Social Story: को कहता है, ‘‘बैंक खाता बंद हो जाएगा.’’
कोई कहता है, ‘‘लोन की वसूली होगी.’’
कोई कहता है, ‘‘पुलिस केस हो गया है.’’
कोई कहता है, ‘‘गिरफ्तार कर लेंगे.’’


और इस डर में अच्छेअच्छों की सम? काम नहीं करती. बदलती दुनिया में मोबाइल फोन अब केवल एक गैजेट नहीं रहा, बल्कि यह हमारी जेब में रखा एक पूरा बैंक, पहचानपत्र, दफ्तर, फोटो अलबम, पर्स और संचार का साधन बन चुका है, लेकिन इसी बदलाव ने अपराधियों के लिए भी एक नया दरवाजा खोल दिया है.


आज मोबाइल पर एक गलत क्लिक से आप अपनी पूरी जमापूंजी खो बैठते हैं. नौजवान, जो डिजिटल दुनिया को सब से ज्यादा सम?ाते हैं, वे भी अपराधियों की तकनीक देख कर भरम में पड़ जाते हैं और मिडिल क्लास लोग, जिन के लिए हर पाई की अहमियत बहुत ज्यादा होती है, उन के लिए डिजिटल ठगी सिर्फ माली नुकसान नहीं है, बल्कि यह इज्जत, आत्मविश्वास और मानसिक शांति की दुश्मन बन जाती है.
भारत में रोजाना हजारों लोग डिजिटल ठगी के शिकार होते हैं. हम अखबार में पढ़ते हैं :


महिला के खाते से 85,000 की ठगी. बुजुर्ग से केवाईसी अपडेट के नाम पर पैसा उड़ाया. फर्जी पुलिस अफसर बन कर नौजवान से 3 लाख की ठगी. ये खबरें तो हम पढ़ लेते हैं, पर इन में हमें पीडि़तों का दर्द नहीं दिखता. बिहार के सहरसा जिले की 40 साल की शशि देवी को सुबहसुबह मोबाइल फोन पर मैसेज आया कि आप का बैंक खाता केवाईसी अपडेट होने के चलते बंद किया जा रहा है. मैसेज के साथ एक लिंक भी था. शशि देवी ने उस लिंक पर क्लिक किया. मोबाइल पर एक परिचित जैसा फार्म खुलानाम, खाता संख्या, पता.


उन्हें लगा कि यह सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने फार्म भर दिया. इस के 2 घंटे बाद बैंक से फोन आया कि आप के खाते से 97,500 रुपए निकाले गए हैं. शशि देवी का पहला वाक्य था कि हम तो खाते में इतने पैसे होना भी नहीं जानते थे. इतना पैसा हम ने 10-10 रुपए बचा कर जमा किया था. डिजिटल दुनिया का
असली सच लोग तकनीक नहीं, डर से हारते हैं. हर डिजिटल अपराध में एक बात कौमन होती है कि अपराधी डर पैदा करता है. छपरा, बिहार के शिवनंदन प्रसाद, जो पूरी जिंदगी पोस्ट औफिस में लोगों के पैसे संभालते रहे, एक दिन खुद ठगी का शिकार हो गए. उन्हें फोन आया कि आप का पैंशन कार्ड ब्लौक हो गया है. वैरिफिकेशन कराइए, नहीं तो अगले महीने पैंशन नहीं आएगी.


शिवनंदन ने कहा कि बाबू, मैं बूढ़ा आदमी हूं, बताओ क्या करना है? उन्होंने ठग के कहने पर एक ऐप डाउनलोड किया और कुछ ही मिनट में उन के खाते से डेढ़ लाख से ज्यादा रुपए गायब हो गए.
शिवनंदन का दुखद वाक्य यह था कि मैं तो जिंदगीभर लोगों को सम?ाता रहा कि कागज सही रखो, अब मु? कौन सम?ाएगा कि डर क्या होता है? पहचान का गलत इस्तेमाल अपराधी अब सिर्फ पैसे नहीं, चेहरा और आवाज भी चुराते हैं. डिजिटल अपराध का सब से डरावना पक्ष है पहचान की चोरी. आज अपराधियों के हाथों में ऐसे उपकरण हैं, जिन से आप की फोटो एडिट की जा सकती है. आप की आवाज क्लोन की जा सकती है. आप की डीपफेक वीडियो बनाई जा सकती है. किसी भी पहचान को मिनटों में बदला जा सकता है. यह सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि मानसिक आतंक है.


पटना, बिहार में 22 साल की रीता को एक दिन व्हाट्सऐप पर फोन आया. लोन ऐप के गुंडे कह रहे थे कि आप ने लोन लिया है, वापस कीजिए. नहीं तो आप की अश्लील फोटो बना कर सब को भेज देंगे.
रीता सदमे में गई. उस ने कहा कि मैं ने कोई लोन नहीं लिया. लेकिन अपराधियों ने 10 मिनट में उस की फोटो को विकृत कर के आधे से ज्यादा दोस्तरिश्तेदारों को भेज दिया. रीता ने रोते हुए कहा कि पैसा तो नहीं गया, लेकिन मेरी इज्जत, मेरा आत्मविश्वास सब चला गया. औनलाइन कस्टमर केयर,
बड़ा धोखा लोग गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजते हैं और सब से ऊपर दिखाई देता है फर्जी नंबर, जिसे अपराधियों ने विज्ञापन दे कर ऊपर चढ़ाया होता है. नवादा के एक टीचर राजेश कुमार एक छोटा सामान लौटाने के लिए फ्लिपकार्ट कस्टमर केयर खोजते हैं. पहले नंबर पर फोन किया. सामने से आवाज आई कि आप का रिफंड शुरू कर रहे हैं, स्क्रीन शेयरिंग औन कीजिए.


