों ने उस की कुंठा और भी बढ़ा दी.

प्रेम संबंधों में पैसे का महत्त्व

प्रेम संबंधों के बीच पैसे की महत्ता होती है. दोस्ती का हाथ बढ़ाने से पहले युवक की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर निर्णय लेना चाहिए. प्रेमी का यह भय सही है कि यदि वह अपनी प्रेमिका को महंगे उपहार नहीं देगा तो वह उसे छोड़ कर चली जाएगी. कोई भी युवती अपने प्रेमी को ठुकरा कर एक ऐसा नया रिश्ता स्थापित कर सकती है, जिस का आधार स्वाभाविक प्यार न हो कर केवल घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने की चाह हो. युवकों को पैसे के अनुभव के बावजूद अपनी प्रेमिकाओं और महिला मित्रों को प्रभावित करने के लिए हैसियत से ज्यादा खर्च करना होगा.

प्रेम में पैसे का प्रदर्शन, बचकानी हरकत

छात्रा अरुणा का विचार है कि अधिकतर युवक इस गलतफहमी का शिकार होते हैं कि पैसे से युवती को आकर्षित किया जा सकता है. यही कारण है कि ये लोग कमीज के बटन खोल कर अपनी सोने की चेन का प्रदर्शन करते हैं. सड़कों, पान की दुकानों या गलियों में खड़े हो कर मोबाइल पर ऊंची आवाज में बात करते हैं या गाड़ी में स्टीरियो इतना तेज बजाते हैं कि राह चलते लोग उन्हें देखें.

हैसियत की झूठी तसवीर पेश करना घातक

अरुणा कहती है कि कुछ लोग प्रेमिका से आर्थिक स्थिति छिपाते हैं तथा अपनी आमदनी, वास्तविक आय से अधिक दिखाने के लिए अनेक हथकंडे अपनाते हैं. इसी संबंध में उन्होंने अपने एक रिश्तेदार का जिक्र किया जो एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे. विवाह के तुरंत बाद उन्होंने पत्नी को टैक्सी में घुमाने, उस के लिए ज्वैलरी खरीदने तथा उसे खुश रखने के लिए इस कदर पैसा उड़ाया कि वे कर्ज में डूब गए.

कर्ज चुकाने के लिए जब उन्होंने कंपनी से पैसे का गबन किया तो फिर पकड़े गए. परिणामस्वरूप अच्छीखासी नौकरी चली गई. इतना ही नहीं, पत्नी भी उन की ऐसी स्थिति देख कर अपने मायके लौट गई. अगर शुरू से ही वह चादर देख कर पैर फैलाते, तो यह नौबत न आती.

समय के साथ बदलती मान्यताएं

मीनाक्षी भल्ला जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, का कहना है कि प्यार में प्रेमीप्रेमिका दोनों ही जहां एकदूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने की भावना रखते हैं, वहीं अपने साथी से कुछ अपेक्षाएं भी रखते हैं.

व्यापार बनता आज का प्रेम

इस प्रकार के रवैए ने प्यार को एक प्रकार का व्यापार बना दिया है. जितना पैसा लगाओ, उतना लाभ कमाओ. कुछ मित्रों का अनुभव तो यह है कि जो काम प्यार का अभिनय कर के तथा झूठी भावुकता दिखा कर साल भर में भी नहीं होता, वही काम पैसे के दम पर हफ्ते भर में हो सकता है. अगर पैसे वाला न हो तो युवती अपना तन देने को तैयार ही नहीं होती.

नोटों की ऐसी कोई बौछार कब उन के लिए मछली का कांटा बन जाए, पता नहीं चलेगा. ऐसी आजाद खयाल या बिंदास युवतियों का यह दृष्टिकोण कि सच्चे आशिक आज कहां मिलते हैं, इसलिए जो भी युवक मौजमस्ती और घूमनेफिरने का खर्च उठा सके, आराम से बांहों में समय बिताने के लिए जगह का इंतजाम कर सके, उसे अपना प्रेमी बना लो.

