लोग पढ़लिख कर आधुनिक होने का कितना भी दम भर लें, लेकिन सोच उन की वही पुरानी ही है. भूरा राजपूत अपनी दकियानूसी सोच को दरकिनार कर अगर बेटी शैफाली की बात मान लेते तो शायद आज उन की बेटी जीवित होती.