राजेश ने सोचा कि कस्टमर केयर वाला ही तो है. उन्होंने स्क्रीन शेयर किया और 2 लाख, 70,000 रुपए गायब. राजेश बोले कि गलती मेरी नहीं है. गूगल मु? सही नंबर क्यों नहीं दिखाता? ठग बन बैठे हैं नएजमींदारबक्सर के रामचरण को कोई बिजली महकमे का आदमी बन कर ठग काल करता है कि हम कनैक्शन काट देंगे, तुरंत अपडेट कराइए. फिर ठग एक ऐप डाउनलोड कराता है. रामचरण कहता है कि हम पढ़ेलिखे नहीं है. हमें क्या करना है? ठग कहता है कि बस उंगली स्क्रीन पर रखें और ऐसा करते ही 68,000 रुपए गायब.


रामचरण की पत्नी रोते हुए कहती है कि हमारे घर में तो कभी 68,000 रुपए एकसाथ नहीं रहे. जो भी था, उसी ठग ने ले लिया. फर्जी पुलिस, सब से बड़ा डर आजकल अपराधी खुद को पुलिस अफसर, साइबर सैल प्रमुख, एनआईए अफसर, सीबीआई अफसर, इनकम टैक्स अफसर, कोर्ट का क्लर्क बता कर फोन करते हैं. वे वरदी में वीडियो काल भी कर देते हैं. दिल्ली के करनदीप को वीडियो काल पर 2 आदमी वरदी में दिखे. उन्होंने कहा कि आप के नाम पर ड्रग्स वाला पार्सल पकड़ा गया है. तुरंत जुर्माना भरिए.
करनदीप डर के मारे कांपने लगा. उस ने 4 लाख रुपए भेज दिए. बाद में पता चला कि वह वीडियो डीपफेक थी.


लोग क्यों फंसते हैं अपराधी साधारण नहीं होते. उन के पास पूरी टीम होती है जैसे मनोविज्ञान सम?ाने वाले, स्क्रिप्ट लेखक, टैक्निकल एक्सपर्ट, काल सैंटर चलाने वाले, डाटा बेचने वाले. वे लोगों की कमजोरी जानते हैं. डर, लालच, शर्म, अनजान तकनीक, भरोसा जीतना, तेजी से बात करना, घबराहट पैदा करनाठग यही खेल खेलते हैं. सिस्टम है कमजोर साइबर ठगी के ज्यादातर मामलों को पुलिस वाले गंभीरता से लेते हैं, पर समस्या यह है कि अपराधी दूसरे राज्यों में होते हैं. फर्जी बैंक खाते, फर्जी सिम, वीपीएन लोकेशनऔर मिनटों में पैसा विदेश भेजना. केस करोड़ों में दर्ज, लेकिन रिकवरी 5 से 10 फीसदी.
एक साइबर अफसर ने कहा कि अपराधी हर महीने तकनीक बदल देता है. पुलिस के पास उतने संसाधन नहीं हैं.


अपराधियों का इकोनौमिक मौडल डिजिटल ठगी का खेल एक उद्योग की तरह चलता है. कमाई का तरीका. एक काल सैंटर, 15-20 मुलाजिम. रोज तकरीबन 1000 काल. 40-50 लोग फंसते हैं. रोजाना कमाई 10 लाख से 50 लाख. महीने में करोड़ों रुपए. पैसे नेपाल, बंगालदेश, दुबई, चीन तक भेजे जाते हैं.
राजस्थान की एक बुजुर्ग औरत 2 घंटे तक रोती रहीं. उन्हें किसी का बैंक मैनेजर बन कर फोन आया. ठग बोला कि आप का खाता ब्लौक हो गया, जल्दी करें. बुजुर्ग औरत ने 3 बार कहा कि बेटा, मैं बूढ़ी हूं. ठग बोलता गया और खाते से एक लाख से ज्यादा रुपए निकल गए.बुजुर्ग औरत ने रोते हुए कहा कि बेटा, हम को लगा तू ही बैंक वाला है.

हमारी आवाज सुन कर भी तू ने दया नहीं दिखाई? जनता को डिजिटल भाषा सिखानी होगी सुरक्षा सब से पहले जनता को ही सम?ानी होगी. ध्यान रखना होगा ओटीपी किसी को नहीं बताना होगा. बैंक कभी फोन नहीं करता. स्क्रीन शेयरिंग भूल कर भी करें. पुलिस वीडियो काल नहीं करती. डिजिटल अरैस्टिंग नहीं होता. केवाईसी लिंक के नाम पर 100 फीसदी धोखा. कस्टमर केयर नंबर गूगल से खोजें. अनजान ऐप डाउनलोड करें. बिजली, गैस, बैंक मैसेज नकली भी हो सकता है. कोई डरा रहा है, तो इस का मतलब साइबर अपराधी है. 1930 नंबर पर तुरंत शिकायत करें.


डिजिटल अपराध सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या भी है. डिजिटल ठगी ने भारत के हर घर को प्रभावित किया है. यह सिर्फ मोबाइल और ऐप की समस्या नहीं, यह भरोसे, सम?, डर, सिस्टम और समाज की समस्या है. हम अगर जागरूक नहीं हुए, तो आने वाले समय में डिजिटल ठगी किसी महामारी की तरह फैल जाएगी. अपराधी तकनीक से तेज हैं और हमें भी अपनी सम?ाबू? से तेज होना पड़ेगा.  Social Story

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