एकतरफा नहीं, दोनों की मंजूरी से Enjoy करें सेक्स

पार्टनर के साथ संबंध बनाना एक सुखद अनुभूति प्रदान करता है. लेकिन इसमें आनंद के लिए शारीरिक जुड़ाव के साथसाथ भावनात्मक लगाव होना भी बहुत जरुरी होता है तभी इसका जी भरकर मज़ा लिया जा सकता है. लेकिन कई बार पार्टनर को सेक्स के दौरान इतना अधिक दर्द महसूस होता है कि वे सेक्स से कतराने लगती है और यह पल उसके लिए खुशी देने के बजाए दर्द देने वाला एहसास बनकर रह जाता है. ऐसे में अगर आप इस पल का बिना किसी रूकावट आनंद लेना चाहते हैं तो अपनाएं ये टिप्स.

1. लुब्रीकेंट से लें मजा

प्लेज़र के लिए कुछ भी करने से शर्माए नहीं बल्कि वो सब करें जिससे दोनों को मज़ा आए और आप उस पल को याद कर पूरा दिन खुद को फ्रेश फील कर सकें. जैसे आप लुब्रीकेंट का इस्तेमाल करें. ये आपको जेल फौर्म, सिलिकौन फौर्म या ऑयल बेस्ड फौर्म में मिल जाएगा. इसे सेक्स के दौरान महिला व पुरुष दोनों इस्तेमाल कर सकते है. इसके इस्तेमाल से पेनिटेशन के दौरान वेजिना सेक्स के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है. क्योंकि इससे खिंचाव व इरिटेशन जो कम होती है. कई महिलाओं को सेक्स के दौरान यह समस्या आती है कि उनकी वेजिना ड्राई हो जाती है. ऐसा अक्सर एस्ट्रोजन लेवल के कम होने के कारण होता है.

2. दोनों का मूड होना जरूरी

सेक्स का आनंद तभी भरपूर लिया जा सकता है जब दोनों की मरज़ी हो वरना सेक्स एकतरफा बनकर रह जाता है. इसके लिए जब आप पार्टनर के करीब जाएं तो उसकी इच्छा व मूड जानें. अगर लगे कि मूड सेक्स के अनुकूल है तो सेक्स आपको वो मज़ा दे देगा जिसकी आपको इच्छा थी. यकीन मानिये ये अनुभूति आपको दर्द का अनुभव भी नहीं होने देगी.

3. माहौल हो अनुकूल

शादी के बाद कपल हनीमून पर बेहतर जगह व माहौल में एकदूसरे के करीब आने के साथ एकदूसरे को जानने की कोशिश करते हैं और उनके ये दिन उनकी ज़िन्दगी के यादगार पल बन जाते हैं. ऐसे में जब भी आप पार्टनर के साथ संबंध बनाएं और उसे यादगार बनाना चाहे तो ध्यान रखें कि कमरे का माहौल खुशनुमा व सैक्स के अनुकूल हो. इससे पार्टनर दिल से उस पल को एन्जॉय कर पाएगा. और यह सभी जानते हैं कि जो चीज़ दिल से महसूस होती है उसमें दर्द की नहीं बल्कि प्यार की अनुभूति होती है.

4. करें प्यार से शुरुआत

सेक्स के लिए लुब्रिकेशन बहुत जऱूरी होता है और इसके लिए पहले पार्टनर के साथ आप शारीरिक जुड़ाव बनाएं. जैसे उसके हाथपैरों पर स्पर्श आदि करें . इससे पार्टनर सेक्स के लिए तैयार हो जाता है और फिर पार्टनर के साथ सेक्स का जो मज़ा आता है उसका कहना ही क्या.

5. प्यारप्यारी बातों से लाएं करीब

जब भी आपका सेक्स का मूड हो तो अपने पार्टनर से प्यार भरी बातें करें. जैसे तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो, तुम्हारे हाथ कितने सौफ्ट हैं , तुम्हे तो आज जी भरकर देखने को दिल कर रहा है. आपकी ऐसे बातें न चाहते हुए भी उसे सेक्स करने के लिए मजबूर कर देगी और वे खुद ब खुद आपके करीब आने को मज़बूर हो जाएगी. आप भी तो यही चाहते है न.

