अनुसंधान तथा सर्वेक्षण से यह ज्ञात हो गया है कि 5% पुरुष एजुस्पर्मिक होते हैं, यानी उन के वीर्य में शुक्राणु होते ही नहीं. इस स्थिति को एजुस्पर्मिया कहा जाता है. दूसरी ओर, जब शुक्राणु की संख्या सामान्य से कम होती है, तो उसे ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है. इन दोनों परिस्थितियों वाले पुरुषों के जरिए सामान्यतया प्रैग्नैंसी की संभावना नहीं होती, क्योंकि वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या 60-120 मिलियन प्रति मि.ली. के बीच होनी चाहिए.

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