कुछ ऐसी होती है उन पलों में आपकी सैक्स फैंटेसी

शारीरिक संबंधों में अनावश्यक सहना या अपनेआप समय गुजरने के साथ उन में तबदीली हो जाने की गुंजाइश मान कर चलना भ्रम है. यह इन संबंधों के सहज आनंद को कम करता है. कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें पति की आक्रामकता पसंद नहीं आती थी. लेकिन लज्जा या संकोचवश कुछ कहना अच्छा नहीं लगता था. कुछ महिलाओं का कहना है कि पति को खुद भी समझना चाहिए कि पत्नी को क्या पसंद आ रहा है, क्या नहीं. मगर इस पसंदनापसंद के निश्चित मानदंड तो हैं नहीं, जिन से कोई अपनेआप ही समझा जाए और आनंद के क्षण जल्दी और ज्यादा मिल जाएं.

एक महिला ने बताया कि उस का पति सुहागरात वाले दिन से ही अश्लील वीडियो देख कर उस के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता था. यह सिलसिला शादी के कई साल बाद तक चलता रहा. अगर वह इस का विरोध करती तो पति उसे धमकियां देता. शर्म के कारण वह अपने मातापिता को इस बारे में बता नहीं पाती थी. इस दौरान उसे शारीरिक तौर पर परेशानी भी शुरू होने लगी. उस के मुताबिक, अप्राकृतिक संबंध से होने वाली परेशानी के बारे में पति को बताने पर भी वह नहीं माना. वह लगातार ऐसा करता रहा. शिकायत करने पर वह मारता भी. उस महिला के मुताबिक बाकी समय तो उस का पति सामान्य रहता था, लेकिन सहवास के समय वह हैवान बन जाता और लगभग रोज ऐसा करता. मजबूर हो कर उसे पुलिस स्टेशन में शिकायत करनी पड़ी.

भावना कहती है, ‘‘मैं कुछ समय पति की आक्रामकता बरदाश्त करती रही. हनीमून के बाद कहने की सोची पर हिम्मत नहीं जुटा पाई. मगर जब यह आक्रामकता थोड़ी और बढ़ने लगी तो कुछ महीनों बाद मुझे बात करनी ही पड़ी. उन्हें मेरा बात करना अच्छा नहीं लगा. हमारे संबंध कुछ समय के लिए प्रभावित हुए. पति बारबार ताना मारते. यह सच है कि यदि मैं ने समय पर उन से अपनी बात कह दी होती तो ऐसी नौबत नहीं आती.’’

रमा कहती है, ‘‘मैं ने तो पहली रात में ही पति से कह दिया कि यह अननैचुरल वाली आदत मुझे पसंद नहीं. इस पर पति का कहना था कि धीरेधीरे पड़ जाएगी. मगर मैं ने स्पष्ट कह दिया कि हम इंसान हैं, जानवर नहीं. फिर क्या था. 4-5 दिनों में सब ठीक हो गया. मैं जानती हूं इस प्रकार की आक्रामकता को बरदाश्त करना कितना कठिन होता है. इस से सैक्स बोझिल हो जाता है. खुल कर बोलने से न केवल अप्रिय स्थितियां सुधरती हैं, बल्कि अच्छी स्थितियों के लिए भी माहौल तैयार होता है.’’

सैक्स को ले कर जितने आतुर मर्द रहते हैं उतनी महिलाएं भी होती हैं. हां यह बात अलग है कि वे इस का जिक्र कभी किसी से नहीं करती हैं. बात अगर स्पैशल रात की हो तो मर्दों से ज्यादा महिलाओं में ऐक्साइटमैंट होता है. यह कहानी सिर्फ हीरो का इंतजार करती हीरोइन की नहीं, बल्कि हर उस लड़की की है जो बेसब्री से इंतजार करती है.

कोई रिश्ता परफैक्ट नहीं

सचाई यह है कि कोईर् भी रिश्ता परफैक्ट नहीं होता. यदि आप यह सोचती हैं कि रिश्ते में सब कुछ आप की मरजी के अनुसार या किसी फिल्मी कहानी की तरह होना चाहिए, तो चोट लगनी लाजिम है. हर रिश्ता अलग होता है. यही नहीं हर रिश्ते को आप के प्यार, समर्पण, श्रम और साथ के खादपानी की जरूरत होती है. कई बार रिश्ता टूटने की वजह बेमानी ही होती है.

वह हमेशा सही बातें करेगा

ऐसा नहीं होगा और न ही आप उस से ऐसी उम्मीद रखें. वह परफैक्ट नहीं है और न ही वह किसी रोमानी फिल्म का हीरो है, जो हमेशा सही और अच्छी बातें ही करेगा. वह भी इंसान है और आम इंसानों की तरह वह भी गलतियां करेगा. वह ऐसी बातें कर सकता है, जो उसे नहीं करनी चाहिए.

और्गैज्म

पति हो या पत्नी, दोनों में से किसी भी एक का तरीका यदि आक्रामक व नैगेटिव हो तो उस के भावों पर ध्यान देना चाहिए. बहुत सी पत्नियां अपने पति से कहतीं कि तुम स्वार्थी हो, तुम्हें सिर्फ अपने आनंद की पड़ी होती है, तुम्हें मेरी परवाह नहीं. इस का सीधा मतलब है अभी उस का और्गैज्म पर पहुंचना बाकी है या आप उस के और्गैज्म पर पहुंचने की परवाह नहीं करते. जल्दीजल्दी और बारबार कही गई बात चिढ़ाने और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली हो सकती है.

इसलिए जब भी जितना कुछ कहा जाए वह किया भी जाए. तभी वह सार्थक और असरदार बदलाव लाने वाला होता है. निजी संबंधों को कहनेसुनने की कुशलता सिर्फ बैडरूम तक ही सीमित नहीं रहती. वह जीवन में घरबाहर भी सार्थक बातचीत का सिस्टम पैदा करती है और उसे बढ़ावा देती है.

सैक्स कोरी क्रिया नहीं, एक खूबसूरत कला है. इसे सदियों से काम कला का स्थान प्राप्त है. इस में हर बार कुछ नया, कुछ अनोखा किए जाने का स्कोप रहता है. पतिपत्नी के रिश्ते में प्यार और सैक्स दांपत्य की इमारत को खड़ा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मजबूत पिलर हैं.

जानें कैसे करें सेक्स को एंजॉय

सैक्सोलौजिस्ट डा. चंद्रकिशोर कुंदरा के मुताबिक, ‘प्रेमीप्रेमिका के बीच सैक्स संबंध स्थापित करने के लिए भौतिक, रासायनिक व मनोवैज्ञानिक कारक ही जिम्मेदार होते हैं. सैक्स ही एक ऐसी सरल क्रिया है जो प्रेमीप्रेमिका को एकसाथ एक ही समय में पूर्ण तृप्ति देती है.’ सैक्स की संपूर्णता प्रेमिका के बजाय प्रेमी पर निर्भर करती है, क्योंकि प्रेमी ही इस की पहल करता है. प्रेमिका सैक्स में केवल सहयोग ही नहीं करती बल्कि पूर्ण आनंद भी चाहती है. अकसर प्रेमीप्रेमिका सैक्स को सुखदायक मानते हैं, लेकिन कई बार सहवास ऐंजौय के साथसाथ कई समस्याओं को भी सामने लाता है. अनुभव के आधार पर इन को दूर कर प्रेमीप्रेमिका सैक्स का सुख उठाते हैं.

शरारती बनें

सैक्स को मानसिक व शारीरिक रूप से ऐंजौय करने के लिए प्रेमीप्रेमिका को शरारती बनना चाहिए. उत्साह, जोश, तनावमुक्त, हंसमुख, जिंदादिल, शरारती प्रेमीप्रेमिका ही सैक्स को संपूर्ण रूप से भोगते हैं.

आत्मविश्वास की कमी न हो

कई बार आत्मविश्वास की कमी हो जाती है. प्रेमी सैक्स के समय उतावलेपन के शिकार हो कर सैक्स के सुखदायक एहसास से वंचित रह जाते हैं.

सैक्स संबंध बनाते समय प्रेमीप्रेमिका के मन में यदि पौजिटिव सोच होगी, तभी दोनों पूर्ण रूप से संतुष्ट हो पाएंगे और सैक्स में कभी कमजोर नहीं पड़ेंगे.

पोर्न फिल्मों से प्रेरित न हों

प्रेमीप्रेमिका अकसर पोर्न फिल्में देख कर, किताबें पढ़ कर सैक्स में हर पल लिप्त रहने की कोशिश करते हैं. अत्यधिक मानसिक कामोत्तेजना की स्थिति में शीघ्रपतन व तनाव में कमी हो जाती है.

सैक्स में जल्दबाजी

कई बार सैक्स में प्रेमीप्रेमिका जल्दबाजी कर जाते हैं. शराब पी कर सैक्स करना चाहते हैं जोकि ठीक नहीं है. हमेशा मादक पदार्थों से दूर रहें. सैक्स के दौरान प्रेमिका ही मादकता का काम करती है.

बढ़ाएं शारीरिक आकर्षण

सहवास के लिए प्रेमी का शारीरिक आकर्षण, स्मार्टनैस, सैक्सी लुक, साफसफाई काफी महत्त्वपूर्ण है. पुरुषोचित्त गुण के साथसाथ गठीले बदन वाले चतुर सुरुचिपूर्ण वस्त्र, रसिक स्वभाव के प्रेमी ही सैक्स में सफल होते हैं.

रोमांटिक स्वभाव रखें

प्रेमिका सहवास के दौरान चाहती है कि उस का प्रेमी रोमांस व ताजगी द्वारा उसे कामोत्तेजित करे. अत: रोमांस की बातें कर सैक्स को सुखदायक बनाएं.

जब सैक्स का मौका मिले

प्रेमीप्रेमिका अकसर सैक्स के लिए मौके की तलाश में रहते हैं. जैसे ही उन्हें मौका मिलता है, वे एकदूसरे में समाने के लिए बेताब हो जाते हैं, लेकिन इस दौरान कई बार ऐसे अचानक किसी का दरवाजा खटखटाना व फोन की घंटी बज जाती है. ऐसी बाधाओं को दूर कर सहवास को मानसिक व शारीरिक रूप से सुखदायक बनाएं.

सबसे बेहतर है सप्ताह में एक बार सेक्स

आम धारणा है कि ज्यादा सेक्स से संबंध ज्यादा बेहतर होते हैं, लेकिन इसके विपरीत एक शोध में यह बताया गया है कि सप्ताह में एक बार सेक्स करने वाले जोड़े सबसे ज्यादा खुश रहते हैं. प्रमुख शोधार्थी कनाडा के टोरंटो-मिसीसोगा विश्वविद्यालय की एमी मूज बताती हैं, “हालांकि ज्यादा से ज्यादा सेक्स को खुशी से जोड़ा गया है. लेकिन सप्ताह में एक बार सेक्स सबसे बेहतर है.”

मूज कहती हैं, “हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि अपने साथी के साथ अंतरंग संबंध बनाए रखना जरूरी है. इसके लिए रोज सेक्स करने की कोई जरूरत नहीं है.”

हालांकि पिछले कई शोधों और स्वयं-सहायता पुस्तकों में यह बताया जाता रहा है कि ज्यादा सेक्स से ज्यादा खुशी मिलती है.

लेकिन 30,000 अमेरिकी नागरिकों पर चार दशकों तक किए गए इस शोध में पहली बार यह पता चला है कि जिन जोड़ो ने सप्ताह में औसतन एक से ज्यादा बार सेक्स किया उनके आपसी रिश्तों से इसका कोई संबंध नहीं देखा गया.

यह शोध सोशल साइकोलॉजिकल और पर्सनैलिटी साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है. मूज कहती है, “हमारे निष्कर्ष युवा या बुजुर्ग जोड़ों, नए-नए शादीशुदा या फिर जिनकी शादी दशकों पहले हुई हो, सब पर समान रूप से लागू होते हैं.”

मूज कहती हैं कि इस सर्वेक्षण का मकसद यह नहीं है कि जोड़े सप्ताह में एक बार सेक्स के औसत तक पहुंचने के लिए कम या ज्यादा सेक्स करने लगे. लेकिन अपने साथी के साथ इस संबंध में बात जरूर करें कि क्या वे उनकी यौन जरूरतों को पूरा कर पा रहे हैं.

वे कहती हैं, “अपने साथी के साथ अंतरंग संबंध बनाए रखना जरूरी है न कि ज्यादा से ज्यादा सेक्स करना.”

छोटे घर में कैसे करें पार्टनर से प्यार, जानें यहां

बड़े शहरों में सब से बड़ी समस्या आवास की होती है. 2 कमरों के छोटे से फ्लैट में पतिपत्नी, बच्चे और सासससुर रहते हैं. ऐसे में पतिपत्नी एकांत का नितांत अभाव महसूस करते हैं. एकांत न मिल पाने के कारण वे सैक्स संबंध नहीं बना पाते या फिर उन का भरपूर आनंद नहीं उठा पाते क्योंकि यदि संबंध बनाने का मौका मिलता है तो भी सब कुछ जल्दीजल्दी में करना पड़ता है. संबंध बनाने से पूर्व जो तैयारी यानी फोरप्ले जरूरी होता है, वे उसे नहीं कर पाते. इस स्थिति में खासकर पत्नी चरमसुख की स्थिति में नहीं पहुंच पाती है. पतिपत्नी को डर लगा रहता है कि कहीं बच्चे न जाग जाएं, सासससुर न उठ जाएं. मैरिज काउंसलर दीप्ति सिन्हा का कहना है, ‘‘संबंध बनाने के लिए एकांत न मिलने के कारण महिलाएं चिड़चिड़ी, झगड़ालू और उदासीन हो जाती हैं और फिर धीरेधीरे दांपत्य जीवन में दरार पड़नी शुरू हो जाती है, यह दरार अनेक समस्याएं खड़ी कर देती है. कभीकभी तो नौबत हत्या या आत्महत्या तक की आ जाती है.’’

कही अनकही

विकासपुरी की रहने वाली सीमा के विवाह को 5 वर्ष हो गए हैं. इस दौरान उस के 3 बच्चे हो गए. तीनों बच्चों की देखभाल, सासससुर की सेवाटहल और घर का काम करतेकरते शाम होतेहोते वह पूरी तरह थक जाती है. सीमा का कहना है कि उस के तीनों बच्चे पति के साथ ही बड़े बैड पर सोते हैं. सीमा पलंग के पास ही नीचे जमीन पर बिस्तर लगा कर सोती है. उसे हर वक्त यही डर लगा रहता है कि सैक्स करते समय कोई बच्चा उठ कर उन्हें देख न ले. परिणामस्वरूप वह सैक्स का पूर्ण आनंद नहीं उठा पाती. इस के असर से वह निराशा से घिरने लगी हैं. ढंग से कपड़े पहनने, सजनेसंवरने का उस का मन ही नहीं करता. फिर वह सजेसंवरे भी किसलिए? स्थिति यह हो गई है कि अब पतिपत्नी दोनों में मनमुटाव रहता है.

खानपान का असर

मांसमछली, शराब आदि का सेवन करने वाले पतियों की सैक्स की अधिक इच्छा होती है और इसीलिए वे न समय देखते हैं और न माहौल, पत्नी पर भूखे भेडि़ए की तरह टूट पड़ते हैं. संबंध बनाने से पहले फोरप्ले की बात तो दूर, वे यह भी नहीं देखते हैं कि बच्चे सोए हैं या जाग रहे हैं अथवा मांबाप ने देख लिया तो वे क्या सोचेंगे. ऐसे में कई बार पत्नी को सासससुर के सामने शर्म महसूस होती है. मांबाप अपने बेटे को कुछ न कह कर बहू को ही सैक्स के लिए उतावली मान बैठते हैं.

संयुक्त परिवार का दबाव

हमारे समाज में विवाह 2 प्राणियों का ही संबंध नहीं, बल्कि 2 परिवारों का संबंध भी होता है. लेकिन मौजूदा हालत में पतिपत्नी अकेले ही अपने बच्चों के साथ रहना पसंद करते हैं. यह उन की मजबूरी भी है, लेकिन यदि पत्नी को परिस्थितिवश सासससुर के साथ छोटे से आशियाने में 2-3 बच्चों के साथ रहना पड़े तो वह कई बार मानसिक दबाव महसूस करती है. सासससुर से शर्म और बातबात पर उन की टोकाटोकी से परेशान बहू पति के लिए खुद को न तो तैयार कर पाती है और न ही एकांत ही ढूंढ़ पाती है. मनोरोगचिकित्सक डाक्टर दिनेश के अनुसार, ‘‘कई बार मेरे पास ऐसे केस आते हैं कि शादी के बाद बच्चे जल्दीजल्दी हो गए. पत्नी उन की देखभाल में लगी रहती है और पति के प्रति उदासीन हो जाती है. इस के चलते पति भी कटाकटा सा रहने लगता है.’’

समय निकालना जरूरी

सैक्स ऐक्स्पर्ट डा. अशोक के अनुसार, ‘‘वास्तव में सैक्स के लिए उम्र की सीमा निर्धारित नहीं होती है कि आप 35 या 40 साल के हो गए हैं. छोटा घर है, बच्चे हैं, सैक्स ऐंजौय नहीं कर सकते. घरगृहस्थी और बच्चों की देखभाल के बाद यदि पतिपत्नी अपने लिए समय निकाल कर शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगे तो आगे चल कर उन्हें कई परेशानियां हो सकती हैं. ‘‘डिप्रैशन के अलावा हारमोंस का स्राव भी धीरेधीरे कम हो जाता है. ऐसी स्थिति में अचानक संबंध बनाने पर पत्नी को तकलीफ होती है. फिर निरंतर तनाव बने रहने पर कभीकभी ऐसी स्थिति बन जाती है कि पत्नी को हिस्टीरिया के दौरे तक पड़ने लगते हैं.’’

मन की बात

जनकपुरी की रहने वाली काजल और राजेश ने लव मैरिज की है. उन की शादी को 7 साल हुए हैं. इन 7 सालों में 3 बच्चे भी हो गए. पहला बच्चा 3 साल का है. उस के बाद 2 बेटियां डेढ़ साल और 7 महीने की हैं. काजल कहती हैं, ‘‘हम शादी के शुरुआती दिनों से ही बहुत झगड़ते आ रहे हैं. वजह है राजेश का प्लान कर के साथ नहीं चलना. राजेश ने कहा था कि वे अपने मातापिता के लिए पड़ोस में ही मकान खरीद लेंगे. छोटे से 2 कमरों के मकान में हम ढंग से नहीं रह पाते हैं. मैं राजेश से अपने मन की बात नहीं कर पाती.

‘‘बस, यही डर लगा रहता है कि कहीं सासूमां कुछ कह न दें. जबकि मन की बात करने का मौका पतिपत्नी दोनों को ही मिलना चाहिए.’’ अगर आप भी इस समस्या से गुजर रहे हैं तो निम्न उपाय अपना कर शारीरिक संबंधों का पूर्ण आनंद उठा सकते हैं-

बच्चों को चाचा, मामा के पास भेजें. उन के बच्चों के लिए कोई भेंट भेजें. ऐसा उस समय करें जब सासससुर कहीं शादीविवाह में बाहर गए हों. यदि मांबाप को फिल्म देखने या पिकनिक मनाने भेज रहे हों तो बच्चों को भी उन के साथ भेज दें.

अगर आप का कोई मित्र छुट्टी पर अपने घर जा रहा हो तो उस के घर की देखभाल के लिए रात में पतिपत्नी वहां रहें और सैक्स ऐंजौय करें. बदले में मित्र के घर लौटने से पहले घर को सजासंवार कर अच्छा सा खाना बना कर उन के लिए रखें.

संबंध बनाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि फोरप्ले ठीक सैक्स से पहले हो. उसे बारबार थोड़ेथोड़े समय में जब भी जहां भी समय मिले किया जा सकता है. इस से सैक्स के समय दोनों पूरी तरह तैयार होंगे. सुबह जब बच्चे स्कूल जा चुके हों तब मातापिता को सुबह घूमने जाने के लिए प्रेरित करें.

सैक्स का समय बदलें. नयापन मिलेगा.

पत्नी के साथ हर 15 दिन बाद कहीं डेट पर जाएं. यानी गैस्टहाउस या होटल में जा कर रहें और सैक्स ऐंजौय करें.

गरमी का मौसम हो तो पत्नी को देर रात छत पर बने कमरे में ले जाएं.

बरसात की रात में भी पत्नी को छत पर बने कमरे में ले जा कर बरसात की फुहारों का आनंद लेते हुए सैक्स एंजौय करें.

सुबह बच्चों के स्कूल जाने के बाद, रात में छत पर और किसी दिन यदि आप औफिस से जल्दी घर आते हैं और बच्चे स्कूल से नहीं आए हैं, मातापिता पड़ोस में गए हैं, तब भी आप सैक्स ऐंजौय कर सकते हैं. हां, इस के लिए आप पत्नी को पहले से ही तैयार कर लें.

मेरी पत्नी का वजन बढ़ नहीं रहा है, इलाज बताएं?

सवाल-

मेरी पत्नी का वजन 40 किलो है. हमारे 2 बच्चे हैं. उस का वजन बढ़ नहीं रहा है. इलाज बताएं?

जवाब-

जल्दीजल्दी बच्चे होने से औरत के शरीर में कमजोरी आ जाती है, इसीलिए सलाह दी जाती है कि एक से दूसरे बच्चे के बीच कम से कम 5 साल का अंतर होना चाहिए.

कई बार टीबी जैसी घातक बीमारी होने के चलते भी इस तरह की परेशानी आ सकती है. वे खाने में दालसब्जी, फलदूध का सेवन ज्यादा करें. थोड़ीबहुत कसरत करने से भी वजन बढ़ सकता है.

कुछ कहते हैं पार्टनर के ये इशारे

स्त्री और पुरुष के बीच जिस्मानी रिश्ते इंसान की फितरत मानी जाती है, यानी ये एक स्वाभाविक बात है. यही रिश्ता होता है जिसकी वजह से किसी परिवार का वंश आगे बढ़ता है. विवाह के पहले शारीरिक संबंध बनाना पश्चिम देशों में तो आम बात मानी जाती है लेकिन भारतीय समाज में इस प्रकार के रिश्ते विवाह के बाद ही सही माने जाते हैं. लेकिन तमाम बंदिशों के बावजूद हमारे समाज में भी सदियों से विवाह के पहले भी स्त्री-पुरुष में शारीरिक संबंध बनते रहे हैं.

इस तरह के संबंध सिर्फ दैहिक सुख के लिये होते हैं और इनकी कोई खास लंबी उम्र नहीं होती. शोधकर्ताओं ने स्‍त्री-पुरुष की भाव-भंगिमाओं को लेकर कुछ ठोस निष्‍कर्ष निकाले हैं, जिससे यह जाना जा सकता है कि स्त्री अथवा पुरुष जिस्मानी संबंध बनाने के इच्छुक है या नहीं.

अध्ययन के अनुसार पुरुष की बॉडी लैंग्‍वेज से साफ़ साफ ज़ाहिर हो जाता है कि वह जिस्मानी रिश्ते बनाना चाहता है. शोधकर्ताओं ने कुछ इशारे बताये हैं जो इस प्रकार हैं.

पुरुषों के इशारे

मोहब्बत के आगोश में आने के बाद पुरुष के चेहरे के उस हिस्‍से में कसावट आ जाती है जो आमतौर पर थोड़ा फूला होता है. ऐसे पुरुषों का जहां एक ओर सीना थोड़ा बाहर की ओर निकल जाता है वहीं दूसरी ओर उस उनका पेट थोड़ा अंदर की ओर धंस जाता है. रक्‍त का प्रवाह तेज़ होने के कारण पुरुषों के होठ और गाल समेत पूरे चेहरे की लालिमा बढ़ जाती है.

महिलाओं के इशारे

वहीं सेक्स की इच्छा रखने वाली महिलाएं की कुछ भंगिमाएं होती हैं. वे अपनी भावना का इजहार करने के लिये अपने बालों को छूती है और अपने कपड़ों पर भी हाथ फेरती हैं. इसके आलावा वे बाल झटककर पीछे की ओर कर लेती है.

पलकों को झुका कर पुरुष को निहारना और टकटकी से देखते रहना भी महिलाओं के इशारे माने जाते हैं. महिलाओं के पिछले हिस्‍से में पहले की तुलना में थोड़ा और उभार आ जाता है. कामातुर स्‍त्री प्‍यार पाने के लिए अपने पैरों को एक-दूसरे से रगड़ती रहती हैं.

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